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नई दिल्ली । केंद्रीय वित्तमंत्री अरूण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि आठ नवंबर को की गई नोटबंदी के बाद करीब 18 लाख बैंक खातों में भारी मात्रा में नकदी जमा कराई गई है और यह रकम जमा करानेवाले की आर्थिक हैसियत से मेल नहीं खाती है। इसलिए इन खातों की जांच कराई जाएगी। लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जबाव में जेटली ने कहा कि ऎसे खातों को ढूंढने के लिए डेटा माइनिंग का प्रयोग किया गया है।  जेटली ने कहा, नोटबंदी के बाद कहीं जनधन खातों और निष्क्रिय खातों का दुरूपयोग तो नहीं किया गया, इसका पता लगाने के लिए डेटा माइनिंग के द्वारा खातों की जानकारी इकटा की गई है और हमारी नजर उन पर है, जिन्होंने भारी मात्रा में नकदी जमा कराई है। मंत्री ने कहा, ऎसे करीब 18 लाख बैंक खातों की पडताल की गई है। ऎसे लोगों को नोटिस भेजकर प्रारंभिक जानकारी मांगी गई है और कई लोगों ने अभी तक जबाव नहीं दिया है।  जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा था कि आठ नवंबर को नोटबंदी के बाद से 30 दिसंबर तक करीब 1.09 करोड खातों में दो लाख रूपये से लेकर 80 लाख रूपये तक की रकम जमा कराई गई है, जो औसतन 5.03 लाख रूपये प्रति खाता है।  500, 2000 के नोटों में 141.13 करोड हुए जब्त... जेटली ने कहा कि सरकारी एजेंसियों ने कुल 141.13 करोड रूपये नए 500 और 2000 के नोटों में जब्त किए गए हैं। जेटली ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में कहा, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो, आयकर विभाग और राजस्व खुफिया निदेशालय ने 141.13 करोड रूपये मूल्य के नए नोट जब्त किए हैं।  उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जब्त 2,000 रूपये और 500 रूपये के सभी नए नोटों को भारतीय स्टेट बैंक या किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा कराया जाता है, ताकि वे प्रचलन में वापस आ सकें। उन्होंने कहा,आयकर विभाग अपनी खोज और जब्ती कार्रवाई के दौरान जब्त की गई नकदी को जल्द से जल्द राष्ट्रीयकृत बैंकों में बनाए गए सार्वजनिक जमा खातों में जमा करता है। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड की बदसलूकी का मामले का बडी मुश्किल से शुक्रवार को पटाक्षेप हुआ ही था कि एक और माननीय सांसद के उडान में उग्र व्यवहार की खबर आई है। एयर इंडिया की एक फ्लाइट में तृणमूल कांग्रेस पार्टी की सांसद ने फ्लाइट में हंगामा किया। तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन ने सुरक्षा जांच में सहयोग नहीं किया जिसकी वजह से फ्लाइट 30 मिनट देरी से उडी।  यह फ्लाइट दिल्ली से कोलकाता जा रही थी। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक एयरलाइन के स्टाफ ने सांसद ने उनकी मां, जो सीनियर सिटीजन की सीट पर थीं,को आपातकालीन सीट से हटाकर कहीं और बैठाने को कहा था। लेकिन सांसद ने मना कर दिया। बताया गया कि डोला की मां व्हील चेयर पर थीं और आपात कालीन गेट के पास बैठी थीं जो नियमों के खिलाफ है। इस पर स्टाफ ने उनको हटने के लिए कहा था। एयर इंडिया के स्टाफ ने यह भी कहा कि बुकिंग के वक्त व्हील चेयर के बारे में नहीं बताया गया था फिर भी सांसद की मां व्हील चेयर पर आईं।  साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने देर रात मंत्रियों और अफसरों के साथ बैठक की। देर रात एक बजे हुई इस बैठक में कई बडे फैसले लिए गए। बैठक में योगी सरकार ने जेवर में एयरपोर्ट को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा सभी जिला मुख्यालयों पर 14 अप्रैल से 24 घंटे बिजली देने का फैसला भी किया गया। साथ ही राज्य की सभी योजनाओं में अब मुख्यमंत्री का नाम जोडने का फैसला लिया गया। आधी रात एक्शन में योगी सरकार: सीएम योगी आदित्यनाथ ने देर रात 1 बजे मंत्रियों और अधिकारियों की बैठक बुलाई। इस बैठक में योगी सरकार ने कई महत्तवपूर्ण फैसले लिए। बैठक में फैसला किया गया कि यूपी के गांवों में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक बिना कटौती बिजली मिलेगी। सभी जिला मुख्यालयों पर 24 घंटे बिजली मिलेगी। साथ ही तहसीलों में 18 घंटे बिजली सप्लाई के आदेश दिए गए हैं। योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को अगले 100 दिनों में पांच लाख नए कनेक्शन करने के आदेश दिए। साथ ही बिजली चोरी रोकने के लिए अफसरों को एक प्रोजेक्ट बनाने को कहा है।  नोएडा के पास जेवर में बनेगा एयरपोर्ट नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जिन योजनाओं में देरी हुई, योगी सरकार ने उसकी जांच के आदेश दे दिए है। वहीं योगी सरकार ने नोएडा के पास जेवर में एयरपोर्ट बनाने के लिए मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि अखिलेश सरकार आगरा में एयरपोर्ट बनाना चाहती थी। राज्य की योजनाओं से हटेगा समाजवादी शब्द: देर रात हुई इस मीटिंग में फैसला किया गया कि राज्य की सभी योजनाओं से समाजवादी शब्द हटेगा और उसकी मुख्यमंत्री का नाम जोडा जाएगा। ज्ञातव्य है कि अखिलेश सरकार में अधिकत्तर योजनाओं में सबसे पहले समाजवादी शब्द जोडा गया था, जैसे- समाजवादी पेंशन योजना और 108 समाजवादी एंबुलेंस सेवा आदि। अब इन योजनाओं से समाजवादी शब्द हटकर मुख्यमंत्री शब्द जुड जाएगा। शराब के खिलाफ बडा फैसला:  योगी सरकार ने यूपी में जनता की मांग को देखते हुए शराब के खिलाफ एक बडा फैसला लिया है। योगी आदित्यनाथ ने राज्य के आबकारी मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा है कि रिहाइशी इलाकों में किसी शराब दुकान की किसी सूरत में अनुमति नहीं दी जायेगी। ज्ञातव्य है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईवे किनारे के शराब दुकान रिहाइशी इलाकों में शिफ्ट हो रहे हैं जिसका लोग पूरजोर विरोध कर रहे हैं।  साभार-khaskhabar.com  

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नयी दिल्ली । संसद ने देश में ऎतिहासिक कर सुधार व्यवस्था जीएसटी को लागू करने का मार्ग प्रशस्त करते हुए गुरूवार को वस्तु एवं सेवा कर से जुडे चार विधेयकों को मंजूरी दे दी। साथ ही सरकार ने आश्वस्त किया कि नयी कर प्रणाली में उपभोक्ताओं और राज्यों के हितों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाएगा तथा कृषि पर कर नहीं लगाया जाएगा।  राज्यसभा ने केंद्रीय माल एवं सेवा कर विधेयक 2017:सी जीएसटी विधेयक, एकीकृत माल एवं सेवा कर विधेयक 2017:आई जीएसटी विधेयक, संघ राज्य क्षेत्र माल एवं सेवाकर विधेयक 2017:यूटी जीएसटी विधेयक और माल एवं सेवाकर:राज्यों को प्रतिकर:विधेयक 2017 को सम्मिलित चर्चा के बाद लोकसभा को ध्वनिमत से लौटा दिया। इन विधेयकों पर लाये गये विपक्ष के संशोधनों को उच्च सदन ने खारिज कर दिया। धन विधेयक होने के कारण इन चारों विधेयकों पर राज्यसभा में केवल चर्चा करने का अधिकार था। लोकसभा 29 मार्च को इन विधेयकों को मंजूरी दे चुकी है।  वस्तु एवं सेवा कर संबंधी विधेयकों पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने विपक्ष की इन आशंकाओं को निर्मूल बताया कि इन विधेयकों के जरिये कराधान के मामले में संसद के अधिकारों के साथ समझौता किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहली बात तो यह है कि इसी संसद ने संविधान में संशोधन कर जीएसटी परिषद को करों की दर की सिफारिश करने का अधिकार दिया है। जेटली ने कहा कि जीएसटी परिषद पहली संघीय निर्णय करने वाली संस्था है। संविधान संशोधन के आधार पर जीएसटी परिषद को मॉडल कानून बनाने का अधिकार दिया गया।  जहां तक कानून बनाने की बात है तो यह संघीय ढांचे के आधार पर होगा, वहीं संसद और राज्य विधानसभाओं की सर्वोच्चता बनी रहेगी। हालांकि इन सिफारिशों पर ध्यान रखना होगा क्योंकि अलग अलग राज्य अगर अलग दर तय करेंगे तो अराजक स्थिति उत्पन्न हो जायेगी। यह इसकी सौहार्दपूर्ण व्याख्या है और इसका कोई दूसरा अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान में संशोधन कर यह सुनिश्चित किया गया है कि यह देश का एकमात्र ऎसा कर होगा जिसे राज्य एवं केन्द्र एक साथ एकत्र करेंगे। उन्होंने कहा कि 28 प्रतिशत से अधिक लगने वाला उपकर (सेस) मुआवजा कोष में जायेगा और जिन राज्यों को नुकसान हो रहा है, उन्हें इसमें से राशि दी जायेगी। ऎसा भी सुझाव आया कि इसे कर के रूप में लगाया जाए। लेकिन कर के रूप में लगाने से उपभोक्ताओं पर प्रभाव प़डता। बहरहाल, उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त कर नहीं लगाया जायेगा।  जेटली ने कहा कि मुआवजा उन राज्यों को दिया जायेगा जिन्हें जीएसटी प्रणाली लागू होने से नुकसान हो रहा हो। यह आरंभ के पांच वर्ष के लिए होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के दौरान इसलिए जीएसटी पर आमसहमति नहीं बन सकी क्योंकि नुकसान वाले राज्यों को मुआवजे के लिए कोई पेशकश नहीं की गई थी। जीएसटी में मुआवजे का प्रावधान डील करने में सहायक हुआ और राज्य साथ आए।  जीएसटी में रीयल इस्टेट क्षेत्र को शामिल नहीं किये जाने पर कई सदस्यों की आपत्ति पर स्पष्टीकरण देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह एक ऎसा क्षेत्र है जिसमें राज्यों को काफी राजस्व मिलता है। इसमें रजिस्ट्री तथा अन्य शुल्कों से राज्यों की आय होती है इसलिए राज्यों की राय के आधार पर इसे जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जीएसटी परिषद में कोई भी फैसला लेने में केंद्र का वोट केवल एक तिहाई है जबकि दो तिहाई वोट राज्यों को है। इसलिए कोई भी फैसला करते समय केंद्र अपनी राय थोपने के पक्ष में नहीं है। वस्तु एवं सेवा कर को संवैधानिक मंजूरी प्राप्त पहला संघीय अनुबंध करार देते हुए जेटली ने कहा कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त कर का भार नहीं डालते हुए जीएसटी के माध्यम से देश में "एक राष्ट्र, एक कर" की प्रणाली लागू करने का मार्ग प्रशस्त होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद कर ढांचे को सर्वसम्मति से तय कर रही है और इस बारे में अब तक 12 बैठकें हो चुकी हैं। यह विधेयक केंद्र और राज्य सरकारों के बीच साझी संप्रभुता के सिद्धांत पर आधारित है और यह ऎसी पहली पहल है। जीएसटी के लागू होने पर केंद्रीय स्तर पर लगने वाले उत्पाद शुल्क, सेवाकर और राज्यों में लगने वाले मूल्य वर्धित कर (वैट) सहित कई अन्य कर इसमें समाहित हो जायेंगे।  जेटली ने विधेयकों को स्पष्ट करते हुए कहा कि केंद्रीय जीएसटी संबंधी विधेयक के माध्यम से उत्पाद, सेवा कर और अतिरिक्त सीमा शुल्क समाप्त हो जाने की स्थिति में केंद्र को कर लगाने का अधिकार होगा। समन्वित जीएसटी या आईजीएसटी के जरिये वस्तु और सेवाओं की राज्यों में आवाजाही पर कें्रद को कर लगाने का अधिकार होगा। कर छूट के संबंध में मुनाफे कमाने से रोकने के उपबंध के बारे में स्थिति स्पष्ट करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि अगर 4..5 प्रतिशत कर छूट दी जाती है तब इसका अर्थ यह नहीं कि उसे निजी मुनाफा माना जाए बल्कि इसका लाभ उपभोक्ताओं को भी दिया जाए। इस उपबंध का आशय यही है।  वित्त मंत्री ने कहा कि रियल इस्टेट की तरह ही स्थिति शराब और पेट्रोलियम उत्पादों के संबंध में भी थी। राज्यों के साथ चर्चा के बाद पेट्रोलियम पदार्थो को इसके दायरे में लाया गया है लेकिन इसे अभी शून्य दर के तहत रखा गया है। इस पर जीएसटी परिषद विचार करेगी। शराब अभी भी इसके दायरे से बाहर है।  वित्त मंत्री ने कहा कि पहले एक व्यक्ति को व्यवसाय के लिए कई मूल्यांकन एजेंसियों के पास जाना पडता था। आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए उत्पाद शुल्क, सेवा कर, राज्य वैट, मनारंजन कर, प्रवेश शुल्क, लक्जरी टैक्स एवं कई अन्य कर से गुजरना प़डता था। वित्त मंत्री कहा कि वस्तुओं और सेवाआंü का देश मंü सुगम प्रवाह नहीं था। ऎसे में जीएसटी प्रणाली को आगे बढाया गया। एक ऎसा कर जहां एक मूल्यांकन अधिकारी हो। अधिकतर स्व मूल्यांकन हों और ऑडिट मामलों को छोडकर केवल सीमित मूल्यांकन हो। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली। पीएम मोदी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को रिसीव करने दिल्ली एयरपोर्ट पहुचें। खास बात यह रही कि जिस रास्ते से पीएम मोदी दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे, उस रूट पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया। पीएम मोदी का काफीला सामान्य ट्रैफिक को बाधित किए बिना ही एयरपोर्ट पहुंचा।    गौरतलब है कि आमतौर पर जब पीएम काफीले के साथ निकलते हैं तो उस रूट पर सुरक्षा बेहद कडी होती है और उस रूट पर वहां से गुजरने वाले ट्रैफिक को 10 मिनट पहले रोक दिया जाता है। लेकिन बांग्लादेश की पीएम को रिसीव करने पीएम मोदी का काफीला सामान्य ट्रैफिक को बाधित किए बिना गया। एयरपोर्ट पहुंचकर मोदी ने शेख हसीना की अगवानी की। प्रधानमंत्री के काफिले के सबसे आगे सायरन बजाती दिल्ली पुलिस के सिक्यॉरिटी स्टाफ की गाडी होती है। उसके बाद एसपीजी की गाडी। उसके बाद दो और गाडियां। फिर लेफ्ट और राइट साइड में दो गाडियां, उनके बीच में प्रधानमंत्री की कार। उसके ठीक पीछे फिर लेफ्ट और राइट साइड में दो गाडिय़ां। उसके बाद दो गाडियां और उसके पीछे जैमर से लैस गाड़ी।    इसके ऊपर बहुत-से ऐंटेना फिट रहते हैं। ये सडक के दोनों तरफ 100 मीटर की दूरी पर रखे विस्फोटकों को डिफ्यूज कर सकते हैं। इन सबके पीछे एंबुलेंस चलती है और उसके बाद दो कारें रहती हैं। सभी गाडियों में एनएसजी के अचूक निशाने वाले कमांडो होते हैं। पीएम के काफीले के साथ करीब 100 लोगों की टीम चल रही होती है।  साभार-khaskhabar.com      

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बोमडिला । तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाईलामा के अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर बीजिंग के कड़े विरोध के बीच दलाईलामा ने बुधवार को कहा कि भारत ने उनका इस्तेमाल कभी भी चीन के खिलाफ नहीं किया। उन्होंने चीन से तिब्बत को स्वशासन तथा स्वायत्तता प्रदान करने का अनुरोध किया। अरुणाचल प्रदेश के दौरे पर बीजिंग की आपत्ति के प्रतिक्रियास्वरूप शांति के नोबेल पुरस्कार विजेता ने कहा, चीन में कई लोग हैं, जो भारत से प्रेम करते हैं, लेकिन अपने विचारों के कारण कुछ संकीर्ण मानसिकता के राजनीतिज्ञ हैं..वे मुझे शैतान मानते हैं। चीन को चुनौती देने के लिए उनका इस्तेमाल कूटनीतिक फायदे के लिए करने के बयान को खारिज करते हुए तिब्बती गुरु ने कहा, मैं भारत में बेहद लंबे समय से मेहमान के रूप में रह रहा हूं। भारत ने कभी भी मुझे चीन के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया। तिब्बत के रूख पर उन्होंने कहा, हम आजादी नहीं मांग रहे हैं। हम चीन के लोगों के साथ रहने के बेहद इच्छुक हैं। मैं हमेशा यूरोपीय संघ की भावना, एक राष्ट्र तथा व्यक्तिगत संप्रभुता के बारे में बातें करता था, लेकिन यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जो महत्वपूर्ण है वह है साझा हित। उन्होंने कहा, तिब्बत भौतिक रूप से भले ही पिछड़ा है, लेकिन आध्यात्मिक रूप से वह बेहद समृद्ध है। भौतिक रूप से विकास के लिए हमें चीन के साथ रहने की जरूरत है, क्योंकि यह हमारे हित में है। सरकार (चीन) को परस्पर लाभ के लिए अच्छा महसूस करना चाहिए। तिब्बती आध्यात्मिक नेता ने हालांकि कहा, चीन को हमें अर्थपूर्ण स्वशासन, स्वायत्तता प्रदान करना चाहिए तथा तिब्बत के पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए। चीन में तिब्बती बौद्धों की संख्या सर्वाधिक है। कई चीनी बुद्धिजीवी हमारी मांगों का समर्थन करते हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनिंग ने दलाईलामा की यात्रा पर विरोध जताया और कहा कि बीजिंग भारत से इस बारे में कड़ा विरोध दर्ज करेगा। चीन ने दलाईलामा की यात्रा को लेकर भारत के राजदूत विजय गोखले के समक्ष अपना विरोध दर्ज किया। वहीं, भारत ने मंगलवार को कहा कि दलाईलामा के अरुणाचल प्रदेश के दौरे के पीछे उसका कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है और चीन को उसके आपसी मामलों में दखलंदाजी न देने की नसीहत दी थी। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । केन्द्र सरकार ने कहा है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने और नया पैन कार्ड बनवाने के लिए अब 1 जुलाई 2017 से आधार कार्ड जरूरी होगा। सरकार ने वित्त विधेयक में एक अहम संशोधन का प्रस्ताव किया था जिसके तहत इनकम टैक्स रिटर्न भरने और नया पैन कार्ड बनवाने के लिए आधार संख्या को जरूरी बनाया गया था लेकिन यह कब से लागू होगा, इस पर संशय बरकरार था। और अब सरकार ने उसकी भी तारीख तय कर दी है।  बिना आधार नंबर के भरे गए इनकम टैक्स रिटर्न को वैध नहीं माना जाएगा। सरकार पिछले काफी समय से कई जरूरी सेवाओं के लिए आधार को जरूरी करती जा रही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने जरूरी सेवाओं के लिए आधार की अनिवार्यता को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने भी कहा है,आधार सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए अनिवार्य नहीं है लेकिन नॉन बेनिफिट (गैर-लाभकारी) योजनाओं के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आधार को जनहित योजनाओं के लिए अनिवार्य नहीं किया जा सकता है। हमारा पिछला आदेश पूरी तरह से स्पष्ट था। गैर लाभकारी (जैसे- इनकम टैक्स, बैंक खाता खुलवाने) योजनाओं में आधार कार्ड को अनिवार्य किए जाने से सरकार को रोका नहीं जा सकता है। आधार को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सात सदस्यीय पीठ के गठन पर उन्होंने कहा कि फिलहाल यह संभंव नहीं है। इस मुद्दे पर समय के साथ सुनवाई की जाएगी।  इससे पहले बैंकों ने भी खाता धारकों से आधार कार्ड को बैंक अकाउंट से लिंक कराने और मोबाइल फोन नंबर दर्ज कराने को कहा है। बैंकों के मुताबिक ऎसा नहीं करने पर खाताधारकों को परेशानी उठानी प़ड सकती है। इस बारे में केंद्र सरकार ने बैंकों को निर्देश दिए हैं। सरकार ने तो अब हवाई यात्रा के लिए भी आधार कार्ड को अनिवार्य कर दिया है। सरकार के नए दिशा-निर्देश के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति के पास आधार संख्या नहीं है तो वो हवाई यात्रा नहीं कर सकेगा। साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल ने 4 अप्रेल को अपनी पहली बैठक में प्रदेश के दो करोड 15 लाख किसानों को फायदा देते हुए 30,359 करोड रूपये का कर्ज माफ करने का अहम फैसला लिया। इससे छोटे और सीमांत किसानों को बडा फायदा मिलेगा। सरकार ने किसानों का एक लाख रूपये तक का कर्ज माफ किया है। मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।  इससे पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा ने भी मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए फैसलों को मीडिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि बैठक में प्रदेश के किसानों को बिचौलियों से भी मुक्त करने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही अवैध बूचडखानों को बंद किए जाने का फैसला भी लिया गया। उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित एंटी रोमियो दस्ते को लेकर कहा कि अगर कोई कपल किसी सार्वजनिक स्क्थल पर बैठे हैं, तो अनावश्क्यक रूप से उनसे पूछताछ किए जाने की शिकायत पाए जाने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने पाया है कि आलू के उचित मूल्य किसानों को नहीं मिलते, इसके लिए तीन लोगों की कमेटी बनाई गई है।  सरकार ने एक बडा फैसला यह भी लिया है कि कमेटी इस बात का अध्ययन करेगी कि आने वाले समय में हम आलू पैदा करने वाले किसान को किस तरह से राहत दे सकें। उन्होंने बताया कि यूपी में बडे तादाद में पूंजी निवेश को लेकर राज्य सरकार ने नई उद्योग नीति बनाने का फैसला किया है। इसके लिए एक मंत्री समूह का गठन किया गया है, जो अलग-अलग राज्यों में जाकर वहां की उद्योग नीति की बारीकियों का अध्ययन करेगा और प्रदेश में सिंगल विंडो के माध्यम से एक अच्छी उद्योग नीति का यहां निर्माण कर सकें, इसके लिए यह मंत्री समूह कई प्रदेशों में जाएगा।  उन्होंने कहा कि राज्य में जिस तरह से अपराध का बोलबाला रहा है, उस पर जीरो टोलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। वहीं, मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि अवैध खनन पर निगरानी के लिए मंत्रियों के समूह का गठन किया गया है। सरकार ने लिए ये अहम फैसले -7 लाख किसान जिनका लोन एनपीए हो गया है, उनके लोन का 5,630 करोड़ पूरा माफ किया गया है। - कुल 36 हजार 359 करोड़ का कर्ज माफ किया गया है। -किसान राहत फंड बनाया जाएगा जिससे फसली ऋण लेने वाले किसानों को लाभ मिलेगा। -लघु और सीमांत किसानों का एक लाख तक का कर्ज माफ किया जाएगा। - लघु और सीमांत किसानों के 30,739 करोड़ का कर्ज माफ होगा। -अवैध बूचडख़ानों के विषय में कैबिनेट में चर्चा हुई। अब तक कुल 26 अवैध बूचडख़ाने बंद किए गए हैं। कैबिनेट ने मुहर लगाई की सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेश का सरकार फॉलो करेगी। -उत्तर प्रदेश में सिंगल विंडो के माध्यम से अच्छी उद्योग नीति की शुरुआत होगी।  -किसानों को आलू के पैदावार की उचित मूल्य नहीं मिलता है। इसके लिए उपमुख्यमंत्री केपी मौर्य की अध्यक्षता में तीन लोगों की टीम बनी है। कमिटी इस बात का अध्ययन करेगी कि आलू पैदा करने वाले किसानों को कैसे फायदा दिया जा सकता है। -ऐंटी रोमियो दस्ता बड़े अधिकारियों से ब्रीफिंग लेकर जाता है। किसी से अनावश्यक रूप से आई कार्ड मांगने और पूछताछ करने की जानकारी मिलेगी तो अधिकारियों से भी पूछताछ होगी। -गेंहू की बंपर फसल हुई है इसलिये 80 लाख टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है। अगर किसानों की मांग है तो जिलों में इसके लिए क्रय केंद्र बढ़ेगा। -1625 के एमएसपी के साथ प्रति क्विंटल पर 10 रुपये ढुलाई और रखरखाव के लिए दिए जाएंगे। -सभी जिला अधिकारियों को आदेश जारी किए गए हैं कि अगर किसी जिले में किसानों की ज्यादा मांग है, तो उस जिले में और भी खरीद केंद्र खोले जाएं।  -पूरे प्रदेश में 5000 गेहूं खरीद के केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिसकी मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री करेंगे। -कैबिनेट में वाराणसी को क्योटो की तर्ज पर विकसित करने पर चर्चा हुई। साभार-khaskhabar.com

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लखनऊ । मुलायम परिवार में एक बार फिर से कलह शुरू हो गई है। गौरतलब है कि चुनावों से पहले मुलायम सिंह के परिवार की कलह सुलझती नजर आ रही है लेकिन विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की हार के बाद मुलायम परिवार में फिर से कलह शुरू होती नजर आ रही है। वहीं अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव आज यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलेंगे।  शिवपाल सिंह यादव आज सुबह 11.15 बजे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से उनके आवास 5 कालिदास मार्ग पर मुलाकात करेंगे। गौरतलब है कि कल मंगलवार को योगी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक थी। इस कैबिनेट बैठक में योगी सरकार ने एक लाख रुपए तक किसानों की कर्जमाफी का ऐलान किया।  कर्जमाफी के बाद योगी से विपक्ष के किसी नेता की ये पहली बड़ी मुलाकात होगी। हांलंाकि शिवपाल और योगी की मुलाकात की वजह तो पता नहीं चल पाई है लेकिन इस मुलाकात ने कई सवाल खडे कर दिए हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों मुलायम सिंह की छोटी बहू अपने पति प्रतीक यादव के साथ योगी आदित्यनाथ से मिलने पहुंची थी। अपर्णा ने उन्हें अपनी गोशाला आने का न्योता दिया था। अपर्णा के आग्रह पर योगी आदित्यनाथ उनकी गोशाला पहुंचे थे। वहां योगी आदित्यनाथ ने गायों को हरा चारा भी खिलाया था।  साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली । केन्द्र सरकार रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर सख्त होती नजर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर जल्द बडा फैसला ले सकती है। रिपोर्ट के अनुसार बाहर से आकर भारत में बसे रोहिंग्या मुस्लिमों को केन्द्र सरकार वापस म्यामांर भेजने का फैसला कर सकती है।  अगर केन्द्र सरकार यह फैसला लेती है तो करीब 40,000 हजार रोहिंग्या मुस्लिमों को भारत छोडना पडेगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गृह मंत्रालय फॉरनर्स एक्ट के तहत रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस म्यायांर भेजेगी। ज्ञातव्य है कि रोहिंग्य मुस्लिम बांग्लादेश और म्यायांर की सीमा से समुद्र के रास्ते घुसपैठ कर भारत में घुसे थे।  रिपोर्ट के अनुसार रोहिंग्य मुस्लिमों के मुद्दे को लेकर गृहमंत्रालय में सोमवार को गृह सचिव राजीव महर्षि की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में जम्मू-कश्मीर के डीजीपी, चीफ सेकेट्ररी भी शामिल थे। इस बैठक में रोहिंग्य मुस्लिमों की पहचान, गिरफ्तारी और देश से बाहर भेजने की रणनीति पर बातचीत की गई है। ज्ञातव्य है कि 1982 में म्यांमार सरकार ने राष्ट्रीयता कानून के तहत रोहिंग्या मुसलमानों का नागरिक दर्जा खत्म कर दिया गया था। इसके बाद म्यांमार सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को देश छोडने के लिए मजबूर करती आ रही है। इसके बाद समुद्र के रास्ते से घुसपैठ कर रोहिंग्या मुस्लिम भारत में आकर बस गए। भारत में सबसे ज्यादा रोंहिग्या मुस्लिम जम्मू में बसे हैं, यहां करीब 10,000 रोंहिग्या मुस्लिम रहते हैं।   साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । योगी आदित्यनाथ सरकार लगातार कडे फैसले ले रही है। गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ ने सभी विभागों को प्रजेंटेशन देने के लिए कहा है। साथ ही भविष्य के लिए विभागों को रोड मैप तैयार करने के लिए भी कहा गया है। विभागों की प्रजेंटेशन सोमवार से शुरू हो गई है। कल शिक्षा विभाग के सचिवों ने योगी आदित्यनाथ के सामने प्रजेंटेशन दिया। साथ ही रोड मैप पर भी चर्चा हुई। सोमवार को देर रात तक सीएम आदित्यनाथ योगी और उनके कैबिनेट मंत्रियों के साथ अधिकारियों की बैठक चलती रही। योगी सरकार ने 5 साल में 10 लाख नए रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा है।  शिक्षा विभाग के सचिवों के साथ देर रात तक चली मीटिंग में योगी आदित्यनाथ ने कई अहम फैसले लिए। जो सरकारी अध्यापक कोचिंग क्लास चला रहे हैं, उन पर नकेल कसेगी। योगी सरकार ने फैसला लिया है कि जो सरकारी अध्यापक कोचिंग क्लास चला रहे हैं, उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा। साथ ही परिक्षाओं में नकल रोकने के लिए योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा विभागों के सचिवों को कडे निर्देश दिए।  योगी आदित्यनाथ पूरी तैयारी के साथ मीटिंगमें गए थे। शिक्षा विभाग का प्रजेंटेशन तो आधे घंटे में ही पूरा हो गया लेकिन उसके बाद जब योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से सवाल जवाब करना शुरू किया। योगी उनसे सारी जानकारी मांग रहे थे और ऐसे में अधिकारी यहां फाइलों का पुलिंदा लेकर दौडते-भागते दिखे। प्राइवेट स्कूलों पर कसेगी नकेल:  योगी सरकार ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ मीटिंग में सीएम योगी ने फीस को लेकर मनमानी पर नीति बनाने के आदेश दिए हैं।  नकल करवाने वाले केन्द्रों पर कडी कार्रवाई के निर्देश:  सीएम योगी ने परीक्षाओं में नकल रोकने को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कडे निर्देश दिए हैं। योगी ने कहा है कि नकल करवाने वालों और जिन केंद्रों पर नकल होती है उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। दागी केंद्रों को पहचान कर उन्हें ब्लैक लिस्ट किया जाए और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाए,  क्योंकि राज्य में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए नकल माफिया से निपटना बेहद जरूरी है। साथ ही योगी ने अधिकारियों से कहा कि स्कूलों के पाठ्यक्रम को 200 दिन में खत्म किया जाए और सभी स्कूलों में बायोमीट्रिक्स के जरिए शिक्षकों और बच्चों की नियमित उपस्थिति पर निगरानी रखी जाए।   साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । एमसीडी चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। बीती रात एमसीडी चुनाव के प्रचार के दौरान दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल मोदी-मोदी के नारे लगाते हुए नजर आए। दरअसल, एमसीडी चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी का प्रचार करने दिल्ली यमुनापार के घोंडा इलाके में अरविंद केजरीवाल भाषण दे रहे थे तभी उनके भाषण के बीच में अचानक मोदी-मोदी के नारे गूंजने लगे। इसके बाद केजरीवाल मंच से भडक़ उठे और ज़ोर-ज़ोर से मोदी-मोदी के नारे लगाने लगे। मोदी के नारे चिल्लाने का सिलसिला तब शुरू हुआ जब केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों का हाउस टैक्स माफ करने की बात कही। लेकिन लोगों की नारेबाजी करते देख अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ‘अगर मोदी-मोदी चिल्लाने से हाउस टैक्स माफ होता है तो मैं भी आपके साथ मोदी-मोदी के नारे लगाता हूं। अगर मोदी-मोदी चिल्लाने से बिजली का बिल माफ होता है तो मैं भी कहूंगा और अगर मोदी-मोदी चिल्लाने से आपका पेट भरता है तो कहिए मोदी-मोदी। इतने ही नहीं अरविंद केजरीवाल की रैली में खलल पैदा कर रहे उन लोगों को केजरीवाल ने पागल तक कह दिया। विधानसभा चुनाव में केजरीवाल ने बिजली बिल हाफ और पानी का बिल माफ करने के बाद इस बार हाउस टैक्स फ्री करने का ऑफर दिया है। हाउस टैक्स माफ करने का वादा ही लोगों से कर रहे थे केजरीवाल तभी मोदी मोदी के नारे लगने शुरू हो गए।  आपको बता दें कि दिल्ली में आने वाली 23 तारीख को दिल्ली नगर निगम का चुनाव होना है। जिसके लिए आम आदमी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस अपना पूरा ज़ोर लगा रही हैं। बीती रात ही कांग्रेस पार्टी ने अपने 140 उम्मीदवारों के नाम की भी घोषणा कर दी। साभार-khaskhabar.com  

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