देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreदुख और सुख जीवन के सबसे मूल्यवान क्षण है....सुख की उम्र कम होती है...दुख हमेशा जीव के साथ चलता रहता है...अगर देखा जाए तो दुख ही है जो हमें हमारी पहचान करवाता है...दुख ही है जो ईश्वर का माध्यम बनता है...दुख ही है जो एक सच्चे साथी के रूप में कुछ न कुछ सीखा के जाता है....सुख क्या क्षण मात्र का है...बस आपके जीवन यात्रा में आता जाता रहता है...इस धरा पे वो ही प्रसन्न हो सकता है जो दुख आने पे विचलित न हो सुख आने पे अति से ज्यादा खुशी न हो संतुलन ही दोनो का आधार है.........आगे हरिहर की इच्छा













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