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रंग बरसे' फिर से - 4 दशक बाद भी होली के रंग को और गाढ़ा करता है यह आइकॉनिक सॉन्ग

मुंबई,। भले ही दुनिया कितनी आगे बढ़ जाए या आधुनिक हो जाए, कुछ चीजें क्लासिक ही अच्छी लगती है, जैसे होली के गीत। आज डीजे पर बजने वाले 'बलम पिचकारी', 'डू मी अ फेवर लेट्स प्ले होली' या फिर 'पनवाड़ी' गाना ही क्यों न हो, यह गाने डीजे पर थिरकने पर मजबूर तो कर देते है लेकिन दिलों में प्यार की उमंग और होली का रस नहीं जगा पाते। होली आते ही अगर किसी एक गाने की धुन सबसे पहले कानों में पड़ती है, तो वह है ‘रंग बरसे’। चार दशक से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन यह गीत आज भी हर होली पार्टी, हर सोसायटी फेस्टिवल और हर पारिवारिक आयोजन की पहली पसंद बना हुआ है। यह गीत सिर्फ रंगों की मस्ती नहीं दिखाता, रंगों और भांग के माहौल में दबे हुए भाव बाहर आते हैं, अनकहे रिश्ते खुलकर सामने आ जाते हैं। यही वजह है कि यह गीत महज नाच-गाने का हिस्सा नहीं, बल्कि कहानी कहने का माध्यम बन गया। गीत में शरारत है, चुटीलापन है और साथ ही पारंपरिक होली का रंग भी। समय बदला, होली मनाने का अंदाज भी बदला। ढोलक और मोहल्ले की महफिलों की जगह अब डीजे, बड़ी पार्टियां और सामाजिक माध्यमों की रीलों ने ले ली है। इसके बावजूद ‘रंग बरसे’ की धुन आज भी उतनी ही मजबूती से गूंजती है।
आज भी सिर्फ इंस्टाग्राम पर ‘रंग बरसे’ पर 3.8 लाख इंस्टाग्राम रील ट्रेंडिग में बनी है। खास बात यह है कि ज्यादातर लोग 'सोने की थाली में जोना परोसा' गाने की इस पंक्ति पर रील बनाना पसंद कर रहे हैं। बाद के वर्षों में कई होली गीत आए, लेकिन इनमें से कोई भी ‘रंग बरसे’ जैसी सांस्कृतिक पहचान नहीं बना सका। आज भी होली के रंग को और गाढ़ा करने के लिए और उसी मस्ती को जिंदा रखने के लिए ‘रंग बरसे’ का ही सहारा लिया जा रहा है। इस गाने के कई नए वर्जन अलग-अलग भाषाओं और वर्जन के साथ रिलीज हो चुके हैं। भक्ति गीत से लेकर भोजपुरी गीत इसी गाने से प्रेरित होकर बनाए जा रहे हैं।
राधा-कृष्ण के प्रेम से भक्ति गीत रंग बरसे में भी वही उत्साह और उमंग देखने को मिलती है। वहीं भोजपुरी गीतों में इस गाने का रीमेक बनाने कोशिश की गई लेकिन गाने का म्यूजिक और लिरिक्स दोनों की ऑरिजन गाने के सामने फीके हैं। ‘रंग बरसे’ का ऑरिजनल गाना होली के आते ही सोशल मीडिया पर छा जाता है और यूट्यूब पर उसका असर भी देखने को मिलता है। सिलसिला का आइकॉनिक गाना 171 मिलियन व्यूज पार चुका है, जो शाहरुख खान की 'डर' फिल्म का 'अंग से अंग लगाना', 'आज ना छोड़ेंगे बस हमजोली' और 'पिया संग खेलो होली' से काफी ज्यादा है।
आज जब हर त्योहार पर नए गीत बनाने की होड़ लगी है, तब भी होली का अनौपचारिक प्रतीक ‘रंग बरसे’ ही बना हुआ है। यह गाना अब केवल एक फिल्म का हिस्सा नहीं, बल्कि एक पीढ़ी की स्मृति और उत्सव की पहचान बन चुका है। होली 2026 में भी जब रंग उड़ेंगे, चेहरे रंगों से सराबोर होंगे और संगीत बजेगा, तो संभावना यही है कि शुरुआत फिर उसी पंक्ति से होगी -"रंग बरसे भीगे चुनर वाली...”।

 

साभार-khaskhabar.com

 

 

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