देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreपरमात्मा का ही अंश है आत्मा जो धरा के सभी जीवों और निर्जिवों में व्याप्त है...जीवों में बस मानव को ही ईश्वर ने बुद्धि, विवेक जैसी मूल्यवान चीज दी है पर मानव अपने अहंकार, लालच, घृणा, ईर्ष्या ,बदला, मान, अपमान, भय, डर, जैसे तामसी गुणों से युक्त इन से घिरा रहता है...जो इन्हे पार कर जाता है वो सफल होता है....और एक सच्चा साधक, भक्त, और एक योगी बन पता है...इसलिए मानव को इन सब से निकलने के लिए जीवन में संतुलन रखें....और ईश्वर के बताए सद मार्ग पे होते है मोक्ष की यात्रा के लिए तैयार रहे.......आगे हरिहर की इच्छा













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