देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreराजस्थान की धरती पर बसा मेहरानगढ़ किला सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि वीरता, शौर्य और भव्यता की कहानी को संजोए एक सजीव स्मारक है। जोधपुर शहर की ऊंचाई से नजर आता यह किला, लगभग 400 फीट की चट्टान पर स्थित है और पूरे 1,200 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी नींव 1459 में राठौड़ वंश के राव जोधा ने रखी थी, और इसके वर्तमान स्वरूप का निर्माण कई पीढ़ियों में पूर्ण हुआ। यह किला जितना मजबूत है, उतना ही सुंदर और रहस्यमयी भी।
इतिहास में रचा-बसा मेहरानगढ़
राव जोधा ने जब जोधपुर को अपनी राजधानी बनाया, तब उन्होंने मंडोर से लगभग 9 किमी दूर भाऊचेरिया पहाड़ी पर इस किले का निर्माण शुरू किया। ‘मेहरान’ शब्द का अर्थ होता है ‘सूर्य’, जो राठौड़ों के कुलदेवता माने जाते थे। यह किला एक समय पर शक्ति और आत्मबल का प्रतीक बना। इसके निर्माण के दौरान एक ऋषि चीरिया नाथजी को जबरन स्थान छोड़ने को मजबूर किया गया, जिससे उन्होंने इस किले को जल संकट का श्राप दिया। इस श्राप को शमन करने के लिए राव जोधा ने एक स्थानीय राजाराम मेघवाल की स्वेच्छिक बलि स्वीकार की। यह बलिदान आज भी किले के इतिहास में अमर है।
वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण
मेहरानगढ़ किले की बनावट 500 वर्षों की लंबी प्रक्रिया में विकसित हुई है। इसकी दीवारें 68 फीट चौड़ी और 117 फीट ऊंची हैं। किले में सात प्रमुख द्वार हैं जिनमें जयपोली, लोहा गेट, डेढ़ कामगरा गेट और मार्टी गेट जैसे प्रवेश द्वार शामिल हैं। किले के भीतर मोती महल, फूल महल, शीश महल, दौलत खाना और सुरेश खान जैसे महलों की भव्यता दर्शनीय है। मोती महल राजा सूर सिंह द्वारा बनवाया गया था और शीश महल अपनी दर्पणयुक्त दीवारों के लिए प्रसिद्ध है। फूल महल को महाराजा अभय सिंह ने अपनी कला प्रेम की पहचान स्वरूप बनवाया था।
किले की अनूठी विशेषताएं
मेहरानगढ़ किला न केवल राजस्थान, बल्कि भारत के सबसे प्रभावशाली किलों में गिना जाता है। यह चट्टानी ऊंचाई पर होने के कारण दूर से ही शौर्य का आभास कराता है। प्रवेश द्वार पर अक्सर लोक कलाकार अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का स्वागत करते हैं। यहां कई फिल्में भी शूट की गई हैं जैसे 'द डार्क नाइट राइजेस', 'द लायन किंग' और 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान'।
मेहरानगढ़ फोर्ट घूमने का उत्तम समय
इस किले की सैर के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अनुकूल माना जाता है, जब मौसम ठंडा और सुहावना होता है। सुबह के समय किले में भ्रमण करने से इसकी भव्यता और वास्तुशिल्प को नजदीक से देखने का आनंद दोगुना हो जाता है।
मेहरानगढ़ किले के दर्शन का समय
—प्रतिदिन खुला रहता है
—समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक
प्रवेश शुल्क विवरण
—अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक (ऑडियो गाइड सहित): ₹600
—अंतर्राष्ट्रीय छात्र: ₹400
—भारतीय पर्यटक: ₹100
—वरिष्ठ नागरिक/छात्र/सुरक्षा कर्मी: ₹50
—फोटोग्राफी शुल्क (स्थिर): ₹100
—वीडियो फोटोग्राफी: ₹200
—लिफ्ट (एकतरफ़ा): ₹50
—टूर गाइड शुल्क: ₹120
—ऑडियो गाइड: ₹180 (छूट सहित ₹120)
जोधपुर के स्वादिष्ट व्यंजन और रेस्तरां
जोधपुर की गलियों में चटपटे और तीखे स्वाद की भरमार है। यहां मिर्ची बड़ा, मावा कचोरी, प्याज़ कचोरी जैसे लज़ीज़ स्ट्रीट फूड मिलते हैं। मिठाई के शौकीनों के लिए मखानिया लस्सी, बेसन की चक्की, मावे की कचौरी और मोतीचूर के लड्डू स्वाद का खजाना हैं।
मेहरानगढ़ किले के पास के दर्शनीय स्थल
राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क
किले से सटा हुआ यह 72 हेक्टेयर में फैला पार्क वनस्पति और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श है। यहां रेगिस्तानी पौधों की विविधता देखने को मिलती है।
चोकेलो गार्डन
18वीं सदी में निर्मित यह गार्डन किले के नीचे स्थित है और यहाँ से किले का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है। साथ ही यहाँ स्थित रेस्टोरेंट एक बेहतरीन अनुभव प्रदान करता है।
नागणेचजी मंदिर
किले के दाईं ओर स्थित यह मंदिर 14वीं सदी में बना था। इसे राठौड़ कुल की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है।
चामुंडा माता मंदिर
राव जोधा जब मंडोर से राजधानी जोधपुर लाए थे, तब उन्होंने अपनी कुलदेवी चामुंडा माता की मूर्ति को भी किले में स्थापित किया, जो आज यहां का पवित्र धार्मिक स्थल है।
यदि आप राजस्थान की वीरता, वास्तुशिल्प और संस्कृति का जीवंत अनुभव लेना चाहते हैं, तो मेहरानगढ़ किला आपके लिए एक परिपूर्ण यात्रा स्थल है। यह ना सिर्फ इतिहास प्रेमियों बल्कि प्रकृति और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी एक अविस्मरणीय अनुभव है।
साभार-khaskhabar.com













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