नई दिल्ली । पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही बीच में पड़ रहे आम बजट को लेकर घमासान शुरू हो गया है। विपक्ष आम बजट को चुनाव बाद पेश करने की मांग कर रहा है। विपक्षी दलों ने चुनाव पूर्व बजट पेश करने की मोदी सरकार की योजना का विरोध किया है। उनका आरोप है कि इसके माध्यम से लोक लुभावनी घोषणाएं करके भाजपा मतदाताओं को लुभा सकती है। विपक्ष की इस मांग का केंद्र में राजग की सहयोगी शिवसेना ने भी समर्थन किया है। गुरुवार सुबह 11 बजे कांग्रेस, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, जदयू, सपा, रालोद के नेता चुनाव आयोग पहुंचे और इस पर रोक लगाने की मांग की। चुनाव आयोग ने इससे पहले बुधवार को कहा था कि एक फरवरी को बजट पेश करने की योजना के खिलाफ राजनीतिक दलों के दिए गए एक आवेदन की वह जांच करेगा। इस बीच, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस कदम का बचाव करते हुए सवाल किया कि अगर राजनीतिक दल दावा करते हैं कि नोटबंदी एक अलोकप्रिय फैसला है तो उन्हें बजट से डर क्यों होना चाहिए। सभी राजनीतिक दलों का दावा है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में वह बेहतर प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेस, वाम, सपा और बसपा सहित विभिन्न दलों ने चुनाव आयोग और राष्ट्रपति को पत्र लिख कर चुनाव से पहले बजट पेश किए जाने का विरोध किया है। विपक्षी दलों के अलावा केंद्र में राजग की सहयोगी शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से अपील की कि वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बजट पेश करने की इजाजत नहीं दें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बजट का इस्तेमाल वोटरों को लुभाने के लिए कर सकती है। इन दलों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले बजट पेश करने से भाजपा और उसके सहयोगियों को अनावश्यक तरीके से लाभ होगा, क्योंकि केंद्र सरकार मतदाताओं को लुभाने के लिए आकर्षक घोषणाएं कर सकती है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी को लिखे एक पत्र में कहा है, ‘यह विपक्षी दलों की सामूहिक और गंभीर चिंता है कि एक फरवरी को बजट पेश किए जाने से सरकार को मतदाताओं को लुभाने के लिए लोकप्रिय घोषणाएं करने का अवसर मिल जाएगा।’ आजाद ने कहा, ‘इससे न केवल सत्तारूढ़ दल को अनावश्यक लाभ मिलेगा बल्कि इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया भी कमजोर होगी। इसलिए यह मांग है कि आगामी चुनाव को देखते हुए और वर्ष 2012 के उदाहरण के अनुसार, बजट को पहले पेश करने की अनुमति न दी जाए।’संवाददाताओं के पूछने पर आजाद ने कहा, ‘आयोग को कुछ राजनीतिक दलों की ओर से अभ्यावेदन मिले हैं जो कि बजट पेश करने से संबंधित हैं। आयोग उन पर गौर कर रहा है।’ माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि एक फरवरी को बजट पेश करना सही नहीं है, क्योंकि इससे तीन के बजाय केवल दो तिमाही की जीडीपी को ही बजट में शामिल किया जा सकेगा। येचुरी ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले बजट पेश करने का लक्ष्य मतदाताओं को लुभाना है। फेसबुक पोस्ट में येचुरी ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और चुनाव आयोग से बजट को पहले पेश करने के फैसले को पलटने का अनुरोध किया। साभार-khaskhabar.com
Read MoreBREAKING NEWS












