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नई दिल्ली । पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही बीच में पड़ रहे आम बजट को लेकर घमासान शुरू हो गया है। विपक्ष आम बजट को चुनाव बाद पेश करने की मांग कर रहा है। विपक्षी दलों ने चुनाव पूर्व बजट पेश करने की मोदी सरकार की योजना का विरोध किया है। उनका आरोप है कि इसके माध्यम से लोक लुभावनी घोषणाएं करके भाजपा मतदाताओं को लुभा सकती है। विपक्ष की इस मांग का केंद्र में राजग की सहयोगी शिवसेना ने भी समर्थन किया है। गुरुवार सुबह 11 बजे कांग्रेस, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, जदयू, सपा, रालोद के नेता चुनाव आयोग पहुंचे और इस पर रोक लगाने की मांग की। चुनाव आयोग ने इससे पहले बुधवार को कहा था कि एक फरवरी को बजट पेश करने की योजना के खिलाफ राजनीतिक दलों के दिए गए एक आवेदन की वह जांच करेगा। इस बीच, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस कदम का बचाव करते हुए सवाल किया कि अगर राजनीतिक दल दावा करते हैं कि नोटबंदी एक अलोकप्रिय फैसला है तो उन्हें बजट से डर क्यों होना चाहिए। सभी राजनीतिक दलों का दावा है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में वह बेहतर प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेस, वाम, सपा और बसपा सहित विभिन्न दलों ने चुनाव आयोग और राष्ट्रपति को पत्र लिख कर चुनाव से पहले बजट पेश किए जाने का विरोध किया है। विपक्षी दलों के अलावा केंद्र में राजग की सहयोगी शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से अपील की कि वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बजट पेश करने की इजाजत नहीं दें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बजट का इस्तेमाल वोटरों को लुभाने के लिए कर सकती है। इन दलों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले बजट पेश करने से भाजपा और उसके सहयोगियों को अनावश्यक तरीके से लाभ होगा, क्योंकि केंद्र सरकार मतदाताओं को लुभाने के लिए आकर्षक घोषणाएं कर सकती है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त नसीम जैदी को लिखे एक पत्र में कहा है, ‘यह विपक्षी दलों की सामूहिक और गंभीर चिंता है कि एक फरवरी को बजट पेश किए जाने से सरकार को मतदाताओं को लुभाने के लिए लोकप्रिय घोषणाएं करने का अवसर मिल जाएगा।’ आजाद ने कहा, ‘इससे न केवल सत्तारूढ़ दल को अनावश्यक लाभ मिलेगा बल्कि इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया भी कमजोर होगी। इसलिए यह मांग है कि आगामी चुनाव को देखते हुए और वर्ष 2012 के उदाहरण के अनुसार, बजट को पहले पेश करने की अनुमति न दी जाए।’संवाददाताओं के पूछने पर आजाद ने कहा, ‘आयोग को कुछ राजनीतिक दलों की ओर से अभ्यावेदन मिले हैं जो कि बजट पेश करने से संबंधित हैं। आयोग उन पर गौर कर रहा है।’ माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि एक फरवरी को बजट पेश करना सही नहीं है, क्योंकि इससे तीन के बजाय केवल दो तिमाही की जीडीपी को ही बजट में शामिल किया जा सकेगा। येचुरी ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले बजट पेश करने का लक्ष्य मतदाताओं को लुभाना है। फेसबुक पोस्ट में येचुरी ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और चुनाव आयोग से बजट को पहले पेश करने के फैसले को पलटने का अनुरोध किया। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी (सपा) में जारी सियासी संकट के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पार्टी विधायकों और मंत्रियों के साथ बैठक लखनऊ में शुरू हो गई है। चुनाव आयोग के बुधवार को यूपी समेत पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान करने के बाद अखिलेश यादव बैठक में चुनाव की रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं। इसी के साथ चुनाव आयोग में असली सपा होने का दावा साबित करने के लिए अपने समर्थक विधायक, विधान परिषद सदस्यों, सांसदों और पदाधिकारियों की सूची भी तैयारी की जा सकती है। चुनाव आयोग ने इस संबंध में दोनों गुटों को नोटिस जारी कर अपने समर्थकों के संबंध में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 11 फरवरी से लेकर 8 मार्च तक सात चरणों में होगा। नतीजे 11 मार्च को आएंगे। अखिलेश यादव ने अपने लोगों से कह दिया है कि अब वह पूरी तरह चुनाव प्रचार में लग जाएं और किसी तरह के भ्रम में न रहें। सीएम ने अपने विधायकों व बड़े नेताओं की आज बैठक बुलाई है जो 10 बजे शुरू हो गई है। इसमें अखिलेश पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से विधायकों को चुनावी तैयारियों के संबंध में निर्देश देंगे। सूत्रों का कहना है कि बैठक में पार्टी प्रत्याशियों की नई सूची भी तैयार की जा सकती है। प्रचार अभियान, रथयात्र कार्यक्रम, रैलियों पर भी चर्चा होगी। साफ है कि अखिलेश खेमा किसी समझौते का इंतजार किए बिना अब अपनी ताकत के बूते चुनाव में उतरना चाहता है। रामगोपाल यादव पहले ही कह चुके हैं कि अब सुलह समझौते का कोई मतलब नहीं है। शिवपाल के हटाए अध्यक्षों को अखिलेश ने रखा: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने देवरिया, कुशीनगर, आजमगढ़ एवं मिर्जापुर जिलों के सभी पूर्व नामित अध्यक्षों क्रमश: राम इकबाल यादव, राम अवध यादव, हवलदार यादव तथा आशीष यादव को बहाल कर दिया है और जिला कमेटियां फिर से काम करती रहेंगी। नरेश उत्तम ने उपर्युक्त सभी अध्यक्षों से तत्काल कार्यभार ग्रहण कर चुनाव तैयारियों में जुट जाने का आग्रह किया है। तीन रोज पहले जब मुख्यमंत्री ने जनेश्वर मिश्र पार्क में राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया था, उसी दिन शिवपाल सिंह यादव ने इन चारों जिलाध्यक्षों को हटाकर अपने लोगों को नामित किया था। इस फैसले के बाद इन जिलों में सरगर्मी बढ़ गई है। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के दो सांसदों की गिरफ्तारी को लेकर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और इसे ‘बदले की राजनीति’ करार दिया। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, ‘यह मोदीजी की ‘बदले की राजनीति’ है। वह संदेश देना चाहते हैं कि अगर किसी ने नोटबंदी के खिलाफ बोला तो छोडेंग़े नहीं। सचमुच निंदनीय है।’ केजरीवाल की टिप्पणी शीर्ष पत्रकार राजदीप सरदेसाई के ट्वीट के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘जब टीएमसी जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) पर राजग (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) का समर्थन कर रही थी, तब हमें चिट फंड मामलों में एक शब्द भी सुनाई नहीं दिया। अब टीएमसी नोटबंदी पर केंद्र के खिलाफ है, तो दो सांसद गिरफ्तार कर लिए गए हैं!’ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को तृणमूल सांसद सुदीप बंदोपाध्याय को रोज वैली चिट फंड घोटाले में गिरफ्तार कर लिया था। इससे पहले एजेंसी ने 30 दिसंबर को तृणमूल सांसद तपस पॉल को भी गिरफ्तार किया।  साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । निर्वाचन आयोग ने 5 राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। चीफ इलेक्शन कमिश्नर नसीम जैदी ने बुधवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया। उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होंगे। मणिपुर में दो चरणों में चुनाव होंगे। वहीं पंजाब, गोवा और उत्तराखंड और एक-एक चरण में चुनाव होंगे। सभी राज्यों के नतीजे 11 मार्च को आएंगे। चुनाव की घोषणा के साथ ही इन पांचों राज्यों में आचार संहिता लागू हो गई है।  उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होंगे। प्रथम चरण में 15 जिलों की 73 सीटों के लिए 11 फरवरी को मतदान होगा। दूसरे चरण के लिए 11 जिलों की 67 सीट पर 15 फरवरी को मतदान होगा। तीसरे चरण में 12 जिलों की 69 सीट 19 फरवरी को मतदान होगा। चौथे चरण में 12 जिलों की 53 सीट पर 23 फरवरी को मतदान होगा। पांचवें चरण में 11 जिलों की 62 सीट पर 27 फरवरी को मतदान होगा। छठवें चरण में 7 जिलों की 49 सीट पर 4 मार्च को मतदान होगा। वहीं सातवें और अंतिम चरण के लिए 7 जिलों की 40 सीट पर 8 मार्च को मतदान होगा। पंजाब- गोवा में एक चरण में मतदान पंजाब में 4 फरवरी को एक चरण में मतदान होगा। उत्तराखंड में भी एक चरण में 15 फरवरी को मतदान होगा। गोवा में भी एक चरण में 4 फरवरी को मतदान होगा। वहीं मणिपुर में दो चरणों में मतदान होगा। यहां 4 मार्च और 8 मार्च को मतदान होगा।  चुनाव आयोग साफ तौर पर चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 16 करोड़ से ज्यादा लोग चुनावों में हिस्सा ले रहे हैं। मतदाताओं को कलरफुल वोटर गाइड भी उपलब्ध कराई जाएगी। पोलिंग बूथ के बाहर सभी जानकारियों पोस्टर पर दी जाएंगी। इसपर नियमों का उल्लेख होगा। मतदाताओं के सहयोग के लिए भी बूथ बनाए जाएंगे। चुनाव आयोग ने कहा कि गोपनीयता बनाए रखने के लिए 30 इंच ऊंची स्टील और अन्य सामग्री से बनी छोटी केबिन का इस्तेमाल किया जाएगा। मतदान को दिव्यांगों के अनुकूल बनाया जाएगा। उन्होंने कहा है कि सभी क्षेत्रों में मतदान जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। गोवा में वोट डालने के बाद एक पर्ची दी जाएगी।  चुनाव आयोग की इस बार अनूठी पहल की है। डिफेंस, पैरा मिलिट्री फोर्सेस में तैनात जवान इलेक्ट्रॉनिक पोस्टल बैलट से वोट डाल सकेंगे। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों को नॉमिनेशन पेपर पर फोटो लगाना होगा और उनको भारत का नागरिक होना चाहिए। कुछ जगहों पर महिलाओं के लिए अलग से पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे। चुनाव प्रचार के दौरान ध्वनि प्रदूषण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्रियों पर प्रतिबंध होगा। चुनाव आयोग ने कहा कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउड स्पीकर पर रोक रहेगी। केंद्र की पैरामिलिट्री फोर्स को तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में 28 लाख चुनाव में खर्च की सीमा होगी। मणिपुर में उम्मीदवार 20 लाख रुपये खर्च कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों को बैंक में अकाउंट खोलवाना होगा और चंदे को यहां जमा कराना होगा। चुनाव आयोग सोशल मीडिया को सपॉर्ट करेगी। इसका इस्तेमाल प्रशासनिक स्तर पर किया जाएगा। मीडिया मॉनिटरिंग कमिटी ध्यान रखेगी कि किसी उम्मीदवार की पब्लिसिटी तो नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर ईवीएम पर नाम के साथ उम्मीदवारों का फोटो भी दिखेगा।  साभार-khaskhabar.com  

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न्यूयॉर्क । भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक और ‘हॉट योगा गुरु’ के रूप में पूरी दुनिया में मशहूर हुए बिक्रम चौधरी को कोर्ट ने उनकी 500 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति से बेदखल कर दिया है। कोर्ट ने बिक्रम चौधरी को उसकी पूर्व वकील मीनाक्षी जाफा बोडेन को करीब 6 करोड़ 27 लाख रुपए का मुआवजा देने के लिए कहा था लेकिन वह अमेरिका छोडक़र फरार हो गया। बिक्रम के इस कदम से कोर्ट इतना नाराज हुआ कि उसने मीनाक्षी को ही ‘बिक्रम योग स्टूडियोज’ की 700 फ्रेंचाइजी की मालकिन बना दिया है। क्या है मामला मीनाक्षी ने बिक्रम पर आरोप लगाया था कि काम के दौरान उन्हें लिंगभेद का भी शिकार होना पड़ा। बिक्रम ने उनका रेप किया और बाद में उन्हें गलत तरीके से टर्मिनेट कर दिया। कोर्ट में केस हार जाने पर जब कोर्ट ने बिक्रम को 6 करोड़ 27 लाख रुपए का मुआवजा देने का ऑर्डर दिया तो वह कथित तौर पर भारत भाग गया। मीनाक्षी ने आरोप लगाया है कि कोलकाता की गली से उठकर योग के जरिए यहां तक पहुंचा बिक्रम अपने छात्र को प्रशिक्षण देने के लिए 13,500 पाउंड (करीब साढ़े 11 लाख रुपए) चार्ज करता था। मीनाक्षी के मुताबिक जैसे-जैसे बिक्रम का बिजनेस बढ़ता चला गया, उसका व्यवहार और नीयत भी बदलती गई। शराब और सेक्स बिक्रम की जिंदगी का हिस्सा बन गए थे और पिछले कुछ सालों के दौरान उसने करीब 5000 महिलाओं के साथ अवैध संबंध बनाए। युवा छात्राओं पर बिक्रम की नजर हमेशा टिकी रहती थी और उसने कई लड़कियों को बहकाकर उनके साथ संबंध बनाए हैं। फिलहाल मीनाक्षी ने खुद को बिक्रम का बॉस घोषित कर दिया है। 69 वर्षीय भारतीय अमेरिकी बिक्रम चौधरी ‘बिक्रम योगा’ के संस्थापक हैं और पूरी दुनिया में हॉट योग गुरु के नाम से मशहूर हैं। 220 देशों में उनके 720 योग स्कूल हैं, जहां बिक्रम योग सिखाने जाता है। बिक्रम के फॉलोअर्स में मैडोना, डेमी मूर, बिल क्लिंटन की बेटी चेल्सी क्लिंटन और जॉर्ज क्लूनी जैसे कई हॉलीवुड, खेल और पॉलिटिक्स की दुनिया के हाई प्रोफाइल सेलिब्रिटीज शामिल हैं। बिक्रम चौधरी अपने फॉलोअर्स को 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में योग सिखाते हैं और इसे ही वह ‘हॉट योगा’ का नाम देते हैं। फोब्र्स के मुताबिक, बिक्रम एक ट्रेनिंग सेशन का 10 हजार डॉलर लेते हैं। 20 हजार डॉलर में पर्सनल ट्रेनिंग देते हैं। बिक्रम बीते साल अक्टूबर में कॉपीराइट केस हार गए थे। इसमें 26 पोज और तीन ब्रीथ एक्सरसाइज थे। बिक्रम की प्रॉपर्टी में जिन 43 लग्जरी कारों का जिक्र है, कोर्ट ने उनके बारे में भी जानकारी मांगी है। मीनाक्षी ने कोर्ट को बताया है कि बिक्रम की प्रॉपर्टी में उसकी 43 लग्जरी कारें भी हैं, जो गुम हैं। बिक्रम की प्रॉपर्टी में शामिल कारें, जिनमें 13 रॉल्स रॉयस, 8 वेंटले और तीन फेरारी शमिल हैं। अमेरिकी कोर्ट ने बिक्रम के गैरेज मैनेजर को समन जारी कर जवाब मांगा था लेकिन उसने कहा है कि इस बारे में वह कुछ नहीं जानता। मीनाक्षी का आरोप है कि कोर्ट के ऑर्डर के बावजूद बिक्रम ने अपनी प्रॉपर्टी छिपा ली और अब वह अमेरिका छोडक़र भाग चुका है लेकिन उन्हें विश्वास है कि न्याय होकर रहेगा। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी में मचा घमासान फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है। सोमवार को मुलायम अपना दुखड़ा लेकर दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचे तो आज बेटे अखिलेश की तरफ से साइकिल पर दावा ठोकने के लिए चाचा प्रोफेसर रामगोपाल यादव पहुंचे। इस बीच मंगलवार को दोनों धड़े में सुलह की एक और कोशिश नाकाम हो गई जब मुलायम और आजम खान के बीच होने वाली मीटिंग भी रद्द हो गई। आजम से मिले बिना ही मुलायम लखनऊ के लिए रवाना हो गए। बाद में यूपी के कैबिनेट मंत्री और सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान ने कहा, ‘मेरी भी अपनी सीमाएं हैं। मेरा मकसद था कि अखिलेश का निलंबन वापस हो जाए, इसमें कामयाबी मिली। माइनोरिटी वोट यह नहीं चाहेगा कि सपा सत्ता से जाए। मायूसी तो है, फिकरमंदी भी है, लेकिन अभी समय है। मैं आगे भी कोशिश करूंगा। अभी सब कुछ संभव है।’ उन्होंने कहा कि सुलह की कोशिश जारी रहेगी, सभी दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि सपा में सबकुछ हो सकता है, लेकिन जुदाई नहीं। उन्होंने कहा कि मुसलमान सपा के साथ हैं। चिट्ठी पर मुलायम सिंह के हस्ताक्षरों को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर उन्होंने कहा, ‘दो दस्तखत हैं, एक शॉर्ट फॉर्म में, एक फुल फॉर्म में। कहने वाले तो कुछ भी कहते हैं।’ चुनाव में किसको फायदा होगा, मुलायम को या अखिलेश को? इस सवाल पर आजम ने कहा कि चुनाव अभी बहुत दूर हैं, इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। बता दें कि इससे पहले जब मुलायम ने अखिलेश और रामगोपाल यादव को 6 साल के लिए पार्टी से बाहर निकाल दिया, तो अगले ही दिन आजम नेताजी से मिलने के लिए उनके आवास पर पहुंचे। उसके बाद सुलह की कोशिश तेज हुई, जिसके तहत वह अखिलेश को लेकर मुलायम के पास आए और शिवपाल सिंह को भी वहां बुलाया गया। करीब एक घंटे चली बैठक के बाद शिवपाल ने अखिलेश और रामगोपाल के निष्कासन को रद्द करने का ऐलान किया। लेकिन बात तब और बिगड़ गई जब रामगोपाल के लखनऊ में बुलाए गए राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुलायम को मार्गदर्शक बना दिया गया। शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया दिया गया और अमर सिंह को पार्टी से निकाल दिया गया। इसके बाद उसी दिन, एक जनवरी को मुलायम ने फिर रामगोपाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया। साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी में चल रहे दंगल के बीच आज पीएम मोदी की रैली है। रमाबाई आंबेडकर मैदान में आज बीजेपी की परिर्वतन रैली है। इस रैली को पीएम मोदी संबोधित करेंगे। बीजेपी का दावा है कि यह अब तक की सबसे बडी रैली होगी। इस रैली में 8 से 10 लाख लोगों के आने का अनुमान है।  इस महारैली में पीएम मोदी विपक्ष पर निशाना साधेंगे। साथ ही नोटबंदी के मुद्दे पर भी बोल सकते हैं। इस महारैली में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, ओम माथुर, केशव मौर्य, स्मृति इरानी, उमा भारती, कलराज मिश्र सहित यूपी कोटे के सभी मंत्रियों के अलावा कई और दिग्गज भी मौजूद रहेंगे।  बीजेपी ने प्रशासन को 10 हजार बसों, 50 हजार छोटे वाहनों और 8-10 लाख लोगों के आने की सूचना दी गई है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि इस महारैली में भीड काफी होने वाली है। रैली को लेकर पार्टी नेता और कार्यकर्ता जोर-शोर से तैयारियों में जुटे हुए हैं। प्रदेश में पार्टी के 1.28 लाख बूथों में से प्रत्येक बूथ से न्यूनतम 10 कार्यकर्ताओं को लाने को कहा गया है। पीएम की रैली को इसलिए भी महत्तवपूर्ण माना जा रहा है कि यूपी में चुनाव होने वाले हैं। पीएम इस मौके पर यूपी चुनाव के लिए बीजेपी के अजेंडे का खाका भी खींचेंगे, जिसे कार्यकर्ता नीचे तक ले जा सकें। आईटी सेल 250 से अधिक लैपटॉप्स के जरिए रैली का डिजिटल प्रसारण वेब और सोशल मीडिया पर करेगी। साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी उनसे जुडी हुई है और उन्हें लोगों का भरपूर समर्थन प्राप्त है। मुलायम ने मीडिया से कहा कि उन्होंने बेदाग जीवन जीया है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें क्लीन चिट दे दी है। मुलायम सोमवार को नई दिल्ली पहुंचे। वह दिल्ली में निर्वाचन आयोग जाकर पार्टी के चुनाव चिह्न् साइकिल पर दावा पेश करेंगे। मुलायम के छोटे भाई और सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि वह हमेशा अपने भाई के साथ रहेंगे। शिवपाल ने कहा, मैं हमेशा नेताजी के साथ रहा हूं और अपनी आखिरी सांस तक उनके साथ रहूंगा। उन्होंने कहा कि मुलायम अब भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और रहेंगे। हालांकि, उन्होंने यह बताने से इनकार किया कि वह कितने बजे तक निर्वाचन आयोग के कार्यालय पहुंचेंगे। उल्लेखनीय है कि पार्टी दो धड़ों में बंट गई है, जिनमें से एक की अगुवाई मुलायम और दूसरे की मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव कर रहे हैं। सपा में मचे घमासान के बीच रविवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गुट ने शिवपाल यादव को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया था। रामगोपाल यादव की ओर बुलाए पार्टी के आपात विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया था, जबकि मुलायम को पार्टी का सर्वोच्च नेता मानते हुए मार्गदर्शक का दर्जा दिया गया। अधिवेशन में अमर सिंह को सपा से निकालने का फैसला भी लिया गया। इसके बाद कुछ ही घंटों के भीतर मुलायम सिंह ने पलटवार करते हुए राज्यसभा सदस्य रामगोपाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया। मुलायम ने इसके साथ ही अन्य राज्यसभा सदस्यों नरेश अग्रवाल और पार्टी के उपाध्यक्ष किरणमय नंदा को भी पार्टी से निकाल दिया। साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । यूपी में समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह और सीएम अखलेश यादव टिकट बंटवारे को लेकर आमने सामने हैं। गौरतलब है कि टिकट की इस लडाई में कल पिता मुलायम ने बेटे अखिलेश को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा गया। इसके बाद कई पार्टियां अखिलेश को समर्थन देने की बात कर रही हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस ने भी अखिलेश के समर्थन की बात कही है। ज्ञातव्य है कि अखिलेश भी कांग्रेस के साथ गठबंधन की बात करते रहे हैं।  ज्ञातव्य है कि अखिलेश ने कहा था कि अगर कांग्रेस के साथ गठबंधन होता है तो 300 से ज्यादा सीटें लेकर आएंगे। लेकिन अब तो खेल ही पलट गया है। अखिलेश को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।  ऐसे में ममता बनर्जी ने भी अखिलेश को सपोर्ट किया है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने शनिवार सुबह अखिलेश यादव को फोन किया। ममता बनर्जी ने अखिलेश को फोन कर कहा कि आप डटे रहो हम आपके साथ हैं। ममता ने कहा कि यूपी में सरकार चाहे किसी की भी बने लेकिन भाजपा को एक भी वोट नहीं मिलना चाहिए। वहीं बसपा के सुधींद्र भदौरिया का कहना है कि यह पूरी लडाई महज पैसों के बंदरबाट को लेकर है, जो कि उन्होंने बीते चार साल की सरकार में लूटे हैं।  साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । समाजवादी दंगल में अब एक नया मोड आ गया है। आज अखिलेश और मुलायम सिंह ने अपने विश्वस्त विधायकों के साथ बैठकें की। इसमें भी अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह पर भारी पडे। जहां अखिलेश की बैठक में 200 विधायक पहुंचे तो मुलायम की बैठक में सिर्फ 18 विधायक ही पहुंचे। इसके बाद स्पष्ट हो गया कि विधायकों का बहुमत अखिलेश के साथ है। बैठक के बाद अखिलेश अपने पिता और पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह से मिलने पहुंचे।  अखिलेश के साथ आजम खान भी मुलायम से मिलने के लिए पहुंचे। मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार अखिलेश ने मुलायम से अमर सिंह को पार्टी से बाहर निकालने की मांग की है। इन सब घटनाक्रम के बीच समाजवादी पार्टी की ऑफिशियल वेबसाइट से अखिलेश यादव के निलंबन पत्र को हटा लिया गया है।  साथ ही रामगोपाल यादव के निलंबन पत्र को भी हटा दिया गया है। इतना ही नहीं वेबसाइट से शिवपाल का नाम भी हटा दिया गया है। गौरतलब है कि टिकट बंटवारे को लेकर हुए दंगल के बीच कल शाम को मुलायम सिंह ने अखिलेश यादव और मुलायम सिंह को पार्टी से 6 साल के लिए निलंबित कर दिया था। गौरतलब है कि टिकट बंटवारे में अखिलेश की कोई सलाह नहीं ली गई। मुलायम सिंह ने जब उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की तो उसमें से अखिलेश के करीबियों के टिकट काट दिए गए।  इसके बाद अखिलेश ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। इसके बाद विवाद ज्यादा बढ गया। मुलायम ने कल अखिलेश को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया। इस नोटिस में पूछा गया कि अखिलेश ने किस हक से लिस्ट जारी की।   साभार-khaskhabar.com  

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