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अमृतसर । हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए नवजोत सिंह सिद्धू आज अमृतसर पहुंचे। यहां कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और सिद्धृ के समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। अपनी हाजऱिजवाबी के लिए मशहूर पूर्व क्रिकेटर सिद्धू को कांग्रेस की ओर से अमृतसर ईस्ट से चुनावी मैदान में उतारा गया है। अमृतसर में सिद्धी समर्थकों से घिरे नजर आए और सिद्धू-सिद्धू के नारे लगाए गए। एयरपोर्ट पर मिसेज नवजोत कौर सिद्धू भी नजर आई। वहीं, समर्थकों की भारी भीड देखने को मिली।  इससे पहले सोमवार को नवजोत सिंह सिद्धू ने औपचारिक तौर पर कांग्रेस का हाथ थामा और पंजाब सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में पंजाबियत की जीत होगी। इस दौरान सिद्धू ने बादल सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए। इतना ही नहीं सिद्धू ने खुद को पैदाइशी कांग्रेसी भी बताया था। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज ने सितंबर, 2016 में बीजेपी से इस्तीफा दे दिया, और फिर उनकी पत्नी ने भी। इसके बाद जनता में लोकप्रिय माने जाने वाले दोनों नेताओं ने पहले कुछ समय तक आम आदमी पार्टी के साथ बातचीत की, लेकिन वहां बात नहीं बनने पर फिर कांग्रेस में शामिल हो गए। कहा जा रहा है कि सौदेबाज़ी इस बात पर केंद्रित रही थी कि अगर कांग्रेस चुनाव जीत जाती है, तो नवजोत सिंह सिद्धू को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा, और उनकी पत्नी को अमृतसर से लोकसभा के लिए चुनाव लड़ाया जाएगा। वैसे राहुल गांधी से सिद्धू की मुलाकात के बाद ये साफ हो गया था कि गुरु अब किसका हाथ थामने जा रहे हैं। सिद्धू को लग रहा है कि कम से कम पंजाब के लिए तो अब उनका ही वक्त है। पंजाब में विधानसभा की कुल 177 सीटें हैं। कांग्रेस ने कल ही पार्टी में शामिल हुए दिग्गज क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को अमृसर ईस्ट सीट से मैदान में उतारा है। अमृतसर ईस्ट सीट से अब तक सिद्धू की पत्नी चुनाव लड़तीं रहीं हैं। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । चुनाव आयोग ने कहा है कि चुनाव चिन्ह साइकिल पर अखिलेश यादव का हक है। आयोग ने अखिलेश को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष माना है। ये फैसला आयोग ने सोमवार को दिया है।  आयोग ने 40 पेज का अपना फैसला सुनाया है। फैसले के अनुसार अखिलेश यादव के पास विधायी सत्ता है व विधायकों का समर्थन प्राप्त है।चुनाव आयोग ने माना कि 200 विधायक, एमएलसी अखिलेश गुट में हैं तथा 5000 कार्यकर्ताओं के हलफनामे दिए गए हैं। इस तरह मुलायम का ये दावा कमजोर पड गया कि पार्टी उन्होंने बनाई है व चिन्ह पर भी उनका ही हक है।  यूपी चुनाव के लिए मंगलवार से परचे भरे जाएंगे व अब तय है कि अखिलेश गुट ने जिन लोगों को प्रत्याशी घोषित किया है वे साइकिल चुनाव चिन्ह पाएंगे। मुलायम सिंह यादव को गत दिनों एक विशेष अधिवेशन में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से बेदखल करने का ऎलान करने वाले राज्यसभा सांसद व मुलायम के भाई रामगोपाल यादव ने इस फैसले का स्वागत किया है व चुनाव आयोग का आभार जताया है। इस फैसले के बाद अखिलेश समर्थकों में भारी उत्साह देखा गया और लोगों ने पार्टी दफ्तर के बाहर जश्न मनाना शुरू कर दिया। अब यह संभावना जताई जा रही है कि शीघ्र ही कांग्रेस के साथ अखिलेश चुनावी गठबंधन की घोषणा कर सकते हैं। अटकलें हैं कि अखिलेश की पत्नी और सपा सांसद डिंपल यादव तथा कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी वाड्रा साथ मिलकर चुनाव प्रचार कर सकती हैं। चुनाव आयोग के फैसले के बाद अखिलेश के करीबी रामगोपाल यादव ने भी इस बात के संकेत दिए। रामगोपाल ने मुलायम सिंह यादव पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया लेकिन कांग्रेस के साथ गठबंधन के संकेत दे दिये। रामगोपाल ने कांग्रेस के साथ गंठबंधन को लेकर संकेत दिये कि संभव है कि उनके साथ गठबंधन हो। उन्होंने कहा, हां उम्मीद है कि गठबंधन होगा। इससे पहले सोमवार दिन में मुलायम सिंह ने कहा था कि अखिलेश उनकी एक नहीं सुनते हैं। शुक्रवार को अखिलेश और मुलायम सिंह यादव के वकीलों ने चुनाव आयोग में अपना अपना पक्ष रखा था।  अखिलेश यादव के वकील कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को चुनाव आयोग के आगे दलील दी थी कि पार्टी के संगठन के साथ सांसद, विधायक और एमएलसी अखिलेश के साथ हैं, इसलिए नियमों के अनुसार असली समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव के नेतृत्व में ही कही जाएगी।  उधर, मुलायम सिंह यादव के वकीलों ने अखिलेश यादव की ओर से पेश किए गए सांसदों और विधायकों के समर्थन के दस्तावेजों पर ही सवाल उठाए थे। साथ ही रामगोपाल यादव की ओर से बुलाए गए उस सम्मलेन पर भी सवालिया निशान उठाया गया था, जिसमें अखिलेश को पार्टी सुप्रीमो चुना गया। इससे पूर्व की लखनऊ की खबर के अनुसार... समाजवादी पार्टी की ‘साइकिल’ किसी को मिलेगी या इसे फ्रीज कर दिया जाएगा, इस पर चुनाव आयोग का फैसला कुछ ही घंटों में आ सकता है। अखिलेश के प्रति कभी नरम, तो कभी गरम दिखने वाले मुलायम सिंह यादव ने ‘साइकिल’ का फैसला होने से ठीक पहले बेटे के खिलाफ तीखा हमला बोला है। मुलायम ने सोमवार को अखिलेश के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें मुस्लिम विरोधी तक कह दिया। अपनी अनदेखी का आरोप लगाते हुए मुलायम ने यह भी कहा कि अखिलेश बीवी-बच्चों की कसम देने पर मिलने आए और बात सुने बिना एक मिनट में ही उठकर चले गए। लखनऊ में सपा के दफ्तर में मुलायम सिंह पार्टी कार्यकर्ताओं से मिले, तो कुछ कार्यकर्ता रोते हुए बोले- नेताजी पार्टी बचा लीजिए। इस पर मुलायम ने कहा- मैंने बहुत कोशिश की, अखिलेश मेरी नहीं सुनते। मुलायम ने कार्यकर्ताओं से कहा, ‘ मैंने अपनी तरफ से हर कोशिश की, अपना पक्ष रखा दिया है। अब 4 बजे के पहले चुनाव आयोग का फैसला आएगा। मैंने कई कोशिश की है। तीन बार अखिलेश को बुलाया, लेकिन मुझे बिने सुने उठकर चला गया। चुनाव आयोग जो फैसला करेगा, स्वीकार होगा, आप लोग मेरा साथ देंगे।’ मेरा बेटा दूसरे के हाथों खेल रहा है मुलायम ने कहा, ‘मैंने कई बार बात करने के लिए अखिलेश को बुलाया, लेकिन वह नहीं आया। जब बीवी-बच्चों की कसम खिलायी तब आये। एक बार आया तो बात शुरू करने से पहले ही चला गया। अखिलेश हमारा बेटा है, लेकिन हमको नहीं मालूम था कि वह विरोधियों से मिल जाएगा। मेरा बेटा दूसरे के हाथों में खेल रहा है, रामगोपाल के इशारे पर काम कर रहा है। रामगोपाल ने पार्टी को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आप से अपील है कि आप मेरा साथ दें। सिंबल जो भी हो, आप मेरा साथ दें।’ उन्होंने कहा कि जनता के बीच संदेश गया है कि अखिलेश मुसलमान विरोधी हैं, उनके प्रत्याशियों की सूची में मुसलमान कम हैं। इस बीच कार्यकर्ताओ ने पार्टी बचाओ के नारे लगाने शुरू किए, तो मुलायम ने उन्हें डांट कर चुप कराया। पार्टी के कोर वोट बैंक माने जाने वाले मुस्लिमों का जिक्र करते हुए मुलायम ने कहा कि अखिलेश की छवि मुस्लिम विरोधी है। उन्होंने कहा, ‘अखिलेश की लिस्ट में मुस्लिम प्रत्याशी कम हैं। जनता के बीच सन्देश गया है कि अखिलेश मुसलमान विरोधी है। अखिलेश ने कई मंत्रियो को बेवजह पार्टी से निकाला।’ अखिलेश के खिलाफ लड़ाई की बात कहते हुए मुलायम ने कहा, ‘मैं पार्टी और साइकिल बचाने की पूरी कोशिश कर रहा हूं। अगर वह (अखिलेश) नहीं सुनता है तो मैं उसके खिलाफ लड़ाई लडूंगा।’ साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी मेंपिता-पुत्र के बीच चुनाव चिह्न साइकिल पर चल रहे दंगल पर चुनाव आयोग आज अपना फैसला सुना सकता है। गौरतलब है कि शुक्रवार को चुनाव आयोग में दोनों पक्षों ने चुनाव चिह्न साइकिल पर अपने अपने दावों को लेकर दलीलें की। मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी की अगुवाई में आयोग ने शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनी थीं और अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।  अब आज चुनाव आयोग इस पर अपना फैसला दे सकेता है। हांलांकि अभी तक चुनाव आयोग की तरफ से कोई बैठक बुलाने की सूचना नहीं हे। गौरतलब है कि नियम के मुताबिक चुनाव आयोग को फैसला लेने के लिए आयोग की फुल कमिशन की बैठक बुलानी होगी। आमतौर पर चुनाव आयोग की यह बैठक मंगलवार और शुक्रवार को ही होती है।  यूपी में कल से शुरू होंगे नामांकन:  ज्ञातव्य है कि यूपी में सात चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की शुरूआत कल 17 जनवरी से होने वाली है। ऐसे में संभव है कि चुनाव आयोग आज सपा के चुनाव चिह्न साइकिल पर अपना फैसला चुना दे।  जब्त हो सकता सपा का चुनाव चिह्न साइकिल:  जानकारों का मानना है कि चुनाव आयोग सपा के चुनाव चिह्न साइकिल को जब्त कर दोनों गुटों को अलग अलग चुनाव चिह्न दे सकता है। ऐसा पहले भी हो चुका है जब दो गुटों में चुनाव चिह्न को लेकर तकरार हुई और चुनाव आयोग ने उस चुनाव चिह्न को जब्त कर दोनों गुटों को अलग अलग चुनाव चिह्न दिए।  साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । कांग्रेस में शामिल होने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू पहली बार मीडिया से मुखातिब हुए। गौरतलब है कि नवजोत सिंह सिद्धू कल रविवार को दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की और कांग्रेस में शामिल हो गए। सिद्धू ने आज एक प्रेस कांफ्रेस कर कहा कि मैं तो पैदाइशी कांग्रेस हंू, ये तो मेरी घर वापसी हुई है। सिद्ध ने कहा कि मेरा कांग्रेस से पुराना नाता है। सिद्धू ने कहा कि यह पंजाब में अस्तित्व की लडाई है। बादल परिवार पर हमला बोलते हुए सिद्धू ने कहा कि बादल परिवार में पंजाब को खोखला कर दिया है।  बीजेपी पर निशाना: साथ ही सिद्धू ने बिना नाम लिए बीजेपी पर निशाना साधा। सिद्धू ने बीजेपी को कैकयी जैसी मां करार दिया। सिद्धू ने कांग्रेस में शामिल होने पर कहा कि मैं अपनी जडों में लौट आया हूं। मेरे पिता सरकार भगवंत सिंह सिद्धू कांग्रेस में 40 साल रहे, एमएलए बने, एमएलसी बने। उन्हें सजा-ए-मौत दी गई थी। ये मेरी घरवापसी है। बीजेपी पर हमला बोलते हुए सिद्धू ने कहा कि कुछ लोग टिप्पणी करते हैं, असर नहीं है। सिद्धू ने कहा कि मैं पार्टी को मां बोलता था, पर माता तो कैकयी भी थी, जो वनवास पर भेजती थी... घर से बाहर भेजती थी... माता कौशल्या वापस बुलाती थी। साथ ही सिद्धू ने इशारों इशारों में बीजेपी नेता अरूण जेटली को मंथरा बताया। बादल परिवार पर निशाना: प्रेस कांफ्रेस के दौरान सिद्धू ने बादल परिवार पर भी हमला बोला। सिद्धू ने कहा कि बादल परिवार ने पंजाब को खोखला कर दिया। साथ ही सिद्धृू ने कहा कि यह मेरी निजी लडाई नहीं, पंजाब के स्वाभिमान की लडाई है। सिद्धू ने कहा कि पंजाब के हालात पर फिल्म बन रही है लेकिन बादल परिवार को नहीं दिखता। सिद्धू ने कहा कि पंजाब की आबादी में आज 55 फीसदी युवा हैं। सिद्धू ने कहा कि पंजाब के युवाओं को बर्बाद किया जा रहा है। पंजाब के युवाओं को दिशा देने की जरूरत है। सिद्धू ने कहा कि जो पंजाब हरित क्रांति के लिए जाना जाता था, आज सफेद चिट्टे के लिए जाना जाता है। ड्रग्स पंजाब की हकीकत है आज। सिद्धू ने बादल को ललकारते हुए कहा कि भाग बाबा बादल भाग जनता आती है। साथ ही सिद्धू ने कहा कि रणभूमि में लड़ूंगा, कभी पीठ नहीं दिखाऊंगा, मेरा कोई पर्सनल अजेंडा नहीं है, मैं पंजाब की तरफ हूं। आगे सिद्धू ने कहा कि यह मेरी निजी लड़ाई नहीं है, यह पंजाब की मुक्ति की लडाई है। साथ ही सिद्धू ने कहा कि मैं सबके चि_े खोल दूंगा, सबकी पोल खोलूंगा। सिद्धू ने कहा कि मुझे बीजेपी से कोई ऐतराज नहीं था, मुझे गठबंधन पर ऐतराज था। सिद्धू ने कहा कि बीजेपी ने गठबंधन को चुना और मैनें कांग्रेस को। साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । रविवार को मायावती 61 साल की हो गई हैं। अपने जन्मदिन पर करोडों रुपये की माला पहनने से सुर्खियों में आई मायावती इस बार बेहद ही सादे तरीके से अपना जन्मदिन मना रही है। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मेरा जन्मदिन सपा की तरह शाही अंदाज में नहीं होता, मैंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से सादगी के साथ जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए कहा है।  अमूमन अपने जन्मदिन को बड़े स्तर पर मनाने वाली मायावती ने इस बार कोई रैली नहीं की, उन्होंने लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस करके समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा गुंडे बदमाशों की पार्टी मानी जाती है, जिसके कारण प्रदेश में जंगलराज ही चलता रहा है जो आज भी बरकरार है। सपा के राज में मुजफ्फरनगर दंगे हुए, अखलाक की हत्या हुई है. ऐसे में आप कैसे सपा को वोट देंगे। मायावती ने बीजेपी पर निशान साधते हुए कहा कि बीजेपी के खिलाफ जनता में गुस्सा है।नोटबंदी के 50 दिन से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी पीएम यह नहीं बता पा रहे हैं कि इससे कितना काला धन पकड़ा गया है। नोटबंदी का फैसला राजनीतिक स्वार्थ के लिए लिया गया, अब उत्तर प्रदेश में जनता बीएसपी को सत्ता में लाने का निश्चय कर चुकी है। अगर बीजेपी बीएसपी की अध्यक्ष और उनके परिवार की संपत्ति का ब्योरा चाहती है, तो सबसे पहले बीजेपी अपने नेताओं की संपत्ति का खुलासा करें।  गौरतलब है कि मायावती अपना जन्मदिन जन-कल्याण दिवस के रूप में मनाती हैं लेकिन इस बार आचार संहिता लगे होने की वजह से है उन्होंने अपने जन्मदिन समारोह से उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड को अलग रखा है। मायावती साल 2010 में जन्मदिन के दिन नोटों की माला पहनने से विवादों में आ गई थीं। बता दे कि मायावती साल 1995 में पहली बार मायावती मुख्यमंत्री बनीं और तब से आज तक 4 बार यूपी की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। राजनीति में आने से पहले वह एक टीचर थीं और आईएएस की तैयारी कर रही थीं। उन्हें कांशीराम राजनीति में लाए थे। बीएसपी में आने के बाद मायावती ने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा और 4 बार सीएम रहने के बाद अब पांचवी बार अकेले दम पर उत्तर प्रदेश विधानसभा में जोर आजमा रही हैं। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । बीजेपी चुनाव समिति की आज दिल्ली में बैठक है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अगले माह होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बीजेपी आज उम्मीदवारोंकी पहली सूची जारी कर सकती है। बीजेपी इससे पहले पंजाब और गोवा में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर चुकी है। दोनों ही राज्यों में एक चरण में चार फरवरी को चुनाव होने हैं। बीपेपी ने पंजाब में 17 सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया गया है। वहीं, गोवा में बीजेपी ने 29 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान किया है। पंजाब में विधानसभा की कुल 117 सीटें हैं, जबकि गोवा में विधानसभा की कुल 40 सीटें हैं। यूपी में सात चरणों में चुनाव होने वाले है। पहला चरण में 15 जिलों की 73 सीटों पर 11 फरवरी को वोटिंग होगी। दूसरे चरण में 11 जिलों की 67 सीटों पर 15 फरवरी को वोटिंग होगी। तीसरें चरण में 12 जिलों की 69 सीटों पर 19 फरवरी को वोटिंग होगी। चौथे चरण में 12 जिलों की 53 सीटों पर 23 फरवरी को वोटिंग होगी। पांचवें चरण में 11 जिलों की 52 सीटों पर 27 फरवरी को वोटिंग होगी। छठें चरण में सात जिलों की 49 सीटों पर चार मार्च को वोटिंग होगी। सातवें चरण में सात जिलों की 40 सीटों पर आठ मार्च को वोटिंग होगी। उत्तराखंड में राज्य की सभी 70 सीटों पर चुनाव 15 फरवरी को कराए जाएंगे। चुनावों का नोटिफिकेशन 20 जनवरी 2017 को जारी होगा। वहीं नॉमिनेशन की आखिरी तारीख 27 जनवरी होगी। 28 तारीख को नामों की छंटाई होगी। 11 मार्च को सभी राज्यों के वोटों की गिनती एक साथ की जाएगी। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बयान को लेकर बीजेपी ने आपत्ति जताई है और इसके खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। बीजेपी ने शुक्रवार को चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है कि राहुल गांधी ने चुनाव आचार संहिता उल्लंघन किया है, साथ ही राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का भी उल्लंघन किया है जिसमें कहा गया था कि धर्म और जाति के नाम पर कोई भी नेता वोट नहीं मांग सकता।  गौरतलब है कि राहुल गांधी ने कथित तौर पर अपने बयान में कांग्रेस के चुनाव चिह्न हाथ को कई धर्मों के भगवानों से जोडा था। बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी ने यह बयान 11 जनवरी को आयोजित जन वेदना सम्मेलन में दिया था। चुनाव आयोग में दर्ज कराई गई शिकायत में बीजेपी ने कहा है, राहुल गांधी ने धर्म से जुडी बात करते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के चिह्न हाथ को शिव, गुरु नानक, बुद्ध, इस्लाम और महावीर से जोडा था। बीजेपी का आरोप है कि राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा है कि जब वह इन भगवानों की तस्वीरों की ओर देखते हैं तो उन्हें कांग्रेस का चुनाव चिह्न हाथ नजर आता है। बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी का बयान आचार संहिता का उल्लंघन है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अव्हेलना भी। बीजेपी का आरोप है कि राहुल ने यह बयान जानबूझकर कांग्रेस को लोगों की धार्मिक भावनाओं से जोडने के मकसद से दिया है। पार्टी ने शिकायत के साथ राहुल के बयान की सीडी भी आयोग को सौंपी है।  साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के लिए आज अहम दिन है। गौरतलब है कि पिता-पुत्र के बीच चुनाव चिह्न साइकिल के लिए दंगल चल रहा है। गौरतलब है कि कल मुलायम गुट और अखिलेश गुट ने चुनाव आयोग के सामने पेश होकर चुनाव चिह्न साइकिल पर अपना-अपना पक्ष रखा। चुनाव चिह्न साइकिल पर कल चुनाव आयोग में सुनवाई भी हुई और दोनों पक्षों के बीच तकरार भी हुई। अब आज चुनाव आयोग आज इस पर अपना फैसला सुना सकता हैं। चुनाव आयोग के फैसले पर निर्भर करेगा कि इस बार मतदाताओं को यूपी चुनाव में साइकिल चुनाव चिन्ह का बटन दबाने का मौका मिलेगा या नहीं। मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार मुलायम और अखिलेश दोनों ही साइकिल की सवारी नहीं कर पाएंगे।  माना जा रहा है के चुनाव आयोग चुनाव चिह्न साइकिल को जब्त कर दोनों गुटों को अलग अलग चुनाव चिह्न आवंटित कर सकता है। गौरतलब है कि कल दोनों गुट चुनाव आयोग के सामने पेश हुए और साइकिल पाने के लिए अपनी अपनी दलीलें दी। अखिलेश यादव की ओर से कांग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल भी चुनाव आयोग में मौजूद थे। अब देखना है कि चुनाव आयोग का फैसला किसके हक में आएगा। कौन करेगा साइकिल की सवारी। लेकिन माना जा रहा है कि अखिलेश और मुलायम दोनों में कोई भी साइकिल भी सवारी नहीं कर सकेंगे। चुनाव चिह्न साइकिल का जब्त होना लगभग तय माना जा रहा है।   साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । बाप-बेटे के दो गुटों में बंटी समाजवादी पार्टी में चुनाव चिह्न साइकिल पर दावे को लेकर चुनाव आयोग में सुनवाई शुरू हो गई है। मुलायम सिंह यादव और अखिलेश गुट की ओर से रामगोपाल यादव चुनाव आयोग पहुंच चुके हैं। अखिलेश खेमे की तरफ से किरणमय नंदा, नरेश अग्रवाल, अक्षय यादव और सुरेंद्र नागर भी पहुंचे हैं। सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच सिंबल के मसले पर वहां तकरार हुई। आयोग के बाहर मुलायम समर्थक उनके पक्ष में नारे लगा रहे हैं। आयोग में अखिलेश खेमे का पक्ष कपिल सिब्बल रखेंगे। उल्लेखनीय है कि आज चुनाव आयोग में ट्राइब्युनल की तर्ज पर मामले की सुनवाई हो रही है। सुनवाई के दौरान तीनों चुनाव आयुक्तों के साथ चुनाव आयोग के कानूनी सलाहकार भी मौजूद रहेंगे। इस दौरान दोनों पक्षों से अपनी बात सबूतों के आधार पर रखने को कहा जाएगा। मामले की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा सकती है। इससे पहले मुलायम सिंह यादव ने अपने पक्ष में आयोग को मुख्य रूप से तीन दस्तावेज दिए हैं- 1. समाजवादी पार्टी का संविधान, 2. रामगोपाल यादव की बर्खास्तगी की चि_ी और तीसरा एक पत्र जिसमें कहा गया है कि रामगोपाल ने जो सम्मेलन बुलाया, वह असंवैधानिक है। उधर जवाब में दूसरे पक्ष के याचिकाकर्ता रामगोपाल यादव (अखिलेश यादव के खेमे से) ने आयोग से कहा है कि सम्मेलन बुलाने के लिए उन्हें अधिकृत किया गया था। 55 प्रतिशत सदस्यों ने सम्मेलन के लिए सहमति दी थी जबकि संविधान के मुताबिक 40 प्रतिशत से अधिक सदस्य लिखित में दें तो पार्टी संविधान के हिसाब से आपात अधिवेशन बुलाया जा सकता है। साथ ही रामगोपाल यादव ने 200 से अधिक विधायकों और 15 से अधिक सांसदों के समर्थन की चि_ी भी दी है। इस बात की संभावना भी है कि अगर आयोग दोनों पक्षों की दलीलों से संतुष्ट नहीं होता है या दोनों की दलीलों में दम लगता है तो वह चुनाव चिह्न को जब्त भी कर सकता है। ऐसे में दोनों ही पक्षों को अगले चुनाव में साइकिल के अलावा कोई और चुनाव चिह्न लेना होगा। रामगोपाल का घर बना वॉर रूम अखिलेश खेमे के नेता दिल्ली में कैंप कर रहे हैं। चुनाव आयोग में जवाब देने से पहले रामगोपाल यादव का घर अखिलेश खेमे के लिए वॉर रूम बना हुआ है। रामगोपाल यादव के दिल्ली के लोधी एस्टेट हाउस पर सपा के सांसद और अन्य नेता लगातार पहुंच रहे हैं। मुलायम से दावा वापस लेने की अपील इससे पहले, सपा के वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल ने मुलायम सिंह से अपील की है कि वह साइकिल से दावा वापस ले लें। अग्रवाल ने मुलायम से अपील की है कि वह चुनाव आयोग में पीछे हट जाएं और अखिलेश को आशीर्वाद दें। उन्होंने कहा है, ‘हर पिता चाहता है कि उनका बेटा आगे बढ़े और अखिलेश तो सितारा है। नेताजी ऐसा करेंगे तो उनका सम्मान और कद ऊंचा रहेगा और हम सब एक रहेंगे।’ इससे पहले मुलायम सिंह ने नरम रुख दिखाते हुए अखिलेश को ही पार्टी के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की बात कही थी। साभार-khaskhabar.com  

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अहमदाबाद । वाइब्रेंट गुजरात समिट में गुरुवार को 14 साल का एक किशोर एक ड्रोन को लेकर चर्चा का विषय बना गया। आंखों पर ऐनक और नीले रंग के सूट में स्मार्ट लग रहे हर्षवर्धन जाला ने इस ड्रोन के प्रॉडक्शन के लिए सरकार के साथ 5 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर किया। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि ही वह चीज थी, जिसने उसे चर्चा का विषय बना दिया। हर्षवर्धन ने गुजरात सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के साथ ऐसे ड्रोन तैयार करने के लिए करार किया है जिसकी मदद से युद्ध के मैदानों में लगे लैंड माइंस का पता लगाया जा सकेगा और ड्रोन की मदद से ही उनको निष्क्रिय भी किया जा सकेगा। 10वीं के छात्र हर्षवर्धन उम्र के उस पड़ाव में अपने बिजनस प्लान पर काम कर रहे हैं और ड्रोन का तीन नमूना बनाया है, जब उनकी उम्र के बच्चे बोर्ड एग्जाम को लेकर चिंतित हैं। हर्षवर्धन ने बताया कि उन्होंने लैंडमाइन का पता लगाने वाले ड्रोन के नमूने पर 2016 में ही काम शुरू कर दिया था और बिजनस प्लान भी बनाया था। उनको यह ड्रोन बनाने का आइडिया कैसे आया, इस बारे में हर्षवर्धन ने बताया, ‘यह आइडिया उस समय आया जब मैं टेलिविजन देख रहा था और पता चला कि हाथ से लैंडमाइन को निष्क्रिय करते वक्त बड़ी संख्या में सैनिक जख्मी होकर दम तोड़ देते हैं।’ उन्होंने अब तक ड्रोन के नमूने पर करीब 5 लाख रुपये खर्च किया है। पहले दो ड्रोन के लिए उनके अभिभावक ने करीब 2 लाख रुपये खर्च किया जबकि तीसरे नमूने के लिए राज्य सरकार की ओर से 3 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है। हर्षवर्धन ने बताया, ‘ड्रोन में मैकेनिकल शटर वाला 21 मेगापिक्सल के कैमरे के साथ इंफ्रारेड, आरजीबी सेंसर और थर्मल मीटर लगा है। कैमरा हाई रिजॉलूशन की तस्वीरें भी ले सकता है।’ ड्रोन जमीन से दो फीट ऊपर उड़ते हुए आठ वर्ग मीटर क्षेत्र में तरंगें भेजेगा। ये तरंगें लैंड माइंस का पता लगाएंगी और बेस स्टेशन को उनका स्थान बताएंगी। ड्रोन लैंडमाइन को तबाह करने के लिए 50 ग्राम वजन का बम भी अपने साथ ढो सकता है। उनके पिता प्रद्युमनीष जाला नरोडा की एक प्लास्टिक कंपनी में अकाउंटेंट हैं जबकि उनकी माता निशाबा जाला गृहिणी हैं। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । बीएसएफ के जवान तेज बहादुर यादव इन दिनों काफी सुर्खियों बटोर रहे है। खराब खाना परोसे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर डालकर बीएसएफ और सरकार में हडकंप बचाने वाले तेज बहादुर ने नया आरोप लगाया है। बीएसएफ जवान तेज बहादुर का कहा है कि उस पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।  बीते दिन पत्नी से बातचीत में तेज बहादुर ने यह खुलासा किया है। तेज बहादुर की पत्नी सुशीला ने कल मीडिया में ऑडियो जारी कर आरोप लगाया है कि बीएसएफ जांच का दिखावा कर रही है और तेजबहादुर पर आरोप वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। तेजबहादुर की पत्नी ने कहा है कि अगर उनके पति को कुछ हुआ तो सरकार और बीएसएफ जिम्मेदार होगी। हालांकि अभी इन आरोपों पर अब तक बीएसएफ का पक्ष नहीं आया है। आपको बता दें कि तेज बहादुर को दूसरी यूनिट में भेज दिया गया है, जहां उसे प्लम्बर का काम दिया गया है। प्लंबर का दिए जाने पर आलोचना के बाद बीएसएफ ने कहा कि तेज बहादुर को कोई सजा नहीं दी गई है। निष्पक्ष जांच के लिए उसे अलग यूनिट में रखा गया है। तेज बहादुर के साथ न्याय होने की बात कही गई है। तेज बहादुर ने बॉर्डर पर बीएसएफ को मिलने वाले खाने की शिकायत करते हुए दो दिन पहले फेसबुक पर वीडियो डाला था। इसके बाद से ये वीडियो वायरल हो गया और पूरे देश का ध्यान बीएसएफ में खाने के मुद्दे पर पड़ा। तेज बहादुर के वीडियो के बाद सत्ता के गलियारे तक हंगामा मच गया। साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । समाजवादी पार्टी में पिता-पुत्र के बीच तकरार खत्म होने के अब कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। अब दोनों ही गुट कार्यकर्ताओं और समर्थकों को रिझाने में लगे हैं। बुधवार को मुलायम सिंह भी कार्यकर्ताओं के बीच गए और उनसे साथ देने की अपील की। वहीं आज अखिलेश यादव भी कार्यकर्ताओ के बीच पहुंचे। साथ ही अखिलेश अपने समर्थकों के साथ मीटिंग कर रहे हैं। मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार अखिलेश अब अकेले ही चुनाव प्रचार अभियान शुरू करने की तैयारी में है। ज्ञातव्य है कि अभी मुलायम सिंह और शिवपाल दिल्ली में हैं। मुलायम और शिवपाल शुक्रवार को चुनाव आयोग के समक्ष चुनाव चिह्न साइकिल को लेकर अपना पक्ष रखेंगे। वहीं अखिलेश गुट को भी इस मामले में शुक्रवार को चुनाव आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखना है। ज्ञातव्य है कि कल मुलायम और शिवपाल दिल्ली जाने से पहले लखनऊ में पार्टी ऑफिस पहुंचे थे। वहां मुलायम सिंह कार्यकर्ताओं से मिले और उनसे कहा कि समाजवादी पार्टी बहुत संघर्ष के बाद बनी है। साथ ही उन्होनें कहा कि हमने पार्टी की एकता के लिए बहुत समय दिया है और पार्टी की एकता में कोई बाधा ना डाले। ज्ञातव्य है कि मुलायम सिंह पार्टी में झगडे का कारण रामगोपाल को मान रहे हैं। मुलायम ने एक बार फिर रामगोपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि रामगोपाल बहुत पहले से ही मोटरसाइकिल चुनाव चिन्ह के साथ अखिल भारतीय समाजवादी पार्टी बनाने में लगे थे। साथ ही मुलायम ने रामगोपाल पर बीजेपी से मिले होने का आरोप भी लगाया।   साभार-khaskhabar.com  

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