लखनऊ । उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में जारी गठबंधन के प्रयास के बीच पेंच फंस गया है। दोनों पार्टियों में सीटों के बंटवारे का विवाद हल नहीं हो पा रहा है। सपा के 209 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होते ही गठबंधन खटाई में पड़ता दिख रहा है। सपा ने कांग्रेस के टिकट पर जीते 10 विधायकों की सीटों पर भी अपने प्रत्याशी घोषित करके एक नया मोड़ ला दिया है। टीवी रिपोट्र्स के मुताबिक, शनिवार को गठबंधन को लेकर गुलाम नबी आजाद अखिलेश से मुलाकात कर सकते हैं।
उधर, कांग्रेस ने अब छोटे दलों जैसे रालोद, पीस पार्टी के साथ गठबंधन के संकेत दिए हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के लखनऊ आने पर शुक्रवार को सपा के साथ गठबंधन के ऐलान की संभावना जताई जा रही थी लेकिन इससे पहले ही सपा ने अपने 190 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी। सपा कह रही है कि जिन सीटों पर पिछले चुनावों में वह पहले-दूसरे स्थान पर रही, उन पर उसका हक बनता है और कांग्रेस बस 54 सीटों की ही हकदार है, मगर गठबंधन के लिए कांग्रेस को 84-85 सीटें तक दी जा सकती हैं। अब आज लखनऊ में गुलाम नबी आजाद और अखिलेश यादव की मुलाकात हो सकती है, और इसके बाद ही गठबंधन के सस्पेंस से परदा उठेगा।
कांग्रेस की जीती हुई सीटों पर सपा ने उतारे प्रत्याशी
दरअसल, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावना पर उस समय संदेह के बादल मंडराने लगे जब प्रदेश के सत्तारूढ़ दल ने शुक्रवार को 209 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों की सूची घोषित करदी, जिसमें आठ वे सीटें भी शामिल हैं, जिन पर कांग्रेस के विधायक हैं। 2012 में कांग्रेस की जीती हुई इन आठ सीटों में मथुरा, शामली, गंगोह, खुर्जा, हापुड़, बिलासपुर, स्वार व स्याना तथा उपचुनाव में जीती हुई देवबंद सीट शामिल हैं। इसके अलावा देवबंद से कांग्रेस विधायक माविया अली को सपा ने अपना प्रत्याशी बना लिया।
तीन सीटों स्वार से नवाब काजिम अली खान, गंगोह से प्रदीप कुमार चौधरी व स्याना से दिलनवाज खान पहले ही कांग्रेस छोडक़र दूसरे दलों में जा चुके हैं। मथुरा से प्रदीप माथुर, शामली से पंकज मलिक, खुर्जा (सुरक्षित) से बंशी सिंह पहाडिय़ा, हापुड़ (सुरक्षित) से गजराज सिंह व बिलासपुर से संजय कपूर कांग्रेस के विधायक हैं। प्रदीप माथुर कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता भी हैं। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार गठबंधन में सपा के साथ सीटों का विवाद अमेठी व रायबरेली की सीटों को लेकर भी है।
इसके अलावा सपा ने कांग्रेस की सीट रही प्रयागपुर बहराइच से उसके विधायक मुकेश श्रीवास्तव को टिकट दे दिया है। कांग्रेस यहां से अपना प्रत्याशी घोषित करना चाहती थी। वर्ष 2012 में अमेठी में दो सीटों तिलोई व जगदीशपुर (सुरक्षित) से कांग्रेस के प्रत्याशी जीते थे, जबकि रायबरेली में वह कोई सीट नहीं जीत पाई थी। कांग्रेस ने सपा के इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। सपा के उम्मीदवारों की सूची जारी करने के बाद उप्र के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता तथा राज्य प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने संकेत दिए कि चुनाव पूर्व गठबंधन की अब संभावना क्षीण है। सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने लखनऊ में संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य मकसद आगामी आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराना है। इसके लिए कांग्रेस से गठबंधन कोशिश की गई, लेकिन उसकी तरफ से अभी तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगर भाजपा को परास्त होते देखना चाहती है, तो उसे सपा के फार्मूले को मानना होगा। इस फार्मूले के तहत वर्ष 2012 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जिन सीटों पर पहले या दूसरे नंबर पर रही थी, और वे सीटें जिन पर सपा तीसरे, चौथे या पांचवें नंबर पर रही थीं, वे कांग्रेस को दे दी जाएंगी।
नंदा ने कहा कि इस हिसाब से कांग्रेस को 54 सीटें मिलनी चाहिए, लेकिन अगर वह गंभीरती से बातचीत करे तो उसे 25-30 सीटें और दी जा सकती हैं, सपा कांग्रेस को अधिकतम 85 सीटें दे सकती हैं। यह पूछे जाने पर क्या सपा द्वारा घोषित 191 सीटों में से कई वे सीटें हैं, जिन पर वर्ष 2012 के पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी जीते थे, उन्होंने कहा कि अगर गठबंधन होगा तो कांग्रेस जहां जीती हैं, वे सीटें उसे दे दी जाएंगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेठी और लखनऊ छावनी सीटें सपा अपने पास ही रखेंगी।
साभार-khaskhabar.com
Read More