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लखनऊ । कांग्रेस ने यूपी में अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में 40 नामों की घोषणा की गई है। इनमें प्रियंका गांधी का भी नाम शामिल है। गौरतलब है कि यह पहला मौका होगा जब प्रियंका गांधी अमेठी और रायबरेली के बाहर प्रचार करेगी।  प्रियंका के अलावा इस लिस्ट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मनमोहन सिंह, प्रदेशाध्यक्ष राज बब्बर और कांग्रेस के यूपी इंचार्ज गुलाम नबी आजाद का नाम भी शामिल किया गया है। ज्ञातव्य है कि यूपी में सात चरणों में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं इस बार यूपी में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन भी हुआ है। इस गठबंधन के चलते यूपी चुनाव बीजेपी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। साथ ही बीजेपी ने यूपी में अभी तक सीएम उम्मीदवार के नाम का भी ऐलान नहीं किया है। ज्ञातव्य है कि बीजेपी को पिछले विधानसभा चुनावों में 47 सीटों पर ही जीत मिली थी। आइए देखते हैं कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की पूरी लिस्ट।  साभार-khaskhabar.com  

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सुल्तानपुर । अखिलेश यादव ने अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। अखिलेश ने पहली चुनावी रैली सुल्तानपुर में की। अखिलेश ने कहा कि नेताजी ने समाजवादी पार्टी का जो घोषणा पत्र दिया, उसको हमने ईमानदारी से लागू किया। साथ ही अखिलेश ने कहा कि हमने यूपी के गांव गांव में एम्बुलेंस सेवा दी, जो कि पांच साल पहले नहीं थी। अखिलेश ने कहा कि हमने 55 लाख महिलाओं को पेंशन दी और अब 1 करोड लोगों को पेंशन देंगे। हम 1 करोड लोगों को एक हजार भत्ता हर माह देंगे।  अखिलेश ने कहा कि किसी भी सरकार ने किसानों को इतना मुआवजा नहीं दिया होगा जितना समाजवादी पार्टी ने। समाजवादी पार्टी ने किसानों को 4 गुना मुआवजा दिया। साथ ही अखिलेश ने कहा कि हम किसानों के लिए मंडी और बेरोजगार नौजवानों के लिए रोजगार का इतंजाम करेंगे। अखिलेश ने कहा कि पहले पुलिसभर्ती में नौजवानों को 10 किमी दौडना पडता था। बिना तैयारी के कई युवकों की तो जान चली जाती थी।  अखिलेश ने कहा कि हमने पुलिसभर्ती को आसान बनाया और इस दौड को 4 किमी की कराई। अखिलेश का कहना है कि हमने ऐसी व्यवस्था की है कि अब आप 100 नंबर डायल कर पुलिस की भी शिकायत कर सकते हैं। अखिलेश ने कहा कि हम महिलाओं को प्रेशर कूकर देंगे। अखिलेश ने कहा कि समाजवादी स्मार्टफोन आम लोगों को सरकार से जोडेगा। अखिलेश ने कहा कि समाजवादी स्मार्टफोन के लिए 1.40 करोड रजिस्ट्रेशन हुए। अखिलेश ने कहा कि हम आने वाले समय में शहरों और गांवों में 24 घंटे बिजली देंगे। अखिलेश ने कहा कि कांग्रेस के साथ आने से हम 300 सीटें जीतेंगे। लोगों को साइकिल पर भरोसा है।  मोदी सरकार पर निशाना: रैली को संबोधित करते हुए अखिलेश ने बीजेपी पर निशाना साधा। अखिलेश ने कहा कि एक पार्टी ने कहा कि अच्छे दिन आएंगे लेकिन तीन साल में अच्छेे दिन कहां है। जनता के अच्छे दिनों के नारे पर विश्वास किया। लेकिन अच्छे दिन आए क्या? अखिलेश ने कहा कि दिल्ली में लोगों के हाथों में झाडू पकडा दी। अखिलेश ने कहा कि बजट आने वाला है और यह पार्टी बजट में समाजवादी के अच्छेे कामों की नकल करने की कोशिश करेगी।  नोटबंदी को लेकर साधा निशाना: अखिलेश ने रैली में नोटबंदी का भी मुद्दा उठाया। अखिलेश ने कहा कि नोटबंदी से कई लोगों की मौत हो गई। अखिलेश ने कहा कि ईमानदारी के पैसे को कालाधन बता दिया। अखिलेश ने कहा कि कोई पैसा काला नहीं होता, काला होता है लेन देन का तरीका। अखिलेश ने कहा कि नोटबंदी से किसानों को काफी तकलीफ हुई। नोटबंदी से कारोबार ठप्प हो गया। अखिलेश ने कहा कि केन्द्र सरकार ने तीन बजट में कुछ नहीं दिया।    साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री व शिवपाल यादव के करीबी नेता अंबिका चौधरी ने शनिवार को समाजवादी पार्टी (सपा) छोडक़र बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का दामन थाम लिया। यहां मॉल एवेन्यू स्थित बसपा कार्यालय में चौधरी ने बसपा की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर उन्होंने मुलायम के परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले दो महीने से सपा में जो नौटंकी चल रही थी, उसका उद्देश्य कुछ और था। उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती की मौजूदगी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। मायावती ने चौधरी को उनकी पसंद की सीट से टिकट देने की भी घोषणा की। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अंबिका चौधरी के कद के हिसाब से बसपा में हमेशा उनका सम्मान किया जाएगा। चौधरी ने कहा, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने पिता के साथ पिछले दो महीने में जो किया वह अच्छा नहीं था। वहां यह सब नौटंकी के पीछे का उद्देश्य ही कुछ और था। हम बसपा में शामिल हो रहे हैं, ताकि उप्र में 2017 में सांप्रदायिक शक्तियों को सत्ता में आने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि वह मुलायम और शिवपाल यादव दोनों के करीब थे, लेकिन समाजवादी पार्टी में जो कुछ हुआ वह अच्छा नहीं था। समाजवादी अपनी राह से भटक गए हैं। अखिलेश की ओर इशारा करते हुए चौधरी ने कहा कि जब एक बेटा अपने पिता के साथ इस तरह का बर्ताव करता है तो इसके बाद और कुछ कहने को क्या बचता है? उल्लेखनीय है कि अंबिका चौधरी पिछले विधानसभा चुनाव में बलिया की फेफना सीट से चुनाव लड़े थे। भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र तिवारी ने उन्हें पराजित किया था। बताया जाता है कि इस बार अंबिका को अहसास हो गया था कि अखिलेश के पास सपा की कमान होने पर उनका टिकट कटेगा, लिहाजा समय रहते उन्होंने पाला बदल लिया। साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन के लिए आखिरी कोशिश जारी है। आज इस गठबंधन पर स्थिति साफ हो सकती है। सूत्रों की मानें तो सपा-कांगे्रेस का गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है। शनिवार को अखिलेश और प्रशांत किशोर के बीच बातचीत बेनतीजा होने के बाद कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक हुई। इस बैठक के बाद गुलाम नबी आजाद ने कहा कि रविवार सुबह गठबंधन पर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा। इन सब घटनाक्रमों के बीच अखिलेश ने देर रात प्रशांत किशोर को फिर से बातचीत के लिए बुलाया। वहीं प्रियंका गांधी ने दिल्ली में रामगोपाल यादव के साथ बैठक की। दरअसल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर पेंच फंसा हुआ है।  कांग्रेस यूपी में 100 से ज्यादा सीटें चाहती है लेकिन समाजवादी पार्टी इतनी सीटें कांग्रेस को देने के लिए राजी नहीं है। माा जा रहा है कि कांग्रेस को यूपी में 103 सीटें मिल सकती हैं। पहले खबर है थी कि अखिलेश कांग्रेस को 100 से ज्यादा सीटें नहीं देना चाहते। सोनिया गांधी ने खुद गठबंधन में हस्तखेप किया है। इसके बाद यह खबरें आ रही हैं कि सपा कांग्रेस को 100 से ज्यादा सीटें देने पर राजी हो गई है।  साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में जारी गठबंधन के प्रयास के बीच पेंच फंस गया है। दोनों पार्टियों में सीटों के बंटवारे का विवाद हल नहीं हो पा रहा है। सपा के 209 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होते ही गठबंधन खटाई में पड़ता दिख रहा है। सपा ने कांग्रेस के टिकट पर जीते 10 विधायकों की सीटों पर भी अपने प्रत्याशी घोषित करके एक नया मोड़ ला दिया है। टीवी रिपोट्र्स के मुताबिक, शनिवार को गठबंधन को लेकर गुलाम नबी आजाद अखिलेश से मुलाकात कर सकते हैं। उधर, कांग्रेस ने अब छोटे दलों जैसे रालोद, पीस पार्टी के साथ गठबंधन के संकेत दिए हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के लखनऊ आने पर शुक्रवार को सपा के साथ गठबंधन के ऐलान की संभावना जताई जा रही थी लेकिन इससे पहले ही सपा ने अपने 190 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी। सपा कह रही है कि जिन सीटों पर पिछले चुनावों में वह पहले-दूसरे स्थान पर रही, उन पर उसका हक बनता है और कांग्रेस बस 54 सीटों की ही हकदार है, मगर गठबंधन के लिए कांग्रेस को 84-85 सीटें तक दी जा सकती हैं। अब आज लखनऊ में गुलाम नबी आजाद और अखिलेश यादव की मुलाकात हो सकती है, और इसके बाद ही गठबंधन के सस्पेंस से परदा उठेगा। कांग्रेस की जीती हुई सीटों पर सपा ने उतारे प्रत्याशी दरअसल, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावना पर उस समय संदेह के बादल मंडराने लगे जब प्रदेश के सत्तारूढ़ दल ने शुक्रवार को 209 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों की सूची घोषित करदी, जिसमें आठ वे सीटें भी शामिल हैं, जिन पर कांग्रेस के विधायक हैं। 2012 में कांग्रेस की जीती हुई इन आठ सीटों में मथुरा, शामली, गंगोह, खुर्जा, हापुड़, बिलासपुर, स्वार व स्याना तथा उपचुनाव में जीती हुई देवबंद सीट शामिल हैं। इसके अलावा देवबंद से कांग्रेस विधायक माविया अली को सपा ने अपना प्रत्याशी बना लिया।  तीन सीटों स्वार से नवाब काजिम अली खान, गंगोह से प्रदीप कुमार चौधरी व स्याना से दिलनवाज खान पहले ही कांग्रेस छोडक़र दूसरे दलों में जा चुके हैं। मथुरा से प्रदीप माथुर, शामली से पंकज मलिक, खुर्जा (सुरक्षित) से बंशी सिंह पहाडिय़ा, हापुड़ (सुरक्षित) से गजराज सिंह व बिलासपुर से संजय कपूर कांग्रेस के विधायक हैं। प्रदीप माथुर कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता भी हैं। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार गठबंधन में सपा के साथ सीटों का विवाद अमेठी व रायबरेली की सीटों को लेकर भी है।  इसके अलावा सपा ने कांग्रेस की सीट रही प्रयागपुर बहराइच से उसके विधायक मुकेश श्रीवास्तव को टिकट दे दिया है। कांग्रेस यहां से अपना प्रत्याशी घोषित करना चाहती थी। वर्ष 2012 में अमेठी में दो सीटों तिलोई व जगदीशपुर (सुरक्षित) से कांग्रेस के प्रत्याशी जीते थे, जबकि रायबरेली में वह कोई सीट नहीं जीत पाई थी। कांग्रेस ने सपा के इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। सपा के उम्मीदवारों की सूची जारी करने के बाद उप्र के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता तथा राज्य प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने संकेत दिए कि चुनाव पूर्व गठबंधन की अब संभावना क्षीण है। सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने लखनऊ में संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य मकसद आगामी आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराना है। इसके लिए कांग्रेस से गठबंधन कोशिश की गई, लेकिन उसकी तरफ से अभी तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगर भाजपा को परास्त होते देखना चाहती है, तो उसे सपा के फार्मूले को मानना होगा। इस फार्मूले के तहत वर्ष 2012 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जिन सीटों पर पहले या दूसरे नंबर पर रही थी, और वे सीटें जिन पर सपा तीसरे, चौथे या पांचवें नंबर पर रही थीं, वे कांग्रेस को दे दी जाएंगी।  नंदा ने कहा कि इस हिसाब से कांग्रेस को 54 सीटें मिलनी चाहिए, लेकिन अगर वह गंभीरती से बातचीत करे तो उसे 25-30 सीटें और दी जा सकती हैं, सपा कांग्रेस को अधिकतम 85 सीटें दे सकती हैं। यह पूछे जाने पर क्या सपा द्वारा घोषित 191 सीटों में से कई वे सीटें हैं, जिन पर वर्ष 2012 के पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी जीते थे, उन्होंने कहा कि अगर गठबंधन होगा तो कांग्रेस जहां जीती हैं, वे सीटें उसे दे दी जाएंगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेठी और लखनऊ छावनी सीटें सपा अपने पास ही रखेंगी। साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश चुनाव में भी आरक्षण का मुद्दा अहम भूमिका निभाता नजर आ रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य के आरक्षण को लेकर दिए गए बयान पर पलटवार करते हुए बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को कहा कि आरक्षण खत्म किया गया तो भाजपा राजनीति भूल जाएगी। चेतावनी भरे लहजे में मायावती ने कहा कि भाजपा को दिन में तारे दिखा दिए जाएंगे। इसी के साथ बसपा प्रमुख ने कांग्रेस-सपा के संभावित गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने ‘दागी’ अखिलेश के आगे घुटने टेक दिए हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। मायावती ने कहा कि जनता केंद्र की नीतियों के खिलाफ है। उन्होंने सपा का निशाना साधते हुए कहा कि यूपी में कानून-व्यवस्था ठप है। यूपी में अब तक 500 दंगे हुए हैं। मुलायम सिंह पुत्र मोह में नाटक कर रहे हैं, ऐसा नाटक कर वह अखिलेश के दाग धोना चाहते हैं। शिवपाल को बलि का बकरा बना दिया गया। शिवपाल मुलायम के पुत्र मोह के शिकार हुए हैं, वह एक सीट पर सिमट कर रहे गए हैं। शुक्रवार को आरक्षण खत्म किए जाने को लेकर मनमोहन वैद्य का बयान सामने आने के बाद यह माना जा रहा था कि विरोधी दल इस मुद्दे को लपकने में देर नहीं लगाएंगे, और ऐसा ही हुआ है। मायावती ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरएसएस और भाजपा को आरक्षण के मुद्दे पर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, ‘अगर आरक्षण को खत्म करने के लिए ये लोग कानून बनाते हैं, तो बीजेपी को दिन में तारे दिखा दिए जाएंगे। दलित वर्ग के लोग इस फैसले पर बीजेपी को हमेशा-हमेशा के लिए राजनीति करना भुला देंगे।’ माया ने कहा कि भाजपा और आरएसएस को देश में दलितों की आबादी का अंदाजा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘चुनाव में जनता बता देगी, इन्हें पता नहीं कि इनकी आबादी कितनी है। बीजेपी को आरक्षण खत्म करने की बंदर की तरह घुडक़ी देना बंद कर देना चाहिए।’ उन्होंने दलित और आदिवासी वर्ग के लोगों से अपील की कि यूपी और बाकी चार राज्यों के चुनावों में बीजेपी और आरएसएस को हराकर इसकी सजा दें। ‘दागी अखिलेश के आगे कांग्रेस नतमस्तक मायावती ने कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा। मायावती ने कहा कि अखिलेश कांग्रेस के भी सीएम के चेहरे हैं। दोनों के बीच गठबंधन होने से पहले ही मायावती ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, ‘दागी अखिलेश अब कांग्रेस के भी सीएम फेस बन गए हैं। सवाल यह है कि क्या कांग्रेस को यही दागी चेहरा चाहिए था? अखिलेश के आगे कांग्रेस ने घुटने टेक दिए हैं। लोग इसे कांग्रेस का दिवालियापन मान रहे हैं।’ उन्होंने कहा, बसपा को रोकने के लिए षडय़ंत्र किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी डूबती नैय्या है। सपा का सत्ता में लौटना मुश्किल है। जिस तरह से कांग्रेस ने अखिलेश के सामने सरेंडर किया, इससे साफ हो गया है कि कांग्रेस ऑक्सीजन पर है। मायावती ने कहा कि सपा के पास अखिलेश का दागी चेहरा है, जो कानून-व्यवस्था, जंगलराज और अराजक राज का प्रतीक है। क्या जनता ऐसे दागी चेहरे को वोट देगी? जनता को अब फैसला करना है कि दागी, भ्रष्ट, सांप्रदायिक और अराजकता का राज चाहिए या इससे छुटकरा। कुशासन पर पर्दा डालने के लिए मुलायम सिंह किस्म-किस्म के नाटक करते रहे हैं। अपने बेटे को बचाने के लिए शिवपाल को बलि का बकरा बनाया है और दागी चेहरे से ध्यान हटाने के लिए किस्म-किस्म के खेल खेले गए। मायावती ने कहा कि अगर शिवपाल बसपा में आना चाहें और गुजारिश करें तो उसके बाद हम फैसला करेंगे। अखिलेश पर बीजेपी से मिलभगत का आरोप लगाते हुए बीएसपी मुखिया ने कहा, ‘कांग्रेस ने उस दागी को सीएम फेस मान लिया है जो बीजेपी से सांठगांठ करता है। ये सारी मिलीभगत बीएसपी को रोकने के लिए है। जनता को चुनाव में सही फैसला लेना होगा। दागी चेहरे जनता को पसंद नहीं।’ माया ने कहा कि चुनाव के वक्त कांग्रेस पार्टी का असली और स्वार्थी चेहरा बेनकाब होकर जनता के सामने आ गया है। मायावती ने कहा कि सपा की लड़ाई का फायदा भाजपा को मिलेगा इसलिए लोगों से अपील है कि भाजपा को हराना है, तो लोग और खासकर मुसलमान अपना वोट बर्बाद न करें और सिर्फ बसपा को वोट दें। भाजपा की भी हालत खराब है, भाजपा की साम, दाम, दंड और भेद की कोई नीति काम नहीं आएगी। साभार-khaskhabar.com  

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वाशिंगटन । आज से अमेरिका में ट्रंप युग की शुरूआत होने जा रही है। ज्ञातव्य है कि अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। डोनाल्ड ट्रंप वाशिंगटन डीसी पहुंच चुके हैं। डोनाल्ड ट्रंप का शपथ समारोह यूएस कैपिटॉल के वेस्ट ग्राउंड्स पर होगा। भारतीय समयानुसार ट्रंप रात 10 बजे राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। ट्रंप का शपथ ग्रहण समारोह 1.30 बजे तक चलेगा।  ट्रंप शपथ लेने के लिए उसी बाइबिल का इस्तेमाल करेंगे, जिसका राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने इस्तेमाल किया था। शपथ ग्रहण समारोह के लिए सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कैपिटॉल हिल को अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया है। ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह का करीब 50 डेमोक्रेटिक नेताओं ने बहिष्कार किया है,    लेकिन हिलेरी क्लिंटन और बिल क्लिंटन, पूर्व राषट्रपति बुश और जिमी कार्टर इस समारोह में उपस्थित रहेंगे। कुछ सेलिब्रिटिज ने ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में परफोर्म करने से इंकार कर दिया है। इस पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें शपथ ग्रहण समारोह में जनता के अलावा किसी सिलेब्रिटी की जरूरत नहीं है। ज्ञातव्य है कि डोनाल्ड ट्रंप अपने भाषणों में कई बार भारत और पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ कर चुके हैं। ट्रंप कह चुके हैं कि वो भारत के अच्छे दोस्त साबित होंगे। साथ ही उन्होनें कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लडाई में वो भारत के साथ खडे हैं। भारत की आर्थिक विकास का उदाहरण वो कई बार अपने चुनावी भाषणों में दे चुके हैं। ज्ञातव्य है कि आज शपथ लेने के बाद ट्रंप ओवल ऑफिस का भार संभालेंगे। साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । अखिलेश यादव ने यूपी विधानसभा चुनावों के लिए आज सपा की पहली लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में 191 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की गई है। अखिलेश की इस लिस्ट में चाचा शिवपाल का नाम भी है। शिवपाल यादव को जसवंत नगर से टिकट दिया गया है तो आजम खान को रामपुर से। लेकिन बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे का टिकट काट दिया गया है। नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल को भी टिकट दिया गया है। नितिन अग्रवाल को हरदोई से टिकट दिया गया है। आजम खान के बेटक अब्दुल्ला को स्वार से टिकट मिला है। इस लिस्ट में 191 उम्मीदवारों का नाम है।  मुलायम करेंगे अखिलेश के लिए प्रचार: सपा में पिता-पुत्र का झगडा भी सुलझ गया है। पिता मुलायम सिंह का कहना है कि पार्टी में सब ठीक है। एक अखबार को मुलायम सिंह ने बताया कि वे बेटे अखिलेश से नाराज नहीं है। मुलायम सिंह ने यह भी कहा कि वे चुनाव में अखिलेश के लिए प्रचार करेंगे।  कांग्रेस के लिए 103 सीटें छोड सकती है सपा: माना जा रहा है कि पहली लिस्ट जारी होने के बाद आज कांग्रेस और सपा के गठबंधन का भी ऐलान हो सकता है। सपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर बातचीत फाइनल स्टेज में हैं और लगभग अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन गई है। सूत्रों की मानें तो समाजवादी पार्टी कांग्रेस के लिए 103 सीटें छोड सकती है।   साभार-khaskhabar.com  

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चेन्नई । सांड़ों पर काबू पाले के पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटाने को लेकर लगातार चौथे दिन हजारों लोग सडक़ों पर हैं, जबकि चेन्नई के मरीना बीच पर हजारों की तादाद में छात्र तीन दिन से जमे हुए हैं। इन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए फेसबुक पर प्रदर्शन को लाइव भी किया। दूसरी ओर राज्य में इसे लेकर बढ़ रहे रोष के मद्देनजर मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम ने गुरुवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनसे फौरन अध्यादेश लाकर जल्लीकट्टू से प्रतिबंध हटाने की मांग की। मुख्यमंत्री के साथ अन्नाद्रमुक के 49 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मिलेगा। इससे पहले मुख्यमंत्री ने बुधवार को कहा था, कल सुबह मैं पीएम मोदी से मिलूंगा और उनसे जल्लीकट्टू से प्रतिबंध हटाने के लिए एक अध्यादेश लाने का अनुरोध करूंगा। इसलिए, मैं सभी प्रदर्शनकारियों से अपना आंदोलन रोकने की अपील करता हूं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर लोगों के साथ है। सीएम की इस अपील के बावजूद आंदोलनकारियों ने अपना आंदोलन खत्म नहीं किया। तमिलनाडु में आंदोलनकारी जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध हटाने के साथ ही पशु अधिकार संगठन ‘पेटा’ पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग कर रहे हैं। अन्नाद्रमुक महासचिव वीके शशिकला ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया और कहा कि विधानसभा के अगले सत्र में जल्लीकट्टू पर से प्रतिबंध हटाने के लिये एक प्रस्ताव पारित किया जायेगा। शशिकला ने कांग्रेस और भाजपा पर भी खेल कराने में असफल रहने को लेकर निशाना साधा। उन्होंने प्रदेश में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के लिए विद्यार्थियों और युवाओं को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि अन्नाद्रमुक सरकार खेल के आयोजन हेतु प्रतिबद्धता से प्रयास कर रही है और सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2014 में इस पर लगाए गए तथा पिछले वर्ष बरकरार रखे गए प्रतिबंध को हटाने के लिए केन्द्र से भी संपर्क किया है। वहीं, जल्लीकट्टू के लिए इजाजत मांगने वालों में आईटी क्षेत्र के कर्मचारी तथा कई और फिल्मी कलाकार भी शामिल हो गए हैं। इस बीच, नयी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र की जनवरी 2016 की अधिसूचना ने जंतु देखभाल की चिंताओं से सामंजस्य बिठाते हुए इस पारंपरिक खेल की इजाजत दी थी। यह फिलहाल कानूनी पड़ताल के दायरे में है और अनुकूल फैसला आएगा। बता दें कि वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद पिछले साल केंद्र सरकार ने अध्यादेश जारी कर इस पारंपरिक खेल की इजाजत दे दी थी, लेकिन सरकार के इस अध्यादेश को फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जिस पर अंतिम फैसला आना है। इसी कारण अभी तक केंद्र सरकार के किसी मंत्री ने इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी है। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली/लखनऊ । उत्तर प्रदेश चुनाव में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के बीच होने वाले महागठबंधन में सीटों को लेकर पेच फंसता नजर आ रहा है। दो मुख्य किरदारों सपा व कांग्रेस में तो गठबंधन पर सहमति बनती दिख रही है लेकिन रालोद से सीटों पर सहमति नहीं बन पा रही है। ऐसे में महागठबंधन की डोर सपा ने अब कांग्रेस के अनुभवी हाथों में थमा दी है। दिल्ली में कांग्रेस और रालोद के नेताओं के बीच अति महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। माना जा रहा है कि बैठक का विषय यूपी विधानसभा चुनावों में महागठबंधन और सीटों का बंटवारा ही है। इससे पहले गठबंधन पर सपा ने अपना पक्ष साफ करते हुए कहा था कि हम केवल कांग्रेस के साथ गठबंधन करेंगे। ताजा घटनाक्रम के बाद लग रहा है कि कांग्रेस बिहार की तरह ही यूपी में भी महागठबंधन को लेकर चलने का प्रयास कर रही है। हालांकि समाजवादी पार्टी को डर है कि अगर रालोद गठबंधन में आती है तो उसका मुस्लिम वोट छिटक सकता है। रालोद 35 सीटें मांग रहा है, जबकि सपा उससे सीधे बात नहीं कर रही, मगर कांग्रेस के जरिए हो रही बातचीत में उसे महज 20 से 25 सीटें देने का प्रस्ताव दिया है। सपा की ओर से प्रस्तावित 85 सीटों के बजाए कांग्रेस भी 110 सीटें मांग रही है। सपा व कांग्रेस की ओर से जल्द गठबंधन व सीट बंटवारे का ऐलान होगा।  किरणमय नंदा ने की थी कांग्रेस से गठबंधन की बात सपा के वरिष्ठ नेता किरणमय नंदा ने एक चैनल से कहा था कि गठबंधन की खातिर सिर्फ कांग्रेस से बात चल रही है। नंदा ने कहा था, ‘आरएलडी से कोई बात नहीं हो रही है। राजद, ममता और जदयू केवल सपा को सपोर्ट करेंगे और चुनाव प्रचार में भाग लेंगे। हम इनके साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ेंगे। हम सिर्फ 2017 को ध्यान में रख चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, हमारी नजर 2019 के चुनावों पर भी है। कांग्रेस साथ सीटों का बंटवारा 2012 के चुनाव परिणाम के आधार पर होगा।’ सपा ने अभी तक रालोद से इस मुद्दे पर सीधे बात नहीं की है, पर कांग्रेस द्वारा उसे गठबंधन में शामिल करने पर रालोद को भी कम से कम 20 तो देनी पड़ेगी। वर्ष 2012 में कांग्रेस से गठबंधन पर अजित सिंह का रालोद 45 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें नौ सीटों पर जीते और 12 पर दूसरे नंबर पर रहे। खास बात यह है कि रालोद की निगाह सपा की तीन सिटिंग सीटों मेरठ की सिवालखास, मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना व हाथरस की सादाबाद पर भी है। सपा इन्हें छोडऩे को तैयार नहीं है।  चुनाव-दर-चुनाव कम होता गया रालोद का जादू आपको बता दें कि रालोद की पकड़़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फिलवक्त निम्न स्तर पर है। 2002 के विधानसभा चुनाव में रालोद ने 38 उतारे थे, जिसमें से 14 को जीत मिली थी जबकि 12 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। 2007 के चुनावों में रालोद ने 254 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से उसे सिर्फ 10 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। खास बात यह थी कि 222 सीटों पर रालोद के प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई थी। इन चुनावों में रालोद का वोट प्रतिशत 3.70 प्रतिशत था। 2007 के चुनावों में मिली करारी हार से सीख ले रालोद ने 2012 के चुनावों में महज 46 सीटों पर ही अपने उम्मीदवार उतारे। इस बार भी परिणाम रालोद के उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा और उसे सिर्फ 9 सीटों से संतोष करना पड़ा। चुनावों में उसके 20 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई। इन चुनावों में रालोद का वोट प्रतिशत घटकर 2.33 फीसदी रह गया। सपा चाह रही है कि कांग्रेस व रालोद दोनों को अधिकतम 110 सीटें दे दी जाएं। 4-6 सीटें तो दूसरे छोटे दलों को देनी होंगी। सीएम अखिलेश ने महागठबंधन का स्वरूप तय करने का काम अपने हाथ में ले रखा है। उन्होंने बुधवार को गठबंधन को लेकर अपनी तय सीटों पर दावेदारों के नामों पर विचार किया। सबसे ज्यादा जोर प्रथम चरण वाली सीटों पर है। कांग्रेस को राजी करने के लिए सपा को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। साभार-khaskhabar.com  

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अमृतसर । बीजेपी छोड कांग्रेस में शामिल हुए नवजोत सिंह सिद्धू ने बुधवार दोपहर करीब 12 बजे अमृतसर ईस्ट विधानसभा से नामांकन दाखिल किया। इस मौके पर सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर भी उपस्थित थे। साथ ही बड़ी संख्या में सिद्धू के समर्थक व कांग्रेसी कार्यकर्ता भी नामांकन के दौरान मौजूद रहें। वहीं सिद्धू ने नामांकन दाखिल करने के बाद बादल परिवार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस बार पंजाब को जीताना है। केवल 500 रुपए के लिए वोट नहीं करना है। उन्होंने कहा कि पंजाब किसी परिवार की जागीर नहीं है। वहीं उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार कांग्रेस की सत्ता में वापसी जरुर होगी। आम आदमी पार्टी नेता भगवंत मान आज फाजिल्का जिले की जलालाबाद सीट से नामांकन दाखिल करने जा रहे है। आपको बता दें कि भगवंत मान पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल के खिलाफ लड़ रहे हैं। इसके अलावा लुधियाना के आतमनगर से सिमरजीत सिंह बैंस और लुधियाना साउथ से बलविंदर बैंस नामांकन दाखिल करेंगे। पंजाब और गोवा में विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने का आज आखिरी दिन है। उम्मीदवार नामांकन आज दोपहर 3 बजे तक भर सकते हैं। दोनों राज्यों में नामांकन पत्रों की जांच 19 जनवरी को होगी। उम्मीदवार 21 जनवरी तक अपने नाम वापस ले सकेंगे।  साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए बनाए जा रहे महागठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ बात लगभग पक्की हो चुकी है और कभी भी इसका ऐलान हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है। सपा कांग्रेस को 90 सीटें देने को राजी है जबकि कांग्रेस अपने लिए 100 से अधिक सीटें मांग रही है। अखिलेश खुद इस महागठबंधन का स्वरूप तैयार कर रहे हैं। अखिलेश यादव ने मंगलवार को ऐलान किया था कि एक-दो दिनों में गठबंधन का ऐलान कर दिया जाएगा। शीला दीक्षित ने इस बीच ऐलान किया कि अखिलेश के लिए वह सीएम पद की दावेदारी छोडऩे को तैयार हैं। महागठबंधन के लिए छोटे दलों को साथ लाने की कोशिश: महागठबंधन के लिए तैयार किए गए स्वरूप में छोटी पार्टियों की साथ लाने की कोशिश की जा रही है। इनमें पीस पार्टी, भारतीय निषाद पार्टी, अपना दल (कृष्णा पटेल गुट) से बातचीत जारी है। छोटे दलों के लिए सपा ने 10 सीटों का कोटा तय किया है। जदयू और राजद भी इस महागठबंधन का हिस्सा होंगी। लालू चुनाव प्रचार में आएंगे। लालू यादव ने सीट के लिए कोई मांग नहीं की है जबकि अखिलेश ने शरद यादव से फोन पर बातचीत की। नोएडा की सभी सीटें समाजवादी पार्टी कांग्रेस और सहयोगियों के लिए छोड़ सकती है, क्योंकि पिछली बार सपा यहां से कोई सीट नहीं जीत सकी थी। अखिलेश नोएडा से अपशकुन को भी जोडक़र देखते रहे हैं। कांग्रेस के यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने गठबंधन को लेकर जल्द बात पूरी हो जाने की उम्मीद जताई। यूपी विधानसभा चुनाव में 403 सीटें हैं। अगर कांग्रेस सपा के इस फॉर्मूले पर राजी होती है तो फिर सपा सोनिया गांधी और राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्रों रायबरेली और अमेठी की कई सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ सकती है। सूत्रों के अनुसार पहले दो चरणों के लिए 30 सीटों को सपा ने कांग्रेस के लिए मंजूर किया है। समाजवादी पार्टी रालोद को 21 सीटें देने को राजी है। रामगोपाल यादव लखनऊ में हैं और अखिलेश और बाकी नेताओं के साथ मिलकर गठबंधन के फॉर्मूले को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। बुधवार को कांग्रेस की चुनाव समिति और स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में गठबंधन के स्वरूप पर चर्चा होगी। 15 सीटों को लेकर माथापच्ची दरअसल यूपी की 403 सीटों में से कांग्रेस पार्टी चाहती है कि गठबंधन ऐसा हो कि कांग्रेस की नाक न कटे। यही वजह है कि वह 100 के फिगर पर अभी हुई अड़ी हुई है। सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी चाहते थे कि कांग्रेस पार्टी को डेढ़ सौ सीटें मिले पर इसे अंजाम देने के लिए फैसला प्रियंका के हाथ छोड़ दिया। पहले दो चरणों की सीटों को हरी झंडी अब दोनों में फाइनल आकड़ों को लेकर चर्चा चल रही है। सूत्रों ने बाताया के फेज-1 और फेज 2 की सीटों पर लगभग सहमति बन गई है। कांग्रेस को इसमें 30 सीटें मिल रही हैं। मगर मुस्लिम बहुल्य और सियासी तौर पर निर्णायक माने जानेवाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सपा इतनी आसानी से छोडऩा नहीं चाहती। पहले ही सपा लगभग 21 सीटें अजित सिंह की राष्ट्रीय लोकदल को देने का वादा कर चुकी है इसलिए दोनों गुट एक-दूसरे पर दबाव बना रहे हैं। मुलायम की लिस्ट पर क्या फैसला लेंगे अखिलेश? कांग्रेस के साथ गठबंधन पर बातचीत के अलावा सपा के अंदर भी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। मंगलवार को मुलायम सिंह ने मुलाकात के दौरान अखिलेश को 38 नेताओं की एक लिस्ट सौंपी थी। सूत्रों के मुताबिक इसमें शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव का नाम भी शामिल है। हालांकि, अखिलेश को इस पर आखिरी फैसला लेना है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अखिलेश इनमें से कई नामों पर सहमत नहीं हैं। लखनऊ कैंट से मुलायम सिंह की दूसरी बहू अपर्णा यादव का टिकट पक्का हो सकता है तो रामपुर से बेनी प्रसाद वर्मा के बेटे राकेश यादव को भी टिकट मिल सकता है। हालांकि, शिवपाल के अन्य करीबी नेताओं ओमप्रकाश सिंह, शादाब फातिमा और नारद राय के टिकटों को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। बदले घटनाक्रम पर बीजेपी की नजर विरोधी खेमे में बढ़ती एकजुटता पर बीजेपी नजर बनाए हुए हैं. दूसरी लिस्ट पर विचार करने के लिए बीजेपी ने सीईसी की मीटिंग मंगलवार को बुलाई थी लेकिन इसे बुधवार तक के लिए टाल दिया गया।  साभार-khaskhabar.com  

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