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चेन्नई । सांड़ों पर काबू पाले के पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटाने को लेकर लगातार चौथे दिन हजारों लोग सडक़ों पर हैं, जबकि चेन्नई के मरीना बीच पर हजारों की तादाद में छात्र तीन दिन से जमे हुए हैं। इन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए फेसबुक पर प्रदर्शन को लाइव भी किया। दूसरी ओर राज्य में इसे लेकर बढ़ रहे रोष के मद्देनजर मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम ने गुरुवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनसे फौरन अध्यादेश लाकर जल्लीकट्टू से प्रतिबंध हटाने की मांग की। मुख्यमंत्री के साथ अन्नाद्रमुक के 49 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मिलेगा।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने बुधवार को कहा था, कल सुबह मैं पीएम मोदी से मिलूंगा और उनसे जल्लीकट्टू से प्रतिबंध हटाने के लिए एक अध्यादेश लाने का अनुरोध करूंगा। इसलिए, मैं सभी प्रदर्शनकारियों से अपना आंदोलन रोकने की अपील करता हूं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर लोगों के साथ है। सीएम की इस अपील के बावजूद आंदोलनकारियों ने अपना आंदोलन खत्म नहीं किया। तमिलनाडु में आंदोलनकारी जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध हटाने के साथ ही पशु अधिकार संगठन ‘पेटा’ पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग कर रहे हैं।
अन्नाद्रमुक महासचिव वीके शशिकला ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया और कहा कि विधानसभा के अगले सत्र में जल्लीकट्टू पर से प्रतिबंध हटाने के लिये एक प्रस्ताव पारित किया जायेगा। शशिकला ने कांग्रेस और भाजपा पर भी खेल कराने में असफल रहने को लेकर निशाना साधा। उन्होंने प्रदेश में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के लिए विद्यार्थियों और युवाओं को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि अन्नाद्रमुक सरकार खेल के आयोजन हेतु प्रतिबद्धता से प्रयास कर रही है और सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2014 में इस पर लगाए गए तथा पिछले वर्ष बरकरार रखे गए प्रतिबंध को हटाने के लिए केन्द्र से भी संपर्क किया है। वहीं, जल्लीकट्टू के लिए इजाजत मांगने वालों में आईटी क्षेत्र के कर्मचारी तथा कई और फिल्मी कलाकार भी शामिल हो गए हैं।
इस बीच, नयी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र की जनवरी 2016 की अधिसूचना ने जंतु देखभाल की चिंताओं से सामंजस्य बिठाते हुए इस पारंपरिक खेल की इजाजत दी थी। यह फिलहाल कानूनी पड़ताल के दायरे में है और अनुकूल फैसला आएगा।
बता दें कि वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद पिछले साल केंद्र सरकार ने अध्यादेश जारी कर इस पारंपरिक खेल की इजाजत दे दी थी, लेकिन सरकार के इस अध्यादेश को फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जिस पर अंतिम फैसला आना है। इसी कारण अभी तक केंद्र सरकार के किसी मंत्री ने इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी है।
साभार-khaskhabar.com













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