लखनऊ । सीबीआई की विशेष कोर्ट अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढांचा गिराने की साजिश मामले में आज आरोप तय करेगा। ज्ञातव्य है कि 25 मई को लखनऊ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सुनवाई में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार और साध्वी ऋतंभरा तथा विष्णु हरि डालमिया को 30 मई को होने वाली अगली सुनवाई में इनवार्य रूप से मौजूद रहने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि उनको पेशी से छूट नहीं दी जा सकती, उनको पेश होना होगा। इन सभी नेताओं पर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढांचा गिराने के षडय़ंत्र में शामिल होने के आरोप हैंं। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि अगली सुनवाई में आरोप तय होंगे, लिहाजा सभी आरोपियों को अगले हफ्ते सुनवाई में मौजूद रहना होगा। इसके साथ ही जज ने यह भी कहा कि किसी को पेशी से छूट नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने निर्देश दिया था कि 1992 के बाबरी विध्वंस केस में आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और अन्य पर षडय़ंत्र के आरोपों को लेकर मुकदमा चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ केस को रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का ट्रायल एक महीने के भीतर शुरू करने और सुनवाई हर करने का आदेश देते हुए इस मामले में दो साल के भीतर निर्णय देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा के प्रमुख नेताओं लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत विहिप के कई नेताओं पर ट्रायल चलाए जाने की याचिका मंजूर कर ली थी और ढांचा विध्वंस को देश के संविधान के धर्मनिरपेक्ष तत्व को झकझोर देने वाला कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने ढांचा विध्वंस के समय यूपी के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह को फिलहाल राजस्थान के राज्यपाल पद पर होने के कारण मुकदमे से अलग रखा है। हालांकि शीर्ष कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि कल्याण सिंह के राज्यपाल पद से हटते ही ट्रायल कोर्ट उन पर आरोप तय करेगा। इस मामले में आरोपी गिरिराज किशोर और अशोक सिंघल की मौत हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में इलाहबाद हाईकोर्ट द्वारा फरवरी 2001 के निर्णय में आडवाणी और अन्य पर आरोप हटाने के फैसले को त्रुटिपूर्ण माना था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विशेष अदालत ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले की रोजाना सुनवाई 20 मई से शुरू की, तब पांच विहिप नेताओं को जमानत दे दी। पूर्व सांसद राम विलास वेदांत (59) एक अलावा शनिवार को सीबीआई कोर्ट से विहिप नेताओं चंपत राय (71), बैकुंठलाल शर्मा (88), महंत नृत्यगोपाल दास (79) और धरमदास महाराज (68) को भी जमानत मिल गई। छठे आरोपी प्रधान उस दिन अदालत में नहीं पेश हो सके थे। बुधवार को छठे आरोपी सतीश प्रधान को भी जमानत दे दी गई। अयोध्या में 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद ढांचा ढहाए जाने के बाद दो एफआईआर दर्ज की गई थी। तब सीबीआई ने जांच के बाद 49 लोगों के खिलाफ चार्जशीट तैयार की थी, लेकिन 13 आरोपी मुकदमा शुरू होने से पहले ही बरी हो गए, वहीं इस मामले में आरोपी रहे अशोक सिंघल और गिरिराज किशोर का पहले ही निधन हो चुका है। साभार-khaskhabar.com
Read MoreBREAKING NEWS












