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नई दिल्ली । पाकिस्तानी शख्स से कथित तौर पर निकाह को मजबूर की गई भारतीय महिला उज्मा अहमद गुरुवार सुबह वतन लौट आईं। भारत लौटने के बाद उज्मा पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उज्मा ने कहा कि पाकिस्तान मौत का कुआं है।
पाकिस्तान से लौटीं उज्मा अहमद और उनके परिजनों से मिलने के लिए खुद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज उनके घर पहुंची। इस दौरान सुषमा स्वराज ने कहा, उज्मा वेलकम होम भारत की बेटी, तुम्हें जिन हालात से गुजरना पड़ा, उसका मुझे दुख है। इसके बाद उज्मा और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सुषमा स्वराज जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
हमारा देश भारत बहुत अच्छा, ना जाए कोई पाकिस्तान...
उज्मा ने बताया, पाकिस्तान मौत का कुआं है, वहां जाना आसान है लेकिन आना मुश्किल है। मैं सभी को सलाह दूंगी कि कभी पाकिस्तान ना जाना। पाकिस्तान को लेकर मेरे मन में खौफ बैठ गया है। हमारा देश भारत बहुत अच्छा है। हमारे पास सुषमा मैम जैसी विदेश मंत्री हैं। मैंने दो-तीन देश देखे हैं लेकिन मुझे गर्व है कि मैं भारतीय हूं। उज्मा ने कहा कि मेरे पास धन्यवाद के अलावा कोई और शब्द नहीं हैं। मैं प्रधानमंत्री मोदी को भी शुक्रिया कहना चाहती हूं।
उज्मा ने कहा कि पाकिस्तान मौत का कुआं है, वहां जाना आसान है लेकिन निकलना मुश्किल है। वहां सबकुछ बहुत अजीब था, रोज फायरिंग होती थी। विदेश से लड़कियां लाकर सप्लाई की जाती थीं। सुषमा स्वराज मैम मुझे रोज फोन करती थी और कहती थी कि तुम जल्द ही वापस आओगी। पाकिस्तान में दूतावास ने मेरी मदद की। उन्होंने तुरंत मेरी बात सुनने के बाद ऐक्शन लिया। मैं पाकिस्तान सिर्फ घूमने गई थी, लेकिन वहां पर स्थिति बदल गई। किसी ने मुझे नींद की गोली दे दी। इससे पहले उज्मा अहमद गुरुवार सुबह वतन लौट आईं थी। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने एक दिन पहले ही उज्मा को भारत लौटने को मंजूरी दी थी। उज्मा वाघा सीमा पार कर अमृतसर पहुंचीं। उनके आने के बाद विदेश मंत्री विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर उनका स्वागत किया। सुषमा ने ट्वीट में कहा, उज्मा, घर में तुम्हारा स्वागत है भारत की बेटी। मुझे खेद है कि तुम्हें यह सब झेलना पड़ा। उज्मा इस्लामाबाद से लाहौर पहुंचीं। इस दौरान उनके साथ भारतीय उप उच्चायुक्त जे. पी. सिंह भी थे, जिन्होंने उज्मा को वाघा सीमा तक छोड़ा। वह 25 दिनों तक पाकिस्तान में रहीं। महिला का दावा है कि उन्हें बंदूक की नोक पर पाकिस्तान के बुनेर के रहने वाले ताहिर अली से निकाह के लिए मजबूर किया गया। सुनवाई के दौरान पाकिस्तानी न्यायाधीश मोहसिन अख्तर कयानी ने उज्मा से पूछा था कि क्या वह उनके चैम्बर में अपने शौहर से मिलना चाहती हैं? इस पर उज्मा ने इससे इनकार कर दिया था। उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि उज्मा अपने देश जा सकती हैं और इस मामले की सुनवाई उनकी अनुपस्थिति में होगी।
उज्मा ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में शरण ले रखी थी। वह वतन लौटना चाहती थीं। अली ने याचिका दायर कर कहा था कि उज्मा को जबरन भारतीय उच्चायोग में रखा गया है और यह भी कहा था कि शादी जबरन नहीं हुई है। नई दिल्ली की रहने वाली उज्मा को मलेशिया में अली से प्यार हो गया था, जिसके बाद वह वाघा सीमा से होते हुए एक मई को पाकिस्तान पहुंची थीं।
साभार-khaskhabar.com













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