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मुंबई। मुंबई में एलफिंस्टन स्टेशन के ओवर ब्रिज पर भगदड के बाद 22 लोगों की मौत के बाद अब सियासत शुरू हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे में मोदी सरकार पर हमला बोला है। राज ठाकरे में मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है, अगर रेलवे ने यहां बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं किया, तो वह मुंबई में बुलेट ट्रेन का काम शुरू नहीं करने देंगे।   एमएनएस प्रमुख ने कहा कि मुंबई में मैं बुलेट ट्रेन की एक ब्लॉक नहीं रखने दूंगा। अगर मोदी बुलेट चाहते हैं, तो गुजरात में जाकर शुरू करें, मुंबई में नहीं। अगर उन्होंने बल का इस्तेमाल किया, तो हम भी देखेंगे क्या करना है।   दशहरा की बधाई देते हुए राज ठाकरे ने कहा कि इतना बड़ा त्यौहार है, लेकिन हम टीवी और अखबारों में क्या देख पढ़ रहे हैं। यह बहुत ही दुखद है। लोगों ने मुझसे घटनास्थल पर जाने को कहा, लेकिन मैं नहीं गया। इससे राहत और बचाव कार्य प्रभावित होता। डॉक्टर, पुलिस और फायर ब्रिगेड अपना काम कर रही है और नेता लोग मीडिया को बाइट दे रहे हैं, इसीलिए मैं घटनास्थल पर नहीं गया।   महाराष्ट्र के बाहरी लोगों को निशाने पर लेते हुए राज ठाकरे ने कहा कि जब बाहरी लोगों का आना नहीं रुकता है, शहर ऐसे ही कांपता रहेगा। हर रोज हजारों लोग मुंबई आते हैं और सब बाहरी होते हैं। लोगों को समझना होगा कि सिर्फ सरकार बदलने से कुछ नहीं होता। राज ठाकरे ने कहा कि बीजेपी जब सरकार में होती है, तो चुप रहती है। विपक्ष में होती है तो प्रदर्शन करती है। मैंने भी लोकल ट्रेन में सफर किया है। स्टेशनों पर बहुत कम जगह है।   मनसे प्रमुख ने कहा कि यह घटना होने का इंतजार कर रही थी। रेलवे स्टेशनों की हालत अच्छी नहीं है। लोगों ने इस बारे में पहले शिकायतें की थी। हमारी पार्टी के लोगों ने रेलवे को पत्र लिखा था। पिछले 10-15 सालों से एलफिंस्टन स्टेशन ब्रिज के लिए रेलवे को पत्र लिखा जा रहा है, लेकिन कुछ नहीं हुआ।   ठाकरे ने कहा कि हमने शिकायत की तो रेलवे अधिकारियों की तरफ से जवाब आया कि फुटओवर ब्रिज का काम एमएमआरडीए को दे दिया गया है। इसलिए यह पूरा नहीं किया जा सकता। हर कोई एक दूसरे जिम्मेदारी डाल रहा है, कोई जिम्मेदारी नहीं लेना चाहता।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवन्त सिन्हा और वर्तमान वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच की लडाई अब खुलकर सामने आ गई है। ज्ञातव्य है कि यशवंत सिन्हा ने एक अंग्रेजी अखबार के लिए लेख में देश की गिरती जीडीपी और खराब अर्थव्सवस्था के लिए सरकार की आलोचना की थी। साथ ही उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि अरुण जेटली भारतीयों को करीब से गरीबी दिखाएंगे। इसके बाद कल गुरुवार को अरुण जेटली ने यशवंत सिन्हा पर निशाना साधते हुए कहा कि 80 की उम्र में नौकरी मांग रहे हैं। इस पर यशवंत सिन्हा ने फिर से अरुण जेटली पर पलटवार किया है।    यशवंत सिन्हा ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर मैं नौकरी चाहता तो अरुण जेटली वहां ना होते। वहीं सरकार का बचाव कर रहे बेटे जयंत सिन्हा के बारे में उन्होंने कहा कि यह मुद्दे को भटकाने की कोशिश है। यशवंत सिन्हा ने कहा कि अगर देश की अर्थव्यवस्था खराब है इसका जिम्मेदार वित्त मंत्री ही होगा ना कि गृह मंत्री। मैं भी व्यक्तिगत आरोप लगा सकता हूं लेकिन मैं इस जाल में नहीं फंसूगा।    80 की उम्र में मांग रहे नौकरी: अरुण जेटली  गुरुवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक पुस्तक विमोचन के मौके पर कहा कि मुझे लगता है कि आपकी किताब का सटीक शीर्षक होता की 70 साल का भारत, साढ़ तीन साल की मोदी सरकार और 80 की उम्र में रोजगार की तलाश। जेटली ने कहा कि देश में कथित मंदी का कोई आधार नहीं है। जेटली ने कहा कि नोटबंदी का विरोध करने वाले कालेधन के समर्थक हैं। साथ ही जेटली ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अच्छा सुधार हो रहा है।    सरकार के बचाव में आए यशवंत सिन्हा के बेटे जयंत सिन्हा: जहां पिता यशवंत सिन्हा सरकार पर नोटबंदी, खराब अर्थव्यस्था और जीएसटी को लेकर आरोप लगा रहे हैं, वहीं उनके बेटे जयंत सिन्हा सरकार का बचाव कर रहे हैं। जयंत सिन्हा ने एक लेख में कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता और उसे स्थिर बनाने के लिए मोदी सरकार ने तमाम उपाय किए हैं, जिसका आने वाले दिनों में देश के लोगों को फायदा होगा।    साथ ही उन्होंने लेख में लिखा कि जीएसटी और नोटबंदीका आने वाले दिनों में देश की आम जनता को लाभ मिलेगा। साथ ही उन्होंने लिखा कि जो लोग लेख में अर्थव्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं वो अर्थव्यवस्था में बदलाव के लिए उठाए गए कदमों को नजरअंदाज कर रहे हैं।  साभार-khaskhabar.com       

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बिश्केक/नई दिल्ली। भारत लगातार विभिन्न मंचों का इस्तेमाल कर आतंक के पनाहगाह बने पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया को दिखाने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में टेररिस्तान कहकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को बेनकाब करने के बाद भारत ने फिर तीखा हमला बोला है। बिश्केक/नई दिल्ली। भारत ने पाकिस्तान पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए गुरुवार को कहा कि आतंकवादियों को पनाह देने वाली सरकारें आत्महत्या को निमंत्रण दे रही हैं। आधुनिक धर्मनिरपेक्ष समाज में इस्लाम विषय पर किर्गिस्तान के बिश्केक में सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेश राज्य मंत्री एम. जे. अकबर ने कहा कि धर्म आधारित आतंकवादी आधुनिकता विरोधी होते हैं और राष्ट्र की अवधारणा को चुनौती देते हैं, जो कि समकालिक स्थिरता की सैद्धांतिक बुनियाद है।   उन्होंने कहा, ये लोग देश के बदले धर्म आधारित स्थान पर विश्वास करते हैं और ये किर्गिस्तान के लिए उतने ही खतरनाक हैं जितने कि इराक, माली, सोमालिया या भारत के लिए। अकबर ने कहा कि जो सरकारें भी इन आतंकवादियों को पनाह दे रही हैं, वे आत्महत्या को आमंत्रण दे रहीं हैं, ये भी आतंकवादियों जितनी ही दोषी हैं। अकबर ने कहा, आतंकवादी मानव सोच और सह-अस्तित्व को निशाना बनाते हैं। वे लोग तबाही मचाकर समाज में भय का वातावरण पैदा करते हैं, जहां कई धर्म और जाति के लोग सौहार्द के सभ्यता के मूल्यों के साथ रहते हैं। आतंकवादी निरंकुशता का विकल्प पेश करते हैं। अकबर ने कहा कि आतंकवादियों ने जो युद्ध शुरू किया है, उसमें उनकी हार जरूर होगी लेकिन इसे खत्म होने में समय लगेगा।    उन्होंने कहा कि यह ऐसा युद्ध है जिसे न सिर्फ जमीनी स्तर पर लड़ा जाना चाहिए, बल्कि दिमाग में भी लड़ा जाना चाहिए। अकबर ने कहा कि यह समय कुछ मुस्लिम समुदायों में पैदा होने वाली अत्यधिक खतरनाक प्रवृत्ति पर ध्यान देने का है और यह प्रवृत्ति है धार्मिक आस्था की श्रेष्ठता का सिद्धांत। इसमें आतंकवादी हिंसा के साथ धर्म आधारित वर्चस्व, जातीय नरसंहार और लैंगिक उत्पीडऩ शामिल हैं। उन्होंने कहा, हमें इस पर स्पष्ट होना चाहिए। इस खतरनाक समस्या को न्यायसंगत ठहराने के लिए कोई भी बहाना नहीं होना चाहिए। आतंकवादी जो धार्मिक वर्चस्वता के नाम पर आतंक फैलाते हैं, वे लोग किसी शत्रु या प्रतीक को हानि नहीं पहुंचाते हैं बल्कि वे लोग इस्लाम की बुनियाद को ही गंभीर हानि पहुंचाते हैं जिसके नाम का अर्थ ही शांति का मिशन है।उन्होंने कहा, इस्लाम एक भाईचार है, न कि राष्ट्रवाद। यह एक मानवीय दर्शनशास्त्र है, न कि आत्मघाती कट्टरवादियों के लिए घातक हथियार। अकबर ने कहा कि आज की मुख्य चुनौती धार्मिक वर्चस्ववादियों और धर्म की बराबरी में विश्वास करने वालों के बीच संघर्ष की है। ज्ञान को आधुनिकता की मुख्य सीढ़ी बताते हुए उन्होंने कहा कि पहले इस्लाम क्षेत्रीय युद्धक्षेत्र से फैला, लेकिन इसका सही में एकीकरण तब हुआ जब मुस्लिम समुदाय ज्ञान के क्षेत्र में सबसे आगे आए।   अकबर ने कहा, आज हमारा मुख्य उत्तरदायित्व है धर्मनिरपेक्ष ज्ञान का लोकतांत्रिकरण करना। अगर हम इसमें विफल होते हैं, तो हम अपने बच्चों को विफल कर देंगे। हम 21वीं शताब्दी को उनकी मु_ी से छीन लेंगे। अकबर ने लैंगिक समानता पर जोर देते हुए कहा कि इस पर समझौता नहीं किया जा सकता। महिलाओं को संस्कृति और आर्थिक वृद्धि का नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने कहा, कुछ प्रतिगामी विचार महिलाओं को दबाने के लिए कानून को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं। हमें उनके खिलाफ खड़ा होना चाहिए और लडऩा चाहिए। साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत खराब बताए जाने के बाद मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। सिन्हा के बयान के बहाने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। अब यशवंत सिन्हा को जवाब देने के लिए उनके ही बेटे जयंत सिन्हा मैदान में आए है। जयंत सिन्हा ने कहा है कि हम एक नई मजबूत अर्थव्यवस्था बना रहे है, जो लम्बे समय में न्यू इंडिया के लिए फायदेमंद होगी।    जयंत सिन्हा ने कहा है कि एक या दो क्वार्टर के डाटा को ना देखते हुए इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हम अभी संरचनात्मक सुधार कर रहे हैं, जो कि लंबे समय के लिए हमारे लिए फायदेमंद होगा। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए लिखे गए लेख में जयंत सिन्हा ने कहा है कि हाल ही के दिनों में अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर कई तरह के आर्टिकल लिखे गए हैं। उन्होंने लिखा कि सरकार जो बदलाव कर रही है वह न्यू इंडिया की जरूरत हैं। जो नई इकोनॉमी तैयार हो रही है वह ज्यादा ट्रांसपेरेंट होगी जिसमें लाखों लोगों को जॉब मिलेगी।   जयंत सिन्हा ने लिखा कि जीएसटी, नोटबंदी और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा एक गेमचेंजिंग कोशिश हैं। जिसका असर लंबे समय में दिखेगा। हर मंत्रालय नई तरह की पॉलिसी बना रहा है अब कोयला की नीलामी भी सही तरीके से हो रही है। इस सरकार के कार्यकाल में एफडीआई के आंकड़ों में काफी बढ़ोतरी हुई है। आपको बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रहे बीजेपी के दिग्गज यशवंत सिन्हा ने एक अंग्रेजी अखबार में लेख लिखा है। जिसमें उन्होंने नोटबंदी के फैसले पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया, उन्होंने कहा कि नोटबंदी ने गिरती जीडीपी में आग में तेल डालने की तरह काम किया। यशवंत सिन्हा ने तंज कसते हुए कहा कि पीएम मोदी कहते हैं कि उन्होंने गरीबी को काफी करीबी से देखा है। ऐसा लगता है कि उनके वित्तमंत्री इस तरह का काम कर रहे हैं कि वह सभी भारतीयों को गरीबी काफी पास से दिखाएं। साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा के सहारे विपक्ष ने बुधवार को मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सिन्हा का हवाला देते हुए मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल के जरिए कहा, देवियों और सज्जनों आपके को-पायलट और वित्त मंत्री बोल रहे हैं: कृपया सीट बेल्ट बांध लें, हमारे प्लेन के पंख गिर गए हैं। गुजरात दौरे के तीसरे दिन बुधवार को राहुल गांधी ने एक बार फिर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी टीवी पर आए और कहा कि आज रात 12 बजे से 500 और 100 का नोट रद्दी हो गया है। पता नहीं कैसे प्रधानमंत्री हैं। पता नहीं किसने मोदी को बता दिया कि कैश की कोई जरूरत नहीं है पूरा देश क्रेडिट कार्ड पर चलता है।   राहुल गांधी ने कहा, प्रधानमंत्री ने वादा किया था कि हर साल दो करोड़ युवाओं को नौकरी दिलवाऊंगा। देश में हल रोज तीस हजार नए सुवा रोजगार ढूंढने के लिए निकलते हैं। देश की सरकार रोज सिर्फ चार सौ युवाओं को रोजगार दे रही है। जबकि चीन रोज चालीस हजार युवाओं को रोजगार दे रहा है। रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि विकास पागल हो गया। उसे पागल खाने से बार निकाल कर लाना है, उसे ठीक करना पड़ेगा और पटरी पर लाना पड़ेगा। आपको बता दें कि कांग्रेस गुजरात में ‘विकास पागल हो गया है’ नाम से कैंपेन भी चला रही है। गौरतलब है कि वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने वित्त मंत्री अरुण जेटली पर जोरदार निशाना साधा है। एक अंग्रेजी अखबार में लिखे लेख में उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था का कबाड़ा कर दिया है। उन्होंने नोटबंदी को सुस्त अर्थव्यवस्था की आग में घी डालने वाला बताया। साथ जीएसटी में भी खामियां बतार्ईं। उनके इसी बयान के सहारे अब मोदी सरकार को घेरने मेें लगी हुई है।  साभार-khaskhabar.com         

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वाराणसी। बनारस विश्वविद्यालय में हुए बवाल के मामले में कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर ओ एन सिंह ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा दे दिया है। बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर ने बीती रात अपना इस्तीफा कुलपति जीसी त्रिपाठी को सौंपा। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने ओ एन सिंह के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। ज्ञातव्य है कि वाराणसी कमिश्नर नितिन गोकर्ण ने मंगलवार को बीएचयू बवाल मामले की जांच रिपोर्ट यूपी सरकार को सौंप दी। इस रिपोर्ट में माहौल बिगाडने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया गया है।    इस जांच रिपोर्ट के बाद यूपी सरकार ने इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। वहीं विपक्षी दलों ने कुलपति को तत्काल हटाने की मांग की है। वाराणसी कमिश्नर की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएचयू प्रशासन ने पीडिता की शिकायत पर गौर नहीं किया और ना ही समय रहते समाधान किया। इस जांच रिपोर्ट के बाद बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। म्   कौन होता है प्रॉक्टर? चीफ प्रॉक्टर विश्वविद्यालय का प्रशासनिक मुखिया होता है। विश्वविद्यालय के साथ ही छात्र छात्राओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी चीफ प्रॉक्टर की ही होती है। कमिश्नर नितिन गोकर्ण की जांच रिपोर्ट के बाद चीफ प्रॉक्टर ने इस्तीफा दे दिया।    साभार-khaskhabar.com       

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वॉशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चेतावनी के बावजूद उत्तर कोरिया एक बाद एक मिसाइल का परीक्षण कर रहा है। उत्तर कोरिया के तानाशाही किम जोन बार-बार अमेरिका पर हमला करने की धमकी दे रहा है। उत्तर कोरिया की इन हरकतों से परेशान होकर अमेरिका ने उस पर नए दौर के प्रतिबंध की घोषणा की है। अमेरिका ने प्योंगयांग के 8 बैंकों और 26 एग्जिक्युटिव्य को बैन किया है। आपको बता दें कि एक सप्ताह के भीतर अमेरिका द्वारा प्योंगयांग पर यह दूसरा प्रतिबंध लगाया है। उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा परिषद 2006 से अब तक नौ बार उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।    वहीं, राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया को चेतावनी दी है कि अमेरिका का सैन्य अभियान प्योंगयांग के लिए तबाही लाने वाला होगा। उन्होंने साथ ही कहा है कि उत्तर कोरिया के बलिस्टिक और परमाणु हथियार कार्यक्रम के खिलाफ सेना का इस्तेमाल पहला विकल्प नहीं है। ट्रंप ने वाइट हाउस कॉन्फ्रेंस में कहा, हम दूसरे विकल्प के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन इसे तरजीह नहीं दी जाएगी। लेकिन अगर हम यह विकल्प चुनते हैं, तो बड़ी तबाही होगी। मैं आपको कह सकता हूं कि यह उत्तर कोरिया के लिए तबाही होगी। जिसे सैन्य विकल्प कहते हैं। अगर हमें यह लेना पड़ा तो हम लेंगे। आपको बताते चले कि अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच चल रहा तनाव दिनों-दिन बढता जा रहा है। इसी कड़ी में उत्तर कोरिया के विेदश मंत्री री योंग हो ने सोमवार को अमेरिका द्वारा युद्ध को घोषणा का दावा किया और इसका माकूल जवाब देने की धमकी दी है। हालांकि, अमेरिका ने उत्तर कोरिया के दावे को बेतुका करार दिया है। उल्लेखनीय है कि प्योंगयांग द्वारा परमाणु परीक्षण कार्यक्रम को जारी रखने से नाराज अमेरिका ने इसके खिलाफ बीते गुरुवार को भी प्रतिबंध की घोषणा की थी और शनिवार को इसके पूर्वी छोर पर बमवर्षकों को उड़ा कर शक्ति प्रदर्शन किया था।     साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। रेप केस में सजा काट रहे राम रहीम की सबसे बडी राजदार और करीबी हनीप्रीत को पुलिस पूरे देश में ढूंढ रही थी। यहां तक की हनीप्रीत को नेपाल में भी तलाशा गया लेकिन हनीप्रीत दिल्ली में मिली। गौरतलब है कि हनीप्रीत को हरियाणा पुलिस पिछले एक माह से तलाश कर रही है। अब आज हनीप्रीत गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर करने वाली है। हनीप्रीत के वकील प्रदीप आर्य का कहना है कि वह हनीप्रीत की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट में ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल याचिका दायर करेंगे और तीन हफ्ते के लिए गिरफ्तारी से छूट मांगेगे। हनीप्रीत सोमवार को लाजपत नगर स्थित अपने वकील प्रदीप आर्य के दफ्तर पहुंची थी।    मैं निर्दोष हूं, सुरक्षा कारणों से सामने नहीं आई: हनीप्रीत  ज्ञातव्य है कि हनीप्रीत 25 अगस्त की शाम से ही गायब है। बता दें कि 25 अगस्त को जब गुरमीत राम रहीम को पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने रेप केस में दोषी ठहराया था, तब तक हनीप्रीत राम रहीम के साथ ही थी। इसके बाद वह राम रहीम के साथ रोहतक भी गई। इसके बाद से वह फरार है। अब हनीप्रीत ने अपने वकील के हवाले से कहा है कि वह निर्दोष है और कहीं भागी नहीं थी। हनीप्रीत का कहना है कि साजिश के तहत उस पर आरोप लगाए गए हैं। हनीप्रीत का कहना है कि पंचकूला हिंसा में उसका कोई हाथ नहीं है। साथ ही उसका कहना है कि वह अभी तक सुरक्षा कारणों की वजह से सामने नहीं आई थी, उसे डर लग रहा था।  हनीप्रीत ने अपने वकील के हवाले से अपने और राम रहीम के अवैध संबंधों पर कहा कि बाप बेटी के रिश्ते को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। ज्ञातव्य है कि हनीप्रीत के पूर्व पति विश्वास गुप्ता ने एक प्रेस कांफ्रेंस में आरोप लगाया है कि हनीप्रीत और राम रहीम के बीच अवैध संबंध है। वे दोनों पति पत्नी की तरह रहते हैं। वहीं हनीप्रीत का कहना है कि उस पर लगे आरोप गलत हैं।    राम रहीम के साथ अवैध संबंधो पर बोली: हनीप्रीत ने अपने वकील के हवाले से अपने और राम रहीम के अवैध संबंधों पर कहा कि बाप बेटी के रिश्ते को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। ज्ञातव्य है कि हनीप्रीत के पूर्व पति विश्वास गुप्ता ने एक प्रेस कांफ्रेंस में आरोप लगाया है कि हनीप्रीत और राम रहीम के बीच अवैध संबंध है। वे दोनों पति पत्नी की तरह रहते हैं। वहीं हनीप्रीत का कहना है कि उस पर लगे आरोप गलत हैं।    साभार-khaskhabar.com     

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वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुए हंगामे की जांच पूरी हो चुकी है। कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने अपनी रिपोर्ट यूपी सरकार को सौंप दी है। कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने अपनी जांच रिपोर्ट में बीएचयू प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि बवाल बढने के लिए बीएचयू प्रशासन जिम्मेदार है। वाराणसी कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने अपनी जांच रिपोर्ट यूपी के चीफ सेक्रेटरी राजीव कुमार को सौंपी है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बीएचयू प्रशासन ने पीडिता की शिकायत पर ढंग से कार्रवाई की और ना ही हालात को सही तरीके से संभाला गया। बता दें के बीएचयू में छेडछाड के बाद छात्राओं ने धरना प्रदर्शन किया। इससे माहौल बिगड गया।   मोदी-शाह ने योगी से जरूरी कदम उठाने को कहा: बीएचयू में उग्र हुए माहौल के बाद पीएम मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से बात की। साथ ही पीएम मोदी ने योगी आदित्यनाथ से इस मामले में जरूरी कदम उठाने को कहा है।    लाठीचार्ज से बिगडा माहौल: ज्ञातव्य है कि गुरुवार रात से ही छेडछाड के विरोध में छात्राएं बीएचयू के गेट पर धरना प्रदर्शन कर रही थी। वहीं बीएचयू परिसर में हिंसा और तनाव की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने 25 थानों की पुलिस बुलाई थी। शनिवार को पुलिस ने छात्राओं पर लाठीचार्ज किया। इसके बाद माहौल बिगड गया। पुलिस के जवान छात्रावासों में घुस गए और स्टूडेंट्स की पिटाई की।    1200 छात्र-छात्राओं पर केस: वहीं पुलिस ने बीएचयू परिसर में शांति भंग और हिंसक वारदात के आरोपों के तहत 1200 अज्ञात छात्र छात्राओं के खिलाफ मामला दर्ज किया। वहीं लाठीचार्ज में दोषी पाए गए लंका थाने के इंचार्ज, भेलूपुर के सीओ और एक अतिरिक्त सिटी मजिस्ट्रेट को हटा दिया गया है।  साभार-khaskhabar.com       

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वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुए हंगामे की जांच पूरी हो चुकी है। कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने अपनी रिपोर्ट यूपी सरकार को सौंप दी है। कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने अपनी जांच रिपोर्ट में बीएचयू प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि बवाल बढने के लिए बीएचयू प्रशासन जिम्मेदार है। वाराणसी कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने अपनी जांच रिपोर्ट यूपी के चीफ सेक्रेटरी राजीव कुमार को सौंपी है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बीएचयू प्रशासन ने पीडिता की शिकायत पर ढंग से कार्रवाई की और ना ही हालात को सही तरीके से संभाला गया। बता दें के बीएचयू में छेडछाड के बाद छात्राओं ने धरना प्रदर्शन किया। इससे माहौल बिगड गया।   मोदी-शाह ने योगी से जरूरी कदम उठाने को कहा: बीएचयू में उग्र हुए माहौल के बाद पीएम मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ से बात की। साथ ही पीएम मोदी ने योगी आदित्यनाथ से इस मामले में जरूरी कदम उठाने को कहा है।    लाठीचार्ज से बिगडा माहौल:ज्ञातव्य है कि गुरुवार रात से ही छेडछाड के विरोध में छात्राएं बीएचयू के गेट पर धरना प्रदर्शन कर रही थी। वहीं बीएचयू परिसर में हिंसा और तनाव की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने 25 थानों की पुलिस बुलाई थी। शनिवार को पुलिस ने छात्राओं पर लाठीचार्ज किया। इसके बाद माहौल बिगड गया। पुलिस के जवान छात्रावासों में घुस गए और स्टूडेंट्स की पिटाई की।    1200 छात्र-छात्राओं पर केस: वहीं पुलिस ने बीएचयू परिसर में शांति भंग और हिंसक वारदात के आरोपों के तहत 1200 अज्ञात छात्र छात्राओं के खिलाफ मामला दर्ज किया। वहीं लाठीचार्ज में दोषी पाए गए लंका थाने के इंचार्ज, भेलूपुर के सीओ और एक अतिरिक्त सिटी मजिस्ट्रेट को हटा दिया गया है।  साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। डेरा चीफ गुरमीत राम रहीम की सबसे करीबी और बडी राजदार हनीप्रीत की तलाश में पुलिस दिल्ली में छापेमारी कर रही है। पुलिस की एक टीम ने हनीप्रीत की तलाश में दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में छापामारी कर रही है। लेकिन अभी तक हनीप्रीत पुलिस के हाथ नहीं लगी। ज्ञातव्य है कि हनीप्रीत के वकील प्रदीप आर्य ने कहा है कि हनीप्रीत कहीं भागी नहीं है, वह दिल्ली में ही है। साथ ही उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में हनीप्रीत की अग्रिम जमानत के लिए अर्जी लगाई है।    प्रदीप आर्य का कहना है कि हनीप्रीत कल सोमवार को उनके ऑफिस आई थी। वहीं हरियाणा पुलिस ने हनीप्रीत के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। हनीप्रीत के अलावा हरियाणा पुलिस ने डेरा प्रवक्ता आदित्य इंसा और पवन हिंसा के खिलाफ भी गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। ये वारंट अक्टूबर के अंततक प्रभावी रहेंगे। अगर इस दौरान आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए तो उन्हें भगोडा घोषित कर दिया जाएगा।    जिसे ढूंढा गली-गली वो दिल्ली में मिली! ज्ञातव्य है कि रेप केस में सजा काट रहे डेरा चीफ गुरमीत राम रहीम की सबसे करीबी और सबसे बडी राजदार हनीप्रीत की तलाश पिछले एक माह से की जा रही है। हरियाणा पुलिस पिछले एक माह से पूरे देश में हनीप्रीत को तलाश रही थी। यहां तक की नेपाल में भी हनीप्रीत को तलाशा गया लेकिन उसके दिल्ली में होन की बात सामने आई है। हनीप्रीत ने सोमवार को अपने वकील प्रदीप आर्य के जरिए कहा कि वह कहीं भागी नहीं थी, बल्कि दिल्ली में ही थी और सुरक्षा कारणों की वजह से सामने नहीं आ रही थी। प्रदीप आर्य का दावा है कि सोमवार को हनीप्रीत उनके ऑफिस में आई थी। आज हनीप्रीत के वकील प्रदीप आर्य दिल्ली हाईकोर्ट में हनीप्रीत की अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। बताया जा रहा है कि वकील प्रदीप आर्या के साथ हनीप्रीत ने करीब 2 घंटे की मुलाकात की थी।   साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। एयरसेल मैक्सिस डील मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंगरब के बेटे कार्ति चिदंबरम पर बडी कार्रवाई करते हुए 90 लाख रुपए मूल्य की संपत्ति, बैंक अकाउंट और एफडी को अटैच कर लिया है। ईडी ने कार्ति चिदंबरम से जुडी कुल 1.16 करोड रुपए मूल्य की चल संपत्तियां जब्त की है। इसमें 26 लाख रुपए का बैंक डिपॉजिट भी शामिल है। साथ ही ईडी को जांच के दौरान यह भी पता चला है कि एयरसेल मैक्सिस केस में एफआईपीबी अप्रूवल पी चिदंबरम द्वारा ही दिया गया था। ज्ञातव्य है कि उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ही थे। साथ ही जांच में सामने आया है कि मैक्सिस ग्रुप से कार्ति और पी चिदंबरम की भतीजी को 2 लाख डॉलर मिले थे।    ज्ञात हो कि एयरसेल मैक्सिस डील में केन्द्रीय जांच एजेंसी पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की भूमिका की भी जांच कर रही है। पी चिदंबरम पर 2006 में मलयेशियाई कंपनी मैक्सिस द्वारा एयरसेल में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने के मामले में रजामंदी देने को लेकर अनियमितताएं बरतने का आरोप है। साथ ही तत्कालीन टेलिकॉम मिनिस्टर दयानिधि मारन पर भी एयरसेल के मालिक सी शिवकृष्णन पर मैक्सिस कंपनी की हिस्सेदारी बेचने का दबाव बनाने का आरोप है।  ज्ञातव्य है कि एयरसेल-मैक्सिस डील केस में ईडी ने अडवांटेज स्टै्रटिजिक और वासन हेल्थकेयर के अधिकारियों के घरों और ऑफिसों की तलाशी ली थी। इनके घरों और दफ्तरों में मिले दस्तावेजों के आधार पर ईडी ने चेस ग्लोबल अडवाइजरी सर्विसेज प्राइवेट लि. की तलाशी ली। इस कंपनी के मालिक कार्ति चिदंबरम हं। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों से पता चला है कि कार्ति का अडवांटेज स्ट्रैटिजिक, सेक्वोया और वेस्टब्रिज से नजदीकी संबंध थे। साभार-khaskhabar.com           

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