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नई दिल्ली। चीन के साथ जारी सीमा विवाद और कश्मीर के ताजा हालात को लेकर मोदी सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के घर पर शाम होने वाली सभी दलों के नेताओं की बैठक है। इस बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी मौजूद रहेंगी। दोनों बड़े मंत्री चीन के साथ सीमा विवाद और कश्मीर के हालात पर बात करेंगे। इस बैठक को सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्ष के साथ बेहतर तालमेल बनाने की सरकार की कोशिश माना जा रहा है।   आपको बता दें कि चीन के साथ सीमा पर जारी विवाद, जम्मू-कश्मीर के बिगड़ते हालात और अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमला इन तीन मुद्दों पर विपक्ष संसद में सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।माना जा रहा है कि विपक्ष ही नहीं, एनडीए सरकार में शामिल बीजेपी के सहयोगी दल भी चीन विवाद और कश्मीर जैसे मुद्दों को संसद में उठा सकते है। शायद यही वजह है कि सभी दलों के प्रमुख नेताओं को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के नाम से न्योता भेजकर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के घर पर बैठक बुलाई गई है। बैठक में सुषमा स्वराज खुद डोकलाम सीमा विवाद पर अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी सभी दलों को देंगी।   वरिष्ठ पत्रकार सुहासिनी हैदर का मानना है कि सरकार की ये बैठक संसद के 17 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र से पहले अहम मुद्दों पर विपक्ष के साथ बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश के तहत बुलाई गई है। सुहासिनी हैदर का कहना है कि भारत सरकार ने कोई विस्तृत ब्रीफिंग नहीं की है। विपक्ष ने मांग की है बताया जाए चीन के साथ क्या हो रहा है। वरना ये मुद्दा संसद के सत्र में छा जाएगा। सुहासिनी हैदर ये भी मानती हैं कि चीन के साथ मौजूदा तनाव एक ऐसे नाज़ुक मोड़ पर है, जिसमें हालात कोई भी मोड़ ले सकता है। साभार-khaskhabar.com     

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लंदन। प्रत्यपर्ण मामले का सामना कर रहे विजय माल्या का कहना है कि भारत में मिस करने लायक कुछ भी नहीं है। ज्ञातव्य है कि विजय माल्या भारत के बैंकों से करीब 9 हजार करोड रुपए का कर्जा लेकर विदेश भाग गए हैं। विजय माल्या फिलहाल लंदन में रह रहा है। भारत सरकार विजय माल्या को भारत लाने का प्रयास कर रही है। इसी संबंध में यूके की एक कोर्ट में विजय माल्या के खिलाफ प्रत्यपर्ण का मामला चल रहा है। वहीं भारत की सुप्रीम कोर्ट में आज विजय माल्या के खिलाफ अवमानना के मामले में सुनवाई होनी है। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आज विजय माल्या के खिलाफ सजा का ऐलान कर सकती है। ज्ञातव्य है कि सुप्रीम कोर्ट ने माल्या को 10 जुलाई को पेश होने का आदेश दिया था, लेकिन कोर्ट ने आदेश का पालन न करने पर उन्हें अवमानना का दोषी करार दिया था।    विजय माल्या बुधवार को फॉर्म्यूला वन के प्रमोशनल इवेंट में पहुंचे थे। वहां विजय माल्या से जब भारत के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होनें कहा कि भारत में याद करने लायक कुछ भी नहीं है। मेरे परिवार के सदस्य या तो इंग्लैंड में रह रहे हैं या फिर अमेरिका में। भारत में कोई नहीं रहता। जहां तक मेरे सौतेले भाई-बहनों का सवाल है, वे सभी यूके के नागरिक हैं। तो परिवार के नजरिए से कुछ भी याद करने लायक नहीं है। विजय माल्या ने कहा कि मैंने कुछ भी गलत नहीं किया। मैं तो खुश हूं कि मामला यूके कोर्ट में है, जहां पक्षपात नहीं होता। अब तो फैसले का इंतजार कर रहा हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि वे यूके का माहौल काफी पसंद कर रहे हैं। उन्होंनें कहा कि वे यहां रोजाना मेहमानों से मिलते हैं और मजे करते हैं।    ज्ञातव्य है कि विजय माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर ब्रिटिश कोर्ट में दो सप्ताह तक होने वाली सुनवाई 4 दिसंबर से शुरू होगी। भारत सरकार ने मुकदमे से जुडे सारे साक्ष्य जमा करा दिए हैं और क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने इनकी समीक्षा भी कर ली है।  साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली । अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले को लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने बुधवार को ट्विटर के जरिए पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए लिखा कि पीएम मोदी की गलत नीतियों की वजह से आतंकियों ने घाटी में पैर पसारे हैं। राहुल गांधी ने लिखा कि पीएम की गलत नीतियों के कारण देश को काफी नुकसान हुआ है। राहुल गांधी ने अपने ट्विट में लिखा है कि पीएम मोदी ने थोडे समय के राजनीतिक फायदे के लिए पीडीपी से जो गठबंधन किया है, वह देश की सुरक्षा पर भारी पडा।  साथ ही राहुल गांधी ने लिखा कि पीएम मोदी के व्यक्तिगत फायदे के कारण निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पडी और देश को राजनीतिक नुकसान हुआ। ज्ञातव्य है कि सोमवार को कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों ने अमरनाथ यात्रियों की एक बस पर हमला कर दिया था। इस हमले में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और 19 लोग घायल हो गए।  महबूबा ने की थी कश्मीरियों की तारीफ: वहीं जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने आज कश्मीरियों की तारीफ की। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले से हर कोई दुखी है, यह एक निंदनीय घटना थी। महबूबा ने कहा कि काफी वर्षों के बाद कश्मीर किसी मुद्दे पर एकजुट हुआ है, हर कश्मीरी को इस हमले से दुख हुआ है।  कश्मीर कभी भी ऐसे हमलों के साथ नहीं है। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा पर आते हैं और कश्मीर के लोग उनकी सेवा भी करते हैं। साथ ही उन्होनें कहा कि कोई कितनी भी कोशिश करले लेकिन कभी भी कश्मीरियत खत्म नहीं होगी। साभार-khaskhabar.com    

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पटना । बिहार के उपमुख्यमंत्री और लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव के समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों द्वारा मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट करने का मामला सामने आया है। घटना सचिवालय की के अंदर की है। ज्ञातव्य है कि आज बिहार सरकार की कैबिनेट बैठक थी। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी कैबिनेट बैठक में शामिल हुए। जब तेजस्वी बैठक से बाहर आए तो उन्होनें मीडिया से बातचीत की। इस दौरान जब मीडियाकर्मियों ने तेजस्वी यादव से सवाल पूछे तो उनके सुरक्षाकर्मी और समर्थक भडक गए और मीडियाकर्मियों से हाथापाई करने लगे। दरअसल मीडियाकर्मी बीजेपी के इस्तीफे की मांग को लेकर तेजस्वी यादव से सवाल कर रहे थे।  यह सवाल पूछने पर तेजस्वी यादव के समर्थक और सुरक्षागार्ड भडक गए और मीडियाकर्मियों पर हमला कर दिया। वही मारपीट से पहले तेजस्वी यादव भी मीडिया पर भडक गए थे। मारपीट से पहले तेजस्वी ने मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा था कि मीडिया का एक तबका मोदी परस्त है और गुंडा है। ज्ञातव्य है कि आरजेडी नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। ज्ञातव्य है कि तेजस्वी रेलवे टेंडर घोटाले में घिरे हैं। कैबिनेट बैठक के बाद आज तेजस्वी ने पहली बार अपने बचाव में और विरोधियों पर भी जमकर हमला बोला। तेजस्वी ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए पीएम मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर हमला बोला। तेजस्वी ने कहा कि यह बीजेपी की साजिश है। तेजस्वी ने कहा कि जब यह मामला हुआ था तब मैं 13-14 साल का था और तब तो मेरे मूंछे भी नहीं आई थी, भ्रष्टाचार क्या करता।  साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली। चीन बॉर्डर पर लगातार ड्रैगन की हरकतें बढ़ती जा रही है। इसी को लेकर केंद्र सरकार अब जाकर एक्शन मूड में आ चुकी है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने स‌र्वदलीय बैठक बुलाई है।  लगातार पाकिस्तान की ओर से बॉर्डर पर सीज फायर का उल्लंघन किया जा रहा है, आतंकवादी बेगुनाह लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार कोई ठोस कदम उठाने के मूड में नजर नहीं आ रही है। वहीं पाकिस्तान के साथ आतंकवाद के मुद्दे पर हाथ पर हाथ धरे बैठने वाली केंद्र सरकार अब चीन को करारा जवाब देने के लिए क्या रणनीति बनाएगी।  चीन की ओर से जारी तनाव के बीच ये बैठक शुक्रवार शाम 5 बजे को राजनाथ सिंह के आवास पर होगी। बैठक में सभी चीन से जुड़ी सभी जानकारियां दी जाएंगी।  बता दें कि सिक्कम बॉर्डर पर डोकलाम के मुद्दे पर भारत और चीन के बीच तनातनी का माहौल है।  चीन ने अपने अखबार में भारत को धमकी भरे लहजे में भड़काऊ लेख के जरिए चेताया भी था। अब देखना होगा कि सर्वदलीय बैठक में कौन से पार्टी के नेता शामिल होते है।  साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । अमरनाथ यात्रियों से भरी जिस बस पर सोमवार को आतंकियों ने हमला किया, उसके ड्राइवर सलीम की बहादुरी के चर्चे अब हर जगह सुनाई दे रहे है। सलीम की इस दिलेरी को यात्रियों के साथ देश के नेताओं ने भी सलाम किया है। वहीं, जम्मू-कश्मीर सरकार ने बहादुरी दिखाने वाले ड्राइवर को 2 लाख रुपये का इनाम देने का ऐलान किया है। दूसरी ओर, यह खबर आ रही है कि गुजरात सरकार वीरता पुरस्कार के लिए ड्राइवर सलीम का नाम भेजेगी। सूरत एयरपोर्ट पर हमले में मारे गए गुजरात के 5 यात्रियों को श्रद्धांजलि देने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने कहा कि ड्राइवर ने जिस तरह दो किलोमीटर तक बिना रुके बस चलाकर आतंकियों की पहुंच से दूर निकाला, इसके लिए वह उन्हें धन्यवाद देते हैं। उन्होंने सलीम को वीरता पुरस्कार देने की मांग भी की। हमले के बाद सलीम ने दिलेरी और जांबाजी दिखाते हुए तब तक बस को चलाना जारी रखा, जब तक बस आतंकियों की पहुंच से दूर नहीं हो गई। सलीम ने मंगलवार को आतंकी हमले के दौरान के खौफनाक लम्हों को याद करते हुए कहा कि आठ बजे के आसपास बस पर सामने से फायरिंग हुई। आतंकवादी अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे। इससे बस में सवार यात्री घबरा गए थे, तभी मैंने कंडक्टर से बस का गेट ठीक से बंद करने को कहा। इसके बाद बस की स्पीड बढा दी। बस जहां पहले 60 की स्पीड से चल रही थी, वहां उसे मैं 80-85 की स्पीड से चलाने को मजबूर हो गया। मैं गाड़ी चलाता रहा तभी एक गोली बगल में बैठे मेरे साथी को लगी। लेकिन, मैं रुका नहीं और बस चलाता रहा। सलीम ने कहा कि उस वक्त खुदा ने मुझे आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी और मैं रुका नहीं। हादसे में बचे कई यात्रियों ने बताया कि बस ड्राइवर ने सूझबूझ दिखाते हुए मौके से बस को किसी तरह भगाकर सुरक्षाबल के कैंप तक पहुंचाया। उनके मुताबिक अगर आतंकी बस में सवार होने में कामयाब हो जाते तो जानमाल का बड़ा नुकसान हो सकता था। आपको बता दें कि इस आतंकी हमले में कुल 7 यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि 30 से ज्यादा घायल हो गए थे। खुलासा हुआ है कि गुजरात के रजिस्ट्रेशन नंबर जीजे09जेड9976 वाली बस अमरनाथ श्राइन बोर्ड में रजिस्टर नहीं थी।  साभार-khaskhabar.com

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श्रीनगर । जम्मू-कश्मीर के बडगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन आतंकी को मार गिराया है। बताया जा रहा है कि तीनों आतंकी हिजबुल मुजाहिद्दीन है। सोमवार को अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले के बाद से सेना की बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, सुरक्षाबल के जवान इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे, इसी दौरान आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के रेडोरा इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ मंगलवार रात से ही चल रही थी। यहां पर सुरक्षा बलों को 2 से 3 आतंकियों के छुपे होने की खबर मिली थी। जिसके बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान में जुट गए। पुलिस ने आस पास के घरों को खाली करा लिया था।  एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सोमवार को अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले के बाद आतंवादियों की तलाश में चलाए गए। अभियान के तहत महगाम इलाके में स्थित रुदवोड़ा गांव में घेरेबंदी डाले सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम पर देर शाम 7.30 बजे अतंकवादियों ने गोलीबारी कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हुई। गांव को घेर रखे सुरक्षा बलों की टीम में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सेना की आतंकवाद-रोधी इकाई राष्ट्रीय राइफल्स और जम्मू एवं कश्मीर पुलिस का विशेष अभियान समूह शामिल है। सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि 176 बटालियन के जवान, दूसरी आरआर और एसओजी के साथ तलाशी अभियान में निकले हुए थे, तभी यह मुठभेड़ शुरू हुई। इस बीच श्रीनगर में आर्मी चीफ की समीक्षा बैठक में आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब जारी रखने की योजना बनाई गई है। एनकाउंटर की यह घटना जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों की बस पर किए गए हमले के एक दिन बाद सामने आई है। सोमवार (10 जुलाई) को अमरनाथ यात्रा के दौरान हुए आतंकी हमले में सात लोगों को मौत हो गई और 30 लोग घायल हो गए। मारे गए ज्यादा लोग गुजरात के थे। यह हमला अनंतनाग जिले के श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे पर रात को 8 बजकर 10 मिनट के करीब हुआ था। साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली । किसी कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों को बिना किसी अनुबंध के अगर 50,000 रुपये से अधिक का उपहार प्रदान किया जाता है तो उस पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत कर चुकाना होगा। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने यहां एक बयान में कहा, ‘‘यह सूचना दी जाती है कि कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों को किसी प्रकार का गिफ्ट या अतिरिक्त सुविधा दी जाती है, जिसका मूल्य साल में 50,000 रुपये से ज्यादा है तो उस पर जीएसटी के हिसाब से कर लगेगा, जो व्यापार या व्यवसाय में प्रगति होने के कारण दिया गया हो। 50,000 रुपये तक के उपहार पर जीएसटी नहीं लगेगा।’’ हालांकि, जीएसटी कानून के अंतर्गत गिफ्ट की परिभाषा निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन सामान्य प्रचलन में इसे बिना किसी अनुंबध के दिया जाता है जो कि कभी कभार बिना किसी विचार-विमर्श के कंपनियों द्वारा स्वेच्छा से अपने कर्मचारियों को दिया जाता है। गिफ्ट प्राप्त करना किसी कर्मचारी का अधिकार नहीं है और ना ही कर्मचारी गिफ्ट के दावे को लेकर अदालत जा सकता है। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि नियोक्ता के साथ कर्मचारियों को अनुबंध के तहत मिले लाभों को जीएसटी के दायरे में नहीं लाया जाएगा। इसके अलावा जीएसटी के अंतर्गट इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) योजना का लाभ किसी क्लब, हेल्थ या फिटनेस सेंटर की ग्राहकी पर नहीं मिलेगी। इसमें कहा गया, ‘‘इसलिए ऐसी सेवाएं अगर कंपनी अपने कर्मचारियों को मुफ्त प्रदान करती है तो वह जीएसटी के दायरे में नहीं आएगी, जबकि इन सेवाओं की खरीद करते वक्त कंपनी ने जीएसटी का भुगतान कर दिया हो।’’ इसी प्रकार से कंपनी द्वारा अनुबंध के तहत अपने कर्मचारियों को मुफ्त आवास की सेवा देने पर भी जीएसटी नहीं लगेगा। साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली । कांग्रेस और अन्य प्रमुख विपक्षी दल मंगलवार को बैठक कर अपने एक संयुक्त उप-राष्ट्रपति उम्मीदवार का चयन करेंगे। वहीं सत्तारूढ़ भाजपा 13 जुलाई को अपने उप-राष्ट्रपति उम्मीदवार पर अंतिम फैसला ले सकती है। पहले से ही राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियां और सत्तारूढ़ भाजपा अपने-अपने उम्मीदवारों के साथ आमने-सामने हैं, ऐसे में उप-राष्ट्रपति चुनाव में भी यह मुकाबला देखने को मिल सकता है। विपक्षी दल के सूत्रों ने दावा किया है कि अब तक अनौपचारिक चर्चा में भी किसी उम्मीदवार का नाम सामने नहीं आया है। यहां तक कि कांग्रेस भी अपना कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा करना चाहती। संसदीय ग्रंथालय भवन में होने वाली विपक्षी दलों की इस बैठक में जनता दल (युनाइटेड) सहित 18 विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि जद (यू) राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के समर्थन में है। हालांकि मंगलवार को होने वाली विपक्षी दलों की बैठक में जद (यू) के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हिस्सा नहीं लेंगे। उनकी जगह वरिष्ठ नेता शरद यादव बैठक में जद (यू) का प्रतिनिधित्व करेंगे। बैठक में हिस्सा लेने वाले अग्रणी नेताओं में माक्र्सवाद कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता डी. राजा, समाजवादी पार्टी (सपा) के महासचिव रामगोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नेता सतीश मिश्रा शामिल हैं। विपक्षी दलों के सूत्रों ने बताया कि उप-राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर उनकी पसंद दक्षिण भारत की कोई गैर-कांग्रेसी हस्ती होगी। विपक्षी दल के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस को बताया, ‘‘अगर कल (मंगलवार) उप-राष्ट्रपति उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला हो जाता है, तो हम इसकी घोषणा कर देंगे।’’ साभार-khaskhabar.com    

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श्रीनगर। जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों की बस पर हुए आतंकी हमले के मामले में कई खुलासे हुए हैं। इस आतंकी हमले के पीछे लश्कर ए तैयब्बा का हाथ बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस हमले में लश्कर आतंकी इस्माइल का हाथ हो सकता है। माना जा रहा है कि इस हमले में 3 से 5 आतंकी शामिल थे। ज्ञातव्य है कि सोमवार को अमरनाथ यात्रियों की एक बस श्रीनगर से जम्मू की ओर जा रही थी। जैसे ही बस अनंतनाग में बटेंगू के पास पहुंची तो बाइक से आए आतंकियों ने बस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 32 लोग घायल हो गए।    हमले के पीछे आतंकी संगठन लश्कर ए तैयब्बा का हाथ होने की बात सामने आ रही है। इंटेलीजेंस सूत्रों के अनुसार इस पूरे हमले में 3 से 5 लश्कर-ए-तैयब्बा के आतंकी शामिल थे। साथ ही लश्कर-ए-तैयब्बा का आतंकी इस्माइल इन आतंकियों के ग्रुप का नेतृत्व कर रहा था। हमले के दौरान वहां पर मौजूद कई गाडियों को भी गोलियां लगी। हमला करने के बाद हमलावर एक गली से भाग निकले, सबसे पहले पुलिस की गाडी पर हमला हुआ। हमला करने के बाद नेशनल हाइवे पर सुरक्षा व्यवस्था कडी कर दी गई है। ज्ञातव्य है कि हाल के दिनों में सुरक्षाबलों ने अपने कई ऑपरेशनों में लश्कर आतंकियों के ढेर किया है। पिछले हफ्ते ही सुरक्षाबलों ने 17 घंटे चले ऑपरेशन में लश्कर कमांडर बशीर लश्करी समेत 3 आतंकियों को ढेर कर दिया था।   साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली। विपक्ष ने आज उपराष्ट्रपति पद के अपने उम्मीदवार का चयन कर लिया है। ज्ञातव्य है कि उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर विपक्षी दलों ने आज बैठक बुलाई थी। इस बैठक में विपक्ष के 18 दलों के नेता मौजूद थे। बैठक में सभी ने सर्वसम्मति से महात्मा गांधी के पौत्र गोपाल कृष्ण गांधी को उपराष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाए जाने पर सहमति दी। इसके बाद विपक्ष ने गोपाल कृष्ण गांधी के नाम की घोषणा की है। विपक्षी दलों की यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया की अध्यक्षता में हुई।   इस बैठक में सोनिया गांधी के अलावा राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, मल्लिकार्जुन खडग़े, गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, ए के एंटनी, डेरेक ओ ब्रायन, आरजेडी से जयप्रकाश नारायण यादव, एसपी से नरेश अग्रवाल, एनसीपी से प्रफुल पटेल, डीएमके से तारिक अनवर एलांगवन, शरद यादव, उमर अब्दुल्ला, हेमंत सोरेन और अजित सिंह शामिल थे।    बैठक में नहीं आए नीतीश कुमार: ज्ञातव्य है कि राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी दलों को झटका देने वाले जेडीयू चीफ नीतीश कुमार इस बैठक में भी शामिल नहीं हुए। ज्ञातव्य है कि नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को समर्थन ना देकर रामनाथ कोविंद को समर्थन दिया था। हांलांकि उप राष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा के लिए बुलाई गई विपक्ष की इस बैठक में जेडीयू की ओर से शरद यादव शामिल हुए। वहीं आरजेडी की तरफ से जेपी यादव बैठक में शामिल हुए।    विपक्ष ने की एकजुटता दिखाने की कोशिश: उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर बुलाई गई इस बैठक में विपक्ष ने एकजुटता दिखाने की काशिश की। ज्ञातव्य है कि कांग्रेस को चिंता इस बात की है कि यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि विपक्षी एकता में फूट पड चुकी है।    ज्ञातव्य है कि राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार को समर्थन की घोषणा करने से पहले जेडीयू ने विपक्ष की उस बैठक में हिस्सा लिया था जिस में विपक्ष उम्मीदवार को लेकर चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि जेडीयू विपक्षी खेमे के साथ ही रहेगी। हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला नीतीश कुमार को ही करना है।    साभार-khaskhabar.com    

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पटना । बढते संकट के बीच बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने आज अपने आवास पर विधायक दल की बैठक बुलाई है। इस बैठक में लालू सहित उनके बेटे और सूबे के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव सहित पार्टी के सभी विधायक मौजूद रहेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि लालू तेजस्वी यादव पर कोई बड़ा फैसला ले सकते है। वहीं मंगलवार को नीतीश कुमार अपने विधायकों, पार्टी के बडे नेताओं और जिलाध्याक्षों से मुलाकात करेंगे।  तेजस्वी आरजेडी विधायक दल के नेता हैं और नीतीश कुमार सरकार में डिप्टी सीएम हैं। जिस तरह तेजस्वी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं, उसके बाद तेजस्वी के इस्तीफे की मांग तेज हो चली है। माना जा रहा है कि चौतरफा दबाव में घिरे लालू यादव भी नैतिक आधार पर तेजस्वी के खिलाफ कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। ताकि विरोधियों के बुलंद स्वर पर विराम लगाया जा सके। आपको बता दें कि पिछले हफ्ते लालू यादव के दिल्ली-पटना समेत 12 ठिकानों पर सीबीआई ने छापेमारी की थी। सीबीआई ने लालू उनकी पत्नी राबड़ी और उनके बेटे तेजस्वी पर लालू के रेलवे मंत्री रहने के दौरान होटल आवंटन मामले में केस दर्ज किया है। उसके बाद बेटी मीसा और दामाद शैलेश कुमार के ठिकानों पर ईडी ने भी छापेमारी की थी। इसपर नीतीश कुमार की चुप्पी से नाराज लालू यादव ने आज अपने सभी विधायकों की बैठक बुलाई है। वहीं दूसरी तरफ, बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने मंगलवार को अपने विधायकों की बैठक बुलाई है। जिस तरीके से लालू के परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार ईडी और सीबीआई की कार्रवाई चल रही है, उस पर नीतीश कुमार ने चुप्पी साध रखी है। ऐसे में माना ये भी जा रहा है कि उनकी ये खामोशी किसी बड़े सियासी भूचाल की तरफ इशारा कर रही है। साभार-khaskhabar.com  

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