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नई दिल्ली । आतंकी सैयद सलाउद्दीन ने स्वीकार किया है कि उसने भारत में आतंकवादी हमले करवाए हैं। एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में सैयद सलाउद्दीन ने कहा कि उसके आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन ने भारत में आतंकी वारदातों को अंजाम दिया है। ज्ञातव्य है कि हाल में सैयद सलाउद्दीन को अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया है। वहीं भारत भी पहले से दावा करता आ रहा है कि पाकिस्तान उन आतंकियों का पनाहगाह बना हुआ है जो कि भारत में आतंक फैलाते हैं। जिओ टीवी को दिए साक्षात्कार में सलाउद्दीन ने कहा है कि अभी उनका फोकस भारतीय सुरक्षाबलों पर है। साथ ही उसने कहा कि उसके संगठन ने अभी तक जिन ऑपरेशन को अंजाम दिया है या देने वाले हैं, वे पूरी तरह से भारतीय सुरक्षाबलों पर हैं। साथ ही सैयद सलाउद्दीन ने कश्मीर को अपना घर बताया है और दावा किया है कि भारत में उसके कई समर्थक हैं।  उसने कहा कि बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में विद्रोह हो रहा है। उसने टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में यह भी स्वीकार किया कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार से हथियार खरीदता है। साथ ही उसने कहा कि वह पैसे मिलने पर इन हथियारों को कहीं भी सप्लाई कर सकता है। उसने यह भी कहा कि वह भारत में किसी भी जगह को निशाना बना सकता है। अमेरिका ने घोषित किया अंतरराष्ट्रीय आतंकी: ज्ञातव्य है कि हाल ही में पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले पाकिस्तान को झटका देते हुए यूएस ने सैयद सलाउद्दीन का नाम अतंरराष्ट्रीय आतंकवादियों की सूची में शामिल किया था। वहीं अमेरिका के इस कदम से बौखलाए पाकिस्तान के इसे पूरी तरह नाइंसाफी करार दिया था। ज्ञातव्य है कि सलाउद्दीन फिलहाल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में रहता है। हिज्बुल के अलावा वह यूनाइटेड जिहाद काउंसिल भी चलाता है। पठानकोट एयरबेस स्टेशन पर हमले की जिम्मेदारी इसी यूनाइडेट जिहाद काउंसिल ने ली थी। इंटेलिजेंस के सूत्रों के मुताबिक, सलाउद्दीन पाकिस्तान में अपने सुरक्षित ठिकाने से जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को नियंत्रित करता है। साभार-khaskhabar.com  

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वाशिंगटन । हाल ही में पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में हुई पहली द्विपक्षीय मुलाकात रंग लाई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के विदेश विभाग ने भारत को 22 प्रीडेटर गार्जियन ड्रोन के निर्यात के लिये अनिवार्य लाइसेंस जारी कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अमेरिकी विदेश विभाग ने डीएसपी-5 गार्जियन निर्यात लाइसेंस जारी किया है। यह लाइसेंस सैन्य सामग्री के स्थायी निर्यात के लिये जारी किया गया है। ज्ञातव्य है कि हाल ही में अमेरिका दौर के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की बात कही थी।  अब गार्जियन ड्रोन से हिंद महासागर में भारत की निगरानी क्षमताओं में इजाफा होगा। ज्ञातव्य है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने भी कहा था कि दक्षिण एशिया में सुरक्षा मजबूत करने के लिए अमेरिका, भारत को जरूरी संसाधन एवं तकनीक मुहैया कराएगा। इस क्षेत्र में चीन के आक्रामक कूटनीतिक और सैन्य रवैये से अन्य देश सकते में हैं। ट्रंप प्रशासन का यह फैसला भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी बढ़ाने की ओर कदम है।  साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने प्रणब मुखर्जी की उंगली पकडक़र दिल्ली में खुद को सेट किया। राष्ट्रपति मुखर्जी को प्यार से प्रणब दा संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि प्रणब दा की उंगली पकड कर दिल्ली की जिंदगी में अपने आप को सेट करने में बहुत सुविधा मिली। प्रधानमंत्री ने यहां राष्ट्रपति मुखर्जी पर एक पुस्तक प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी- अ स्टेट्समैन के अनावरण के मौके पर यह बातें कहीं। अपने संबोधन के दौरान मोदी ने भावुक होते हुए कहा कि बीते तीन वर्षो के दौरान ऐसा एक भी मौका नहीं होगा जब वह मुखर्जी से मिले हों और मुखर्जी ने उन्हें पिता का स्नेह न दिया हो।  मोदी ने कहा, वह अक्सर मुझसे कहा करते हैं मोदी जी आपको आधे दिन का आराम कर लेना चाहिए। आप इतनी भाग-दौड़ क्यों करते हैं, अपने कार्यक्रमों को कम कीजिए, अपने स्वास्थ्य का खयाल रखिए।  प्रधानमंत्री ने कहा कि वह खुद को सौभाग्यशाली महसूस करते हैं कि उन्हें राष्ट्रपति मुखर्जी के साथ काम करने का मौका मिला। राष्ट्रपति मुखर्जी पर अनावृत्त पुस्तक के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा, इस किताब में मौजूद तस्वीरों में हमें अपने राष्ट्रपति के मानवीय पहलू भी देखने को मिलेंगे और हमें उन पर गर्व होगा। इसी मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी खुलासा किया कि उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच कुछ वैचारिक मतभेद रहे हैं, लेकिन दोनों ने अपने-अपने मतभेद अपने पास रखे और सरकार के कामकाज को प्रभावित नहीं होने दिया। 13वें राष्ट्रपति के रूप में मुखर्जी के जीवन की चित्रमय यात्रा वाली इस किताब का प्रकाशन स्टेटमैन समूह ने किया है, जिसका विमोचन मोदी ने किया और उसकी पहली प्रति राष्ट्रपति को भेंट की। वित्तमंत्री अरुण जेटली की तरफ देखते हुए मुखर्जी ने कहा कि वह खास मुद्दों के बारे में जानकारी के लिए जेटली को अक्सर फोन किया करते थे, और जेटली एक सक्षम और प्रभावी वकील की तरह हमेशा उन्हें समझाते थे। मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को यहां कहा कि देश के नागरिकों को आवश्यक कर भुगतान के लिए तैयार होना चाहिए और एक विकासशील राष्ट्र से विकसित राष्ट्र की तरफ बढऩे के लिए एक नई सोच बनानी चाहिए। जेटली ने द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ट अकाउंट्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित चार्टर्ट अकाउंट्स दिवस को संबोधित करते हुए कहा, विमुद्रीकरण के दौरान मैंने कहा था कि भारत को अब नई सामान्य स्थिति को परिभाषित करने की आवश्यकता है और सामान्य स्थिति यह है कि मुझे जो भी कर भुगतान करना है, उसे मुझे भुगतान करना आवश्यक है। जेटली ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत एक विकासशील देश से विकसित देश की तरफ आगे बढ़े। उन्होंने कहा, देश को आगे ले जाने के लिए इस सोच को भी एक विकसित अर्थव्यवस्था की सोच बननी चाहिए।   सरकार ने शनिवार को देशभर में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू कर दिया है। जेटली ने कहा कि दशकों से यहां कर अदा करने से बचने की प्रवृत्ति रही है। उन्होंने सोने पर एक प्रतिशत कर का जिक्र किया, जिसके कारण देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था और उसे वापस लेना पड़ा था। लेकिन ऐसे ही लोगों ने सोने पर तीन प्रतिशत कर लगाने के जीएसटी परिषद के निर्णय का स्वागत किया। जेटली ने कहा कि सरकार देश चलाने के लिए हमेशा विभिन्न संस्थानों से कर्ज नहीं ले सकती। सरकार को करों के माध्यम से देश के नागरिकों से ही धन जुटाना होगा। उन्होंने कहा, हम इसे इसलिए नहीं कर सकते, क्योंकि हमारी व्यवस्था में कर वंचना की प्रवृत्ति बन गई है।   उन्होंने जीएसटी के बारे में कहा कि इससे आर्थिक व्यवस्था सुदृढ़ होगी और औपचारिक अर्थव्यवस्था विकसित होगी। जेटली ने मौजूदा कर आधार का जिक्र करते हुए कहा कि यह बहुत कम है। 130 करोड़ आबादी में से मात्र 78 लाख लोग अपनी आय पांच लाख रुपये से अधिक दिखाते हैं, जिनमें से 61 लाख लोग वेतनभोगी हैं। उन्होंने कहा कि तीन महत्वपूर्ण श्रेणियों -सेवा कर, मूल्यवर्धित कर और उत्पाद शुल्क- के तहत अप्रत्यक्ष कराधान में कुल 80 लाख लोग पंजीकृत हैं, जो कुल आबादी के एक प्रतिशत से कम है। उन्होंने कहा, यह समाज का एक प्रतिशत शीर्ष आर्थिक वर्ग है, जो कहता है कि उन्हें नहीं पता कि कंप्यूटर कैसे चलाना है और इसलिए मैं कर भुगतान करना नहीं चाहता। जेटली ने कहा कि 80 लाख अप्रत्यक्ष करदाताओं में से जो 20 लाख रुपये प्रतिवर्ष से नीचे वाले हैं, उन्हें छूट मिली हुई है और जो 75 लाख रुपये से ऊपर हैं, उनको संयोजन मुहैया कराया गया है। उन्होंने कहा, कृपया देश के लिए कुछ कीजिए- रक्षा और विकास के लिए। हमारी व्यवस्था ऐसी रही है कि जिसमें कर भुगतान न करना गलत नहीं रहा है। कोई भी धारा यह दावा नहीं कर सकती कि मैंने कर भुगतान नहीं किया है, इसलिए मैं भुगतान नहीं करूंगा। उन्होंने कहा, झुकने वाली सरकार कभी सुधार नहीं ला पाएगी। हम किसी भी सुधार को लेकर भयभीत नहीं हुए। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली। देशभर में गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स यानी जीएसटी देशभर में लागू हो गया है। रात के ठीक 12 बजते ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साथ बटन दबाकर पूरे देश में एक टैक्स व्यवस्था की शुरुआत की। इस लॉन्चिंग के साथ ही देश में एक समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू हो गई। जीएसटी लागू होने के मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज मौजूद रहे। जीएसटी लागू होने के बाद देशभर में जश्न का माहौल है। दिल्ली, यूपी, गुजरात सहित कई राज्यों में जीएसटी लागू होते ही जश्न मनाया गया। जीएसटी लागू होने के साथ ही लोगों ने फटाखे फोड़े और ढोल नगाडों की धुन पर डांस करके जमकर जश्न मनाया।    इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि ऐतिहासिक क्षण दिसंबर, 2002 में शुरू हुई लंबी यात्रा की परिणति है। प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी को देश भर के तमाम राज्यों की सरकारों के बीच सहमति और देश हित के लिए सबके साथ आने का प्रतीक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है। इस पर सालोंसाल चर्चा हुई है। मौजूदा और पूर्व के सांसदों ने इस पर लगातार बात की है। इस सतत प्रयास का ही परिणाम है कि हम आज जीएसटी को साकार होते देख रहे हैं। जब संविधान बना तो देश के लिए समान अधिकार और समान अवसर की व्यवस्था खड़ी हुई। आज जीएसटी एक तरह से सभी राज्यों के मोतियों को एक धागे में पिरोने का काम कर रहा है।   वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी को देश के सभी लोगों की साझी विरासत करार दिया। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह किसी एक दल या सरकार की सिद्धि नहीं है। यह हम सभी के प्रयासों का नतीजा है। जीएसटी सहकारी संघीय ढांचे की एक मिसाल है। जीएसटी इस बात का प्रतीक का है कि टीम इंडिया की एकजुटता का क्या परिणाम हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसी की भी या कहीं की भी सरकार हो, लेकिन सभी ने जीएसटी में आम लोगों के हितों का ध्यान रखा है। पीएम मोदी ने कहा कि जिन-जिन लोगों ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, मैं उन सभी को बधाई देता हूं। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जीएसटी लागू होने से पहले आज तक काउंसिल की 18वीं बैंठकें हुईं। मोदी ने कहा कि गीता के भी 18 अध्याय थे और जीएसटी काउंसिल की भी 18 बैठकें हुई हैं। मोदी ने जीएसटी को गुड एंड सिंपल टैक्स बताया। उन्होंने कहा कि गुड इसलिए क्योंकि टैक्स पर टैक्स से लोगों को मुक्ति मिलेगी।   उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था को लेकर तमाम आशंकाएं थीं, लेकिन इसे तमाम प्रयासों के बाद लागू किया जा सका है। चाणक्य का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कोई वस्तु कितनी ही दूर हो या कठिन हो, लेकिन तपस्या के जरिए उसे पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के वक्त सरदार पटेल ने जिस तरह 500 से ज्यादा रियासतों को मिलाकर एक किया था, उसी तरह जीएसटी के जरिए देश का एकीकरण हो रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि देश के 29 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों के 500 से ज्यादा टैक्सों का विलय हो जाएगा। अब गंगा नगर से ईटानगर एक टैक्स, एक देश का नारा गूंजेगा। अरुण जेटली ने कहा कि हम गौरवशाली देश के ऐतिहासिक मौके पर उपस्थित हैं। इससे भारत के सामने असीम संभावनाओं के द्वार खुलेंगे और उसे अपनी इकॉनमी को मजबूत करने का मौका मिलेगा। इससे भारत एक मार्केट-एक देश के तौर पर उभरेगा। इससे देश के सभी राज्य संघीय ढांचे के तहत एक साथ आगे बढ़ सकेंगे। हमने इसे ऐसे समय में किया है, जब दुनिया धीमी ग्रोथ और संरक्षणवाद के दौर से गुजर रही है। अरुण जेटली ने कहा कि इस लॉन्चिंग के साथ ही देश में 17 से ज्यादा टैक्सों की जगह सिर्फ एक ही टैक्स ले लेगा। साभार-khaskhabar.com        

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राजकोट। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज से दो दिवसीय गुजरात दौरे पर हैं। गुरुवार को पीएम मोदी ने राजकोर्ट में रोड शो किया। रोड शो के बाद पीएम मोदी ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि 40 साल बाद कोई पीएम राजकोट आया है। साथ ही उन्होनें कहा कि राजकोट की उनके दिल में खास जगह है। उन्होनें कहा कि उनके राजनीति की शुरुआत गुजरात से हुई है। दिव्यांगों के लिए एक साइन लैंग्वेज कानून बनाया: पीएम मोदी ने यहां जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि दिव्यांगों की जिम्मेदारी पूरे समाज की है। आजादी के 70 साल बाद भी देश के हर राज्य में दिव्यागों के लिए अलग अलग साइन लैंग्वेज है। इससे दिव्यांग देश में कही भी जाता तो उसे परेशानी होती, उसे समझने के लिए कारेई इंटरप्रेटर नहीं था। मोदी ने कहा कि हमने एक कानून बनाया कि देश के सभी बालकों को एक साइन लैंग्वेज सिखाया जाए और इसकी व्यवस्था की। पीएम मोदी ने कहा कि यह काम बहुत छोटा लगता है, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण है।    हवाई अड्डे तक रोड शो: पीएम मोदी दो दिवसीय गुजरात दौरे के दौरान कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। राजकोट में पीएम मोदी दिव्यांगों को जरूरी उपकरण बांटेंगे। इसके बाद वे आजी बांध जाएंगे, जहां वह नर्मदा के जलावतरण का स्वागत करेंगे। इसके बाद बांध से स्थानीय हवाई अड्डे तक पीएम मोदी रोड शो कर रहे हैं। शाम को मोदी गांधी नगर रवाना हो जाएंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीएम मोदी उत्तरी गुजरात के अरावली जिले के मोदासा जाएंगे। यहां पीएम मोदी 552 करोड रुपये की लागत से दो जलापूर्ति योजनाओं का उद्घाटन करेंगे। साथ ही एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।    साबरमती में गोरक्षकों को दिया कडा संदेश: इससे पहलेपीएम मोदी ने साबरमती आश्रम में लोगों को संबोधित किया। यहां मोदी ने गौरक्षा पर लगातार देशभर में हो रही हिंसा पर कडा संदेश दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने एक वाकया भी सुनाया, जिसे सुनाते वक्त वह काफी भावुक हो गए थे। साथ ही साबमती आश्रम की 100वीं वर्षगांठ पर उन्होंने महात्मा गांधी के आध्यात्मिक गुरु माने जाने वाले श्रीमद राजचन्द्र पर स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया।    साभार-khaskhabar.com      

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पेइचिंग। सिक्किम में सीमा विवाद को लेकर चीन और भारत के बीच तनातनी चल रही है। तनातनी से बौखलाए चीन ने भारत को धमकी दी है कि जब तक भारत सिक्किम की सीमा से सैनिक नहीं हटाएगा, तब तक सीमा विवाद पर भारत से कोई बातचीत नहीं होगी। साथ ही चीन ने कहा है कि भारतीय सेना को 1962 की लडाई से ऐतिहासिक सबक लेना चाहिए। वहीं चीनी सेना ने भारतीय आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत के बयान को गैर जिम्मेदाराना बताया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ढाई मोर्चे पर युद्ध लडने के लिए तैयार है। ज्ञातव्य है कि जनरल रावत ने कहा था कि भारत चीन, पाकिस्तान और आंतरिक चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कंग ने कहा कि भारतीय सैनिक चीनी सीमा में घुसपैठ कर रहे हैं। लु कंग ने डोका ला में भारतीय घुसपैठ की तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि यह विवाद तभी सुलझ सकता है जब भारतीय सेना इस क्षेत्र से वापस जाएगी। उन्होनें यह भी कहा कि ये तस्वीरें चीनी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर भी लगाई जाएगी। ज्ञातव्य है कि कल बुधवार को चीन ने रास्ता बंद कर मानसरोवर यात्रा को भी रोक दिया था।    अब चीन के विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद मानसरोवर यात्रा खटाई में पडती नजर आ रही है। ज्ञातव्य है कि विवाद तब बढा जब सिक्किम के डोका ला में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनातनी और धक्का मुक्की हुई थी। ज्ञातव्य है कि चीन सिक्किम के डोका ला इलाके को अपना हिस्सा बताता है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता कंग के अनुसार सिक्किम विवाद को सुलझाने के लिए यह पूर्व शर्त है। इसी के आधार पर आगे की बातचीत होगी। ज्ञातव्य है कि चीन डोका ला में सडक बना रहा है। भूटान ने इसका विरोध किया था तो चीन ने इसे कानूनी तौर पर सही बताते हुए कहा था कि यह निर्माण चीन की सीमा में ही हो रहा है। डोका ला चीन और भूटान के बीच एक विवादित क्षेत्र है। कंग का कहना है कि डोका ला पुराने समय से चीन का हिस्सा है। यहां किसी प्रकार का विवाद नहीं है। हमारे पास इसे साबित करने के लिए पर्याप्त कारण हैं। चीन ने किया युद्धक टैंक का परीक्षण:  वहीं चीन ने तिब्बत में एक 35 टन के युद्धक टैंक का परीक्षण किया है। चीनी सेना के एक प्रवक्ता के अनुसार चीन ने तिब्बत में भारतीय सीमा के पास एक हल्के युद्धक टैंक के साथ अभ्यास किया है। एक प्रश्र के जवाब में उन्होनें कहा कि यह किसी देश के खिलाफ नहीं है। इसका मकसद केवल टैंक का परीक्षण करना था।  साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली। आज रात 12 बजे से जीएसटी लागू हो जाएगा, इसके साथ ही देश को अनगिनत टैक्स से आजादी मिल जाएगी। संसद में जीएसटी के लॉन्च की जबरदस्त तैयारी की गई है। जीएसटी लागू होने के मौके पर केंद्रीय कक्ष में होने वाले कार्यक्रम में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली के साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री हिस्सा लेंगे। इस मौके पर कई फिल्मी सितारें और बड़ी हस्तियां भी मौजूद होंगी।   संसद भवन को दुल्हन की तरह सजाया गया है। सेंट्रल हॉल में जीएसटी पर आज आधी रात को ठीक वैसा ही भव्य आयोजन होने वाला है जैसा 15 अगस्त 1947 की आधी रात को हुआ था। केंद्रीय कक्ष में भी तैयारियां पूरी हो चुकी है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार की निगरानी में जीएसटी लागू करने का अभ्यास भी हो चुका है। मुख्य कार्यक्रम में ठीक 12 बजे घंटा बजेगा, जो यह बताएगा कि जीएसटी लागू हो गया है।    रात 11.30 बजे से 12.5 बजे तक चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान दो शार्ट फिल्में भी दिखाई जाएगीं। इसके लिए केंद्रीय कक्ष में दो बड़ी-बड़ी स्क्रीन भी लगाई गई हैं। इस मौके पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री एक एप भी जारी करेंगे।राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम में शामिल लोगों को संबोधित करेंगे, इसलिए केंद्रीय कक्ष के साउंड सिस्टम को भी बदला गया है। संसद के दोनों सदनों के सांसदों सहित करीब 1500 लोगों के हिस्सा लेने की उम्मीद है।    जीएसटी के कार्यक्रम के लिए संसद भवन को एलईडी बल्बों से रोशन किया गया है। माइक्रो सेंड तकनीक से संसद भवन के खंभों को साफ किया जा रहा है, ताकि इमारत को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचे। साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली। आज आधी रात से देश में सबसे बडा कर सुधार यानी जीएसटी लागू हो जाएगा। इसके बाद कल से कई चीजों के दामों पर इसका असर पडेगा। वहीं जीएसटी लागू होने से पहले व्यापारी अपना स्टॉक बेचने के लिए प्री जीएसटी सेल के तहत ग्राहकों को लुभावने ऑफर दे रहे हैं। फ्यूचर ग्रुप का बिग बाजार 30 जून की आधी रात से 22 प्रतिशत तक की छूट के साथ सेल दे रहा है। वहीं ऑनलाइन मार्केटप्लेस फ्लिपकार्ट बुधवार की आधी रात से ही सेल शुरू कर चुका है। ऐमजॉन भी कन्ज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज पर 40 से 50 प्रतिशत तक का डिस्काउंट ऑफर दे रही है।    इधर, जीएसटी के आम लोगों के बजट पर पडऩे वाले असर को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। उम्मीद की जा रही है कि जीएसटी से पूरा देश एक सिंगल कॉमन मार्केट में तब्दील हो जाएगा, जहां राज्यों की सीमाओं के आर-पार वस्तुओं एवं सेवाओं का सहज प्रवाह हो सकेगा। आइए जानते हैं जीएसटी लागू होने के बाद किन किन चीजों के दामों पर असर पडेगा। कौन सी चीजें महंगी होंगी और कौन सी चीजें सस्ती होंगी।    जीएसटी लागू होने के बाद ये होंगे सस्ते:  -दवाइयां: जीएसटी में दवाइयों की कीमतें भी घटेंगी क्योंकि इन पर अभी 14 प्रतिशत टैक्स लग रहा है जो घटकर 12 प्रतिशत रह जाएगा।   दोपहिया वाहन: टू-वीइलर सस्ते तो होंगे, लेकिन बहुत ज्यादा नहीं क्योंकि अभी मोटरसाइकल या स्कूटर पर वैट और एक्साइज ड्यूटी मिलाकर उसकी कुल लागत का 30 प्रतिशत पड़ता है जबकि जीएसटी की दर 28 प्रतिशत होगी।   -छोटी कारें: छोटी कारें अच्छी-खासी सस्ती होनेवाली हैं क्योंकि इन कारों पर 29 प्रतिशत जीएसटी लगना है जबकि अभी इन पर 40 प्रतिशत टैक्स लग रहा है। वहीं, लग्जरी कारों के दाम भी घटेंगे क्योंकि जीएसटी में ज्यादा-से-ज्यादा 43 प्रतिशत (28 प्रतिशत जीएसटी और 15 प्रतिशत सरचार्ज) टैक्स लगेगा जबकि अभी इन पर 46 प्रतिशत टैक्स देना पड़ रहा है।   -फ्लाइट टिकट: हवाई जहाज में इकॉनमी क्लास के टिकट थोड़े सस्ते होंगे क्योंकि मौजूदा 5.60 प्रतिशत टैक्स की जगह जीएसटी में 5 प्रतिशत टैक्स लगेगा। लेकिन, बिजनस क्लास के टिकट महंगे होने जा रहे हैं क्योंकि अभी इन पर 8.40 प्रतिशत टैक्स लग रहा है जबकि जीएसटी में यह बढकऱ 12 प्रतिशत हो जाएगा।   -स्मार्टफोन: अगर आप 30 जून के बाद मोबाइल खरीदते हैं तो आपको 1.5 प्रतिशत कम टैक्स देना होगा। यानी, 1 जुलाई से स्मार्टफोन सस्ते होनेवाले हैं।   -कन्ज्यूमर ड्युरेबल्स: कन्ज्यूमर ड्युरेबल आइटम्स पर जीएसटी में कोई राहत नहीं मिलने वाली। अभी इन सामानों पर 25 से 26 प्रतिशत टैक्स लगता है जबकि जीएसटी में 2 प्रतिशत ज्यादा टैक्स देना होगा। सिनेमा, थिअटर, केबल और डीटीएच सर्विस:1 जुलाई से मनोरंजन के ये सारे साधन सस्ते होने जा रहे हैं क्योंकि इन पर अधिकतम 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा जो अभी राज्य सरकारों की ओर से लगाए जा रहे एंटरटेनमेंट टैक्स से कम ही होगा। मसलन, महाराष्ट्र में अभी 35 प्रतिशत मनोरंजन कर वसूला जा रहा है। टेलिफोन बिल: टेलिफोन बिल पर मौजूदा 15 प्रतिशत की बजाय 18 प्रतिशत जीएसटी लागू होने वाला है। इसलिए आपका टेलिफोन बिल बढऩेवाला है। इसी तरह ब्यूटी पार्लर जाना भी महंगा पड़ेगा।   -कोचिंग क्लास: जीएसटी में कोचिंग क्लासेज महंगे हो जाएंगे क्योंकि अभी इन पर 15 प्रतिशत टैक्स लगता है जो जुलाई से बढकऱ 18 प्रतिशत होने जा रहा है। -बैंकिंग: बैंकिंग सर्विसेज महंगी होने जा रही हैं क्योंकि अभी इन पर 15 प्रतिशत टैक्स देना पड़ता है जबकि जीएसटी में 18 प्रतिशत टैक्स तय हुआ है। यानी, 1 जुलाई से डिमांड ड्राफ्ट, फंड ट्रांसफर जैसी सेवाएं महंगी पड़ेंगी। इसी तरह, टर्म पॉलिसीज, एंडोमेंट पॉलिसीज और यूलिप्स आदि के इंश्योरेंस प्रीमियम भी महंगे होंगे।   -रेल टिकट:1 जुलाई से फर्स्ट, सेकंड और थर्ड एसी के टिकट थोड़े महंगे होने जा रहे हैं। उपनगरीय रेल सेवाओं के फर्स्ट क्लास टिकट पर भी थोड़ा ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे   -कपडे: 1,000 रुपये से कम कीमत के कपड़ों पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं होगा। इन पर मौजूदा 5 प्रतिशत की दर ही लागू रहेगी। लेकिन, कीमती पोशाक महंगे होंगे क्योंकि अभी इन पर 8 प्रतिशत टैक्स लगता है जबकि जीएसटी में 12 प्रतिशत टैक्स देना होगा।   -प्रॉपर्टी: प्रॉपर्टी पर अभी की तरह ही सिर्फ स्टांप ड्यूटी देनी होगी, लेकिन अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी खरीदने पर 12 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। अभी निर्माणाधीन मकानों पर 6 प्रतिशत सर्विस टैक्स और वैट लगते हैं।  साभार-khaskhabar.com      

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार की शाम करीब 47 लाख से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी खुशखबरी दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। नए भत्ते और पेंशन से सरकार पर लगभग 30 हजार करोड़ का अतिरिक्त खर्च आएगा। नए भत्ते और पेंशन 1 जुलाई 2017 से लागू होंगे। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को 34 सुधारों से साथ मंजूरी दी। वेतन आयोग के जो सुझाव थे कर्मचारियों के पक्ष में उन्हें स्वीकार करके उनमें सुधार किया गया। इसको तैयार करने के लिए वेतन भत्तों और अन्य जरुरी सुविधाओं को ध्यान में रखकर एक रूपरेखा तैयार की गई है।   इसमें अनौद्योगिक और औद्योगिक सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारी, अखिल भारतीय सेवाओं के कर्मी और केंद्रशासित प्रदेशों के कर्मचारी भी शामिल हैं, इसके साथ ही सेवेंथ पे कमीशन में रिजर्व बैंक को छोडक़र भारतीय लेखा एवं परीक्षण विभाग के अधिकारी एवं कर्मी, संसद अधिनियम के तहत गठित नियामक संस्थाओं के चयनित सदस्यों तथा उच्चतम - न्यायालय के अधिकारियों एवं कर्मियों को शामिल किया गया है।    एयर इंडिया की हिस्सेदारी बेचेगी सरकार    केंद्र सरकार ने एयर इंडिया की हिस्सेदारी बेचने का फैसला कर लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को एयर इंडिया में विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। रेलवे से जुड़े 12 भत्तों पर अभी फैसला नहीं हो सका है। फिलहाल सभी सरकारी कर्मचारियों को पुराने ढांचे के तहत ही अलाउंस मिल रहे हैं। सभी कर्मचारियों को जुलाई महीने की सैलरी के साथ बढ़ा हुआ भत्ता मिलेगा। इस मसले पर केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग बुधवार को सुबह ही होनी थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद विदेश दौरे से सुबह ही लौटे। ऐसे में मीटिंग शाम को आयोजित की गई।   कैबिनेट मीटिंग में हुए ये बड़े फैसले 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत भत्तों को मंजूरी। - केंद्रीय कर्मचारियों का एचआरए बढ़ाने को दी गई मंजूरी। - करीब 47 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को 1 जुलाई से मिलेंगे बढ़े हुए भत्ते। - एयर इंडिया के विनिवेश को मिली मंजूरी। - यूपी में नेशनल हाइवे-2 को चकेरी से इलाहाबाद के बीच 6 लेन करने को मंजूरी। साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एयर इंडिया की हिस्सेदारी बेचने का फैसला कर लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को एयर इंडिया में विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। रेलवे से जुड़े 12 भत्तों पर अभी फैसला नहीं हो सका है। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा कि मंत्रिमंडल ने एयर इंडिया के विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। जेटली ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, एयर इंडिया के विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है।   जेटली ने कहा, एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया की रूपरेखा तय करने के लिए वित्तमंत्री की अध्यक्षता में एक समूह गठित करने के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के प्रस्ताव को भी स्वीकार कर लिया गया है। हालांकि जेटली ने इस समूह के गठन की या विनिवेश राशि तय करने के लिए गठित होने वाले समूह द्वारा अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने की कोई समयसीमा नहीं बताई।   जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री इस समिति के सदस्यों पर फैसला लेंगे। केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने 20 जून को कहा था कि सरकारी स्वामित्व वाली विमानन कंपनी, एयर इंडिया के भविष्य को लेकर नीति आयोग की सिफारिश केंद्रीय मंत्रिमंडल को भेज दी गई है, जो इस पर अंतिम फैसला लेगा।   सिन्हा ने तब कहा था कि एयर इंडिया के भविष्य के संबंध में अंतर मंत्रालयी परमार्श प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया है और उसे मंत्रिमंडल को सौंप दिया गया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में नीति आयोग ने घाटे में चल रही एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश की सिफारिश की थी, जिसके जरिए एयर इंडिया पर से सरकार का नियंत्रण खत्म कर उसे निजी क्षेत्र को सौंपा जाना है।आपको बता दें कि एयर इंडिया सरकारी क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी घरेलू विमानन कंपनी है। एयर इंडिया 41 इंटरनेशनल और 72 घरेलू उड़ान सेवाएं मुहैया कराती है। लेकिन, निजी कंपनियों के तेजी से विस्तार के कारण एयर इंडिया की हिस्सेदारी में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।   जानकारों के मुताबिक एयर इंडिया पर करीब 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसमें 21,000 करोड़ रुपये विमान संबंधी लोन है जबकि करीब 8,000 करोड़ रुपये वर्किंग कैपिटल है। इसमें से 30,000 करोड़ रुपये के कर्ज को नीति आयोग ने राइट ऑफ करने के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश की है।   साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को यहां एक बार फिर कहा कि वस्तु एवं सेवा कर जीएसटी का क्रियान्वयन टाला नहीं जाएगा। उन्होंने विपक्षी पार्टियों, विपक्षी सांसदों और विपक्षी सरकार वाले राज्यों से अपील की कि उन्हें 30 जून आधी रात को संसद में प्रस्तावित जीएसटी लांच कार्यक्रम में हिस्सा लेना चाहिए। जेटली ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘यह न तो किसी पक्ष का है, और न किसी दबाव में निर्देशित है। मैं सभी दलों, राज्यों और सांसदों से सहमति की भावना से कार्यक्रम में हिस्सा लेने की अपील करता हूं।’’ जेटली उस सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें उनसे पूछा गया कि विपक्षी पार्टियों और उनके सांसदों की योजना आधी रात के लांच कार्यक्रम से दूर रहने की है, और उन्होंने क्रियान्वयन को छह महीने टालने की मांग की है।   वित्तमंत्री ने कहा, ‘‘एक संवैधानिक जनादेश के अनुसार 15 सितंबर को आप के पास कर संग्रह का अधिकार नहीं रह जाएगा। इसलिए वैकल्पिक प्रणाली को लाना होगा। आशा है कि प्रणाली सुगम होगी। लोग छह महीने टालने की बात जो कर रहे हैं, वह संवैधानिक रूप से अमान्य है। मुझे आशा है कि जम्मू एवं कश्मीर इसमें जल्द सक्षम हो जाएगा। मैंने कहा है कि यदि वे समय पर इससे नहीं जुड़ पाते हैं तो कारोबारियों को लागत और अंतिम उत्पाद पर कर भुगतान करना होगा। यह बाकी राज्यों की बनिस्बत अधिक होगा। यह राज्य और उपभोक्ताओं व कारोबारियों के हित में है।’’जेटली ने कहा कि जीएसटी से संबंधित सभी निर्णय हर स्तर पर सहमति के साथ लिए गए -संसद, विधानसभाओं में कानून पारित करने और विधायी बदलावों पर। विभिन्न वर्गों के बीच नए कानून के प्रावधानों को लेकर चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘जीएसटी से संबंधित सभी निर्णयों में मुझे कोई खास समस्या नहीं लगती। छोटी-मोटी समस्याएं तो हमेशा रहेंगी। व्यवस्था पूरी तरह तैयार है। क्रियान्वयन की तिथित हमेशा जीएसटी परिषद द्वारा सहमति से तय किया गया है, केंद्र सरकार द्वारा नहीं।’’   जम्मू एवं कश्मीर में इस नए कानून के पारित न होने से संबंधित एक सवाल पर वित्तमंत्री ने कहा कि इसका राज्य में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें लागत क्रेडिट नहीं मिल पाएगा और अंतिम उत्पाद के लिए भुगतान करना होगा। जम्मू एवं कश्मीर में कीमतें अन्य राज्यों की बनिस्बत अधिक होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य कर संग्रह नहीं कर पाएगा, क्योंकि मौजूदा कानून 15 सितंबर से समाप्त हो जाएगा।   उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हमेशा खुले मन से काम कर रही है। जेटली ने कहा, ‘‘जीएसटी परिषद अपनी खुद की प्रक्रिया के तहत गठित हुई। परिषद फिटमेंट कमेटी के जरिए परीक्षण करती है। वे मेरिट के आधार पर निर्णय लेते हैं। यह सामूहिक रूप से निर्णय लिया गया। मैं आश्वस्त कर सकता हूं कि हरेक निर्णय मेरिट के आधार पर लिया गया। यह न तो एक पक्षीय है और न किसी दबाव में निर्देशित है।’’ साभार-khaskhabar.com    

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