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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को यहां एक बार फिर कहा कि वस्तु एवं सेवा कर जीएसटी का क्रियान्वयन टाला नहीं जाएगा। उन्होंने विपक्षी पार्टियों, विपक्षी सांसदों और विपक्षी सरकार वाले राज्यों से अपील की कि उन्हें 30 जून आधी रात को संसद में प्रस्तावित जीएसटी लांच कार्यक्रम में हिस्सा लेना चाहिए। जेटली ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘यह न तो किसी पक्ष का है, और न किसी दबाव में निर्देशित है। मैं सभी दलों, राज्यों और सांसदों से सहमति की भावना से कार्यक्रम में हिस्सा लेने की अपील करता हूं।’’
जेटली उस सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें उनसे पूछा गया कि विपक्षी पार्टियों और उनके सांसदों की योजना आधी रात के लांच कार्यक्रम से दूर रहने की है, और उन्होंने क्रियान्वयन को छह महीने टालने की मांग की है।
वित्तमंत्री ने कहा, ‘‘एक संवैधानिक जनादेश के अनुसार 15 सितंबर को आप के पास कर संग्रह का अधिकार नहीं रह जाएगा। इसलिए वैकल्पिक प्रणाली को लाना होगा। आशा है कि प्रणाली सुगम होगी। लोग छह महीने टालने की बात जो कर रहे हैं, वह संवैधानिक रूप से अमान्य है। मुझे आशा है कि जम्मू एवं कश्मीर इसमें जल्द सक्षम हो जाएगा। मैंने कहा है कि यदि वे समय पर इससे नहीं जुड़ पाते हैं तो कारोबारियों को लागत और अंतिम उत्पाद पर कर भुगतान करना होगा। यह बाकी राज्यों की बनिस्बत अधिक होगा। यह राज्य और उपभोक्ताओं व कारोबारियों के हित में है।’’जेटली ने कहा कि जीएसटी से संबंधित सभी निर्णय हर स्तर पर सहमति के साथ लिए गए -संसद, विधानसभाओं में कानून पारित करने और विधायी बदलावों पर। विभिन्न वर्गों के बीच नए कानून के प्रावधानों को लेकर चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘जीएसटी से संबंधित सभी निर्णयों में मुझे कोई खास समस्या नहीं लगती। छोटी-मोटी समस्याएं तो हमेशा रहेंगी। व्यवस्था पूरी तरह तैयार है। क्रियान्वयन की तिथित हमेशा जीएसटी परिषद द्वारा सहमति से तय किया गया है, केंद्र सरकार द्वारा नहीं।’’
जम्मू एवं कश्मीर में इस नए कानून के पारित न होने से संबंधित एक सवाल पर वित्तमंत्री ने कहा कि इसका राज्य में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें लागत क्रेडिट नहीं मिल पाएगा और अंतिम उत्पाद के लिए भुगतान करना होगा। जम्मू एवं कश्मीर में कीमतें अन्य राज्यों की बनिस्बत अधिक होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य कर संग्रह नहीं कर पाएगा, क्योंकि मौजूदा कानून 15 सितंबर से समाप्त हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हमेशा खुले मन से काम कर रही है। जेटली ने कहा, ‘‘जीएसटी परिषद अपनी खुद की प्रक्रिया के तहत गठित हुई। परिषद फिटमेंट कमेटी के जरिए परीक्षण करती है। वे मेरिट के आधार पर निर्णय लेते हैं। यह सामूहिक रूप से निर्णय लिया गया। मैं आश्वस्त कर सकता हूं कि हरेक निर्णय मेरिट के आधार पर लिया गया। यह न तो एक पक्षीय है और न किसी दबाव में निर्देशित है।’’
साभार-khaskhabar.com












