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नई दिल्ली। मोदी सरकार जल्द ही भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कडे फैसले ले सकती है। मोदी सरकार ने सतर्कता विभाग को डोजियर बनाने के निर्देश दिए हैं। इस डोजियर के बनते ही भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ सरकार बडी कार्रवाई कर सकती है। साथ ही सरकार की नजर अपने काम पर फोकस ना करने वाले अफसरों पर भी रहेगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए सरकार ने सभी मंत्रालयों के सतर्कता विभाग को अपने-अपने विभागों के भ्रष्ट्र अधिकारियों के दस्तावेज तैयार करने कोकहा है। मोदी सरकार के आदेश के बाद सभी मंत्रालय अपने अपने विभाग के भ्रष्ट्र अफसरों के दस्तावेज तैयार करने में जुट गए हैं।    रिपोर्ट के अनुसार गृह मंत्रालय अपने विभाग के अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर दस्तावेज तैयार कर रहा है। मोदी सरकार ने मंत्रालयों के साथ ही पैरा मिलिट्री फोर्स को भी अपनी लिस्ट 5 अगस्त तक किसी भी हाल में पूरी करने के निर्देश दिए हैं।    इस आधार पर तैयार होगा डोजियर: सभी मंत्रालय अपने अपने विभागों के भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों से संबंधित डोजियर शिकायत, जांच रिपोर्ट और अधिकारियों के आचरण, नैतिक विषमता, कर्तव्य की उपेक्षा के आधार पर तैयार करेंगे। साथ ही डोजियर में इस बात का भी जिक्र होगा कि क्या उस अधिकारी के खिलाफ कभी बडा या मामूली जुर्माना लगाया गया था या नहीं। सभी विभागों के भ्रष्ट अधिकारियों की सूची तैयार होने के बाद उसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। दस्तावेज पूरा होने के बाद सीवीओ और सतर्कता विभाग सूची में शामिल भ्रष्ट अधिकारियों पर नजर रखेगा। साथ ही लिस्ट में शामिल अधिकारियों के कार्यों और निर्णयों की जांच होगी कि क्या वे अपने आर्थिक लाभों के लिए सरकार को नुकसान पहुंचा रहे हैं।    साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि ऐसे अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले पदों पर पोस्ट नहीं किया जाए। इसके अलावा सीबीआई और सीवीसी लिस्ट में शामिल भ्रष्ट अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करेंगे। या फिर उन पर जुर्माना, नौकरी में डिमोशन या बर्खास्तगी सहित विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करेंगे।  साभार-khaskhabar.com         

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने एक प्रोस्टेट कैंलेंडर बरामद किया है। यह प्रोटेस्ट कैलेंडर कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी द्वारा जारी किया गया है। इस कैलेंडर पर गिलानी के हस्ताक्षर भी हैं। एनआईए ने इस कैलेंडर को गिलानी के दामाद अल्ताफ अहमद शाह के पास से बरामद किया है। इस कैंलेंडर की बरामद होने से पाक हैंडलर्स की मदद से कश्मीर में अशांति और हिंसा फैलाने में अलगाववादियों की भूमिका सामने आई है।    इस प्रोटेस्ट कैलेंडर में उन तारीखों का जिक्र है जब हिजबुल के आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में हिंसा फैलाने के कार्यक्रम किए गए। ज्ञातव्य है कि एनआईए टेरर फंडिंग मामले में जांच कर रही है। इसके तहत एनआईए ने कुछ अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार किया है। एनआईए की जांच में सामने आया था कि पाक हैंडलर्स की मदद से अलगाववादी नेता कश्मीर घाटी में हिंसा और अशांति फैलाने का काम कर रहे हैं। अब इस प्रोटेस्ट कैलेंडर के बरामद होने से इस बात की पुष्टि हो गई है कि अलगाववादी नेताओं ने योजनाबद्ध तरीके से घाटी में हिंसा फैलाने का काम किया है।    ज्ञातव्य है कि पिछले वर्ष सुरक्षाबलों के साथ एनकाउंटर में हिजबुल आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में फैली हिंसा के दौरान दर्जनों लोगों की मौत हुई है और सैंकडों घायल हुए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एनआईए की जांच इस ओर इशारा करती है कि हुर्रियत के हिंसक विरोध-प्रदर्शन में स्थानीय मौलवियों, अलगाववादी कार्यकर्ताओं के साथ विपक्षी दलों के कार्यकर्ता भी शामिल रहे। एनआईए द्वारा बरामद प्रोटेस्ट कैलेंडर में 6 अगस्त 2016 और 8 अगस्त की तारीखों का जिक्र है।   गिलानी ने 6 अगस्त को स्थानीय चौक और मोहल्लों में लोगों के इक_ा होने का आह्वान किया था। साथ ही इन लोगों को मस्जिदों में इस्लामिक और आजादी के तराने गाने को कहा था। वहीं प्रोटेस्ट कैलेंडर में 8 अगस्त को दर्ज कार्यक्रम के मुताबिक श्रीनगर के सचिवालय और तहसील दफ्तरों के रास्तों को ब्लॉक करने की बात कही गई है। इस प्रोटेस्ट कैलेंडर में ऐसी कई तारीखों को जिक्र है जब गिलानी में कश्मीर में लोगों को अशांति फैलाने के लिए कहा और इसके लिए कार्यक्रम तय किए गए।कैलेंडर में 11 अगस्त के कार्यक्रम का भी जिक्र है। 11 अगस्त वाले कार्यक्रम के तहत गिलानी ने भारत का समर्थन करने वाले सभी नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं के अलावा पंच और सरपंचों को इस्तीफा देने के लिए पोस्टर जारी करने की बात कही गई है। इन पोस्टरों को ऐसे लोगों के घरों के गेट पर लगाया गया था। प्रोटेस्ट कैलेंडर के अलावा एनआईए ने बहल के घर से 4 मोबाइल, एक टैबलट और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। इसके अलावा टेरर फंडिंग की जांच से जुड़े डॉक्युमेंट्स के साथ दूसरे लेख भी बरामद किए गए हैं।   साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। गुजरात में बीते दो दिनों में अपने छह विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने को लेकर परेशान कांग्रेस ने शनिवार को निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया और भाजपा द्वारा अपने विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले में उच्चस्तरीय जांच बिठाए जाने की मांग की। कांग्रेस की शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन आयोग ने गुजरात के मुख्य सचिव से रिपोर्ट देने के लिए कहा है। आयोग ने गुजरात सरकार को सभी विधायकों और उनके परिवार के सदस्यों को समुचित सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश भी दिया।   कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, मनीष तिवारी, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक टांखा वाले प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से मुलाकात की और एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया है कि गुजरात में भाजपा आठ अगस्त को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पूर्व कांग्रेस विधायकों को तोडऩे के लिए धनबल और बाहुबल का इस्तेमाल कर रही है।   प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से कांग्रेस विधायकों को धनबल, बाहुबल और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर पार्टी से तोडऩे के मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र व्यक्ति/अधिकारियों वाली उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कम से कम तीन विधायकों - पूनाभाई गैमिट (व्यारा), मंगलभाई गैमिट (डांग) और ईश्वरभाई पटेल (धरमपुर) - से भाजपा और उसके एजेंटों ने संपर्क साधा और पैसों का लालच देकर उन्हें पार्टी से तोडऩे की कोशिश की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले आजाद ने कहा, राज्य सरकार, प्रशासन और पुलिस का इस्तेमाल किया गया।    सबसे दुखद बात यह है कि यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य में हुआ। हमने निर्वाचन आयोग से इस शर्मनाक घटनाक्रम में शामिल सभी अधिकारियों को स्थानांतरित करने या निलंबित करने की मांग भी की..जिन्होंने हमारे विधायकों का अपहरण कर उन्हें बंधक बनाए रखा। गुजरात में ताजा घटनाक्रम से कांग्रेस को आठ अगस्त को होने वाले राज्यसभा चुनाव में नुकसान पहुंचने की संभावना है, जिसे देखते हुए कांग्रेस ने गुजरात के अपने शेष 44 विधायकों को कर्नाटक में सुरक्षित जगह पहुंचा दिया है।वहीं, कांग्रेसी नेता मनीष तिवारी ने शनिवार को कहा कि बीजेपी गुजरात में कांग्रेस विधायकों और उनके परिवार वालों को धमकी दे रही है और उन पर राज्यसभा चुनाव में एक खास तरीके से मतदान करने का दबाव बना रही है। तिवारी ने कहा, आप पुलिस और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रहे हैं। यह किस तरह का लोकतंत्र है?    उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस विधायकों को सुरक्षित जगह पहुंचा दिया गया, तो भाजपा ने उनके परिवार वालों को धमकाना शुरू कर दिया। तिवारी ने कहा, इस तरह की प्रताडऩा और लोकतंत्र की हत्या पहले कभी नहीं हुई। गौरतलब है कि बीते दो दिनों में कांग्रेस के छह विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं। अपने और विधायकों को टूटने से बचाने के लिए कांग्रेस ने गुजरात के अपने 44 विधायकों को बेंगलुरू के एक निजी रिसॉर्ट पहुंचा दिया है।   साभार-khaskhabar.com     

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पटना। बिहार में छठी बार मुख्यमंत्री पद संभालने वाले नीतीश कुमार ने शनिवार को मंत्रिमंडल विस्तार करते हुए विभागों का बंटवारा कर दिया। उपमुख्यमंत्री बने सुशील कुमार मोदी को वित्त, वाणिज्य कर और वन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नीतीश मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री का दायित्व संभाल रहे सुशील कुमार मोदी को वित्त, वाणिज्य कर और वन विभग की जिम्मेवारी सौंपी गई है, जबकि विजेंद्र प्रसाद यादव को एकबार फिर ऊर्जा विभाग का दायित्व सौंपा गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व में विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता प्रेम कुमार को कृषि विभाग की जिम्मेवारी सौंपी गई है।   नीतीश मंत्रिमंडल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कोटे से 11, जनता दल (यूनाइटेड) से 14 और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) से एक विधायक और विधान पार्षद को जगह दी गई है। लोजपा कोटे से मंत्री बने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। नीतीश के करीबी माने जाने वाले राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को एकबार फिर जल संसाधन, योजना विकास का दायित्व सौंपा गया है, जबकि भाजपा नेता नंद किशोर यादव को पथ निर्माण विभाग की जिम्मेवारी दी गई है। श्रवण कुमार को ग्रामीण विकास, संसदीय कार्य विभाग, रामनारायण मंडल को राजस्व, भूमि सुधार, जय कुमार सिंह को उद्योग, विज्ञान प्रौद्यौगिकी तथा प्रमोद कुमार को पर्यटन विभाग का जिम्मा दिया गया है।   शिक्षा विभाग कृष्णनंदन वर्मा को सौंपी गई, जबकि भवन निर्माण विभाग मंत्री महेश्वर हजारी को तथा लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की जिम्मेवारी विनोद नारायण झा को सौंपी गई है। इसके अलावा शैलेश कुमार को ग्रामीण कार्य विभाग, सुरेश शर्मा को नगर विकास एवं आवास, मंत्रिमंडल में एक मात्र महिला मंजू वर्मा को समाज कल्याण विभाग, विजय सिन्हा को श्रम संसाधन विभाग, संतोष निराला को परिवहन विभाग तथा राणा रणधीर को सहकारिता जैसे अहम विभाग सौंपे गए हैं।   नीतीश मंत्रिमंडल में एकमात्र अल्पसंख्यक चेहरा खुर्शीद उर्फ फिरोज को अल्पसंख्यक कल्याण और गन्ना उद्योग विभाग, विनोद सिंह को खान एवं भूतत्व, मदन सहनी को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण, कृष्ण कुमार ऋषि को कला संस्कृति विभाग, कपिल देव कामत को पंचायती राज विभाग, दिनेश चंद्र यादव को लघु सिंचाई एवं आपदा प्रबंधन विभाग की जिम्मेवारी दी गई है। रमेश ऋषिदेव को अनुसूचित जनजाति, कल्याण विभाग, बृज किशोर बिंद को पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा विभाग तथा पशुपति पारस को पशु एवं मत्स्य संसाधन का दायित्व सौंपा गया है। इसके अलावा शेष विभाग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पास रखी है।   जानें-किस मंत्री को सौंपा कौनसा विभाग   बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार: गृह, सामान्य प्रशासन व निगरानी मंत्रालय।   उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी: वाणिज्य, वित, कर, आईटी मंत्रालय।    विजेंद्र यादव: ऊर्जा, उत्पाद, मद्य विभाग।   जय कुमार सिंह: उद्योग, विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग।   प्रमोद कुमार: पर्यटन विभाग।   शैलेश कुमार: ग्रामीण कार्य विभाग।   सुरेश शर्मा: नगर विकास एवं आवास विभाग।   विजय सिन्हा: श्रम संसाधन विभाग।   संतोष निराला: परिवहन विभाग।   राणा रणधीर: सहकारिता विभाग।   विनोद सिंह: खान एवं भूतत्व विभाग।   महेश्वर हजारी: भवन निर्माण विभाग।   नंद किशोर यादव: पथ निर्माण विभाग। बृजकिशोर बिंद: पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा विभाग।   पशुपति पारस: पशुपालन विभाग ।   मदन सहनी: खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग।   खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद: अल्पसंख्यक और गन्ना विभाग।   विनोद नारायण झा: पीएचईडी विभाग।   रामनारायण मंडल: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग।   श्रवण कुमार: संसदीय कार्य व ग्रामीण विकास विभाग।   मंजू वर्मा: समाज कल्याण विभाग।   कृष्ण नंदन वर्मा: शिक्षा विभाग।   प्रेम कुमार: कृषि विभाग।   ललन सिंह: जल संसाधन विभाग।   कृष्ण कुमार ऋषि: कला एंव संस्कृति विभाग।   कपिलदेव कामत: पंचायती राज विभाग।   दिनेश चंद्र यादव: लघु सिंचाई और आपदा प्रबंधन विभाग।   रमेश ऋषिदेव: एससी/एसटी विभाग। साभार-khaskhabar.com       

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पेइचिंग। सिक्किम के डोकलाम में जारी तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने उकसाने वाला बयान दिया है। शी ने चीनी सेना को युद्ध के लिए हर पल तैयार रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि चीन सेना को खुद पर पूरा भरोसा है और वह घुसपैठ करने वाले दुश्मन को हराने की ताकत रखती है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने यह बात रविवार को चीनी सेना के शक्ति प्रदर्शन के दौरान कहीं। हालांकि, अपने भाषणं जिनपिंग ने डोकलाम विवाद का जिक्र नहीं किया। चीन पीपल्स लिबरेशन आर्मी की स्थापना के 90 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है।   इस मौके पर सुदूर उत्तरी चीन स्थित एक सैन्य बेस पर एक बड़ी मिलिटरी परेड निकाली गई और चीनी सेना ने शक्ति प्रदर्शन किया। इसमें नए अडवांस्ड फाइटर जेट्स से लेकर कई चीनी सैन्य टुकडिय़ों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में शी चिनफिंग भी मौजूद थे। न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, ऐसा पहली बार है जब सेना का लिबास पहनकर चिनफिंग ने सैन्य टुकडिय़ों का इस तरह मुआयना किया। खास बात यह भी है कि 1949 के कम्युनिस्ट आंदोलन के बाद ऐसा भी पहली बार हुआ है जब 1 अगस्त को मनाए जाने वाले आर्मी डे से दो दिन पहले चीन ने अपनी सैन्य ताकत का इस तरह प्रदर्शन किया हो।    सेना की वर्दी पहन खुली जीप में परेड का निरीक्षण   चीनी राष्ट्रपति ने बाकायदा सेना की वर्दी पहनकर खुली जीप में परेड का जायजा लिया। इस दौरान जिनपिंग ने कहा, पीएलए को सख्ती से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना को फॉलो करना चाहिए। आर्मी को वहीं ही जाना चाहिए जहां पार्टी निर्देश दे। मुझे पूरा यकीन है कि आर्मी किसी भी दुश्मन को हराने की ताकत रखती है।    चीन ने किया शक्ति प्रदर्शन परेड में 12 हजार चीनी सैनिकों ने हिस्सा लिया। इसमें 129 एयरक्राफ्ट और 571 मिलिट्री इक्विपमेंट्स का भी प्रदर्शन किया गया। टैंक, गाडिय़ों पर लगे न्यूक्लियर मिसाइल्स, पारंपरिक फाइटर जेट्स से लेकर अत्याधुनिक जे 20 स्टेल्थ विमान इस मिलिटरी परेड में शामिल हुए। साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में भारत व चीन के सैनिकों के बीच गतिरोध जारी है। चीन लगातार डोकलाक से भारतीय सेना को हटाने के साथ ही युद्ध की धमकी देने में लगा हुआ है। इसी बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। जमीन से हवा में मार करने वाली एक तिहाई स्वदेशी आकाश मिसाइल शुरूआती जांच में फेल हो गई है। सीएजी रिपोर्ट में कहा है कि युद्ध जैसी किसी भी स्थिति में आकाश मिसाइल का प्रयोग जोखिम भरा हो सकता है। भारतीय वायुसेना पर सीएजी की रिपोर्ट को शुक्रवार को संसद मे पेश किया गया है। हालांकि, भारतीय वायु सेना ने सीएजी की रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया है।    रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा पर वायुसेना की 06 स्ट्रेटेजिक मिसाइल’स्कावड्रन को तैनात किया जाना था लेकिन वो पिछले 7 सालों से नहीं हो पाया है। इसका कारण मूलभूत सुविधाओं की कमी और बीईएल द्वारा बनाई गई इन मिसाइलों में तकनीकी खामियां हैं। हालांकि रिपोर्ट में चीन का नाम नहीं है सिर्फ कोड वर्ड इस्तेमाल किए गए हैं। लेकिन जिस तरह की भाषा और जानकारी रिपोर्ट में दी गई है उससे साफ है कि ये मिसाइलें चीनी सीमा पर तैनात की जानी थीं।    रिपोर्ट में लिखा है कि विरोधी द्वारा सीमा पर लगातार इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा था उसे देखते हुए सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने वर्ष 2009 में सीमा पर 06 मिसाइल स्कॉवड्रन तैनात करने को हरी झंडी दी थी। इसके लिए बीईएल यानि भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड को वायुसेना के लिए स्ट्रेटेजिक मिसाइल तैयार करनी थी। ये स्ट्रेटोजिक मिसाइल सुपरसोनिक जमीन से आकाश में मार करने वाले मिसाइल थी, लेकिन 7 साल बाद भी इन्हें तैनात नहीं किया जा सका है। वायुसेना ने इसके लिए रक्षा मंत्रालय पर आरोप लगाया है, लेकिन हकीकत ये है कि वायुसेना ने बीईएल से इन मिसाइलों के रखरखाव और मूलभूत सुविधाओं के लिए करार नही किया, जिसके चलते देरी हो गई।    सीएजी रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि बीईएल की मिसाइलों में खामियां थी। सीएजी के मुताबिक, जो 80 मिसाइलें वायुसेना को सौंपी गईं उसमें से 20 का टेस्ट हुआ तो पाया गया कि 6 मिसाइल यानि 30 प्रतिशत ना तो तय दूरी तक पहुंच पाईं और ना ही वे ऑपरेशनली तैनात करने लायक थीं। आपको बता दें कि पिछले एक हफ्ते में सीएजी की ये दूसरी बड़ी रिपोर्ट है जो भारतीय सेनाओं की तैयारियों पर सवाल खड़ी कर रही है। सीएजी ने पिछले सप्ताह संसद में पेश अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल में लाए जाने वाले 55 फीसदी गोला-बारूद की मात्रा न्यूनतम जरूरतों को पूरा नहीं करता।रिपोर्ट के मुताबिक, सेना द्वारा भंडारित बाकी 45 फीसदी गोला-बारूद भीषण युद्ध के हालात में 10 दिन से अधिक नहीं चलेंगे। जिस पर सफाई देते हुए रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को संसद को आश्वस्त किया कि सशस्त्र बल किसी भी हालात का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं और हथियार व गोला-बारूद की किसी भी तरह की कमी का शीघ्र समाधान किया जा रहा है। गोला-बारूद की कमी से संबंधित नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के मद्देनजर, जेटली ने कहा, जहां तक सशस्त्र बलों की बात है, तो वे किसी भी हालात का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं और हथियार व गोला-बारूद की किसी भी तरह की कमी का शीघ्र समाधान किया जा रहा है।   साभार-khaskhabar.com       

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अहमदाबाद। राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले गुजरात में कांग्रेस की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है। गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी कांग्रेस को झटके पर झटके लग रहे हैं। शुक्रवार को तीन और कांग्रेसी विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है, जिनमें छनाभाई चौधरी, रामसिंह परमार और मान सिंह चौहान शामिल है। इससे पहले गुरुवार को पीआई पटेल, बलवंत सिंह और तेजस्वीबेन पटेल ने कांग्रेस से इस्तीफा देने के कुछ देर बाद ही बीजेपी का दामन थाम लिया था। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ विधायक राघवजी पटेल ने कहा कि वह भी पांच अन्य विधायकों के साथ इस्तीफे देने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेसी विधायकों के इस्तीफे के कारण पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के राज्यसभा पहुंचने की राह मुश्किल होती दिख रही है।   जनजातीय वांसादा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक चन्नाभाई चौधरी, रामसिंह परमार और बालासिनोर से मानसिंह चौहान ने अपना इस्तीफा अध्यक्ष रमनलाल वोहरा को सौंप दिया। यह अभी भारतीय जनता पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं, लेकिन इनकी शाम तक भाजपा से जुडऩे की उम्मीद है। सौराष्ट्र के जामनगर (ग्रामीण) निर्वाचन क्षेत्र के एक विधायक राघवजी पटेल ने कहा, मैं भाजपा में जाना चाहता हूं और पांच अन्य भी हैं जो इसकी तैयारी कर रहे हैं।    उन्होंने कहा, हम निराश हैं। किसी ने हमारी आवाज नहीं सुनी और न ही हमारे विचारों की ओर ध्यान दिया। पटेल, चौधरी और चौहान को विपक्षी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला के करीबी माना जाता है, जिन्होंने 21 जुलाई को अपने जन्मदिन पर विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा दे दिया था। वाघेला ने आरोप लगाया था कि उन्हें पार्टी से बाहर निकालने के लिए आतंरिक षड्यंत्र रचा गया था।   सिद्धपुर से विधायक बलवंत सिंह राजपूत, विरामगम से विधायक तेजश्री पटेल, और विजापुर के विधायक पी आई. पटेल ने गुरुवार दोपहर को अपना इस्तीफा सौंपा और भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में शामिल होने के कुछ मिनटों के भीतर राजपूत को राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के बाद पार्टी के तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में नामित किया गया। शाह, स्मृति और राजपूत ने 8 अगस्त को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को नामांकन दाखिल किया।वहीं, राज्यसभा में शुक्रवार को गुजरात कांग्रेस के पांच विधायकों के इस्तीफे पर हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस के ये विधायक पार्टी से इस्तीफा देने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे। कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने आरोप लगाया कि गुजरात पुलिस ने कांग्रेस विधायकों को अगवा कर उन पर दबाव बनाया कि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो जाएं। इसके बाद विपक्षी सांसद सदन के बीचों बीच आ गए। उन्होंने नारेबाजी की कि संविधान की हत्या करना बंद करो।   उपसभापति पी.जे.कुरियन ने कहा, मैं इसमें क्या कर सकता हूं? इसके जवाब में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, आप निर्वाचन आयोग को राज्य में निष्पक्ष चुनाव कराने के निर्देश दे सकते हैं। कुरियन ने इसके जवाब में कहा, निर्वाचन आयोग को पीठ से दिशानिर्देशों की जरूरत नहीं है। वह संवैधानिक रूप से निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा सांसद मुख्तार अब्बास नकवी ने आजाद की मांग का विरोध करते हुए कहा, आप सर्वोच्च न्यायालय से भी इस तरह के दिशानिर्देश के लिए आग्रह कर सकते हैं।   साभार-khaskhabar.com       

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बिजिंग। डोकलाम विवाद को लेकर चीनी मीडिया लगातार भारत पर तीखे प्रहार कर रहा है। ज्ञातव्य है कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने बिजिंग गए हुए हैं। इस बीच चीनी मीडिया ने फिर से डोकलाम विवाद को लेकर भारत पर हमला बोला है। ग्लोबल टाइम्स के एक लेख में लिखा है कि चीन डोकलाम के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। साथ ही लेख में लिखा है कि अजीत डोभाल के चीन दौरे से कोई खास फर्क नहीं पडेगा और चीन अपने रुख से पीछे हटने वाला नहीं है।    लेख में फिर से भारत की सेना को डोकलाम से पीछे हटने के लिए कहा है। लेख में लिखा है कि चीन अभी भी अपने रुख पर कायम है और भारत को पहले अपनी सेना को डोकलाम से पीछे हटाना चाहिए। लेख में लिखा है कि भारत की सेना जब तक डोकलाम से पीछे नहीं हटेगी, तब तक शांति की कोई पहल नहीं हो सकती।    फिर दी कश्मीर में दखल देने की धमकी: चीनी मीडिया ने एक बार फिर से जम्मू कश्मीर मामले में दखल देने की धमकी दी है। चीन ने कहा है कि अगर भारत डोकलाम मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगा तो चीन जम्मू-कश्मीर के मुद्दे में दखल देगा। ज्ञातव्य है कि इससे पहले भी चीन ने भारत को कश्मीर मामले में दखल देने की बात कही थी। चीन का कहना है कि जब भारत, चीन और भूटान मामले में तीसरी पार्टी के तौर पर दखल दे रहा है तो पाकिस्तान की अपील पर चीन भी कश्मीर मामले में दखल देगा। ज्ञातव्य है कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने बिजिंग गए हुए हैं। चीनी मीडिया ने अजीत डोभाल और उनकी चीन यात्रा को लेकर भी निशाना साधा था। चीनी मीडिया ने डोकलाम विवाद के पीछे अजीत डोभाल को ही मास्टरमाइंड बताया था। साथ ही कहा था अजीत डोभाल के चीन दौरे से कोई फर्क नहीं पडने वाला। वहीं डोकलाम को लेकर जारी गतिरोध के बीच डोभाल ने यहां अपने चीनी समकक्ष यांग जिची से मुलाकात की। प्राप्त जानकारी के अनुसार आज डोभाल चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर सकते हैं।   साभार-khaskhabar.com   

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पटना। जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने बिहार की महागठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के अगले दिन गुरुवार को फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। जनादेश महागठबंधन को मिला था, जिसे धता बताते हुए नीतीश ने भाजपा से गठबंधन कर नई सरकार बना ली है और महागठबंधन एक झटके में टूट गया है। नीतीश के इस कदम से लालू प्रसाद के समर्थकों में जबर्दस्त आक्रोश है। पटना सहित कई जिलों में प्रदर्शन किया गया और सडक़ जाम किया गया। पहलेजा में जिलाधिकारी पर पथराव किया गया। कई पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। जगह-जगह नीतीश का पुतला फूंका गया।   नीतीश छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं। उनकी नई मंत्रिपरिषद शुक्रवार को विश्वासमत प्राप्त करेगी। महागठबंधन के अचानक टूटने के बाद राजद और जद (यू) में बगावत के सुर उभरने लगे हैं। राजद के कार्यकर्ता नीतीश पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए सडक़ पर उतरे और नीतीश का पुतला फूंका। लालू प्रसाद के समर्थकों ने आक्रोश प्रकट करने के लिए उत्तर बिहार को जोडऩे वाले सबसे बड़े पुल ‘महात्मा गांधी सेतु’ को पांच घंटे तक जाम रखा, जिससे बसों और अन्य वाहनों में बैठे हजारों लोग गर्मी व उमस में हलकान हुए। लोग सकते में हैं और खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।   बिहार के राजभवन स्थित राजेंद्र मंडप में आयोजित एक सादे समारोह में 10 बजे प्रभारी राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री और सुशील मोदी को उपमुख्यमंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। सुशील मोदी चार साल पहले तक नीतीश मंत्रिमंडल में बतौर उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। महागठबंधन सरकार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव पर मीडिया के सामने आरोप लगाते रहने के दैनिक कार्यक्रम का इनाम आखिरकार उन्हें मिल गया। शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कई नेता शामिल हुए। शपथ लेने के बाद सुशील मोदी ने कहा कि जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा।   राजभवन को नीतीश ने 131 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा है। राजभवन ने नीतीश को दो दिनों के भीतर विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा है। इस बीच एक अधिकारिक बयान में कहा गया है कि शुक्रवार को बिहार विधानसभा की विशेष सत्र बुलाई गई है, जिसमें नवगठित मंत्रिपरिषद विश्वासमत प्राप्त करेगी। नीतीश कुमार ने बुधवार की शाम मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके साथ ही 20 महीने पुरानी महागठबंधन सरकार अचानक गिर गई। इस्तीफे का कारण राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी के साथ नीतीश की तनातनी को माना जा रहा है। जद(यू) का कहना है कि तेजस्वी पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, लेकिन नीतीश के कहने के बावजूद उन्होंने इन आरोपों का तथ्यात्मक जवाब नहीं दिया। वहीं लालू का कहना है कि आरोप निराधार है, तेजस्वी सीबीआई को जवाब देंगे, नीतीश सीबीआई के निदेशक नहीं हैं। जबकि नीतीश का कहना है कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर इस्तीफा दिया।   उधर, दिल्ली में भाजपा संसदीय दल की बैठक हुई, वहां से आए फरमान के मुताबिक भाजपा की बिहार इकाई ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनने वाली सरकार को समर्थन देने की घोषणा की। भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नीतीश ने बिहार के विकास का वादा किया। उन्होंने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा, ‘‘हमने यह निर्णय बिहार के विकास और यहां के लोगों के हित में लिया गया है। मेरा न्याय के साथ विकास का कार्यक्रम चलता रहेगा।’’ उन्होंने कहा कि उनका ‘कमिटमेंट’ बिहार और बिहार के लोगों के प्रति है। जद (यू) अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मैं बिहार के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि अब तक जिस तरह लोगों की सेवा करता आ रहा हूं, उसी तरह आगे भी खिदमत करता रहूंगा।’’   इधर, महागठबंधन टूटने के बाद राजद और जद (यू) में बगावती सुर उठने लगे हैं। जद (यू) के राज्यसभा सांसद अली अनवर ने गुरुवार को नीतीश कुमार के इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा, ‘‘नीतीश कहते हैं कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर इस्तीफा दिया और भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना रहे हैं, लेकिन मेरा जमीर इस फैसले को नहीं मानता। मैं इस फैसले से खुश नहीं हूं। मैं अभी पार्टी नहीं छोड़ूंगा, मुझे मौका मिला तो मैं अपनी बात पार्टी फोरम पर जरूर रखूंगा। शरद यादव से मिलूंगा।’’ इधर, राजद के गायघाट के विधायक महेश्वर यादव ने गठबंधन टूटने के लिए पार्टी के अध्यक्ष लालू प्रसाद और उनके पुत्र तेजस्वी प्रसाद यादव को जिम्मेदार बताया है।गायघाट से राजद विधायक महेश्वर यादव ने गुरुवार को यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘महागठबंधन लालू प्रसाद के पुत्र मोह और उनकी और तेजस्वी की जिद के कारण टूटा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा तेजस्वी यादव पर प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अगर इस्तीफा दे दिया जाता तो गठबंधन नहीं टूटता।’’ इस बीच, बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद राजद के कार्यकर्ता गुरुवार को सडक़ पर उतरे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए राजद ने ‘विश्वासघात दिवस’ मनाने की घोषणा की और सैकड़ों राजद समर्थकों ने पटना में ऐतिहासिक महात्मा गांधी सेतु पर धरना दिया, जिससे करीब पांच घंटे तक इस पुल पर आवागमन ठप रहा।    सारण जिले में पहलेजा के पास जेपी सेतु जामकर हंगामा कर रहे लोगों ने शांत करने आए जिलाधिकारी हरिहर प्रसाद को निशाना बनाया। पथराव किया गया, जिससे कई पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं। पटना शहर में भी राजद कार्यकर्ता सडक़ पर उतरे और राजद प्रदेश कार्यालय से आयकर गोलंबर पर पहुंचकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला फूंका। इस दौरान राजद कार्यकर्ताओं ने नीतीश के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वैशाली, समस्तीपुर सहित कई जिले में भी राजद समर्थक सडक़ों पर उतरे।   साभार-khaskhabar.com   

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पटना। बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को बहुमत हासिल कर लिया है। विश्वास मत में नीतीश कुमार के पक्ष में 131 वोट पड़े, वहीं विरोध में 108 वोट मिले। आपको विश्वास मत से पहले तेजस्वी यादव ने नीतीश पर जमकर हमला बोला। वहीं, जवाब में नीतीश कुमार ने कहा कि ये कांग्रेस के लोग हैं अहंकार में जीने वाले लोग हैं। नीतीश ने कहा कि मैंने जो भी किया है बिहार के हित में किया है। कहा जा रहा है कि शुक्रवार को ही मंत्रिमंडल का ऐलान हो सकता है।   नीतीश ने कहा कि 15 से ज्यादा सीटें कांग्रेस को नहीं मिलने वाली थी लेकिन हमने महागठबंधन में 40 सीटों पर चुनाव लड़वाया। विश्वास मत से पहले राजद विधायक लगातार हंगामा कर रहे हैं। राजद विधायकों ने विधानसभा के बाहर धरना भी दिया। तेजस्वी ने पहले बोलते हुए काफी तीखे आरोप लगाए नीतीश पर।   पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि मैं इस प्रस्ताव के विरोध में खड़ा हूं। हमें बीजेपी के खिलाफ वोट मिला था, ये सब प्रीप्लान था। ये एक तरह से लोकतंत्र की हत्या है। बीजेपी के भी कई मंत्री हैं जिनपर आरोप हैं, नीतीश कुमार और सुशील मोदी पर भी आरोप हैं। तेजस्वी ने कहा कि कांग्रेस और राजद ने मिलकर नीतीश कुमार के वजूद को बचाया था, नीतीश ने बिहार की जनता को धोखा दिया।उधर, बिहार में जेडीयू-बीजेपी सरकार के विरुद्ध राजद की याचिका हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है। इसको लेकर सुनवाई सोमवार को होगी।   आपको बता दें कि 243 सदस्यीय विधानसभा में नीतीश सरकार को बहुमत के लिए 122 सदस्यों के समर्थन की जरूरत थी। नीतीश के पास 71, बीजेपी और सहयोगियों के पास 58 सीटें हैं। कुल 129 हुए। 4 निर्दलीय विधायक हैं। एनडीए का दावा है कि उनके पक्ष में 132 सदस्य हैं। वहीं सबसे बड़े दल आरजेडी के खाते में 80, कांग्रेस के पास 27 और सीपीएम के पास 3 विधायक हैं। साभार-khaskhabar.com     

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पटना। बुधवार शाम को बिहार की राजनीति में उठापटक और इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने बीजेपी का हाथ थाम लिया। देर रात हुई बीजेपी-जेडीयू की साझा बैठक में नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुना गया। नीतीश कुमार और सुशील मोदी सुबह राजभवन पहुंचे। नीतीश कुमार को राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने बिहार के सीएम पद की शपथ दिलाई। वहीं सुशील मोदी ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। ज्ञातव्य है कि नीतीश कुमार ने छठी बार बिहार के सीएम पद की शपथ ली है। ज्ञातव्य है कि 4 साल बाद जेडीयू और बीजेपी फिर साथ हैं।    कल बिहार की राजनीति में ऐसे आया यू टर्न:  बुधवार शाम को नीतीश कुमार ने आरजेडी और कांग्रेस के साथ 20 महीने पुराने महागठबंधन से खुद को अलग करते हुए राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे की घोषणा के कुछ ही देर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर नीतीश को बधाई दी। मोदी ने ट्वीट किया, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जुडऩे के लिए नीतीश कुमार जी को बहुत-बहुत बधाई। सवा सौ करोड़ नागरिक ईमानदारी का स्वागत और समर्थन कर रहे हैं। देश के, विशेष रूप से बिहार के उज्ज्वल भविष्य के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक होकर लडऩा, आज देश और समय की मांग है। नीतीश के इस्तीफे की घोषणा के बाद भारतीय जनता पार्टी बीजेपी ने उन्हें बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा भी कर दी। ज्ञातव्य है कि 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में जेडीयू और भाजपा को मिलाकर 129 विधायक हो जाएंगे, जो जरूरी बहुमत 124 से अधिक है।    साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में आए भूचाल के बाद आज आखिरकार नीतीश कुमार ने छठी बार बिहार के सीएम पद की शपथ ले ली। ज्ञातव्य है कि इस बार नीतीश कुमार को बीजेपी ने समर्थन दिया है। बीजेपी के सुशील मोदी बिहार के डिप्टी सीएम बने हैं। इस बीच बीजेपी से समर्थन को लेकर जेडीयू में फूट पड गई है। कांग्रेस अपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने नीतीश कुमार को धोखेबाज कहा है। राहुल गांधी ने कहा कि नीतीश कुमार ने कांग्रेस के साथ धोखाधडी की है। उन्होंने कहा कि नीतीश और बीजेपी के बीच यह खिचडी पिछले चार माह से पक रही थी।    वहीं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने ट्वीट करते हुए कहा कि बिहार में राज्यपाल ने सरकारिया कमीशन और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया है। दिग्विज सिंह ने लिखा कि सबसे बडी पार्टी आरजेडी को मौका नहीं दिया गया है। साथ ही उन्होंने लिखा कि बीजेपी का प्रजातंत्र में विश्वास ना पहले था ना अब है, इस कृत्य के लिए धिक्कार है। साथ ही यूपी के पूर्व सीएम और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी नीतीश पर तंज कसा है। अखिलेश यादव ने नीतीश पर तंज सकते हुए है कि ना-ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे।    साभार-khaskhabar.com     

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