देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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नई दिल्ली। सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में भारत व चीन के सैनिकों के बीच गतिरोध जारी है। चीन लगातार डोकलाक से भारतीय सेना को हटाने के साथ ही युद्ध की धमकी देने में लगा हुआ है। इसी बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। जमीन से हवा में मार करने वाली एक तिहाई स्वदेशी आकाश मिसाइल शुरूआती जांच में फेल हो गई है। सीएजी रिपोर्ट में कहा है कि युद्ध जैसी किसी भी स्थिति में आकाश मिसाइल का प्रयोग जोखिम भरा हो सकता है। भारतीय वायुसेना पर सीएजी की रिपोर्ट को शुक्रवार को संसद मे पेश किया गया है। हालांकि, भारतीय वायु सेना ने सीएजी की रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा पर वायुसेना की 06 स्ट्रेटेजिक मिसाइल’स्कावड्रन को तैनात किया जाना था लेकिन वो पिछले 7 सालों से नहीं हो पाया है। इसका कारण मूलभूत सुविधाओं की कमी और बीईएल द्वारा बनाई गई इन मिसाइलों में तकनीकी खामियां हैं। हालांकि रिपोर्ट में चीन का नाम नहीं है सिर्फ कोड वर्ड इस्तेमाल किए गए हैं। लेकिन जिस तरह की भाषा और जानकारी रिपोर्ट में दी गई है उससे साफ है कि ये मिसाइलें चीनी सीमा पर तैनात की जानी थीं।
रिपोर्ट में लिखा है कि विरोधी द्वारा सीमा पर लगातार इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा था उसे देखते हुए सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने वर्ष 2009 में सीमा पर 06 मिसाइल स्कॉवड्रन तैनात करने को हरी झंडी दी थी। इसके लिए बीईएल यानि भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड को वायुसेना के लिए स्ट्रेटेजिक मिसाइल तैयार करनी थी। ये स्ट्रेटोजिक मिसाइल सुपरसोनिक जमीन से आकाश में मार करने वाले मिसाइल थी, लेकिन 7 साल बाद भी इन्हें तैनात नहीं किया जा सका है। वायुसेना ने इसके लिए रक्षा मंत्रालय पर आरोप लगाया है, लेकिन हकीकत ये है कि वायुसेना ने बीईएल से इन मिसाइलों के रखरखाव और मूलभूत सुविधाओं के लिए करार नही किया, जिसके चलते देरी हो गई।
सीएजी रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि बीईएल की मिसाइलों में खामियां थी। सीएजी के मुताबिक, जो 80 मिसाइलें वायुसेना को सौंपी गईं उसमें से 20 का टेस्ट हुआ तो पाया गया कि 6 मिसाइल यानि 30 प्रतिशत ना तो तय दूरी तक पहुंच पाईं और ना ही वे ऑपरेशनली तैनात करने लायक थीं। आपको बता दें कि पिछले एक हफ्ते में सीएजी की ये दूसरी बड़ी रिपोर्ट है जो भारतीय सेनाओं की तैयारियों पर सवाल खड़ी कर रही है। सीएजी ने पिछले सप्ताह संसद में पेश अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल में लाए जाने वाले 55 फीसदी गोला-बारूद की मात्रा न्यूनतम जरूरतों को पूरा नहीं करता।रिपोर्ट के मुताबिक, सेना द्वारा भंडारित बाकी 45 फीसदी गोला-बारूद भीषण युद्ध के हालात में 10 दिन से अधिक नहीं चलेंगे। जिस पर सफाई देते हुए रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को संसद को आश्वस्त किया कि सशस्त्र बल किसी भी हालात का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं और हथियार व गोला-बारूद की किसी भी तरह की कमी का शीघ्र समाधान किया जा रहा है। गोला-बारूद की कमी से संबंधित नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के मद्देनजर, जेटली ने कहा, जहां तक सशस्त्र बलों की बात है, तो वे किसी भी हालात का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं और हथियार व गोला-बारूद की किसी भी तरह की कमी का शीघ्र समाधान किया जा रहा है।
साभार-khaskhabar.com













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