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उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा टाटा टेक्नोलॉजीज

बृज खंडेलवाल द्वारा17 अगस्त 2025

की तकनीकी शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। टाटा टेक्नोलॉजीज के अधिकारियों ने भी युवाओं को विश्वस्तरीय कौशल प्रदान करने की प्रतिबद्धता जताई, साथ ही इसे राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक कदम बताया। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह आईटीआई का निजीकरण नहीं, बल्कि एक सहयोगी मॉडल है, जिसमें टाटा तकनीकी उन्नयन और प्रशिक्षण प्रदान करेगी, जबकि प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारी राज्य सरकार की रहेगी।  हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। तीन साल में 271 संस्थानों का उन्नयन एक जटिल लक्ष्य है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षकों की कमी और परियोजना लागत में 5,472 करोड़ से 6,935.8 करोड़ रुपये तक की वृद्धि को लेकर पारदर्शिता के सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि लागत वृद्धि का औचित्य स्पष्ट हो और सरकारी हिस्सेदारी को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने पर विचार किया जाए। साथ ही, कोर्स स्थानीय उद्योगों, जैसे ऑटोमोबाइल, हस्तशिल्प, कृषि प्रौद्योगिकी और ग्रीन एनर्जी, की जरूरतों के अनुरूप हों। त्रैमासिक स्किल ऑडिट, उद्योगों से फीडबैक और डिजिटल स्किलिंग डैशबोर्ड की स्थापना भी जरूरी है।  भारत के अन्य राज्यों में ऐसी साझेदारियों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। मैसूर के उद्योगपति जगन बेंजामिन के मुताबिक कर्नाटक में सिस्को नेटवर्किंग अकादमी ने 150 से अधिक आईटीआई में साइबर सुरक्षा और नेटवर्किंग प्रशिक्षण देकर 50,000 से ज्यादा छात्रों को 85 प्रतिशत प्लेसमेंट दर के साथ रोजगार दिलाया है। तमिलनाडु में श्वाब फाउंडेशन के साथ उद्योग 4.0 केंद्रित प्रशिक्षण और महाराष्ट्र में सीमेंस द्वारा 80 आईटीआई में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग लैब्स की स्थापना इसके उदाहरण हैं।  एजुकेशनल कंसल्टेंट एन गणेशन के मुताबिक यदि उत्तर प्रदेश में यह परियोजना स्थानीय जरूरतों पर केंद्रित रही और पारदर्शिता बरती गई, तो यह न केवल युवाओं को रोजगार देगी, बल्कि राज्य को तकनीकी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।

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