देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreअपने धर्म ग्रंथों को जरूर पढ़े बहुत कुछ मिलेगा: अभी कुछ सालों से एक मन में इच्छा हुई थी की वेदों को पढ़ा जाए दादा जी एक अच्छे विद्वान के साथ एस बी जे इंटर कॉलेज बिसावर में संस्कृत के अध्यापक और भागवत आचार्य थे काशी से ये अपनी शिक्षा पूरी करके लौटे थे....कॉलेज की छुट्टियां के दिनों में वो गोकुल से जलेसर तक अपनी भागवत कहते थे उन दिनों संगीत नहीं हुआ करता था....सिर्फ भागवत ही होती थी पहले संस्कृत में कहनी उसके बाद हिंदी में लोगों को समझना....लोगों में उस समय रस हुआ करता था सुनने का...देश की आजादी से पहले और बाद में ये क्रम चलता रहा....१९८७ को वो इस धरा से गोलोक लोक की यात्रा पे चले गए...पर अच्छाइयां क्या होती उनके जाने और रहने पे पता लगता है...जब भी में बचपन में ननिहाल जाता था...मेरी ननिहाल में ज्यादा तर लोग यादव है तो सभी जब मेरे पैर छूने के लिए आगे आते थे.... तो में मां से एक ही बात कहता था की हमें तो बड़ों के पैर छूना बताया है आपने...ये हमारे क्यों छू रहे है तब मां का एक जवाब था ये सभी तुम्हारे दादा जी के शिष्य है आज भी ये तुम्हे उनका अपने गुरु की छवि के रूप में देखते है....में समझ नही पाया था क्योंकि वो बचपन था जब समझ आई तो समझ में आया की दादा जी गुरु के रूप में वहां पूजनीय थे...खेर वहां के तमाम गांव आज भी पुराने लोगों में उनके दिए हुई शब्दों की माला आज भी जीवित है....खेर उनके बारे में फिर कभी विस्तार से लिखूंगा...आज बात वेदों पे हो रही थी वाकई हमारे वेदों का इस धरा पे बहुत बड़ा योगदान है बशर्ते उसे सही ढंग से पढ़ा जाए तब....सभी वेद पाठियों को मेरा वंदन... क्योंकि नॉर्थ से साउथ तक अपनी अपनी जगह सभी वेदों का उल्लेख मिलता है...... भगवान शिव ने महर्षि अगस्त्य को स्वयं तमिल भाषा का उदय करवाया और कई ग्रंथों की रचना करवाई....अगस्त्य थे कौन और ये नाम कैसे मिला...अगं पर्वतं स्तम्भयति इति अगस्त्यः' - जो 'अगं' अर्थात् पर्वत को स्तंभित कर दे, उसे अगस्त्य कहते हैं। ये पुलस्त्य ऋषि के ज्येष्ठ पुत्र थे इनका स्थान काशी था....उसके बाद उन्होंने देवातों के आग्रह पर दक्षिण की यात्रा की....आज भी दक्षिण में इनका भगवान शिव की कृपा से पूरा योगदान रहा......इनके बारे में फिर कभी पूरा लिखूंगा क्योंकि आज वेदों की बात थी जब भी हमारे धर्म ग्रंथों को आपको पढ़ने का समय मिले तो जरूर पढ़िएगा.....आपको नई उर्जा प्रदान होगी.....जय गिरधारी













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