देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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अहमदाबाद। राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले गुजरात में कांग्रेस की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है। गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी कांग्रेस को झटके पर झटके लग रहे हैं। शुक्रवार को तीन और कांग्रेसी विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है, जिनमें छनाभाई चौधरी, रामसिंह परमार और मान सिंह चौहान शामिल है। इससे पहले गुरुवार को पीआई पटेल, बलवंत सिंह और तेजस्वीबेन पटेल ने कांग्रेस से इस्तीफा देने के कुछ देर बाद ही बीजेपी का दामन थाम लिया था। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ विधायक राघवजी पटेल ने कहा कि वह भी पांच अन्य विधायकों के साथ इस्तीफे देने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेसी विधायकों के इस्तीफे के कारण पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के राज्यसभा पहुंचने की राह मुश्किल होती दिख रही है।
जनजातीय वांसादा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक चन्नाभाई चौधरी, रामसिंह परमार और बालासिनोर से मानसिंह चौहान ने अपना इस्तीफा अध्यक्ष रमनलाल वोहरा को सौंप दिया। यह अभी भारतीय जनता पार्टी में शामिल नहीं हुए हैं, लेकिन इनकी शाम तक भाजपा से जुडऩे की उम्मीद है। सौराष्ट्र के जामनगर (ग्रामीण) निर्वाचन क्षेत्र के एक विधायक राघवजी पटेल ने कहा, मैं भाजपा में जाना चाहता हूं और पांच अन्य भी हैं जो इसकी तैयारी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, हम निराश हैं। किसी ने हमारी आवाज नहीं सुनी और न ही हमारे विचारों की ओर ध्यान दिया। पटेल, चौधरी और चौहान को विपक्षी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला के करीबी माना जाता है, जिन्होंने 21 जुलाई को अपने जन्मदिन पर विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा दे दिया था। वाघेला ने आरोप लगाया था कि उन्हें पार्टी से बाहर निकालने के लिए आतंरिक षड्यंत्र रचा गया था।
सिद्धपुर से विधायक बलवंत सिंह राजपूत, विरामगम से विधायक तेजश्री पटेल, और विजापुर के विधायक पी आई. पटेल ने गुरुवार दोपहर को अपना इस्तीफा सौंपा और भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में शामिल होने के कुछ मिनटों के भीतर राजपूत को राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के बाद पार्टी के तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में नामित किया गया। शाह, स्मृति और राजपूत ने 8 अगस्त को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को नामांकन दाखिल किया।वहीं, राज्यसभा में शुक्रवार को गुजरात कांग्रेस के पांच विधायकों के इस्तीफे पर हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस के ये विधायक पार्टी से इस्तीफा देने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे। कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने आरोप लगाया कि गुजरात पुलिस ने कांग्रेस विधायकों को अगवा कर उन पर दबाव बनाया कि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो जाएं। इसके बाद विपक्षी सांसद सदन के बीचों बीच आ गए। उन्होंने नारेबाजी की कि संविधान की हत्या करना बंद करो।
उपसभापति पी.जे.कुरियन ने कहा, मैं इसमें क्या कर सकता हूं? इसके जवाब में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, आप निर्वाचन आयोग को राज्य में निष्पक्ष चुनाव कराने के निर्देश दे सकते हैं। कुरियन ने इसके जवाब में कहा, निर्वाचन आयोग को पीठ से दिशानिर्देशों की जरूरत नहीं है। वह संवैधानिक रूप से निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। भाजपा सांसद मुख्तार अब्बास नकवी ने आजाद की मांग का विरोध करते हुए कहा, आप सर्वोच्च न्यायालय से भी इस तरह के दिशानिर्देश के लिए आग्रह कर सकते हैं।
साभार-khaskhabar.com













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