जयपुर। चुनावी माहौल के बीच जनता के धर्म के बाद अब भगवान की जाति भी एक बड़ा मुद्दा बन गई है। राजस्थान की चुनावी रैली में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री और बीजेपी के स्टार प्रचारक योगी आदित्यनाथ ने बीते मंगलवार को अलवर के मालाखेड़ा में हनुमानजी को दलित बताकर विवाद खडा कर दिया है। इस बयान के बाद बुधवार को इस पर राजनीति गरमा गई। लखनऊ के संत-महंतों ने भी योगी के इस बयान को गलत बताया। सभी ने हनुमानजी के दलित व वंचित होने से नकार दिया। इनका कहना है कि हनुमानजी ब्राह्मण थे। उनको क्षत्रिय की उपाधि मिली हुई थी। बुधवार को योगी आदित्यनाथ के इस बयान पर कांग्रेस के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। हनुमान जी पर विवादित टिप्पणी करने वाले योगी आदित्यनाथ को सर्व ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश मिश्रा ने लीगल नोटिस भेजकर तीन दिन में माफी मांगने को कहा है। मिश्रा का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने केवल राजनीतिक लाभ के लिए भगवान हनुमान को ‘दलित’ बताया है। बता दे, अलवर जिले के मलाखेड़ा में मंगलवार को एक चुनावी रैली के दौरान आदित्यनाथ ने कहा, ‘बजरंग बली आदिवासी, वन-वन घूमने वाले, दलित और वंचित थे। उन्होंने पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण के सभी भारतीय समुदायों को जोडऩे के लिए काम किया।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग राम भक्त हैं वे भाजपा के लिए वोट करेंगे और जो रावण की पूजा करते हैं वे कांग्रेस के पक्ष में मतदान करेंगे। हनुमान पर बयान देने के बाद योगी विपक्ष के निशाने पर आ गए जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उनका बचाव किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने गुरुवार को आदित्यनाथ पर भगवान के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। सिब्बल ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ‘योगी आदित्यनाथ आगे चलकर भगवान राम और कृष्ण के बारे में भी ऐसी ही बातें करेंगे। मैं नहीं मानता कि जाति, भगवान और ईश्वर के लिए हमारा जो सम्मान है उसे राजनीति से मिलाना चाहिए।’ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता माजीद मेनन ने कहा कि योगी ने दलित वोटों को लुभाने के लिए इस तरह का बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘यह पूरी तरह से दलित वोटरों को लुभाने के लिए दिया गया बयान है। इस तरह का बयान दलित एवं गैर दलितों, ब्राह्मण एवं गैर ब्राह्मण समाज को बांटता है। इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है और इस तरह का बयान नहीं दिया जाना चाहिए।’ वहीं, भाजपा सांसद एवं दलित नेता उदित राज ने कहा कि चुनावों में जाति का प्रभाव देखते हुए इस बारे में बातें की जा रही हैं। उन्होंने कहा, ‘योगी आदित्यनाथ ने अपनी बात सीधे तौर पर रखी जबकि बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनकी राजनीति में दोहरी मानसिकता है।’ बता दें कि राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटों के लिए 7 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे जबकि नतीजे 11 दिसंबर को घोषित होंगे। हर बार की तरह इस बार भी भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला है। साभार-khaskhabar.com
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