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मथुरा। विश्वभर में प्राचीन परंपराओं के लिए मशहूर ब्रज की होली का आनन्द लेने के लिए और यहां होने वाले विभिन्न होली कार्यक्रमों को देखने और कैमरों में कैद करने के लिए बड़ी संख्या में विदेशी कृष्ण भक्त और पर्यटक इन दिनों धर्म नगरी मथुरा-वृंदावन की कुंज गलियों में घूमते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा विदेशी कृष्णभक्त होली के रंगों में सराबोर होकर गोवर्धन की सप्तकोसीय परिक्रमा कर रहे हैं तो कुछ मंदिरों में आयोजित होली महोत्सव में थिरकते हुए दिख रहे है। होली की मस्ती और रंगो का खुमार विदेशी भक्तों और पर्यटकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। दरअसल फागुन के महीने में होली पर्व के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में  विदेशी भक्त दर्शन और होली के रंग में रंगने को आते हैं। यहां आने वाले ये विदेशी भक्त अर्जेंटीना, कोलंबिया, फिजी, ब्राजील और वोलोबिया से यहां कान्हा के प्रेम के वशीभूत होकर खिंचे चले आते हैं। यहां के प्रमुख सप्तदेवालयों के दर्शन करते हुए एवं होली के विभिन्न आयोजनों का हिस्सा भी बनते हैं। ब्रज की होली में विदेशी भक्त सब कुछ भूलकर कृष्णमयी हो जाते हैं और रंग-गुलाल से जमकर होली का लुत्फ उठाते हैं। यहां होली के रंग में सराबोर जर्मनी से आई स्लैविया और मैलनी ने बताया कि यहां आकर होली खेलने पर प्रेम की अनुभूति होती है। ब्रज के तमाम आयोजनों को देखने के लिए विदेशी भक्त होली से पहले ही ब्रज में डेरा डाल देते हैं और होली का भरपूर आनंद उठाने के साथ ही इस अनूठी और परंपरागत होली के अद्भुत क्षणों को अपने कैमरों में भी कैद कर ले जाते हैं।   

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नारायण भट्ट की समाधी पर मनाई होली  मथुरा। बरसाना कस्बे में ब्रज मंडल के साथ  राधा रानी को  प्रागट्य करने वाले नारायण भट्ट की समाधी स्थल पर शहीद भगत सिंह के तत्वाधान में होली मनाई गयी। इस दौरान ग्रामीणों ने होली के रसियाओं पर जमकर नृत्य किया।  बुधवार को ऊँचागांव स्थित नरायन भट्ट जी की समाधी पर ब्रजाचार्य पीठ के पीठाधीश्वर गोस्वामी उपेंद्र नारायण भट्ट के सानिध्य में शहीद भगत सिंह  क्रांति दल  संस्थापक पदम सिंह फौजी के साथ दल के सदस्यों व ग्रामीणों ने होली के रसियाओं ने  ष्नैक आगे आ श्याम तोपे रंग डारू ,नेक आगे आ श्याम तोपे रंग डारो ष्आ जइयो श्याम बरसाने धाम  तोय होरी खूब खिला दूंगी  तोहे नर से नार बना दूंगी  आ जइयो श्याम बरसाने धाम होली खेल रहे नटवर नंदकिशोर बरसाने की सखियों संग आज गुजरिया घूंघट खोल, रंगीली होली आई है ष्डरवाय ले गोपी रंग, फागुन आयो री, गायक कलाकार राजू शर्माष्दाऊजी मंडल द्वारा  गाए हुए भजनों को सुनकर  श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गए महिलाएं और पुरुष  नाचने पर मजबूर हो गए।ब ध्य यंत्रों को बजाकर अबीर गुलाल उड़ाकर होली मनाई। इस दौरान इस दौरान शहीद भगत सिंह क्रांति दल के संस्थापक पदम फौजी ने  बताया कि बृजाचार्य पीठ श्री घनश्याम भट्ट जी द्वारा अवगत हुआ उन्होंने कहा कि कुछ ही वर्षों से सेवायतो  द्वारा समाज गायन अभी नहीं होता। नहीं तो सदियों से नारायण भट्ट जी की समाधि पर मंदिर के सेवायतो द्वारा समाज गायन होता आ रहा था । अभी किस कारणवश मंदिर सेवायतो दुरा   समाज गायन नहीं होता है। । इस मौके पर मंदिर के सूसठ महाराज ,दीपक महाराज, गोविंद मुनीम ,घनश्याम राज भट्ट आदि मौजूद थे।

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प्रियाकान्तजू मंदिर में बिखरा ब्रज की सम्पूर्ण होली का रस-रंग देवकीनंदन महाराज ने हाईड्रोलिक पिचकारी से श्रद्धालुओं पर बरसाया टेसू का रंग मथुरा। वृन्दावन नगर में गुरूवार को ठा0 प्रियाकान्तजू मंदिर पर ब्रज की सम्पूर्ण होली का रसरंग बिखर गया । देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज के साथ मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में श्रद्धालुभक्तों ने रंग-गुलाल और फूलों की खूब होली खेली । मंदिर अट्टालिका से भक्तों पर हाईड्रोलिक पिचकारी से टेसू के फूलों का रंग गिराया तो श्रद्धालु झूमकर नृत्य करने लगे । ब्रजभक्ति के यह रंग तीन घंटे तक चटक होते रहे । महाभारत में युधिष्ठर बने गजेन्द्र चैहान भी ब्रज के रंगों में रंगे नजर आये । पूर्व वर्षों की भांति इस बार भी विश्व शांति सेवा चैरीटेबल ट्रस्ट द्वारा प्रियाकान्तजू मंदिर पर होली महोत्सव का आयोजन हुआ । प्रातः देवकीनंदन महाराज ने प्रियाकान्तजू विग्रह पर गुलाल लगाया उसके बार नंदगाॅंव से आये कलाकारों ने नगाढ़ा बजाकर होली महोत्सव की शुरूआत की। मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं पर राधा-कृष्ण स्वरूपों ने लड्डू-जलेबी बरसाये । मंच पर गोप-ग्वालों के बीच पदों के साथ हास-परिहास प्रारम्भ हुआ जो बाद में लठामार होली में बदल गया । इसके बाद फूलों की होली से समूचे मंदिर परिसर में कृष्णकालीन होली के दृश्य जीवन्त हो उठे । देवकीनंदन महाराज ने तोय सौं हमारी कान्हाँ रंग मत डारो, गोरो-गोरो रंग मेरो कहूॅं है नाय जाये कारो..., ब्रज में प्रियाकान्तजू संग, होरी खेलू रंगभरी..., रंग मत डारे रे साँवरिया... जैसे भजनों की श्रंखला शुरू की तो मंदिर प्रागण में श्रद्धालु झूमकर नृत्य करने लगे । इसके बाद ठाकुरजी महाराज के साथ गजेन्द्र चैहान ने श्रद्धालुओं पर रंग और गुलाल बरसाया ।  इस अवसर पर बनवारी महाराज, दाऊदयाल महाराज ने भी भजन प्रस्तुत किये । संस्था सचिव विजय शर्मा, अजय भाटीवाल, रवि रावत, मधु कूपर, एच.पी. अग्रवाल, विशन गुप्ता, जौय गुप्ता, मोहन मगनानी, धन्नू भईया, जगदीश वर्मा, गजन्द्र सिंह, दिवाकर पचहरा, अमित, धमेन्द्र, जे.पी. सिंघल, मुकुन्द, श्यामसुन्दर शर्मा, अजय दुबे आदि के साथ देश के विभिन्न स्थानों से आये हजारों भक्त सम्मिलित रहे ।

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मथुरा। जिले के प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर में बुधवार दोपहर भक्तों ने प्रभु द्वारिकाधीश महाराज से टेसू के पीले फूलों के रंगों व गुुलाल से जमकर होली खेलते हुए होली के रसिया, गायन, चैपाई और गीतों पर थिरकते हुए नजर आए। जिसमें विदेशी भक्तों के साथ-साथ चतुर्वेदी समाज की महिलाएं और युवकों की संख्या सर्वाधिक देखने को मिली।  प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर में बुधवार बगीचे में बैठकर प्रभु द्वारिकानाथ ने भक्तों के साथ होली खेली। टेसू के पीले फूलों के रंग और गुलाल से होली का यह आयोजन दर्शनीय था। प्रभु बगीचा में विराजमान होकर सखियों के साथ मौजूद रहे तो चारों ओर दर्शन और उनके द्वारा छोड़ी गयी पिचकारियों को प्रसाद रूप में ग्रहण करने के लिये भक्तों की संख्या भी कम नहीं थी। महिला, पुरूष, बच्चे सभी प्रभु के दरबार में आज के इस भव्य मनोरथ को देखने के लिये उत्सुक नजर आये। होली के रसिया, गायन, चैपाई और गीतों पर थिरकते महिला-पुरूष दूर-दूर से होली के इस कार्यक्रम को देखने के लिये मौजूद थे। भगवान द्वारिकानाथ गुरूवार मंदिर से बाहर आकर बगीचे में विराजमान थे। हरे-भरे वृक्षांे और केला के पेड़ों के बीच सजाये गये बगीचे का दृश्य भी दर्शनीय था। होली के रंगों में सराबोर श्रद्धालु काफी उत्साहित थे और प्रभु के चरणों में लीन होकर इस नजारे को देख रहे थे। द्वारिकाधीश मंदिर में बगीचे का यह भव्य आयोजन आज मंदिर के लोगों द्वारा किया गया था। प्रतिवर्ष द्वादशी के दिन होली के अवसर पर यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। आज के इस बागीचा होली को देखने के लिये भक्तों की काफी भीड़ मौजूद रही। अपने-अपने ऊपर रंग डलवाने के लिये श्रद्धालु लालयित थे। प्रभु का प्रसाद और होली का रंग, इन दोनों को पाकर श्रद्धालु अभिभूत थे। मंदिर के कर्मचारियों और व्यवस्थापकों द्वारा इसके लिये अच्छी व्यवस्था की गयी थी। दोपहर शुरू हुये इस होली के कार्यक्रम में खूब रंग बरसा। लाल-पीले श्रद्धालु होली के रसिया बने नजर आ रहे थे। शाम पांच बजे द्वारिकाधीश महाराज की शयन आरती हुई जिसमें देशी-विदेशी भक्तों ने भाग लिया।   

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नन्ने मुन्ने बच्चों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किए मथुरा। राया बाल मंदिर में होली महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया इस दौरान विद्यालय के नन्ने मुन्ने छात्र छात्राओं ने रंगारंग एवं सास्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ नगर पंचायत राया के पूर्व चेयरमैन सुभाष बाबू अग्रवाल ने माता सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्जवलित कर किया। उन्होनंे कहा कि होली आपसी भाई चारे और प्रेम का त्यौहार है हमें सभी मतभेद भुला कर होली मनानी चाहिए जिससे जीवन में मिठास आ सके। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र छात्राओं ने रंगारंग एवं सास्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस अवसर पर उमेश चन्द्र सारस्वत,जितेन्द्र कुमार,ज्वाला प्रसाद शर्मा, प्रेम शंकर, भारती अग्रवाल,अम्बिका व्यास, आत्माराम,लता वर्मा,सोनल,निशा पाण्डेय आदि प्रमुख लोग उपस्थित थे। 

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मथुरा। जिले के वृंदावन स्थित गोपीनाथ मंदिर में मंगलवार को पूर्वान्ह सुलभ इंटरनेशनल की टीम एवं संस्थापक ने इस बार सैकड़ों विधवा महिलाओं के साथ होली खेली। जिसमें विधवाओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हुए इस होली के दौरान जिंदगी के रंगों से दूर रही विधवाओं की जिंदगी में एक नया रंग नजर आया और इस उमंग में होली के गीतों पर सभी विधवा महिलाएं थिरकने लगी।   मंगलवार को जानी मानी सुलभ इंटनेशनल ने फिर चैथी बार बार विधवाओं को खुशी देने तथा उनके जीवन में रंग भरने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए संस्थापक बिंदेश्वर पाठक तथा उनकी टीम ने वृंदावन के गोपीनाथ मंदिर में विधवाओं के साथ होली खेली तथा सभी विधवाओं ने आपस में गले मिल फूलों तथा गुलाल से जमकर होली खेली। इस अवसर पर वाराणसी की विधवाओं ने भी होली खेली। विदित हो कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विधवाओं की स्थिति के बारे में 2012 की गई टिप्पणियों के बाद से सुलभ इंटरनेशनल वाराणसी व वृंदावन में विधवाओं की देखरेख करता चला रहा है। बिधवाओं ने बताया कि इस होली पर्व पर हम सब अपने परिवार के रूप में मनाते है, जितनी भी महिला विधवा आश्रम में है,तथा हमने जिनको निमंत्रण देकर बुलाया है उनके साथ हम अपनी खुशी व होली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। सुलभ के संस्थापक  विधवा विरोधी मान्यताओं के विरोध करते चले आ रहे हैं।  इस दौरान इनके होली खेलने के लिए 1500 किलो फूल और 1200 किलो अबीर-गुलाल की व्यवस्था की गई। सफेद साड़ी पहनकर सुबह से ही इन महिलाओं का गोपीनाथ मंदिर शुरु हो चुका था। सालभर के बाद एक बार फिर रंगो का त्यौहार मनाने का मौका मिला तो चेहरे पर रौनक खिल गई। ठाकुरजी के साथ होली खेलने के बाद महिलाओं ने आपस में जमकर पहले फूलों की पंखुड़ियों से होली खेली इसके बाद अबीर-गुलाल की होली खेली गई।  

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मथुरा। जिले में यूं तो चहुंओर होली की धूम मची हुई है। वहीं मंगलवार को भगवान बालकृष्ण की नगरी गोकुल में छड़ीमार होली खेली गई। जिसमें हुरियारिनों ने छड़ियां बरसाईं तो बालकृष्ण के स्वरूपों ने अपने डंडे से उनकी छड़ियांे से बचाव किया।  विदित हो कि बरसाना और नंदगांव में लट्ठमार होली खेली जाती है, लेकिन गोकुल में भगवान का बाल स्वरुप होने के कारण होली छड़ी से खेली जाती है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ। उनका बचपन गोकुल बीता। यही कारण है कि यहां की होली पूरे ब्रज से अलग है। भक्ति भाव से भक्त सबसे पहले बाल गोपाल को फूलों से सजी पालकी में बैठाकर नन्द भवन से मुरलीधर घाट ले जाते हैं। जहां भगवान बगीचे में भक्तों के साथ होली खेलते हैं।  मंदिर प्रांगण से करीब 12 बजे पालकी में विराजमान होकर भगवान श्रीकृष्ण व बलराम ने भक्तों को दर्शन दिए। पालकी के साथ चल रही खुदा बक्स छोटे बाबूलाल शहनाई पार्टी के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रसिया व भजनों पर हुरियारे व हुरियारिनों ने जमकर नृत्य किया।नंद चैक पर पालकी के पहुंचते ही हुरियारिनों का जोश दुगना हो गया। यहां करीब आधे घण्टे तक होली के गीतों पर हुरियारिनें जमकर झूमी। गोकुल में आ रहा मजा क्या होली में, भरा गुलाल-अबीर कृष्ण की झोली में..आदि होली के गीतों पर श्रद्धालु जम कर झूमे। नंदभवन से डोले में सवार हो कर बाल स्वरूप श्रीकृष्ण मुरलीधर घाट को ग्वाल बालों के साथ नाचते गाते हुए चले। मुरलीधर घाट पर सूर्य अस्त होने तक ग्वालवाल कान्हा की साथ होली की मस्ती में सुधबुध खोकर डूबे रहे। शाम होने पर नंदभवन को प्रस्थान कर गये।  परंपरा के अनुसार गोकुलवासी बाल गोपाल को पालकी में बैठाकर नन्द भवन से मुरलीधर घाट पहुंचे। इस दौरान पालकी के साथ चल रहे हजारों श्रद्धालु बाल गोपाल के डोले पर पुष्प बरसा रहे थे। एक दूसरे अबीर गुलाल लगाकर होली के गीतों पर झूम रहे थे। इस होली के बारे में कहा जाता है कि बाल गोपाल ने बगीचे में बैठकर भक्तों के साथ होली खेली थी। वही परंपरा आज तक चलती आ रही है। इस बार भी हुरियारिनों ने श्रद्धालुओं के साथ छड़ीमार होली खेली। जिसका आनंद देश के कई इलाकों से आए हजारों लोगों ने उठाया। गोकुल में होली द्वादशी से शुरू होकर धूल होली तक चलती है। इस दौरान भगवान केवल एक दिन द्वादशी के दिन ही नंद भवन से निकलकर होली खेलते हैं। बाकी के दिन मंदिर में ही होली खेली जाती है। यहां की होली को देखने के लिए देश-विदेश से भी लोग आते हैं और छड़ीमार होली का आनंद उठाते हैं।  

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मथुरा। वृन्दावन इस्कॉन मन्दिर के द्वारा मथुरापुरी में तीसरी बार भगवान श्री जगननाथ की रथ यात्रा का आयोजन उड़ीसा की तरह भव्य स्तर पर हर वर्ष की भांति 9 मार्च शुक्रवार को किया जाएगा ।  जो रथ यात्रा को विकास बाजार से शुरू कर होली गेट ,विश्राम घाट ,भरतपुर गेट,डीग गेट होते हुये द्वारका धीश मन्दिर से मुकुन्द विहार में यात्रा का समापन होगा । जिसमें देश विदेश से आये हजारों भक्तों के द्वारा संकीर्तन एवं नृत्य आकर्षण झांकियां निकाल कर मन लुभाने वाली यथयात्रा में रंगोली एवं प्रसाद वितरण भी किया  जायेगा । जिसमे प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करेंगे। ये जानकारी प्रेेसवार्ता के दौरान इस्कॉन मन्दिर के पीआरओ रवि लोचन ने मीडिया को दी । मथुरापुरी में तीसरी श्रीगवान जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन नौ मार्च को किया जाएगा। भगवान जगन्नाथ स्वयं साक्षात श्री कृष्ण हैं। श्री बलदेव उनके बडे“ भाई श्री अन्नत शेष हैं और देवी सुभद्रा योगमाया उनकी बहिन है। भगवान जगन्नाथ श्री जगन्नाथ उड़ीसा उड़ीसा के नीलांचल क्षेत्र जगन्नाथपुरी में निवास करते हैं। प्रारम्भ में रथ यात्रा जगन्नाथपुरी में ही आयोजित होती थी। आज विश्व के अनेक देशों में रथ यात्राओं का आयोजन होता है। श्री मथुरापुरी में रथ यात्रा का शुभारम्भ विकास बाजार से होगा। भक्तों द्वारा कीर्तन, छप्पन भोग अर्पण एवं आरती होगी। उत्तर भारत के श्रद्धालु इस आयोजन में जुटते हैं। दोपहर  बारह बजे फूलों से सजे हुए भव्य रथ पर आरुढ़ होंगे। इसके बाद मुख्यअतिथि तथा विशिष्ट अतिथि आरती उतारेंगे। रथयात्रा विकास बाजार से होलीगेट, विश्राम घाट, भरतपुर गेट से द्वारिकाधीश मंदिर होते हुए मुकुंद विहार में विश्राम करेगी। नृत्य, झांकियां, रंगोली आदि यात्रा के मुख्य आकर्षण होंगे। 

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हरियाणा सहित 345 बेटी   मथुरा।  कोटवन चैकी पर कोसी पुलिस ने हरियाणा व उत्तराखण्ड ब्रांड की अवैध शराब बडे पैमाने पर पकड़ी है। शराब तस्कर फर्जी नम्बर लिखे ट्रक व ट्रेक्टर से अवैध शराब हरियाणा व उत्तराखण्ड से लेकर आ रह थे। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर उन्हे कोटवन चैकी पर पकड लिया। मंगलवार की सुबह कोसी पुलिस को सूचना मिली एक ट्रक में बडे पैमाने पर अवैध शराब उत्तर प्रदेश में तस्करी के लिये लायी जा रही है। मुखबिर की सूचना पर कोसी पुलिस ने कोटवन चैकी पर वाहनों की चेंकिग करनी शुरू कर दी। चेकिंग के दौरान ट्रक संख्या एचआर 61 सी 7606 में चेंकिग की तो उसमे 300 पेटी उत्तराखण्ड ब्राण्ड शराब की मिली। ट्रक चालकों सोनू यादव पुत्र रामप्यारे निवासी लहरवार थाना कप्तानगंज आजमगढ व विजय चैहान पुत्र रामधनी निवासी जमकी बलीपुर थाना मेहरगढ आजमगढ को तुरन्त हिरासत में लेकर जब ट्रक की जांच पडताल की गयी तो ट्रक पर लिखा नम्बर फर्जी पाया गया। उसके कुछ देर पर एक ट्रेक्टर की चेकिंग करने पर उसमें हरियाणा ब्राण्ड की 45 पेटी मिली। कोसी पुलिस ने ट्रेक्टर सवार रोहित पुत्र दिलबाग निवासी बादशाहपुर सोनीपत व साहिल पुत्र ऋषिपाल निवासी जाडवाडा सोनीपत को तुरन्त हिरासत में ले लीया। पूछताछ में सोनू व विजय ने बताया कि वे शराब उत्तराखण्ड से ले जाकर नागपुर बेचने के लिये ले जा रहे थे जबकि रोहित व साहिल ने बताया कि वे शराब सोनीपत से आगरा सप्लाई के लिये ले जा रहे थे। कोसी पुलिस ने अवैध शराब को जब्त कर अभियुक्तों को जेल भेज दिया। अवैध शराब को पकडने वाली टीम में प्रभारी निरिक्षक कोसी पोहप सिह, उ.नि. अमरपाल सिह, कां. विनय कुमार, गजेन्द्र सिंह, नेत्रपाल सिंह थें। पुलिस टीम को एसएसपी स्वप्निल ममगाई ने 5000 रू ईनाम की घोषणा की है।  

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मथुरा। ब्रज मंडल क्षत्रिय राजपूत महासभा की एक आवश्यक बैठक कुँवर नरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में आवागढ़ हाउस में सम्पन्न हुई, जिसमें क्षत्रिय प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा इस सभा में निम्नलिखित प्रस्ताव सर्व सम्मिति से पारित किए गए। ब्रजमंडल क्षत्रिय राजपूत महासभा के अध्यक्ष कुँवर नरेंद्र सिंह ने कहा कि जनपद में एक ऐसा संगठन ब्रजमंडल क्षत्रिय राजपूत महासभा के नाम से चल रहा है जो अवैध है और मात्र क्षत्रियों को गुमराह कर रहे हैं। जनपद में कुँवर नरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में गठित ब्रज मंडल क्षत्रिय राजपूत महासभा उत्तर भारत जिसका रजि. नम्बर-8883 दिनांक 25.11.14 ही एक ऐसा संगठन है जो पूर्णतरूवैध और पंजिकृत है, जिसका मुख्यालय आवागढ़ हाउस में है। अतरू इस संगठन के अतिरिक्त यदि कोई दूसरा संगठन चलाया जा रह है तो उसे अवैध मानते हुए मात्र इसी संगठन को वैध माना जाए। सर्व समित्ति से यह निर्णय किया गया कि क्षत्रियों में जन जागरण करने हेतु 15 मार्च को एक होली मिलन समारोह एवं खुला अधिवेशन आवागढ़ फार्म हाउस, बाईपास मथुरा पर आयोजित होगा, जिसमें मुख्य अतिथि मा.सांसद एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा कुँवर हरिवंश सिंह होंगे। अतरू अधिक से अधिक सभी घारों के क्षत्रिय इस समारोह में आने की कृपा करें। इसके बाद सौहदपूर्ण वातावरण में सभा समाप्त की गई। इस अवसर पर अध्यक्ष कुँवर नरेंद्र सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष भजन सिंह सिसौदिया, महामंत्री थान सिंह, पूर्व प्रधान चंदन सिंह, लीला सिंह सिसौदिया, शहर अध्यक्ष धर्मपाल सिंह, संयोजक रमेश सिंह तौमर, मुकेश सिसौदिया, पप्पू सिंह, प्रदेश अध्यक्ष हरियाणा विनय भाटी, जगन्नाथ सिंह, जगन्नाथ सिंह चैमुहां, शैलेन्द्र सिंह, धीरेन्द्र सिंह,  हेमु सिंह, धर्मपाल सोलंकी, रतन सिंह, लोकमन सिंह, समय सिंह जेत, अनिरुध सिंह, लोकमणि सिंह आदि उपस्थित थे।   

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मथुरा। आज रंगभरनी एकादशी पर मथुरा के प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर में राजभोग के दर्शन के साथ ही सुबह दस बजे से रंग-गुलाल खूब उड़ा। मंदिर के अंदर मौजूद पुजारियों द्वारा श्रद्धालुओं पर टेसू के चहकते पीले फूलों का रंग डाला तो बाहर रंग गुलाल में सराबोर श्रद्धालु अलग ही नजर आ रहे थे। पूरे मंदिर प्रांगण में सुबह से ही होली का माहौल बनता जा रहा था। लोग होली के रसियाओं पर नाच-गा रहे थे। महिलायें होली के गीतों पर खूब नाच-गा रही थीं। होली के रसिया बने लोग अपनी-अपनी तान छेड़ रहे थे। पूरे मंदिर प्रांगण में हरे, लाल, पीले रंग के गुलाल की वर्षा हो रही थी। दूर-दूर से आये भक्त प्रभु द्वारिकानाथ के दरबार में होली के इस आयोजन को लेकर अपने को धन्य समझ रहे थे। रंग, अबीर, गुलाल एक-दूसरे पर फंैका जा रहा था तो मंदिर के अंदर से भी रंग-गुलाल भक्तांे पर डाला जा रहा था। प्रभु द्वारिकाधीश आज भक्तों के संग होली खेल रहे थे। दूर-दूर से श्रद्धालु आये हुये थे। लगभग एक घंटे तक मंदिर प्रांगण में यह आयोजन चलता रहा। शहर कोतवाली पुलिस भी इस मौके पर मौजूद थी। जगह-जगह पुलिस बल तैनात था ताकि किसी के साथ कोई अभद्रता न हो पाये। महिलाओं और दूर से आये श्रद्धालुओं का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा था। संपूर्ण मंदिर प्रांगण होली के रंग में रंगा था।   

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रंगभरनी एकादशी पर संतरंगी अबीर-गुलाल से पटा जन्मभूमि परिसर  मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में सोमवार देरसायं रंगभरनी एकादशी के पर्व पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भी लठठामार होली का आयोजन किया गया। पूरा जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन चप्पे चप्पे पर नजर रखे हुआ था, डीएम और एसएसपी ने स्वयं पहुंचकर इस लठ्ठामार होली को शांतिपूर्वक सम्पन्न कराया।  सोमवार श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर दोपहर बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने किया। मंच पर भक्तों ने जहाॅ पहलें राधा-कृष्ण व ग्वालवालों के साथ फूलों की होली का आनन्द लिया। इसके अलावा मंच पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गये। वहीं सांय होली खेलने के लिए बरसाना से बुलाई गई-गोपी गोपिकाओं की प्रशिक्षण टीम स्थान के लीला मंच पर उपस्थित प्रदेश के ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलन कर आरती उतारी तथा मंच पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर सायं पांच बजे लठठामारी होली शुरू कर दी। उर्जा मंत्री ने मंच पर ढोल बजाकर होली के गीत गाये उसके बाद होली गीत मे ढप के साथ झूम उठे । इस होली महोत्सव मे बडी संख्या मे लोगो ने बढ चढकर भाग लिया । हौज पाइपो से टेसू के रंगो से होली पर्व अपने पूरे यौवन पर पहुॅच गया । इसके बाद उर्जा मंत्री श्रीकांत षर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मे होली खेलकर उन्हे बहुत ही सुखद आनन्द की अनुभूति हो रही है उन्होने कहा कि ब्रज की होली को अन्तराष्टर््ीय स्तर का दर्जा दिलाये जाने के लिये केन्द्र एवं प्रदेश सरकार काम कर रही है जब उनसे ब्रज के के अन्य क्षेत्रो के अलावा मथुरा नगरी को धार्मिक स्थल घोषित न किये जाने के बारे मे पूछे जाने पर उन्होने कहा कि राधाकुड नंन्द गाॅव गोवर्धन गोकुल और बरसाने के बाद मथुरा नगरी को भी तीर्थ स्थल घोषित किया जायेगा । लठामार होली से पूर्व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रारंभ हुई जिसमें कलाकारों ने मयूर नृत्य, चुरकुला नृत्य व फूलों की होली के मनमोहन कार्यक्रम प्रस्तुत किये जिसे देख उपस्थित जन समूह भाव विभोर हो गया। कलाकारों की प्रस्तुति ओर राधाकृष्ण के युगल स्वरूप पर हुई फूलों की होली का अनूठा भाव देख हर कोई वाह-वाह कर उठा। रंगारंग कार्यक्रमों की श्रृंखला के बीच मंच से स्वचलित यंत्रों से रंग बिरंगे गुलाल व पुष्प पंखुडियों की वर्षा हुई तो पण्डाल में सतरंगी छठा नजर आने लगी। हर कोई इस नजारे से भाव विभोर हो गया। जिसे देखकर लाखों की संख्या में आये श्रद्धालुओं ने लठामार होली का आनन्द ले रहे थे। जैसे जैसे हुरियारे हुरियारानों पर रंग डालते हुरियारिनें लाठियां ग्वालों पर मारने लगती। यह नजारा देख ऐसा लग रहा था जैसे स्वयं राधाकृष्ण आकर साक्षात होली खेल रहे हो। एक ओर जहाॅ लठठामार होली का आनन्द आ रहा था वहीं दूसरी ओर आकाश में गुलाल गुलाल ही उड़ा नजर आ रहा था। वहीं भक्ैतगण भी एक दूसरो पर गुलाल वर्षा कर होली की मस्ती का आनन्द ले रहे थे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर लठठामार होली को देखने आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किये गये थे। जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र, एसएसपी स्वप्निल ममगाई स्वयं उपस्थित रहकर सुरक्षा की हर स्थिति का जायजा ले रहे थे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान व आसपास के क्षेत्र में चप्पे चप्पे पर पुलिसबल तैनात था। प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए सजग नजर आ रहा था।   

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