मथुरा। देश के विभिन्न भागों से गजल के समकक्ष ‘हिन्दी-सजल’ को हिन्दी साहित्यकारों समीक्षकों एवं सृजन धर्मियों से मिले प्रोत्साहन से उत्साहित सजल-सर्जना-समिति की राष्ट्रीय कारिणी ने विभिन्न प्रान्तों में सजल महोत्सव आयोजित करने का फैसला किया है । बुधवार को कैम्प कार्यालय पर आयोजित बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष डा. अनिल गहलौत ने बताया कि अन्य प्रान्तों में सजल-महोत्सव आयोजित करने पर प्रान्तीय इकाइयों को महोत्सव आयोजन पर हुए खर्च की पचास प्रतिशत धनराशि का भुगतान भी केन्द्रीय समिति द्वारा किया गया। जिसके लिए प्रान्तीय समिति को केन्द्रीय समिति से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी । समिति ने अनुभव किया है कि विभिन्न प्रदेशों में सजल-सृजन को आन्दोलन के रूप में विकसित करने के लिए स्थानीय स्तर पर हिन्दी रचना धर्मिता के प्रति समर्पित उत्साही कवि/कवियित्रियों को इस विधा से जोड़ा जाना जरूरी है । राष्ट्र भाषा हिन्दी के भण्डार को स्तरीय सजल सृजन से समृद्ध करने, सजल विधा को पहचान दिलाने के उद्देश्य से समिति गजल के समानान्तर आन्दोलन को पूरी दृढ़ता के साथ खड़ा करने की पक्षधर है । समिति अध्यक्ष डा. गहलौत ने बताया कि सितम्बर में प्रस्तावित वार्षिक सजल महोत्सव से पूर्व दो सजल सप्तकों एक समवेत गीत-नवगीत संग्रह तथा एक समवेत सजल संग्रह का प्रकाशन भी किया जायेगा । इस समयबद्ध योजना द्वारा नये सजलकारों को प्रोत्साहित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है । इन सभी का विमोचन समिति के संरक्षक सदस्य पूर्व जज डा. चन्द्रभाल ‘सुकुमार’ के आग्रह पर 9 सितम्बर को विद्वानों की नगरी वाराणसी में आयोजित सजल महोत्सव में किया जाना है । केन्द्रीय समिति ने अन्य भाषाओं का हिन्दी वैकल्पिक शब्दकोश प्रकाशित करने का भी निर्णय लिया है । इससे उदीयमान सजल सृजनकारों को सहायता मिल सकेगी । बैठक में सर्वसम्मति से समिति के आजीवन सदस्य उपेन्द्र त्रिपाठी को समिति का मीडिया प्रभारी भी नियुक्त किया गया. समिति की बैठक में संरक्षक पूर्व जज डा. चन्द्रभाल ‘सुकुमार’ डॉ. अशोक बंसल, डा. राम सनेही लाल ‘यायावर’ डॉ. राकेश सक्सैना, विजय.
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