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साहित्यकारों का हुआ सम्मान
मथुरा। हिन्दी सजल सर्जना समिति के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय अर्द्ध वार्षिक सजल महोत्सव में उपस्थित-साहित्यकारों ने ‘हिन्दी-सजल’ के माध्यम से हिन्दी-साहित्य के भण्डार को पूरी निष्ठा एवं गुणवत्ता के साथ समृद्ध बनाने का संकल्प लिया। समारोह में अनुभव किया गया कि ‘गजल’ को हिन्दी में अपनाने से हिन्दी साहित्य का अहित ही अधिक हुआ है। समारोह की अध्यक्षता जे.एस. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर हरिमोहन ने की ।
सजल काव्य विद्या’ की विस्तार से चर्चा करते हुए समिति के अध्यक्ष डॉ. अनिल गहलौत ने बताया कि बड़ी संख्या में हिन्दी के प्रतिष्ठित विद्वानों, साहित्य-कारों, विद्वानों एवं समीक्षकों द्वारा परस्पर विचार मंथन से सजल के शिल्प एवं व्याकरण का निर्धारण किया गया है। सजल के समकक्ष शेर को ‘पदिक’, रदीफ को ‘पदान्त’ काफिया को ‘समांत’, मतला को ‘आदिक’ तथा मक्ता को ‘अन्तिक’ नाम देते हुए गजल के समकक्ष ‘सजल’ का शिल्प गत ढाँचा तैयार किया गया है। सजल में समान-मात्रा भार मीटर लय की एक रूपता तथा मुक्तक वाली ‘कहन’ पर भी विशेष जोर है । ये सभी तत्व ‘सजल’ को हिन्दी गजल से अलग पहचान देते हैं । कार्यक्रम का संचालन करते हुए कवि एवं शिक्षाविद् डॉ. रमाशंकर पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति की सेवा करना ही सजल समिति का उद्देश्य है ।
साहित्य सर्जना समिति के अर्द्ध वार्षिक समारोह में प्रख्यात साहित्यकार डॉ. नरेश चन्द बंसल को साहित्य विभूषण की उपाधि से सम्मानित किया गया। उनकी अनुपस्थिति में उनका सम्मान उनके प्रतिनिधि डॉ. सुभाष चन्द दीक्षित ने ग्रहण किया । फर्रुखाबाद से पधारे कवि डा. शिव ओम ‘अम्बर’ को सजल-विभूषण, केन्द्र एवं प्रदेश सरकार से साहित्य सृजन हेतु सम्मानित डा. दिनेश पाठक ‘शशि’ व डॉ. राकेश चक्र को हिन्दी साहित्य गौरव, डॉ. रमाशंकर पाण्डेय व युवा कवि मनवीर ‘मधुर’ को ‘काव्य-भूषण’ तथा अटल राम चतुर्वेदी को ब्राज भाषा काव्य भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया।













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