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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश उपचुनाव में मिली करारी हार के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि हार का कारण सपा और बसपा के बीच बने गठबंधन है। एक चैनल को इंटरव्यू देते हुए शाह ने कहा कि ऐन वक्त पर सपा और बसपा साथ आ गए, लेकिन अब शाह ने कहा कि पार्टी ने हार के कारणों की समीक्षा करने के लिए एक समिति गठित की है और पार्टी 2019 में 50 फीसदी वोट शेयर के लिए लडाई लडने को तैयार हैं।  उपचुनाव की तर्ज पर साल 2019 के लोकसभा चुनाव में धुर विरोधियों सपा और बसपा के गठजोड की संभावना से भाजपा का चुनावी गणित गडबडाने संबंधी सवाल पर शाह ने कहा, ‘ये सरल नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘मीडिया दो सीटों (गोरखपुर और फूलपुर) के नतीजों को लेकर बाग बाग है। कांग्रेस की ओर से संसद परिसर में मिठाई बांटी गई कि हमने उपचुनाव में आठ सीटें खोई हैं, लेकिन ये कोई नहीं कह रहा कि हमने उनसे 11 प्रदेश छीने हैं। कोई भी त्रिपुरा का नाम नहीं ले रहा, जहां दो हफ्ते पहले ही हमने भारी जीत हासिल की।’ शाह ने कहा, ‘हमने हार के कारणों की जांच के लिए कमेटी बनाई है और उसकी जो रिपोर्ट आएगी उस पर काम किया जाएगा। हमें यह ध्यान रखना होगा कि उपचुनाव स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रख कर लडे जाते हैं, हर स्थानीय चुनाव का अलग परिदृश्य होता है, लेकिन आम चुनाव में बडे नेता और बडे मुद्दे शामिल होते हैं। साल 2019 में भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन अधिक सीटें हासिल करेंगी।’   साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए सरगर्मी तेज हो गई है। यूपी से इस बार कुल 10 उम्मीदवार राज्यसभा पहुंचने वाले हैं। इसमें से 8 सीटों पर बीजेपी और एक पर समाजवादी पार्टी की जीत तय मानी जा रही है। लेकिन, यूपी की 10वीं सीट पर सबसे बड़ा सस्पेंस बना हुआ है। इस सीट पर एसपी-कांग्रेस जहां बीएसपी को जिताने में जुटी हैं, वहीं बीजेपी ने भी 9वें कैंडिडेट को उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। अखिलेश यादव ने बुधवार रात लखनऊ में डिनर पार्टी दी तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपने आवास पर सहयोगियों की मीटिंग ले चुके है। ऐसे में दोनों ही दलों ने राज्यसभा चुनाव के लिए गणित सेट कर लिया है, लेकिन शुक्रवार की वोटिंग के बाद नतीजे आने पर ही स्थिति साफ हो पाएगी।    अपने प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए दलों के पास महज 24 घंटे से कम का समय बचा है। मतदान 23 मार्च को है। प्रमुख दलों द्वारा जरूरी मतों को सहेजने और दल के प्रत्याशी अथवा समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में पोल करा देने की कवायदें तेज कर दी गई हैं। इस चुनाव की अहमियत को देखते हुए दलों के बड़े नेताओं का लखनऊ दौरा तेज हो गया है। बैठकें और भोज का दौर भी तेजी से चल रहा है। विधायकों को कहां और कैसे मतदान करना है इसकी जानकारी दी जा रही है। उन विधायकों पर नजरें रखी जा रही हैं जिन पर विरोधी खेमे के पक्ष में क्रास वोटिंग की आशंका है। बहुजन समाज पार्टी के सभी विधायकों को बुधवार को ही लखनऊ बुला लिया गया है। बसपा प्रमुख मायावती आज विधायकों को रात्रिभोज देंगी। वह इसके पहले विधायकों के साथ बैठक कर राज्यसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा करेंगी। बसपा के कुल 19 विधायक हैं।    मायावती विधायकों के साथ आज शाम 7 बजे से बैठक करेंगी। इसमें वह राज्यसभा चुनाव के संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश देंगी। उन्होंने विधायकों को रात्रिभोज भी दिया है। बसपा ने भीमराव अंबेडकर को राज्यसभा चुनाव में उतारा है। बसपा उम्मीदवार को सपा और कांग्रेस के विधायक भी वोट देंगे। बसपा उम्मीदवार को जिताने के लिए अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ किया जा रहा है। लेकिन, भाजपा ने 9वां उम्मीदवार उतार कर सभी पार्टियों की गणित बिगाड़ दिया है। इससे जोड़तोड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसीलिए सभी पार्टियां अपने विधायकों को सहेज कर रखने के प्रयास में जुटी हुई हैं। इससे जोड़तोड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने विधायकों को वोट डालने के लिए खासी सतर्कता बरतने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार शाम अपने सरकारी आवास पांच कालिदास मार्ग पर सभी विधायकों की बैठक बुलाई। इसमें बागी तेवर दिखा कर बाद में नर्म पड़े सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष व कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर व विधायक भी शामिल हुये।   नरेश अग्रवाल के बीजेपी में शामिल होने के बाद इस बात की आशंका तेज हो गई है कि एसपी से विधायक उनके बेटे नितिन अग्रवाल क्रॉस वोटिंग करेंगे। नितिन अग्रवाल के झटके के बीच एसपी-बीएसपी के लिए कुंडा से निर्दलीय विधायक राजा भैया उम्मीद की किरण बने हुए हैं। अखिलेश यादव की डिनर पार्टी में राजा भैया भी पहुंचे थे। इसके अलावा अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव भी आए थे। शिवपाल ने कहा कि जो इस पार्टी में नहीं आए हैं, उनका भी समर्थन मिलेगा, हम सब साथ हैं। 10वीं सीट के लिए यह चुनाव इतना फंसा हुआ नहीं होता अगर नरेश अग्रवाल ने पाला नहीं बदला होता। दरअसल यूपी में राज्यसभा चुनावों की गणित के मुताबिक एक कैंडिडेट को जीत के लिए 37 विधायकों के मतों की जरूरत है। भाजपा के पास 311 और सहयोगियों अपना दल एस (9) व सुभासभा (4) को मिलाकर एनडीए के कुल 324 विधायक हो रहे हैं। वहीं सपा के पास 47, बसपा के 19, कांग्रेस के 7, आरएलडी के 1, निषाद के 3 और निर्दलीय तीन विधायक हैं।      साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। फेसबुक डेटा लीक के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीति घमासान जारी है। कांग्रेस ने बीजेपी के आरोप पर पलटवार किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि बीजेपी फर्जी खबर पैदा करने की फैक्ट्री है। आपको बता दें कि केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फेसबुक डेटा लीक मामले में फेसबुक को जहां चेतावनी दी है वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से सफाई भी मांगी है।   केंद्रीय मंत्री प्रसाद के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा है कि बीजेपी का चरित्र ही फर्जी है और वो गलत खबरें पैदा करती है। रणदीप सुरजेवाला ने कहा, बीजेपी फर्जी खबरों की फैक्ट्री है उसने आज एक और फर्जी खबर का उत्पादन किया है। फर्जी बयान, फर्जी प्रेस कॉंफ्रेंस और फर्जी एजेंडा बीजेपी और उसके नियम-विरुद्ध कानूनमंत्री रविशंकर प्रसाद का चरित्र हो गया है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके अध्यक्ष कभी भी कैंब्रिज एनालिटिका की सेवाएं नहीं ली हैं।   उन्होंने कहा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस या कांग्रेस अध्यक्ष ने कभी भी कैंब्रिज एनालिटिका नाम की कंपनी की सेवाएं नहीं ली हैं। ये फर्जी एजेंडा और सफेद झूठ है, जिसे केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद फैला रहे हैं। सुरजेवाला ने कहा कि कैंब्रिज एनालिटिका से संबंधित वेबसाइट से जानकारी मिली है कि 2010 में बीजेपी-जेडीयू ने इसकी सेवाएं ली थीं। इसकी भारतीय सहयोगी कंपनी ओवलीन बिजऩेस इंटेलीजेंस बीजेपी के सहयोगी दल के सांसद के बेटे चला रहे हैं। 2009 में ओबीआई की सेवाएं रराजनाथ सिंह ने ली थीं।    रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी से पूछा सवाल रविशंकर प्रसाद ने सवाल पूछा है कि क्या कांग्रेस पार्टी अब चुनाव जीतने के लिए डेटा चोरी और छेड़छाड़ की मदद लेगी। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा, कैंब्रिज एनालिटिका का राहुल गांधी के सोशल मीडिया प्रोफाइल से क्या संबंध है। आपको बता दें कि कैंब्रिज एनालिटिका पर फेसबुक के करीब 5 करोड़ यूजर्स के डेटा चुराने का आरोप है।   इस मुद्दे पर रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर हमला बोला है और कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने 2019 के चुनाव प्रचार के लिए ब्रिटिश एजेंसी कैंब्रिज एनालिटका को जिम्मेदारी सौंपी है और इस पर अब गंभीर आरोप लगे हैं। साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। पीएम नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में मोदी केयर योजना को मंजूरी दे दी गई है। सरकार ने इसे नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम के तहत आयुष्मान भारत नाम दिया है। इस योजना पर खर्च होने वाली राशि का 60 फीसदी केंद्र सरकार और 40 फीसदी राज्य सरकार की ओर से वहन किया जाएगा। इस पर अगले दो साल तक करीब 10,500 करोड़ रुपए खर्च आएगा। इस योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को सालाना 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा दिए जाने का दावा भी किया गया है।    इसके अलावा कैबिनेट ने सरोगेसी रेग्युलेशन बिल में संशोधन को भी मंजूरी दी है। अब इसे संसद में पेश किया जाएगा। सरकार का कहना है कि सरोगेसी का अधिकतर दुरुपयोग किया जा रहा है। इस बिल की मदद से इसे रोका जा सकेगा। अब प्रत्येक राज्य में तीन माह में नेशनल सरोगेसी बोर्ड बनेगा। इसके अलावा राज्य के स्तर पर स्टेट सरोगेसी बोर्ड बनाया जाएगा। कैबिनेट में ओबीसी कोटे में सब कैटिगरी के लिए बनाए कमिशन को जून 2018 तक बढ़ाने को मंजूरी दी गई है। आपको बता दें कि कमिशन का गठन पिछले साल किया गया था। इसके अलावा कैबिनेट ने सिल्क उद्योग के लिए 2100 करोड़ की योजना को भी मंजूरी दी है।   यह है आयुष्मान भारत में इस योजना के तहत हर परिवार को 5 लाख रुपए तक का हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा। इस योजना के तहत शामिल होने वाले परिवारों का फैसला आर्थिक आधार पर होगा। इस योजना के दायरे में आने वाले परिवारों को सरकारी और चुने हुए प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलेगी। जो परिवार इस योजना के तहत आएंगे उन्हें इलाज की सुविधा देश भर में कहीं भी मिल सकेगी।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। संसद में मोदी सरकार की अग्नि परीक्षा की पहली घड़ी करीब आ गई है। लोकसभा में आज टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस की ओर से केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाएगा।    आईये, जानते है क्या कहते है आंकड़े   अविश्वास प्रस्ताव के लिए मिला समर्थन अविश्वास प्रस्ताव को पेश करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन हासिल होना चाहिए। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, एसपी के अलावा लेफ्ट पार्टियों ने अविश्वास प्रस्ताव को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। एनडीए सरकार से अलग हुई टीडीपी के पास 16 सांसद हैं। वहीं, वाईएसआर कांग्रेस के पास नौ सांसद हैं। टीएमसी के पास 34 सांसद है। यानी साफ है कि अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए जरूरी 54 सासंदों का समर्थन मिल गया है। हालांकि, केंद्र सरकार को पूरा भरोसा है कि वह बहुमत साबित कर लेगी।    बहुमत साबित करने के लिए 270 सांसदों की जरूरत   इस समय लोकसभा में 539 सांसद हैं। बहुमत साबित करने के लिए 270 सांसदों की जरूरत है। टीडीपी के एनडीए से अलग हो जाने पर भी लोकसभा में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है। उसे करीब 315 सदस्यों का समर्थन हासिल है और खुद उसके पास जरूरी 270 सीटों से चार सीट ज्यादा यानी 274 सीटें हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश और बिहार में हुए उप चुनावों में हारने के बाद संसद के ऊपरी सदन में भाजपा के 274 सदस्य हैं। इसके सहयोगी दलों के 41 सदस्यों को मिला दिया जाए तो यह संख्या 315 पर पहुंच जाती है। इसमें शिवसेना (18) को भी शामिल किया गया है, जिसने अभी तक खुलासा नहीं किया है कि अविश्वास प्रस्ताव पर उसका क्या रुख होगा। हाल के दिनों में शिवसेना और भाजपा के बीच संबंधों में खटास उभरकर सामने आई है।    राजग के सहयोगियों में लोक जनशक्ति पार्टी (6), अकाली दल (4), राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (3), अपना दल (2), जनता दल-युनाइटेड (2) और ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस (एआईएनआरसी), जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (जेकेपीडीपी), नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी), पटाल्ली मक्कल काची (पीएमके), सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के एक-एक सांसद शामिल हैं। अन्नाद्रमुक, जिसने 2014 में भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ा था लेकिन आम तौर पर इसे केंद्र की भाजपा सरकार का सहयोगी माना जाता है, के पास 37 सांसद हैं।   ये है लोकसभा की स्थिति   कुल सीट-545 बीजेपी-275 कांग्रेस-48 एआईएडीएमके-37 टीएमसी-34 बीजेडी-20 शिवसेना-18 टीडीपी-16 टीआरएस-11 सीपीआई (एम)-9 वाईएसआरएस कांग्रेस-9 समाजवादी पार्टी-7 अन्य-56 खाली -5   साभार-khaskhabar.com         

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मुंबई। महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मोदी और फडणवीस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अब मोदी मुक्त भारत का समय आ गया है। मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए ठाकरे ने कहा कि नीरव मोदी के मुद्दे को साइडलाइन करने के लिए बॉलीवुड अभिनेत्री श्रीदेवी की मौत को भुनाया गया। ठाकरे ने श्रीदेवी को राजकीय सम्मान देने पर सवाल उठाते हुए कहा कि श्रीदेवी ने अपने जीवन में किया क्या कि उन्हें राजकीय सम्मान दिया गया। किस आधार पर उन्हें तिरंगे में लपेटा गया। ये सरकार की सबसे बड़ी गलती थी। राज ठाकरे ने कहा कि श्रीदेवी की मौत शराब के कारण हुई थी।    आपको बता दें कि श्रीदेवी का 24 फरवरी को दुबई के एक होटल में बाथटब में दुर्घटनावश डूबने से मौत हो गई थी। इसके बाद जब श्रीदेवी के पार्थिव शरीर को मुंबई लाया गया था, तब महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें राजकीय सम्मान दिया था और उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा गया था। भारत सरकार ने श्रीदेवी को उनके सिनेमा में योगदान के लिए साल 2013 में पद्मश्री से नवाजा था। इसी कारण श्रीदेवी को राजकीय सम्मान दिया गया था। शिवाजी पार्क की सभा में रविवार को राज ठाकरे ने कहा कि यदि भविष्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और नोटबंदी की जांच हुई तो आजादी के बाद का यह देश का सबसे बड़ा घोटाला बनकर सामने आएगा।    राज ठाकरे ने कहा कि मोदी सरकार में बोफोर्स से बड़ा भी घोटाला हुआ है। सरकार राफेल विमानों की खरीद में हुए घोटाले को लेकर रहस्यमय ढंग से चुप्पी साधे है। मीडिया में भी इस घोटाले की खबरें नहीं आ रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अखबारों के मालिकों को विज्ञापन बंद करने की धमकी देते हैं। क्या समाचार देना है और क्या नहीं देना, यह सरकार तय कर रही है। राज ठाकरे ने आशंका व्यक्त की कि आगामी चुनावों को देखते हुए देश में धार्मिक दंगे कराए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी अब तक दुनिया घूम चुके हैं लेकिन कालाधन के रूप में देश से बाहर गया एक पैसा वापस देश में नहीं आया है। उल्टे बेरोजगारों को पकौड़े बेचने की सलाह दी जा रही है। अगर पकौड़े बेचना रोजगार है, तो क्या मोदी जी बेसन जमा करने के लिए दुनिया घूम रहे हैं।    उन्होंने भारत को लगी मोदी नाम की बीमारी को दूर करने के लिए सभी पक्षों को एकजुट होना होगा। आगामी चुनाव भारत की तीसरी आजादी की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि भारत को पहली आजादी 1947 में मिली। आजादी की दूसरा संघर्ष 1977 में हुआ और अब 2019 के चुनाव में भारत को मोदी से मुक्ति के रूप में तीसरी आजादी की लड़ाई लडऩे के लिए तैयार रहना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी अपने भाषण में हमला बोला। राज ठाकरे ने कहा कि फडणवीस क्लास के ऐसे मॉनिटर हैं, जो शिक्षकों को तो पसंद है लेकिन विद्यार्थियों को नहीं। उन्होंने कहा कि फडणवीस लादे गए मुख्यमंत्री है।    राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि राज्य में दलाल राज कर रहे हैं। फडणवीस ने मोदी को खुश करने के लिए महाराष्ट्र पर कर्ज का बोझ बढ़ा दिया है। महाराष्ट्र से महत्वपूर्ण कार्यालयों को गुजरात ले जाया जा रहा है, ताकि यहं के लोगों के हक की नौकरियां गुजरात के लोगों को मिलें। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी मोदी केवल गुजरात के ही बन कर रह गए हैं। सरकार के पास पैसे नहीं है और सरकार बड़ी-बड़ी घोषणाएं करके लोगों को मूर्ख बना रही है। अभिनेत्री श्रीदेवी के मृतदेह को राष्ट्रध्वज में लपेटे जाने को भी उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की गलती बताया। साभार-khaskhabar.com         

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नई दिल्ली। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का 84वें महाधिवेशन का आज तीसरा और अंतिम दिन है। दिल्ली में आयोजित महाधिवेशन को आज पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह संबोधित करेंगे, जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का समापन भाषण होगा। इस दौरान अलग-अलग पार्टी नेताओं की तरफ से कई प्रस्ताव पेश किए जाएंगे। मनमोहन सिंह सुबह 11.30 बजे भाषण देंगे। इसके बाद शाम 4 बजे राहुल गांधी का समापन भाषण होगा। आपको बता दें कि शनिवार को राहुल गांधी के भाषण के साथ शुरू हुए महाधिवेशन में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था। अपने संबोधन में सोनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र और बीजेपी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार की जमकर आलोचना की थी। सोनिया गांधी ने पीएम मोदी के वादों और नारों को निशाने पर लिया था। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी और उनके करीबियों के झूठे, फर्जी दावों और भ्रष्टाचार का हम सबूतों के साथ खुलासा कर रहे हैं। लोग अब समझ रहे हैं कि 2014 के सबका साथ, सबका विकास और मैं ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा जैसे उनके वादे सिर्फ और सिर्फ ड्रामेबाजी और वोट हथियाने की चाल थी। कुर्सी हथियाने की चाल थी। इससे आगे उन्होंने कहा था कि हमें ऐसा भारत बनाना है, जो सत्ता के भय और मनमानी से मुक्त हो। ऐसा भारत जिसमें हर व्यक्ति के जीवन की गरिमा बनी रहे। पक्षपात मुक्त भारत, प्रतिशोध मुक्त भारत, अहंकार मुक्त भारत। इसके लिए हर कांग्रेसजन को बलिदान देने के लिए तैयार रहना चाहिए।   साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने शनिवार को कहा कि 'सत्ता के नशे में चूर' और 'घमंडी' भाजपा सरकार ने विपक्ष को बर्बाद करने के लिए सभी हथकंडे अपनाए हैं। उन्होंने अपने 15 मिनट के भाषण में मोदी सरकार के चार वर्ष के शासन के दौरान कांग्रेस को समाप्त करने का आरोप लगाया।   सोनिया ने कहा, "बीते चार वर्षो में, घमंडी सरकार ने कांग्रेस को बर्बाद करने का कोई अवसर नहीं छोड़ा और साम, दाम, दंड, भेद भी अपनाया लेकिन पार्टी सत्ता के अभिमान के सामने कभी भी झुकी नहीं और न ही कभी झुकेगी।   उन्होंने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि उनका सभी के लिए विकास और भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करने का नारा सत्ता प्राप्त करने का हथकंडा था।   इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में उन्होंने कहा, "वर्ष 2014 में, जब मोदी सरकार आई, उन्होंने 'सबका साथ, सबका विकास', 'ना खाऊंगा, न खाने दूंगा' के बारे में बात की, जोकि वोट पाने के लिए की गई ड्रामेबाजी थी।"   उन्होंने कहा, "यह कांग्रेस पार्टी है जो अन्याय के खिलाफ खड़ी हो सकती है और इसके खिलाफ आवाज उठा सकती है। हमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने की जरूरत है। शपथ लीजिए कि हम इसके लिए पूरी कोशिश करेंगे।"   गुजरात विधानसभा में पार्टी के प्रदर्शन और राजस्थान व मध्यप्रदेश उपचुनाव में पार्टी के प्रदर्शन की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग कांग्रेस को समाप्त करना चाहते हैं, उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं है कि लोगों के बीच कांग्रेस के लिए कितना स्नेह है।   सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि उनका सभी के लिए विकास और भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करने का नारा सत्ता प्राप्त करने का हथकंडा था। इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में कांग्रेस के अधिवेशन में उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2014 में, जब मोदी सरकार आई, उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘ना खाऊंगा, न खाने दूंगा’ के बारे में बात की, जोकि वोट पाने के लिए की गई ड्रामेबाजी थी।’’   उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह की अगुवाई में संप्रग ने मजबूत अर्थव्यवस्था और जीडीपी पाई थी। उन्होंने कहा, ‘‘यह कांग्रेस पार्टी है जो अन्याय के खिलाफ खड़ी हो सकती है और इसके खिलाफ आवाज उठा सकती है। हमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने की जरूरत है। शपथ लीजिए कि हम इसके लिए पूरी कोशिश करेंगे।’’    साभार-khaskhabar.com       

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लखनऊ। गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए है। योगी आदित्यनाथ ने आज अधिकारियों की मीटिंग बुलाई है। सीएम योगी द्वारा अचानक बुलाई गई मीटिंग से अधिकारियों में हडक़ंप मच गया है। योगी आदित्यनाथ के गुरुवार को कई कार्यक्रम तय थे, लेकिन उन्होंने सारे कार्यक्रम निरस्त कर दिए। योगी को गोंडा के लोक कला महोत्सव में हिस्सा लेने जाना था लेकिन उन्होंने कार्यक्रम निरस्त कर दिया।    सीएम योगी का दूसरा प्रस्तावित कार्यक्रम भी निरस्त कर दिया गया है। उन्हें राज्य सभा के पूर्व सांसद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दिग्गज नेता रहे नानाजी देशमुख की मूर्ति का अनावरण करना था। योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रमों को निरस्त करके सभी उच्चाधिकारियों और विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल बैठक में बुलाया है। आपको बता दें कि सपा ने बुधवार को फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीटों पर हुए उप चुनाव में जीत दर्ज की।    गोरखपुर सीट उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और फूलपुर सीट उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सांसद पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। गोरखपुर में सपा के उम्मीदवार प्रवीण कुमार निषाद ने भाजपा के उपेंद्र दत्त शुक्ला को 21,961 मतों से पराजित किया। यहां निषाद को 4,56,437 मत हासिल हुए। उनके निकततम प्रतिद्वंदी भाजपा के उपेंद्र दत्त शुक्ला को 4,34,476 मत मिले। कांग्रेस प्रत्याशी डॉक्टर सुरहीता करीम को 18,844 मत मिले।    फूलपुर में सपा के नागेंद्र सिंह पटेल ने भाजपा के कौशलेंद्र सिंह पटेल को 59,613 मतों से हराया। नागेन्द्र सिह को 3,42,796 वोट मिले, वहीं भाजपा प्रत्याशी कौशलेंद्र सिंह को 2,83,183 मत हासिल हुए। यहां से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में लड़ रहे जेल में बंद अतीक अहमद को 48,087 मत हासिल हुए जबकि कांग्रेस प्रत्याशी मनीष मिश्रा को 19,334 मत हासिल हुए।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी को गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में तगड़ा झटका लगा है। दोनों ही जगह मिली करारी हार के बाद विपक्षी दल बीजेपी पर हमलावर हो रहे है। इसी बीच अब बीजेपी के अंदर भी नेतृत्व के खिलाफ स्वर उठ रहे हैं। बीजेपी नेता और पटना से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने हार के लिए सीधे-सीधे पार्टी नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया है। शत्रुघ्न सिन्हा ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा, सर, यूपी-बिहार के उपचुनाव के नतीजों ने आपको और हमारे लोगों को यह संकेत दिया होगा कि सीटबेल्ट बांधनी होगी। आगे कठिन समय है! उम्मीद है कि भविष्य में हम इस संकट से निपट सकेंगे। जितनी जल्दी हम इस समस्या को हल कर सकेंगे बेहतर होगा। ये नतीजे राजनीतिक भविष्य के बारे में भी बताते हैं, इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।    सिन्हा ने अखिलेश, मायावती और तेजस्वी यादव को भी बधाई दी। एक और ट्वीट में सिन्हा ने कहा, मैं लगातार कहता रहा हूं कि अहंकार, गुस्सा और अतिआत्मविश्वास लोकतांत्रिक राजनीति में सबसे बड़े दुश्मन हैं। यह बात ट्रंप, मित्रों और विपक्षी नेताओं समेत सब पर लागू है। वहीं, आजमगढ़ से सांसद रहे रमाकांत यादव ने सीधे-सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमला बोला। यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी सीएम बना तो लगा कि अब सबकी चिंता की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।   पिछड़ों और दलितों को हक न दिए जाने के चलते ऐसा हुआ है। विशेष जाति को लेकर सरकार का कड़ा रुख दिखा। पिछड़े और दलितों के साथ जो किया जा रहा है, उसका परिणाम 2019 में दिखाई देगा। यदि सभी को लेकर चलेंगे तो इसकी भरपाई की जा सकेगी। बीजेपी पर आरक्षण से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, पिछड़ों-दलितों के आरक्षण से छेड़छाड़ का प्रयास किया गया। उनके अधिकारों से छेड़छाड़ का प्रयास किया गया।   साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। अयोध्या के बहुप्रतीक्षित राममंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में आज फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट इस विवाद पर लगातार सुनवाई की तारीख तय कर सकता है। उधर, एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस केस के पक्षकारों का कहना है कि अब सुप्रीम कोर्ट से ही उम्मीद है, इस मामले को और नहीं टाला जाना चाहिए, जल्द से जल्द निर्णय सुनाने की जरूरत है। आपको बता दें कि पिछली बार 1 फरवरी को इस मामले की सुनवाई हुई थी, तब वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस और गीता सहित 20 धार्मिक पुस्तकों से इस्तेमाल किए तथ्यों का अंग्रेजी में ट्रांसलेशन न होने की वजह से सुनवाई टालनी पड़ी थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए मार्च की तारीख तय की थी।    पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सभी को वक्त देते हुए कहा था कि सभी पक्ष तैयार होकर आएं, अब सुनवाई नहीं टाली जाएगी। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था कि वह इस विवाद को जमीन विवाद के तौर पर देखेंगे, आस्था के विषय के रूप में नहीं देखेंगे। कोर्ट ने कहा था कि कोई नया पक्षकार इस मामले में और नहीं जोड़ा जाएगा। कोर्ट ने सभी पक्षों को दो हफ्ते में दस्तावेज तैयार करने का आदेश दिया।    साथ ही पीठ ने यह स्पष्ट किया कि उसका इरादा इस मामले को कभी भी रोजाना सुनने का नहीं रहा है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने सुन्नी वक्फ बोर्ड तथा अन्य की इस दलील को खारिज किया था कि याचिकाओं पर अगले आम चुनावों के बाद सुनवाई हो।    साभार-khaskhabar.com     

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इंफाल। मणिपुर में छह प्रतिबंधित भूमिगत संगठनों द्वारा गठित समन्वय समिति (कोरकॉम) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के राज्य के दौरे के दिन 16 मार्च को 17 घंटे के बंद का आह्वान किया है। कोरकॉम ने मंगलवार को कहा कि 16 मार्च को बंद देर रात एक बजे से प्रभावी होगा। इसने लोगों से किसी भी सरकारी सम्मेलन में भाग नहीं लेने की अपील की है और कहा है कि परीक्षाओं और अन्य जरूरी सेवाओं को प्रस्तावित बंद से छूट दी गई है।   दूसरी तरफ, मणिपुर में मापीथेल बांध के जबरदस्ती उद्घाटन के खिलाफ प्रदर्शन कर रही ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने राज्य में 48 घंटे की आम हड़ताल की घोषणा की है जो 16 मार्च की आधी रात को समाप्त होगी। मोदी एक दिवसीय मणिपुर दौरे पर 16 मार्च को सुबह इंफाल पहुचेंगे। वह कई परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। इन परियोजनाओं में खेल विश्वविद्यालय भी शामिल है।    प्रधानमंत्री को मुख्यमंत्री एन.बीरेन सिंह के क्षेत्र हेनगैंग में लुवांगशांगफम में एक सार्वजनिक सभा को भी संबोधित करना है। वह मणिपुर विश्वविद्यालय परिसर में दसवीं विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन भी करेंगे।   वीवीआईपी दौरे से पहले गड़बड़ी के संभावित इलाकों में पुलिस ने छापेमारी शुरू कर दी है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि अन्य जिलों से अतिरिक्त सुरक्षा बलों को मोदी और सिंह के दौरे वाले इलाकों में तैनात कर दिया गया है। साभार-khaskhabar.com     

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