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नई दिल्ली। त्रिपुरा में जबर्दस्त जीत और नगालैंड व मेघालय में बीजेपी गठबंधन की सरकार के बाद मंगलवार को दिल्ली में बीजेपी संसदीय दल की बैठक हुई। पूर्वोत्तर में मिली जीत का जश्न मनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता मीटिंग में आए। इस दौरान सभी नेताओं के गले में उत्तर-पूर्व का पारंपरिक पट्टा नजर आया। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्रिपुरा की ऐतिहासिक जीत को विचारधारा की जीत करार दिया है। वहीं, दूसरी ओर बीजेपी संसदीय दल की बैठक में अब कर्नाटक की बारी के नारे की गूंज सुनाई दी।    संसदीय दल की बैठक में सांसदों ने पीएम मोदी का स्वागत नारे लगाकर किया। पीएम मोदी जैसे ही बैठक में पहुंचे सांसदों ने जीत हमारी जारी है, अब कर्नाटक की बारी है का नारा लगाया। इस दौरान पीएम ने आडवाणी को मिठाई खिलाई। मीटिंग के दौरान पीएम मोदी ने कहा हिंसा की राजनीति और नफरत की राजनीति को आज के दौर में जनता नकार रही है। इसका एक बहुत बड़ा उदाहरण त्रिपुरा है। त्रिपुरा में बीजेपी की जीत लेफ्ट की हिंसक विचारधारा पर बीजेपी के विचार की जीत है।    उत्तर पूर्व के 3 राज्यों के नतीजे बीजेपी के लिए उत्साहजनक हैं। माना जा रहा है कि पीएम मोदी ने बीजेपी सांसदों को बजट सत्र के दूसरे राउंड में विपक्ष के आरोपों और हमले का जवाब देने के लिए सही रणनीति से आगे बढऩे के लिए कहा। मीडिया रिपोट्र्स की मानें तो बीजेपी की संसदीय दल की बैठक में उत्तर पूर्व के चुनाव नतीजों के साथ आने वाले राज्यसभा चुनाव और कर्नाटक समेत दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनावों की तैयारी में भी जुटने के निर्देश दिए। साभार-khaskhabar.com       

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मुंबई। करोड़ो रुपयों के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले मामले में सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस ने आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर और ऐक्सिस बैंक की एमडी शिखा शर्मा को समन भेजा है। एसएफआईओ ने आईसीआईसीआई और ऐक्सिस बैंक की प्रमुखों को नोटिस जारी कर गीतांजलि ग्रुप को वर्किंग कैपिटल फैसिलिटी दिए जाने पर जवाब मांगा है। 31 बैंकों के कन्सॉर्टियम ने हीरा कारोबारी नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के गीतांजलि ग्रुप को 5,280 करोड़ रुपये की वर्किंग कैपिटल फैसिलिटी दी थी। एसएफआईओ ने इस मसले पर पहले पीएनबी को नोटिस जारी किया था, अब एजेंसी ने कुछ अन्य बैंकों से इस बारे में जवाब मांगा है। आईसीआईसीआई बैंक ने 405 करोड़ रुपये का लोन गीतांजलि ग्रुप को जारी किया था। इसके अलावा ऐक्सिस ने भी बड़ी राशि इस समूह को जारी की थी।    मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक एसएफआईओ की ओर से कोचर और शिखा शर्मा से इस पर पूछताछ भी की जा सकती है। इससे पहले पीएनबी के एमडी सुनील मेहता को भी समन जारी किया गया था। कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय के तहत आने वाला एसएफआईओ का काम कारोबारी क्षेत्र में फ्रॉड की जांच करना है। एसएफआईओ को संदेह है कि नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने देश भर में करीब 400 शेल कंपनियां बना रखी थीं, जिनमें देश भर में फर्जी डायरेक्टर भी थे और इनके जरिए रकम को देश से बाहर भेजने का काम किया गया।     गीतांजलि के टॉप अधिकारी से पूछताछ   इधर, सीबीआई ने मंगलवार को गीतांजलि समूह के बैंकिंग कामकाज के उपाध्यक्ष से पूछताछ शुरू की। दिल्ली में सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘विपुल चितालिया से पूछताछ की जा रही है।’’ उन्होंने कहा कि चितालिया के बैंकॉक से लौटने के बाद सीबीआई उसे मुंबई हवाईअड्डे से ही पूछताछ के लिए लेकर चली गई। आभूषण कारोबारी नीरव मोदी के साथ चोकसी पर 12,600 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले का आरोप है। इसी घोटाले में अतिरिक्त 1,300 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का 26 फरवरी को खुलासा हुआ था।    सीबीआई ने 14 फरवरी को नीरव मोदी, उनकी पत्नी एमी, भाई निशाल मोदी, मेहुल चोकसी और उनकी कंपनियों डायमंड आर यूएस, सोलर एक्सपोट्र्स और स्टेलार डायमंड के खिलाफ पहली प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की थी। मोदी, उनका परिवार और चोकसी जनवरी के पहले सप्ताह में ही देश छोडकऱ फरार हो गए थे। सीबीआई ने चोकसी के गीतांजलि समूह के खिलाफ 4,886.72 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को लेकर 15 फरवरी को दूसरी प्राथमिकी दर्ज की थी।     साभार-khaskhabar.com       

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बीजिंग। चीन साल 2018 में अपना रक्षा बजट 8.1 फीसदी बढ़ाने जा रहा है। राष्ट्रीय विधायिका में सोमवार को पेश की गई बजट रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में यह इजाफा पिछले साल के मुकाबले सात फीसदी अधिक है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, सोमवार से शुरू हो रहे 13वीं नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के पहले सत्र के समक्ष पेश होने से पहले मीडिया में उपलब्ध इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश का 2018 का रक्षा बजट 1110 करोड़ युआन (175 अरब डॉलर) होगा। यह भारत के रक्षा बजट से तीन गुना ज्यादा है।    दुनियाभर में रक्षा बजट पर सबसे ज्यादा खर्च अमेरिका करता है। इसके बाद चीन का नंबर आता है। अमेरिका का रक्षा बजट 602.8 अरब डॉलर है। चीन का रक्षा बजट अमेरिका के मुकाबले चार गुना कम है। भारत सरकार ने इस बार यानी 2018-19 में रक्षा बजट के लिए 2.95 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए हैं जो पिछले साल के 2.74 लाख करोड़ रुपए की तुलना में 7.81 फीसदी ज्यादा है।    13वीं एनपीसी की पहली वार्षिक बैठक के प्रवक्ता झांग येसुई ने रविवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कई प्रमुख देशों की तुलना में चीन के रक्षा बजट में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और राष्ट्रीय राजकोषीय व्यय से छोटा सा हिस्सा लिया गया है। झांग ने कहा कि देश का प्रति व्यक्ति सैन्य खर्च अन्य प्रमुख देशों की तुलना में कम है। साभार-khaskhabar.com       

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मुंबई। आईएनएक्स मीडिया के कथित रिश्वतखोरी मामले में आगे बढ़ते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम का सामना हत्या मामले में आरोपी इंद्राणी मुखर्जी से कराया। सीबीआई की एक छह सदस्यीय विशेष टीम 46 वर्षीय कार्ति चिदंबरम को सुबह नई दिल्ली से मुंबई लाई और उन्हें बायकुला महिला जेल ले गई, जहां इंद्राणी मुखर्जी बंद हैं। पूर्व मीडिया दिग्गज पीटर मुखर्जी की पत्नी इंद्राणी अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के मामले में आरोपी हैं। शीना उनके पहले पति की बेटी थी। 2012 में शीना बोरा हत्याकांड मामले में पीटर व इंद्राणी हिरासत में हैं।   मुंबई पहुंचने के थोड़ी देर बाद सीबीआई टीम कार्ति को सुबह करीब 11 बजे लेकर जेल पहुंची और उनका सामना इंद्राणी मुखर्जी से कराया। इसके बाद दोनों से करीब चार घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान इंद्राणी ने सभी सवालों का जवाब बहुत शांति से दिया। इंद्राणी अपने बयान पर कायम रही और उसने कहा कि कार्ति ने उनसे घूस की मांग की थी और उन्हें घूस दी गई। सीबीआई ने कार्ति पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने पिता के पद का दुरुपयोग करते हुए मुखर्जी दंपति के स्वामित्व वाले आईएनएक्स मीडिया के लिए विदेशी निवेश प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) से मंजूरी हासिल की थी।   इंद्राणी मुखर्जी ने 17 फरवरी को नई दिल्ली में मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना बयान दर्ज करते हुए इस सौदे में कार्ती चिदंबरम पर आरोप लगाते हुए कहा था कि कार्ति ने इस मंजूरी के लिए कथित तौर पर उनसे रिश्वत ली थी। कार्ति को आईएनएक्स (जिसका नाम बाद में नाइन एक्स पड़ा) से साढ़े तीन करोड़ रिश्वत मिली थी।   उन्होंने यह आरोप लगाया था कि नई दिल्ली के एक होटल में कार्ति ने उनसे मुलाकात की थी और एफआईपीबी मंजूरी के लिए कथित रूप से 10 लाख डॉलर की मांग की थी। इस खुलासे के बाद 28 फरवरी को चेन्नई हवाई अड्डे से कार्ति को गिरफ्तार किया गया था। वह उस वक्त लंदन से लौटे थे। इसके बाद उन्हें छह मार्च तक सीबीआई की हिरासत में भेज दिया गया। हालांकि, कार्ति ने कहा कि उनके खिलाफ लगे सभी आरोप झूठे और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं।   साभार-khaskhabar.com     

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश लोकसभा उप-चुनाव में समाजवादी पार्टी (एसपी) के साथ गठबंधन की बात को खारिज किया है। प्रेस कांफ्रेंस कर उन्होंने इस बात की जानकारी दी। मायावती ने कहा कि, गठबंधन को लेकर इस तरह की जो भी बातें की जा रही है वह सिर्फ अफवाह है। आपको बता दें कि इससे पहले खबर आई थी कि राज्य में दो लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में बीएसपी एसपी को समर्थन करेगी। मीडिया से बात करते हुए मायावती ने कहा, यूपी में हाल ही में राज्य सभा और विधान परिषद में होने वाले चुनव में बीजेपी को हराने के लिए एसपी और बीएसपी के द्वारा एक दूसरे को वोट ट्रांसफर कर दिया जाता है तो ये कोई चुनावी गठबंधन नहीं है। आपको बता दें कि गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर 11 मार्च को चुनाव होने हैं और नतीजे 14 मार्च आएंगे।    1993 में SP-BSP एक साथ चुनाव लड़ चुके हैं- आपको बता दें कि इससे पहले 1993 में एसपी-बीएसपी एक साथ चुनाव लड़ चुके हैं। तब एसपी और बीएसपी गठबंधन को 176 सीटें मिली थी और बीजेपी को 177 सीट मिली थी। गेस्ट हाउस कांड के बाद यह गठबंधन टूट गया था, लेकिन अब फिर से दोनों पार्टी साथ आती दिख रही है।     योगी आदित्यनाथ ने ली चुटकी- इस बात की जानकारी सामने आने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर चुटकी ली थी। उन्होंने रहीम के एक दोहे का उदाहरण देते हुए कहा था, कह रहीम कैसे निभे, केर-बेर को संग।   इस दोहे का मतलब है कि केले का पत्ते और बेर का साथ नहीं हो सकता। क्योंकि अगर यह दोनों साथ आए तो बेर के कांटें केले के पत्ते को काट देंगे। योगी ने कहा था कि भले ही दोनों दल साथ आने का दिखावा कर रहे हैं लेकिन दोनों के बीच की दूरियां कभी कम नहीं हो सकती है।   आपको बता दें कि सीएम योगी रविवार को त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने पुरानी बात याद दिलाते हुए कहा था कि गेस्ट हाउस कांड किसने कराया था। लखनऊ में बने स्मारक तोडऩे की चेतावनी कौन दे रहा था। आपको बता दें कि केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर के सांसद पद से इस्तीफा देकर विधान परिषद के सदस्य बन गए हैं। इस उपचुनाव में बीजेपी ने वाराणसी के पूर्व महापौर कौशलेंद्र सिंह पटेल को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं एसपी की तरफ से नागेंद्र सिंह पटेल उपचुनाव में अपना भाग्य अपनाएंगे। कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता जेएन मिश्र के पुत्र मनीष मिश्र को भाग्य आज़माने का मौका दिया है।   वहीं योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे के बाद खाली हुई गोरखपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी ने क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ला को प्रत्याशी घोषित किया है। जबकि एसपी की तरफ से प्रवीण कुमार निषाद उपचुनाव लड़ेंगे।   साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। बीजेपी के बढ़ते रुतबे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बढ़ते कद से विपक्षी दल घबराए हुए हैं और एकजुट होने की तैयारी कर रहे है। पूर्वोत्तर के चुनाव नतीजों में बीजेपी को बंपर जीत मिलने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बीजेपी से मुकाबले के लिए उत्तर प्रदेश में मायावती की पार्टी बसपा अब अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को समर्थन दे सकती है। आपको बता दें कि यूपी में दो सीटों पर लोकसभा उपचुनाव होने है। फूलपुर व गोरखपुर उपचुनाव से पहले बीएसपी और एसपी साथ आ सकती है।    बीएसपी आज ही इसका एलान भी कर सकती है। इसके लिए आज इलाहाबाद और गोरखपुर में पार्टी के स्थानीय नेताओं की मीटिंग बुलाई गई है। शाम को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर औपचारिक एलान हो सकता है। फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट पर 11 मार्च को उपचुनाव है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने पहले ही उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनावों में समाजवादी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान कर चुकी है। साथ ही साथ पार्टी ने सभी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक दलों से अपील की है कि वे भाजपा-संघ के सांप्रदायिक गठजोड़ को हराने के लिए एकजुट हो जाएं।    राकांपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमेश दीक्षित ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। दोनों नेता के बीच करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में प्रदेश के सियासी हालात पर चर्चा हुई थी। इसके बाद राकांपा ने बीसपी को समर्थन देने का ऐलान किया था। राकापा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दीक्षित ने एक बयान जारी कर कहा था कि मौजूदा दौर में सभी धर्मनिरपेक्ष राजनैतिक दलों की जिम्मेदारी बनती है कि वे भाजपा-संघ के गठजोड़ को परस्त करने में अपनी पूरी ताकत लगा दें। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को भी सलाह दी और कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को समझदारी से काम लेते हुए अपने दोनों उम्मीदवारों के नाम वापस ले लेने चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक दलों की एकता के आगे फासीवादी भाजपा हार जाए। उन्होंने कहा कि भाजपा को हराने के लिए सभी लोकतांत्रिक दलों के बीच एक व्यापक एकता बनेए यही आज के वक्त की दरकार है।     साभार-khaskhabar.com     

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शिलांग। मेघालय में सरकार बनाने की कवायद में जुटी कांग्रेस ने आज राज्यपाल से मुलाकात की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राज्यपाल से मिलकर मेघालय में सरकार बनाने का दावा पेश किया है। राज्यपाल को लिखी चिट्ठी में कांग्रेस ने कहा है कि राज्य में 21 सीटें जीतकर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी है और सरकार बनाना चाहती है। संवैधानिक नियमों के अनुसार कांग्रेस को जल्द से जल्द सरकार बनाने के लिए निमंत्रण दिया जाना चाहिए। यह भी कहा गया है कि विधानसभा में तय दिन और समय के अनुसार पार्टी बहुमत सिद्ध कर देगी।    कांग्रेस के दिग्गज नेता कमल नाथ ने कहा कि हमने राज्यपाल को लेटर सौंप दिया है, जिसमें कांग्रेस पार्टी को सरकार बनाने के लिए निमंत्रण देने की मांग की गई है। कमलनाथ वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल और मुकुल वासनिक के साथ मेघालय में ही है। वे यहां खंडित जनादेश के बीच प्रदेश में सरकार बनाने की कोशिश में जुटे हैं। कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस सरकार बनाने के अपने प्रयास में मेघालय के सभी क्षेत्रीय दलों के संपर्क में हैं।    कमलनाथ ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर धनबल का इस्तेमाल कर कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में भाजपा ने वाममोर्चा को सत्ता से बेदखल कर दिया है लेकिन त्रिपुरा की जनता को जल्द ही समझ में आ जाएगा कि उनको गहरा आघात लगने वाला है।    मेघालय की 60 सीटों वाले विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा कांग्रेस को 21 सीटों पर जीत मिली। लेकिन इसके बावजूद भी वह बहुमत से पीछे रह गई। वहीं, एनपीपी को 19 सीटों पर जीत मिली है। एनपीपी ने बीजेपी से अलग चुनाव लड़ा था लेकिन बहुमत से पिछडऩे पर वो भाजपा से गठबंधन कर कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर सकती है। भाजपा के साथ एनपीपी के गठबंधन के आसार भी मजबूत नजर आ रहे हैं। यहां भाजपा को सबसे कम दो सीटें मिली हैं।   साभार-khaskhabar.com         

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न्यूयार्क। नीरव मोदी की तीन कंपनियों द्वारा यहां दायर दिवालिया अर्जी में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) का ऋणदाता के रूप में कोई उल्लेख नहीं किया गया है। गौरतलब है कि सरकारी पीएनबी में हुए 2 अरब डॉलर के घोटाले का नीरव मोदी मुख्य आरोपी है। नीरव मोदी की कंपनियों द्वारा दाखिल दिवालिया अर्जी के दस्तावेजों में केवल एचएसबीसी और इजरायल डिस्काउंट बैंक (आईडीबी) बैंक का ऋणदाता के रूप में उल्लेख है, जिनका कुल 2 करोड़ डॉलर दो कंपनियों पर बकाया है।    आईडीबी से ऋण लेने के लिए मोदी ने निजी गारंटी प्रदान की थी, साथ ही दो अन्य कंपनियों ने भी गारंटी प्रदान की थी। हालांकि नीरव मोदी की इन तीन कंपनियों द्वारा अमेरिकी में दाखिल दिवालिया अर्जी अगर मंजूर हो जाती है तो पीएनबी को इन कंपनियों से अपने ऋण की वसूली में बाधाएं खड़ी हो जाएगी। क्योंकि दिवालिएपन के मामले में दाखिल करने से कर्जदार और देनदार की संपत्ति के खिलाफ स्वचालित रूप से कर्ज की वसूली और कर्जदार की संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने पर रोक लग जाती है। दिवालिया दस्तावेजों में कहा गया है, अगर आप अपने कर्ज की वसूली की कोशिश करते हैं या कोई अन्य कार्रवाई करते हैं तो यह दिवालिया संहिता का उल्लंघन होगा और आपको इसके लिए दंडित किया जा सकता है। नीरव मोदी की तीन कंपनियों - फायरस्टार डायमंड इंक (एफडीआई), फैंटेसी इंक (एफआई), और ए जेफे इंक (एजेआई) ने अमेरिका के दक्षिणी न्यूयार्क दिवालिया अदालत में दिवालिया होने की याचिका दाखिल की है।   साभार-khaskhabar.com       

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मुंबई। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने फिल्म ‘परी’ में अपनी पत्नी-अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के काम की सराहना की है। विराट कोहली ने ट्वीट किया, ‘‘पिछली रात फिल्म ‘परी’ देखी। यह मेरी पत्नी का अब तक का सबसे बेहतरीन काम है। पिछले कुछ समय में मैंने इससे बेहतर कोई फिल्म नहीं देखी। डर भी लगा, लेकिन तुम पर गर्व है अनुष्का शर्मा।’’   नवोदित निर्देशक प्रोसित रॉय द्वारा निर्देशित इस हॉरर फिल्म को अनुष्का की क्लीन स्लेट फिल्म्स और क्र ीआज एंटरटेनमेंट ने संयुक्त रूप से प्रोड्यूस किया है। फिल्म ‘एनएच 10’ और ‘फिलोरी’ के बाद एक निर्माता के रूप में यह अनुष्का की तीसरी फिल्म है। इस फिल्म में बांग्ला अभिनेता परमब्रता चटर्जी भी हैं।   साभार-khaskhabar.com       

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कांचीपुरम। कांचीपुरम मठ के 69वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को आज अंतिम विदाई दी गई। सरस्वती के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हिंदू साधुओं की परंपरा का अनुपालन करते हुए उनका पार्थिव शरीर मठ के आहाते में ही दफनाया जाएगा। जयेंद्र सरस्वती की महा समाधि के पहले उनके शरीर पर भभूत का लेप लगाया गया। संतों-महंतों-ऋषियों-आचार्यों ने शंकराचार्य के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित की। उनकी आत्मा की शांति के लिए मंत्रोच्चारण किए गए। श्रद्धालुओं के अंतिम दर्शन के लिए जयेंद्र सरस्वती का पार्थिव शरीर कांची मठ स्थित नंदवनम में रखा गया है। अभी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और लोग मौजूद है। मठ का दावा है कि एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु उनके अंतिम दर्शन को पहुंचे है। जयेंद्र का बुधवार को यहां के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। वह 82 वर्ष के थे। डॉक्टरों ने बताया कि हृदयाघात के कारण जयेंद्र सरस्वती का निधन हुआ। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को किया जाएगा।    नंदवनम में ही चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामी के पास उनको महासमाधि प्रदान किया जाएगा। इस बीच विजयेंद्र सरस्वती को शंकराचार्य के रूप में मठ प्रमुख बनाया गया है। जयेंद्र सरस्वती का जन्म 18 जुलाई 1935 को पुराने तंजावुर जिले के इरुलनीक्की में हुआ था। चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामी ने उनको अपने वारिश के तौर पर उनका अभिषेक किया था। उनको 22 मार्च 1954 को जयेंद्र सरस्वती का पदनाम प्रदान किया गया था। दक्षिण भारत में जयेंद्र सरस्वती के काफी अनुयायी हैं। उन्होंने केंद्र में अटल बिहारी बाजपेयी की अगुवाई में 1998 से 2004 के दौरान भारतीय जनता पार्टी की सरकार के समय रामजन्म भूमि विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की बात कही थी।    पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की सरकार के दौरान 2004 में वह विवादों में आए और कांचीपुरम के वरदराज पेरुमल मंदिर के अधिकारी शंकर रमण की हत्या के आरोप में उनको गिरफ्तार किया गया। इस मामले की सुनवाई तमिलनाडु से बाहर पुडुचेरी में हुई जहां अदालत ने 2013 में मठ के कनिष्ठ संत विजयेंद्र और 21 अन्य समेत उनको बरी कर दिया। अगस्त 1987 में भी एक विवाद में उनका नाम आया जब जयेंद्र सरस्वती ने तत्काल मठ छोडऩे का फैसला लिया। कर्नाटक के कोडागू स्थित ताला कावेरी में 17 दिन बिताने के बाद वह मठ लौटे तो हजारों श्रद्धालुओं ने असीम श्रद्धा व उत्साह के साथ उनका स्वागत किया था। उन्होंने जन कल्याण नामक सामाजिक संगठन की नींव डाली।   जयेंद्र के निधन पर राजनीति में शोक   राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जयेंद्र सरस्वती के निधन पर शोक जताया। कोविंद ने शोक जताते हुए ट्वीट कर कहा, कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के निधन की खबर सुनकर दुख हुआ। हमारे देश ने एक आध्यात्मिक नेता और सामाजिक सुधारक खो दिया है। मेरी संवेदनाएं उनके असंख्य शिष्यों और अनुयायियों के साथ है।    प्रधानमंत्री मोदी ने शंकराचार्य के साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए शोक जताया। मोदी ने ट्वीट कर कहा, श्री कांची कामकोटि पीठ के आचार्य जगद्गुरु पूज्यश्री जयेंद्र सरस्वती शंकराचार्य के निधन पर गहरा दुख हुआ। वह अपनी अनुकरणीय सेवा और नेक विचारों की वजह से लाखों भक्तों के दिलो-दिमाग में जीवित रहेंगे। उनकी आत्मा को शांति मिले। राहुल गांधी ने कहा कि वह कांची शंकराचार्य के निधन की खबर सुनकर दुखी हैं। राहुल ने ट्वीट कर कहा, मैं कांची कामकोटि पीठ के जगद्गुरु पूज्यश्री जयेंद्र सरस्वती शंकराचार्य के निधन की खबर सुनकर दुखी हूं।   भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री एल.के. आडवाणी ने शोक जताते हुए कहा कि उन्होंने बाबरी मस्जिद विवाद पर हिंदू और मुसलमान समुदायों के बीच कटुता को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आडवाणी ने लिखित संदेश में कहा, मुझे जयेंद्र सरस्वती स्वामी जी को बेहद करीब से जानने का सौभाग्य मिला। अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में राजग-1 के कार्यकाल के दौरान जब मैं गृहमंत्री था, हमारा संबंध मजबूत हुआ।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। स्लामिक हेरिटेज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम आतंकवाद पर काबू पाने में सक्षम है। दुनियाभर के मजहब और मत भारत की मिट्टी में पनपे हैं। विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में गुरुवार को पीएम मोदी ने कहा कि जॉर्डन एक ऐसी पवित्र भूमि पर आबाद है जहां से खुदा का पैगाम, पैगम्बरों और संतों की आवाज बनकर दुनियाभर में गूंजा है। जॉर्डन नरेश की इस्लाम की पहचान बनाने में अहम भूमिका है। इस कार्यक्रम में जॉर्डन के किंग अब्दुल द्वितीय बिन-अल-हुसैन के साथ कई मुस्लिम धर्म गुरु भी मौजूद थे।    पीएम मोदी ने कहा कि सांस्कृतिक विविधता ही हमारी पहचान है। देश में मंदिर में दिया भी जलता है तो मस्जिद में सजदा भी होता है। गुरुद्वारे में सबद गाई जाती है तो चर्च में प्रार्थना भी की जाती है। उन्होंने कहा अभी होली के रंग हैं, कुछ ही दिन बाद रमजान मनाया जाएगा। देश में बुद्ध नववर्ष, गुड फ्राइडे मनाया जाता है। पीएम मोदी ने कहा कि इंसानियत के खिलाफ दरिंदगी करने वाले ये नहीं जानते कि ऐसा करने से धर्म का भी नुकसान होता है। आतंकवाद के खिलाफ मुहिम किसी धर्म के खिलाफ नहीं बल्कि मानसिकता के खिलाफ है। आतंकवाद पर काबू पाने में हम सक्षम हुए हैं।    उन्होंने कहा हमारे देश में युवा के हाथ में कंप्यूटर है तो दूसरे हाथ में कुरान भी है। उन्होंने कहा कि अमन समझौते पर दस्तखत करने वालों में दो भारतीय शामिल रहे। देश की खुशहाली से ही सभी की खुशहाली है। इस मौके पर किंग ऑफ जॉर्डन शाह अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल हुसैन कहा ने कि धर्म सभी से प्रेम करना सिखाता है, सभी पड़ोसियों को साथ लेकर चलना सिखाता है। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथ चिंता का विषय है, मानवियता और इंसानियत ही दुनिया की बुनियाद है।    पीएम मोदी के साथ विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने से पहले जॉर्डन के किंग राष्ट्रपति भवन पहुंचे। राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जॉर्डन किंग का भव्य स्वागत किया। किंग अब्दुल्ला और पीएम मोदी के बीच आज हैदराबाद में कई अहम मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत होगी। कई मुद्दों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने पर चर्चा अहम है। बातचीत में फलस्तीन के मुद्दों के साथ आतंकवाद और चरमपंथ से निपटने के तरीकों पर बात हो सकती है।    साभार-khaskhabar.com     

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भोपाल। 15 साल से प्रदेश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बुधवार को आए दो विधानसभा क्षेत्रों के उप-चुनावों के परिणामों से झटका लगा है। तमाम कोशिशों के बावजूद भाजपा के हाथों से ये दोनों सीटें निकल गईं। यहां मुकाबला शिवराज सरकार बनाम कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच हो गया था। चुनाव नतीजों से यह संकेत मिल रहा है कि प्रदेश में भाजपा के लिए पहले जैसा अनुकूल माहौल नहीं रहा है। वहीं, चुनाव परिणाम जनता के मूड में बदलाव की ओर भी इशारा कर रहे हैं। राज्य में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले शिवपुरी के कोलारस और अशोकनगर के मुंगावली विधानसभा क्षेत्रों के उप-चुनाव काफी अहम माने जा रहे थे। सत्ताधारी पार्टी और सरकार ने चुनाव जीतने के अपने प्रयास में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी।   वहीं, कांग्रेस की कमान युवा सांसद सिंधिया के हाथ में थी। उन्हें चुनाव प्रचार अभियान में पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ, प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया और सहरिया जनजाति में गहरी पैठ रखने वाले मनीष राजपूत का भरपूर साथ मिला। चुनाव नतीजों पर बुद्धिजीवी साजी थॉमस ने कहा, ये उप-चुनाव हर दृष्टि से प्रदेश सरकार के लिए अहम थे, क्योंकि पिछले दिनों मंदसौर में किसानों पर गोली चलने की घटना के बाद से जगह-जगह किसान आंदोलन और कर्मचारी वर्गो के आंदोलन चल रहे हैं। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से नोटबंदी और जीएसटी लागू करने को लेकर लोगों में जो नाराजगी है, उसमें अगर अगर भाजपा जीत हासिल करती तो यह माना जाता कि शिवराज का करिश्मा अब तक बरकारार है, मगर ऐसा नहीं हुआ।   उन्होंने कहा कि उप-चुनाव के नतीजों से भाजपा और सरकार को यह इशारा जरूर मिला है कि आने वाला समय उनके लिए बहुत अच्छा नहीं है। यह बात सही है कि, यह दोनों विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के कब्जे वाले रहे हैं, साथ ही यह सांसद सिंधिया के संसदीय क्षेत्र के अधीन आते हैं। उसके बावजूद राज्य के मुख्यमंत्री चौहान और संगठन ने जीत के लिए किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी। लगभग पूरा मंत्रिमंडल और संगठन के पदाधिकारी कई-कई दिन तक यहां डेरा डाले रहे। वहीं सिंधिया के करीबी और सांसद प्रतिनिधि के. पी. यादव को भाजपा में शामिल कराकर सिंधिया को बड़ा झटका दिया था। मुख्यमंत्री चौहान ने लगभग हर सभा और जनसंपर्क के दौरान दोनों जगहों के मतदाताओं से पांच माह के लिए भाजपा का विधायक मांगा और वादा पूरे न करने पर अगले चुनाव में नकार देने तक की बात कही, मगर जनता का उन्हें साथ नहीं मिला।   मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस हार को स्वीकारते हुए कहा है कि, यह दोनों क्षेत्र कांग्रेस के थे। यहां आम चुनाव में कांग्रेस बड़े अंतर से जीती थी। उसके बाद भी भाजपा के कार्यकर्ताओं ने काफी मेहनत की और मुकाबले को बनाए रखा। भाजपा बहुत कम अंतर से हारी है। वहीं कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव का कहना है कि, भाजपा आगामी चुनाव में 200 पार का नारा दे रही है और दो विधानसभा चुनाव को तो पार कर नहीं पाई है। यह चुनाव कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ पनपते आक्रोश की जीत है। इस जीत में सांसद सिंधिया और कार्यकर्ताओं की मेहनत का बड़ा योगदान रहा है। इन चुनाव के नतीजों से शिवराज सरकार की विदाई का क्रम शुरू हो गया है।   राजनीति के जानकारों की मानें तो इन नतीजों से सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पडऩे वाला, मगर कांग्रेस में उत्साह का संचार जरूर होगा। वहीं भाजपा को अपनी कार्यशैली और रणनीति पर विचार करने को मजबूर होना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा ने दोनों चुनाव जीतने के लिए हर दाव पेंच लगाए। पहले आदिवासियों को प्रतिमाह 1000 रुपये देने का ऐलान किया। उसके बाद जाति के आधार पर तीन मंत्री बनाए गए। यह सारी कोशिशें बेकार नजर आ रही हैं। आगामी चुनाव के लिए शिवराज और उनकी सरकार को मास्टर स्ट्रोक की तलाश रहेगी। विधानसभा के दो उप-चुनाव की जीत कांग्रेस में नया उत्साह तो भरेगी ही, क्योंकि उसे इस जीत से वह खुराक भी मिल गई है, जिसकी उसे दरकार थी। आम चुनाव कुछ माह बाद हैं, दूसरी ओर कई वर्गों में सरकार के खिलाफ असंतोष पनप रहा है। इन स्थितियों का भाजपा और शिवराज कैसे मुकाबला करेंगे, यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है।    साभार-khaskhabar.com       

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