देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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कांचीपुरम। कांचीपुरम मठ के 69वें शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को आज अंतिम विदाई दी गई। सरस्वती के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हिंदू साधुओं की परंपरा का अनुपालन करते हुए उनका पार्थिव शरीर मठ के आहाते में ही दफनाया जाएगा। जयेंद्र सरस्वती की महा समाधि के पहले उनके शरीर पर भभूत का लेप लगाया गया। संतों-महंतों-ऋषियों-आचार्यों ने शंकराचार्य के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित की। उनकी आत्मा की शांति के लिए मंत्रोच्चारण किए गए। श्रद्धालुओं के अंतिम दर्शन के लिए जयेंद्र सरस्वती का पार्थिव शरीर कांची मठ स्थित नंदवनम में रखा गया है। अभी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और लोग मौजूद है। मठ का दावा है कि एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु उनके अंतिम दर्शन को पहुंचे है। जयेंद्र का बुधवार को यहां के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। वह 82 वर्ष के थे। डॉक्टरों ने बताया कि हृदयाघात के कारण जयेंद्र सरस्वती का निधन हुआ। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को किया जाएगा।
नंदवनम में ही चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामी के पास उनको महासमाधि प्रदान किया जाएगा। इस बीच विजयेंद्र सरस्वती को शंकराचार्य के रूप में मठ प्रमुख बनाया गया है। जयेंद्र सरस्वती का जन्म 18 जुलाई 1935 को पुराने तंजावुर जिले के इरुलनीक्की में हुआ था। चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती स्वामी ने उनको अपने वारिश के तौर पर उनका अभिषेक किया था। उनको 22 मार्च 1954 को जयेंद्र सरस्वती का पदनाम प्रदान किया गया था। दक्षिण भारत में जयेंद्र सरस्वती के काफी अनुयायी हैं। उन्होंने केंद्र में अटल बिहारी बाजपेयी की अगुवाई में 1998 से 2004 के दौरान भारतीय जनता पार्टी की सरकार के समय रामजन्म भूमि विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की बात कही थी।
पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की सरकार के दौरान 2004 में वह विवादों में आए और कांचीपुरम के वरदराज पेरुमल मंदिर के अधिकारी शंकर रमण की हत्या के आरोप में उनको गिरफ्तार किया गया। इस मामले की सुनवाई तमिलनाडु से बाहर पुडुचेरी में हुई जहां अदालत ने 2013 में मठ के कनिष्ठ संत विजयेंद्र और 21 अन्य समेत उनको बरी कर दिया। अगस्त 1987 में भी एक विवाद में उनका नाम आया जब जयेंद्र सरस्वती ने तत्काल मठ छोडऩे का फैसला लिया। कर्नाटक के कोडागू स्थित ताला कावेरी में 17 दिन बिताने के बाद वह मठ लौटे तो हजारों श्रद्धालुओं ने असीम श्रद्धा व उत्साह के साथ उनका स्वागत किया था। उन्होंने जन कल्याण नामक सामाजिक संगठन की नींव डाली।
जयेंद्र के निधन पर राजनीति में शोक
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जयेंद्र सरस्वती के निधन पर शोक जताया। कोविंद ने शोक जताते हुए ट्वीट कर कहा, कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के निधन की खबर सुनकर दुख हुआ। हमारे देश ने एक आध्यात्मिक नेता और सामाजिक सुधारक खो दिया है। मेरी संवेदनाएं उनके असंख्य शिष्यों और अनुयायियों के साथ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने शंकराचार्य के साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए शोक जताया। मोदी ने ट्वीट कर कहा, श्री कांची कामकोटि पीठ के आचार्य जगद्गुरु पूज्यश्री जयेंद्र सरस्वती शंकराचार्य के निधन पर गहरा दुख हुआ। वह अपनी अनुकरणीय सेवा और नेक विचारों की वजह से लाखों भक्तों के दिलो-दिमाग में जीवित रहेंगे। उनकी आत्मा को शांति मिले। राहुल गांधी ने कहा कि वह कांची शंकराचार्य के निधन की खबर सुनकर दुखी हैं। राहुल ने ट्वीट कर कहा, मैं कांची कामकोटि पीठ के जगद्गुरु पूज्यश्री जयेंद्र सरस्वती शंकराचार्य के निधन की खबर सुनकर दुखी हूं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री एल.के. आडवाणी ने शोक जताते हुए कहा कि उन्होंने बाबरी मस्जिद विवाद पर हिंदू और मुसलमान समुदायों के बीच कटुता को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आडवाणी ने लिखित संदेश में कहा, मुझे जयेंद्र सरस्वती स्वामी जी को बेहद करीब से जानने का सौभाग्य मिला। अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में राजग-1 के कार्यकाल के दौरान जब मैं गृहमंत्री था, हमारा संबंध मजबूत हुआ।
साभार-khaskhabar.com













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