नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर चीन पहुंच गए हैं। वुहान एयरपोर्ट पर पीएम मोदी को विदेश मंत्रालय के असिस्टेंट मिनिस्टर कॉग जुआंगयू, एंबेसडर ल्यू जायूं और हुबेई के वाइस गवर्नर टॉग डाओचा ने रिसीव किया। चीन के शहर वुहान में आयोजित होने वाले शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे। इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच भारत-चीन से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। खास बात ये है कि इस बैठक में न कोई समझौता होगा और न ही कोई साझा बयान जारी किया जाएगा। 2014 में सत्ता में आने के बाद से मोदी की यह चौथी चीन यात्रा होगी। प्रधानमंत्री ने दौरे के संबंध में ट्वीट किया और कहा, "मैं 'रणनीतिक और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य' में चीन-भारत संबंधों की समीक्षा करूंगा।" उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति शी और मैं, द्विपक्षीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व के वृहद मुद्दे पर अपने विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।" मोदी ने कहा, "हमलोग मौजूदा और भविष्य के अंतर्राष्ट्रीय स्थिति के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय विकास के हमारे संबंधित दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं पर चर्चा करेंगे।"इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शंघाई सहयोग संगठन के मंत्री स्तरीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए इस हफ्ते बीजिंग का दौरा किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 और 28 अप्रैल को वुहान में होने वाली बैठक के दौरान वह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मिलकर रणनीतिक और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में भारत-चीन संबंधों की समीक्षा करेंगे। मोदी ने जारी बयान में कहा, ‘‘मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग और द्विपक्षीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों की समीक्षा करेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम राष्ट्रीय विकास विशेष रूप से मौजूदा और भावी अंतर्राष्ट्रीय स्थिति को लेकर अपनी प्राथमिकताओं पर चर्चा करेंगे।’’ मोदी ने कहा, ‘‘हम रणनीतिक और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में भारत-चीन संबंधों के घटनाक्रमों की भी समीक्षा करेंगे।’’दोनों देशों के नेताओं की यह बैठक भारत और चीन के बीच संबंधों के जीवंत होने का संकेत है, जो पिछले साल डोकलाम विवाद को लेकर बुरे दौरे से गुजरी। मोदी के इस दौरे की 1998 के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के दौरे से तुलना की जा रही है, जिन्होंने उस समय चीन के नेता डेंग शियाओपिंग से मुलाकात की थी और 1962 के युद्ध के बाद से दोनों देशों के बीच आए रिश्तों की तल्खी को दूर करने की कोशिश की थी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) मंत्रिस्तरीय बैठकों में शिरकत करने के लिए इस सप्ताह बीजिंग का दौरा किया था। दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दों के अलावा कई ज्वलंत मुद्दे हैं। साभार-khaskhabar.com
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