देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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नई दिल्ली। 12 वीं सदी लिंगायत समुदाय के दार्शनिक और सबसे बड़े समाज सुधारक बासवन्ना की आज जयंती है। ऐसे में बीजेपी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले परंपरागत लिंगायत वोट साधने की रणनीति बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंदन से तो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह बेंगलुरु से लिंगायत समुदाय के वोट बैंक पर नजरें बनाए हुए है। कॉमनवेल्थ देशों के राष्ट्र प्रमुखों की बैठक में हिस्सा लेने लिए ब्रिटेन पहुंचे पीएम मोदी आज टेम्स नदी के किनारे स्थित 12वीं सदी के समाज सुधारक संत बसवेश्वर की प्रतिमा पर भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
इसके अलावा पीएम मोदी यहां ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टरीजा मे से भी मुलाकात करने वाले हैं। आपको बता दें कि बसवेश्वर कर्नाटक के लिंगायत समुदाय में पूजनीय हैं और आगामी विधानसभा चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही इस समुदाय के वोटबैंक पर नजर बनाए हुए है। ऐसे में पीएम मोदी जब बसवेश्वर की प्रतिमा पर फूल चढ़ा रहे होंगे तो इसे जाहिर तौर पर इसे कर्नाटक चुनावों से जोडक़र भी देखा जाएगा। आज यानी 18 अप्रैल को संत बसवेश्वर जयंती भी है और पीएम मोदी ने ट्वीट कर इस अवसर पर शुभकामना भी दी है। बसेश्वर जयंती वैशाख महीने के तीसरे दिन पड़ती है।
अंग्रेजी कैलंडर के हिसाब से देखें तो तारीख हर साल बदल जाती है। आपको बता दें कि नवंबर 2015 में अपनी ब्रिटेन यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने संत बसवेश्वर की प्रतिमा का अनावरण किया था। दरअसल लंदन में टेम्स नदी के किनारे बसवेश्वर की प्रतिमा की का स्वप्न कलबुर्गी (कर्नाटक) के एक एनआरआई ने देखा था। पूर्व मेयर और लंदन में कम्युनिटी मेडिकल डॉक्टर नीरज पाटील ने 2011 में आसियान और पाकिस्तान समुदायों के समर्थन के बाद यहां बसवेश्वर की प्रतिमा स्थापित करने का विचार दिया था।
साभार-khaskhabar.com













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