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नई दिल्ली। पंजाब विधानसभा में विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ प्रस्ताव पारित हो चुका है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सोमवार को यहां कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। सिंह, पार्टी की पंजाब प्रभारी आशा कुमारी और राज्य इकाई के अध्यक्ष सुनील जाखड़ के साथ सोनिया गांधी के आवास पर पहुंचे। बैठक आधे घंटे से अधिक समय तक चली। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने सीएए को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले अपनी योजनाओं से सोनिया को अवगत कराया। पंजाब विधानसभा ने पिछले हफ्ते सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया था। इससे पहले केरल सरकार भी विधानसभा में अधिनियम के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुकी है। सीएए को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने वाला केरल पहला राज्य है। पार्टी सूत्र ने कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा के बयानों और मंत्रिमंडल विस्तार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।      साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली। जैसे-जैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है वैसे-वैसे राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ती जा रही है। यहां 8 फरवरी को मतदान होना है और सभी दलों ने अपनी कमर कस ली है। आम आदमी पार्टी (आप) ने मंगलवार को सभी 70 सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिए। भाजपा और कांग्रेस भी रणनीतियां बनाने में जुटे हुए हैं। इस बीच, आप के पूर्व नेता कुमार विश्वास को लेकर एक बार फिर हलचल मच गई। दरअसल पिछले काफी समय से अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे भाजपा की सदस्यता ले सकते हैं। हालांकि जब ट्विटर पर उनसे किसी ने इस बारे में सवाल पूछा तो उन्होंने शिकायती लहजे में जवाब दिया। विश्वास ने लिखा कि अप्रवासी भारतीयों के एक समारोह के लिए परदेस दोहा (कतर) मैं हूं! यहीं से जॉइन कर लूं तुम कहो तो? इस खबर का रिपीट-अलार्म लगाकर हर हफ्ते चला लिया करो यार, क्यूं बार-बार उंगलियों को कष्ट देते हो। उल्लेखनीय है कि इससे पहले कुमार विश्वास के भाजपा की ओर से राज्यसभा जाने, लोकसभा चुनाव लडऩे की खबरें भी सामने आई थीं। वे कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने आप के टिकट पर वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी और स्मृति ईरानी जैसे कद्दावर नेताओं के खिलाफ चुनाव लड़ा था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अनबन के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी।  साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली। उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी कुलदीप सेंगर ने दोषी करार दिए जाने व उम्रकैद की सजा को दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को चुनौती दी है। सेंगर को 20 दिसंबर को तीस हजारी कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। भाजपा से निष्कासित किए जा चुके विधायक सेंगर पर 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। सेंगर सजा सुनते ही रोने लगा था। बहस के दौरान सेंगर की ओर से वकील ने कहा था कि उनकी दो बेटियां और पत्नी है। उन पर परिवार की जिम्मेदारी है। उनके ऊपर लोन भी है। दूसरी ओर, पीडि़ता के परिवार ने सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने पर संतोष जाहिर किया था। उन्होंने कहा था कि सेंगर विधायक थे और उन्होंने इस मामले में पद का दुरुपयोग किया। उल्लेखनीय है कि पिछले साल 28 जुलाई को रायबरेली के गुरुबख्शगंज थाना क्षेत्र में कार व ट्रक की टक्कर में रेप पीडि़ता की चाची और मौसी की मौत हो गई थी। पीडि़ता और कार चला रहे उनके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पीडि़त परिवार का आरोप है कि सेंगर ने ही यह दुर्घटना करवाई थी। इस मामले में भी सेंगर और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। अगस्त में सेंगर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।  साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली। केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वित्त वर्ष 2018-19 में सभी राजनीतिक दलों में सबसे आगे रहते हुए 2410.08 करोड़ रुपए की आय हासिल की। यह आय अन्य छह राष्ट्रीय दलों की कुल आय का 65.16 प्रतिशत है। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स (एडीआर) के वित्त वर्ष 2018-19 के लिए राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के आय-व्यय के विश्लेषण के अनुसार, भाजपा ने कुल 2410.08 करोड़ रुपए की आय करने और कुल आय का सिर्फ 41.71 प्रतिशत (1005.33 करोड़ रुपए) व्यय करने की घोषणा की। वहीं कांग्रेस की कुल आय 918.03 करोड़ रुपए रही और उसने 51.19 प्रतिशत (469.92 करोड़ रुपए) खर्च किए। छह राष्ट्रीय दलों (भाजपा, कांग्रेस, माकपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस और भाकपा) ने देशभर से कुल 3698.66 करोड़ रुपए की आय की घोणषा की। एडीआर के विश्लेषण के अनुसार भाजपा की आय वित्त वर्ष 2017-18 में 1027.34 करोड़ रुपए से वित्त वर्ष 2018-19 में 134.59 प्रतिशत बढक़र 2410.08 करोड़ हो गई। भाजपा ने वित्त वर्ष 2018-19 में अपनी कुल आय का 97.67 प्रतिशत (2354.02 करोड़ रुपए) स्वैच्छिक योगदान के रूप में घोषित किया। वहीं कांग्रेस ने इस दौरान सबसे ज्यादा 551.55 करोड़ रुपए (कुल आय का 60.08 प्रतिशत) अनुदान, दान, योगदान के रूप में लेने की घोषणा की। भाजपा का सबसे ज्यादा 792.39 करोड़ रुपए का खर्च चुनाव, प्रचार में हुआ, जिसके बाद प्रशासनिक कार्यो में 178.35 करोड़ रुपए खर्च हुए। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट समय पर दाखिल की, वहीं भाजपा ने 24 दिन बाद और कांग्रेस व भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने 42 दिन बाद जमा की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट अंतिम तिथि के 76 दिन बाद जमा की। टीएमसी की कुल आय 192.65 करोड़ रुपए हुई, जिसमें पार्टी ने 5.97 प्रतिशत (11.50 करोड़ रुपए) खर्च किए, माकपा ने 100.96 करोड़ रुपए की आय की घोषणा की और उसने 76.15 करोड़ रुपए खर्च किए। कांग्रेस की आय वित्त वर्ष 2017-18 में 199.15 करोड़ रुपए से 360.97 प्रतिशत (718.88 करोड़ रुपए) बढक़र वित्त वर्ष 2018-19 में 918.03 करोड़ रुपए हो गई। वित्त वर्ष 2017-18 से 2018-19 के बीच सबसे ज्यादा आय वृद्धि 3,628.47 प्रतिशत (187.48 करोड़ रुपए) टीएमसी की हुई और उसने 2017-18 में 5.167 करोड़ रुपए की आय से बढक़र 2018-19 में 192.65 करोड़ रुपए हो गई। एडीआर विश्लेषण के अनुसार राष्ट्रीय दलों ने दान, योगदान को अपनी आय के तीन प्रमुख साधनों में गिनाया। दान और योगदान से राजनीतिक दलों- भाजपा को 2354.02 करोड़ रुपए, कांग्रेस को 551.55 करोड़ रुपए, टीएमसी को 141.54 करोड़ रुपए, माकपा को 37.228 करोड़ रुपए और भाकपा को 4.08 करोड़ रुपए की आय हुई। एडीआर के अनुसार, कुछ राष्ट्रीय दलों ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स स्कीम, 2018 पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए इसकी आलोचना की है। उन्होंने हर सार्वजनिक मंच पर इसकी हरसंभव आलोचना की है और एक राष्ट्रीय पार्टी ने तो इसके खिलाफ जनहित याचिका तक दायर कर दी है। हालांकि अजीब बात है कि वही दल इलेक्टोरल बॉन्ड्स के माध्यम से चंदा स्वीकार कर रहे हैं। दानदाताओं को गोपनीयता प्रदान करते हुए इलेक्टोरल बॉन्ड्स वित्त वर्ष 2018-19 में राष्ट्रीय दलों को चंदा देने में सबसे लोकप्रिय माध्यम के रूप में उभरा है। वित्त वर्ष 2018-19 में छह राष्ट्रीय दलों की 1931.43 करोड़ रुपए (52 प्रतिशत से अधिक) इलेक्टोरल बॉन्ड्स से हुई है।  साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली। कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग टीम (तथ्यान्वेषी दल) ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) का दौरा किया और अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंप दी है। सौंपी गई रिपोर्ट में कांग्रेस की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने जेएनयू के कुलपति के इस्तीफे की मांग करने के साथ ही उनके खिलाफ आपराधिक जांच शुरू करने की मांग भी की है। टीम ने कहा कि कुलपति एम. जगदीश कुमार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए और 27/01/2017 (नियुक्ति की तारीख) से अब तक की गई सभी नियुक्तियों की जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच शुरू की जानी चाहिए। टीम ने आगे कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए अन्य सभी वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों की भी जांच होनी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया कि कुलपति, सुरक्षा सेवा प्रदान करने वाली कंपनी और हमलावरों के साथ मिलकर हिंसा करवाने वाले शिक्षकों के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू की जानी चाहिए। इसके अलावा टीम ने पांच जनवरी को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में हुई हिंसा की घटना की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की। टीम ने दिल्ली पुलिस आयुक्त और अन्य पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करने की सिफारिश की। उन्होंने कहा कि पांच जनवरी को छात्रों और शिक्षकों द्वारा आपातकालीन कॉल की गई थी, जिस पर उचित कार्रवाई नहीं की गई और प्रथम दृष्ट्या सबूतों के अनुसार, उन्होंने परिसर में आपराधिक तत्वों को सुगम बनाने का कार्य किया।  साभार-khaskhabar.com  

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मुंबई। महाराष्ट्र में पिछले साल के अंत में सरकार बनाने के लिए लंबी जद्दोजहद हुई थी। वहां 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव हुए थे और तीन दिन बाद 24 अक्टूबर को ही नतीजे आ गए थे। इसमें जनता ने भाजपा और शिवसेना के गठबंधन पर मोहर लगाई थी। हालांकि दोनों के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद करीब एक महीने तक तरह-तरह की राजनीतिक चालें चली गईं और अंत में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई। शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने दावा किया है कि शिवसेना के 56 में से 35 विधायक पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। राणे फिलहाल भाजपा के कोटे से राज्यसभा सदस्य हैं। राणे ने शनिवार रात को यहां एक कार्यक्रम में सरकार को नकारा करार दिया। उन्होंने भरोसा जताया कि भाजपा महाराष्ट्र में सत्ता में जरूर लौटेगी। भाजपा के पास 105 विधायक हैं तथा शिवसेना के पास 56 और उसमें भी 35 असंतुष्ट हैं। किसानों का ऋण माफ करने का ठाकरे सरकार का वादा भी खोखला है क्योंकि इस बात की कोई समय सीमा नहीं है कि इसे कब लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने औरंगाबाद में किसी योजना की घोषणा किए बगैर या इस क्षेत्र को कोई फंड दिए बिना लौट गए। हम ऐसी सरकार से क्या उम्मीद कर सकते हैं? उन्हें सरकार चलाने के बारे में कुछ भी मालूम नहीं है। उन्होंने सरकार बनाने में पांच सप्ताह ले लिए जिससे कोई भी सोच सकता है कि वे इसे कैसे संचालित करेंगे। भाजपा और राज ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के हाथ मिलाने संबंधी अटकलों पर राणे बोले कि भाजपा प्रमुख ही इस पर कुछ कहेंगे।  साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने रविवार को नए सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने पर उनके पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को लेकर दिए गए बयान पर निशाना साधा और उन्हें सलाह देते हुए कहा कि वे बोलें कम और काम ज्यादा करें। चौधरी ने अपने ट्विटर हैंडल पर कहा कि नए सेना प्रमुखजी संसद ने पहले ही वर्ष 1994 में पीओके को लेकर सर्वसम्मत से प्रस्ताव पारित कर दिया था। सरकार कार्रवाई करने और निर्देश देने के लिए स्वतंत्र है। यदि आप पीओके पर कार्रवाई करने के लिए इतने ही इच्छुक हैं, तो मेरी सलाह है कि आप सीडीएस (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) और पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) से बातचीत करें। कम बोलें, काम ज्यादा करें। जनरल नरवाने ने अपने हाल ही के साक्षात्कार में कहा था कि यदि संसद चाहे, तो भारतीय सेना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को भारत में मिलाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। चौधरी ने इससे पहले तब विवाद को जन्म दे दिया था, जब उन्होंने लोकसभा में कहा था कि संसद जम्मू एवं कश्मीर से संबंधित अनुच्छेद 370 को रद्द नहीं कर सकती है, क्योंकि प्रदेश का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में लंबित पड़ा हुआ है। इसके बाद उनकी काफी आलोचना हुई थी और अब लगता है कि उनके इस ट्वीट ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक और मौका दे दिया है, जिसके माध्यम से पार्टी पीओके पर कांग्रेस के रुख को लेकर उसे निशाने पर ले सकती है।  साभार-khaskhabar.com  

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भोपाल। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस समय पूरे देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के समर्थन में जन जागरण अभियान चला रही है। इसी क्रम में रविवार को गृह मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जबलपुर में विशाल जनसभा संबोधित की। शाह ने कहा कि ये जन जागरण अभियान भाजपा इसलिए चला रही है क्योंकि कांग्रेस पार्टी, केजरीवाल, ममता बनर्जी, कम्यूनिस्ट ये सभी एक होकर देश को गुमराह कर रहे हैं। आज मैं बताने आया हूं कि सीएए में कहीं पर भी किसी की नागरिकता छीनने का प्रावधान नहीं है, इसमें नागरिकता देने का प्रावधान है। जब देश का बंटवारा हुआ और कांग्रेस पार्टी ने देश का बंटवारा धर्म के आधार पर किया। बंटवारे के समय पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान से हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाइ को भारत आना था, मगर उस समय स्थिति सही नहीं होने के कारण वहां वे रह गए। हमारे देश के सभी नेताओं ने आश्वासन दिया कि आप अभी वहां रह जाइए और आप जब भी कभी भारत आएंगे तो आपका स्वागत किया जाएगा, भारत आपको नागरिकता देगा। 2 जुलाई 1947 को महात्मा गांधीजी ने कहा कि जिन लोगों को पाकिस्तान से भगाया गया, जो पाकिस्तान में रह गए हैं उनको पता होना चाहिए कि वो भारत के नागरिक थे, जब भी भारत में आना चाहते हैं भारत उनको नागरिकता देगा। आज सारे कांग्रेसी पूरे देश में सीएए का विरोध कर रहे हैं। जो गांधी जी ने कहा था, राहुल बाबा आप गांधी जी की भी नहीं सुनोगे। महात्मा गांधी जी को तो कबका आपने छोड़ दिया है। कांग्रेस वालों कान खोलकर सुन लो, जितना विरोध करना है करो, ये सारे लोगों को नागरिकता देकर ही हम दम लेंगे। भारत पर जितना अधिकार मेरा और आपका है, उतना ही अधिकार पाकिस्तान से आए हुए शरणार्थियों का है। वो भारत के बेटा-बेटी हैं, वो हमारे भाई हैं। देश के अल्पसंख्यकों को उकसाया जा रहा है कि आपकी नागरिकता चली जाएगी। मैं देश के अल्पसंख्यक भाइयों-बहनों से कहने आया हूं कि सीएए को पढ़ लें इसमें कहीं पर भी किसी की भी नागरिकता जाने का कोई प्रावधान नहीं है। कमलनाथजी जोर-जोर से कहते हैं सीएए लागू नहीं होगा। अरे कमलनाथजी ये जोर से बोलने की आयु नहीं है आपकी, स्वास्थ्य बिगड़ जाएगा आपका। अगर इतना जोर बाकी है तो मध्य प्रदेश को ठीक करिए।  साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार में भाजपा की सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) भी दिल्ली विधानसभा चुनाव लडऩे की तैयारी में है। पार्टी मुखिया और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने दिल्ली में चुनाव लडऩे के लिए भाजपा से कुल चार सीटें मांगी हैं। आठवले ने भाजपा से कहा है कि अगर गठबंधन नहीं हुआ तो फिर छह सीटों पर पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी, और बाकी की अन्य सीटों पर भाजपा को उनकी पार्टी समर्थन देगी। आठावले ने आईएएनएस से बातचीत में दिल्ली विधानसभा चुनाव लडऩे की तैयारियों की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, दिल्ली में विधानसभा चुनाव लडऩे के लिए हमारी पार्टी की भाजपा से बात चल रही है। अगर समझौता सफल नहीं हुआ तो फिर पार्टी अकेले छह सीटों पर चुनाव लड़ेगी और अन्य पर भाजपा को समर्थन करेगी। दिल्ली में चुनाव लडऩे के लिए हमारे पास योग्य उम्मीदवार हैं। आठवले ने आईएएनएस से यह भी दावा किया कि इस बार दिल्ली में भाजपा की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के पक्ष में माहौल ठीक है और जनता मोदी सरकार के कार्यो पर वोट करेगी। गौरतलब है कि 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा के चुनाव के लिए आठ फरवरी को मतदान होना है। नतीजे 11 फरवरी को आएंगे। 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने रिकॉर्ड 67 सीटें जीती थी, जबकि भाजपा को सिर्फ तीन सीटें मिली थीं, और कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला था।  साभार-khaskhabar.com

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गुवाहाटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समयाभाव के कारण यहां खेलो इंडिया गेम्स के शुभारंभ की घोषणा करने 10 जनवरी को नहीं आएंगे। भाजपा की असम इकाई के प्रवक्ता दीवान ध्रुब ज्योति मराल ने बुधवार को आईएएनएस से कहा कि यह दौरा रद्द हो गया है। मराला ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री से संपर्क किया था, लेकिन दौरा संभव नहीं हो पाया है, क्योंकि मोदी के पास समय नहीं है।  

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नई दिल्ली। भाजपा नेता विनय सहस्रबुद्धे और रमेश बिधूड़ी ने दिल्ली सिटी ऑन वेंटिलेटर नाम से एक बुकलेट जारी की है। बुकलेट में दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर केजरीवाल सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली की स्वास्थ्य सेवा वेंटिलेटर पर है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पांच साल में केजरीवाल सरकार रोगियों के उपचार के लिए महज 394 नए बेड ही लगा सकी, जबकि वादा प्रति एक हजार जनसख्या पर 10 बेड लगाने का था। लोक नीति शोध केंद्र की इस बुकलेट में यह भी कहा गया है कि पिछले पांच साल में एक भी नया प्राथमिक चिकित्सा केंद्र नहीं बनाया गया, सिर्फ मोहल्ला क्लीनिक का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, जिसका हाल बेहाल है। रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के डेटा का इस्तेमाल करते हुए यह दिखाया गया है कि पिछले पांच साल में 91 डिस्पेंसरी और 25 जच्चा-बच्चा केंद्र कम हुए हैं। रिपोर्ट में नीति आयोग की उस रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसमें दिल्ली स्वास्थ्य सूचकांक में पांचवें पायदान पर आ गई है। रिपोर्ट में दवाइयों की खरीद में भ्रष्टाचार की बात भी कही गई है। यह रिपोर्ट श्यामा प्रसाद मुखर्जी न्यास की तरफ से लोक नीति शोध केंद्र, दिल्ली ने तैयार की है। रिपोर्ट को 131 आरटीआई और 44 हेल्थ फील्ड रिपोर्टिंग के आधार पर तैयार किया गया है। इस मौके पर भाजपा सांसद और उपाध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे ने सवाल किया कि केजरीवाल बताएं कि कितने हेल्थ सेंटर खोले गए हैं। सहस्रबुद्धे ने केजरीवाल सरकार पर आरोप लगाया कि कभी भी दिल्ली सरकार के बजट का पूरा उपयोग नहीं किया गया। दावा किया गया है कि दिल्ली में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ी है, लेकिन रेबीज वैक्सीन की व्यवस्था बहुत कम है। दिल्ली के बड़े अस्पतालों में बोर्ड लगा दिया गया है कि वैक्सीन नहीं है।  साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पांच जनवरी को हुई हिंसा के लिए कांग्रेस ने विश्वविद्यालय के कुलपति पर हमला करते हुए उनके इस्तीफे की बुधवार को मांग की। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने बुधवार को एक ट्वीट में कहा कि कुलपति को विश्वविद्यालय छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जेएनयू के कुलपति चाहते हैं कि छात्र अतीत को पीछे छोड़ दें। उन्हें अपनी सलाह माननी चाहिए। वे अतीत हैं। उन्हें जेएनयू छोड़ देना चाहिए। कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, जेएनयू के कुलपति ने परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी जिम्मेदारी तक नहीं ली है और अब वे लापता हैं। पुलिस ने छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जबकि गुंडे परिसर में दंगा करते हैं। लगता है कि कानून-व्यवस्था हमारे अपने लोगों के प्रति असमर्थ है! कांग्रेस नेताओं ने बुधवार को जेएनयू का दौरा किया। सुष्मिता देव के नेतृत्व वाली टीम साबरमती हॉस्टल गई, जहां रविवार को काफी हिंसा हुई थी। टीम ने मारपीट के समय मौजूद छात्रों और लोगों से भी बातचीत की। टीम के एक सदस्य और जेएनयू में एनएसयूआई के पूर्व अध्यक्ष सैयद नसीर हुसैन ने कहा, स्थिति गंभीर है और हम कांग्रेस अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंपेंगे। टीम में नसीर हुसैन, हिबी एडेन और अमृता धवन शामिल रहे। कांग्रेस ने मंगलवार को परिसर में हमले में शामिल दोषियों को गिरफ्तार नहीं करने के लिए सरकार पर हमला किया और इसके बजाए जेएनयूएसयू की अध्यक्ष आइशी घोष व अन्य पीडि़तों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की निंदा भी की। इस दौरान कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट किया गया, जिसमें जेएनयू हिंसा में शामिल लोगों को गिरफ्तार नहीं कर पाने के लिए पुलिस व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की आलोचना की गई। कांग्रेस के अलावा डीएमके सांसद कनिमोझी भी बुधवार को जेएनयू पहुंचीं। कनिमोझी ने यहां जख्मी छात्रों से मुलाकात की। छात्रों से मुलाकात के बाद कनिमोझी ने कहां कि जेएनयू में हुई वारदात किसी सदमे से कम नहीं है। कनिमोझी ने कहा कि हॉस्टल में एबीवीपी के छात्रों के कमरे सही सलामत अवस्था में हैं, जबकि विरोधी विचारधारा वाले अन्य छात्रों के कमरों में तोडफ़ोड़ की गई है। उन्होंने कहा कि जेएनयू में पांच जनवरी से पहले भी छुटपुट हिंसा की वारदातें चल रही थीं, पांच जनवरी की शाम हमलावरों ने लाठी-डंडों व लोहे की रॉड से यहां छात्रों को पीटा है। कांग्रेस व डीएमके से पहले माकपा नेता सीताराम येचुरी, भाकपा नेता डी. राजा और कन्हैया कुमार आदि जेएनयू के जख्मी छात्रों से मुलाकात कर चुके हैं। अधिकांश वामपंथी नेता जेएनयू छात्रसंघ द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित धरने में भी शामिल हुए हैं। नेताओं के अलावा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुई हिंसा पर अपनी चिंता जताई है।  साभार-khaskhabar.com

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