देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमुंबई। महाराष्ट्र में पिछले साल के अंत में सरकार बनाने के लिए लंबी जद्दोजहद हुई थी। वहां 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव हुए थे और तीन दिन बाद 24 अक्टूबर को ही नतीजे आ गए थे। इसमें जनता ने भाजपा और शिवसेना के गठबंधन पर मोहर लगाई थी। हालांकि दोनों के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई।
इसके बाद करीब एक महीने तक तरह-तरह की राजनीतिक चालें चली गईं और अंत में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई। शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने दावा किया है कि शिवसेना के 56 में से 35 विधायक पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं।
राणे फिलहाल भाजपा के कोटे से राज्यसभा सदस्य हैं। राणे ने शनिवार रात को यहां एक कार्यक्रम में सरकार को नकारा करार दिया। उन्होंने भरोसा जताया कि भाजपा महाराष्ट्र में सत्ता में जरूर लौटेगी। भाजपा के पास 105 विधायक हैं तथा शिवसेना के पास 56 और उसमें भी 35 असंतुष्ट हैं।
किसानों का ऋण माफ करने का ठाकरे सरकार का वादा भी खोखला है क्योंकि इस बात की कोई समय सीमा नहीं है कि इसे कब लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने औरंगाबाद में किसी योजना की घोषणा किए बगैर या इस क्षेत्र को कोई फंड दिए बिना लौट गए। हम ऐसी सरकार से क्या उम्मीद कर सकते हैं? उन्हें सरकार चलाने के बारे में कुछ भी मालूम नहीं है। उन्होंने सरकार बनाने में पांच सप्ताह ले लिए जिससे कोई भी सोच सकता है कि वे इसे कैसे संचालित करेंगे। भाजपा और राज ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के हाथ मिलाने संबंधी अटकलों पर राणे बोले कि भाजपा प्रमुख ही इस पर कुछ कहेंगे।
साभार-khaskhabar.com












