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मुंबई। महाराष्‍ट्र में कैबिनेट विस्‍तार के बाद से शिवसेना, एनसीपी विधायकों में नाराजगी देखी जा रही है। उद्धव सरकार के कैबिनेट में शिवसेना सांसद संजय राउत के भाई सुनील राउत को नहीं लिया गया है। कैबिनेट विस्तार के दौरान संजय राउत भी मौजूद नहीं थे, उनकी अनुपस्थिति को नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, एनसीपी विधायक प्रकाश सोलंके और स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी भी कैबिनेट में नहीं लेने से बगावती रूख अपना लिया है। उद्धव कैबिनेट विस्‍तार में संजय राउत के भाई विधायक सुनील राउत को जगह नहीं मिली है । साथ ही में संजय राउत के करीबी विधायकों को भी स्थान नहीं दिया गया है। संजय राउत विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस का गठबंधन बनाने के समर्थन में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में संजय राउत का शपथ ग्रहण समारोह में नहीं आना राजनीतिक कई मयाने निकाले जा रहे हैं। संजय राउत के भाई सुनील राउत मुंबई के विक्रोली से विधायक हैं और सोमवार को महाराष्ट्र विकास आघाड़ी सरकार के मंत्रिपरिषद के विस्तार में मंत्री बनने के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन कैबिनेट विस्तार में उन्हें जगह नहीं मिल सकी है। संजय राउत ने अपने भाई को मंत्री नहीं बनाने को लेकर कोई बयान नहीं दिया है। संजय राउत ने बताया कि मेरे परिवार की परम्परा मंत्री बनने की नहीं है। हम मंत्री बनने के लिए नहीं, संगठन के लिए काम करते हैं। मेरे भाई सुनील राउत भी पार्टी के कार्यकर्ता हैं। वो लंबे समय से विधायक हैं और उन्होंने कभी मंत्री बनना नहीं चाहा। एनसीपी प्रमुख शरद पवार के करीबी प्रकाश शोलंके चार बार से विधायक हैं, लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से इतने खफा हो गए हैं कि वे राजनीति छोड़ने का निर्णय कर लिया है। प्रकाश सोलंके ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा और राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि वह राजनीति करने के लिए अयोग्य हैं। विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर अपना इस्तीफा देने की बात कही है। शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी के गठबंधन महा विकास आघाड़ी की सहयोगी स्वाभिमानी शेतकरी संगठन नेता राजू शेट्टी ने कहा कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए निस्वार्थ रूप से प्रयास करने वाले सभी सहयोगियों की अनदेखी की गई।  साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। जनरल मनोज मुकुंद नरवणे बने नए सेना अध्यक्ष बन गए हैं। नरवणे 28वें सना अध्यक्ष हैं। उन्होंने कार्यभार संभाल लिया है। जनरल नरवणे ने जनरल बिपिन रावत की जगह ली है। नई दिल्ली के सेना भवन में रावत ने परंपरा के तहत बैटन सौंपकर मनोज मुकुंद नरवणे को चार्ज सौंप दिया गया। महाराष्ट्र से ताल्लुक रखनेवाले नरवणे को मुश्किल मोर्चे पर सफलता और बेहतरीन नेतृत्व क्षमता के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही नए आर्मी चीफ अपने सहकर्मियों और स्टाफ के बीच साफ छवि और अच्छे व्यवहार के कारण काफी लोकप्रिय हैं। चीन के साथ जुड़े सुरक्षा मामलों पर भी जनरल नरवणे की मजबूत पकड़ है। नरवणे इससे पहले जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन और पूर्वी मोर्चे पर इन्फेंट्री ब्रिगेड की कमान संभाल चुके हैं। श्रीलंका में इंडियन पीस कीपिंग फोर्स का भी हिस्सा थे और तीन साल तक म्यांमार में भी रहे। जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का जन्म 22 अप्रेल 1960 को मराठी परिवार में हुआ था। उनके पिता इंडियन एअर फोर्स में अफसर थे, वो विंग कमांडर की पोस्ट से रिटायर हुए थे। नए आर्मी चीफ की मां ऑल इंडिया रेडियो में एनाउंसर थीं और उनकी पत्नी पेशे से टीचर हैं, उन्हें शिक्षण कार्य में 25 साल का अनुभव है। मनोज मुकुंद नरवणे दो बेटियों के पिता हैं, जनरल मनोज मुकुंद ने अपनी स्कूल शिक्षा पुणे के एक स्कूल से पूरी की।  साभार-khaskhabar.com

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अयोध्या। अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार को मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ भूमि देने के निर्देश के बाद सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड फिलहाल कोई निर्णय भले ही नहीं कर पाया है, लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रस्तावित मस्जिद के लिए पांच स्थलों की पहचान कर ली है। पांचों स्थान साधु-संतों की इच्छानुसार पंचकोसी परिक्रमा के दायरे से बाहर हैं, ताकि भविष्य में कोई विवाद न उपजे। पंचकोसी परिक्रमा मानसून के समय दो दिन की होती है। श्रद्धालु पहले सरयू नदी में डुबकी लगाते हैं, और उसके बाद शहर के चारों ओर 15 किलोमीटर की परिक्रमा करते हैं। कहा जाता है कि प्रयागराज, हरिद्वार, मथुरा और काशी के लगभग 50,000 साधु-संत इस कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रदेश सरकार ने चार स्थान अयोध्या-फैजाबाद मार्ग पर, अयोध्या-बस्ती मार्ग पर, अयोध्या-सुल्तानपुर मार्ग पर और अयोध्या-गोरखपुर मार्ग पर चिह्नित किए हैं और पांचवां स्थान राजमार्ग पर परिक्रमा मार्ग से दूर प्रस्तावित है। एक अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित स्थानों की विस्तृत जानकारी मंजूरी के लिए केंद्र के पास भेज दी गई है। हमने यह सुनिश्चित किया है कि सभी स्थान सुगम हों। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सलन लॉ बोर्ड, बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी और जमीयत उलेमा-ए-हिंद जैसे मुस्लिम पक्षों ने ढहाई गई बाबरी मस्जिद के बदले नई मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ भूमि के प्रस्ताव को पहले ही अस्वीकार कर दिया है। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने कोई निर्णय नहीं लिया है। बोर्ड के सूत्रों ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए अगले महीने बैठक होगी।      साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। सेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्ति के बाद जनरल बिपिन रावत को सरकार ने देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस (सीडीएस) नियुक्त कर दिया है। कांग्रेस ने उनकी नियुक्ति पर एतराज जताते हुए सरकार पर सवाल दागे हैं। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी और पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने ट्वीट के माध्यम से निशाना साधा। चौधरी ने लिखा कि आखिरकार मिस्टर रावत पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बन गए हैं। सरकार ने निश्चित तौर पर रावत के सभी प्रदर्शन और वैचारिक झुकाव को देखते हुए उनकी नियुक्ति की है। भारतीय सेना गैर राजनीतिक संस्था है, जिसके लिए जाति-धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर सभी भारतीयों को गर्व है। बिपिन रावतजी के वैचारिक झुकाव का असर गैर राजनीतिक संस्था सेना पर नहीं पडऩा चाहिए। दूसरी ओर, तिवारी ने कहा कि बहुत ही अफसोस और पूरी जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि सीडीएस के मामले में सरकार ने पहला ही कदम गलत उठाया है। इस फैसले के नुकसान के बारे में समय बताएगा।  सरकार का यह फैसला परेशानियों और अस्पष्टताओं से क्यों भरा पड़ा है? क्या सरकार को सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों से मिलने वाली सलाह से ऊपर सीडीएस का सुझाव होगा? क्या तीनों सेनाओं के प्रमुख रक्षा सचिव के बजाय अब सीडीएस के माध्यम से रक्षा मंत्री को रिपोर्ट करेंगे? उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पूर्व में भी रावत को घेर चुकी है।  साभार-khaskhabar.com

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लखनऊ। केद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भगवा वस्त्र पर टिप्पणी करने वाली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर पलटवार किया है। साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि 'नकली गांधी' भगवा के बारे में नहीं समझ सकते हैं। साध्वी ने सुझाव दिया कि उन्हें अपना नाम बदलकर 'फिरोज प्रियंका' कर लेना चाहिए। साध्वी ज्योति ने बताया कि प्रियंका गांधी भगवा रंग को नहीं समझ सकती हैं क्योंकि वह नकली गांधी है। उन्हें अपने नाम में से गांधी हटा कर प्रियंका फिरोज कर लेना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रियंका को योगी सरकार से इसलिए परेशानी है क्योंकि वह अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रियंका को सामने आकर बताना चाहिए कि क्या वह दंगाइयों के पीछे है। कांग्रेस महासचिव को 'भगवा' के बारे में अधिक अध्ययन करने की आवश्यकता है, साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि जिस तरह से उन्होंने योगी की आलोचना की है, उससे यह पता चलता है कि जो लोग नकली नाम का उपयोग करते हैं, वे सब कुछ वैसा ही देखते हैं। भगवा ज्ञान और आत्मीयता का प्रतीक है। केन्द्रीय मंत्री ने गांधी से पूछा कि जिन उप्रदवियों ने निर्दोष लोगों को पीटा था और पुलिस पर पथराव किया था, उन्हें सजा मिलनी चाहिए या नहीं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रियंका ने लोगों को सीएए के विरोध में प्रदर्शन के लिए उकसाया। आपको बताते जाए कि सोमवार को प्रियंका गांधी ने कहा था कि सीएम योगी भगवा वस्त्र धारण करते हैं तो उसका मूल्य भी समझें। यहां तक कहा कि योगी आदित्यनाथ धर्म धारण करना सीखें। भगवा रंग हिंदू धर्म का प्रतीक है, जो बदला लेना व हिंसा नहीं सिखाता। योगी के बदला लेने वाले बयान के बाद यूपी पुलिस बेगुनाहों को घर से निकालकर मार रही है। बच्चों और बूढ़ों तक का ख्याल नहीं रख रही है।  साभार-khaskhabar.com  

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श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर से करीब पांच महीने पहले आर्टिकल 370 हटाकर उसका विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया गया था। मोदी सरकार के इस फैसले ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। पाकिस्तान तो आज तक इससे बौखलाया हुआ है और लगातार अन्य देशों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है। देश में भी विपक्षी दलों ने इसका काफी विरोध किया। सरकार ने हिंसा फैलने की आशंका के मद्देनजर ऐहितयात बरतते हुए वहां के कई स्थानीय नेताओं को नजरबंद कर दिया था। हालांकि अब जनजीवन सामान्य होने लगा है। ऐसे में आज पांच और नेताओं को रिहा कर दिया गया। रिहा किए गए नेताओं में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के दो पूर्व विधायक और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के दो पूर्व विधायक के साथ एक निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं। इन सभी को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद हिरासत में लिया गया था। एएनआई से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जिन नेताओं को छोड़ा गया है, उनमें इशफाक जब्बर, गुलाम नबी भट, बशीर मीर, जहूर मीर व यासिर रेशी शामिल हैं। फिलहाल कश्मीर के तीन सबसे प्रमुख नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, उनके बेटे उमर अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती हिरासत में हैं। पिछले हफ्ते गृह मंत्रालय ने जम्मू और कश्मीर से सुरक्षा घटाने का फैसला लेते हुए अर्धसैनिक बलों की 72 टुकडिय़ों को हटाने का फैसला लिया था। पिछले महीने 18 नवंबर को श्रीनगर और बनिहाल के बीच की ट्रेन सेवा भी शुरू कर दी गई थी। उल्लेखनीय है कि 5 अगस्त को भारतीय संसद ने आर्टिकल 370 के ज्यादातर प्रावधानों को समाप्त कर दिया था। जम्मू-कश्मीर को विभाजित करके लद्दाख और जम्मू-कश्मीर को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। इनमें से जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी लेकिन लद्दाख चंडीगढ़ की तर्ज पर सीधे तौर पर केंद्र के अधीन रहेगा।  साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन एक्ट के विरोध में देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन के दौरान रेलवे का कुल 80 करोड़ का नुकसान हुआ है। रेलवे बोर्ड चेयरमैनके चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने कहा कि नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ जो देशभर में विरोध उसमें रेलवे को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई की जाएगी। ये भरपाई उन्हीं से होगी, जो इस हिंसा में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों की जांच की जाएगी और फिर उनसे ही राशि वसूली जाएगी। आपको बताते जाए कि देश के कई हिस्सों में CAA के खिलाफ जो विरोध प्रदर्शन हुआ, उसमें कुछ रेलवे स्टेशन में आग लगा दी गई थी, कुछ जगह रेलवे को रोका गया था और स्टेशन पर हुड़दंग मचाया गया है। इससे पहले उत्तर प्रदेश की सरकार ने भी यही फॉर्मूला अपनाया है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया था कि जो लोग हिंसा में शामिल थे, उनसे ही तोड़फोड़ का पैसा वसूल किया जा रहा है। नागरिकता संशोधन एक्ट, नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिजन के विरोध में जो हिंसा हुई, उसमें देशभर में करीब 25 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें से अधिकतर मौत उत्तर प्रदेश में हुईं हैं, उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन को देखते हुए 31 जनवरी तक धारा 144 लगाई गई है।  साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बने। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का कार्यकाल 3 साल के लिए और बढ़ा दिया गया है। अब चीफ ऑफ डिफेंस के रिटायर होने की उम्र 65 वर्ष होगी। 65 साल की उम्र पूरी होने के बाद ही इस पद से सीडीएस रिटायर होंगे। पहले 62 साल में ही रिटायर होने का प्रावधान बना हुआ था। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की जिम्मेदारी तीनों सेनाओं के रक्षामंत्री को सलाह देना है। सीडीएस ही रक्षामंत्री का प्रधान सैन्य सलाहकार होगा। हालांकि सैन्य सेवाओं से जुड़े विशेष मामलों में तीनों सेनाओं के चीफ पहले की तरह रक्षामंत्री को सलाह देते रहेंगे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ सैन्य अभियान के दौरान तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बैठाने का काम भी रहेगा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद पर 4 स्टार जनरल रैंक के सैन्य अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ को तीनों सेनाओं के प्रमुखों के बराबर वेतन दिया जाएगा।  साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच अब राष्ट्रीय स्वसयंसेवक संघ (आरएसएस) ने मोर्चा संभाल लिया है। संघ इस संदर्भ में अब भाजपा नेताओं को नया होमवर्क दे रहा है। संघ ने इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से की है। आरएसएस ने शनिवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की एक बैठक मेरठ के संघ कार्यालय में बुलाई थी। बैठक में पश्चिम उत्तर प्रदेश से संघ के कई पदाधिकारी भी शामिल हुए। बैठक में फैसला हुआ कि अल्पसंख्यक समाज में नागरिकता कानून के बारे में फैले भ्रम और भय को दूर किया जाए। सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए पूरे उत्तर प्रदेश में छह रैलियां आयोजित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में यह भी तय हुआ कि सभी सांसद और मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों में पदयात्रा निकालेंगे, जो एक से 15 जनवरी के बीच होंगी। सूत्रों ने बताया है कि बैठक में केंद्रीय मंत्री वी. के. सिंह, संजीव बालियान, प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों के अलावा प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल मौजूद थे। संघ की प्रांतीय और विभागीय टीम के अलावा सभी आनुषांगिक संगठनों के लोग भी बैठक में शामिल हुए। बैठक में दो सत्रों में आयोजित हुई। बैठक में एक पत्रक सभी सदस्यों के बीच साझा किया गया, जिसमें एनआरसी और नागरिकता कानून के बीच का अंतर बताया गया है। सूत्र ने बताया कि इस पुस्तिका को प्रदेश भर में अल्पसंख्यक लोगों के बीच बांटा जाएगा। उल्लेखनीय है कि सीएए के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। देश के कई हिस्सों में हुए हिंसक प्रदर्शनों में कई लोगों की जान जा चुकी है।  साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। मेरठ के सिटी एसपी के बयान पर अब भाजपा भी सख्त होने लगी है। एसपी के बयान की चौतरफा निंदा होते देख अब भाजपा नेता भी उसकी निंदा करने लगे हैं। भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सिटी एसपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मुख्तार अब्बास नकवी ने मेरठ के सिटी एसपी के विवादास्पद बयान पर आईएएनएस से कहा कि अगर किसी पुलिसकर्मी ने ऐसा किया है, तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। इस बात की जांच होनी चाहिए। पुलिसकर्मियों का काम शांति बहाल करना होता है। गौरतलब है कि मेरठ के सिटी एसपी अखिलेश नारायण सिंह का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने नागरिकता कानून के विरोध से निपटने के लिए सजा-ए-पाकिस्तान ढूंढ़ निकाली है। नकवी ने हालांकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के उस बयान की भी निंदा की, जिसमें प्रियंका ने उप्र पुलिस पर आरोप लगाया है कि उनका गला दबाने की कोशिश की गई। नकवी ने प्रियंका के आरोप को राजनीति से प्रेरित बताया है। गौरतलब है कि केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी इन दिनों देश भर में घूम-घूमकर नागरिकता कानून पर अल्पसंख्यकों में फैले भ्रम को दूर करने के अभियान में लगे हुए हैं। उनके इस अभियान में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा भी सहयोग कर रहा है।  साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ। यूपी की योगी सरकार पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। नागरिकता संशोधन कानून (CCA) के विरोध के दौरान यूपी में हुए हिंसक प्रदर्शन के पीछे पीएफआई (PFI) का हाथ होने की बात सामने आने के बाद सरकार ने इस संगठन को बैन करने की तैयारी में जुट गई है। बता दें कि पीएफआई एक चरमपंथी इस्लामी कट्टरपंथी संगठन है जिसका गठन साल 2006 में हुआ था। यूपी पुलिस द्वारा केंद्रीय एजेंसियों और गृह मंत्रालय को दिए गए इनपुट्स के अनुसार पीएफआई नागरिकता संशोधित कानून (CCA) को लेकर हो रहे प्रदर्शन के दौरान शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, वाराणसी, आजमगढ़ और सीतापुर क्षेत्र में सक्रिय था। बता दें कि यूपी पुलिस ने बुधवार को पीएफआई के चार सदस्यों को मेरठ से गिरफ्तार किया। पुलिस ने इन चारों को नागरिकता संशोधित कानून के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया है। नागरिकता संशोधित कानून (CCA) के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल होने के आरोप में पुलिस ने अब तक कुल 25 पीएफआई सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले यूपी पुलिस ने लखनऊ के तीन पीएफआई सदस्यों और शामली से 18 सदस्यों को अरेस्ट किया था। खबरों के अनुसार पीएफआई (PFI) कार्यकर्ता गांवों में जाते थे और मुस्लिम समुदाय के लोगों को भड़काते थे। इसके अतिरिक्त वो लोग भड़काऊ पर्चे और किताबें भी बांटते थे। वितरित करते हैं। बताया जा रहा है कि पीएफआई के सदस्यों को कैराना ईदगाह में मुस्लिमों को हिंसा के लिए उकसाने के लिए गिरफ्तार किया गया।  साभार-khaskhabar.com

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रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजों से साफ हो गया है कि लोगों को इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का अबकी बार 65 पार का नारा पसंद नहीं आया और मतदाताओं ने इस नारे को नकार दिया। झारखंड के मतदाताओं ने अबकी बार सोरेन सरकार नारे को अपना लिया है। झामुमो गठबंधन ने बाजी मार ली। गौरतलब है कि भाजपा इस चुनाव में अकेले मैदान में उतरी थी।  

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