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नई दिल्ली । यूपी में भारतीय जनता पार्टी की ऎतिहासिक सफलता को लेकर मुस्लिम समुदाय के नेताओं का मानना है कि तमाम हिन्दू जातियों का एक साथ आकर हिन्दू वोट के रूप में परिवर्तित हो जाने से ये जीत मिली है जिसने मुस्लिम मतों के बंटने को अर्थहीन बना दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झोली में जबरदस्त सफलता डाल दी। यूपी में बीजेपी ने अकेले 312 सीटें जीती हैं, जिनमें मुरादाबाद नगर, देवबंद, नूरपुर, चांदपुर, नानपारा और नकुड जैसे कुछ ऎसे इलाके भी हैं, जहां मुसलमान ब़डी संख्या में रहते हैं।  राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन जैसी तमाम जगहों पर मुस्लिम मत सपा और बसपा में बंट गए। फिर भी मुस्लिम प्रत्याशी मेरठ, कैराना, नजीबाबाद, मुरादाबाद ग्रामीण, संभल, रामपुर, स्वार-टांडा जैसे इलाकों में जीत हासिल करने में सफल रहे। कुछ मुस्लिम नेताओं ने कहा कि कुछ सीटें तो मुस्लिम मतों के विभाजन के कारण बीजेपी की झोली में गिरीं, लेकिन जिस पैमाने पर बीजेपी को सफलता मिली है, उससे साफ है कि अगर मुसलमान किसी एक पार्टी के साथ गए होते, तो भी कोई खास फर्क नहीं पडता।  बीजेपी हिन्दू मतों को एकजुट करने के लिए... समाजवादी पार्टी के पूर्व सदस्य कमाल फारूकी ने कहा कि मुस्लिम मतों के विभाजन की बात एक तरह का अमूर्त विचार है। उन्होंने कहा, सामान्य धारणा के विपरीत, मुसलमान एकजुट होकर किसी पार्टी को वोट नहीं देते। बीजेपी हिन्दू मतों को एकजुट करने के लिए इस बात को उछालती है कि मुसलमान एकजुट होकर मत देते हैं जबकि सच्चाई यह है कि मुसलमान भी किसी अन्य सामान्य मतदाता की ही तरह अपने मुद्दों व चिंताओं के आधार पर मत देते हैं। उन्होंने कहा,यह संभव ही नहीं है कि उत्तर प्रदेश के मुसलमान किसी एक पार्टी को मत दें, लेकिन वे कभी-कभी एकजुट होकर किसी एक क्षेत्र में किसी एक प्रत्याशी का समर्थन करते हैं।  मुस्लिम फैक्टर को निष्प्रभावी बनाया... वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि चुनावों में बीजेपी की रणनीति ने मुस्लिम फैक्टर को सफलतापूर्वक निष्प्रभावी बना दिया है। इलियास ने कहा कि बीजेपी ने जाटवों के अलावा बाकी सभी अनुसूचित जातियों और यादवों के अलावा अन्य सभी पिछडों के मत हासिल किए हैं। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के उदय के बाद यह नई तरह की सोशल इंजीनियरिंग देखने को मिल रही है।  अच्छे दिन की आड में हिन्दू राष्ट्र का वादा... पूर्व राज्यसभा सदस्य मोहम्मद अदीब ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अच्छे दिन की आड में हिन्दू राष्ट्र का वादा परोस रहे हैं, जिसने बीजेपी को हिन्दू मतों को इकलौती सर्वाधिक प्रभावी इकाई में बदलने में मदद की है। उन्होंने कहा, बीते तीन साल में मोदी सरकार की कोई ऎसी उपलब्धि नहीं है फिर भी लोगों ने मोदी को मत दिया। मोदी में लोग हिन्दू राष्ट्र की उम्मीद देख रहे हैं, जिसे मोदी अच्छे दिन कहकर प्रचारित कर रहे हैं। कई मुस्लिम संगठनों के साझा संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरात के अध्यक्ष नवेद हामिद ने कहा, हम एक बहुसंख्यकवादी लोकतंत्र की तरफ बढ रहे हैं, जहां राष्ट्रवाद को हिन्दुत्व में मिला दिया गया है। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । तकरीबन दो साल पहले मनोहर पर्रिकर ने गोवा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर देश के रक्षा मंत्री का पद संभाला था। अब वह रक्षा मंत्री का पद छोडक़र फिर से गोवा का मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। वह मंगलवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पर्रिकर ने गोवा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार गठित करने के लिए सोमवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया। राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है, राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत मनोहर पर्रिकर का मंत्रीपरिषद से इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके अलावा राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिफारिश पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। भाजपा ने रविवार को पर्रिकर को गोवा में सरकार का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। वह मंगलवार शाम 5 बजे राजभवन में शपथ ग्रहण करेंगे। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहेंगे। गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा पर्रिकर सहित उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी। सिन्हा ने पर्रिकर से शपथ ग्रहण के बाद गोवा विधानसभा में 15 दिनों के अंदर बहुमत साबित करने के लिए कहा है। पर्रिकर इससे पहले दो बार गोवा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पहली बार अक्टूबर 2000 से फरवरी 2005 तक और दूसरी बार मार्च 2012 से 8 नवंबर 2014 तक। इसके बाद वह रक्षा मंत्री बने थे। जेटली भी इससे पहले रक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल चुके हैं। मोदी सरकार के गठन पर उन्होंने 26 मई 2014 से 9 नवंबर 2014 तक रक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला था। पर्रिकर ने 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा में 21 सदस्यों के समर्थन का दावा किया है। विधानसभा चुनाव में भाजपा को 13 सीटों पर जीत मिली है। गोवा फॉरवर्ड पार्टी और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के 3-3 सदस्यों ने भाजपा के प्रति समर्थन जाहिर किया है। इसके अलावा दो निर्दलीय विधायकों ने भी अपना समर्थन जताया है। गोवा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 17 सीटों पर जीत हासिल करते हुए सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन यह संख्या सरकार गठन के लिए नाकाफी है।  भाजपा सूत्रों ने बताया कि पार्टी को समर्थन देने वाले अधिकतर विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। सूत्रों ने कहा, अभी इस पर विचार-विमर्श चल रहा है। हम वित्त एवं गृह मंत्रालय अपने पास रखेंगे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समर्थन देने वाले विधायकों को दिए जाने वाले मंत्री पद पर बात कर रहे हैं। पर्रिकर अन्य पार्टी नेताओं के साथ खुद अंतिम फैसला करेंगे। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जबर्दस्त जीत के बीजेपी और पार्टी कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है। इस बीच बड़ा सवाल ये है कि यूपी का मुख्यमंत्री कौन बनेगा। सूत्रों के मुताबिक छह नाम बीजेपी की रेस में चल रहे हैं। आज शाम 6 बजे बीजेपी पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक होगी, जिसमें मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लग सकती है। इस बैठक में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सीएम पद पर कोई फैसला हो सकता है। साथ ही मणिपुर और गोवा की राजनीतिक परिस्थिति पर भी चर्चा हो सकती है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड चुनाव में मिली बडी जीत के बाद बीजेपी रविवार को दिल्ली में विजय जुलूस निकाल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद बीजेपी के इस रोड शो में हिस्सा लेंगे। हालांकि यह रोड शो छोटा होगा और दोपहर करीब 3 बजे ली मेरिडियन होटल से शुरू होकर पार्टी ऑफिस तक जाएगा। इसमें अमित शाह सहित सीनियर नेता और बीजेपी के कई कार्यकर्ता हिस्सा ले सकते हैं। राजनाथ सिंह:- सीएम की कुर्सी के लिए देश के मौजूदा गृह मंत्री राजनाथ सिंह सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। राजनाथ सिंह यूपी से ही ताल्लुक रखते हैं और 2002 तक सीएम का पद भी संभाल चुके हैं। यूपी को बीजेपी में जीत दिलाने के लिए बतौर राष्ट्रीय नेता सबसे ज्यादा सवा 100 रैलियां भी राजनाथ ने की। मनोज सिन्हा- यूपी के गाजीपुर से सांसद मनोज सिन्हा भी सीएम की रेस में हैं। इसकी बड़ी वजह उनका पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का करीबी होना है। आईआईटी-बीएचयू के छात्र रहे मनोज सिन्हा अभी मोदी सरकार में दूरसंचार और रेल राज्यमंत्री हैं और उनका काम भी संतोषजनक रहा है। भूमिहार जाति के मनोज सिन्हा यूपी की प्रभावी जाति में नहीं गिने जाते हैं। इसलिए उनका दावा भी मजबूत माना जा रहा है। योगी आदित्यनाथ:- मुख्यमंत्री पद की रेस में गोरखपुर से बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम भी दमदार माना जा रहा है। आदित्यनाथ हिंदुत्व का मुखर चेहरा माने जाते हैं। फायर ब्रांड छवि होने की वजह से पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल तक उनकी जबरदस्त पैठ है। प्रदेश के नेताओं में शायद संघ और बीजेपी के कार्यकर्ताओं में सबसे ज्यादा लोकप्रिय भी हैं। बहुसंख्यकों का ध्रुवीकरण कराने में भी आदित्यनाथ अहम भूमिका कही जा रही है। लेकिन कम प्रशासनिक अनुभव और बहुत ज्यादा कट्टर हिंदुत्व चेहरा होने की वजह से आदित्यनाथ के चयन में परेशानी आ सकती है। केशव प्रसाद मौर्य- बीजेपी के यूपी अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने गैर यादव पिछड़ी जातियों को पार्टी के साथ खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभाई है। फूलपुर से बीजेपी सांसद केशव युवा हैं और मेहनती भी। इसलिए केंद्रीय नेतृत्व उन्हें पसंद करता है। लेकिन अतीत की जिंदगी के कुछ दागदार पन्ने उनकी राह में रोड़े अटका सकते हैं। श्रीकांत शर्मा- यूपी के सीएम की रेस में बीजेपी के पास एक और नाम श्रीकांत शर्मा का है। श्रीकांत अभी पार्टी में राष्ट्रीय सचिव हैं। मथुरा से पहली बार विधानसभा चुनाव श्रीकांत शर्मा ने लड़ा और बड़ी जीत भी हासिल की। श्रीकांत अमित शाह के बेहद करीबी हैं. कहा तो यहां तक जाता है कि अमित शाह के पास जाने का रास्ता श्रीकांत शर्मा के पास से ही खुलता है। सिद्धार्थनाथ सिंह- टीवी चैनलों में बीजेपी का पक्ष रखने वाले सिद्धार्थनाथ सिंह भी सीएम पद के उम्मीदवार हैं। इलाहाबाद पश्चिम से उन्होंने जीत दर्ज की है। सिद्धार्थ नाथ सिंह पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाती हैं। इलाहाबाद की रैली में अमित शाह ये पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि बीजेपी की सरकार बनने पर उन्हें महत्वपूर्ण दायित्व दिया जाएगा। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । मुलायम सिंह यादव ने यूपी में हुई पार्टी की करारी हार के बाद इसके लिए सीधे तौर पर अखिलेश यादव को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इस हार के लिए सपा का कांग्रेस से हुए गठबंधन को भी बराबर का जिम्मेदार ठहराया है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक और चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटाए गए नेताजी गठबंधन को ही हार का जिम्मेदार बता रहे हैं। करारी हार के बाद मीडिया से रूबरू हुए मुलायम सिंह ने कहा कि कांग्रेस से यदि सपा का गठबंधन नहीं होता तो प्रदेश में हमारी सरकार होती। अपने निवास 5 विक्रमादित्य पर इस करारी हार से खामोश हुए मुलायम का कहना था कि जो कोई भी इस गठबंधन को सही कह रहा था वह हकीकत में झूठ बोल रहा था। कांग्रेस को यूपी में कोई पसंद नहीं करता है, न ही इस गठबंधन की कोई जरूरत थी। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा अपने दम पर पूर्ण बहुमत से आई थी। पिछले दिनों समाजवादी पार्टी में छिड़े घमासान के लिए भी उन्होंने अखिलेश यादव को ही जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि इस हार की सबसे बड़ी वजह वही घमासान रहा है। इस घमासान के बाद लोगों ने सपा को वोट इसलिए नहीं किया क्योंकि इस दौरान उनका अपमान किया गया था। पार्टी में मचे घमासान के बाद यही संदेश सपा कार्याकर्ताओं और जनता के बीच पहुंचा था। इस दौरान उन्होंने माना कि यह भाजपा के लिए बहुत बडी जीत है, लिहाजा आज उनका दिन है। उन्होंने भाजपा की जीत और सपा की हार को विचित्र बताया है। तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव पार्टी की हार के बावजूद अविचलित दिखते हैं। पहलवान से नेता बने मुलायम के लिए संतोषजनक बात यह है कि उनके समर्थक जीत गए। उन्होंने कहा मेरे निकट के सारे जीत गए। इसमें उनके छोटे भाई शिवपाल यादव भी शामिल हैं। हार के बाद मुलायम की अखिलेश से बातचीत पर वह बोले की अब वह क्या बोलेगा। उन्होंने अखिलेश को सलाह दी कि हार के बाद भी उन्हें जनता के बीच जाकर जनता को बधाई और धन्यवाद देना चाहिए। मुलायम ने यह भी कहा कि अब यदि पार्टी को जीत चाहिए तो पार्टी को काम करना होगा। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर दिनरात एक कर पार्टी बनाई और खड़ा किया था। लेकिन अब हार का दुख छोडक़र इस हार पर चिंतन किए जाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में किसी भी राज नेता ने अपने जीते जी सत्ता की कमान अपने बेटे को नहीं सौंपी थी लेकिन उन्होंने इसके उलट ऐसा किया और सत्ता का वारिस अखिलेश को बनाया था। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे के रूझान आने शुरू हो गए है। सभी 690 विधानसभा सीटों पर लडे प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला शाम तक आ जाएगा। इन चुनावों के नतीजे पूरे देश के लिए अहम साबित होने वाले हैं। इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव की दिशा तय करेंगे।   यूपी :- अभी तक के मुताबिक बीजेपी 300 सीटों के साथ सबसे आगे चल रही है जबकि 17 सीट जीत ली है। सपा 51 सीटों पर आगे चल रही है और 1 सीटे जीत ली है। बसपा 18 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस 8 सीटों पर आगे चल रही है और 1 सीटे जीत ली है। आरएलडी 2 और अन्य 4 सीटों पर आगे चल रहे है। बहुमत के लिए 202 सीटें जीतना जरूरी है।    पंजाब:- अभी तक रुझान के मुताबिक कांग्रेस 50 सीटों के साथ सबसे आगे चल रही है जबकि 27 सीटे जीत ली है। अकाली 13 सीटों पर आगे चल रही है और 1 सीटे जीत ली है। आप 12 सीटों पर आगे चल रही है और 9 सीटे जीत ली है। बीजेपी 2 सीटों पर आगे चल रही है और 1 सीटे जीत ली है। अन्य 2 सीटों पर आगे चल रहे है। बहुमत के लिए 117 सीटें जीतना जरूरी है।    उत्तराखंड- उत्तराखंड में सभी 70 विधानसभा सीटों पर मतगणना जारी है। शुरूआती रूझान में बीजेपी 27 सीटों पर आगे चल रहे हैं जबकि 29 सीटें जीत ली है। कांग्रेस 8 सीटों पर आगे चल रहे हैं जबकि 4 सीटें जीत ली है। अन्य 2 सीटों पर आगे चल रहे हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत दोनों विधानसभा सीट हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा से हार गए।   गोवा- गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर मंद्रेम विधानसभा सीट से चुनाव हार गए हैं। उन्हें कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी दयानंद सोप्टे ने करीब 5,000 वोटों के अंतर से हराया। अभी तक रुझान के मुताबिक कांग्रेस 5 सीटों के साथ सबसे आगे चल रही है जबकि 8 सीटें जीत ली है। बीजेपी 3 सीटों से आगे चल रही है जबकि 8 सीटे जीत ली है। अन्य पार्टियां 5 सीटों पर आगे चल रहे है जबकि 5 सीटे जीत ली है। बहुमत के लिए 21 सीटें जीतना जरूरी है।   मणिपुर- मणिपुर विधानसभा चुनाव की 60 सीटों पर हुए मतदान की गिनती जारी है। अभी तक के रुझानों के अनुसार कांग्रेस 7 सीटों बढत बनाए हुए है जबकि 11 सीटें जीत ली है। वहीं बीजेपी 6 सीटों पर आगे चल रही है जबकि 10 सीटें जीत ली है। अन्य पार्टी 1 सीटों पर आगे चल रही है जबकि 7 सीटें जीत ली है।    राज्य के मुख्यमंत्री ओकराब इबोबी सिंह अपना चुनाव जीत गए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला चुनाव हार गई हैं। उन्हें नोटा से भी कम वोट मिले हैं। इरोम शर्मिला को थाउबल सीट पर महज 85 वोट मिले।       ज्ञातव्य है कि पांचों राज्यों के एक्जिट पोल आ चुके हैं लेकिन ये एक्जिट पोल कितने सटीक होते हैं यह तो परिणाम आने पर ही पता चलेगा। शाम तक हार-जीत की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।   निर्वाचन आयोग के अनुसार मतगणना सुबह 8 बजे शुरू होने के बाद देर शाम तक समाप्त हो जाएगी। वोटों की गिनती 157 केंद्रों पर हो रही है। पंजाब में 53, गोवा में दो, उत्तर प्रदेश में 75, उत्तराखंड में 15 और मणिपुर में 12 केंद्रों पर मतों की गिनती हो रही है। चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार डाक मत-पत्रों की गिनती होने के आधे घंटे बाद ईवीएम के वोटों की गिनती शुरू होगी।    परिणाम घोषित होने के बाद विजेता उम्मीदवारों का नाम गजट में उल्लिखित होगा। गजट अधिसूचना ही पांचों राज्यों में अगली विधानसभा बनाने की प्रक्रिया शुरू करेगी। मतगणना स्थलों पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। साभार-khaskhabar.com      

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पणजी। गोवा विधानसभा चुनाव की 40 सीटों पर मतगणना जारी है। अभी तक रुझान के मुताबिक कांग्रेस ने 2 सीटों पर बढत बनाए हुए है जबकि 11 सीट जीत ली है। वहीं बीजेपी ने 3 सीटों पर बढत बनाई हुई है और 10 सीटें जीत ली है। अन्य 4 सीटों पर बढत बनाए हुए है और 6 सीटें जीत ली है।   गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर मंद्रेम विधानसभा सीट से चुनाव हार गए हैं। उन्हें कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी दयानंद सोप्टे ने करीब 5,000 वोटों के अंतर से हराया।   पार्सेकर संवाददाताओं से बात किए बिना ही पणजी में मतदान केंद्र से बाहर निकल गए, वहीं दयानंद सोप्टे ने अपनी जीत का श्रेय अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को देते हुए कहा कि लोग पार्सेकर के काम से नाखुश हैं।   सोप्टे ने कहा, ‘‘करीब 5,000 सीटों का फर्क दर्शाता है कि जनता मुख्यमंत्री के काम से खुश नहीं है।’’   इस चुनाव में कुल 250 उम्मीदवार खड़े हैं जिसमें कई निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल हैं। इस बार बड़ी संख्या में नए चेहरे चुनावी मैदान में हैं। साथ ही गोवा के पांच पूर्व मुख्यमंत्री चर्चिल अलेमाओ, प्रतापसिंह राणे, रवि नाइक, दिगंबर कामत और लुईझिन्हो फलेरियो के अलावा मौजूदा मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर के राजनीतिक भविष्य का भी फैसला होगा। इस बार आम आदमी पार्टी भी चुनावी मैदान में है।   माना जा रहा है कि अगर यहां बीजेपी की सरकार बनती है तो मनोहर पर्रिकर ही यहां सीएम चेहरा होंगे। ज्ञातव्य है कि मनोहर पर्रिकर यहां के सीएम रह चुके हैं। वहीं सुभाष वेलिंगकर जो आरएसएस के नेता थे उन्होनें इस बार चुनावों में अलग पार्टी बनाई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वो बीजेपी का खेल बिगाड सकते हैं। इन चुनावों में कांग्रेस ने 37, आम आदमी पार्टी के 39 जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने 18 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। साभार-khaskhabar.com    

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लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव 2017 के लिए गए ज्यादातर एग्जिट पोल्स प्रदेश में कमल खिलने का संकेत मिल रहे है। कुछ एग्जिट पोल्स ने जहां बीजेपी के लिए बंपर जीत का अनुमान लगाया है तो वहीं कुछ मुताबिक बीजेपी सबसे बडी पार्टी बन सकती है।  आपको बता दें कि 2012 चुनाव में 59.40 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, जबकि इस बार चुनावों में वोटिंग प्रतिशत बढकर 60.03 प्रतिशत पहुंच गया। अब सभी निगाहें 11 मार्च को होने वाली मतगणना पर टिकी है। बता दें कि यूपी में सरकार बनाने के लिए पार्टियों को 202 सीटें हासिल करनी होंगी।   ये हैं एग्जिट पोल के आंकड़े बीजेपी+सहयोगी : बीजेपी (241-265), अपना दल (6-8), एसबीएसपी (4-6)- कुल (251-279) सपा+कांग्रेस : सपा (78-97), कांग्रेस (10-15)- कुल (88-112) बीएसपी : 28-42 आरएलडी : 2-5 अन्य : 4-11 एग्जिट पोल के मुताबिक चुनावों में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को कुल 36 प्रतिशत वोट मिले। जबकि सपा और कांग्रेस के पक्ष में महज 30 फीसदी। मायावती की बीएसपी के पक्ष में जनता ने 22 फीसदी मतदान किया जबकि अन्य को कुल 12 प्रतिशत वोट मिले।   आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 15.21 प्रतिशत ही वोट मिले थे। मतलब इन चुनावों में बीजेपी को मोदी लहर का फायदा होता नजर आ रहा है उसके वोट शेयर में गुणात्मक वृद्धि उसी का नतीजा हैं। सपा को 2012 में हुए विधानसभा चुनावों में कुल 29.29 फीसदी वोट मिले थे और कांग्रेस को 13.26 फीसदी. मतलब साफ है कि इस बार यूपी की जनता ने सपा-कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में कुछ कम मतदान किया। मायावती का जादू इन चुनावों में भी नहीं चला, पिछले चुनावों में बीएसपी को कुल 25.95 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि इन चुनावों में 22 फीसदी।   साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे 11 मार्च को आएंगे लेेकिन नतीजों से पहले सट्टा बाजार गर्म हो गया है। हांलांकि विधानसभा चुनावों के एक्जिट पोल आ चुके हैं लेकिन सटोरिए इन सब पर भारी हैं। गौरतलब है कि सट्टा बाजार में शुरूआती दौर में बीजेपी पीछे चल रही थी लेकिन अब बीजेपी को सट्टा बाजार में बढत मिल गई है। तो सपा-कांग्रेस गठबंधन भी सट्टा बाजार में पीछे नहीं है।    गौरतलब है कि 11 मार्च को 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आएंगे लेकिन सबकी नजर यूपी पर है। सट्टा बाजार में भी यूपी पर सबकी नजरें टिकी हैं। दिल्ली से लेकर मुंबई और राजस्थान तक के सटोरिए दुकान खोल बैठे हैं। चुनावी रण के हर दिन और हर इलाके का सटीक हिसाब-किताब पार्टियों के मैनेजरों से ज्यादा सट्टा बाजार में उपलब्ध रहा है।    प्राप्त जानकारी के अनुसार सट्टा बाजार में पहले एसपी-कांग्रेस गठबंधन को 210 से 215 सीटें मिलने के दावे किए जा रहे थे। वहीं सट्टा बाजार में पहले बीजेपी पीछे थी लेकिन अंतिम चरण में अब बीजेपी को बढत मिल गई है।  तीसरे राउंड तक पीछे रहने वाली बीजेपी को गुरुवार को खुले नए भाव में 188 से 190 और एसपी गठबंधन को 125 से 130 तक सीटें मिलने की संभावना बताई है। इस संभावना पर बनारस में ही 25 करोड रुपए से ज्यादा का सट्टा लगा है।    वहीं सट्टा बाजार में बीएसपी को 80 सीटें मिलने की संभावना बताई जा रही है। लेकिन राजनीति जानकारों का कहना है कि बीएसपी दलित-मुस्लिम वोटों की गठरी से साइलेंट किलर के रूप में सामने आ सकती है।    साभार-khaskhabar.com  

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नयी दिल्ली। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण गुरुवार से शुरू हो गया है। इस बजट सत्र में शामिल होने से पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुझे विश्वास है कि इस बार चर्चा का स्तर ऊपर जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की उम्मीद जाहिर की है। पीएम ने कहा, हमारी आशा है जीएसटी में सभी राज्यों का सहयोग मिलेगा।    वहीं, संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने कहा, इस सत्र में वित्त, मैटरनिटी और कई अन्य बिलों पर चर्चा होनी है। सभी से अनुरोध है कि संसद की कार्रवाई चलने देने से सहयोग करें। दूसरी ओर, वहीं राज्यसभा की बैठक वर्तमान सदस्य हाजी अब्दुल सलाम के निधन पर उनके सम्मान में आज पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। अमेरिका में भारतीय पर हुए हमले को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस पर लोकसभा में बयान देते हुए कहा कि अमेरिका में भारतीयों पर हो रहे हमलों को गंभीरता से लिया गया है। इस मसले पर भारत सरकार की तरफ से लोकसभा में अलग से बयान दिया जाएगा। गृहमंत्री लखनऊ एनकाउंटर में मारे गए आतंकवादी सैफुल्ला और मध्य प्रदेश के शाजापुर में ट्रेन में विस्फोट की घटना पर भी लोकसभा में बयान दे रहे हैं। गौरतलब है कि मंगलवार देर रात लखनऊ के एक घर में छिपे आतंकवादी को करीब 11 घंटे चले अभियान के बाद मार गिराया गया। आईएसआईएस मॉड्यूल द्वारा शाजापुर में भोपाल—उज्जैन यात्री ट्रेन में आईईडी विस्फोट में दस लोग घायल हो गये थे, जिनमें से तीन की हालत गंभीर है। साभार-khaskhabar.com    

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सोमनाथ। गुजरात दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा अर्चना की। इस दौरान उनके साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार पीएम नरेंद्र मोदी सोमनाथ मंदिर पहुंचे। बताया जा रहा है कि नरेन्द्र मोदी मंदिर न्यास की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। यह भी माना जा रहा है कि मंदिर में पूजा के साथ ही भाजपा ने गुजरात विधानसभा चुनावों का बिगुल फूंक दिया है। इससे पूर्व मंगलवार को पीएम मोदी आज अपनी मां हीराबेन से मिलने पहुंचे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार रात छोटे भाई के आवास पर अपनी 97 वर्षीय मां से भेंट की। प्रधानमंत्री के छोटे भाई प्रांतीय राजधानी गांधीनगर के बाहर रायसान में रहते हैं। उनके छोटे भाई पंकज ने कहा कि मोदी मां हीराबा और परिवार के अन्य लोगों से मिलने आये थे। उन्होंने बताया कि वह करीब 20 मिनट रुके। मोदी जब भी गुजरात आते हैं तो मां से मिलते हैं। गुजरात दौरे के प्रथम दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भरूच में देश के सबसे लंबे केबल पुल का उद्घाटन किया था। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे। इस पुल का निर्माण अहमदाबाद-मुम्बई राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात को सुगम बनाने के लिए किया गया है। यह देश का सबसे लंबा एक्स्ट्रा डाज्ड केबल ब्रिज है। इसकी लंबाई 1344 मीटर है और चौड़ाई 20.8 मीटर है। इसे बनाने में 2 साल लगे जबकि 379 करोड रुपये का खर्च हुआ। गुजरात पीएम मोदी का गृहराज्य है ऐसे में यहां का चुनाव नरेंद्र मोदी के लिए काफी अहम साबित होगा। यूपी में चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद पीएम मोदी ‘मिशन गुजरात’ पर निकले हैं। गुजरात में इसी साल के अंत में चुनाव होने हैं। दौरे में मोदी विधानसभा चुनावों के बारे में पार्टी की तैयारी की समीक्षा भी करेंगे। गांधीनगर में महात्मा मंदिर में महिला दिवस के मौके पर राज्य की सभी महिला सरपंचों का सम्मेलन आयोजित किया गया है, जिसे पीएम मोदी संबोधित करने वाले हैं। भाजपा साल 1995 से ही लगातार गुजरात में विधानसभा चुनाव जीतती आ रही है। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी की ये 10वीं गुजरात यात्रा है। पिछले कुछ महीनों में मोदी ने गुजरात के अपने दौरों में काफी तेजी ला दी है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार का काम अब खत्म हो गया है, ऐसे में मोदी सहित भाजपा का सारा ध्यान गुजरात पर ही लगने वाला है, क्योंकि गुजरात न सिर्फ मोदी और अमित शाह का गृह प्रदेश है, बल्कि भाजपा का गढ भी है। यहां तीन विधानसभा चुनावों में उन्होंने खुद मुख्यमंत्री रहते हुए भाजपा को जीत दिलाई थी। साथ ही जीत की इस हैट्रिक से ही उनके लिए दिल्ली का रास्ता भी खुला और 2014 में लोकसभा चुनावों में भारी जीत के बाद वो पीएम बने।   साभार-khaskhabar.com  

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जयपुर। अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सोडाला थाने में बुधवार को महिलाओं के लिए सेमीनार आयोजित किया। इस दौरान विभिन्न स्कूलों से लगभग 50 से अधिक छात्राएं शामिल हुई, जिन्हें महिलाओं के साथ हिंसा को रोकने और उनके अधिकारों की जानकारी दी गई। सोडाला थाना के एसएचओ सुनील शर्मा ने बताया कि महिला दिवस के मौके पर शहर में सभी जगहों पर महिला पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया है, साथ ही थाने में भी सभी पदों पर महिला पुलिस अधिकारियों को ही बिठाया गया है । यहां आई हुई सभी छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग की भी जानकारी भी दी गई है ताकि वे सशक्त रूप से आगे बढ़ सकें । साभार-khaskhabar.com  

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Lucknow: The Anti-Terrorism Squad of Uttar Pradesh Police was engaged in an encounter with a suspected ISIS terrorist, accused in the Madhya Pradesh train blast, in Thakurganj area of the state capital today.   Additional Director General of Police Law and Order Daljeet Choudhury told reporters here that the terrorist was still firing and the security personnel were trying to arrest him.   "We are suspecting presence of only one suspect inside the building and the input came in from outside the state.   The suspect inside the building is possibly from Lucknow," the ADG said, adding that earlier in the day one suspect was arrested from Kanpur, while the second one was hiding inside a building at Thakurganj.   The sleuths of ATS have gheraoed a house in Haji locality at Thakurganj area of the state capital, where the terrorist was hiding.   CCTV footage near the place where the explosion took place on a train in Madhya Pradesh helped the police there to identify suspects. Madhya Pradesh Home Minister Bhupendra Singh said the explosion on the train running between Ujjain and Bhopal was a terror attack, as per initial investigation.   The Madhya Pradesh police said that interrogation of the three men it arrested helped with information about the two other men who were allegedly involved in the train blast, and they then shared the information with central agencies as well as the Uttar Pradesh police.   The Lucknow neighbourhood of Thakurganj, which is residential, has been cordoned off and at least 20 commandos are involved in the operation, said police sources. "The suspect came from outside the state," said Mr Chaudhary, adding that the terror suspect "has refused to surrender."   According to locals, at around 3.30 pm, over 30 policemen started vacating the houses in the locality to corner the suspect.   Aseem Arun, a senior office of the Anti-Terror Squad handling the operation in Lucknow, said "We are not in a hurry to finish the operation, but want to catch him alive."   Credit: The Emerging Word  

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नारद संवाद

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