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नई दिल्ली। विवादों से घिरी संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया कि पद्मावत देश के सभी राज्यों में रिलीज होगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विवाद और बढ़ सकता है। पद्मावत पर चार राज्यों में बैन के खिलाफ गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट में बहस हुई। इस दौरान वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने निर्माताओं की ओर से पक्ष रखा। साल्वे ने कहा, सेंसर बोर्ड की ओर से पूरे देश में फिल्म के प्रदर्शन के लिए सर्टिफिकेट मिला है। साल्वे ने चार राज्यों के प्रतिबंध को असंवैधानिक करार दिया।    साल्वे ने कहा, राज्यों का पाबंदी लगाना सिनेमैटोग्राफी एक्ट के तहत संघीय ढांचे को तबाह करना है। राज्यों को इस तरह का कोई हक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि लॉ एंड आर्डर की आड़ में राजनीतिक नफा नुकसान का खेल हो रहा है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पद्मावत देश के सभी राज्यों में एक साथ रिलीज होगी।    आपको बात दें कि पद्मावत पर राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और मध्यप्रदेश में बैन लगा हुआ है। हालांकि, फिल्म को सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है। फिल्म 25 जनवरी को रिलीज हो रही है। राजपूत संगठनों का आरोप है कि फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है। जबकि फिल्म से संबद्ध लोगों ने इससे इनकार किया है।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पर लगाए गए आरोपों के बाद से जारी विवादों के बीच अब जस्टिस बी. एच. लोया की संदिग्ध मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट की किसी दूसरी बेंच में भेजा जा सकता है। इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस अरुण मिश्रा ने कुछ ऐसे ही संकेत दिए हैं। जस्टिस मिश्रा और जस्टिस मोहन एम. शांतनागौदार की बेंच ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा, सभी दस्तावेज अगले 7 दिनों के अंदर ऑन रिकॉर्ड रखे जाएं और अगर ये दस्तावेज उपयुक्त पाए जाते हैं तो उसकी प्रति याचिकाकर्ताओं को भी मुहैया कराई जाए। इसे उचित बेंच के समक्ष रखा जाए। जजों के इस कथन से अब ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि अब यह केस किसी और बेंच के पास भेजा जा सकता है। इसके साथ ही अदालत ने मामले को सात दिनों के लिए स्थगित कर दिया।    न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा व न्यायमूर्ति मोहन एम.शांतनगुदार की पीठ ने वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे से दस्तावेजों को याचिकाकर्ताओं के साथ साझा करने को कहा, इस मामले में उन्हें सबकुछ मिलना चाहिए। कोई गोपनीयता नहीं होनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता टी.पूनावाला व मुंबई के पत्रकार बंधुराज संभाजी लोन ने न्यायाधीश लोया की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। वकील साल्वे ने महाराष्ट्र सरकार की तरफ से पेश होते हुए अदालत से मुहरबंद लिफाफे में मौजूद दस्तावेजों पर नजर डालने को कहा तो न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, याचिकाकर्ताओं के साथ इसकी प्रतियां साझा करें और हम मामले को सात दिनों के लिए स्थगित करते हैं।  साल्वे ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा भेजे गए दस्तावेजों को उन्होंने खुद नहीं देखा है। इस पर अदालत ने कहा कि वह दस्तावेजों को देखें और यदि वह उनमें कुछ संवेदनशील पाते हैं तो उसे अपने पास रख सकते हैं। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, यदि उसमें कुछ नहीं है, तो कोई गोपनीयता नहीं होनी चाहिए। सामान्य तौर पर दस्तावेजों को साझा करने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।   साल्वे ने कहा कि उनके पास एक अतिरिक्त प्रति है, जिसे वह याचिकाकर्ता के वकील पल्लव सिसोदिया को साझा कर सकते हैं, लेकिन उन्हें इसे अपने तक रखना होगा। न्यायाधीश लोया की मौत को लेकर विवाद पैदा हो गया है, क्योंकि लोया शोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आरोपी थे। शाह को बाद में आरोपमुक्त कर दिया गया था। साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुराने नोटों का जखीरा पकड़ा गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और उत्तर प्रदेश पुलिस की ज्वाइंट रेड में कानपुर में 100 करोड़ रुपये मूल्य के पुराने नोटों को जब्त कर लिया गया है। एनआईए और यूपी पुलिस ने कानपुर के एक होटल समेत 3 जगहों से पुराने नोटों के साथ आठ सौदागरों को भी गिरफ्तार किया है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, कानपुर पुलिस को एक बंद घर में बड़ी मात्रा में पुराने नोटों के होने के बारे में पता चला। इन नोटों को बदलवाने की बात करने वालों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।    अनुमान के मुताबिक जब्त की गई रकम करीब 100 करोड़ रुपये तक की हो सकती है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अधिकारियों और आयकर विभाग (इनकम डैक्स डिपार्टमेंट) की टीम जल्द ही जब्त की गयी राशि की सटीक जानकारी देगी। पुलिस ने गिरफ्तार किये गये व्यक्तियों के नाम बताने से इंकार कर दिया है।    यूं हुआ बड़ा खुलासा   गौरतलब है कि पिछले दिनों मेरठ के एक बिल्डर संजीव मित्तल के पास से पुलिस ने 25 करोड़ के पुराने नोट बरामद किए थे। इसके बाद एनआईए को जानकारी मिली थी कि यूपी में कानपुर समेत कई जिलों में मनीचेंजर गैंग सक्रिय है। सटीक सूचना पर एनआईए के अफसरों ने आईजी अलोक सिंह और एसएसपी अखिलेश कुमार से संपर्क किया। इसके बाद कानपुर पुलिस के अधिकारियों ने एनआईए की टीम के साथ मिलकर छापेमारी को अंजाम दिया।    मंगलवार सुबह पुलिस और एनआईए की संयुक्त टीम ने सीसामऊ इलाके के एक होटल में छापा मारकर तीन लोगों को दबोचा। इनकी निशानदेही पर पांच और लोगों को गिरफ्तार किया गया। एक पुलिस अफसर ने बताया कि इनके पास से करीब 100 करोड़ रुपए पुराने नोट बरामद हुए हैं।   आपको बता दें कि साल 2016 के नवंबर महीने में आठ तारीख को पीएम मोदी ने एतिहासिक नोटबंदी का ऐलान किया था। इस ऐलान के बाद आठ नवंबर के पहले चलन में रहे 1000 और 500 के नोटों को बंद कर दिए गया था। इनके बदले 2000 और 500 के नए नोट लाए गए।   सरकार ने वादा किया था कि इस कदम से कालाधन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, नक्सलवाद और कश्मीर में होने वाली पत्थरबाज़ी जैसी घटनाओं की कमर टूट जाएगी। हालांकि बाद में सरकार ने इसे कैशलेस इकॉनमी से जोड़ दिया और बताया कि कैश का प्रयोग कम होने से डिजिटल इंडिया को तो फायदा मिलेगा ही, साथ ही काले धन पर भी लगाम लगेगी।    साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई को लेकर प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और 4 सबसे वरिष्ठ न्यायाधीशों के बीच एक तरह से मतभेद उभरने के बीच शीर्ष अदालत ने सोमवार को सीजेआई की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के गठन की घोषणा की। चौंकाने वाली बात ये है कि इस पीठ में वे चारों न्यायाधीश शामिल नहीं हैं, जिन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।   चारों न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम.बी. लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ में से किसी का नाम पांच जजों की संविधान पीठ के सदस्यों में नहीं है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक पांच न्यायाधीशों की पीठ में सीजेआई दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर, न्यायमूर्ति डी.वाई.चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण शामिल हैं। यह संविधान पीठ 17 जनवरी से कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई शुरू करेगी।    इस बीच अदालत के सूत्रों ने कहा कि इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि सीजेआई ने सोमवार को उन 4 न्यायाधीशों से मुलाकात की या नहीं जिन्होंने 12 जनवरी को संवाददाता सम्मेलन में सीजेआई के खिलाफ आरोप लगाए थे। कार्यसूची के अनुसार पांच न्यायाधीशों की पीठ आधार कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले मामले और सहमति से वयस्क समलैंगिकों के बीच यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने के फैसले को चुनौती देने से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई करेगी।    इन्हीं न्यायाधीशों ने पिछले साल 10 अक्टूबर से संविधान पीठ के विभिन्न मामलों में सुनवाई की थी। इनमें प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच टकराव का मामला भी है। पीठ केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर रोक के विवादास्पद मुद्दे पर भी सुनवाई करेगी और इस कानूनी सवाल पर सुनवाई फिर शुरू करेगी कि क्या कोई पारसी महिला दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी के बाद अपनी धार्मिक पहचान खो देगी।    संविधान पीठ अन्य जिन मामलों को देखेगी उनमें आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहे किसी जनप्रतिनिधि के अयोग्य होने से संबंधित सवाल पर याचिकाएं भी हैं। इन सभी मामलों को पहले शीर्ष अदालत की बड़ी पीठों को भेजा गया था। मंगलवार की दैनिक कार्यसूची के मुताबिक न्यायमूर्ति लोया की मौत के मामले में जांच की दो जनहित याचिकाएं न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है जिनके खिलाफ एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने सार्वजनिक रूप से आक्षेप लगाए थे। साभार-khaskhabar.com       

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बाड़मेर। राजस्थान के विकास में आज को एक और स्वर्णिम अध्याय जुडऩे जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राजस्थान के बाड़मेर जिले में आएंगे। यहां पीएम मोदी देश की सबसे आधुनिक रिफाइनरी के कार्य का शुभारंभ करेंगे। इस रिफाइनरी की तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आधारशिला रखी थी। यह कार्यक्रम अपराह्न् 12.30 बजे पचपडरा में आयोजित होगा।   पचपडरा राजधानी जयपुर से करीब 450 किमी दूर है। इस 43,000 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना के चार साल में पूरा होने के बाद इससे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर 10,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। यह 9 एमएमटीपीए (मिलियन मिट्रिक टन प्रति साल) क्षमता वाली रिफाइनरी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) व राजस्थान सरकार का एक संयुक्त उद्यम है। इसके उत्पाद बीएस-वीआई उत्सर्जन के मानकों के अनुरूप होंगे।   सीएम राजे ने लिया तैयारियों का जायजा   इससे पहले सोमवार को मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे एवं केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने रिफाइनरी के कार्य शुभारम्भ समारोह की तैयारियों का जायजा लिया। राजे सोमवार को जयपुर से पचपदरा पहुंची और केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के साथ समारोह स्थल पर बनाए गए मंच, पाण्डाल, एग्जीबिशन रूम सहित अन्य सभी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।   गहलोत ने पीएम से पूछा- रिफाइनरी का शिलान्यास फिर से क्यों? इस बीच बाड़मेर रिफाइनरी को लेकर कांग्रेस व राजस्थान की सत्तारूढ़ भाजपा के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। रिफाइनरी को लेकर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री से सवाल किया था कि रिफाइनरी का शिलान्यास फिर से क्यों किया जा रहा है, जब यह पहले ही 2013 में हो चुका है।   इसके तुरंत बाद वितरित किए गए आमंत्रण पत्र में कार्य शुभारंभ समारोह लिखा गया है। गहलोत ने इस पर त्वरित टिप्पणी में कहा कि यह मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया सरकार का मुंह छिपाने जैसा कदम है। साभार-khaskhabar.com       

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मुंबई। 26/11 मुंबई हमले में माता-पिता को खोने वाला इजरायल का बेबी मोशे 9 साल बाद भारत पहुंच गया है। मुंबई पहुंचने पर मोशे का भव्य स्वागत किया गया। मुंबई में मोशे नरीमन हाउस के साथ-साथ गेटवे ऑफ इंडिया घूमने जाएगा। आपको बता दें कि 26/11 मुंबई हमले में बेबी मोशे ने अपने माता-पिता को खो दिया था, उस समय वो सिफऱ् 2 साल का था।    बेबी मोशे अपने माता-पिता के साथ नरीमन हाउस में रूका था। उस हादसे के बाद ये पहली बार है जब बेबी मोशे भारत आया है। आपको बता दें कि इजरायली दौरे के दौरान पीएम मोदी भी मोशे से मिले थे और पीएम मोदी ने भारत आने का न्यौता दिया था।    मोशे की मां रिवका और पिता गैवरूल होल्त्जबर्ग की मुंबई आतंकी हमले में दर्दनाक मौत हो गई थी। 2008 में हुए इस हमले में उसकी मां और पिता समेत छह अन्य इस्राइली नागरिकों की मौत हो गई थी।    बेबी मोशे और उसके इस्राइली माता-पिता मुंबई के नरीमन हाउस (अब चबाड हाउस) में रहते थे। सैंड्रा सैमुअल मोशे की आया के तौर पर काम करती थीं। 2008 में 26 नवंबर को मुंबई पर लश्कर तैयबा के हमले में नरीमन हाउस को भी निशाना बनाया गया था।      साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का आज छह दिवसीय भारत दौरे का दूसरा दिन है। आज पीएम नेतन्याहू कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। इससे पहले राष्ट्रपति भवन में जरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भव्य स्वागत किया गया। पीएम नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में स्वागत किया। इसके बाद नेतन्याहू को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जिसके बाद पीएम मोदी ने इजरायली पीएम और उनकी पत्नी को वहां मौजूद अधिकारियों और मंत्रियों से मिलवाया।    नेतन्याहू ने भी पीएम मोदी को इजरायली प्रतिनिधियों से मिलवाया। राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत और विदेश राज्य मंत्री भी मौजूद रहे। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद बेंजामिन ने पीएम मोदी की तारीफ की। इस दौरान उन्होंने कहा कि शांति और खुशहाली के लिए दोनों देशों की साझेदारी अहम है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के इजरायल दौरे से हमारी दोस्ती शुरू हुई।    ये है आज का कार्यक्रम   -सुबह 10.30 बजे: राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे। -दोपहर 12 बजे: हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी से नेतन्याहू की मुलाकात। -दोपहर 12.30 बजे: डेलीगेशन स्तर की बातचीत।  -दोपहर 1 बजे: समझौतों पर हस्ताक्षर और मीडिया ब्रीफिंग। -शाम 5.45: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात। -शाम 7 बजे: होटल ताज डिप्लोमेटिक में भारत-इजरायल सीईओ फोरम के साथ मीटिंग। -शाम 7.30 बजे: भारत-इजरायल बिजनेस समिट।   प्रोटोकॉल तोड नेतन्याहू से मिले थे पीएम मोदी   भारत और इजरायल के बीच 10 बिजनेस और इंडस्ट्री संबंधी समझौता-पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ भारत आए 130 प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ये समझौते एनर्जी, वॉटर, ऑटोमेशन प्रॉजेक्ट्स और आईटी के क्षेत्र में हो सकते हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रोटोकॉल तोडकऱ अपने समकक्ष व मित्र इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से गले मिलकर यहां हवाईअड्डे पर गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया। नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने अपने छह दिवसीय भारत दौरे की शुरुआत रविवार को हवाईअड्डे पर लगे रेड कारपेट अपने कदम रखकर की। मोदी ने आगे बढकऱ इजरायली प्रधानमंत्री को गले लगाया और बाद में नेतन्याहू दंपति से हाथ मिलाकर उनकी अगवानी की।    इन समझौतों पर होंगे हस्ताक्षर साइबर सिक्योरिटी समझौते को लेकर बातचीत हो सकती है। -दोनों देशों के बीच पहली बार तेल और गैस क्षेत्र में निवेश हो सकता है। -इजरायल रिन्यूवेबल एनर्जी में भारतीय कंपनियों को नई तकनीक देने को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। -दोनों देशों के बीच उड्डयन क्षेत्र के विस्तार संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद लगाई जा रही है। -भारत, इजरायल में फिल्मों की शूटिंग को प्रोत्साहन देने को लेकर भी समझौता कर सकता है। -एक-दूसरे के निवेशकों को बढ़ावा देने और सुरक्षा देने का समझौता होगा। -दोनों देशों के बीच हथियारों की खरीदारी को लेकर भी समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।   साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और बिहार राजनीति के महत्वपूर्ण व्यक्तित्व रघुनाथ झा का निधन निधन हो गया है। 78 साल के रघुनाथ झा ने दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल अंतिम सांस ली। वे किडनी की बीमारी से ग्रसित थे और दिल्ली के अस्पताल में इलाज चल रहा था। 1972 में पहली बार विधायक बने स्वर्गीय झा 90 के दशक में बिहार के सर्वाधिक लोकप्रिय और प्रभावशाली नेताओं में से एक थे। माना जाता है कि लालू प्रसाद यादव को बिहार का मुख्यमंत्री बनाए जाने के पीछे भी रघुनाथ झा की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने 1990 में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के लिए चुनाव भी लड़ा था।    उन्होंने 3 सितंबर, 2015 को राष्ट्रीय जनता दल की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। बिहार के कद्दावर नेता रघुनाथ झा का संसदीय जीवन 37 वर्षों का रहा। वे शिवहर से छह बार विधायक रहे, साथ ही गोपालगंज और बेतिया से दो बार सांसद भी रहे। रघुनाथ झा जनता दल के गठन के बाद उसके प्रथम प्रदेश अध्यक्ष के साथ साथ सजपा ओर समता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे थे। शिवहर जिला को अलग पहचान दिलाने का भी श्रेय भी इन्हें जाता है। रघुनाथ झा ने अपनी राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण पद संभाले।    वे बिहार सरकार में डेढ़ दर्जन से अधिक विभागों के मंत्री रहे। इसके अलावा वे केन्द्र में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने भारी उद्योग राज्य मंत्री रहे। साल 2015 में आरजेडी का साथ छोडऩे से पहले रघुनाथ झा ने लालू प्रसाद यावद को चिट्ठी भी लिखी थी। कभी लालू के करीबी माने जाने वाले झा ने उन पर पक्षपात करने का आरोप लगाया था। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था मैं पिछले 25 साल से आपके हर सुख-दुख में साथ रहा।    लेकिन हाल की के दिनों में पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति आपके व्यवहार को देखते हुए और मेरे प्रति उपेक्षा के भाव को देखते हुए मैं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहा हूं। उनकी लिखी इस चिट्ठी ने उस समय काफी सुर्खियां बटोरी थी।  साभार-khaskhabar.com         

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नई दिल्ली। देश के सर्वोच्च न्यायालय विवाद को सुलझाने के लिए आज का दिन अहम साबित हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट कोर्ट के 4 शीर्ष न्यायाधीशों की ओर से सर्वोच्च न्यायालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने से उपजे संकट के बीच प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा बगावती तेवर अपनाने वाले न्यायाधीशों से आज मुलाकात कर सकते हैं। इनमें से दो न्यायाधीशों ने शनिवार को मुद्दा सुलझाने की ओर इशारा भी किया है। बागी तेवर अपनाए चार में से तीन न्यायाधीश राष्ट्रीय राजधानी से बाहर हैं और रविवार दोपहर तक उनके यहां वापस आने की संभावना है।   इस रिपोर्ट की हालांकि कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि न्यायमूर्ति मिश्रा सवाल उठाने वाले चारों न्यायाधीशों से मुलाकात करेंगे। लेकिन न्यायायमूर्ति कुरियन जोसेफ, रंजन गोगोई और महान्यायवादी के के वेणुगोपाल से मिल रहे संकेतों से इस विवाद पर सुलह के आसार नजर आ रहे हैं।   मुकदमों के ‘चुनिंदा’ तरीके से आवंटन और कुछ न्यायिक फैसलों के विरुद्ध चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के खिलाफ एक तरह से बगावत का कदम उठाने वाले सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों में एक न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने भरोसा जताया है कि उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं। उस मुद्दे को कोर्ट के अंदर ही सुलझाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस विवाद को बाहर से सुलझाने की जरूरत नहीं है। हालांकि उन्होंने फिर दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट में सुधार की जरूरत है। केरल में अपने पैतृक घर पहुंचे न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, हम न्याय और न्यायपालिका के पक्ष में खड़े हुए. एक मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया गया है। इस मुद्दे पर ध्यान लाने पर निश्चित तौर पर यह मुद्दा सुलझ जाएगा। न्यायमूर्ति जोसेफ ने बताया कि उनके साथ चार अन्य जजों ने न्यायपालिका में लोगों का भरोसा जीतने के लिए ये काम किया है।   न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने कोच्चि में कहा कि शीर्ष न्यायालय में कोई भी संवैधानिक संकट नहीं है और जो मुद्दे उन लोगों ने उठाए हैं, उनके सुलझने की पूरी संभावना है। न्यायामूर्ति जोसेफ ने कहा, हमने एक उद्देश्य को लेकर ऐसा किया था और मेरे विचार से यह मुद्दा सुलझता दिख रहा है। यह किसी के खिलाफ नहीं था और न ही इसमें हमारा कुछ निजी स्वार्थ था। यह सर्वोच्च न्यायालय में ज्यादा पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से किया गया था। साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। यूपी विधानसभा और सीएम हाउस के बाहर आलू फेंके जाने वाले मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। यूपी पुलिस का दावा है कि आलू फेंकने वाले किसान नहीं बल्कि सामाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता थे। इस मामले में पुलिस ने समाजवादी पार्टी के 2 नेताओं को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को पुलिस ने कन्नौज से गिरफ्तार किया है। यूपी पुलिस के एसएसपी दीपक कुमार ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीते शुक्रवार को लखनऊ में विधानसभा, सीएम आवास और राजभवन के बाहर आलू फेंके गए थे।    इसमें मामले में पुलिस ने दो लोगों को कन्नौज से गिरफ्तार किया है। ये दोनों एसपी कार्यकर्ता अंकित चौहान और गाड़ी का ड्राइवर प्रदीप हैं। साथ ही उन्होंने साफ किया कि किसान यूनियन का पूरे मामले में कोई लेना-देना नहीं था। दीपक कुमार ने कहा हमने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तारी की और मामले का पता लगाया। इसके बाद करीब 10 हजार फोन कॉल्स डिटेल्स की जांच की गई और सामने आया कि आलू फेंकने की साजिश कन्नौज में रची गई थी। इसमें 6 लोग शामिल हैं। ये सभी समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं।   यूपी पुलिस के अनुसार कन्नौज में समाजवादी पार्टी नेता कक्कू चौहान और एक महिला नेता के पति ने ये पूरी प्लानिंग की थी। उन्होंने बताया कि गिरफ्त में लिए गए आरोपियों ने बताया कि उन्हें सरकार को बदनाम करने के लिए कहा था। साथ ही फेंके गए आलू हटिया के कोल्ड स्टोरेज से लाए गए थे जिनके मालिकों की भूमिका की जांच भी की जाएगी। एसएसपी ने यह भी बताया कि सभी आरोपी समाजवादी पार्टी के टिकट से पंचायती चुनाव लड़ चुके हैं। मामले में 2 लोगों को गिरफ्तार करने के अलावा 10 लोगों के खिलाफ हुकुम तहरीरी की गई है।    साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों द्वारा शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंंस कर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाने के बाद अब सुहल की कोशिश तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र शनिवार सुबह चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा से मुलाकात करने के लिए पहुंचे हैं। लेकिन, मिश्रा से मिले बिना ही मिश्र वापस लौट आए।    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र को शनिवार सुबह सीजेआई आवास के बाहर उनकी कार में देखा गया। प्रधान सचिव का एक सहायक सीजेआई के कैंप ऑफिस गया और मिनटों में ही वापस आ गया, इसके बाद नृपेंद्र मिश्र की कार वहां से रवाना हो गई।   बार एसोसिएशन ने बुलाई मीटिंग   जजों के पूरे विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट की बार एसोसिएशन ने भी शनिवार को शाम को 5 बजे मीटिंग बुलाई है। इस बैठक के बाद असोसिएशन की ओर से 4 जजों के बयान के चलते पैदा हुए हालात के बारे में बात करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की जाएगी। शुक्रवार को भी अटर्नी जनरल और सीजेआई ने पूरे विवाद पर मीटिंग कर चर्चा की थी। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा है कि देशवासियों में भ्रम पैदा करना जुडिशियरी के लिए ठीक नहीं है।   अटर्नी जनरल वेणुगोपाल को उम्मीद, जल्द सुलझेगा मामला   इधर, अपने घर से निकलते हुए अटर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने कहा कि उम्मीद है कि पूरा मामला सही ढंग से निपट जाएगा। इससे संकेत मिलता है कि सरकार इस विवाद को निपटाने में सक्रिय भूमिका अदा कर रही है। साभार-khaskhabar.com         

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पालघर। महाराष्ट्र में पालघर जिले के दहानू में शनिवार को बड़ा हादसा हुआ। यहां बच्चों से भरी एक नाव समुद्र में डूब गई। नाव में करीब 40 बच्चे सवार थे। जिनमें से 4 बच्चों की मौत हो गई है। वहीं, 32 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। अभी भी 4 बच्चे लापता बताए जा रहे है। फिलहाल, बचाव और राहत टीम बच्चों को ढूंढने के प्रयास में लगी हुई है।    पुलिस के मुताबिक केएल पोंडा हाईस्कूल के छात्र दहानु में समुद्र तट पर पिकनिक मनाने आए हुए थे। नाव पर वजन ज्यादा होने के कारण नाव पलट गई। हादसे के वक्त नाव में 40 बच्चे सवार थे। कोस्ट गार्ड के पीआरओ के मुताबिक समुद्री कोस्ट गार्ड को खबर मिलते ही उनकी टीम ने दहानु की ओर कूच कर दिया है।   बच्चों को बचाने के लिए कोस्ट गार्ड के शिप्स के अलावा मुंबई से भी कुछ बोट्स भेजी गईं हैं। साथ ही बचाव के लिए दमन से डोर्नियर एयरक्राफ्ट और हेलीकाप्टर को भी राहत और बचाव अभियान में लगा दिया गया है।    साभार-khaskhabar.com     

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