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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद से ही सरकार और संगठन दोनो में बदलाव होने की अटकलें पिछले कई महीने से लगाई जा रही हैं। योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल तो पहले होना था लेकिन निकाय चुनाव की वजह से यह टल गया था। लेकिन भाजपा सूत्रों ने बताया कि मकर संक्रांति के बाद 20 जनवरी तक योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में बदलाव दिखाई दे सकता है। सरकार के बाद संगठन में भी बदलाव होगा और कई जिलाध्यक्षों की छुट्टी होगी एवं कई मोर्चो के अध्यक्ष बदले जा सकते हैं।   दरअसल कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर सरकार, संगठन और आरएसएस के बीच एक समन्वय बैठक हुई थी, जिसमें वरिष्ठ पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबोले और कृष्णगोपाल ने शिरकत की थी वहीं संगठन की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय और दोनों उपमुख्यमंत्री भी उपस्थित थे। भाजपा सूत्रों के अनुसार, समन्वय बैठक में तय हुआ था कि मकर संक्रांति के बाद पहले सरकार की रूपरेखा बदली जाए फिर संगठन का कायाकल्प किया जाए।   सूत्रों के अनुसार, नगर निकाय चुनाव में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन न करने वाले कई जिलाध्यक्षों की छुट्टी होनी तय है। इसके अलावा भाजपा में प्रदेश के सभी मोर्चे के चेहरों में भी बदलाव होने की पूरी संभावना है। पार्टी के एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने बताया, मकर संक्रांति के बाद पहले सरकार में बदलाव होगा। इस बदलाव में कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव होने की पूरी संभावना है। उम्मीद यह भी है कि इस बदलाव में पश्चिम और पूरब का समन्वय बरकरार रखने के लिए एक मंत्री पश्चिमी उप्र से तो एक मंत्री पूर्वांचल से बनाए जाने की पूरी उम्मीद है।   उन्होंने बताया कि सरकार में कई मंत्रियों के विभागों में फेरबदल होने की भी संभावना है। कैबिनेट मंत्री स्वाती सिंह, अनुपमा जायसवाल और धर्मपाल सिंह के विभाग छिन सकते हैं। इनके विभाग नए मंत्रियों को मिलने की संभावना है। लखनऊ से सांसद और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह के मंत्री बनने की संभावना कम ही है। बकौल पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, सरकार में बदलाव के बाद संगठन में भी फेरबदल होगा। कई जिलाध्यक्ष बदले जाएंगे। खासतौर से ऐसे जिलाध्यक्ष सुनील बंसल के रडार पर हैं, जिन्होंने निकाय चुनाव में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक से नही किया। इसके अतिरिक्त मोचरें के अध्यक्ष भी बदले जाएंगे।दरअसल महिला मोर्चे की अध्यक्ष स्वाती सिंह के मंत्री बनने के बाद यह सीट खाली पड़ी है। उनकी जगह नए चेहरे की तलाश हो रही है। भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा का भी अध्यक्ष बदलने की पूरी संभावना है। बहुत संभावना है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े अनिल यादव को इसकी जिम्मेदारी दी जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चाहती है कि लोकसभा के चुनाव से पहले अनिल यादव को अध्यक्ष बनाने से समाजवादी पार्टी के वोट बैंक में सेंधमारी की जा सकती है। लिहाजा पार्टी ने उनको भुनाने की पूरी तैयारी कर ली है।   सूत्रों के मुताबिक, भाजपा की जो नई टीम बनेगी वह सुनील बसंल की पसंद की होगी। बंसल खुद ही चाहते हैं कि पार्टी के वरिष्ठ लोगों का समायोजन सरकार में किया जाए और उप्र में भाजपा की नई पौध तैयार की जाए। इसके लिए वह पिछले एक महीने के भीतर उप्र के कई विभाग प्रचारकों के साथ उनकी बैठकें हो चुकी हैं। इन प्रचारकों ने अपनी तरफ से नाम भी सुझाए हैं जिस पर जल्द अमल होने की पूरी संभावना है। साभार-khaskhabar.com       

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जयपुर/राजकोट। राजस्थान के जयपुर और गुजरात के राजकोट में आग लगने के कारण भीषण हादसे हो गए। राजस्थान के जयपुर में गैस सिलेंडर फटने के बाद लगी भीषण आग में 5 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, गुजरात के राजकोट में कथा शिविर के दौरान लगी आग में तीन बच्चियों की मौत हो गई है। इन हादसे के बाद लोग सदमे में है। वहीं, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।    जयपुर में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत   राजस्थान की राजधानी जयपुर में रसोई गैस सिलिंडर फटने से एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में दादा सहित चार बच्चे शामिल है। हादसा शुक्रवार तडक़े चार बजे विद्यानगर के सेक्टर 9 इलाके में हुआ। जब सिलेंडर में धमाके के बाद आग लगी उस समय परिवार के सभी लोग सो रहे थे। इसी बीच आग ने पूरे घर को घेर लिया और बचने का मौका तक नहीं मिला। इस हादसे में दादा सहित चार पोते-पोतियों की मौत हो गई है। कड़ी मशक्कत के बाद दमकल ने करीब 3 घंटे में आग पर काबू पाया। सीविल डिफेंस की मदद से पुलिस ने शवों को बाहर निकाला और मोर्चरी में रखवाया।    पुलिस के मुताबिक यह हादसा संजीव गर्ग के मकान में हुआ। संजीव गर्ग अपनी पत्नी के साथ घर से बाहर गए हुए थे। घर में दादा पोती समेत करीब आधा दर्जन लोग निवास कर रहे थे। अचानक घर में जबरदस्त विस्फोट हुआ। देखते ही देखते मकान मे भीषण आग लग गई। इस घटना में महेंद्र गर्ग, अर्पिता, अपूर्वा, अनिमेष और सौम्या समेत पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।   गुजरात में तीन बच्चियों की मौत   इधर, गुजरात के राजकोट के उपलेटा में कथा शिविर में आग लगने से 3 बच्चियों की मौत हो गई। वहीं, 15 अन्य बच्चे झुलस गए, जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। यहां उपलेटा के प्रासंला में राष्ट्र कथा शिविर का आयोजन किया गया था जो 6 जनवरी से 13 जनवरी तक चलना था, लेकिन इस दौरान देर रात यह हादसा हो गया। आयोजित किए गए इस कथा शिविर में तकरीबन 15 हजार बच्चियों ने हिस्सा लिया था। इस आयोजन के दौरान अचानक पंडाल में आग लग गई जिसमें जलकर 3 बच्चियों की मौत हो गई और करीब 15 बच्चियां घायल हैं। आपको बता दें कि दो दिन पहले ही इस शिविर में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हिस्सा लिया था और शुक्रवार को टीवी सीरियल शक्तिमान से जाने जाने वाले मुकेश खन्ना भी मौजूद रहे थे। लेकिन शुक्रवार शाम को यहां अचानक आग लग गई जिसके चलते यहां भगदड़ मच गई, यहां मौजूद बाकी बच्चियां तो बाहर सुरक्षित निकल आईं लेकिन 3 बच्चियां इस दौरान जल गईं जिनकी मौत हो गई।      साभार-khaskhabar.com     

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लंदन। भारतीय बैंकों के करीब 9,000 करोड़ रुपये के फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को लंदन में फिर राहत मिली है। विजय माल्या के वकीलों ने भारत की तरफ से पेश किए गए दस्तावेजों की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए बहस की मांग की। बचाव पक्ष की दलील पूरी नहीं होने की वजह से माल्या के प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद जज ने माल्या को 2 अप्रैल तक के लिए जमानत दे दी। प्रत्यर्पण मामले में सुनवाई के लिए कारोबारी माल्या ब्रिटेन की वेस्टमिनिस्टर मैजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश हुए।    माल्या की तरफ से कोर्ट में पेश हुए बचाव पक्ष ने भारत की तरफ से माल्या के खिलाफ पेश किए गए दस्तावेजों पर सवाल उठाए। गुरुवार की सुनवाई माल्या प्रत्यर्पण मामले की आखिरी सुनवाई होने की उम्मीद थी, लेकिन बचाव पक्ष की दलील पूरी नहीं हो पाई। बचाव पक्ष माल्या के खिलाफ भारत सरकार के केस को खारिज करने की मांग कर रहा है।   अदालत में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर रही ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने माल्या के खिलाफ सबूतों के पक्ष में अपनी दलील शुरू की। सीपीएस बचाव पक्ष की उन दलीलों का विरोध कर रही है जिसमें माल्या के खिलाफ मामला बनाने के लिए प्रथमदृष्टया सबूतों की कमी की बात की जा रही है। कोर्ट के सामने पहले के मामले होने की वजह से माल्या के केस में अगली सुनवाई के लिए कोई दूसरी तारीख तय नहीं की जा सकी। इसके बाद माल्या को 2 अप्रैल तक जमानत मिल गई। माल्या केस में अब बचाव और अभियोजन, दोनों पक्ष मिलकर अगले तीन हफ्तों में फिर सुनवाई के लिए एक तारीख तय करेंगे।    लंदन कोर्ट में माल्या के प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई 4 दिसंबर से शुरू हुई है। माल्या मार्च 2016 से ही भारत से फरार हैं। माल्या को अप्रैल, 2017 में एक प्रत्यर्पण वॉरंट पर स्कॉटलैंड यार्ड द्वारा गिरफ्तार किया गया था और 650,000 पाउंड के बॉन्ड जमा करने पर उन्हें जमानत मिल गई। ब्रिटेन की अदालत में माल्या के खिलाफ केस में अगर भारत सरकार को सफलता मिली तो ब्रिटेन के गृह सचिव के पास कारोबारी के प्रत्यर्पण आदेश पर साइन करने के लिए दो महीने होंगे। आपको बता दे कि भारत की राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (फेरा) के नियमों का उल्लंघन करने के मामले में शराब कारोबारी विजय माल्या को भगोड़ा घोषित किया गया है। मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट दीपक सेहरावत ने कहा था यह ध्यान में रखते हुए और तथ्यों के आधार पर विजय माल्या 30 दिनों के भीतर अदालत में उपस्थित नहीं हो पाए और न ही उनकी ओर से कोई प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित हो पाया। इसी के मद्देनजर आरोपी माल्या को भगोड़ा अपराधी घोषित किया जाता है। उन्होंने कहा कि 30 दिन से ज्यादा बीत जाने के बाद भी आरोपी अदालत के समक्ष पेश होने में असफल रहा।   प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने नवंबर 2017 में फेरा नियम के उल्लंघन के मामले में माल्या को भगोड़ा घोषित करने के लिए कार्रवाई शुरू करने का आवेदन दिया था। उल्लेखनीय है कि माल्या ने लंदन और अन्य यूरोपीय देशों में 1996, 1997 और 1998 में होने वाली फॉर्मूला वन वल्र्ड रेसिंग चैम्पियनशिप में किंगफिशर के प्रतीक चिह्न् (लोगो) को प्रदर्शित करने के लिए कथित रूप से ब्रिटेन की एक कंपनी को दो लाख डॉलर की राशि दी थी। निदेशालय ने दावा किया था कि यह राशि कथित रूप से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की सहमति के बिना दी गई, जोकि फेरा नियमों का उल्लंघन है। साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने वाला भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का 100वां सेटेलाइट शुक्रवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च हो गया है। इसरो ने शुक्रवार को अपने अंतरिक्ष केंद्र से 31 उपग्रहों के साथ पीएसएलवी-सी 40 रॉकेट का प्रक्षेपण किया। इन 31 उपग्रहों में से तीन उपग्रह भारत के और 28 अन्य छह देशों के हैं। इसके साथ ही इसरो ने नए साल में नया इतिहास रच दिया है।   44.4 मीटर ऊंचे ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी40) ने 28 घंटों की उल्टी गिनती के बाद शुक्रवार सुबह 9.29 बजे उड़ान भरी। प्रक्षेपण के लगभग 17 मिनट और 18 सेकंड के बाद 320 टन वजनी रॉकेट से एक-एक करके उपग्रह अलग होते जाएंगे और यह उन्हें पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करेगा।   भारत की उपलब्धि पर बौखलाया पाक   भारत की इस उपलब्धि पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत जिन उपग्रहों का प्रक्षेपण कर रहा है, उससे वह दोहरी नीति अपना रहा है। इन उपग्रहों का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य उद्देश्य में किया जा सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि इनका इस्तेमाल सैन्य क्षमताओं के लिए ना किया जाए, अगर ऐसा होता है कि इसका क्षेत्र पर गलत प्रभाव पड़ेगा।    जानें-10 बड़ी बातें   -माइक्रोउपग्रह अंतरिक्ष में भारत का 100वां उपग्रह।    -पीएसएलवी-सी-40 चीन और पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने में माहिर।    -चौथे चरण के पीएसएलवी-सी-40 की ऊंचाई 44.4 मीटर और वजन 320 टन है।    -पीएसएलवी के साथ 1332 किलो वजनी 31 उपग्रह एकीकृत किए गए हैं ताकि उन्हें प्रेक्षपण के बाद पृथ्वी की ऊपरी कक्षा में तैनात किया जा सके।   -पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का काटरेसेट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है।   -इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं।   -कुल 28 अंतर्राष्ट्रीय सह यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं। चार महीने पहले 31 अगस्त 2017 इसी तरह का एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नेविगेशन उपग्रह को वितरित करने में असफल रहा था।    -पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है।   -पीएसएलवी अपने 39वें परियोजना (पीएसएलवी-सी 39) तक बहुत सफल रहा था।    -पीएसएलवी-सी 39 हमारे लिए एक बहुत बड़ा झटका था क्योंकि हीट शील्ड अलग नहीं हो पाए थे।   साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने शुक्रवार को मीडिया के सामने आकर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायधीशों ने शुक्रवार को कहा कि देश के सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन सुचारू रूप से काम नहीं कर रहा है। वरिष्ठता के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में दूसरे नंबर के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर के आवास में बुलाई संवाददाता सम्मेलन में न्यायाधीशों ने कहा, जिस बात से वे दुखी हैं उसकी जानकारी सार्वजनिक करने में उन्हें कोई खुशी नहीं हो रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चारों जजों ने एक चिट्ठी जारी की, जिसमें गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित 7 पन्नों के पत्र में जजों ने कुछ मामलों के असाइनमेंट को लेकर नाराजगी जताई है।   जानें-चिट्ठी में जजों ने क्या लिखा?   चिट्ठी में जजों ने लिखा कि हम बेहद कष्ट के साथ आपके समक्ष यह मुद्दा उठाना चाहते हैं कि अदालत की ओर से दिए गए कुछ फैसलों से न्यायपालिका की पूरी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके अलावा उच्च न्यायालयों की स्वतंत्रता भी प्रभावित हुई है। इसके अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के कामकाज पर भी असर पड़ा है। जजों ने लिखा, स्थापना के समय से ही कोलकाता, बॉम्बे और मद्रास हाई कोर्ट में प्रशासन के नियम और परंपरा तय थे। इन अदालतों के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने विपरीत प्रभाव डाला है, जबकि शीर्ष अदालत की स्थापना तो खुद इन उच्च न्यायालयों के एक सदी के बाद हुई थी।    सामान्य सिद्धांत है कि चीफ जस्टिस के पास रोस्टर तैयार करने का अधिकार होता है और वह तय करते हैं कि कौन सी बेंच और जज किस मामले की सुनवाई करेगी। हालांकि यह देश का न्यायशास्त्र है कि चीफ जस्टिस सभी बराबर के जजों में प्रथम होता है, न ही वह किसी से बड़ा और न ही छोटा होता है।  जजों ने आगे लिखा, ऐसे भी कई मामले हैं, जिनका देश के लिए खासा महत्व है। लेकिन, चीफ जस्टिस ने उन मामलों को तार्किक आधार पर देने की बजाय अपनी पसंद वाली बेंचों को सौंप दिया। इसे किसी भी कीमत पर रोका जाना चाहिए। यह संस्थान की प्रतिष्ठा को हानि न पहुंचे, इसलिए मामलों का जिक्र नहीं कर रहे हैं, लेकिन इसकी वजह से पहले ही न्यायपालिका की संस्था की छवि को नुकसान हो चुका है। साभार-khaskhabar.com         

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पर सनसनीखेज आरोप लगाए जाने के बाद न्यायपालिका से लेकर सरकार तक में हलचल मच गया है। जजों के आरोपों और चिट्ठी के बाद पीएम मोदी ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से फोन बात की है। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक सरकार का मानना है कि उसे इस मामले में दखल देने की जरूरत नहीं है। सरकार का कहना है कि यह शीर्ष अदालत का अंदरुनी मामला है और इसमें सरकार पक्ष नहीं है।   चीफ जस्टिस प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देंगे जवाब   वहीं, पूरे मामले को लेकर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने अटॉर्नी जनरल के.के वेणुगोपाल से मुलाकात कर पूरे मामले पर चर्चा की है। अब चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। उम्मीद है कि वह जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगाई, जस्टिस मदन भीमराव और जस्टिस कुरियन जोसेफ द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दे सकते हैं। उनके साथ अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल भी रहेंगे।   स्वामी ने कहा-मामला गंभीर, पीएम मोदी दें दखल इधर, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि ये बहुत ही गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि जजों का बहुत बलिदान दिए हैं और उनकी नियत पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। उन्होंनेे कहा कि चारों जज बहुत ही ईमानदार है और वो याचिकाकर्ता की बाते जिस तरह से सुनते हैं और फैसला लिखते हैं वह काबिले तारीफ है। जजों की वेदना को समझना चाहिए। स्वामी ने पीएम नरेंद्र मोदी से इस मामले में दखल देने की मांग की है।   उज्जवल ने कहा-न्यायपालिका के लिए काला दिन   वरिष्ठ वकील उज्जवल निकम ने इस पूरे मामले पर कहा कि ये न्यायपालिका के लिए काला दिन है। आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हर कोई न्यायपालिका के फैसले को शक की निगाहों से देखेगा। उन्होंने कहा कि अब से हर फैसले पर सवाल उठने शुरू हो जाएंगे।   साभार-khaskhabar.com       

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना ने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान चला रखा है। ऐसे में बीजेपी के सहयोग से सरकार चला रही पीडीपी के एक विधायक ने आतंकियों को शहीद करार देकर विवाद खड़ा कर दिया है। पीडीपी विधायक एजाज अहमद मीर ने विवादित बयान देते हुए कहा कि कश्मीर के आतंकी शहीद हैं और वे हमारे भाई हैं। इनमें से कुछ तो नाबालिग हैं, जिन्हें यह नहीं पता है कि वह क्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उग्रवादियों की मौत पर हमें जश्न नहीं मनाना चाहिए, वे कश्मीर के ही निवासी हैं।    उन्होंने आगे कहा कि हमें उनकी मौत का जश्न नहीं मनाना चाहिए, यह हमारी सामुहिक असफलता है। हमें तब भी दुख होता है जब हमारे जवान शहीद होते हैं। हमें जवानों के साथ ही आतंकियों के परिवारों के साथ भी सद्भावना रखनी चाहिए। मीर के इस बयान के बाद पीडीपी के साथ बीजेपी के गठबंधन पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और भाजपा गठबंधन की सरकार है। ऐसे में बीजेपी ने एजाज अहमद के बयान से किनारा कर लिया है। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने पीडीपी विधायक के बयान का विरोध करते हुए कहा है कि अलगाववादी और आतंकी कश्मीर के दुश्मन हैं। केंद्रीय मंत्री और सीनियर बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने मीर के बयान पर कहा, आतंकी और अलगाववादी कश्मीर, कश्मीरियों, शांति और विकास के दुश्मन हैं। वे किसी के भाई कैसे हो सकते हैं? जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती कह चुकी हैं कि कश्मीर के लोग अमन चाहते हैं। ऐसे में कोई आतंकी किसी के भाई कैसे हो सकते हैं।   साभार-khaskhabar.com         

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पंचकुला। साध्वियों से रेप के मामले में राम रहीम की सजा के बाद पंचकुला में हुई हिंसा मामले में हनीप्रीति समेत 15 अन्य आरोपियों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर गुरुवार को पंचकुला कोर्ट सुनवाई हुई। लेकिन, आज किसी पर भी आरोप तय नहीं हुए। पंचकुला हिंसा मामले में अब 21 फरवरी को सुनवाई होगी। तब राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत सहित 15 अन्य आरोपियों पर आरोप तय किए जाएंगे। गुरुवार को पंचकुला में दंगा भडक़ाने और देशद्रोह की आरोपी हनीप्रीत इंसा पंचकुला कोर्ट में पेश हुईं। कोर्ट में हनीप्रीत की वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल पर आरोप तय होने से पहले बहस हो।    हनीप्रीत को भारी सुरक्षा के बीच सुनवाई के लिए कोर्ट लाया गया। आपको बता दें कि पिछले साल 25 अगस्त को रेप के दोषी राम रहीम की गिरफ्तारी के बाद पंचकुला में हिंसा भडक़ गई थी। इस हिंसा में 36 लोगों की मौत हुई थी। दंगा फैलाने में के आरोप में हनीप्रीत को गिरफ्तार भी किया गया था। पंचकुला दंगों की पड़ताल में जुटी हरियाणा पुलिस ने कुछ समय पहले हनीप्रीत समेत 15 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। पहले की सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों को इसकी कॉपी सौंप दी गई थी। कुल 1200 पन्ने की इस चार्जशीट में हनीप्रीत समेत 15 अन्य को पंचकुला में दंगों व हिंसा की घटना के लिए आरोपी बनाया गया है। हनीप्रीत के खिलाफ एफआईआर नंबर 345 में चालान पेश किया गया था। इस चार्जशीट में कुल 67 लोगों को गवाह बनाया गया है। आरोप पत्र के तीन पन्नों में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम और डेरे के 6 सुरक्षाकर्मियों का भी जिक्र किया गया है। जिन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है उनमें हनीप्रीत इंसा, उसकी साथी सुखदीप कौर, राकेश कुमार अरोड़ा, सुरेंद्र धीमान इंसा, चमकौर सिंह, दान सिंह, गोविंद राम, प्रदीप गोयल इंसा व खैराती लाल पर कई धाराओं के तहत केस दर्ज है।   साभार-khaskhabar.com         

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नई दिल्ली। अगले बजट में मोदी सरकार मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दे सकती है। मोदी सरकार वर्ष 2018-19 के आगामी आम बजट में सरकार कर छूट सीमा बढ़ाने के साथ साथ कर स्लैब में भी बदलाव कर सकती है। वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा को मौजूदा ढाई लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये किया जा सकता है। हालांकि, छूट सीमा को पांच लाख रुपये तक बढ़ाने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है। आपको बता दें कि साल 2018-19 का आम बजट मोदी सरकार के मौजूदा कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट होगा। इस बजट में सरकार मध्यम वर्ग को, जिसमें ज्यादातर वेतनभोगी तबका आता है, बड़ी राहत देने पर सक्रियता के साथ विचार कर रही है।    सरकार का इरादा है कि इस वर्ग को खुदरा मुद्रास्फीति के प्रभाव से राहत मिलनी चाहिए। सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्री एक फरवरी को पेश होने वाले आगामी बजट में टैक्स स्लैब में व्यापक बदलाव कर सकते हैं। पांच से दस लाख रुपये की सालाना आय को दस प्रतिशत टैक्स दायरे में लाया जा सकता है, जबकि 10 से 20 लाख रुपये की आय पर 20 प्रतिशत और 20 लाख रुपये से अधिक की सालाना आय पर 30 प्रतिशत की दर से कर लगाए जाने की उम्मीद है। उद्योग मंडल सीआईआई ने अपने बजट-पूर्व ज्ञापन में कहा है, मुद्रास्फीति की वजह से जीवनयापन लागत में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में निम्न आय वर्ग को राहत पहुंचाने के लिए आयकर छूट सीमा बढ़ाने के साथ-साथ अन्य स्लैब का फासला भी बढ़ाया जाना चाहिए। उद्योग जगत ने कंपनियों के लिए कंपनी कर की दर को भी 25 प्रतिशत करने की मांग की है। हालांकि, सरकार पर राजकोषीय दबाव को देखते हुए उसके लिए इस मांग को पूरा करना मुश्किल लगता है। जीएसटी लागू होने के बाद सरकार की अप्रत्यक्ष कर वसूली पर दबाव बढ़ा है। इस साल के बजट में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.2 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने के लिए पिछले दिनों ही बाजार से 50,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त उधार उठाया है।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने मंगलवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) को संबोधित करेंगे। वह 1997 के बाद इस प्रतिष्ठित वैश्विक व्यापारिक सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। आशंका जताई जा रही है कि इस दौरान दावोस में पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात भी हो सकती है। वाइट हाउस ने मंगलवार को बताया है कि ट्रंप दावोस में 22 जनवरी से शुरू हो रहे विश्व व्यापार मंच सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं।    वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, डब्ल्यूईएफ 2018 का आयोजन 23 से 26 जनवरी तक होगा। इसमें साठ देशों के शीर्ष नेता व विश्व की प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिस्सा लेंगे। प्रभु ने यहां मीडिया से कहा, प्रधानमंत्री पहली बार डब्ल्यूईएफ में शिरकत करने जा रहे हैं, एक ऐसे समय में जब पूरा विश्व भारत की ओर देख रहा है। उन्होंने कहा, डब्ल्यूईएफ विश्व के व्यापारिक नेताओं और बैंकरों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण सम्मेलन है..एक तरह से यह फैसले लेने का एक वैश्विक मंच है। बीते साल चीन के राष्ट्रपति के यहां आने की काफी चर्चा हुई थी। वाणिज्य मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के मुताबिक, मोदी 23 जनवरी को डब्ल्यूईएफ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। इसके अलावा कई भारतीय मंत्री महत्वपूर्ण सामूहिक चर्चाओं में हिस्सा लेंगे। इनमें प्रभु के अलावा वित्त मंत्री अरुण जेटली, रेल मंत्री पीयूष गोयल, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेद्र प्रधान, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और विदेश राज्य मंत्री एम.जे.अकबर शामिल हैं।   प्रभु ने बताया कि इनके साथ आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू व देवेंद्र फडणवीस भी सम्मेलन में शामिल होंगे। औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के सचिव रमेश अभिषेक ने बताया कि मोदी दावोस में इंटरनेशनल बिजनेस कौंसिल में शीर्ष व्यापारिक नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस कौंसिल में खास बहुराष्ट्रीय कंपनियों के 120 शीर्ष अधिकारी शामिल हैं। साभार-khaskhabar.com       

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कुपवाड़ा। भारतीय सेना ने कश्मीर में आतंक के खात्मे के लिए ऑल आउट ऑपरेशन चला रखा है। इसके बावजूद रोजाना आतंकी संगठनों से कुछ नए लोगों से जुडी बाते सामने आ रही है। अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले मनन वानी की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर डाली है। वानी के हाथ में एके-47 है। माना जा रहा है कि वानी ने हिजबूल मजाहिद्दीन ज्वाइन कर ली है।  मनन वानी कुपवाड़ा जिले के लोलाब का रहने वाला है। वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में जियोलॉजी में पीएचडी कर रहा था। 26 साल का वानी तीन दिन पहले घर आने वाला था। लेकिन उसने घर पर कोई खबर नहीं दी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो वानी पिछले पांच साल से एएमयू में रह रहा था, वहां उसने एमफिल की डिग्री भी ली। रविवार को ही वानी के परिवार की तरफ से गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने तलाश शुरू की। आपको बता दें कि अभी हाल ही में कश्मीर के ही एक कॉलेज छात्र और फुटबॉल खिलाड़ी माजिद अरशिद खान ने भी इसी तरह आतंकी संगठन ज्वाइन कर लिया था। माजिद खूंखार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ जुड़ा था। हालांकि, अपनी मां की अपील के बाद माजिद ने आतंकी संगठन को छोड़ दिया और घर वापसी आ गया था। साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। भारत-म्यांमार सीमा के आसपास के क्षेत्र में रविवार दोपहर भूकंप के झटके से मणिपुर थरथरा उठा। रिक्टर पैमाने पर भूंकप की तीव्रता छह मापी गई। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, भूकंप पृथ्वी की सतह से 35 किलोमीटर नीचे उत्पन्न हुआ। भूकंप के झटके दोपहर 12:17 पर महसूस किए गए।   भूकंप का मुख्य केंद्र 24.7 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 94.7 डिग्री पूर्वी स्थित म्यांमार-भारत (मणिपुर) सीमा क्षेत्र था।   अधिकारी ने कहा, "हमें मणिपुर के अलग अलग हिस्सों से लोगों द्वारा भूकंप के झटकों की जानकारी हासिल करने के लिए फोन आए। हालांकि वास्तव में भूकंप का केंद्र मणिपुर नहीं था लेकिन यह भारत-म्यांमार सीमा के पास उत्पन्न हुआ था।"   अधिकारी ने आगे कहा, "किसी के भी हताहत होने और संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है।"   साभार-khaskhabar.com       

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