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अंतरिक्ष में इसरो का शतक, एक साथ छोड़े 31 उपग्रह, जानें-10 बड़ी बातें

अंतरिक्ष में इसरो का शतक, एक साथ छोड़े 31 उपग्रह, जानें-10 बड़ी बातेंनई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने वाला भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का 100वां सेटेलाइट शुक्रवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च हो गया है। इसरो ने शुक्रवार को अपने अंतरिक्ष केंद्र से 31 उपग्रहों के साथ पीएसएलवी-सी 40 रॉकेट का प्रक्षेपण किया। इन 31 उपग्रहों में से तीन उपग्रह भारत के और 28 अन्य छह देशों के हैं। इसके साथ ही इसरो ने नए साल में नया इतिहास रच दिया है।

 

44.4 मीटर ऊंचे ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी40) ने 28 घंटों की उल्टी गिनती के बाद शुक्रवार सुबह 9.29 बजे उड़ान भरी। प्रक्षेपण के लगभग 17 मिनट और 18 सेकंड के बाद 320 टन वजनी रॉकेट से एक-एक करके उपग्रह अलग होते जाएंगे और यह उन्हें पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करेगा।

 

भारत की उपलब्धि पर बौखलाया पाक

 

भारत की इस उपलब्धि पर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत जिन उपग्रहों का प्रक्षेपण कर रहा है, उससे वह दोहरी नीति अपना रहा है। इन उपग्रहों का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य उद्देश्य में किया जा सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि इनका इस्तेमाल सैन्य क्षमताओं के लिए ना किया जाए, अगर ऐसा होता है कि इसका क्षेत्र पर गलत प्रभाव पड़ेगा। 

 

जानें-10 बड़ी बातें

 

-माइक्रोउपग्रह अंतरिक्ष में भारत का 100वां उपग्रह। 

 

-पीएसएलवी-सी-40 चीन और पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने में माहिर। 

 

-चौथे चरण के पीएसएलवी-सी-40 की ऊंचाई 44.4 मीटर और वजन 320 टन है। 

 

-पीएसएलवी के साथ 1332 किलो वजनी 31 उपग्रह एकीकृत किए गए हैं ताकि उन्हें प्रेक्षपण के बाद पृथ्वी की ऊपरी कक्षा में तैनात किया जा सके।

 

-पृथ्वी अवलोकन के लिए 710 किलोग्राम का काटरेसेट-2 सीरीज मिशन का प्राथमिक उपग्रह है।

 

-इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं।

 

-कुल 28 अंतर्राष्ट्रीय सह यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं।

चार महीने पहले 31 अगस्त 2017 इसी तरह का एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नेविगेशन उपग्रह को वितरित करने में असफल रहा था। 

 

-पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है।

 

-पीएसएलवी अपने 39वें परियोजना (पीएसएलवी-सी 39) तक बहुत सफल रहा था। 

 

-पीएसएलवी-सी 39 हमारे लिए एक बहुत बड़ा झटका था क्योंकि हीट शील्ड अलग नहीं हो पाए थे।

 

साभार-khaskhabar.com 

 

 

 

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