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भोपाल। ग्वालियर| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्यप्रदेश के टेकनपुर में प्रदेशों एवं केंद्रीय पुलिस संगठनों के पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक स्तर के अधिकारियों के चल रहे तीन दिवसीय सम्मेलन में शिरकत करने रविवार को ग्वालियर पहुंचे। भोपाल पुलिस नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री सुबह नौ बजे वायुसेना के विशेष विमान से महाराजपुरा एयर बेस पहुंचे, जहां उनकी अगवानी राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, मंत्री नरोत्तम मिश्रा, महापौर विवेक शेजवलकर सहित अन्य ने अगवानी की। प्रधानमंत्री यहां से टेकनपुर के लिए रवाना होंगे।   प्रधानमंत्री टेकनपुर में प्रदेशों व केंद्रीय पुलिस संगठनों के पुलिस महानिदेशक व पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारियों के शनिवार से शुरू हुए तीन दिवसीय सम्मेलन में शिरकत करने आए हैं। वह दो दिन यहां रहने वाले हैं।   इससे पहले प्रधानमंत्री ने ऐसे ही सम्मेलन को 2014 में गुवाहाटी, 2015 में गुजरात के कच्छ के रण स्थित धोर्दो और 2018 में हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पुलिस अकादमी को संबोधित किया था।   प्रधानमंत्री पुलिस बल के लिए खास तौर से प्रौद्योगिकी और मानवीय इंटरफेस का जिक्र करते हुए नेतृत्व की अहमियत, व्यवहार कुशलता और सामूहिक प्रशिक्षण पर विशेष बल देते रहे हैं।   राष्ट्रीय राजधानी से बाहर सालाना डीजीपी सम्मेलन का आयोजन प्रधानमंत्री के उस दर्शन के अनुसार हो रहा है जिसमें वह कहते हैं कि ऐसे सम्मेलन न सिर्फ दिल्ली में बल्कि देशभर में आयोजित होने चाहिए।मध्यप्रदेश के टेकनपुर स्थित सीमा सुरक्षा बल अकादमी में आयोजित सम्मेलन के दौरान शनिवार को देशभर से पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा से जुड़े मुद्दों, साइबर आतंकवाद, सोशल मीडिया का प्रभाव, सीमापार आतंकवाद, युवाओं के अतिवादी बनने के अलावा अन्य मुद्दों पर चर्चा की।   गृहमंत्री राजनाथ सिंह, राज्यमंत्री हंसराज अहीर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और गृह सचिव राजीव गौवा शनिवार को ही टेकनपुर पहुंच चुके हैं। सम्मेलन में भाग के लिए 205 वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहुंचे हैं। साभार-khaskhabar.com           

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रांची। चारा घोटाले के दूसरे मामले में सीबीआई की विशेषय अदालत ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को 3.5 साल की सजा सुनाई गई है। आपको बता दें कि 23 दिसंबर से लालू बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं, मगर सजा का ऐलान नहीं होने के कारण जेल में उन्हें क्या काम करना है इसकी जानकारी नहीं थी।   मगर अब सजा का ऐलान होने के बाद लालू को जेल में माली का काम मिला है और वो अब रोजाना 93 रुपये कमाएंगे। उधर, लालू यादव को सोमवार को हजारीबाग की ओपन जेल में शिफ्ट किया जाएगा। उन्हें अपनी सजा यहीं बितानी होगी। इधर राष्ट्रीय जनता दल अपने नेता की जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है। आपको बता दें कि शनिवार को सजा मिलने के बाद लालू को कोर्ट से जमानत नहीं मिली। सीबीआई जज शिशुपाल सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लालू को सजा सुनाई और 5 लाख का जुर्माना भी ठोंका।   लालू जेल जाने के बाद अपने समर्थकों को ट्विटर के जरिए संदेश देते रहे हैं। जेल जाने के बाद लालू ने ट्वीट किया था, प्रिय साथियों, कारागार प्रवास के दौरान मेरे ट्विटर हैंडल का संचालन मेरा कार्यालय और परिवार के सदस्य करेंगे। समय-समय पर मुलाकातियों के मार्फत कार्यालय को संदेश पहुंचेगा, जो आपके पास ट्विटर या अन्य विधा से पहुंच जाएगा। संगठित रहिए, सचेत रहिए।   साभार-khaskhabar.com         

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नई दिल्ली। आम आमी पार्टी में राज्यसभा टिकट बंटवारे को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है। ओखला सेआम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान का एक ट्वीट सियासी ड्रामा से फिल्म रूप लेता दिख रहा है। अमानतुल्ला ने फिल्मी अंदाज में तंज करते हुए लिखा है कि फुके हुए कारतूस भी आजकल खूद को बाहुबली कहते है। माना जा रहा है कि ये ट्वीट कुमार विश्वास के लिए किया गया है।    आपको बता दें कि दोनों के बीच पिछले कुछ समय से काफी खींचतान चल रही है। सावज़्जनिक तौर पर दोनों नेता एक दूसरे की आलोचना करते नजर आए थे। जिसके बाद अब राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर कुमार विश्वास का पत्ता कट जाने के बाद अमानतुल्ला ने इस ट्वीट के जरिए प्रतिक्रिया दी है।ज्ञात रहे कि शुक्रवार को कुमार विश्वास ने पार्टी तोडऩे के आरोपों पर पलटवार किया था। विश्वास ने चुप्पी तोड़ते हुए दिल्ली के संयोजक गोपाल राय की तुलना कुंभकर्ण और फिल्म बाहुबली के कट्टपा से की थी। हालांकि, विश्वास ने ये भी कहा था कि इस माहिष्मती की शिवगामी कोई और है। आपको बता दें कि आम आदमी पाटीज़् ने राज्यसभा के लिए तीन उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। उम्मीद जताई जा रही थी कि संजय सिंह के अलावा कुमार विश्वास और आशुतोष के रूप में तीन सदस्य राज्यसभा भेजे जाएंगे। हालांकि, पार्टी पीएसी की बैठक में इन दोनों नामों पर चर्चा तक नहीं की गई। साभार-khaskhabar.com       

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर इलाके में हुए आतंकी हमले की 4 पुलिसकर्मी शहीद हो गए। वहीं, दो जवान घायल हो गए है, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।  जानकारी के मुताबिक यह हादसा बारामूला जिले के सोपोर इलाके में शनिवार सुबह हुआ।    आतंकवादियों ने पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर आईईडी ब्लास्ट किया। इस हमले में चार पुलिसकर्मी शहीद हो गए। इस हादसे में दो अन्य पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए श्रीनगर लाया जा रहा है। घटना के बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के तमाम जवान मौके पर पहुंचे हैं। सेना और पुलिस की टीमों द्वारा सोपोर समेत उत्तरी कश्मीर के कई इलाकों में गहन तलाशी अभियान भी शुरू किया गया है।   साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी में राज्यसभा टिकट के बंटवारे के बाद पार्टी में अविश्वास बढ़ता ही जा रहा है। एक ओर पार्टी के वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास की नाराजगी की खबरें है, तो दूसरी ओर अब पार्टी की दिवंगत कार्यकर्ता संतोष कोली की मां कलावती कोली भी राज्यसभा के लिए मैदान में उतर आई हैं। दिल्ली सरकार में पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने शुक्रवार को ट्वीट कर यह जानकारी दी। मिश्रा ने ट्वीट किया शहीद संतोष कोली की मां कलावती कोली शुक्रवार को सुबह 11.30 बजे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर अपने नॉमिनेशन के लिए समर्थन मांगने जाएंगी। मिश्रा ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, कलावती कोली ने आम आदमी पार्टी के सभी विधायकों से समर्थन के लिए अपील की है।    कलावती अरविंद केजरीवाल से मिलकर हर विधायक को निजी तौर पर समर्थन के लिए फोन करेगी। इससे पहले कपिल मिश्रा ने एक और ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने कलावती कोली और सुशील गुप्ता की तस्वीर लगाकर पूछा कि इनमें किसको राज्यसभा जाना चाहिए? उन्होंने आप की पीएसी और सभी विधायकों से अपील करते हुए कलावती कोली के लिए समर्थन मांगा। कपिल ने कहा कि कलावती कोली के पास एक सिर्फ एक कमी है, उनके पास पैसा नहीं है। गुरुवार को एक ट्वीट करते हुए कपिल मिश्रा ने कहा था कि शहीद संतोष कोली की मां को याद रखिए, अरविंद केजरीवाल ने कई सालों तक इनका नमक खाया है। आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी की ओर से केजरीवाल की अगुवाई में पीएसी ने तीन लोगों को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। इनमें आप नेता संजय सिंह, सीए सुशील गुप्ता और एनडी गुप्ता शामिल हैं। लेकिन, सुशील गुप्ता का नाम आने और कुमार विश्वास का पत्ता कटने के बाद पार्टी में विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर पार्टी के ही लोग सुशील गुप्ता का विरोध कर रहे है। वहीं, खुद का नाम कटने के बाद कुमार विश्वास भी खुलकर केजरीवाल के सामने खड़े हो गए है। लेकिन, अब राज्यसभा के लिए आम आदमी पार्टी का चौथा उम्मीदवार मैदान में आ गया है। इसके बाद विवाद बढऩा संभव है।   साभार-khaskhabar.com       

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मुंबई। महाराष्ट्र में भडक़ी हिंसा की आग ठंडी पड़ गई है। लेकिन, इस पर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है। महाराष्ट्र बंद बुलाने वाले दलित नेता प्रकाश अंबेडकर ने एक बार फिर महाराष्ट्र सरकार से अपील की है कि जल्द से जल्द संभाजी भिड़े को अरेस्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि दलितों का गुस्सा तब तक शांत नहीं होगा, जब तक संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोते को अरेस्ट नहीं किया जाएगा। इसी बीच हिंसा के आरोपी संभाजी भिड़े ने पहली बार मीडिया के सामने आकर सफाई दी है। संभाजी ने कहा है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप गलत हैं। साथ ही उन्होंने हिंसा फैलाने की घटना को राजनीतिक साजिश करार दिया है।    संभाजी भिडे ने कहा कि मुझे फंसाया जा रहा है। मैंने हिंसा फैलाई यह बेकार की बाते हैं। मैं समाज को तोडऩे का काम नहीं करता हूं। उन्होंने कहा कि मैं घटना वाले दिन वहां मौजूद नहीं था, फिर क्यों मुझ पर आरोप लगाए जा रहे है। भिडे ने कहा कि कुछ लोग मेरा नाम इस मामले में डालकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं।   संभाजी ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण पर समंतक मणि चुराने के आरोप लगे थे, उसी तरह मुझ पर भी आरोप लग रहे हैं। मेरा इस मामले से कुछ भी लेना देना नहीं है। यह देश के वातावरण को बिगाडऩे के लिए रची गई साजिश है। मुझ पर वधु गांव में जाकर सभा लेने की बात उतनी ही झूठी है, जैसे किसी को अमावस में चांद दिखा हो। संभाजी भिड़े हिंदूत्व का बड़ा चेहरा है। कभी पीएम मोदी ने संभाजी को परम आदरणीय और गुरुजी कहा था। इन पर हिंसा भडक़ाने के आरोप में केस दर्ज हुआ है। माथे पर लंबा टीका और मराठी टोपी और तीखा भाषण इनकी पहचान है। संभाजी भिड़े की सख्शियत ऐसी है कि उनके एक हुक्म पर लाखों युवा एकत्रित हो जाते हैं। पीएम मोदी भिडे का बहुत सम्मान करते हैं। मोदी उनके संगठन शिव प्रतिष्ठान के कार्यक्रमों में जा चुके हैं। संभाजी भिड़े महाराष्ट्र के जाने-माने नेता हैं। वह महाराष्ट्र के सांगली जिले के रहने वाले हैं। भिडे कोल्हापुर में शिव प्रतिष्ठान नाम का संगठन चलाते हैं और मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी के अनुयायी हैं।   साभार-khaskhabar.com         

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नई दिल्ली। भारतीय सीमा पर चीन घुसपैठ करने की हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पिछले हफ्ते चीनी सडक़ निर्माण दल के कर्मी अरुणाचल प्रदेश के तूतिंग क्षेत्र में एक किलोमीटर तक घुस आए थे। हालांकि, भारतीय सैनिकों के विरोध करने पर उन्हें वापस लौटना पड़ा। सरकारी सूत्रों ने बताया कि असैन्य दल सडक़ निर्माण से जुड़ी गतिविधियों के लिए आए थे, लेकिन भारतीय सैनिकों के विरोध करने पर खुदाई करने वाले कई उपकरण वहीं छोडक़र लौट गए। अरुणाचल प्रदेश के स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक चीनी दल में सैनिकों के साथ असैन्य लोग भी थे। यह घटना 28 दिसंबर की बताई जा रही है।    जानकारी के मुताबिक जब भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने चीनी लोगों को कंस्ट्रक्शन का काम रोकने के लिए कहा, तब चीनियों ने कहा कि हम अपने इलाके में यह काम कर रहे हैं। भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने जब सबूत पेश किए तो वे वापस चले गए, लेकिन अपने साथ लाई गई खुदाई की दो मशीनें रहस्यमय ढंग से भारतीय इलाके में ही छोड़ गए। भारत ने चीनी पक्ष को संदेश भेजा है कि वे अपनी मशीनें ले जाएं। सूत्रों का कहना है कि मामले को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच उपलब्ध मौजूदा व्यवस्था के तहत संपर्क किया गया है। सीमावर्ती इलाके में सडक़ बनाने के लिए चार स्टेज पर काम होता है - सर्वे, अलाइनमेंट, फॉर्मेशन और कारपेटिंग। सर्वे के तहत सडक़ बनाने के लिए इलाके का जायजा लिया जाता है।    तूतिंग में सर्वे का काम चीनियों ने कब किया, इसका पता सुरक्षा एजेंसियों को नहीं चल सका। जब भारतीय सैनिक वहां पहुंचे तो करीब एक किलोमीटर तक अलाइनमेंट का काम हो चुका था। अलाइनमेंट के तहत सडक़ की दिशा तय कर ली जाती है। फॉर्मेशन के तहत मशीनों से खुदाई की जाती है। करीब 400 मीटर तक फॉर्मेशन का काम भी पूरा हो चुका था। भारत की ओर से भी इस इलाके में सडक़ बनाने पर काम किया जा रहा है। चीनी सैनिकों की चौकी मौके से करीब डेढ़ किलोमीटर पीछे हैं। चीनी सैनिकों की चौकी तक पक्की सडक़ है और वे उसके आगे सडक़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।   चीन ने अरुणाचल प्रदेश के अस्तित्व को नकारा   हालांकि, चीन ने बुधवार कहा कि उसे कथित तौर दिसंबर में अरुणाचल प्रदेश में अपने सैनिकों की घुसपैठ के बारे में जानकारी नहीं है। इसके साथ ही उसने कहा कि भारत के पूर्वोत्तर में तथाकथित राज्य है ही नहीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, सबसे पहले भारत के साथ सीमा मुद्दे पर चीन का रुख स्पष्ट व एक जैसा रहा है। हमने तथाकथित अरुणाचल प्रदेश के अस्तित्व को कभी स्वीकार नहीं किया।    उन्होंने कहा, आप जिस विशेष स्थिति का उल्लेख कर रहे हैं, मुझे इसकी जानकारी नहीं है। गेंग ने कहा, मैं उल्लेख करना चाहता हूं कि चीन व भात के बीच सीमा से जुड़े मामलों के लिए सुव्यवस्थित प्रणाली है। इस प्रणाली के जरिए चीन व भारत सीमा संबंधित अपने मामलों का प्रबंधन कर सकते हैं। उन्होंने कहा, सीमावर्ती इलाकों में शांति व स्थिरता चीन व भारत दोनों के हित में है।   डोकलाम विवाद थमने के बाद पहली घटना चीन भारत के अरुणाचल प्रदेश को अपना बताता है और इसे दक्षिण तिब्बत कहता है। यह पूर्वोत्तर राज्य 3,448 किमी लंबी अचिन्हित भारत-चीन सीमा के पूर्वी सेक्टर में स्थित है। बीते साल चीन व भारत के बीच सिक्किम क्षेत्र के डोकलाम में विवाद की वजह से दोनों देशों की सेनाएं दो महीने तक आमने-सामने रहीं। इस संकट का समाधान अगस्त में किया गया और दोनों पक्षों ने दिसंबर में 20 दौर की वार्ता की और विवादित सीमा पर शांति व स्थिरता बनाए रखने की बात कही। साभार-khaskhabar.com       

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मुंबई। पुणे के भीमा-कोरेगांव से शुरू हुई हिंसा की आग महाराष्ट्र से गुजरात तक जा पहुंच है। लेकिन, पुणे हिंसा के पीछे किसका हाथ है। इसके लिए पुलिस जांच में जुटी हुई है। सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जाहिर की है कि पुणे के भीमा-कोरेगांव में दलित संगठनों के आंदोलन के पीछे शहरी नक्सल काडर का हाथ है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक नक्सलियों ने भीमा-कोरेगांव में प्रदर्शन और सेमिनार का आयोजन इसलिए रखा ताकि इससे विवाद पैदा हो और उसके बाद पूरे महाराष्ट्र में दलितों का आंदोलन फैल जाए। भीमा-कोरेगांव की हिंसा से ठीक एक दिन पहले मुंबई में नक्सल फ्रंट ऑर्गनाइजेशंस की मीटिंग यलगर परिषद के सीज किए दस्तावेजों के आधार पर एजेंसियों ने यह निष्कर्ष निकाला है।   इधर, दलित समाज संभाजी भिडे और मिलिंद एकबोटे की गिरफ्तारी और हत्या का मुकदमा चलाने की मांग कर रहा है। पुलिस पर एकबोटे और संभाजी भिड़े दोनों को गिरफ्तार करने का दबाव है लेकिन अब तक पुलिस के हाथ खाली हैं। दलित समाज की मानें तो हिंसा के पहले आरोपी संभाजी भिडे हैं, जो इलाके में हिंदुत्व का बहुत बड़ा चेहरा है और दूसरे आरोपी मिलिंद एकबोटे हैं, हिंदू एकता मोर्चा नाम का संगठन चलाते हैं।    आईये जानते है संभाजी और मिलिंद के बारे में   संभाजी भिड़े: संभाजी भिड़े हिंदूत्व का बड़ा चेहरा है। कभी पीएम मोदी ने संभाजी को परम आदरणीय और गुरुजी कहा था। इन पर हिंसा भडक़ाने के आरोप में केस दर्ज हुआ है। माथे पर लंबा टीका और मराठी टोपी और तीखा भाषण इनकी पहचान है। संभाजी भिड़े की सख्शियत ऐसी है कि उनके एक हुक्म पर लाखों युवा एकत्रित हो जाते हैं। पीएम मोदी भिडे का बहुत सम्मान करते हैं। मोदी उनके संगठन शिव प्रतिष्ठान के कार्यक्रमों में जा चुके हैं। संभाजी भिड़े महाराष्ट्र के जाने-माने नेता हैं। वह महाराष्ट्र के सांगली जिले के रहने वाले हैं। भिडे कोल्हापुर में शिव प्रतिष्ठान नाम का संगठन चलाते हैं और मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी के अनुयायी हैं। मिलिंद एकबोटे: मिलिंद एकबोटे पर भी केस दर्ज हुआ है। आरोप है कि मिलिंद एकबोटे के कार्यकर्ताओं ने भीमाकोरे गांव जा रहे दलितों से हिंसा की। मिलिंद एकबोटे हिंदू एकता मोर्चा नाम का संगठन चलाते हैं। 56 साल के मिलिंद एकबोटे गोरक्षा अभियान चलाने के लिए जाने जाते हैं। बीजेपी से 1997 से 2002 तक पुणे के पार्षद रह चुके हैं। इनका पूरा परिवार आएसएस से जुड़ा हुआ है। साल 2014 में मिलिंद एकबोटे ने शिवसेना के टिकट पर विधायक का चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे। एकबोटे पर दंगा फैलाने, धमकी देने समेत 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं। 5 मामलों में मिलिंद एकबोटे को दोषी करार दिया जा चुका है। साभार-khaskhabar.com         

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मुंबई/पुणे। महाराष्ट्र में पुणे के भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के विरोध में आज कई दलित संगठनों ने महाराष्ट्र बंद का ऐलान किया है। महाराष्ट्र बंद का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। ठाणे रेलवे स्टेशन में आंदोलनकारियों ने ट्रेन रोककर प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र बंद से भागती-दौडती मुंबई की रफ्तार भी थम गई है। यहां के प्रसिद्ध डब्बावाला असोसिएशन ने अपनी सेवा रद्द कर दी है। मुंबई और आसपास के इलाकों में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बीच मुंबई पुलिस के पीआरओ ने जानकारी दी है कि राज्य में विभिन्न जगहों से 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।       लाइव अपडेट्स -- - चंद्रपुर के बल्लारपुर में बसों में तोड-फोड की गई।  - औरंगाबाद में इंटरनेट सर्विस रोकी गई। - पुणे में कई स्कूल बंद हैं। क्लास नहीं चलेंगी हालांकि स्टाफ और टीचर्स को स्कूल आने को कहा गया है। - मुंबई पुलिस ने हिंसा मामले में 9 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया, 100 से अधिक को हिरासत में लिया। - पालघर में बस सेवा पूरी तरह से ठप हुई, पालघर रेलवे स्टेशन की कैंटीन भी बंद।  - रेलवे का बयान, ट्रेन को रोकने की कोशिश नाकाम की गई। - ईस्टर्न एक्सप्रेस-वे पर पुलिस की भारी तैनाती। - ठाणे के पास प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोकी। - ठाणे इलाके में चार जनवरी की रात तक धारा 144 लागू।       लोकल ट्रेन से लेकर स्कूल और हाइवे बंद- 63 साल के प्रकाश अंबेडकर ने कहा कि 250 से अधिक दलित संगठनों का इस बंद को समर्थन है। बंद को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कई इलाकों में एहतियातन धारा 144 लगा दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आज पूरे महाराष्ट्र में लोकल ट्रेन से लेकर स्कूल और हाइवे बंद रहेंगे। मराहाष्ट्र बंद होने से राज्य की 40 हजार बसें नहीं चलेंगी और पुणे हाईवे भी बंद रहेगा।   सीएम फडनवीस ने दिए जांच के आदेश- पुणे की जातीय हिंसा पर महाराष्ट्र सीएम ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सरकार को बदनाम करने की साजिश है। सरकार ने इसके न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। सीएम देवेंद्र फडनवीस ने मृतक के परिजनों को 10 लाख का मुआवजा देने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर करीब तीन लाख लोग आए थे। हमने पुलिस की 6 कंपनियां तैनात की थी। कुछ लोगों ने माहौल बिगाडऩे के लिए हिंसा फैलाई। इस तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।   केंद्रीय मंत्री ने की महाराष्ट्र सीएम से बात- उधर, भीमा-गांव हिंसा की दलित नेता और केन्द्रीय मंत्री रामदास अठावले कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के सीएम से बात की है। अठावलने ने कहा कि उन्होंने सीएम से जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है ताकि इस तरह की घटना दोबारा ना हो। शरद पवार ने पूछा-घटना के पीछे कौन- इस घटना पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। शरद पवार का कहना है कि घटना के पीछे कौन लोग हैं इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने आगे यह भी कहा कि शौर्य दिवस के 200 साल पूरे होने पर अधिक लोगों को इक_ा होने की संभावना पहले से थी इसलिए प्रशासन को इस पर नजर रखनी चाहिए थी।   ये है पूरा मामला- बता दें कि 1 जनवरी 1818 के दिन अंग्रेजों और पेशवा बाजीराव द्वितीय के बीच कोरेगांव भीमा में युद्ध हुआ था जिसमें पेशवा को अंग्रेजों से पटखनी मिली थी। इसमें कुछ संख्या में दलित भी शामिल थे। इस घटना के इस बार 200 साल पूरे होने पर नए साल के मौके पर पुणे के कोरेगांव भीमा गांव में शौर्य दिवस मनाया गया था जिसके बाद से दो समुदायों के बीच झड़प हो गई थी। इस दौरान एक शख्स की मौत भी हो गई थी। जिसके बाद पुणे हिंसा की आग दूसरे इलाकों तक जा पहुंची। साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। तीन तलाक बिल आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा और सरकार इस पर बहस भी कराएगी। विपक्षी दलों के कडे तेवर के बीच ट्रिपल तलाक को राज्यसभा में पेश करना मोदी सरकार के लिए बडी चुनौती है। इससे पहले यह बिल मंगलवार को सदन में पेश किया जाना था लेकिन विपक्षी दलों के कड़े तेवर को देखते हुए इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया था।   मोदी सरकार ने इस बिल पर कांग्रेस समेत अन्य दलों से बातचीत के बाद ही राज्यसभा में पेश करने की योजना बनाई है। संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने एक बयान में कहा था, ट्रिपल तलाक बिल पर हम कांग्रेस समेत अन्य दलों से बात कर रहे हैं। उम्मीद है कि आसानी से राज्यसभा में पास होगा। बुधवार यह पेश हो सकता है।   मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) बिल 2017 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कडग़म और अन्य वामदलों ने सिलेक्ट कमेटी को भेजे जाने की मांग की है।इस मामले में डीएमके नेता कनिमोझी ने कहा है, तीन तलाक बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना चाहिए। वहीं एनसीपी नेता माजीद मेमन ने ट्रिपल तलाक बिल पर कहा, हमारी पार्टी ट्रिपल तलाक को अपराध बनाने के खिलाफ है, आप तलाक देने पर तीन साल सजा नहीं दे सकते हैं। सीपीआई नेता डी राजा ने ट्रिपल तलाक पर कहा कि लेफ्ट पार्टी बिल को राज्यसभा की प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की जाएगी।   आपको बता दें कि कांग्रेस व कुछ अन्य दलों ने लोकसभा में मांग की थी कि विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजा जाए लेकिन सरकार ने इस मांग को ठुकरा दिया था। विपक्ष द्वारा विधेयक में सुझाए गए संशोधनों को भी खारिज कर दिया गया था।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। एक साथ तीन तलाक को अपराध ठहराने वाला बिल बुधवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। इस बिल को लोकसभा में पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद बुधवार को राज्यसभा में तीन तलाक बिल को पेश करेंगे। हालांकि, पहले मीडिया में खबरें आई कि मंगलवार को राज्यसभा में तीन तलाक बिल पास किया जाएगा। लेकिन, अब साफ हो चुका है कि बुधवार को यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा। वहीं, विपक्षी दलों ने आज तीन तलाक पर बहस के लिए मीटिंग बुलाई है।    इधर, बीजेपी ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी कर दिया है और सभी बीजेपी सांसदों को मंगलवार और बुधवार को संसद में रहने के लिए कहा है। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने मंगलवार को कहा कि तीन तलाक बिल राज्यसभा में बुधवार को पेश हो सकता है। उन्होंने कहा कि वह राज्यसभा से ट्रिपल तलाक बिल पास कराने के लिए कांग्रेस सहित दूसरी पार्टियों के साथ संपर्क में है।    सीपीआई नेता डी राजा ने कहा कि हमारी मांग है कि तीन तलाक बिल को राज्यसभा की चयन समिति को भेजना चाहिए। मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जिस तरह से लोकसभा में तीन तलाक बिल पास हुआ उम्मीद है कि राज्य सभा में भी चर्चा के बाद पास हो जाएगा। कांग्रेस को मदद करनी चाहिए।    एनसीपी नेता मजीद मेनन ने कहा कि एनसीपी ने पहले ही यह साफ कर दिया है कि हम तीन तलाक को अपराध मानने के खिलाफ है। अगर शादी एक सिविल कॉन्ट्रैक्ट है तो आप तीन साल की सजा कैसे दे सकते है। इस बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजना चाहिए। बीजेपी ने लोकसभा और राज्यसभा के अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी की है। बीजेपी ने मंगलवार और बुधवार को संसद में पारित होने वाले अति महत्वपूर्ण विधेयकों के दौरान इन सभी सांसदों को उपस्थित रहने को कहा है।    साभार-khaskhabar.com         

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इस्लामाबाद। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि अब अमेरिका की तरफ से पाकिस्तान को कोई मदद नहीं मिलेगी। साथ ही अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 1628 करोड़ रुपये की मदद पर रोक लगा दी है। अमेरिका के इस कदम से भारत खुश है। लेकिन, भडक़े पाकिस्तान ने अमेरिका पर जमकर भड़ास निकाली। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा है कि अमेरिका अफगानिस्तान की लड़ाई के लिए पाकिस्तान के संसाधनों का इस्तेमाल करता है और उसी की कीमत चुकाता है। उन्होंने यहां तक कहा कि ट्रंप के नो मोर का कोई महत्व नहीं है और पाकिस्तान इस तानाशाही को नहीं सहेगा।   पाकिस्तान के टीवी चैनल जियो न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा, हमने अमेरिका को पहले ही कह दिया है कि अब हम उसके लिए और नहीं करेंगे। इसलिए ट्रंप के नोर मोर का कोई महत्व नहीं है। पाकिस्तान को अरबों डॉलर फंड देने को लेकर ट्रंप के दावे पर उन्होंने कहा, यदि हमने यह लिया है तो इसमें पाकिस्तान द्वारा दी गई सेवाओं के बदले भुगतान भी शामिल है। ट्रंप अफगानिस्तान में हार से दुखी हैं और इसलिए वह पाकिस्तान पर दोष मढ़ रहे हैं। हमारी जमीन, रोड, रेल और दूसरी सेवाओं का इस्तेमाल किया गया और इसके बदले हमें भुगतान किया गया। इसका ऑडिट भी हुआ है।    आसिफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान फंड को रोके या नहीं, लेकिन पाकिस्तान को इसकी जरूरत नहीं है। ट्रंप अपने प्रशासन से पूछ सकते हैं कि पाकिस्तान को फंड क्यों दिया गया। आसिफ ने पाकिस्तान के हित को सबसे ऊपर बताते हुए कहा, हमें किसी और दूसरे देश के हित की रक्षा नहीं करनी है। हमारी प्राथमिकता पाकिस्तान की भलाई है। हमारा हित उनसे अलग है और हम उनके सहयोगी नहीं बनेंगे। ट्रंप के ट्वीट को लेकर उन्होंने कहा, इस तरह की तानाशाही किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नववर्ष के मौके पर लंबे समय से दोस्त रहे पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला था। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका की तरफ से पाकिस्तान को अब कोई मदद नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि जिन आतंकवादियों को हम अफगानिस्तान में तलाश रहे हैं, उन्हें पाकिस्तान अपने यहां सुरक्षित पनाह दे रखा है। ट्रंप ने ट्वीट में इस्लामाबाद की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, पिछले 15 सालों से पाकिस्तान अमेरिका को बेवकूफ बनाकर 33 अरब डॉलर की सहायता प्राप्त कर चुका है और उसने बदले में हमें सिर्फ झूठ और धोखे के अलावा कुछ नहीं दिया, वह हमारे नेताओं को बेवकूफ समझता है।    उन्होंने कहा, वे उन आतंकियों को सुरक्षित पनाह दे रखे हैं, जिन्हें हम अफगानिस्तान में तलाश रहे हैं। बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके जवाब में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा एम. आसिफ ने ट्वीट किया था हम जल्द ही ट्रंप के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देंगे। ईंशा अल्लाह..दुनिया को सचाई का पता चलना चाहिए..तथ्यों और कल्पना के बीच का अंतर। आपको बता दें कि पाकिस्तान पर भारत और अफगानिस्तान दोनों देशों के खिलाफ आतंकियों को पनाह देने का आरोप है। लेकिन, इस्लामाबाद बार-बार इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है।   साभार-khaskhabar.com       

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