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कोलकाता। भारतीय जनता पार्टी की ओर से पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित रथ यात्रा को कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंजूरी प्रदान कर दी है। गणतंत्र बचाओ यात्रा को मंजूरी मिलने से राज्य की ममता सरकार को बड़ा झटके रूप में माना जा रहा है। राज्य सरकार ने सांप्रदायिक सद्भाव बिगडऩे का हवाला देते हुए रथयात्रा को स्वीकृति देने से मना कर दिया था। रथयात्रा रोके जाने पर ममता सरकार पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने खूब निशाना बनाया था। पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने बयान में बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट को बताया कि सांप्रदायिक सौहार्द में बिगडने का अंदेशा जताने वाली खुफिया रिपोर्ट राज्य में भाजपा की रथ यात्रा रैलियों को इजाजत देने से मना करने का मुख्य कारण था। इस पर भाजपा के वकील एसके कपूर ने दलील दी कि इसके लिए ममता सरकार की ओर से स्वीकृति देने से मना करना पूर्व निर्धारित था और इसका कोई आधार नहीं था। वकील ने बताया कि अंग्रेजों के जमाने में महात्मा गांधी ने दांडी मार्च किया था और किसी ने उन्हें नहीं रोका। अब यहां सरकार कहती है कि वह एक राजनीतिक रैली निकालने की इजाजत नहीं देगी। भाजपा ने याचिका के माध्यम से अपनी रैली को इजाजत देने से मना करने के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार के कदम को चुनौती दी थी। आपको बताते जाए कि बीते शनिवार को राज्य सरकार ने भाजपा के प्रस्तावित रथयात्रा की अनुमति देने से इंकार करते हुए कहा था कि इससे सांप्रदायिक सद्भाव बिगडऩे और कानून व व्यवस्था की समस्या पैदा होने का अंदेशा बना हुआ है। बुधवार को सुनवाई के दौरान जज और एडवोकेट जनरल के बीच बहस भी हुई। इसके बाद जज ने कहा था कि अगर खुफिया विभाग की रिपोर्ट को आधार माना जाए तो किसी भी रैली की अनुमति नहीं दी जा सकती।   साभार-khaskhabar.com

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श्रीहरिकोटा। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने कम्युनिकेशन सैटलाइट जीएसएलवी-एफ11/जीसैट-7 ए को बुधवार दोपहर को लॉन्च कर दिया है। आपको बताते जाए कि यह सैटलाइट भारतीय वायुसेना के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस सैटलाइट की लागत 500-800 करोड़ रुपए बताई गई है। इसमें 4 सोलर पैनल भी लगाए गए हैं। इनके जरिए करीब 3.3 किलोवॉट बिजली पैदा की जा सकेगी। इसको कक्षा में आगे-पीछे जाने या ऊपर जाने के लिए बाई-प्रोपेलैंट का केमिकल प्रोपल्शन सिस्टम भी लगाया गया है। इसके जरिये वायुसेना को भूमि पर रडार स्टेशन, एयरबेस और एयरबॉर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (एडब्ल्यूएसीएस) से इंटरलिंकिंग की सुविधा मिलेगी, जिससे उसकी नेटवर्क आधारित युद्ध संबंधी क्षमताओं में विस्तार होगा और ग्लोबल ऑपरेशंस में दक्षता बढ़ेगी।टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, जीसैट-7ए से वायुसेना न सिर्फ अपने विभिन्न एयरबेस से जुड़ सकेगी, बल्कि इससे ड्रोन संबंधी ऑपरेशंस में भी मदद मिलेगी। यह उपग्रह ऐसे समय में प्रक्षेपित होने जा रहा है, जबकि भारत अमेरिकन आर्म्ड प्रीडेटर-बी या सी गार्जियन ड्रोन हासिल करने की प्रक्रिया में जुटा है। ये उपग्रह नियंत्रित अनमैन्ड एरियल व्हीकल हैं, जो लंबी दूरी से भी दुश्मनों के ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।

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रांची। आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने कहा है कि महागठबंधन में नीतीश कुमार आना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। यहां पर तेजप्रताप अपने पिता लालू यादव से मिलने पहुंचे थे। इस मौक पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान तेजप्रताप ने यह बात कही। यादव ने कहा कि तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद यह साबित हो गया है कि जनता ने भाजपा को नकार दिया है।  तेज प्रताप ने कहा कि कोई भी पार्टी जो धर्मनिरपेक्ष हो, उसका महागठबंधन में स्वागत रहेगा। इस अवसर पर यादव ने कहा कि वे मानसिक तनाव से नहीं गुजर रहे हैं। उन्होंने खुद को कृष्ण और अपने भाई तेजस्वी को अर्जुन करार दिया है। इसके साथ ही यादव ने कहा कि नीतीश कुमार भी महागठबंधन में आना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। आपको बताते जाए कि तेजस्वी यादव ने कई बार कह चुके हैं कि नीतीश कुमार की अब महागठबंधन में एंट्री नहीं होगी। तेज प्रताप ने बताया कि झारखंड में गैर- भाजपा दलों को एकजुट कर बड़ा कार्यक्रम करेंगे। उन्होंने कहा कि यहां कानून व्यवस्था की हालत बहुत खराब हो गई है। यहां पर बात-बात पर हत्याएं होती रहती हैं । अपने गायब रहने के सवाल पर तेज प्रताप ने बताया कि वे वृंदावन चले गए थे, कृष्ण नगरी से सुदर्शन चक्र लेना है।    साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। मोदी सरकार आम नागरिकों को बड़ी सौगात देने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को और ज्यादा सरल बनाने के संकेत दिए हैं। जिसका फायदा व्यापारी वर्ग को भी होगा। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार चाहती है कि 99 प्रतिशत सामान या चीजें जीएसटी के 18 प्रतिशत के कर स्लैब में रहें। जबकि 28 फीसदी टैक्स स्लैब में सिर्फ लग्जरी सामान ही रहेगा।   एक निजी टीवी चैनल के सम्मिट में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा ‘हमारे देश में दशकों से जीएसटी की मांग थी। आज हम संतोष के साथ कह सकते हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद बाजार की विसंगतियां दूर हो रही हैं और सिस्टम की कार्यक्षमता बढ़ रही है। अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता की तरफ हम बढ़ रहे हैं।’ पीएम ने कहा, ‘आज, जीएसटी व्यवस्था काफी हद तक स्थापित हो चुकी है और हम उस दिशा में काम कर रहे हैं जहां 99 प्रतिशत चीजें जीएसटी के 18 प्रतिशत कर स्लैब में आएं।’ उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना होगा कि आम आदमी के उपयोग वाली सभी वस्तुओं समेत 99 प्रतिशत उत्पादों को जीएसटी के 18 प्रतिशत या उससे कम कर स्लैब में रखा जाए।   उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि उद्यमों के लिये जीएसटी को जितना अधिक से अधिक सरल किया जाना चाहिए।’ गौरतलब हो कि नवंबर में जीएसटी संग्रह मासिक लक्ष्य से 4,000 करोड़ रुपए कम रही। हाल ही में जारी आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि नवंबर में जीएसटी राजस्व संग्रह 97,637 करोड़ रुपए था, जबकि अक्टूबर में 1 लाख करोड़ रुपए अधिक जीएसटी राजस्व संग्रह हुआ था। वित्त मंत्रालय का मासिक लक्ष्य लगभग 1 लाख करोड़ रुपए होता है।    जबकि वित्त वर्ष 2018-19 के बजट में जीएसटी संग्रह 13.48 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया गया है। देशभर में मोदी सरकार ने 1 जुलाई 2017 को कर व्यवस्था में सुधार हेतु वन नेशन-वन टैक्स यानि जीएसटी लागू की। गत 21 जुलाई को जीएसटी परिषद ने रेफ्रिजरेटर, वाशिग मशीन और छोटे टेलीविजन सहित कई सामानों पर जीएसटी दर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने का फैसला किया। वहीं कर की दरों में कटौती करने के अलावा जीएसटी परिषद ने कई सामानों पर से कर समाप्त कर दिया था, जिसमें सैनिटरी नैपकिन, राखी, फोर्टिफाइड मिल्क और पत्थर, मार्बल और लकड़ी से बनी मूर्तियां आदि शामिल थी।   साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की नई सरकार ने किसानों का लोन माफ करने का फैसला किया है। अब कांग्रेस ने पूरे देश में किसानों की कर्ममाफी की मांग छेड़ दी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने पिछले चार साल में किसानों का एक पैसा माफ नहीं किया है। जबकि 10 से 15 उद्योगपतियों का अरबों का कर्ज माफ किया गया। अगर मोदी किसानों का कर्ज माफ नहीं करते हैं तो हम उन्हें सोने नहीं देंगे।    उन्होंने कहा कि अगर किसानों का कर्ज मोदी माफ नहीं करेंगे तो कांग्रेस पार्टी करेगी। संसद के बाहर प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा, ‘हमने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 10 दिनों के भीतर कर्ज माफ करने का वादा किया था। लेकिन छह घंटे के भीतर हमने कर्ज माफ किया।’ उन्होंने कहा कि 45 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया गया। इतनी रकम में राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के सभी किसानों का कर्ज माफ किया जा सकता था। लेकिन पीएम मोदी ने एक पैसे की राहत किसानों को नहीं दी। राहुल गांधी ने देशभर के किसानों से अपील करते हुए कहा, ‘आपको डरने की जरूरत नहीं है, हम ये काम करेंगे।    विपक्ष किसानों का ऋण माफ करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को मजबूर करेगा। जब तक कर्जमाफी नहीं होगी पीएम मोदी को सोने नहीं देंगे।’ हमने तीन राज्यों में से दो में किसानों का कर्ज माफ करने का काम शुरू कर दिया है, जल्द ही तीसरे राज्य के किसानों को भी राहत देंगे। पत्रकारों ने राहुल गांधी से कर्जमाफी पर सवाल पूछा। इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि देखा आपने, शुरू हो गया न काम। हमने छह घंटे में कर्जमाफी का वादा पूरा किया।     साभार-khaskhabar.com

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रायबरेली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को यूपी के दौरे पर हैं। उन्होंने यहां कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। हालांकि उनका यह दौरा परियोजनाओं के उद्घाटन से कहीं अधिक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीएम मोदी नेे इस दौरान रायबरेली में मॉडर्न रेल कोच फैक्ट्री का निरीक्षण किया और 900वें कोच व हमसफर रेक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने वायुसेना को मजबूत नहीं होने दिया। रक्षा सौदे के मामले में कांग्रेस का इतिहास क्वात्रोची मामा का रहा और कुछ दिन पहले एक और आरोपी मिशेल चाचा को लाया गया है और हमने देखा है कि कांग्रेस ने कैसे इनको बचाने के लिए अपना वकील अदालत में भेज दिया। कांग्रेस क्या इसलिए भडक़ी हुई क्योंकि बीजेपी सरकार जो रक्षा सौदे कर रही उसने क्वात्रोची मामा और मिशेल अंकल नहीं है। हमारे लिए हमेशा दल से बड़ा देश है। पीएम मोदी ने कहा कि यहां आने से पहले मैं पास ही में बनी मॉर्डन कोच फैक्ट्री में था। मैंने उस फैक्ट्री में इस वर्ष बने 900वें डिब्बे को हरी झंडी भी दिखाई। पहले की सरकारों की क्या कार्यसंस्कृति रही है, इसकी गवाह रायबरेली की रेल कोच फैक्ट्री भी है। जो फैक्ट्री नए डिब्बे बनाने के लिए थी, उसे पूरी क्षमता से कभी काम ही नहीं करने दिया गया।  पीएम मोदी ने कहा, ये फैक्ट्री 2007 में स्वीकृत हुई थी। 2010 में ये फैक्ट्री बनकर तैयार भी हो गई, लेकिन उसके बाद 4 साल तक इस फैक्ट्री में कपूरथला से डिब्बे लेकर उनमें पेंच कसने और पेंट करने का काम हुआ। देभ भर के मेट्रो के डिब्बे रायबरेली के कोच फैक्ट्री में बनेंगे।   पीएम मोदी ने कहा कि अगर कोच फैक्टरी की क्षमता बढ़ेगी तो यहां के युवाओं के लिए हर तरह के रोजगार बढ़ेंगे। उस दिन के बारे में सोचिए, जब यहां हर रोज 10-12 नए कोच बनने लगेंगे। जब पहले की सरकार ने यहां पर रेल कोच फैक्ट्री का निर्माण तय किया था, तो ये तय हुआ था कि 5000 कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। लेकिन स्वीकृति इसके आधे पदों को ही दी गई। पीएम मोदी ने कहा, इतना ही नहीं, 2014 में हमने ये भी देखा कि यहां की कोच फैक्ट्री में एक भी नई नियुक्ति नहीं हुई थी। अब आज की स्थिति ये है कि लगभग 2 हजार नए कर्मचारियों को हमारी सरकार ने नियुक्त किया है। आज मुझे ये कहते हुए गौरव का एहसास हो रहा है कि आने वाले समय में रायबरेली, रेल कोच निर्माण के मामले में एक ग्लोबल हब बनने वाला है।   प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के सामने दो पक्ष है, एक पक्ष सत्य का है, सुरक्षा का है। दूसरा पक्ष उन ताकतों का है जो किसी भी कीमत पर देश को कमजोर करने चाहते हैं। कांग्रेस उन ताकतों के साथ खड़ी है जो हमारे सेनाओं को मजबूत नहीं होना देना चाहते हैं, ऐसे लोगों की कोशिशों को किन देशों से समर्थन मिल रहा है देश देख रहा है। भाषण यहां दिया जाता है और तालियां पाकिस्तान में बजती हैं। कुछ लोगों के लिए रक्षा मंत्रालय झूठा है, रक्षा मंत्री झूठी हैं, कुछ लोगों को कोर्ट भी झूठा दिखता है, सच को श्रृंगार की जरूरत नहीं होती और झूठ जितना भी बोलो उसमें जान नहीं होती है।   साभार-khaskhabar.com

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बेंगलुरु। कर्नाटक के बगलकोट जिले के मुधोल में निरानी चीनी मिल में बॉयरल फटने से पूरी इमारत हिल गई और दरारे आ गई। वहां काम कर रहे 6 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। मिली जानकारी के अनुसार, हादसा मुधौल के निरानी शुगर मिल में हुआ। सरकारी चीनी मील के अंदर मजदूर काम कर रहे थे कि इसी दौरान बॉयलर के अंदर तेज धमाका हुआ। धमाका इतना तेज था कि चीनी मील की पूरी इमारत हिल गई और दरारे आ गई। वहां काम कर रहे 6 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई मजदूरों गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। फायर ब्रिगेड और बचाव टीम मौके पर पहुंच गई है। मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी है। कुछ लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका भी जताई जा रही है। स्थानीय अधिकारी भी मौके पर हालात का मुआयना करने में जुटे हुए हैं। बॉयलर में हुआ धमाका इतना तेज था कि तीन मंजिला बिल्डिंग ढह गई। यह मिल भाजपा विधायक मुरुगेश निरानी, उनके भाई संगामेश और हनुमंथा की बताई गई है। फैक्ट्री में करीब एक हजार मजदूर काम करते हैं। हादसे वाली जगह पर एक दर्जन के करीब मजदूर उपस्थित थे। पुलिस मौके पर राहत बचाव काम में जुट गई है। वहीं मजदूरों के परिवार वाले अपनों की तलाश में वहां जुट हुए हैं।  आपको बताते जाए कि दो दिन पहले कर्नाटक के चामारजनगर जिले में मंदिर का प्रसाद खाने के बाद 13 लोगों की मौत हो गई।   साभार-khaskhabar.com

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लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ एकजुट हो रहे विपक्ष में दरार नजर आ रही है। मोदी के खिलाफ राफेल मुद्दे को कांग्रेस लगातार उठा रही है। उसको शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लग गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राफेल सौदे में पारदर्शिता बरती गई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कोर्ट के निर्णय को सर्वोपरि बताते हुए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग को वापस ले लिया है। इसके बाद बीजेपी के खिलाफ लड़ाई लडऩे का दावा करने वाले विपक्ष के नेता अखिलेश के इस बयान से सारे हैरान हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश ने बताया कि मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सर्वोपरि है। हमने जेपीसी की मांग उस समय की थी जब सुप्रीम कोर्ट का जिक्र नहीं था। ऐसी स्थिति में कोर्ट का निर्णय आ गया है, हर पहलू पर विचार कर रहे हैं।  हमारा मानना है कि भविष्य में सवाल करना हो वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। इसी के साथ उन्होंने राफेल डील में जेपीसी की मांग से अपने आपको अलग कर लिया है। उल्लेख है कि सर्वोच्च न्यायालय ने राफेल सौदे मामले पर अपने निर्णय में केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी है। साथ ही कहा कि देश के लिए लड़ाकू विमान जरूरी है और उनके बगैर काम नहीं चलेगा। कोर्ट ने कहा कि उसे राफेल डील में कोई अनियमितता नजर नहीं आ रही है।   साभार-khaskhabar.com

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जयपुर । कांग्रेस सरकार आते ही, और नए मुख्यमंत्री के रूप में अशोक गहलोत के नाम का ऐलान होते ही राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में फेरबदल की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।    प्रदेश के नए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निशाने पर पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार के सीएमओ की ब्यूरोक्रेसी रही है। खुलेआम गहलोत ने आईएएस अफसरों का नाम लिया था और हिदायत दी थी कि वह वसुंधरा सरकार के कहने पर कांग्रेस के खिलाफ कोई हथकंड़े नहीं अपनाएं। साथ ही गहलोत ने मुख्य सचिव डीबी गुप्ता को भी पत्र लिखा था कि वह वसुंधरा सरकार के मनमाने फैसले पर सहमति नहीं जताए। इस खत के बाद मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने अशोक गहलोत से जाकर भी मुलाकात की थी।    वहीं अब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ लेने जा रहे है। इसलिए इससे पहले शनिवार को प्रदेश के आला आईएएस अफसरों, आईपीएस अफसरों, आरएएस अफसरों ने सरकारी आवास जाकर मुख्यमंत्री बनने पर अशोक गहलोत से मुलाकात की और बधाई दी। माना जा रहा है कि नए साल से पहले या नए साल में ब्यूरोक्रेसी में आमूलचूल परिवर्तन हो सकता है। वहीं गहलोत सरकार के निशाने पर सीएमओ की ब्यूरोक्रेसी रहेगी, जिन्हें सबसे पहले बदला जाएगा। इसके बाद पुलिस प्रशासन में आमूलचूल परिवर्तन होगा।   वहीं शासन सचिवालय के गलियारों में सीएमओ, नए मुख्य सचिव और आरोपी आईएएस अफसर, जिनके मामले हाईकोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन बहाल होने के बाद ऊंचे पदों पर बैठे है। इन पर कुछ ना कुछ गहलोत सरकार आने वाले दिनों में फैसला ले सकती है।   साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। राफेल विमान सौदे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को बड़ी राहत मिली है। फ्रांस से 36 राफेल विमान की खरीद पर क्लीन चिट मिलने के बाद केंद्र सरकार ने कांग्रेस और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए देश से माफी मांगने के लिए कहा है। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कहा कि राफेल की जांच के लिए जेपीसी सही मंच है और वही जांच कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट में जांच संभव नहीं है।   रणदीप सुरजेवाला - कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि इस मामले की जांच के लिए संसद की JPC की ही सही मंच है। उन्होंने कहा, राफेल मामले पर जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट सही मंच नहीं है। हम SC के फैसले का स्वागत करते हैं लेकिन इस मामले पर सच तभी सामने आएगा जब इस मामले की जांच जेपीसी करेगी।   रणदीप सुरजेवाला ने मीडिया से बात करते हुए कहा, राफेल सौदे का मामला अनुच्छेद 132 और 32 से जुड़ा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट विमान के मूल्य और सौदे की प्रकिया से जुड़ी संवेदनशील रक्षा अनुबंध पर फैसला नहीं दे सकता। इस मामले की सिर्फ जेपीसी से जांच कराई जा सकती है।   शशि थरूर - बीजेपी की मांग पर शशि थरूर ने कहा कि राहुल गांधी के माफी मांगने का कोई प्रश्न ही नहीं है। जनता के पैसे की संरक्षक संसद है और राफेल घोटाले पर जेपीसी में चर्चा होनी चाहिए।    मल्लिकार्जुन खडग़े कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खडग़े ने भी कहा कि राफेल पर माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता।    साभार-khaskhabar.com

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नई दिल्ली। राफेल सौदे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राफेल सौदे पर कोई संदेह नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जहाज की जरूरत और क्वालिटी पर कोई संदेह न होत तो उसकी कीमत पर जाने की कोई जरूरत नहीं है। सीजेआई रंजन गोगोई की पीठ ने आज कहा कि हम इससे सन्तुष्ट हैं कि प्रक्रिया में कोई विशेष कमी नहीं रही है। भारत को विमान की ज़रूरत है, विमान की क्षमता पर शक नहीं है। 126 की बजाय 36 विमान लेने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाना ठीक नहीं है।   सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि राफेल फाइटर जेट की खरीददारी में कोई खामी नहीं है और इसपर सवाल उठाना गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कीमत की समीक्षा करना कोर्ट का काम नहीं। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा ऐसा कुछ भी नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि किसी को व्यवसायिक लाभ पहुंचाया गया हो। कोर्ट ने डील से संबंधित चारों याचिकाओं को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि देश को इस फाइटर जेट की जरूरत है और इसमें किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने राजनीतिक दलों के इसे मुद्दा बनाने पर कहा कि किसी एक व्यक्ति की राय या विचार से काई सौदा नहीं होता है और इसे घोटाला नहीं कहा जा सकता।   राफले सौदे के खिलाफ याचिका दाखिल करने वाले देश के नामी वकील प्रशांत भूषण ने कहा, कोर्ट ने अपने फैसले में कहा इसमें किसी जांच की जरूरत नहीं है, जो सरकार ने नियम अपनाया वो ठीक ही लगता है और जो पार्टनर का चयन किया गया है वो भी राफेल कंपनी ने चुना है। इस आधार पर कोर्ट ने याचिका को रद्द कर दिया गया है। हमारे हिसाब से यह गलत फैसला है। हम तो सिर्फ जांच की मांग कर रहे थे। वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने सौदे पर लोगों को गुमराह किया और अब उन्हें माफी मांगनी चाहिए। दूसरी तरफ बीजेपी प्रवक्ता शाइना एनसी ने इस फैसले को लेकर कहा कि यह सच्चाई की जीत है और अब कांग्रेस के पास सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा बचा ही नहीं है।   इससे पहले केन्द्र सरकार ने फ्रांस से 36 लड़ाकू विमान खरीदने के सौदे का पुरजोर बचाव किया और इनकी कीमत से संबंधित विवरण सार्वजनिक करने की मांग का विरोध किया था। वहीं दूसरी तरफ मुख्यविपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए सबसे बड़ा घोटाला करार दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को कांग्रेस के लिए एक बड़े झटके की तरह माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस बेहद आक्रमक तरीके से इसे लोकसभा चुनाव 2019 में मुद्दा बनाने की तैयारी में थी।   साभार-khaskhabar.com

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घाना। अफ्रीकी देश घाना के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों के विरोध के बाद भारत के राष्ट्रपति महात्मा गांधी की प्रतिमा को परिसर से हटा दिया गया है। यहां बापू की एक कथित नस्लभेदी टिप्पणी को लेकर लगातार विरोध हो रहा था और अन्तत: विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रतिमा को हटाना ही पड़ा।  आपको बताते जाए कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दोनों देशों के सम्बंधों के प्रतीक के तौर पर जून 2016 में घाना यूनिवर्सिटी में अहिंसा और शांति के पुजारी महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया था। इसके कुछ समय बाद ही विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने इसे हटाने के लिए याचिका लगा दी थी। लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि अश्वेत अफ्रीकियों को लेकर महात्मा गांधी के विचार काफी नस्लीय थे। प्रोफेसर ने गांधी द्वारा लिखी उस लाइन का जिक्रकरते हुए बताया था कि बापू ने दावा किया था कि अश्वेत अफ्रीकियों की तुलना में भारतीय ज्यादा बेहतर थे। विद्यार्थियों ने बताया कि विरोध जोर पकडऩे पर विश्वविद्यालय के लीगन कैंपस से गांधी की प्रतिमा को हटा दिया गया है। अफ्रीकन स्टडीज संस्थान में भाषा और साहित्य विभाग के प्रमुख ओबदील कांबोन ने कहा कि प्रतिमा को हटाया जाना एक आत्म-सम्मान का विषय था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस विषय पर टिप्पणी देने से मना कर दिया है।इधर, घाना के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह विश्वविद्यालय द्वारा लिया गया आंतरिक निर्णय है। आपको बताते जाए कि इससे पहले घाना की पूर्व सरकार ने बताया था कि विवाद को टालने के लिए प्रतिमा को किसी दूसरी जगह पर स्थापित किया जाएगा। यह विवाद आश्चर्यजनक है क्योंकि महात्मा गांधी को ब्रिटिश शासन के खिलाफ उनके अहिंसक आंदोलन के लिए जाना जाता है। अफ्रीका में भी उन्हें काफी सम्मान मिलता है। दक्षिण अफ्रीका में वह 1893 से लेकर 1915 तक रहे और एक वकील के रूप में कार्य किया था।   साभार-khaskhabar.com

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