देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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श्रीहरिकोटा। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने कम्युनिकेशन सैटलाइट जीएसएलवी-एफ11/जीसैट-7 ए को बुधवार दोपहर को लॉन्च कर दिया है। आपको बताते जाए कि यह सैटलाइट भारतीय वायुसेना के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस सैटलाइट की लागत 500-800 करोड़ रुपए बताई गई है। इसमें 4 सोलर पैनल भी लगाए गए हैं। इनके जरिए करीब 3.3 किलोवॉट बिजली पैदा की जा सकेगी। इसको कक्षा में आगे-पीछे जाने या ऊपर जाने के लिए बाई-प्रोपेलैंट का केमिकल प्रोपल्शन सिस्टम भी लगाया गया है।
इसके जरिये वायुसेना को भूमि पर रडार स्टेशन, एयरबेस और एयरबॉर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (एडब्ल्यूएसीएस) से इंटरलिंकिंग की सुविधा मिलेगी, जिससे उसकी नेटवर्क आधारित युद्ध संबंधी क्षमताओं में विस्तार होगा और ग्लोबल ऑपरेशंस में दक्षता बढ़ेगी।टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, जीसैट-7ए से वायुसेना न सिर्फ अपने विभिन्न एयरबेस से जुड़ सकेगी, बल्कि इससे ड्रोन संबंधी ऑपरेशंस में भी मदद मिलेगी। यह उपग्रह ऐसे समय में प्रक्षेपित होने जा रहा है, जबकि भारत अमेरिकन आर्म्ड प्रीडेटर-बी या सी गार्जियन ड्रोन हासिल करने की प्रक्रिया में जुटा है। ये उपग्रह नियंत्रित अनमैन्ड एरियल व्हीकल हैं, जो लंबी दूरी से भी दुश्मनों के ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।













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