शिमला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कुशल नेतृत्व में चलने वाली भाजपा सरकार के दो वर्ष प्रगतिशील एवं उपलब्धियों से पूर्ण रहे उन्होंने कहा कि प्रदेश में जरूरतमंदों का सहारा बनी अनेक स्वास्थ्य योजनाएं, स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार का प्रदर्शन अद्भुत रहा। सतपाल सत्ती ने कहा आयुष्मान भारत योजना में कवर न होने वाले परिवारों के लिए ‘हिमकेयर’ योजना आरंभ की गई। योजना के तहत आयुष्मान भारत योजना की तर्ज पर प्रति परिवार 5 लाख रुपए के निःशुल्क इलाज का प्रावधान किया गया है, हिमकेयर के तहत 5 लाख 50 हजार परिवार पंजीकृत हुए हैं। प्रथम जनवरी, 2020 से हिम केयर के नए कार्ड भी बनेंगे। उन्होंने बताया कि हिम केयर योजना का लाभ उठाने के लिए 201 अस्पतालों को पंजीकृत किया गया है, जिसमें से 51 अस्पताल निजी क्षेत्रों में हैं।
उन्होंने बताया हिम केयर योजना के तहत इस वर्ष नवम्बर माह के अंत तक लगभग 43 हजार रोगियों ने लाभ उठाया। उपचार पर 42.35 करोड़ रुपए से भी ज्यादा खर्च किए गए। सत्ती ने कहा आयुष्मान भारत योजना के तहत भी 3 लाख परिवारों को पंजीकृत किया गया। एक वर्ष के भीतर 35 हजार से भी ज्यादा रोगियों के उपचार पर 33 करोड़ 16 लाख रुपए खर्च किए गए, 523 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं 354 स्वास्थ्य उपकेंद्रों को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में परिवर्तित करने की योजना आरंभ। इस योजना से चिकित्सा की सभी मूलभूत सुविधाएं इन वेलनेस केंद्रों में उपलब्ध होंगी।
उन्होंने कहा गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री चिकित्सा कोष गठित किया गया है। इस कोष में से 192 लाभार्थियों को चार करोड़ से भी अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। उन्होंने कहा कैंसर, अधरंग, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, थेलेसेमिया तथा पार्किन्सन जैसी गभीर बीमारियां से पीड़ित लोगों को निरन्तर देखभाल की आवश्यकता को देखते हुए ऐसे परिवारों को कुछ राहत पहुंचाने के लिए आर्थिक ऐसे मरीजों की देखभाल के लिए ‘सहारा योजना’ आरम्भ की गई। इस योजना के तहत प्रत्येक रोगी को 2,000 रुपए प्रतिमाह की सहायता प्रदान करने का प्रावधन किया गया। इस वर्ष इस योजना के लिए 10 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान है।
सत्ती ने बताया स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य में सहभागिता योजना आरम्भ की गई है। इस योजना के तहत खोले जाने वाले निजी बहु विशेषज्ञ अस्पतालों के लिए दो करोड़ रुपए के निवेश पर 25 प्रतिशत पूंजीगत उपदान देने का प्रावधन किया गया है, जबकि डेढ़ करोड़ रुपए ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज उपदान 3 वर्ष के लिए दिए जाने का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में सभी सरकारी अस्पतालों में ग्रामीण स्तर तक लोगों को निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध करवाने पर 80 करोड़ रुपए खर्च किए गए। आई.जी.एम.सी. शिमला, टांडा मेडिकल कॉलेज तथा नेरचौक मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े अस्पतालों में 330 दवाइयां 24 घंटे निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
अस्पताल में जन्मे नवजात शिशुओं व उनकी माताओं को ‘‘नव आगंतुक किट’’ उपलब्ध करवाने के लिए अटल आशीर्वाद योजना आरंभ की गई है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 1500 रुपए मूल्य की शिशुओं के लिए उपयोगी सामग्री उपलब्ध करवाई जा रही है। एक वर्ष के भीतर इस योजना के तहत प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अध्किरियों को 77,000 से भी ज्यादा किट वितरण के लिए उपलब्ध करवाई जा चुकी हैं।
उन्होंने कहा किशोरावस्था में लड़कियों की व्यक्तिगत स्वच्छता के लिए छठी से 12वीं कक्षा तक की सभी छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन एक रुपए प्रति पैकेट की दर से उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, जिसके लिए 4 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। अब तक 8,79,634 सेनिटेरी नेपकिन पैकेट वितरित किए गए। प्रदेश में 108 बाइक एंबुलेंस सेवा आरंभ की गई। यह सेवा आरंभ करने वाला हिमाचल प्रदेश उत्तरी भारत का पहला राज्य है। प्रदेश में दो नए स्वास्थ्य उप केंद्र, पांच स्वास्थ्य केंद्र खोले तथा एक स्वास्थ्य उपकेंद्र को स्तरोन्नत कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्तरोन्नत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को स्तरोन्नत कर नागरिक अस्पताल बनाया गया।
नागरिक अस्पताल आनी की क्षमता को 50 से बढ़ाकर 100 बिस्तर, नागरिक अस्पताल नूरपुर को 135 से 200 बिस्तर, नागरिक अस्पताल थुरल की क्षमता को स्तरोन्नत कर 100 बिस्तर तथा सिविल अस्पताल पांवटा साहिब की क्षमता को 100 से 150 बिस्तर किया गया। बिलासपुर में एम्स निर्माणाधीन है। ऊना में पी.जी.आई., चंडीगढ़ का सेटेलाइट सेंटर बन रहा है। उन्होंने बताया गत दो वर्षों में 900 से भी ज्यादा डॉक्टरों के पद भरे गए। राष्ट्रीय क्षय रोग निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए हिमाचल प्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार मिला। प्रदेश में संस्थागत प्रसव का प्रतिशत 87 से बढ़कर 90 प्रतिशत तक पहुंचा।
संस्थागत प्रसव तथा एक वर्ष तक की आयु के बच्चों के निःशुल्क ईलाज पर 20.30 करोड़ रुपए खर्च किए गए। कुल्लू, बिलासपुर, ऊना, हमीरपुर, चम्बा तथा शिमला के जिला अस्पतालों एवं नागरिक चिकित्सालय पालमपुर, नूरपुर तथा पांवटा साहिब में डायलसिस केंद्र खोले गए। इन केंद्रों में डायलसिस की सुविधा गरीबी रेखा से नीचे परिवारों को निशुल्क प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त धर्मशाला, मंडी व सोलन में भी यह सेवाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा जयराम सरकार की इस क्षेत्र में और भी बड़ी उपलब्धियां रही है जिससे हिमाचल के नाम पूरे देश मे एसे सकारात्मक कार्यों के लिए आदर्श बन रहा है।
साभार-khaskhabar.com
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