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स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’ || लखनऊ : अखिलेश का दावा, SIR पर चुनाव आयोग में ही मतभेद, बताया- लोकतंत्र के लिए घातक || चेन्नई : राहुल गांधी अगले महीने तमिलनाडु में कर सकते हैं 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम || उत्तर प्रदेश : गोंडा में मुठभेड़ के बाद तीन गौतस्कर गिरफ्तार, बहराइच में शातिर अपराधी पुलिस की गोली लगने से घायल

नई दिल्ली । उत्तर भारत के पहाडी इलाके में हो रही बर्फबारी से मैदानी क्षेत्रों में ठंड बढ गई है। घने कोहरे के कारण रेल और हवाई यातायात पर भारी असर देखने को मिल रहा है। कोहरी की वजह से दिल्ली आने-जाने वाली पांच ट्रेनों को रद्द करना पडा जबकि 41 ट्रेनें देरी से चल रही है। खराब मौसम को देखते हुए 14 ट्रेनों का वक्त भी बदलना पडा। वहीं, दिल्ली से सात इंटरनेशनल उड़ानों में देरी हो गई है, जबकि एक उड़ान को रद्द कर दिया गया है। डिब्रूगढ़ से दिल्ली आने वाली 12423 राजधानी 13 घंटे देरी से चल रही है, वहीं, दिल्ली से भुवनेश्वर जाने वाली 22812 राजधानी 16 घंटे लेट चल रही है। इससे यात्रियों को काफी परेशान का सामना करना पडा रहा है। घने काहरे के कारण हवाई यातायात पर भी खासा असर पडा है। खराब मौसम की वजह से श्रीनगर से विमान उड़ान नहीं भर रहे हैं। खराब मौसम और बारी बर्फबारी के कारण जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाइवे आज चौथे दिन भी बंद हैं। जिससे जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाइवे पर ट्रकों की लंबी कतार लग गई है। वहीं उधम पुर बाइपास पर भी ट्रकों की लाइन लगी हुई है। बर्फबारी से जहं शिमला में पर्यटकों की गाड़ी फंसी हुई हैं। तो हिमाचल प्रदेश के भी कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया है।    साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । आम बजट इस बार 1 फरवरी को ही पेश होगा। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सरकार की सिफारिश पर मुहर लगा दी है। पहले दिन राष्ट्रपति राज्य सभा और लोकसभा दोनों सदनों को संबोधित करेंगे। इसके बाद 31 जनवरी को बजट सत्र की शुरूआत होगी। आम बजट के साथ ही रेल बजट भी पेश होगा। रेल बजट अलग से पेश नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि आम बजट को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग और राष्ट्रपति के समक्ष विरोध दर्ज कराया था। चुनाव आयोग ने विपक्ष के विरोध पर सरकार से अपना रुख साफ करने के लिए कहा है। विपक्ष ने राष्ट्रपति से भी गुहार लगाई थी कि आम बजट को चुनावों के बाद लाया जाए। जबकि केन्द्र सरकार 1 फरवरी को बजट पेश करना चाहती है।  राष्ट्रपति ने केन्द्र सरकार की सिफारिश पर मुहर लगा दी है। अब स्पष्ट हो गया है कि बजट 1 फरवरी को ही पेश किया जाएगा। ज्ञातव्य है कि विपक्ष का कहना है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के ठीक पहले बजट पेश करके सरकार लुभावनी घोषणाओं से मतदाताओं को रिझाने की कोशिश कर सकती है। वहीं सरकार का कहना है कि बजट का चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। एक फरवरी को बजट पेश करने से एक अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष में नये प्रावधानों को अमल में लाया जा सकेगा। बजट सत्र का पहला चरण 31 जनवरी से 9 फरवरी तक होगा। 31 जनवरी को ही आर्थिक सर्वेक्षण भी पेश किया जाएगा। 1 फरवरी को आम बजट पेश किया जाएगा। बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से 12 अप्रैल तक होगा।      साभार-khaskhabar.com  

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नूहं । जिले के धीरधोका गांव में डिपो होल्डर की मनमानी के चलते राशन में जमकर गरीबों का हक डकारने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांवों में कई -कई महीने का राशन नहीं मिला है। बीपीएल परिवारों को सरकारी राशन नहीं मिलने के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। धीरधोका गांव के सैकड़ों गरीब परिवारों ने डिपो होल्डर की शिकायत उपायुक्त महोदय से भी भी कर चुके है। प्रशासन द्वारा डिपो होल्डर के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है।       साभार-khaskhabar.com  

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शिमला । उत्तर भारत में ठंड ने फिर से दस्तक दे दी है। दिल्ली एनसीआर में शनिवार तडके हुई बारिश से फिर ठंड का अहसास बढ गया है। दिल्ली एनसीआर में शनिवार तडके हल्की बारिश शुरू हो गई। बदले मौसम और बारिश के कारण सुबह तक अंधेरा छाया रहा। दिल्ली एनसीआर में आज सुबह हुई बारिश के कारण अचानक ठंड बढ गई है। वहीं पहाडी इलाकों में भी बर्फबारी हो रही है। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाके और कश्मीर में बर्फबारी हो रही है। पहाडी इलाकों की इस बर्फबारी ने मैदानी इलाकों में ठंड बढा दी है। बर्फबारी के कारण हिमाचल में शिमला, कुफरी, नरकंडा और मसोहोबरा को जाने वाले सभी रास्ते बंद हो गए हैं। वहीं कश्मीर में बर्फबारी से जम्मू से कश्मीर का भी संपर्क टूट गया है। बर्फबारी के कारण पहाडी इलाकों में बिजली की सेवा भी बाधित हो रही है। ज्ञातव्य है कि बर्फबारी की वजही से कल श्रीनगर के एयरपोर्ट को बंद करना पडा था। साथ ही श्रीगनर-जम्मू नेशनल हाइवे भी बंद कर दिया गया। कई यात्री बीच रास्ते में फंसे हुए हैं। हाइवे बंद करने से गाडियों की लंबी लाइनें लग गई। वहीं हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में हिमस्खलन होने की आशंका को देखते हुए मध्यम खतरे की चेतावनी जारी की गई है।  साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । अब फ्रांस से खरीदे गए अत्याधुनिक फाइटर जेट्स रफाल के जरिए चीन को काबू करने की तैयारी हो रही है। भारत रफाल जेट्स के पहले दस्ते का बेस ईस्टर्न सेक्टर में बनाएगा। गौरतलब है कि रफाल जेट परमाणु हथियारों को ढोने में सक्षम है। दरअसल भारत यह चीन को काउंटर करने के लिए पारंपरिक और न्यूक्लियर दोनों तरह के हमलों की क्षमता मजबूत करने के लिए कर रहा है।  भारतीय वायुसेना की योजना के अनुसार 2019 तक 18 राफेल लडाकू विमानों को पश्चिम बंगाल के हाशिमपुरा बेस पर तैनात किया जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय वायुसेना फाइटर जेट्स सुखोई 30एमकेआई की तैनाती असम के तेजपुर और छाबुआ में कर चुकी है। ज्ञातव्य है कि पिछले वर्ष सितंबर माह में भारत की फ्रंास के साथ 59 हजार करोड रुपए की डील हुई थी। इस डील के तहत फ्रांस 2022 के मध्य तक भारतीय वायुसेना को 36 राफेल फाइटर जेट कई चरणों में देगा।  वहीं राफेल में कुछ अन्य फीचर्स भी जोडने की मांग की गई है। इन फीचर्स में एक कोल्ड स्टार्ट है। कोल्ड स्टार्ट फीचर में ये राफेल ऊंचाई वाले इलाकों में जहां ठंड अधिक होती है, वहां आसानी से स्टार्ट हो सकेंगे। ज्ञातव्य है कि राफेल जेट 9.3 टन के हथियार ढोने में सक्षम है। यह हवाई सुरक्षा से लेकर जमीनी हमले से जुडे मिशनों के लिए बेहद कारगर है। एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार हाशिमपुरा एयरबेस पर फिलहाल मिग-27 जेट्स हैं, जो अगले दो से तीन साल में रिटायर हो जाएंगे। इन मिग 27 जेट्स को राफेल से रिप्लेस किया जाएगा। राफेल जेट बनाने वाली कंपनी ने हाल ही में हाशिमपुरा का दौरा भी किया। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार यूपी के सरस्वा बेस पर राफेल की दूसरी टुकडी तैनात करने पर भी विचार हो रहा है। गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना ने 10 दिन पहले ही अरुणाचल के सियांग जिले स्थित टूटिंग में भी एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) को शुरू कर दिया है। इन सभी को शुरू करने का फैसले चीन के मद्देनजर लिया गया है।    साभार-khaskhabar.com  

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श्रीगंगानगर । रायसिंहनगर रेलवे स्टेशन को साफ सुथरा बनाने के लिए सीमा सुरक्षा बल ने अभियान चलाया है। सीमा सुरक्षा बल की 52 वाहिनी ने अपने जवानों के साथ स्वच्छता अभियान के तहत शनिवार को रेलवे स्टेशन पर स्वच्छता अभियान की शुरुआत की। घने कोहरे में सुबह ही बीएसएफ अधिकारी अपने जवानों के साथ रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। वहां जवानों ने अधिकारियों के निर्देशन में स्टेशन को गंदगी मुक्त बना दिया। इस अवसर पर बीएसएफ अधिकारियों ने बताया कि अभियान लगातार जारी रहेगा। शहर के दूसरे सार्वजनिक स्थानों को भी बीएसएफ अभियान चलकर साफ सुथरा बनाएगा।   साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । चुनाव आयोग की नजर में राज्य के डेढ़ दर्जन से आईपीएस अफसर हैं। जल्द ही चुनाव आयोग इन अफसरों को मौजूदा पद से हटाकर नए जगह तैनात कर सकता है और इस पदों की कमान लोकसभा चुनाव के दौरान बेहतर काम करने वाले अफसरों का दी जा सकती है। इसमें राज्य के डीजीपी, एडीजी कानून व्यवस्था दलजीत चौधरी का भी नाम है। इसके साथ ही राज्य के प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पांडा को भी हटाने के पूरे संकेत हैं। ये वो अफसर हैं जो राज्य सरकार के करीबी माने जाते हैं।  नए डीजीपी के तौर पर सुलखान सिंह चुनाव आयोग की पहली पसंद हैं। सुलखान सिंह 1980 बैच के अफसर हैं और राज्य सरकार ने उनकी सीनियरटी को दरकिनार कर जावेद अहमद को राज्य का डीजीपी नियुक्त किया था।आयोग ने गृह विभाग से प्रदेश के जनपदों में तैनात आईपीएस अफसरों का ब्यौरा तलब किया था। इसमें कई पार्टियों ने जिलों के पुलिस कप्तानों पर मौजूदा सरकार की तरफ झुकाव की शिकायत की थी। इसमें से वह अफसर भी हैं जो पीपीएस से आईपीएस में प्रमोट किए गए हैं। जिन पुलिस कप्तानों को हटाने की पूरी संभावना है,उसमें गौतमबुद्धनगर, आगरा, कुशीनगर, बाराबंकी , लखनऊ, मुरादाबाद,एटा,गाजीपुर और गोंडा समेत करीब 14 जनपदों के पुलिस कप्तानों के नाम शामिल हैं।  जबकि अभी शंटिंग पोस्टिंग में रखें आईपीएस अफसर मनोज तिवारी, अमित पाठक, सुभाष चन्द दूबे, वैभव कृष्ण, सुरेश राव आनंद कुलकर्णी, अनीस अहमद अंसारी, समेत कई अफसरों को जिलों का कप्तान बनाया जा सकता है। इन अफसरों ने लोकसभा चुनाव में बेहतर काम किया था।   साभार-khaskhabar.com  

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बरेली । 2017 की ऐसी ‘भीष्म प्रतिज्ञा’ कि आप भी सुनकर हैरान रह जाएंगे। बरेली के समाजवादी लॉयर्स फ्रंट के पूर्व शहर अध्यक्ष प्रमोद यादव ने यह भीष्म प्रतिज्ञा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए की है। प्रमोद यादव ने अखिलेश की सेवा के लिए शादी न करने का फैसला किया है, क्योंकि उनकी ‘शादी’ तो समाजवादी पार्टी से हो चुकी है! 44 साल के प्रमोद ने पिछले एक दशक में पार्टी के लिए कई बार प्रचार किया है। अखिलेश को पार्टी से निकाले जाने के बाद उन्होंने विरोधस्वरूप लॉयर्स फ्रंट से भी नाता तोड़ लिया। भले ही मुलायम परिवार में चल रहे उठापटक से वह परेशान हैं लेकिन अखिलेश के लिए उनके सपॉर्ट में कोई कमी नहीं आई। प्रमोद कहते हैं, ‘नेताजी को अखिलेश को पार्टी अध्यक्ष बना देना चाहिए, जो भी हो मैं हमेशा अखिलेश के साथ हूं।’ प्रमोद ने बताया कि अखिलेश ने एक बार उन्हें एक लडक़ी से शादी का सुझाव दिया था, लेकिन पार्टी वर्कर और वकील होने के नाते अपने टाइट शेड्यूल का हवाला देकर बड़ी विनम्रता से शादी से इनकार कर दिया। प्रमोद ने बताया, ‘अखिलेश ने गोरखपुर में कन्या विद्या धन वितरण कार्यक्रम में जुटी भीड़ में पहुंची एक लडक़ी से शादी का सुझाव दिया था, उन्होंने शादी के बारे में मेरी राय मांगी थी और मैंने इनकार कर दिया था।’ जो लोग प्रमोद को जानते हैं, वे उन्हें अखिलेश का ब्लू-आइड बॉय (पसंदीदा) कहते हैं। प्रमोद की लंबाई 4 फुट से भी कम है। 3 फुट 8 इंच के प्रमोद पार्टी या अखिलेश के हर कार्यक्रम का आकर्षण बिंदु बने रहते हैं। हाल में सीएम अखिलेश ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर प्रमोद की कुछ तस्वीरें पोस्ट की थीं।    साभार-khaskhabar.com  

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बीकानेर । बेटी के जन्म की खुशी का इजहार अब उसके परिजनों के साथ-साथ जिला प्रशासन, चिकित्सक और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि पौधे लगाकर करेंगे। इसकी शुरूआत भी राष्ट्रीय बालिका दिवस (24 जनवरी) जैसे खास दिन से होगी। बालिका उपवन में लगाए गए इन पौधों की देखभाल बेटी के परिजनों और सरकारी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी। इस अभियान की पूर्व तैयारियों के संबंध में जिला कलक्टर वेदप्रकाश की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित हुई। जिला कलक्टर ने कहा कि कन्या जन्म को प्रोत्साहित करने तथा इसे एक उत्सव की भांति मनाने के उद्देश्य से यह नवाचार किया जा रहा है। राष्ट्रीय बालिका दिवस से इसकी शुरूआत होगी। इसके लिए जिला मुख्यालय पर पीबीएम और जिला अस्पताल में बालिका उपवन विकसित किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों से इसकी शुरूआत होगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी इसके प्रभारी होंगे।    साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । पहाडों पर हो रही बर्फबारी का असर जल्द ही लखनऊ के साथ ही मैदानी इलाकों में भी देखने को मिलेगा। पिछले दो दिनों से कोहरे की चादर में लिपटे उप्र में अगले कुछ दिनों में तापमान में और गिरावट आएगी। मौसम विभाग के अनुसार, कोहरे की वजह से दृश्यता में गिरावट आएगी। उप्र मौसम विभाग के निदेशक जे.पी गुप्ता के अनुसार, दिन में कोहरे का असर रहेगा। दृश्यता में कमी आएगी जिससे यातयात पर इसका असर पड़ेगा। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में दिखाई देगा और तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जाएगी। गुप्ता ने बताया कि उत्तराखंड, हिमाचल व जम्मू-कश्मीर में काफी बर्फबारी हुई है जो पिछले नौ वषरें की सर्वाधिक है। मौसम विभाग के अनुसार, लखनऊ का न्यूनतम तापमान गुरूवार को आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान जताया गया है। लखनऊ के अतिरिक्त बनारस का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस, कानपुर का 9.2 डिग्री सेल्सियस, गोरखपुर का आठ डिग्री सेल्सियस, इलाहाबाद का 8.5 डिग्री सेल्सियस और आगरा का सात डिग्री सेलिसयस दर्ज किया गया।   साभार-khaskhabar.com  

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धर्मशाला । मौसम की बेरुखी की पहले ही मार झेल चुका जसूर व नूरपुर के किन्नू पर राजस्थान के गंगानगर के किन्नू की मिठास भारी पड़ गई है। गंगानगर से किन्नू की सप्लाई पंजाब की मंडियों में की जा रही है, जहां से सीधे इसकी सप्लाई जिला कांगड़ा व चंबा क्षेत्रों में की जा रही है। जिला कांगड़ा के इन क्षेत्रों से भले ही सब्जी मंडियों में किन्नू की सप्लाई कम हो लेकिन इसकी आपूर्ति काफी हद तक गंगानगर से आने वाला किन्नू करने में लगा हुआ है। इनकी आपूर्ति अच्छी होने से भावों में भी नरमी है, ऐसे में खरीददार जसूर व नूरपुर के किन्नू की बजाय गंगानगर के किन्नू खरीदना अधिक पसंद कर रहा है। जिले में किन्नू मुख्यता नागपुर व पंजाब के गंगानगर से आता है।  नागपुर व गंगानगर से आने वाले किन्नू की परिवहन लागत भी अधिक होने से इसके भाव हमेशा अधिक रहते हैं जिसके कारण व्यापारियों की बिक्री पर भी इसका असर रहता है। ऐसे में स्थानीय मंडी के व्यापारी नागपुर व गंगानगर की बजाय जिला कांगड़ा के जसूर व नूरपुर से ही भारी मात्रा में किन्नू की सप्लाई मंगाते हैं परंतु इस बार जसूर व नूरपुर के किन्नू पर मौसम की मार पड़ी है जिससे यहां किन्नू की पैदावार तो कम हुई है, साथ में यहां का किन्नू गंगानगर के किन्नू के आगे फीका पड़ गया है, जिसके कारण बाजार में मंडियों में इसकी मांग दम तोड़ती जा रही है। आढ़ती भी गंगानगर के किन्नू की मंगा रहे हैं तथा इनकी मांग भी अभी तक अच्छी बनी हुई है। यहां का किन्नू फरवरी माह के पहले सप्ताह में आता था लेकिन वहां अच्छी फसल होने के कारण किन्नू जनवरी माह में ही आ चुका है जिसकी सप्लाई अप्रैल तक बनी रहेगी। इसकी वजह से अभी बाजार में गंगानगर का किन्नू ही अधिक छाया हुआ है जो संतरे की मांग को भी पूरा कर रहा है।  गंगानगर का किन्नू जिला की मंडियों में 20 से 25 रुपये किलो बेचा जा रहा है जो बाजार में ग्राहकों को 40 से 50 रुपये प्रति किलों के हिसाब से मिल रहा है। वहीं जिला कांगड़ा के जसूर व नूरपुर कि किन्नू की मांग कम होने के कारण यह मंडियों में 10 से 15 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है जो बाजार में गंगानगर के किन्नू की कीमत पर ही बेचा जा रहा है परंतु स्वाद में गंगानगर के किन्नू के आगे इसका स्वाद फीका पड़ चुका है जिसके कारण बाजार में इसकी मांग भी कम देखने को मिल रही है। हालांकि पिछले वर्ष जसूर व नूरपुर के किन्नू ने नागपुर व गंगानगर कि किन्नू को डिमांड में पीछे छोड़ दिया था। भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष सुरेश पठानिया, चमन सिंह, नरेंद्र शर्मा, अशोक कुमार, राकेश कुमार, तरसेम शर्मा के अनुसार समय पर वर्षा न होने के कारण व कोहरे के चलते किन्नू की पैदावार पर बुरा असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि वर्षा के बिना किन्नू, संतरा, आगरा, माल्टा व नींबू प्रजाति की किस्मों के फल को सही आकार नहीं मिल पाया है। इससे बागवानों को फल के सही दाम भी नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति में सरकार को बागवानों के हित में निर्णय लेना जरुरी है।  इस बारे में कृषि विशेषज्ञ डा. विकास डोगरा के अनुसार बागवानी खेती पर खूखे की मार के कारण फल के विकास में धीमी गति रही है जिसके कारण किन्नू का आकार जहां छोटा रहा है वहीं इसमें मिठास भी कम आंकी गई है। बागवानी के लिए समय पर वर्षा जरूरी है जिससे फल को सही आकार मिलता है तथा उसमें रस भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहता है।    साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । मोदी सरकार नोटबंदी के बाद देशभर के लोगों को बड़ा तोहफा दे सकती है। इसके तहत देश के हर नागरिक को हर महीने आमदनी के तौर पर एक तयशुदा रकम मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक, आर्थिक सर्वे और आम बजट में इसका ऐलान हो सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि अगर सबके लिए नहीं तो सरकार कम-से-कम उन जरूरतमंदों के लिए यह स्कीम लागू करेगी, जिनके पास कमाई का जरिया नहीं है। योजना की शुरुआत हर अकाउंट में 500 रुपये डाल कर हो सकती है। इससे देश भर के करीब 20 करोड़ जरूरतमंदों को फायदा मिल सकता है। यह प्रस्ताव लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गाय स्टैंडिंग ने तैयार किया है। उन्होंने इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में दावा किया कि मोदी सरकार से जुड़े एक जिम्मेदार शख्स ने पुष्टि की है कि बजट में इसका ऐलान मुमकिन है। प्रोफेसर गाय ने संकेत दिया कि सरकार इसे चरणबद्ध लागू कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मध्य प्रदेश की एक पंचायत में पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर ऐसी स्कीम पर काम किया था, जहां बेहद साकारत्मक नतीजे आए थे। मैंने अपने प्रॉपोजल में अमीर-गरीब सबके लिए निश्चित आमदनी की बात कही है। प्रोफेयर गाय पूरी दुनिया में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की पुरजोर वकालत करते रहे हैं। वैसे सरकारी सूत्रों ने बजट में इस स्कीम के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया, लेकिन प्रोफेसर गाय ने इस मसले पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, मुझे पिछले दिनों सरकार के टॉप अधिकारियों की ओर से बताया गया कि वे बजट सर्वे में मेरी रिपोर्ट को शामिल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार इसकी घोषणा करेगी। यह नरेंद्र मोदी का बहुत बोल्ड डिसीजन होगा और देश के इतिहास में गेमचेंजर हेागा। जब उनसे पूछा गया कि आपको यह ठोस संकेत किससे मिले, क्या आपकी पीएम मोदी से बात हुई है, तो प्रोफेसर गाय ने कहा, आपको बता दूं कि यूनिर्वसल बेसिक इनकम स्कीम पर पेश रिसर्च को इकनॉमिक सर्वे रिपोर्ट में शामिल किया गया है और नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविन्द पनगढिय़ा ने मुझसे इस बारे में बात की थी और जानकारी दी। प्रोफेसर गाय ने कहा कि यह योजना तभी सफल होगी जब अमीर-गरीब का भेद किए बिना हर नागरिक को खास इनकम हर महीने मिले। इसमें भेद किया तो फिर स्कीम अपने मूल रूप में नहीं रहेगी। भ्रष्टाचार बढ़ेगा। हां, एक बार सभी को पैसे देने के बाद जो गरीबी के दायरे से बाहर आएं उनसे सब्सिडी वापस लें या दूसरे तरीके से राशि वापसी का सिस्टम बनाएं। सभी को आधार नंबर से जोडक़र यह लाभ मिलेगा। यह पूछे जाने पर कि ऐसी स्कीम के लिए बहुत बड़े फंड की जरूरत होती है, तो क्या सरकार के पास फंड है, उन्होंने कहा, ‘मैंने अपनी रिपोर्ट में फंड के बारे में भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मेरे हिसाब से अगर स्कीम को पूरे देश में लागू किया जाता है तो जीडीपी का 3 से 4 फीसदी खर्च आएगा, जबकि अभी कुल जीडीपी का 4 से 5 फीसदी सरकार सब्सिडी में खर्च कर रही है। हां, इस स्कीम को लागू करने के बाद सरकार को चरणबद्ध तरीके से सब्सिडी समाप्त करने की दिशा मे भी कदम उठाना पड़ेगा। यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम और सब्सिडी दोनों साथ-साथ नहीं चल सकतीं। इसके अलावा इस स्कीम के लिए सरकार माइनिंग और बड़े प्रॉजेक्ट पर अलग से सरचार्ज निकालकर राशि जुटा सकती है। मुझे नहीं लगता है कि कहीं से फंड की कमी होगी। नोटबंदी का यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम से संबंध के बारे में उन्होंने कहा, ‘जहां तक मेरे प्रॉजेक्ट का सवाल है, दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं है। लेकिन नोटबंदी बहुत साहसिक फैसला है। नोटबंदी के बाद जो राशि आएगी उसका उपयोग सरकार इसमें कर सकती है, बस इतना संबंध है। हां, नोटबंदी के फैसले के बाद इतना जरूर संकेत मिला कि मोदी और बड़े जोखिम भरे फैसले कर सकते हैं।’ ऐसी स्कीम के लोगों को कुछ न करने की अधिक प्रेरणा देने की बात पर प्रोफेसर गाय ने कहा, ‘यह गलत धारणा है। दरअसल मध्य वर्ग पूर्वाग्रह ऐसी सोच के पीछे है। मध्य प्रदेश सहित विश्व के तमाम दूसरे इलाकों में हमने जब पायलट प्रॉजेक्ट पर काम किया तो पाया कि दरअसल इस स्कीम के बाद तो उनमें कुछ करने की अधिक प्रेरणा जगी। जब महीने की एक निश्चित इनकम के बारे में गरीबों को गारंटी मिली तो खुद को अपग्रेड करने और उससे अधिक कमाने की प्रेरणा अधिक मिली। आलोचक यूनिर्वसल बेसिक इनकम स्कीम को लेफ्ट आधारित पॉपुलिस्ट स्कीम के तौर पर भी देखते हैं। ऐसे में आर्थिक सुधार के हिमायती माने जाने वाली मोदी सरकार ऐसी स्कीम पर आगे बढऩे को कैसे तैयार हो गई? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, यह गलत सोच है कि यह स्कीम लेफ्ट केंद्रित है। वैसे भी, मुझे न कांग्रेस, न ही मोदी की नीतियों को अलग करके देखने की जरूरत है। कांग्रेस के शासन के दौरान भी इस स्कीम के बारे में सरकार ने मुझसे संपर्क किया था। लेकिन तब सरकार इसे लागू करने की हिम्मत नहीं कर सकी।’    साभार-khaskhabar.com  

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