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बरेली । 2017 की ऐसी ‘भीष्म प्रतिज्ञा’ कि आप भी सुनकर हैरान रह जाएंगे। बरेली के समाजवादी लॉयर्स फ्रंट के पूर्व शहर अध्यक्ष प्रमोद यादव ने यह भीष्म प्रतिज्ञा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए की है। प्रमोद यादव ने अखिलेश की सेवा के लिए शादी न करने का फैसला किया है, क्योंकि उनकी ‘शादी’ तो समाजवादी पार्टी से हो चुकी है! 44 साल के प्रमोद ने पिछले एक दशक में पार्टी के लिए कई बार प्रचार किया है। अखिलेश को पार्टी से निकाले जाने के बाद उन्होंने विरोधस्वरूप लॉयर्स फ्रंट से भी नाता तोड़ लिया। भले ही मुलायम परिवार में चल रहे उठापटक से वह परेशान हैं लेकिन अखिलेश के लिए उनके सपॉर्ट में कोई कमी नहीं आई। प्रमोद कहते हैं, ‘नेताजी को अखिलेश को पार्टी अध्यक्ष बना देना चाहिए, जो भी हो मैं हमेशा अखिलेश के साथ हूं।’ प्रमोद ने बताया कि अखिलेश ने एक बार उन्हें एक लडक़ी से शादी का सुझाव दिया था, लेकिन पार्टी वर्कर और वकील होने के नाते अपने टाइट शेड्यूल का हवाला देकर बड़ी विनम्रता से शादी से इनकार कर दिया। प्रमोद ने बताया, ‘अखिलेश ने गोरखपुर में कन्या विद्या धन वितरण कार्यक्रम में जुटी भीड़ में पहुंची एक लडक़ी से शादी का सुझाव दिया था, उन्होंने शादी के बारे में मेरी राय मांगी थी और मैंने इनकार कर दिया था।’ जो लोग प्रमोद को जानते हैं, वे उन्हें अखिलेश का ब्लू-आइड बॉय (पसंदीदा) कहते हैं। प्रमोद की लंबाई 4 फुट से भी कम है। 3 फुट 8 इंच के प्रमोद पार्टी या अखिलेश के हर कार्यक्रम का आकर्षण बिंदु बने रहते हैं। हाल में सीएम अखिलेश ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर प्रमोद की कुछ तस्वीरें पोस्ट की थीं।    साभार-khaskhabar.com  

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बीकानेर । बेटी के जन्म की खुशी का इजहार अब उसके परिजनों के साथ-साथ जिला प्रशासन, चिकित्सक और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि पौधे लगाकर करेंगे। इसकी शुरूआत भी राष्ट्रीय बालिका दिवस (24 जनवरी) जैसे खास दिन से होगी। बालिका उपवन में लगाए गए इन पौधों की देखभाल बेटी के परिजनों और सरकारी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी। इस अभियान की पूर्व तैयारियों के संबंध में जिला कलक्टर वेदप्रकाश की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित हुई। जिला कलक्टर ने कहा कि कन्या जन्म को प्रोत्साहित करने तथा इसे एक उत्सव की भांति मनाने के उद्देश्य से यह नवाचार किया जा रहा है। राष्ट्रीय बालिका दिवस से इसकी शुरूआत होगी। इसके लिए जिला मुख्यालय पर पीबीएम और जिला अस्पताल में बालिका उपवन विकसित किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों से इसकी शुरूआत होगी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी इसके प्रभारी होंगे।    साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । पहाडों पर हो रही बर्फबारी का असर जल्द ही लखनऊ के साथ ही मैदानी इलाकों में भी देखने को मिलेगा। पिछले दो दिनों से कोहरे की चादर में लिपटे उप्र में अगले कुछ दिनों में तापमान में और गिरावट आएगी। मौसम विभाग के अनुसार, कोहरे की वजह से दृश्यता में गिरावट आएगी। उप्र मौसम विभाग के निदेशक जे.पी गुप्ता के अनुसार, दिन में कोहरे का असर रहेगा। दृश्यता में कमी आएगी जिससे यातयात पर इसका असर पड़ेगा। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में दिखाई देगा और तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जाएगी। गुप्ता ने बताया कि उत्तराखंड, हिमाचल व जम्मू-कश्मीर में काफी बर्फबारी हुई है जो पिछले नौ वषरें की सर्वाधिक है। मौसम विभाग के अनुसार, लखनऊ का न्यूनतम तापमान गुरूवार को आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जबकि अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान जताया गया है। लखनऊ के अतिरिक्त बनारस का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस, कानपुर का 9.2 डिग्री सेल्सियस, गोरखपुर का आठ डिग्री सेल्सियस, इलाहाबाद का 8.5 डिग्री सेल्सियस और आगरा का सात डिग्री सेलिसयस दर्ज किया गया।   साभार-khaskhabar.com  

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धर्मशाला । मौसम की बेरुखी की पहले ही मार झेल चुका जसूर व नूरपुर के किन्नू पर राजस्थान के गंगानगर के किन्नू की मिठास भारी पड़ गई है। गंगानगर से किन्नू की सप्लाई पंजाब की मंडियों में की जा रही है, जहां से सीधे इसकी सप्लाई जिला कांगड़ा व चंबा क्षेत्रों में की जा रही है। जिला कांगड़ा के इन क्षेत्रों से भले ही सब्जी मंडियों में किन्नू की सप्लाई कम हो लेकिन इसकी आपूर्ति काफी हद तक गंगानगर से आने वाला किन्नू करने में लगा हुआ है। इनकी आपूर्ति अच्छी होने से भावों में भी नरमी है, ऐसे में खरीददार जसूर व नूरपुर के किन्नू की बजाय गंगानगर के किन्नू खरीदना अधिक पसंद कर रहा है। जिले में किन्नू मुख्यता नागपुर व पंजाब के गंगानगर से आता है।  नागपुर व गंगानगर से आने वाले किन्नू की परिवहन लागत भी अधिक होने से इसके भाव हमेशा अधिक रहते हैं जिसके कारण व्यापारियों की बिक्री पर भी इसका असर रहता है। ऐसे में स्थानीय मंडी के व्यापारी नागपुर व गंगानगर की बजाय जिला कांगड़ा के जसूर व नूरपुर से ही भारी मात्रा में किन्नू की सप्लाई मंगाते हैं परंतु इस बार जसूर व नूरपुर के किन्नू पर मौसम की मार पड़ी है जिससे यहां किन्नू की पैदावार तो कम हुई है, साथ में यहां का किन्नू गंगानगर के किन्नू के आगे फीका पड़ गया है, जिसके कारण बाजार में मंडियों में इसकी मांग दम तोड़ती जा रही है। आढ़ती भी गंगानगर के किन्नू की मंगा रहे हैं तथा इनकी मांग भी अभी तक अच्छी बनी हुई है। यहां का किन्नू फरवरी माह के पहले सप्ताह में आता था लेकिन वहां अच्छी फसल होने के कारण किन्नू जनवरी माह में ही आ चुका है जिसकी सप्लाई अप्रैल तक बनी रहेगी। इसकी वजह से अभी बाजार में गंगानगर का किन्नू ही अधिक छाया हुआ है जो संतरे की मांग को भी पूरा कर रहा है।  गंगानगर का किन्नू जिला की मंडियों में 20 से 25 रुपये किलो बेचा जा रहा है जो बाजार में ग्राहकों को 40 से 50 रुपये प्रति किलों के हिसाब से मिल रहा है। वहीं जिला कांगड़ा के जसूर व नूरपुर कि किन्नू की मांग कम होने के कारण यह मंडियों में 10 से 15 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है जो बाजार में गंगानगर के किन्नू की कीमत पर ही बेचा जा रहा है परंतु स्वाद में गंगानगर के किन्नू के आगे इसका स्वाद फीका पड़ चुका है जिसके कारण बाजार में इसकी मांग भी कम देखने को मिल रही है। हालांकि पिछले वर्ष जसूर व नूरपुर के किन्नू ने नागपुर व गंगानगर कि किन्नू को डिमांड में पीछे छोड़ दिया था। भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष सुरेश पठानिया, चमन सिंह, नरेंद्र शर्मा, अशोक कुमार, राकेश कुमार, तरसेम शर्मा के अनुसार समय पर वर्षा न होने के कारण व कोहरे के चलते किन्नू की पैदावार पर बुरा असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि वर्षा के बिना किन्नू, संतरा, आगरा, माल्टा व नींबू प्रजाति की किस्मों के फल को सही आकार नहीं मिल पाया है। इससे बागवानों को फल के सही दाम भी नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति में सरकार को बागवानों के हित में निर्णय लेना जरुरी है।  इस बारे में कृषि विशेषज्ञ डा. विकास डोगरा के अनुसार बागवानी खेती पर खूखे की मार के कारण फल के विकास में धीमी गति रही है जिसके कारण किन्नू का आकार जहां छोटा रहा है वहीं इसमें मिठास भी कम आंकी गई है। बागवानी के लिए समय पर वर्षा जरूरी है जिससे फल को सही आकार मिलता है तथा उसमें रस भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहता है।    साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । मोदी सरकार नोटबंदी के बाद देशभर के लोगों को बड़ा तोहफा दे सकती है। इसके तहत देश के हर नागरिक को हर महीने आमदनी के तौर पर एक तयशुदा रकम मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक, आर्थिक सर्वे और आम बजट में इसका ऐलान हो सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि अगर सबके लिए नहीं तो सरकार कम-से-कम उन जरूरतमंदों के लिए यह स्कीम लागू करेगी, जिनके पास कमाई का जरिया नहीं है। योजना की शुरुआत हर अकाउंट में 500 रुपये डाल कर हो सकती है। इससे देश भर के करीब 20 करोड़ जरूरतमंदों को फायदा मिल सकता है। यह प्रस्ताव लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गाय स्टैंडिंग ने तैयार किया है। उन्होंने इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में दावा किया कि मोदी सरकार से जुड़े एक जिम्मेदार शख्स ने पुष्टि की है कि बजट में इसका ऐलान मुमकिन है। प्रोफेसर गाय ने संकेत दिया कि सरकार इसे चरणबद्ध लागू कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मध्य प्रदेश की एक पंचायत में पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर ऐसी स्कीम पर काम किया था, जहां बेहद साकारत्मक नतीजे आए थे। मैंने अपने प्रॉपोजल में अमीर-गरीब सबके लिए निश्चित आमदनी की बात कही है। प्रोफेयर गाय पूरी दुनिया में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की पुरजोर वकालत करते रहे हैं। वैसे सरकारी सूत्रों ने बजट में इस स्कीम के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया, लेकिन प्रोफेसर गाय ने इस मसले पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, मुझे पिछले दिनों सरकार के टॉप अधिकारियों की ओर से बताया गया कि वे बजट सर्वे में मेरी रिपोर्ट को शामिल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार इसकी घोषणा करेगी। यह नरेंद्र मोदी का बहुत बोल्ड डिसीजन होगा और देश के इतिहास में गेमचेंजर हेागा। जब उनसे पूछा गया कि आपको यह ठोस संकेत किससे मिले, क्या आपकी पीएम मोदी से बात हुई है, तो प्रोफेसर गाय ने कहा, आपको बता दूं कि यूनिर्वसल बेसिक इनकम स्कीम पर पेश रिसर्च को इकनॉमिक सर्वे रिपोर्ट में शामिल किया गया है और नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविन्द पनगढिय़ा ने मुझसे इस बारे में बात की थी और जानकारी दी। प्रोफेसर गाय ने कहा कि यह योजना तभी सफल होगी जब अमीर-गरीब का भेद किए बिना हर नागरिक को खास इनकम हर महीने मिले। इसमें भेद किया तो फिर स्कीम अपने मूल रूप में नहीं रहेगी। भ्रष्टाचार बढ़ेगा। हां, एक बार सभी को पैसे देने के बाद जो गरीबी के दायरे से बाहर आएं उनसे सब्सिडी वापस लें या दूसरे तरीके से राशि वापसी का सिस्टम बनाएं। सभी को आधार नंबर से जोडक़र यह लाभ मिलेगा। यह पूछे जाने पर कि ऐसी स्कीम के लिए बहुत बड़े फंड की जरूरत होती है, तो क्या सरकार के पास फंड है, उन्होंने कहा, ‘मैंने अपनी रिपोर्ट में फंड के बारे में भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मेरे हिसाब से अगर स्कीम को पूरे देश में लागू किया जाता है तो जीडीपी का 3 से 4 फीसदी खर्च आएगा, जबकि अभी कुल जीडीपी का 4 से 5 फीसदी सरकार सब्सिडी में खर्च कर रही है। हां, इस स्कीम को लागू करने के बाद सरकार को चरणबद्ध तरीके से सब्सिडी समाप्त करने की दिशा मे भी कदम उठाना पड़ेगा। यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम और सब्सिडी दोनों साथ-साथ नहीं चल सकतीं। इसके अलावा इस स्कीम के लिए सरकार माइनिंग और बड़े प्रॉजेक्ट पर अलग से सरचार्ज निकालकर राशि जुटा सकती है। मुझे नहीं लगता है कि कहीं से फंड की कमी होगी। नोटबंदी का यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम से संबंध के बारे में उन्होंने कहा, ‘जहां तक मेरे प्रॉजेक्ट का सवाल है, दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं है। लेकिन नोटबंदी बहुत साहसिक फैसला है। नोटबंदी के बाद जो राशि आएगी उसका उपयोग सरकार इसमें कर सकती है, बस इतना संबंध है। हां, नोटबंदी के फैसले के बाद इतना जरूर संकेत मिला कि मोदी और बड़े जोखिम भरे फैसले कर सकते हैं।’ ऐसी स्कीम के लोगों को कुछ न करने की अधिक प्रेरणा देने की बात पर प्रोफेसर गाय ने कहा, ‘यह गलत धारणा है। दरअसल मध्य वर्ग पूर्वाग्रह ऐसी सोच के पीछे है। मध्य प्रदेश सहित विश्व के तमाम दूसरे इलाकों में हमने जब पायलट प्रॉजेक्ट पर काम किया तो पाया कि दरअसल इस स्कीम के बाद तो उनमें कुछ करने की अधिक प्रेरणा जगी। जब महीने की एक निश्चित इनकम के बारे में गरीबों को गारंटी मिली तो खुद को अपग्रेड करने और उससे अधिक कमाने की प्रेरणा अधिक मिली। आलोचक यूनिर्वसल बेसिक इनकम स्कीम को लेफ्ट आधारित पॉपुलिस्ट स्कीम के तौर पर भी देखते हैं। ऐसे में आर्थिक सुधार के हिमायती माने जाने वाली मोदी सरकार ऐसी स्कीम पर आगे बढऩे को कैसे तैयार हो गई? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, यह गलत सोच है कि यह स्कीम लेफ्ट केंद्रित है। वैसे भी, मुझे न कांग्रेस, न ही मोदी की नीतियों को अलग करके देखने की जरूरत है। कांग्रेस के शासन के दौरान भी इस स्कीम के बारे में सरकार ने मुझसे संपर्क किया था। लेकिन तब सरकार इसे लागू करने की हिम्मत नहीं कर सकी।’    साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । उत्तर भारत के कई हिस्सों में बुधवार सुबह घने कोहरे की वजह से 67 रेलगाडिय़ां देरी से चल रही हैं, जबकि छह रद्द हो गई हैं। रेलवे अधिकारी ने बताया कि रद्द हुई छह रेलगाडिय़ों में से चार बुधवार को रवाना होनी थी जबकि दो गुरुवार को रवाना होनी थी। अधिकारी ने बताया कि बुधवार को 15 रेलगाडिय़ों के समय में फेरबदल किया गया है। जिन रेलगाडिय़ों को बुधवार को रद्द किया गया है उनमें वाराणसी-जोधपुर मरुधर एक्सप्रेस, नई दिल्ली-वाराणसी काशी विश्वनाथ, देहरादून-हावड़ा उपासना एक्सप्रेस और नई दिल्ली-राजेंद्र नगर राजधानी एक्सप्रेस हैं। दिल्ली जंक्शन-माल्दा टाउन फराक्का एक्सप्रेस और नई दिल्ली-पुरी एक्सप्रेस को गुरुवार को रद्द कर दिया गया। बिहार में सुबह धुंध छाई, तापमान में गिरावट   पटना। बिहार में राजधानी पटना तथा इसके आसपास के क्षेत्रों में बुधवार सुबह कोहरे और चल रही ठंडी हवा के कारण तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई। पटना का बुधवार को न्यूनतम तापमान 12.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पटना मौसम विज्ञान केंद्र ने पूर्वानुमान में कहा है कि अगले एक-दो दिनों तक सुबह कोहरा रहेगा और दिन चढऩे के बाद गुनगुनी धूप रहेगी। पछुआ हवा चलने से ठंड में वृद्धि होगी।  केंद्र के अनुसार, गया में बुधवार को न्यूनतम तापमान 10.2 डिग्री, भागलपुर का 14.1 डिग्री तथा पूर्णिया का 14.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पटना का बुधवार को अधिकतम तापमान 21.0 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने की संभावना है।   साभार-khaskhabar.com  

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इलाहाबाद । स्वरूपानंद सरस्वती या फिर वासुदेवानंद सरस्वती ? आखिर कौन होगा बद्रिकाश्रम का शंकराचार्य ? यह सवाल कई महीनों से धर्माचार्य व मठाधीशों के बीच गूंज रहा है। स्वरूपानंद सरस्वती और वासुदेवानंद सरस्वती में से वैध शंकराचार्य कौन होगा इसका जवाब हमें जल्द ही मिल जाएगा। क्योंकि इस मामले की सुनवाई पूरी करते हुये इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और जल्द ही फैसला सुनाने की तिथि भी मुकर्रर होगी। मालूम हो कि देश की चार धर्मपीठों में से ज्योतिषपीठ बद्रिकाश्रम का महत्व विश्वविख्यात है। परन्तु इस पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर विवाद चल रहा है। वैध शंकराचार्य को लेकर लोवर कोर्ट से मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट इस मामले की रोज सुनवाई कर रहा था और इसी मामले पर महीनों से बहस भी चल रही थी। जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुये फैसला सुरक्षित कर लिया है। गौरतलब है कि लोवर कोर्ट ने स्वामी वासुदेवानंद को शंकराचार्य न मानते हुए क्षत्र, चंवर व सिंहासन आदि को धारण करने पर भी रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट तथा बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वामी वासुदेवानंद को लोवर कोर्ट के आदेश के खिलाफ अंतरिम आदेश देने पर रोक लगा दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ज्योतिषपीठ बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य को तय करने के लिए हाईकोर्ट के दो जजों की खंडपीठ ने अवकाश छोड़कर हर रोज सुनवाई की। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति केजे ठाकुर की खंडपीठ कर रही है। साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । उत्तर प्रदेश में एक तरफ जहां सभी राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य की सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी में मची कलह खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। मंगलवार को कई बैठकें और मुलाकातों के बाद भी पिता-बेटे के बीच कोई सुलह नहीं हो पाई। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खान बुधवार को एक बार फिर अंतिम बार अखिलेश-मुलायम के बीच सुलह कराने का प्रयास करेंगे। आजम खान ने कहा था कि इस विवाद को खत्म करने के लिए जो भी करना पड़ेगा करेंगे, जिसके हाथ जोडऩे पड़ेंगे जोड़ लेंगे। जल्द ये तकरार खत्म हो जाएगी। आजम खान वैसे तो किसी के आगे जल्दी झुकते नहीं हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी में जारी तकरार को खत्म करने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार हैं। पार्टी में जारी घमासान को सुलझाने के लिए आजम खान ने मुलायम सिंह से मुलाकात की है और आज फिर से मुलाकातों का दौर चलने वाला है। मुलायम से मिलने आजम कल दिल्ली गए थे, लेकिन मुलायम तब तक लखनऊ पहुंच गए। आजम खान हालांकि बुधवार को लखनऊ पहुंच गए हैं और मुख्यमंत्री को लेकर उनके पिता मुलायम सिंह यादव के पास जाएंगे। आजम ने कहा, ‘सुलह की एक और कोशिश करूंगा। हालांकि मुझे अपनी हद के बारे में पता है। मैं उतनी ही चादर फैलाने का प्रयास करूंगा जितना मेरे पास है। एक सीमा तक ही मैं इस मामले में दखल दे सकता हूं उसके बाद नहीं।’ उल्लेखनीय है कि मंगलवार को अखिलेश व मुलायम सिंह यादव के बीच करीब तीन घंटे तक बातचीत हुई थी। लेकिन अखिलेश अब भी अपनी शर्तों पर कायम हैं, जिसके चलते कल सुलह की कोशिश के बाद भी रास्ता नहीं निकल पाया है। सपा सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने जो शर्तें रखी हैं उसके अनुसार, सपा के राष्ट्रीय महासचिव अमर सिंह को पार्टी से बाहर करना, शिवपाल यादव को राष्ट्रीय स्तर पर भेजना और स्वयं मुख्यमंत्री को उत्तर प्रदेश में विधानसभा टिकट के बंटवारे का अधिकार देना शामिल है। लेकिन मुलायम सिंह यादव अमर सिंह को पार्टी से बाहर निकालने के लिए राजी नहीं हैं। उन्होंने भी अखिलेश से राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटने और रामगोपाल को पार्टी से बाहर रखने की बात कही है, लेकिन अखिलेश इस पर तैयार नहीं हैं। साभार-khaskhabar.com  

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उत्तर प्रदेश । उत्तराखंड समेत 5 राज्यों में 4 जनवरी से आचारसंहिता लग सकती है। सूत्र बता रहे हैं कि चुनाव आयोग 4 जनवरी को प्रेस कॉन्फ़्रेन्स कर चुनावों का ऐलान कर सकता है। पहले चरण का मतदान 4 फरवरी से शुरू हो सकता है। उत्तर प्रदेश में 7 चरणो में चुनाव हो सकते है। वही इसी सम्बंध में मुख्य चुनाव आयुक्त पाँच राज्यों के मुख्य निर्वाचन आयुक्तों के साथ बैठक करेंगे। हर राजनीतिक दल को 4 जनवरी का बेसब्री से इंतज़ार है। साभार-khaskhabar.com  

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कानपुर । गत वर्ष मई को लखनऊ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की गई भवन निर्माण मजदूरों को उनके कार्यस्थल पर ही 10 रुपये में भोजन मुहैया कराने की योजना अब कानपुर में भी चार जनवरी से शुरू हो जाएगी। इस योजना का शुभारंभ करने श्रम एवं सेवायोजन मंत्री शाहिद मंजूर आएंगे। इसके तहत भवन निर्माण मजदूरों को 10 रुपये का एक कूपन लेना होगा जिसके तहत उसे कार्यस्थल पर ही भोजन पहुंचाया जाएगा। योजना का लाभ उसी कार्यस्थल पर दिया जाएगा जहां 50 या उससे अधिक भवन निर्माण मजदूर काम कर रहे हों। अधिकारियों ने सिग्नेचर सिटी विकास नगर, पनकी के जवाहरपुरम एवं शताब्दी नगर सहित शहर के 15 कार्यस्थल चिन्हित किए थे किंतु पहले चरण में सिग्नेचर सिटी, विकास नगर को ही लिया गया है। जिसके तहत यहां पर पहले दिन 250 मजदूरों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराया जाएगा फिर जरूरत के मुताबिक अन्य जगहों पर भी आपूर्ति की जाएगी। इस प्रकार रहेगा मेन्यू पहले मेन्यू में 6 रोटी, दो प्रकार की सब्जी, 20 ग्राम गुड़, 40 ग्राम सलाद, अचार और 2 हरी मिर्च दी जाएंगी। जबकि दूसरे मेन्यू में 400 ग्राम चावल, 2 सब्जियां, 250 ग्राम दाल, 20 ग्राम गुड़, 40 ग्राम सलाद, अचार और 2 हरी मिर्च मिलेगी। योजना के तहत आपूर्ति संस्था की यह भी जिम्मेदारी होगी कि वह दोपहर 12 बजे तक मजदूरों को कार्यस्थल पर भोजन उपलब्ध करा दें। गौरतलब है कि इस योजना का शुभारंभ सीएम अखिलेश यादव ने 1 मई 2016 को राजधानी लखनऊ में भवन निर्माण मजदूरों के साथ भोजन करके किया था।  साभार-khaskhabar.com  

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मुंबई । गूगल ने डूडल के जरिए 19वीं सदी की समाज सुधारक सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले को उनकी 186वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी है। वह भारत की पहली नारीवादी मानी जाती हैं जिन्होंने महिलाओं के अधिकार के लिए आवाज बुलंद की।सावित्रीबाई के. पाटिल का जन्म 3 जनवरी 1831 को एक अमीर और प्रभावशाली किसान परिवार में हुआ था। नौ साल की आयु में उनकी शादी 13 साल के ज्योतिराव फुले से हो गई। सावित्रीबाई को उनके पति ने पढऩा-लिखना सीखाया और जब वह 17 साल की हुईं इस दंपति ने लड़कियों और महिलाओं के लिए पुणे के भीडेवाड़ा में पहला स्कूल खोला। रूढिवादी भारतीय समाज में इस कदम को ऐतिहासिक माना गया। भारत में ब्रिटिश शासन काल के दौरान बाल विवाह, सती प्रथा, सामाजिक भेदभाव जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ उन्होनें आवाज उठाई। महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया । रंगीन डूडल में सावित्रीबाई व्यापक शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए समाज की सभी वर्गो की महिलाओं को अपने पल्लू में समेटे हुए हैं। लगभग 18 दशक बाद महाराष्ट्र सरकार ने सावित्रीबाई फुले के सम्मान में पुणे विश्वविद्यालय का नाम सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय कर दिया।   साभार-khaskhabar.com  

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वाराणसी । जिले में शीतलहर का प्रकोप लगातार जारी है। ठंड का आलम यह हैं कि नए साल पर लोगों को सूर्य के दर्शन तक नहीं हुए हैं। बाबतपुर स्थित मौसम कार्यालय के अनुसार रविवार को अधिकतम तापमान 16.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। न्यूनतम तापमान में वृद्धि जरूर हुई है पर अधिकतम व न्यूनतम तापमान में बहुत अंतर न होने के चलते कपड़ों में लदे लोग दिन भर ठंड से ठिठुरते रहे। दिन ढलने के बाद ठंडी हवा की बयार चलने लगी जिसके चलते सिहरन और बढ़ गई, ऐसे में सड़कों पर भी जल्द ही सन्नाटा छा गया। हालांकि रविवार के चलते बाजार बंद थे लेकिन नए साल के जश्न में डूबे लोगों ने भी घरों में दुबके रहने में ही अपनी भलाई समझी।  लोगों का कहना है कि जिलाधिकारी तो ठंड के चलते स्कूलों और कॉलेजों में लगातार छुट्टी करते जा रहे हैं लेकिन अलाव पर न जिला प्रशासन की नजर है न ही नगर निगम प्रशासन की। राहगीर हों या रिक्शा ट्रॉली चालक शहर में किसी के लिए भी इस ठंड से बचाव को कोई रास्ता नहीं है। नगर निगम चाहे जो दावा करे पर अलाव कहीं दिख नहीं रहे हैं। जहां कहीं कुछ लकड़ियां डाली भी गई है वो गीली होने के कारण जल नहीं पा रही है। अस्पतालों में ठण्ड से पीड़ित मरीजों की संख्या भी निरन्तर बढ़ती जा रही है। पुरवा और पछुआ के सम्मिलित योग से ठण्ड का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। साथ ही मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी बारिश के कोई आसार नहीं है।  साभार-khaskhabar.com  

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