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इलाहाबाद । स्वरूपानंद सरस्वती या फिर वासुदेवानंद सरस्वती ? आखिर कौन होगा बद्रिकाश्रम का शंकराचार्य ? यह सवाल कई महीनों से धर्माचार्य व मठाधीशों के बीच गूंज रहा है। स्वरूपानंद सरस्वती और वासुदेवानंद सरस्वती में से वैध शंकराचार्य कौन होगा इसका जवाब हमें जल्द ही मिल जाएगा। क्योंकि इस मामले की सुनवाई पूरी करते हुये इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और जल्द ही फैसला सुनाने की तिथि भी मुकर्रर होगी।
मालूम हो कि देश की चार धर्मपीठों में से ज्योतिषपीठ बद्रिकाश्रम का महत्व विश्वविख्यात है। परन्तु इस पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर विवाद चल रहा है। वैध शंकराचार्य को लेकर लोवर कोर्ट से मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट इस मामले की रोज सुनवाई कर रहा था और इसी मामले पर महीनों से बहस भी चल रही थी। जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुये फैसला सुरक्षित कर लिया है।
गौरतलब है कि लोवर कोर्ट ने स्वामी वासुदेवानंद को शंकराचार्य न मानते हुए क्षत्र, चंवर व सिंहासन आदि को धारण करने पर भी रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट तथा बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वामी वासुदेवानंद को लोवर कोर्ट के आदेश के खिलाफ अंतरिम आदेश देने पर रोक लगा दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ज्योतिषपीठ बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य को तय करने के लिए हाईकोर्ट के दो जजों की खंडपीठ ने अवकाश छोड़कर हर रोज सुनवाई की।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति केजे ठाकुर की खंडपीठ कर रही है।
साभार-khaskhabar.com













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