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गंगानगर के किन्नू के आगे फीकी पड़ी कांगड़ा के किन्नू की मिठास

गंगानगर के किन्नू के आगे फीकी पड़ी कांगड़ा के किन्नू की मिठासधर्मशाला । मौसम की बेरुखी की पहले ही मार झेल चुका जसूर व नूरपुर के किन्नू पर राजस्थान के गंगानगर के किन्नू की मिठास भारी पड़ गई है। गंगानगर से किन्नू की सप्लाई पंजाब की मंडियों में की जा रही है, जहां से सीधे इसकी सप्लाई जिला कांगड़ा व चंबा क्षेत्रों में की जा रही है। जिला कांगड़ा के इन क्षेत्रों से भले ही सब्जी मंडियों में किन्नू की सप्लाई कम हो लेकिन इसकी आपूर्ति काफी हद तक गंगानगर से आने वाला किन्नू करने में लगा हुआ है। इनकी आपूर्ति अच्छी होने से भावों में भी नरमी है, ऐसे में खरीददार जसूर व नूरपुर के किन्नू की बजाय गंगानगर के किन्नू खरीदना अधिक पसंद कर रहा है। जिले में किन्नू मुख्यता नागपुर व पंजाब के गंगानगर से आता है। 

नागपुर व गंगानगर से आने वाले किन्नू की परिवहन लागत भी अधिक होने से इसके भाव हमेशा अधिक रहते हैं जिसके कारण व्यापारियों की बिक्री पर भी इसका असर रहता है। ऐसे में स्थानीय मंडी के व्यापारी नागपुर व गंगानगर की बजाय जिला कांगड़ा के जसूर व नूरपुर से ही भारी मात्रा में किन्नू की सप्लाई मंगाते हैं परंतु इस बार जसूर व नूरपुर के किन्नू पर मौसम की मार पड़ी है जिससे यहां किन्नू की पैदावार तो कम हुई है, साथ में यहां का किन्नू गंगानगर के किन्नू के आगे फीका पड़ गया है, जिसके कारण बाजार में मंडियों में इसकी मांग दम तोड़ती जा रही है। आढ़ती भी गंगानगर के किन्नू की मंगा रहे हैं तथा इनकी मांग भी अभी तक अच्छी बनी हुई है। यहां का किन्नू फरवरी माह के पहले सप्ताह में आता था लेकिन वहां अच्छी फसल होने के कारण किन्नू जनवरी माह में ही आ चुका है जिसकी सप्लाई अप्रैल तक बनी रहेगी। इसकी वजह से अभी बाजार में गंगानगर का किन्नू ही अधिक छाया हुआ है जो संतरे की मांग को भी पूरा कर रहा है। 

गंगानगर का किन्नू जिला की मंडियों में 20 से 25 रुपये किलो बेचा जा रहा है जो बाजार में ग्राहकों को 40 से 50 रुपये प्रति किलों के हिसाब से मिल रहा है। वहीं जिला कांगड़ा के जसूर व नूरपुर कि किन्नू की मांग कम होने के कारण यह मंडियों में 10 से 15 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है जो बाजार में गंगानगर के किन्नू की कीमत पर ही बेचा जा रहा है परंतु स्वाद में गंगानगर के किन्नू के आगे इसका स्वाद फीका पड़ चुका है जिसके कारण बाजार में इसकी मांग भी कम देखने को मिल रही है। हालांकि पिछले वर्ष जसूर व नूरपुर के किन्नू ने नागपुर व गंगानगर कि किन्नू को डिमांड में पीछे छोड़ दिया था।

भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष सुरेश पठानिया, चमन सिंह, नरेंद्र शर्मा, अशोक कुमार, राकेश कुमार, तरसेम शर्मा के अनुसार समय पर वर्षा न होने के कारण व कोहरे के चलते किन्नू की पैदावार पर बुरा असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि वर्षा के बिना किन्नू, संतरा, आगरा, माल्टा व नींबू प्रजाति की किस्मों के फल को सही आकार नहीं मिल पाया है। इससे बागवानों को फल के सही दाम भी नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूखे की स्थिति में सरकार को बागवानों के हित में निर्णय लेना जरुरी है। 

इस बारे में कृषि विशेषज्ञ डा. विकास डोगरा के अनुसार बागवानी खेती पर खूखे की मार के कारण फल के विकास में धीमी गति रही है जिसके कारण किन्नू का आकार जहां छोटा रहा है वहीं इसमें मिठास भी कम आंकी गई है। बागवानी के लिए समय पर वर्षा जरूरी है जिससे फल को सही आकार मिलता है तथा उसमें रस भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहता है।   

साभार-khaskhabar.com

 

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