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स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’ || लखनऊ : अखिलेश का दावा, SIR पर चुनाव आयोग में ही मतभेद, बताया- लोकतंत्र के लिए घातक || चेन्नई : राहुल गांधी अगले महीने तमिलनाडु में कर सकते हैं 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम || उत्तर प्रदेश : गोंडा में मुठभेड़ के बाद तीन गौतस्कर गिरफ्तार, बहराइच में शातिर अपराधी पुलिस की गोली लगने से घायल

मथुरा । भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने के अपने पर सफाई दी है। साक्षी महाराज शुक्रवार को वृन्दावन पहुंचे जहां उन्होंने बुर्का पर दिए बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने पर कोई विवादित बयान नहीं दिया है। उनका कहना था कि जैसे साधू भेष में कई लोग अपराध करते हैं वैसे ही बुर्का पहनने वालों की भी जांच होनी चाहिए। उनकी कई पुरुषों से मुलाकात हुई है जिसमे उन्होंने कहा है कि पुरुष बुर्का पहनकर वोट डाल कर आए है। उन्होने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के बुर्का पहनने पर मैंने कोई विवादित बयान नहीं दिया है। मैंने कहा कि जैसे साधु भेष का लोग दुरुपयोग करते हैं। कोई चोर डकैत भी बाबाजी बनकर चोरी अपरहण, बलात्कार कर देता है, फिर लोग कहते हैं कि बाबाजी ने किया है। उन्होंने कब्रिस्तान पर दिए बयान पर कहा कि हमारे साधू-संतों की संख्या देश में करीब 3 करोड़ है। हमको भी दफनाया या समाधी दी जाती है। इस तरह से तो कुछ जमीन समाधी में कुछ कब्रिस्तान में तो कुछ श्मशान में ही चली जाएगी। हिंदुस्तान बहुत बड़ा देश है जहां जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। मैंने ये बहस के लिए अपने विचार रखे हैं। विदेशों में कई जगह जलाने की परम्परा शुरू हो गई है।   साभार-khaskhabar.com  

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तिरुमाला । तिरुपति मंदिर प्रशासन ने नरेंद्र मोदी सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को पुराने नोटों में मिले चढ़ावे को लेकर पत्र लिखा है। नोटबंदी से देशभर की जनता ने बैंकों और एटीएम के सामने लाइनों में घंटों खड़े रहकर बहुत-सी परेशानियां झेलीं, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार के इस फैसले ने जनसाधारण ही नहीं, भगवान के लिए भी एक अनूठी समस्या पैदा कर दी है। विश्व प्रसिद्ध आंध्र प्रदेश में भगवान वेंकटेश्वर के तिरुपति स्थित मंदिर के सामने बहुत विचित्र स्थिति खड़ी हो गई है, क्योंकि पिछले दो महीनों में भक्तों-श्रद्धालुओं ने यहां हुंडियों में लगभग चार करोड़ रुपये मूल्य के बंद हो चुके 500 और 1000 रुपये के नोट दान किए हैं। मंदिर में ये नोट पुराने नोटों को बदलवाने के लिए तय अंतिम तारीख 30 दिसंबर के बाद दान किए गए। मंदिर के लिए यह समस्या इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि सरकार एक कानून को अधिसूचित कर चुकी है, जिसके तहत 10 से ज्यादा संख्या में बंद किए जा चुके नोटों को रखना अपराध है, जिसके लिए कम से कम जुर्माना 10,000 रुपये निर्धारित किया गया है। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम के कार्यकारी अधिकारी डी संबाशिवा राव ने बताया कि पुरानी मुद्रा में चार करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंदिर में चढ़ाई गई है। मंदिर प्रशासन ने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को इस बाबत पत्र लिखा है।     साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ । रंगों का त्योहार होली इस बार गरीब परिवारों को लिए कुछ फीकी रहेगी, ऐसा इसलिए होगा क्योंकि आचार संहिता के चलते इस बार राशन कार्ड धारकों को होली पर मिलने वाली अतरिक्त चीनी के वितरण पर खाद्य आयुक्त ने रोक लगा दी है। माना जा रहा है कि त्योहार में अतिरिक्त चीनी का वितरण करना चुनाव को प्रभावित कर सकता है। इस बार खाद्यान्न वितरण पांच से शुरू होना है, लेकिन अभी तक दुकानों पर अनाज नहीं पहुंच सका है। ऐसे में होली पर लोगों को अनाज मिल पाएगा कि नहीं इस पर भी आशंका है।  वहीं जिलापूर्ति अधिकारी संतोष विक्रम शाही ने होली तक सभी कार्ड धारकों को हर हाल में अनाज मिल जाने की बात कही है।खाद्य सुरक्षा योजना के तहत पात्रगृहस्ती कारण धारक यानी तीन लाख से कम वार्षिक आय वाले परिवार जिसमें घर की महिला के नाम राशन कार्ड जारी किए गए है, उसमें प्रतिकार्ड नौ सो ग्राम के हिसाब से चीनी का वितरण किया जाता है। होली व दीपावली के पर्व पर उन कार्ड धारकों को सौ ग्राम चीनी अतरिक्त दी जाती है। इसी तरह अन्त्योदय कार्ड धारक जो की गरीबी रेखा से भी नीचे का जीवन यापन करने करते हैं, उनके कार्ड धारको को प्रतिकार्ड दो किलो चीनी मिलती है, जबकि त्योहार के समय इस श्रेणी के कार्ड धारकों को आधा किलो अतरिक्त चीनी दी जाती है। कार्ड धारकों के वितरण के लिए दुकानों पर अतरिक्त चीनी पहुंच भी रही है, लेकिन मिलेगी नहीं। जिलापूर्ति अधिकारी ने आचार संहिता में अतरिक्त वितरण को लेकर खाद्य आयुक्त अजय सिंह चौहान से मार्ग दर्शन मांगा था, जिसमें आयुक्त ने आचार संहिता हटने के बाद ही अतरिक्त वितरण किए जाने के निर्देश दिए हैं। जिलापूर्ति अधिकारी ने बताया कि सामान्य वितरण की चीनी व गेहू, चावल होली से पहले मिल जाएगा,लेकिन अतरिक्त चीनी अगले आदेश के बाद ही मिलेगी। वितरण रूकने से कोटेदार भी परेशान : आचार संहिता के दौरान कार्ड पर अतरिक्त चीनी व अनाज का वितरण रोके जाने से कोटेदार भी परेशान हैं, क्योंकि उन्होंने अतरिक्त स्टाक का पैसा पहले ही जमा कर दिया है। ऐसे में अतरिक्त चीनी व अनाज न मिलने से कोटेदारों का पैसा फस गया है। उत्तर प्रदेश सस्ता गल्ला विक्रेता संघ के प्रदेश अध्यक्ष अशोक मेहरोत्रा का कहना है कि इस मामले में खाद्य आयुक्त से मिलकर कार्ड धारकों का पक्ष रखेगे। उधर सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर गुरुवार को भी अनाज नहीं पहुंच सका। जिलापूर्ति अधिकारी का कहना है कि अधिकतर दुकानों पर खाद्यान्न पहुंच गया है, जिन दुकानों पर नहीं पहुंचा है उनमें एक दो दिनों में खाद्यान्न पहुंच जाएगा और होली पर सभी कार्डधारकों को अनाज मिलेगा। गोदाम से कम मिल रहा अनाज: उतर प्रदेश सस्ता गल्ला विक्रेता संघ के प्रदेश अध्यक्ष अशोक मेहरोत्रा ने जिलापूर्ति अधिकारी को पत्र देकर आवश्यक वस्तु निगम के गोदामों से मिलने वाले अनाज में घटतौली की शिकायत की गयी है। उन्होंने बताया कि राशन कार्ड पर खाद्यान्न वितरण के लिए एफसीआई के गोदामों से अनाज निकल कर आवश्यक वस्तु निगम के गोदामों में जाता है, इसके बाद वहां से कोटेदारों को भेजा जाता है। उन्होंने खाली ट्रक का वजन कराकर उसकी पर्ची ट्रक पर चस्पा करने की मांग की है।     साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । बीएसएफ जवान तेजबहादुर यादव का एक और वीडियो सामने आया है। तेजबहादुर ने इस वीडियो में उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया है। जारी वीडियो में तेज बहादुर ने उनके फेसबुक पेज पर पाकिस्तानी दोस्तों के अकाउंट्स का मिलना उनके खिलाफ रची गयी साजिश का हिस्सा है। यादव का नया वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। इसमें वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछते नजर आते हैं कि क्या भ्रष्टाचार का खुलासा करने की वजह से उन्हें सजा दी जा रही है। अपने फेसबुक अकाउंट से जुड़े उनके ताजा आरोप उन मीडिया रिपोर्ट्स की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है, जिनमें आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि जांच में यादव के फेसबुक दोस्तों में 17 फीसदी लोग पाकिस्तान के हैं। यादव के खिलाफ बीएसएफ की जांच अब भी जारी है। वहीं, गृह मंत्रालय के सूत्रों ने इस बात के भी संकेत दिये हैं कि तेज बहादुर के खिलाफ बार-बार झूठा आरोप लगाने के मामले में कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। अभी कुछ दिन पहले ही तेज बहादुर के परिवार ने आरोप लगाया था कि जवान को धमकाकर उन्हें मानसिक यातना दी जा रही है। वहीं, उनकी पत्नी ने भी यह आरोप लगाया था कि उन्हें उनके पति से मिलने नहीं दिया जा रहा। हाई कोर्ट के 10 फरवरी के निर्देश के बाद बीएसएफ ने तेज बहादुर की पत्नी को उनसे मिलने और दो दिनों तक उनके साथ रहने की मंजूरी दी थी। कुछ दिन पहले उन्होंने कोर्ट को जानकारी दी कि उनकी पति से मुलाकात हुई है और अब वह उनकी सुरक्षा को लेकर आश्वस्त हैं। जवान की पत्नी ने अदालत को बताया कि उनकी मुलाकात जम्मू-कश्मीर के सांबा क्षेत्र में हुई, जहां वह तैनात हैं। आपको बता दें कि तेज बहादुर ने जनवरी में सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उन्होंने बीएसएफ जवानों को दिये जाने वाले घटिया गुणवत्ता भोजन की शिकायत थी और कुछ अधिकारियों पर भोजन सामग्री बेचने का आरोप भी लगाया था। हालांकि, उन्होंने किसी अधिकारी का नाम नहीं लिया था। तेज बहादुर का वीडियो वायरल होने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस घटना का ब्योरा मांगा था।     साभार-khaskhabar.com  

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लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार को झटका देते हुए मथुरा के जवाहरबाग कांड में सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में सीबीआई को दो महीने में अपनी जांच प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि मथुरा का जवाहरबाग कांड सिर्फ हिंसा का मामला नहीं था बल्कि यह जमीन कब्जे की एक बड़ी साजिश थी, जिसे रामवृक्ष यादव और उनके साथियों ने रची थी। गौरतलब है कि मथुरा के जवाहरबाग कांड में सीबीआई जांच के लिए अलग-अलग 9 याचिका दाखिल की गई थी। इसमें अश्वनी उपाध्याय की लीडिंग याचिका थी। इसके अलावा मथुरा हिंसा के दौरान शहीद हुए एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी और प्रफुल्ल द्विवेदी ने भी याचिका दायर की थी। सभी याचिकाओं में एक बात जो प्रमुखता से कही गई थी, वह यह कि उन्हें सिविल पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है। इस मामले में कोर्ट ने 20 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। गौरतलब है कि मथुरा कांड में राज्य सरकार सीबीआई जांच से कन्नी काट रही थी। अभी तक पुलिस ने इस मामले में 101 लोगों के खिलाफ चार्जशीट तैयार की है। साभार-khaskhabar.com      

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नई दिल्ली। बैंकों से लेन-देन अब महंगा हो गया है। कैशलेस व्यवस्था को बढावा देने के लिए एक मार्च से बैंकिंग नियमों में कई बड़े बदलाव हुए हैं। निजी बैंकों एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस ने कैश ट्रांजेक्शन पर शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है। एक महीने में चार मुफ्त लेन-देन के बाद हर बार 150 रुपये न्यूनतम शुल्क लिया जाएगा। यह नियम एक मार्च से सेविंग और सैलरी खातों पर लागू कर दिया गया है। माना जा रहा है कि कैश ट्रांजेक्शन में कमी और डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है। भारतीय स्टेट बैंक में 1 अप्रैल से माह में एटीएम से तीन बार ही कैश ट्रांजेक्शन फ्री में कर पाएंगे। इससे ज्यादा कैश ट्रांजेक्शन करते हैं तो हर ट्रांजेक्शन पर 50 रुपए और सर्विस चार्ज देना होगा। भारतीय स्टेट बैंक ने 1 अप्रैल 2017 से यह नियम लागू करने का फैसला किया है। साथ ही बैंक ने व्यावसायिक प्रतिनिधि और पीओएस से नकदी निकालने पर निर्धारित सीमा के बाद शुल्क लगेगा। एटीएम निकासी की सीमा को भी सीमित करने के लिए फिर से रिजर्व बैंक के नियम लागू हो जाएंगे। एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक ने नए नियम लागू करने का फैसला किया है। एचडीएफसी: प्राइवेट सेक्टर के अगुआ बैंक एचडीएफसी ने अपने एक सर्कुलर में कहा है कि पहले चार ट्रांजेक्शन मुफ्त होंगे, इसके बाद हर बार 150 रुपये फाइन के अलावा टैक्स और सेस वसूल किया जाएगा। थर्ड पार्टी कैश ट्रांजेक्शन पर भी नॉन होम ब्रांच से एक दिन में 25,000 रुपये की निकासी सीमा तय कर दी गई है। इससे अधिक रकम पर प्रति हजार निकासी पर 5 रूपये या न्यूनतम चार्ज 150 रुपये अदा करने होंगे। इस ट्रांजैक्शन पर भी आपको टैक्स और सेस अलग से अदा करना होगा। एचडीएफसी के मुताबिक, बैंक के सीनियर सिटिजन ग्राहकों और नाबालिग बैंक खाताधारकों के लिए प्रति दिन निकासी सीमा 25,000 रुपये रहेगी, हालांकि इन खाताधारकों पर कोई चार्ज अथवा टैक्स नहीं लगेगा। इसके साथ ही नोटबंदी के बाद बैंक द्वारा लगाया गया कैश हैंडलिंग चार्ज तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है। एक्सिस में 5 फ्री ट्रांजैक्शन निजी क्षेत्र के एक्सिस बैंक ने अपने ग्राहकों को एक महीने में पहले 5 कैश ट्रांजैक्शन या फिर 10 लाख रुपये तक नकदी जमा या निकासी फ्री दिए हैं। एक्सिस बैंक की गाइडलाइन के मुताबिक, उसके ग्राहक 5 फ्री ट्रांजैक्शन के साथ एक महीने में 10 लाख रुपये तक की निकासी बिना किसी भुगतान के कर सकते हैं। इसके ऊपर किए गए कैश ट्रांजैक्शन पर बैंक 5 रुपये प्रति हजार या 150 रुपये देने होंगे (जो भी अधिक हों)। आईसीआईसी बैंक आईसीआईसी बैंक 8 नवंबर को हुई नोटबंदी की घोषणा से पहले के समान शुल्क वसूल कर रहा है। बैंक की वेबसाइट के मुताबिक, महीने में पहले चार ट्रांजेक्शन फ्री रहेंगे। इसके बाद प्रति हजार 5 रुपये का शुल्क लिया जाएगा जो महीने में न्यूनतम 150 रुपये हो सकता है। थर्ड पार्टी लिमिट प्रतिदिन 50 हजार रुपये रखी गई है। नॉन होम ब्रांच से महीने में एक बार कैश निकासी पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, लेकिन उसके बाद प्रति हजार 5 रुपये देने होंगे, जोकि न्यूनतम डेढ़ सौ रुपये होगा। कैश डिपॉजिट पर बैंक प्रति हजार पांच रुपये चार्ज करेगा। कैश डिपॉजिट मशीने से भी महीने में एक बार ही मुफ्त में रुपये जमा कराए जा सकते हैं। इसके बाद यहां भी 5 रुपये प्रति हजार देने होंगे। अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि क्या सरकारी बैंकों ने भी इस तरह का शुल्क लेना शुरू कर दिया है या नहीं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकार की ओर से इस तरह के किसी चार्ज को लेकर कोई निर्देश नहीं मिला है। साभार-khaskhabar.com    

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लखनऊ। यूपी में 6 वें चरण का मतदान शनिवार को होना है लेकिन अभी से मायावती को खुश करने की कवायद शुरू हो गई है। दरअसल बहन जी के राज में बने इन पार्को की अखिलेश सरकार ने कोई सुध नहीं ली है। लेकिन अब करोड़ों रुपए खर्च कर फिर से पार्कों को चमकाया जा रहा है। आपको बता दें मायावती के बनाए कई स्मारकों में गेट लगाए गए थे, इनमें से कई टूटे पड़े थे,इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं आया लेकिन अब अचानक इनकी भी मरम्मत होनी शुरू हो गयी है। मायावती राज आएगा की नहीं इस सवाल का जवाब तो 11 मार्च को मिलेगा, लेकिन अधिकारियों को न जाने क्यूं डर सताने लगा है और चार साल से बेसुध पड़ेेे स्मारकों का खयाल उन्हें अचानक से आ गया। पानी के लिए एक करोड़ की प्लम्बरिंग का सामान आ चुका। गेट और प्लंबरिंग का काम स्मारक समिति की ओर से किया जा रहा है। इन सभी कामों को 11 मार्च से पहले पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. आला अधिकारी जल्दी काम पूरा करने का दबाव बनाए हुए हैं। हालांकि वहीं सम्बंधित अधिकारियों का कहना है कि ये रूटीन का कार्य है,बजट जारी करने में देरी हुई थी, जिसके चलते काम देर में शुरू हुआ है।  खैर जो भी हो लेकिन अचानक अधिकारियों की चहलकदमी ये साफ दिखाती है कि अधिकारी कोई चांस लेने के मूड में नहीं हैं। साभार-khaskhabar.com  

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पटना । बिहार में नीतीश कुमार सरकार में मंत्री अब्दुल जलील मस्तान की सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो पर जूते चलवाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य में विपक्षी दल भाजपाने जहां सडक़ से लेकर विधानसभा तक में विरोध का झंडा बुलंद कर दिया है वहीं नीतीश कुमार ने भी अपने मंत्री के काम को गलत बताया है। जदयू ने मंत्री से इस मामले पर माफी मांगने को कहा है। मंत्री के काम को लेकर नीतीश ने कहा- यह ठीक नहीं है, यह गलत है। डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने भी कहा है कि मंत्री को इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी ने भी इस टिप्पणी पर खेद जताया है। यह हुआ जलील मस्तान की रैली में दरअसल, बिहार सरकार में उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री अब्दुल जलील मस्तान की एक सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोटो पर जूते-चप्पलें चलीं। खुद मंत्री अब्दुल जलील मस्तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस सभा में डकैत कहा। इस घटना का विवादास्पद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह घटना 22 फरवरी की है जब पूर्णिया जिले में मंत्री अब्दुल जलील मस्तान कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित जन वेदना सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस रैली में मंत्री जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लागू की गई नोटबंदी की आलोचना कर रहे थे और इस फैसले से आम लोगों को भी परेशानी के बारे में जिक्र कर रहे थे। रैली में नोटबंदी को पूरी तरीके से फेल और गलत बताते हुए अब्दुल जलील मस्तान इतने उत्तेजित हो गए कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को डकैत तक कह डाला। मामला यही पर खत्म नहीं हुआ, मस्तान ने वहां मौजूद लोगों से कहा कि ऐसे प्रधान मंत्री को जूते मारने चाहिए। बस फिर क्या था, मंत्री जी का आदेश मिलते ही मंच पर एक कार्यकर्ता प्रधानमंत्री की तस्वीर को लेकर आ गया और उस पर जूते और चप्पलें चलाने लगा। बीजेपी ने जताया विरोध इस पूरी घटना का वीडियो वायरल होने के बाद बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री अब्दुल जलील मस्तान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उनसे इस घटना के लिए माफी मांगने के लिए कहा है। भाजपा ने मंत्री के खिलाफ केस भी करने की धमकी दी है। भाजपा ने इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया। साभार-khaskhabar.com  

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चंबा । वैसे तो चंबा एक ऐतिहासिक नगरी है जिसमे हज़ारों साल प्राचीन मंदिरो के साथ राजस्वी काल से चली आ रही बेश-कीमती धरोहर देखी जा सकती है पर सरकार और प्रशासन की बेरुखी के चलते अब यह सदियों पुरानी धरोहरे धीरे-धीरे समाप्त होने के कगार पर पहुंच रही है। इसका जीता-जागता उदाहरण है शहर के बीचों-बीच घने पोश क्षेत्र में एक हज़ार साल से भी प्राचीन राधाकृष्ण का मन्दिर। भले ही यह मंदिर अपनी प्राचीनता को दर्शाता हो पर आज एक हज़ार साल से भी प्राचीन राधाकृष्ण मन्दिर की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि उसकी सुध लेने वाला कोई भी नहीं।  इस ऐतिहासिक मंदिर के आगे हर समय गंदगी से भरे नगर परिषद के वाहन खडे रहते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कोर्ट काॅम्पलेक्स से सटा और नगर परिषद कार्यालय चंबा से इसी दूरी केवल 10 मीटर है लेकिन इसके बाद भी आस्था का यह घर सरकार और स्थानीय निवासियों की अनदेखी का शिकार हो रहा है। इतना ही नहीं, आसपास का कूड़ा करकट रेहड़ियों में लाकर इसी मन्दिर के सामने ही लोड किया जाता है। मंदिर के आगे रेत और बजरी के ढेर अक्सर लगे रहते हैं जो देख जा सकते हैं जो इस मंदिर की बदहाली की कहानी कह देते हैं। अगर यही हाल रहा तो इतिहास को संजोए इस नगरी का वर्चव देखने को तो नही मिल सकेगा सिर्फ किताबो के पन्ने ही मात्र ग्वाह होंगे।  क्या कहना है स्थानीय निवासियों का लोगों का कहना है कि इस प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर के आगे हर समय गंदगी से भरे नगर परिषद के वाहन खडे रहता है जिससे बदबू फैली रहती है। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है की जो लोग मंदिर में पूजा करने नंगे पांव मन्दिर के भीतर जाते है तो गंदगी भी चली जाती हैै। इसके बाद भी सुनने वालीा कोई भी नहीं है। स्थानीय चंबा के प्रवुद्ध लोगों के साथ चंबा के सभी संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों ने नगर परिषद चंबा और प्रशासन से आग्रह के साथ गुहार लगाई है। साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । गुरमेहर कौर मामले को लेकर मचे बवाल के बीच उनके दादा खुलकर अपनी पोती के समर्थन में आ गए हैं। उनके दादा कंवलजीत सिंह ने अपनी पोती का बचाव करते हुए कहा कि मेरी पोती ने ऐसी कोई बात नहीं की जो देश के खिलाफ हो। मेरी पोती सिर्फ 21 साल की है और लोग जाने क्या-क्या बहस कर रहे हैं। एक सांसद और एक मंत्री ने भी बोल दिया कि यह देशद्रोह का काम है। उन्होंने कहा- मुझे अपनी पोती की चिंता नहीं है, अधिक से अधिक वे इसे मार ही देंगे ना। पहले भी अपना बेटा करगिल युद्ध के दौरान खो चुका हूं। मेरा बेटा 26 दुश्मनों को मारने के बाद शहीद हुआ था। जब यह घटना हुई थी उस वक्त भी सरकार बीजेपी की थी। हमसे कई तरह के वादे किए गए थे जो पूरे नहीं हुए और आज जब मेरी पोती को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है तब भी सरकार बीजेपी की है। कंवलजीत सिंह ने न्यूज चैनल एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने गुरमेहर को लेकर बहुत गलत बयान दिए हैं, उन्हें ऐसा नहीं बोलना चाहिए। हमें बहुत तकलीफ हुई। काम सही होना चाहिए चाहे वह कांग्रेस की सरकार हो या बीजेपी की। जब से बीजेपी ने सर्जिकल स्ट्राइक की है तबसे कितने जवान शहीद हुए हैं? क्या ये एक के बदले दस सिर लाए हैं? गुरमेहर की सुरक्षा पर बोले- चार बॉडीगार्ड दिए हैं पर वे भी उन्हीं के आदमी हैं दादा कंवलजीत सिंह ने गुरमेहर की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि चार बॉडीगार्ड दिए हैं, लेकिन सिक्योरिटी वाले भी उन्हीं के आदमी है। मैं चाहता हूं कि सब कुछ शांत हो जाए। विश्वविद्यालयों में जो झगड़े हो रहे हैं, वे नहीं होने चाहिए। इस मामले में अब कांग्रेस के नेता शशि थरूर का बयान सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया शेयर की है जिसमें उन्होंने लिखा है कि मैं अपने क्रिकेट के हीरो वीरेंद्र सहवाग की इस मामले को लेकर की गई टिप्पणी से बेहद निराश हूं। गौरतलब है कि वीरेंद्र सहवाग ने कहा था कि मैंने दो तिहरे शतक नहीं लगाए हैं, बल्कि मेरे बैट ने लगाए हैं। वीरेंद्र सहवाग ने यह टिप्पणी गुरमेहर के उस स्टेटस पर की थी, जिसमें गुरमेहर ने कहा था कि उनके पिता को पाकिस्तान नहीं मारा, बल्कि युद्ध ने मारा है। दरअसल, गुरमेहर के पिता करगिल के युद्ध में शहीद हुए थे। इससे पहले मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा गुरमेहर कौर ने एबीवीपी के खिलाफ विरोध मार्च से हटते हुए उन्हें अकेले छोड़ देने का अनुरोध किया और वह अपने परिवार के पास जालंधर चली गईं। एबीवीपी के खिलाफ अपने सोशल मीडिया अभियान को लेकर विवाद छिडऩे के बीच उनका यह फैसला आया। उनके अभियान के चलते उन्हें बलात्कार की कथित धमकियां मिलीं। यहां तक कि केंद्रीय मंत्री भी विवाद में कूद पड़े। लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्रा कौर ने सिलसिलेवार ट्वीट में अपने फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने काफी कुछ झेला है और ‘20 साल की उम्र में मैं इतना ही बर्दाश्त कर सकती हूं।’ इससे पहले कौर ने लोगों से अनुरोध किया था कि यदि शहीद की बेटी के रूप में उनकी पहचान से लोगों को परेशानी हो रही है तो वे इस रूप में उन्हें नहीं पहचानें। वह कैप्टन मंदीप सिंह की बेटी हैं। सिंह जम्मू कश्मीर में 1999 में एक आतंकवादी हमले में मारे गए थे। साभार-khaskhabar.com  

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आजमगढ़ । सीएम अखिलेश यादव ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के फूलपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए भाजपा और बसपा, दोनों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी श्मशान और कब्रिस्तान की बात कर रही है तो हम लोग लैपटॉप और स्मार्टफोन की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक पत्थर वाली पार्टी है, वह जब सरकार में थी तो पत्थर वाली मूर्तियां लगाती थी। मायावती पर तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा कि वह हमारी बुआ हैं, लेकिन रक्षाबंधन भारतीय जनता पार्टी के साथ मनाती हैं। यूपी सीएम ने कहा कि हम लोगों को सुविधाएं दे रहे हैं। समाजवादी पार्टी ने तय किया है कि कोई भी गरीब नहीं छूटेगा। आने वाले समय में सरकार बनेगी तो गरीबों को समाजवादी पेंशन के तहत सभी को एक हजार रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने कहा, एक्सप्रेस-वे का काम काफी तेजी से हुआ और महज 23 महीनों में पूरा हो गया। आगरा से लखनऊ एक्सप्रेस-वे जब शुरू हुआ था तो 36 महीने लगने थे लेकिन नेताजी ने कहा कि इसे 23 महीनों में बनाया जाए, हमनें यह करके दिखा दिया। रैली में बेहोश हुआ कार्यकर्ता अखिलेश यादव जब रैली कर रहे थे तो उनकी रैली में मौजूद एक व्यक्ति बेहोश हो गया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद अफसरों से कहा कि इसे एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि विरोधी पार्टियों ने हमारी एंबुलेंस से समाजवादी शब्द भी हटा दिया। उन्होंने चुनाव आयोग में शिकायत कर दी। लेकिन हमने कहा कि कहां कहां नाम हटाओगे, साइकिल तो सभी के पास है।   साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली । देश की पहली अनारक्षित सुपरफास्ट अंत्योदय ट्रेन मंगलवार को पटरियों पर दौड़ पड़ी। कोच्चि के एर्नाकुलम स्टेशन से हावड़ा स्टेशन के बीच शुरू हुई इस ट्रेन को रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेल भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हरी झंडी दिखा कर इसे रवाना किया। यह ट्रेन देश की ऐसी पहली सुपरफास्ट ट्रेन है, जो पूरी तरह अनारक्षित श्रेणी की है।  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक- रफ्तार के मामले में यह राजधानी एक्सप्रेस को भी मात देगी। यह ट्रेन 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। इसका बेस फेयर मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों से महज 15 फीसदी ज्यादा रखा गया है। अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन का उद्घाटन करते हुए रेलमंत्री प्रभु ने कहा, हम आज देश की पहली अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन की शुरुआत कर रहे हैं और जल्द ही तेजस और उदय एक्सप्रेस ट्रेनें भी शुरू की जाएंगी। अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेनें लंबी दूरी की, पूरी तरह अनारक्षित, सुपरफास्ट ट्रेनें हैं, जिन्हें देश की आम जनता के लिए सबसे व्यस्त रेलमार्ग पर शुरू किया गया है।  ट्रेन में ये हैं सुविधाएं बिल्कुल नई श्रेणी की इन ट्रेनों में कई सुविधाएं दी गई हैं, जिनमें सामान रखने के लिए गद्दीदार रैक हैं जिन्हें सीट की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह आरामदायक और सुरक्षित हैं। पेयजल आपूर्ति, मोबाइल चार्जिंग सुविधा, मॉड्यूलर शौचालय, शौचालय इस्तेमाल होने की जानकारी देने वाला डिस्प्ले, एलईडी लाइट शामिल हैं। 22 डिब्बों वाली यह ट्रेन 2,307 किलोमीटर की दूरी 37 घंटों में तय करेगी। हर कोच में आरओ लगा होगा। हमसफर को भी दिखाई हरी झंडी रेलमंत्री ने राजस्थान के श्रीगंगानगर से तमिलनाडु में तिरुचिरापल्ली के बीच एक हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाई। हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन आम नागरिकों के लिए शुरू की गई पूरी तरह वातानुकूलित सुविधायुक्त ट्रेन है, जिसकी घोषणा पिछले वर्ष रेल बजट में की गई थी। पूरी ट्रेन में वातानुकूलित 3 टीयर डिब्बे होंगे।   साभार-khaskhabar.com  

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