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नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद लगातार विपक्ष की आलोचनाओं का सामना कर रही मोदी सरकार को अब भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि, आरबीआई को ही पता नहीं कि नोटबंदी के बाद कितना कालाधन कम हुआ है। आरबीआई ने एक संसदीय समिति से कहा है कि उसके पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि नोटबंदी से कितना कालाधन समाप्त हुआ है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसे यह भी पता नहीं है कि 500 और 1000 के नोटों को बंद करने के बाद नोटों को बदलने की प्रक्रिया में कितनी बेहिसाबी नकदी को वैध धन में बदला गया है।    रिजर्व बैंक ने कहा कि नोटबंदी के बाद अनुमानत:15.28 लाख करोड़ रुपये के बंद किए गए नोट लौटे हैं। भविष्य में सत्यापन की प्रक्रिया में इस आंकड़े में सुधार किया जा सकता है। आरबीआई ने कहा कि उसके पास इस बात की भी सूचना नहीं है कि क्या नियमित अंतराल के बाद नोटबंदी की किसी तरह की योजना है। केंद्रीय बैंक को नोटबंदी के आंकड़े देने में विलंब के लिए विपक्षी दलों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। हालांकि, सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि 8 नवंबर, 2016 को बड़े मूल्य के नोटों को बंद करने के फैसले से कालेधन पर अंकुश लगाने में मदद मिली है और साथ ही इसके अन्य फायदे भी हुए हैं।   आपको बता दें पिछले सप्ताह आखिरकार रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के बाद वापस लौटे नोटों का आंकड़ा सार्वजनिक किया था। इसमें कहा गया है कि नोटबंदी के बाद चलन से बाहर किए गए नोटों में से 15.28 लाख करोड़ रुपये सिस्टम में वापस लौटे हैं। यह बंद नोटों का करीब 99 प्रतिशत बैठता है। केंद्रीय बैंक ने यही आंकड़े वित्त पर संसद की स्थाई समिति से भी साझा किए हैं। समिति के सवालों के जवाब में रिजर्व बैंक ने कहा कि वापस लौटे नोटों के सत्यापन की प्रक्रिया अभी जारी है। बैंकों और डाकघरों द्वारा स्वीकार किए गए 500 और 1000 के कुछ पुराने नोट अभी भी करंसी चेस्ट में पड़े हैं। केंद्रीय बैंक ने यह भी सूचित किया है कि यह बड़ा आंकड़ा है, ऐसे में सत्यापन की प्रक्रिया को पूरा करने में अभी कुछ समय लगेगा। यह काम तेजी से जारी है और रिजर्व बैंक दफ्तर में डबल शिफ्ट में काम किया जा रहा है। इसके लिए हाई एंड स्क्रूटनी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रिजर्व बैंक ने समिति को लिखित जवाब में कहा, जब तक रिजर्व बैंक इन नोटों के आंकड़ों का पूरी तरह सत्यापन नहीं कर लेता, तब तक इसके बारे में अनुमान ही दिया जा सकता है। भविष्य में इसमें सुधार से पहले 30 जून तक कुल 15.28 लाख करोड़ रुपये के बंद नोटों का आंकड़ा उसके पास है। इस सवाल कि नोटबंदी से कितना कालाधन समाप्त हुआ है, केंद्रीय बैंक ने कहा कि उसके पास इसकी कोई सूचना नहीं है। कितना कालाधन पुराने नोटों को बदलने की प्रक्रिया में सफेद हुआ है, इस पर भी रिजर्व बैंक ने यही जवाब दिया है कि उसके पास इसकी कोई सूचना नहीं है।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। जनता दल (युनाइटेड) के पूर्व अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य शरद यादव ने पिछले साल आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले को अपरिपक्व बताते हुए सोमवार को कहा कि वह यह बात पहले से कहते रहे हैं, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की हालिया रिपोर्ट से भी यह सही साबित हुआ। यादव ने पत्रकारों से कहा, आरबीआई की ओर से जारी रिपोर्ट के बाद, मेरा नोटबंदी को लेकर दिया गया बयान सही साबित होता है, जो मैंने तब और समय-समय पर दिया था। नोटबंदी से कुछ भी हासिल नहीं हुआ, जैसा सरकार ने इसे लागू करते समय अपना लक्ष्य बनाया था।   यादव ने सरकार पर नोटबंदी के नाम पर लोगों को धोखा देने और देशवासियों की कठिनाइयों को हल्के में लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को अमान्य किए जाने के सरकार के फैसले के बाद किसानों की आमदनी 50 से 60 प्रतिशत तक घट गई, क्योंकि उन्हें अपने अनाज औने-पौने दाम में बेचने पड़े। यादव ने कहा, सरकार द्वारा लिया गया नोटबंदी का निर्णय अपरिपक्व, जल्दबाजी और जमीनी स्तर पर पडऩे वाले प्रभाव को जाने-समझे बिना लिया गया फैसला था। इस वजह से लोगों को कष्ट, अपमान सहना पड़ा। दुनिया के इतने बड़े लोकतांत्रिक सरकार के लिए ऐसा फैसला लेना मूर्खतापूर्ण था।उन्होंने कहा, आठ नवंबर, 2016 देश के लिए काला दिवस था। हमारी अर्थव्यवस्था का नोटबंदी के प्रभाव से उबरना अभी भी बाकी है। सरकार को इस बात का अहसास नहीं है कि हमारे ज्यादातर मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं और उनके साथ क्या हुआ होगा। सरकार के इस एक फैसले का तीन करोड़ दिहाड़ी मजदूरों की जिंदगी पर बुरा असर पड़ा। साभार-khaskhabar.com     

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बीजिंग। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल रविवार को ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने चीन पहुंचे। बीती रात पीएम मोदी ने चीन के शियामेन शहर में भारतीय समुदाय पर से मुलाकात की। इस दौरान भारत माता की जय के नारे लगे। पीएम मोदी के पहुंचते ही चीन में भारत माता की जय के नारे लगने शुरू हो गए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग से भी मुलाकात करेंगे। रविवार को चीन पहुंचने पर जिनपिंग ने पीएम मोदी का स्वागत किया। वहीं 5 सितंबर यानी मंगलवार को पीएम मोदी और शी जिनपिंग अलग से मुलाकात करेंगे।    पीएम मोदी उठा सकते हैं पाक प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में पाक प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठा सकते हैं। हांलांकि चीन की तरफ से पहले ही कहा जा चुका है कि इस सम्मेलन में पाकिस्तान पर चर्चा उपयुक्त नहीं है। गौरतलब है कि चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए कहा गया था कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद के खिलाफ लडता है और आतंकवाद के खिलाफ लडाई में वह दूसरे देशों के साथ काम करना चाहता है। साथ ही उन्होंने कहा था कि इसलिए ब्रिक्स सम्मेलन में पाकिस्तान पर चर्चा उपयुक्त नहीं होगी।    डोकलाम विवाद के बाद पहली बार मिलेंगे पीएम मोदी और जिंगपिंग:इस बार सबकी निगाहें पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात पर हैं। ज्ञातव्य है कि पिछले दो माह से भी ज्यादा वक्त से चीन और भारत के बीच डोकलाम को लेकर तनाव चल रहा था। हांलांकि हाल ही में दोनों देशों ने इस मुद्दे को शांति से सुलझा लिया। इसको भारत की चीन पर बडी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। ऐसे में अब डोकलाम विवाद के बाद पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच पहली मुलाकात होगी। इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मंत्रिमंडल में प्रदर्शन के आधार पर फेरबदल व विस्तार किया। इसमें निर्मला सीतारमण को रक्षामंत्री बनाया गया है। मोदी ने तीन अन्य को भी कैबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्नति दी और अपने कैबिनेट में नौ नए चेहरों को शामिल किया। मंत्रिमंडल में शामिल नौ नए चेहरों में से चार पूर्व नौकरशाह हैं। बिजली मंत्री पीयूष गोयल को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) से पदोन्नति देकर रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। रेल मंत्रालय से सुरेश प्रभु को वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय भेज दिया गया है। प्रभु से पहले वाणिज्य मंत्रालय का प्रभार सीतारमण के पास था। प्रभु ने उत्तर प्रदेश में हुए एक बड़े रेल हादसे के बाद इस्तीफा देने का प्रस्ताव दिया था। इस रेल हादसे में बीते महीने 23 लोगों की मौत हो गई थी।   प्रोन्नत मंत्रियों व नए चेहरों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में हुए 35 मिनट के समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस समारोह में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद व कुछ नए मंत्रियों के परिवार के सदस्य मौजूद थे।   प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के रक्षामंत्री रहने के बाद सीतारमण रक्षा मंत्रालय संभालने वाली दूसरी महिला हैं। इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला था। अभी तक वित्तमंत्री अरुण जेटली के पास रक्षा मंत्रालय का प्रभार था।   अपनी नियुक्ति पर सीतारमण ने कहा कि वह बहुत अभिभूत महसूस कर रही हैं और वह इस सम्मान को शब्दों में बयां नहीं कर सकतीं।   उन्होंने कहा, "पार्टी और प्रधानमंत्री बहुत ही सहयोगी रहे हैं। दक्षिण (भारत) के एक सामान्य कार्यकर्ता से पार्टी द्वारा यह पहचान मिलने से मैं अभिभूत हूं।"   मंत्रिमंडल में तीन साल में तीसरी बार हुए फेरबदल में नितिन गडकरी, जिनके पास सड़क परिवहन व राजमार्ग व जहाजरानी मंत्रालय था, उन्हें जल संसाधन, नदी विकास व गंगा पुनर्जीवन मंत्रालय की भी जिम्मेदारी दी गई। इस मंत्रालय को उमा भारती से ले लिया गया। उमा को अब पेयजल व स्वच्छता विभाग दिया गया है। इससे पहले अटकलें थीं कि उमा भारती को हटाया जा सकता है।   मोदी मंत्रिमंडल के छह मंत्रियों ने फेरबदल से पहले इस्तीफा दे दिया था। इसमें कलराज मिश्रा (कैबिनेट मंत्री) राजीव प्रताप रूडी व बंडारू दत्तात्रेय (राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार), फग्गन सिंह कुलस्ते, संजीव बालियान व महेंद्र नाथ पांडेय शामिल हैं।   जिन अन्य दो मंत्रियों को पदोन्नति दी गई है, उनमें पेट्रोलिय व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान को साथ में कौशल विकास व उद्यमिता का प्रभार दिया गया है। कौशल विकास व उद्यमिता विभाग राजीव प्रताप रूडी के पास था। मुख्तार अब्बास नकवी के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को बरकरार रखते हुए उन्हें कैबिनेट में जगह दी गई है।   कैबिनेट में शामिल किए गए चार नौकरशाहों में से तीन को राज्य मंत्री का स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। इन तीन में पूर्व गृह सचिव आर.के. सिंह को बिजली एवं नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा का प्रभार दिया गया है। इसका प्रभार पूर्व में पीयूष गोयल के पास था। पूर्व राजनयिक हरदीप पुरी को आवास व शहरी मामलों का प्रभार दिया गया है।   के.जे. अल्फोंस को पर्यटन व इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्रालय का राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। पुरी व अल्फोंस सांसद नहीं हैं और उन्हें संसद में छह महीने में चुनकर आना होगा। अल्फोंस केरल भाजपा से आने वाले दूसरे व्यक्ति हैं, जिन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली है। इससे पहले भाजपा के पूर्व नेता ओ. राजगोपाल को जगह मिली थी, राजगोपाल ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय अपनी सेवाएं दी थीं।   मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त सत्यपाल सिंह को मानव संसाधन विकास, जल संसाधन, नदी विकास व गंगा पुनर्जीवन का राज्य मंत्री बनाया गया है। यह विभाग पूर्व में बालियान के पास था। बालियान व सत्यापाल सिंह दोनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हैं। मंत्रिमंडल में शामिल अन्य पांच नए राज्य मंत्रियों में -शिव प्रताप शुक्ला (वित्त), अश्विनी चौबे (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण), वीरेंद्र कुमार (महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक मामले), अनंत कुमार हेगड़े (कौशल विकास व उद्यमिता), गजेंद्र सिंह शेखावत (कृषि व किसान कल्याण) शामिल हैं।   शिव प्रताप शुक्ला उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में कैबिनेट मंत्री के तौर पर आठ सालों तक सेवाएं दी हैं और उन्हें उनके ग्रामीण विकास, शिक्षा व जेल सुधार के कार्यो के लिए जाना जाता है।   वीरेंद्र कुमार छह बार से मध्य प्रदेश से लोकसभा सांसद हैं। हेगड़े उत्तर कन्नड़ से लोकसभा सांसद हैं, वह पांच बार चुनाव जीत चुके हैं। कर्नाटक में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।   शेखावत राजस्थान के जोधपुर से पहली बार सांसद बने हैं। शेखावत एक तकनीकी सेवी प्रगतिशील किसान के रूप में ग्रामीण समुदाय में देखे जाते हैं।   मोदी ने इस अवसर का इस्तेमाल कुछ मंत्रालयों में बदलाव के लिए भी किया है। राज्यवर्धन सिंह राठौर को पदोन्नति दी गई है। राठौर को युवा मामलों व खेल विभाग का स्वतंत्र प्रभार दिया गया है। इस मंत्रालय को विजय गोयल से लिया गया है।   विजय गोयल को बिना स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री बनाया गया है और उन्हें संसदीय मामलों व सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन का प्रभार दिया गया है।   एस.एस. अहलूवालिया को संसदीय मामलों से उमा भारती के पेयजल व स्वच्छता विभाग में स्थानांतरित किया गया है।   गिरिराज सिंह जो सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमिता मंत्रालय में राज्य मंत्री थे, उन्हें कलराज मिश्रा के इस्तीफे के बाद मंत्रालय का पूरा प्रभार दिया गया है।   अन्य राज्य मंत्रियों में, जिन्हें स्वतंत्र प्रभार के रूप में पदोन्नति मिली है, संतोष गंगवार को वित्त से श्रम व रोजगार में स्थानांतरित किया गया है। दूसरे वित्त राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल को अब संसदीय कार्य व जल संसाधन का प्रभार दिया गया है।   संस्कृति मंत्री महेश शर्मा को पर्यटन व पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन के राज्य मंत्री के रूप में हर्ष वर्धन के अधीन रखा गया है। जहाजरानी राज्य मंत्री पी.राधाकृष्णन को वित्त विभाग का प्रभार दिया गया है। उन्हें राज्य परिवहन व राजमार्ग से हटा दिया गया है।   मोदी मंत्रिमंडल के रविवार को हुए फेरबदल में उसके सहयोगी दल शिवसेना व जनता दल (युनाइटेड) व नए सहयोगी एआईएडीएमके को शामिल नहीं किया गया है।   अब मोदी मंत्रिमंडल में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की संख्या 76 हो गई है। इसमें 28 कैबिनेट, 11 स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री व 37 राज्य मंत्री शामिल हैं।   पीएम ने दी बधाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कैबिनेट मंत्रियों और राज्य मंत्रियों के रूप में शपथ लेने वाले सभी मंत्रियों को बधाई दी और कहा कि इन लोगों के ज्ञान से उनकी सरकार को बहुत अधिक लाभ होगा। मोदी ने ट्वीट किया, मैं उन सभी को बधाई देता हूं, जिन्होंने आज शपथ ली। उनके अनुभव और ज्ञान से मंत्रिपरिषद को अपार लाभ मिलेगा। साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में अपशिष्ट भराव क्षेत्र (लैंडफिल साइट) के एक हिस्से के ढहने से दो लोगों की मौत के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने शनिवार को इस साइट पर कूड़ा जमा करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। बैजल ने शुक्रवार की दुर्घटना के मद्देनजर कदम उठाए जाने को लेकर आपातकालीन बैठक बुलाई और गाजीपुर के लैंडफिल साइट पर कूड़ा जमा करने पर तत्काल रोक लगाने के आदेश दिए।    बैजल ने दो वर्ष के भीतर इस लैंडफिल साइट को साफ करने के भी आदेश दिए। उपराज्यपाल की ओर से जारी एक प्रेस बयान के अनुसार, उपराज्यपाल ने गाजीपुर लैंडफिल साइट में किसी भी प्रकार का ठोस कचरा फेंकने पर प्रतिबंध लगाया है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम अन्य वैकल्पिक साइट पर कचरे को यहां से स्थानांतरित करेगा।   बयान के अनुसार, सुरक्षा कारणों से आसपास के सडक़ों से तत्काल प्रभाव से यातायात मार्ग बदल दिया गया है और ट्रैफिक पुलिस को वाहनों की सही तरीके से आवाजाही के लिए क्षेत्र में तैनात किया गया है। लोगों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई है। बैठक में पूर्व दिल्ली नगर निगम के आयुक्त, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के जनरल मैनेजर, डीडीए के मुख्य आयुक्त, लैंडफिल साइट के विशेषज्ञ एवं संबंधित अधिकारी शामिल थे। एनएचएआई भी सडक़ों में इस्तेमाल होने वाले कूड़े को उठाने का काम नवंबर से शुरू कर देगा। उल्लेखनीय है कि गाजीपुर में शुक्रवार को दोपहर बाद अपशिष्ट भराव क्षेत्र में कूड़े के एक बड़े हिस्से के ढहने से दो महिलाओं की मौत हो गई थी। वहीं कूड़ा ढहने से एक कार और एक दोपहिया वाहन चालक समेत पास के कोंडली नहर में बह गए थे। गाजीपुर लैंडफिल साइट राष्ट्रीय राजधानी के चार लैंडफिल साइटों में से एक है। यहां लगातार कूड़ा डाले जाने की वजह से इसकी ऊंचाई 50 मीटर यानी किसी 15 मंजिली इमारत के बराबर हो गई थी।     साभार-khaskhabar.com 

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जियामेन। चीन के दक्षिणी-पश्चिमी शहर जियामेन में रविवार से तीन दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन की शुरुआत हो रही है, जिसमें सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की संभावना है। पांच सदस्यीय देशों के समूह की वार्षिक बैठक के दौरान आर्थिक, सुरक्षा एवं अन्य बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होगी और इससे इतर मोदी और जिनपिंग के बीच होनी वाली संभावित मुलाकात डोकलाम विवाद की वजह से सम्मेलन का मुख्य केंद्र होगी।   चीन के शीर्ष थिंक टैंक चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंस के विशेषज्ञ वांग देहुआ ने बताया, चूंकि अब डोकलाम विवाद खत्म हो गया है, इसलिए जियामेन बैठक एक टर्निंग प्वाइंट साबित होगी। डोकलाम विवाद के समय भारत को युद्ध की धमकी देने वालों में से एक चीनी विशेषज्ञ वांग ने कहा कि इसका कोई कारण नहीं है कि भारत और चीन एक-दूसरे से शत्रुता रखें। वांग ने कहा, मैं हमेशा चिंडिया के पक्ष में रहा हूं, जो भारत और चीन को मिलाकर बनता है। मुझे ऐसा लगता है कि अगर हम साथ मिलकर काम करेंगे तो यह हमारे लिए एक टर्निंग प्वाइंट साबित होगा। दुनिया हमारी सुनेगी।   भारत और चीन की सेनाएं डोकलाम के पास चीन के सडक़ निर्माण के विरोध में गत दो माह से आमने-सामने थी, जिस वजह से ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता पर संकट के बादल गहरा गए थे। दोनों देशों की ओर से सोमवार को डोकलाम से अपनी सेनाओं को हटाने का फै सला करने के बाद यह विवाद थम गया था। दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशिया संस्थान के अध्यक्ष हू शिशेंग ने कहा, यह अच्छी खबर है कि मोदी आ रहे हैं, लेकिन इस तरह के विवाद से रणनीतिक अविश्वास को बढ़ावा मिलता है।   सम्मेलन में दोनों नेताओं के बीच होने वाली चर्चा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, वे (मोदी और शी) मुलाकात के दौरान इस ओर इशारा कर सक ते हैं कि दोनों देशों की सेनाएं अब इस तरह आमने-सामने नहीं होंगी। यह पूछे जाने पर कि मोदी पाकिस्तान में आतंकवाद के संबंध में सवाल उठा सकते हैं, हू ने कहा, यह विश्वास बहाली का समय है। वे सामान्य तौर पर द्विपक्षीय मुद्दों के संबंध में बातचीत के लिए मुलाकात करेंगे। अभी डोकलाम विवाद के बाद विश्वास बहाली में कुछ समय लगेगा।   चीन ने सम्मेलन में पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा दिए जाने पर चर्चा के संबंध में भारतीय चिंताओं को खारिज कर दिया है। यह भारत और चीन के बीच एक पेचीदा मसला है। बीजिंग की बेल्ट एवं सडक़ परियोजना, जिससे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा जुड़ा हुआ है, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरता है और यह दोनों देशों के बीच एक और विवादास्पद पहलू है।सम्मेलन में आतंकवाद और वैश्विक वित्तीय संकट पर भी चर्चा होगी। ब्रिक्स के नौवें सम्मेलन के दौरान प्रस्तावित ब्रिक्स रेटिंग एजेंसी भी चर्चा का मुख्य केंद्र होगी। पांच देशों के समूह, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल है, की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी। यह समूह पूरे विश्व की आबादी का 42 प्रतिशत है और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 23 प्रतिशत है। ब्रिक्स की विश्व व्यापार में हिस्सेदारी 17 प्रतिशत है। नौवें ब्रिक्स सम्मेलन का थीम उज्जवल भविष्य के लिए मजबूत साझेदारी रखा गया है।   साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कराधान अधिकारियों से कहा कि वे छोटे व्यापारियों, जिनकी सालाना बिक्री 20 लाख रुपये से कम हो, का भी जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के तहत पंजीकरण कराने का लक्ष्य रखें। जीएसटी के तहत सालाना 20 लाख कम बिक्री करने वाले व्यापारियों का पंजीकरण अनिवार्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ऐसा वातावरण बनाने की दिशा में काम कर रही है, जो भ्रष्ट लोगों का भरोसा तोड़ेगी और ईमानदार करदाताओं का आत्मविश्वास बढ़ाएगी।   उन्होंने यहां आयोजित केंद्र और राज्य के कर अधिकारियों के दो दिवसीय ‘राजस्व ज्ञान संगम’ में कहा, ‘‘जीएसटी के तहत सभी व्यापारियों को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए, हमें सुनिश्चित करना होगा कि 20 लाख से कम बिक्री करने वाले व्यापारी भी जीएसटी के तहत पंजीकृत हों।’’ मोदी ने कहा कि दो महीनों में अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में 17 लाख नए व्यापारी जोड़े गए हैं। उन्होंने कहा कि जीएसटी के अलावा आर्थिक एकीकरण भी प्रणाली में पारदर्शिता लाने में मदद करता है। मोदी ने कहा कि ईमानदारों को बेइमानों के खराब कर्म की कीमत चुकानी जारी नहीं रखनी चाहिए। इस संबंध में उन्होंने बताया कि सरकार ने नोटबंदी करके और काले धन व बेनामी संपत्ति के खिलाफ कड़े कानून बनाकर कई कदम उठाए हैं। साभार-khaskhabar.com   

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श्रीनगर। श्रीनगर के पंथाचौक में हुए आतंकी हमले के बाद पूरे जम्मू-कश्मीर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। ईद के पर्व से पहले आतंकवादियों ने दहशत फैलाने के लिए श्रीनगर के प्रमुख इलाके में सुरक्षाबलों की बस पर हमला बोल दिया है। इस आतंकी हमले में एक जवान शहीद हो गया। वहीं, 8 पुलिसवाले घायल हो गए, जिनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने हमले की जिम्मेदारी ली है। इधर, पुंछ सेक्टर में पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन किया। पाक रेंजर्स की फायरिंग में बीएसएफ का एक सब इंस्पेक्टर शहीद हो गया है।    अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक हमला शुक्रवार शाम उस वक्त हुआ, जब दिन भर की ड्यूटी के बाद पुलिसकर्मी जम्मू कश्मीर आर्म्ड पुलिस के मुख्यालय की तरफ लौट रहे थे। तभी पंथाचौक पर आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों की बस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में एक जवान शहीद हो गया। जबकि 8 अन्य घायल हैं। घायलों में दो की हालत गंभीर बनी हुई है। हमले की बाद आतंकी आसपास के घरों में जा छिपे। आतंकवादियों को पकडऩे के लिए सेना का सर्च ऑपरेशन जारी है।    आपको बता दें कि पिछले महीने ही आतंकियों ने पुलवामा की पुलिस लाइन पर हमला किया था। इसमें 8 जवान शहीद हुए थे और सेना ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया था। जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। इस हमले के बाद आईबी ने आशंका जाहिर की थी कि पुलिस लाइन अटैक के दौरान जो आठ आंतकवादी बच गए है, वो पंजाब व जम्मू-कश्मीर के इलाकों में छिपे हो सकते हैं। वो अब सेना या सुरक्षाबलों के कैंप को फिर से निशाना बना सकते है। आईबी ने आशंका जाहिर की थी कि पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले की तर्ज पर ये आतंकवादी किसी और बड़े हमले को अंजाम दे सकते हैं।   पुंछ में पाक ने फिर तोड़ा सीजफायर, जवान शहीदइधर, पुंछ सेक्टर में पाकिस्तान ने एक बार फिर सीजफायर का उल्लंघन किया है। शुक्रवार शाम को पाकिस्तान की तरफ से फायरिंग में सीमा सुरक्षा बल के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर शहीद हो गए। भारतीय जवानों ने पाकिस्तान की गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया है। पाकिस्तान लगातार युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा है। 26 अगस्त को रजौरी जिले के सुंदरबनी सेक्टर में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय इलाके में बिना उकसावे के फायरिंग की थी। इस दौरान भारतीय सेना की जवाबी फायरिंग में कम से कम 3 पाकिस्तानी रेंजर्स मारे गए थे। साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। मोदी मंत्रिमंडल में रविवार को विस्तार हो सकता है। ऐसे में राजनीति के बाजार में कई तरह की अटकलें लग रही है। ज्ञातव्य है कि इन अटकलों के बीच मोदी कैबिनेट से कई मंत्रियों ने इस्तीफे सौंप दिए हैं और कुछ मंत्रियों ने अपने इस्तीफों की पेशकश की है। शुक्रवार को बंडारू दत्तात्रेय ने भी अपना इस्तीफा दे दिया। वहीं आज केन्द्रीय उद्योग मंत्री कलराज मिश्र ने भी इस्तीफा दे दिया है। मोदी कैबिनेट विस्तार की चर्चा के बीच खबरें थी कि मोदी मंत्रिमंडल में जेडीयू के दो मंत्रियों को भी शामिल किया जा सकता है। ज्ञातव्य है कि जेडीयू चीफ नीतीश कुमार ने पिछले दिनों ही आरजेडी के साथ गठबंधन तोडकर राज्य में बीजेपी के साथ सरकार बनाई है। साथ ही जेडीयू हाल ही में एनडीए में भी शामिल हो गई। ऐसे में माना जा रहा था कि नीतीश कुमार के दो करीबी मंत्रियों को मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अभी तक जेडीयू को मोदी कैबिनेट में शामिल होने का न्यौता नहीं मिला है।   जेडीयू को नहीं मिला मंत्रिमंडल में शामिल होने का न्यौता:  ज्ञातव्य है कि पहले खबरें आ रही थी कि मोदी मंत्रिमंडल में जेडीयू के दो मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है। ज्ञातव्य है कि जेडीयू हाल ही में एनडीए में शामिल हुई है। वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अभी तक जेडीयू को मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए कोई न्यौता नहीं मिला है।   जेडीयू के दो मंत्रियों को मिल सकती है मोदी कैबिनेट में जगह!पहले खबरें आ रही थी कि हाल ही में एनडीयू में शामिल हुई जेडीयू के दो मंत्रियों को मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पसंद के जेडीयू के 2 नेताओं को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती हैं। जेडीयू से राम चंद्र प्रसाद सिंह और पूर्णिया से सांसद संतोष कुशवाहा को मंत्री बनाए जाने की अटकले चल रही हैं।   मोदी कैबिनेट में हो सकता है अब तक का सबसे बडा फेरबदल: माना जा रहा है कि मोदी मंत्रिमंडल के तीसरे विस्तार में सबसे बडा फेरबदल हो सकता है। ज्ञातव्य है कि अब तक 7 मंत्री इस्तीफा दे चुके है। इस्तीफा देने वालों में केन्द्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय का भी नाम शामिल है। माना जा रहा है कि 10 से 12 मंत्री मोदी कैबिनेट से आउट हो सकते हैं। वहीं 18 से 30 मंत्रियों के मंत्रालय बदले जा सकते हैं। साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल रविवार को सुबह 10 बजे अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे। इसके मद्देनजर बैठकों का दौरा चल रहा है। वहीं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी वृंदावन से दिल्ली वापस लौट आए हैं। गौरतलब है कि कल शुक्रवार को अमित शाह आरएसएस की समन्वय बैठक में हिस्सा लेने वृंदावन गए थे। आज वे दिल्ली वापस लौटे और लौटते ही उनके आवास पर बैठकोंका दौर शुरू हो गया है। दिल्ली से सांसद और पूर्व सीएम साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा अमित शाह के आवास पहुंचे। अटकलें लगाई जा रही हैं कि प्रवेश वर्मा को मंत्री बनाया जा सकता है।    शाम को पीएम मोदी से करेंगे फाइनल चर्चा: संभावित मंत्रियों से मिलने के बाद अमित शाह शाम को पीएम मोदी से कैबिनेट विस्तार पर फाइनल चर्चा करेंगे और मंत्रिमंडल विस्तार को शेप देंगे। मंत्रिमंडल में शामिल किए जा रहे हैं नए चेहरों और किन-किन के विभाग बदले जाने हैं, सब पर अमित शाह प्रधानमंत्री से अंतिम दौर की चर्चा करेंगे। शाह पहले अपने आवास पर मीटिंग करेंगे फिर उसके बाद वो पीएम से मिलेंगे।    अमित शाह ने संघ प्रमुख भागवत के साथ भी की चर्चा: मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बैठक के पहले दिन अमित शाह ने संघ प्रमुख मोहन भागवत और संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ अलग से बैठक की। खबरों के अनुसार अलग से हुई इस बैठक में किस मुद्दे पर चर्चा हुई, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है लेकिन माना जा रहा है कि इस बैठक में मोदी कैबिनेट में होने वाले फेरबदल पर चर्चा की गई।    AIADMK शामिल नहीं होगी कैबिनेट में:    ज्ञातव्य है कि मोदी कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं के बीच अटकलें लगाई जा रही थी कि मोदी कैबिनेट में एआईएडीएमके के एक नेता को जगह मिल सकती है। अब इन अटकलों पर विराम लग गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एआईएडीएमके भी कैबिनेट में शामिल नहीं होगी। अभी तक मोदी सरकार और तमिलनाडु के सत्ताधारी दल एआईएडीएमके बीच कोई आधिकारिक वार्ता नहीं हुई हैं। हांलांकि पीएम मोदी ने तमिलनाडु सीएम ई. पलानीस्वामी और उप मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम दोनों के साथ बैठक की लेकिन इस बैठक में कैबिनेट विस्तार को लेकर कोई चर्चा नहीं गई।    कैबिनेट में फेरबदल को लेकर राजनाथ के घर हुई बैठक:  मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर कल रात गृह मंत्री राजनाथ सिंह के घर बैठक हुई। इस बैठक में सुषमा स्वराज, अरूण जेटली, नितिन गडकरी जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए। वहीं मोदी कैबिनेट में ओम माथुर और सत्यपाल सिंह को भी जगह मिल सकती है। वहीं फेरबदल से पहले कई मंत्रियों की छुट्टी भी गई है। ज्ञातव्य है कि कई मंत्रिशें ने अपने इस्तीफे दे दिए हैं। इनमें बंडारू दत्तात्रेय और कलराज मिश्र जैसे नाम भी शामिल हैं। कलराज मिश्र को राज्यपाल बनाए जाने के कयास हैं।   साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार और भाजपा से बड़ी खबर आ रही है। मोदी सरकार में कौशल विकास मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफे की पेशकश की है। इसके साथ ही संजीव बाल्यान, कलराज मिश्र, महेंद्र नाथ पांडेय ने भी इस्तीफे की पेशकश की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार में कौशल विकास मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपा है। माना जा रहा है कि रूडी का इस्तीफा जल्द ही होने वाले कैबिनेट विस्तार की योजना का हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक, बिहार के सारण से सांसद रूडी को संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।    बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री रूडी के प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए भी कहा गया था। रूडी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी एक साल के लिए उड्डयन मंत्री रह चुके हैं। पिछले दिनों लगातार रेल हादसों के बाद रेलमंत्री सुरेश प्रभु भी इस्तीफा दे चुके हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें इंतजार करने के लिए कहा है।ही खबर है कि केंद्रीय विमानन मंत्री गजपति राजू का मंत्रालय भी बदला जा सकता है। यूपी में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के लिए नाम तय होन होने पर केंद्रीय मंत्री महेंद्रनाथ पांडेय ने पहले ही इस्तीफा दे दिया।   मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कलराज मिश्रा, राजीव प्रताप रुडी, निर्मला सीतारमन, गिरिराज सिंह, उमा भारती से भी देर रात तक इस्तीफे लिए जाने की खबर है। कुल आठ मंत्रियों को हटाकर नए चेहरे शामिल किए जाने हैं। कलराज मिश्रा को बिहार का राज्यपाल बनाकर उनकी नाराजगी को दूर किया जा सकता है।सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति कोविंद तीन सितंबर तक नए मंत्रियों को शपथ दिला सकते हैं। बिहार में नीतीश से हाथ मिलाने के बाद अब मोदी केबिनेट में जदयू के चेहरे शामिल हो सकते हैं। इसमें केसी त्यागी, आरसीपी सिंह व संजय कुशवाहा व एआइडीएमके कोटे से एम थंबीदुरई और वी मैत्रेयन मंत्री बन सकते हैं।    साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। देशभर में मोदी लहर कायम है। पाटीदार आंदोलन और दलित उत्पीडऩ की घटनाओं का गुजरात में बीजेपी की पकड़ पर कोई असर पड़ता नजर नहीं आ रहा है। एबीपी न्यूज और सीएसडीएस लोकनीति सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य में बीजेपी एक बार फिर सरकार बनाएगी। ओपिनियन पोल में कहा गया है कि बीजेपी को 144-152 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, कांग्रेस की हालत खस्ता नजर आ रही है। पोल के मुताबिक कांग्रेस केवल 26-32 सीटों पर सिमट सकती है और अन्य को 3 से 7 सीटें ही मिलती दिख रही हैं। गुजरात में बीजेपी 2 दशक से सत्ता में है।    पिछली बार 2012 में नरेंद्र मोदी की अगुआई में बीजेपी को 119 सीटों पर जीत मिली थी। तब कांग्रसे के खाते में 57 सीटें आईं थीं। गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटें हैं। ओपिनियन पोल में हिस्सा लेने वाले 59 फीसदी लोगों ने कहा कि यदि अभी चुनाव हो तो वे सत्ताधारी पार्टी को ही फिर वोट देंगे, केवल 29 फीसदी लोगों कांग्रेस के पक्ष में जाने की बात कही। इसका मतलब यह है कि बीजेपी 2014 लोकसभा चुनाव में मिले समर्थन को अब तक संभालने में सफल रही है।    पोल के मुताबिक बीजेपी को पूरे गुजरात में स्वीप कर सकती है। सबसे अधिक समर्थन सौराष्ट्र और कच्छ में मिल सकती है, जहां 65 फीसदी वोटर्स उसके पक्ष में दिखे। गुजरात में विजय रुपानी ही मुख्यमंत्री पद की पहली पसंद है। 24 फीसदी लोग दोबारा रुपानी को सीएम बनते देखना चाहते हैं। वहीं, 7 फीसदी लोग चाहते है कि पीएम मोदी दोबारा राज्य की सता में आएं। पोल के मुताबिक 2 फीसदी लोग बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को अगले मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते है। हालांकि, 43 फीसदी लोगों ने पसंदीदा मुख्यमंत्री के रूप में किसी उम्मीदवार का नाम नहीं लिया। बताया गया है कि सर्वे 9 अगस्त 2017 से 16 अगस्त 2017 के बीच किया गया है। 50 विधानसभा क्षेत्र के 4090 लोगों की राय ली गई है। शाह ने गुजरात चुनावों के मद्देनजर केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गुजरात विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर समय-समय पर बैठकें कर रहे है। गुरुवार को भी अमित शाह ने मीटिंग की और गुजरात में 150 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करने की रणनीति पर चर्चा की। इस मीटिंग में केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, नरेंद्र सिंह तोमर, निर्मला सीतारमण, जितेंद्र सिंह, पी.पी. चौधरी, भाजपा महासचिव राम लाल व भूपेंद्र यादव तथा गुजरात भाजपा प्रमुख जीतू वाघानी ने हिस्सा लिया। जेटली को बीते सप्ताह गुजरात का चुनाव प्रभारी बनाया गया, जबकि उनका सहयोग करने के लिए सीतारमण व चौधरी को सह प्रभारी बनाया गया। गुजरात विधानसभा का कार्यकाल 2018 में समाप्त होगा और गुजरात में इस साल के अंत में या अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने की उम्मीद है।   नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह गुजरात में पहला विधानसभा चुनाव होगा। मोदी के इस्तीफे के बाद आनंदीबेन पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया था। आनंदीबेन के शासन के दौरान गुजरात में हार्दिक पटेल का उदय हुआ। हार्दिक पटेल ने पाटीदार समुदाय के आरक्षण को लेकर भारी जन आंदोलन किया। इसके बाद भाजपा ने मुख्यमंत्री को बदलने का फैसला किया और आनंदीबेन पटेल की जगह बीते साल अगस्त में विजय रूपानी को मुख्यमंत्री और नीतिन पटेल को उप मुख्यमंत्री बनाया गया। शाह ने कई मौकों पर कहा है कि भाजपा अगला विधानसभा चुनाव रूपानी के नेतृत्व में लड़ेगी।   साभार-khaskhabar.com     

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