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नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद के समाधान का भी सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर पड़ते हुए देखा जा सकता है। असर इतना गहरा है कि बीते सप्ताह सकारात्मक वैश्विक संकेतों के कारण सेंसेक्स और निफ्टी में प्रभावशाली बढ़ोतरी देखी गई। वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई। व्यापक आर्थिक आंकड़ों के मोर्चे पर, देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर में चालू वित्त वर्ष की जून में खत्म हुई तिमाही के दौरान गिरावट दर्ज की गई और यह वित्त वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही में दर्ज 6.1 फीसदी से घटकर 5.7 फीसदी पर आ गई, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 7.9 फीसदी थी।    साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 296.17 अंकों या 0.93 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 31,892.23 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 117.35 अंकों या 1.19 फीसदी की वृद्धि के साथ 9,974.40 पर बंद हुआ। मिडकैप सूचकांक में 2.84 फीसदी और स्मॉलकैप में 3.09 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।   सोमवार को सेंसेक्स में 154.76 अंकों या 0.49 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 31,750.82 पर बंद हुआ। मंगलवार को सेंसेक्स 362.43 अंकों या 1.14 फीसदी की गिरावट के साथ 31,388.39 पर बंद हुआ। बुधवार को सेंसेक्स में फिर तेजी लौटी और यह 258.07 अंकों या 0.82 फीसदी की तेजी के साथ 31.646.46 पर बंद हुआ।   इस सप्ताह सेंसेक्स के तेजी वाले शेयरों में प्रमुख रहे -  इंफोसिस (0.83 फीसदी), विप्रो (2.49 फीसदी), डॉ. रेड्डी (6.2 फीसदी), ल्यूपिन (0.18 फीसदी), मारुति सुजुकी इंडिया (2.77 फीसदी), टाटा मोटर्स (1.74 फीसदी), बजाज ऑटो (6.74 फीसदी), रिलायंस इंडस्ट्रीज (2.68 फीसदी) और एलएंडटी (0.74 फीसदी)।   साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। देश के टैबलेट खंड में लेनोवो ने सैमसंग को मात देकर बाजार में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। साल 2017 की दूसरी तिमाही में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 21.8 फीसदी रही। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिसर्च फर्म इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (आईडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक लेनोवो के टैबलेट बिक्री में 12.6 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया, जिसमें मुख्य रूप से वाणिज्यिक खंड में अच्छी बिक्री का हाथ रहा। लेनोवो की टैबलेट बिक्री का करीब 80 फीसदी हिस्सा सरकार, शिक्षण संस्थानों और बड़े उद्यमियों द्वारा की गई खरीद का है।    आईडीसी इंडिया के एसोसिएट मार्केट एनालिस्ट (क्लाइंट डिवाइस) सेल्सो गोम्स ने कहा, वाणिज्यिक खंड में वृद्धि का प्रमुख कारक सरकार और शिक्षा क्षेत्र की डिजिटल परियोजनाएं हैं। आईडीसी ने यह रिपोर्ट कैलेंडर वर्ष के आधार पर तैयार की है। सैमसंग की बाजार हिस्सेदारी 20.6 फीसदी रही और यह फिसल कर दूसरे स्थान पर आ गया।    आईडीसी की रिपोर्ट में कहा गया कि देश में समीक्षाधीन तिमाही में कुल 7,22,000 टैबलेट्स की बिक्री हुई, जिसमें सभी ब्रांड्स के टैबलेट शामिल थे। वाणिज्यिक खंड में अच्छी बढ़त के बावजूद कुल टैबलेट बिक्री में पिछली तिमाही की तुलना में महज 2.9 फीसदी की वृद्धि हुई।   साभार-khaskhabar.com 

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नई दिल्ली। प्रमुख आयातक देशों में मांग कम होने के रुझान के बीच भारतीय कपड़ा उद्योग का निर्यात अस्थिर और हतोत्साहित बना हुआ है, क्योंकि वैश्विक कपड़ा व्यापार में वृद्धि नहीं हो रही है। मूडीज की निवेश सेवा कंपनी आईसीआरए की रिपोर्ट में बुधवार को यह जानकारी दी गई है। आईसीआरए की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक परिधान व्यापार में गिरावट लगातार तीसरे साल जारी है, जो वैश्विक कपड़ा व्यापार के रुझान का संकेत है।    आईसीआरए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख (कॉरपोरेट सेक्टर रेटिंग) जयंत रॉय ने बताया, यद्यपि हमने पिछले 18 महीनों में विकास के संक्षिप्त चरणों को देखा है, लेकिन यह प्रवृत्ति निर्थक रही है और आत्मविश्वास को स्थापित करने में असफल रही है। ऐसे परिदृश्य में, भारत के कपड़ा निर्यात में निरंतर वृद्धि चुनौतीपूर्ण है। हालिया महीनों में भारतीय रुपये में मजबूती से चुनौतियां और बढ़ी है, जिससे वैश्विक समकक्षों के मुकाबले भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल की गई नोटबंदी के तात्कालिक दुष्प्रभाव के बाद कपड़ा उद्योग अब जीएसटी शासन में परिवर्तन के कारण चुनौतियों का सामना कर रहा है।    इसके कारण वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में कपड़ा उत्पादन में 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जबकि वित्त वर्ष 2016 में इसकी वृद्धि दर शून्य थी और वित्त वर्ष 2017 में इसमें 2 फीसदी की गिरावट आई थी। इसके साथ ही आईसीआरए ने उम्मीद जताई है कि भारतीय निर्यातकों तथा घरेलू कपड़ा/परिधान निर्माताओं का वित्तीय जोखिम प्रोफाइल निकट अवधि में स्थिर रहेगा। साभार-khaskhabar.com   

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मुंबई। अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस समूह की कंपनी रिलायंस कैपिटल लिमिटेड ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड के शेयरों का आवंटन 6 सितंबर से करने की घोषणा की है।   रिलायंस कैपिटल द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि रिलायंस कैपिटल के सभी शेयरधारकों को 6 सितंबर से रिलायंस कैपिटल के प्रत्येक शेयर के साथ रिलायंस होम फाइनेंस का एक-एक शेयर मुफ्त दिया जाएगा।   बयान में कहा गया, ‘‘24 जुलाई 2017 के आमसभा में शेयरधारकों ने 99.59 फीसदी मत से योजना को मंजूरी प्रदान की थी, साथ ही अन्य आवश्यक मंजूरी भी मिल गई है।’’   रिलायंस होम फाइनेंस में रिलायंस कैपिटल की 51 फीसदी हिस्सेदारी है और भविष्य में कंपनी के ऋण कारोबार को कई गुना बढ़ाने के लिए पर्याप्त पूंजीकरण किया जाएगा।   कंपनी के प्रबंधन में 30 जून तक 13,022 करोड़ की परिसंपत्ति थी।साभार-khaskhabar.com     

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नोएडा। भारतीय टाइल उद्योग के प्रमुख ब्रांड्स में से एक ओरिएंट बेल लिमिटेड (ओबीएल) ने गुरुवार को नोएडा में चैनल पार्टनर (भागीदार) गुप्ता स्टील (इंडिया) के साथ मिलकर ओरिएंट बेल टाइल बुटीक (ओबीटीबी) लांच किया।   इस बुटीक में ओरिएंट बेल लिमिटेड ने नवीनतम पैटर्न एवं शेड्स का आकर्षक संग्रह पेश किया गया है। इन टाइल्स में डिजिटल टाइल टेक्नॉलॉजी पर बल दिया गया है, जिसमें स्टोन, सैंड, वूड, मार्बल और नैचुरल लुक टाइल्स शामिल हैं।    कंपनी ने ओबीएल सेरेमिक, डिजिटल, विट्रिफाइड, पॉलिश्ड विट्रिफाइड, डबल चार्ज एवं कई अन्य डेकोरेटिव टाइल्स उतारे हैं। इसके अलावा ओरिएंट बेल लिमिटेड चार यूनिक पेटेंट टेक्नॉलॉजी - फॉरएवर टाइल, कूल टाइल, लाइफ टाइल एवं जर्म-फ्री टाइल उतारे हैं।    ओरिएंट बेल लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष और मुख्य परिचालन अधिकारी के. एम. पाइ ने ओबीटीबी का उद्घाटन करते हुए कहा, ‘‘ओबीटीबी उत्तरप्रदेश के पश्चिमी हिस्से में ओबीएल के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम हैं। ये शोरूम पेशेवर और खुदरा ग्राहकों के लिए वनस्टॉप डेस्टिनेशन हैं। इससे देश के उत्तरी हिस्से में नए बाजारों में विस्तार में मदद मिलेगी।’’   ओरिएंट बेल लिमिटेड की स्थापना दिल्ली में 1977 में हुई थी। कंपनी सेरेमिक एवं विट्रिफाइड टाइल्स की सबसे बड़ी निर्माताओं में से एक है।    साभार-khaskhabar.com     

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कोलकाता। प्रमुख वाहन निर्माता टाटा मोटर्स ने अगले एक या दो सालों में यात्री वाहन खंड में ‘तीसरा स्थान’ हासिल करने की योजना बनाई है। कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।   कंपनी के कार्यकारी निदेशक और मुख्य परिचालन अधिकारी सतीश बी बोरवानकर ने यहां सीआईआई द्वारा आयोजित ‘मैनुफैक्चरिंग एक्सेलेंस, 2017’ आयोजन के दौरान समारोह से इतर एक बयान में कहा, ‘‘पीवी (यात्री वाहन) खंड में हमारी बिक्री बढ़ रही है। बाजार में हमारी स्थिति 7वें या 8वें नंबर पर थी। अब हमने पांचवा नंबर हासिल कर लिया है। हमारा लक्ष्य एक या दो सालों में तीसरे नंबर पर आना है।’’ उन्होंने कहा कि बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कार निर्माता का जोर नई कारों की लांचिंग पर है, साथ ही वे अपने वितरण नेटवर्क को मजबूत करने पर भी जोर दे रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पीवी खंड में कई उत्पाद पर काम जारी है और हम दिवाली से पहले एक कांपैक्ट एसयूवी (स्पोटर्स यूटिलिट वेहिकल) वाहन लांच करेंगे।’’ टाटा मोटर्स ने जुलाई में घरेलू बाजार में कुल 14,933 यात्री वाहनों की बिक्री की थी, जो कि पिछले साल के समान महीने में की गई 13,547 वाहनों की बिक्री से 10 फीसदी अधिक है।साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। ऑनलाइन भुगतान और मार्केटप्लेस पेटीएम पर मई में फ्लाइट्स, ट्रेन और बस टिकटों की 30 लाख से ज्यादा बुकिंग दर्ज की गई है।    कंपनी ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि इनमें से ज्यादातर बुकिंग टिअर 2 और टिअर 3 शहरों से हासिल हुई है।    पेटीएम ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में उसका लक्ष्य हर महीने 1 करोड़ बुकिंग प्राप्त करने का है।   पेटीएम के उपाध्यक्ष अभिषेक राजन ने कहा, ‘‘हमारा प्रयास ऐसे उत्कृष्ट उत्पाद अनुभवों का निर्माण करने पर ध्यान केन्द्रित करना है जिन्हें ग्राहक प्यार करें। कंपनी ने पिछले साल जुलाई व अक्टूबर में क्रमश: फ्लाइट व रेल टिकट की बुकिंग शुरू की थी। लांच करने के कुछ ही महीनों में इसके द्वारा बुकिंग्स करने में भारी वृद्धि देखने को मिली है, और आज यह फ्लाइट्स में तीन शीर्ष कंपनियों में से एक है और आईआरसीटीसी के बाद सबसे ज्यादा टिकटों की बुकिंग करती है।’’साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। महिलाओं को होंडा, फोक्सवैगन और निसान की कार पसंद हैं। सेफ्टी, सिक्यूरिटी और सुविधा वे कारक हैं जिसे महिला खरीदार अपनी कारों में चाहती हैं। एक सर्वेक्षण में इस बात का खुलासा किया गया है। कंसलटिंग फर्म प्रेमॉनएशिया ने गुरुवार को जारी वीमेन ऑटोमोटिव बायर स्टडी (डब्ल्यूएबीएस) में कहा गया कि महिलाएं कार की सर्विस को मोबाइल एप से लाइव ट्रैक करना, कार सर्विस के लिए पिक और ड्रॉप की सुविधाएं, 24 घंटे एसओएस/पैनिक बटन, रीयर कैमरा पार्किंग सेंसर, 24 घंटे सडक़ पर सहायता और ऑटोमेटिक डोर क्लोजिंग सिस्टम जैसे फीचर्स को सबसे ज्यादा महत्व देती हैं।    कंपनी के मुताबिक यह भारत का अब तक का पहला व्यापक ऑटोमोटिव सिंडिकेटेड अध्ययन है। इस अध्ययन में बताया गया कि उत्पाद व स्वामित्व की लागत के लिहाज से होंडा सबसे आगे है। वहीं, ब्रांड इमेज के लिहाज से फोक्सवैगन का स्थान सबसे ऊपर है। बिक्री बाद की सेवा के लिहाज से निसान सबसे बेहतर है, जबकि बिक्री व डिलीवरी में टोयोटा सर्वश्रेष्ठ है। 2017 वीमेन ऑटोमोटिव बायर स्टडी में 28 शहरों की 3,945 महिला कार स्वामियों और इच्छुक खरीदारों को शामिल किया गया।   प्रेमॉनएशिया के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजीव लोचन ने कहा, उद्योग को इस बात को समझने की जरूरत है कि महिला कार खरीदारों की महत्ता बढ़ रही है और इसमें उनकी अपेक्षाओं को लेकर घिसी-पिटी मान्यताएं बनाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने आगे कहा, परिवार की किसी सदस्य या महिला मित्र के लिए कार खरीदने वाले पुरुष मानते हैं कि बजट, स्वामित्व की लागत और ईंधन कुशलता महिलाओं के लिए प्रमुख पसंद हैं। इस मिथक के उलट, अध्ययन से यह खुलासा होता है कि महिला खरीदार ब्रांड और उत्पाद की खासियतों को बहुत ज्यादा महत्व देती हैं और उसकी कद्रदान होती हैं।साभार-khaskhabar.com     

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के उत्तरी इलाके की पहाडिय़ों पर जारी अशांति के कारण गिरते निर्यात के बीच दार्जिलिंग के चाय उगाने वाले किसानों को उम्मीद है कि भौगोलिक परिस्थिति भविष्य में बाजार में उनकी साझेदारी जरूर बढ़ाएगी।     पिछले दो महीने से राज्य में लगातार बंद के कारण 9 जून से अब तक 87 बागानों में चाय उगाने और तोडऩे का काम लगभग बंद कर दिया गया है। इस कारण निर्यात के लिए बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली चाय उपलब्ध नहीं है। यह इस क्षेत्र की कंपनियों और दूसरे देशों में इसके खरीदारों के लिए तगड़ा झटका है।   समूचा दार्जिलिंग 8 जून से ही उबल रहा है। अलग गोरखालैंड राज्य के लिए गोरखा जनमुक्ति मोर्चा द्वारा चलाया जा रहा आंदोलन इसकी वजह है।   इस आंदोलन के तहत मोर्चे ने 12 जून से राज्य में पूर्ण बंद का आह्वान किया था।    दुनिया की सबसे बड़ी चाय उत्पादक कंपनी मैकलियोड रसेल इंडिया के उपाध्यक्ष व प्रबंध निदेशक आदित्य खेतान ने आईएएनएस को बताया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दार्जिङ्क्षलग की चाय की उपलब्धता नहीं होने से इसके खरीदार इससे वंचित हर जाएंगे और तब दूसरे देश, जैसे नेपाल, श्रीलंका और केन्या की चाय बाजार में अपनी जगह बना सकती है।    साल 1984 में बने हालात का हवाला देते हुए आदित्य ने कहा कि उस दौरान सरकार ने चाय की सबसे मशहूर किस्म के निर्यात पर पूरीतरह से प्रतिबंध लगा दिया था। इस कारण सुनने में आया था कि प्रतिबंध के कारण बहुत सी अंग्रेजी बाजार की खरीदार कंपनियों ने केन्या की चाय खरीदनी शुरू कर दी थी। लेकिन अब उन हालात से पार पाना सभी के लिए मुश्किल होगा, जैसा साल 1984 में रहा।    आदित्य ने आगे कहा कि अब अगर खरीदार दूसरे देश की चाय खरीद लेता है, तो दार्जिलिंग के लिए आने वाले समय में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।    गुडरिक गु्रप लिमिटेड प्रबंध निदेशक ए.एन. ङ्क्षसह ने खेतान का समर्थन करते हुए कहा कि लोगों का सुबह का कप कभी खाली नहीं जाता और जब उन्हें दूसरे देशों की चाय दार्जिलिंग की चाय जैसी ही लगेगी तो वे जरूर दूसरे उत्पाद को अपना सकते हैं।    ङ्क्षसह ने आगे कहा कि एक बार जब असली चाय, जो दार्जिङ्क्षलग की है, की जगह दूसरी किस्म की चाय ले लेगी, तब इसका प्रभाव बाजार पर भी पड़ेगा जो दार्जिङ्क्षलग की चाय के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हो सकता है।    उन्होंने कहा कि इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस साल चाय का निर्यात जनवरी से लेकर जून तक महज 20.7 लाख किलो रहा, जबकि साल 2016 में यह 80.13 लाख किलो रहा था।    हालांकि दार्जिङ्क्षलग चाय उगाने वालों को आस है कि बाजार में स्थिति सामान्य होने पर बाजार में उनकी साझेदारी जरूर बढ़ेगी, क्योंकि उनके इलाके की भौगोलिक परिस्थिति में अंतर के कारण उनकी चाय में अलग तरह का स्वाद है।    दार्जिङ्क्षलग चाय एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अशोक लोहिया ने आईएएनएस को बताया कि बाजार में दार्जिङ्क्षलग की चाय न होने पर खरीदार जरूर इसके दूसरे विकल्पों की तलाश करेंगे, लेकिन ऐसी हालत बहुत कम दिन रहने वाली है।    लोहिया ने बताया कि दार्जिङ्क्षलग की चाय अपने आप में कुछ अलग है और इसका कोई विकल्प नहीं है। भौगोलिक परिस्थिति में अंतर होने के कारण बाजार में इसकी अलग पहचान है।    कुछ ऐसा ही डीटीए के मौजूदा अध्यक्ष विनोद मोहन ने कहा कि जीआई एक्ट के तहत दार्जिङ्क्षलग की चाय पूरी तरह से सुरक्षित है और मुझे संदेह है कि कोई दूसरी चाय इसका विकल्प बन सके। बाजार में इसकी मात्रा में कमी हो सकती है, लेकिन जल्द ही ये बाजार में खरीदारी के लिए उपलब्ध होगी।    पहाड़ी इलाके में बंद के कारण दार्जिङ्क्षलग चाय उगाने वाले किसानों को लगातार कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण किसानों ने केंद्र सरकार से वित्तीय मदद देने की मांग की है। मोहन ने बताया कि चाय बोर्ड इस बारे में एक विशेष प्रस्ताव लाना चाहता है, जिसे तैयार किया जा रहा है।    मोहन ने बताया कि इस क्षेत्र ने पहले भी कई दिक्कतें सही हैं, लेकिन उत्पादन के वक्त इतना लंबा बंद कभी नहीं देखा गया है।    मोहन ने कहा कि बंद के कारण चाय उत्पादन पर करीब 20 फीसदी तक असर पड़ा है और राजस्व में करीब 40 फीसदी तक कमी आई है।    कुल मिलाकर कहा जाए, तो चाय उत्पादन क्षेत्र को करीब 350 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।    साभार-khaskhabar.com       

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कोलकाता। देश में इस्पात के उपभोग में साल-दर-साल आधार पर जुलाई में 3.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और कुल 69.05 लाख टन इस्पात का खपत हुआ, जबकि इस दौरान निर्यात में 64 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस्पात मंत्रालय के नवीनतम रिपोर्ट से शनिवार को यह जानकारी मिली।    मंत्रालय की संयुक्त संयंत्र समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘जुलाई में इस्पात का कुल उपभोग 69.05 लाख टन हुआ, जोकि जून की तुलना में 4.2 फीसदी कम है, जबकि साल 2016 के जुलाई की तुलना में यह 3.7 फीसदी अधिक है।’’   देश में अप्रैल-जुलाई की अवधि में तैयार इस्पात का कुल खपत 2.79 करोड़ टन रहा, जो कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 4.4 फीसदी अधिक है।    वहीं, अप्रैल-जुलाई अवधि में तैयार इस्पात के निर्यात में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 65.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और कुल 28.07 लाख टन इस्पात का निर्यात किया गया। जुलाई में 7.7 लाख टन टन इस्पात का निर्यात किया गया, जोकि जून की तुलना में 19 फीसदी अधिक है और एक साल पहले के समान माह की तुलना में 64 फीसदी अधिक है।    हालांकि कुल तैयार इस्पात के आयात में चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 4.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई और कुल 25.05 लाख टन तैयार इस्पात का निर्यात किया गया।      साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। चीन की स्मार्टफोन कंपनी कोमियो ने शुक्रवार को भारतीय बाजार में प्रवेश करते हुए तीन फ्लैगशिप स्मार्टफोन लांच किए। इन स्मार्टफोन के लिए कंपनी ने रिलायंस जियो के साथ एक्सक्लूसिव साझेदारी की है।    इन तीन डिवाइसों - पी1, एस1 और सी1 की कीमत क्रमश: 9,999 रुपये, 8,999 रुपये और 5,999 रुपये रखी गई है।    कोमियो ने रिलायंस जियो के साथ साझेदारी में इन फोन्स के साथ ग्राहकों के लिए 309 रुपये के रिचार्ज पर 5 जीबी अतिरिक्त डेटा का ऑफर दिया है।    कोमियो इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और निदेशक संजय कुमार ने एक बयान में कहा, ‘‘हम भारत में लंबे समय तक टिके रहने के लिए आए हैं और देश के ‘मेक इन इंडिया’ पहल में योगदान करेंगे।’’   कोमियो एस1 में मेटल यूनीबॉडी, 5.2 इंच का एचडी आईपीएस डिस्प्ले, फिंगरप्रिंट सेंसर, 13 मेगापिक्सल का पिछला कैमरा और 8 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा तथा 2,700 एमएएच की बैटरी है।    पी1 में 5,000 एमएएच की बैटरी, मेटल बॉडी, ड्यूअल सिम, 5.5 इंच का एचडी आईपीएस डिस्प्ले, फिंगरप्रिंट सेंसर, 13 मेगापिक्सल पिछला कैमरा तथा 8 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा फ्लैश के साथ है।    कोमियो सी1 में मेटल फ्रेम, 5 इंच का एचडी आईपीएस डिस्प्ले, 8 मेगापिक्सल का पिछला कैमरा तथा 5 मेगापिक्सल का अगला कैमरा है।साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। देश में 4जी तकनीक के आने, डेटा के उपभोग में वृद्धि, बाजार में नई कंपनियों के आने, डिजिटल वॉलेट शुरू होने और स्मार्टफोन की लोकप्रियता में इजाफा होने से प्रौद्योगिकी की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे दूरसंचार क्षेत्र में रोजगार के मौके बढ़ रहे हैं और 2018 में इस क्षेत्र में 30 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी। एक अध्ययन में गुरुवार को यह जानकारी दी गई।   उभरती प्रौद्योगिकीयों जैसे 5जी, एम2एम और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के विकास के फलस्वरूप साल 2021 तक 8,70,000 नई नौकरियां पैदा होंगी। यह जानकारी एसोचैम-केपीएमजी की संयुक्त अध्ययन में दी गई है।   इसमें कहा गया, ‘‘कौशल में अंतर को भरने की आवश्यकता है, जिसमें एक तरफ कौशलयुक्त मानव संसाधन की कमी है, खासकर बुनियादी संरचना और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, एप्किलेशन डेवलपर, सेल्स एक्जीक्यूटिव, इंफ्रास्ट्रक्चर टेकनीशियन, हैंडसेट टेकनीशियन आदि के क्षेत्र में तो दूसरी तरफ वर्तमान मानव संसाधन के कौशल को दुबारा बढ़ाने की जरूरत है ताकि वे वर्तमान प्रौद्योगिकी की जरुरतों के अनुरूप काम करने में सक्षम हो सके।’’   दूरसंचार क्षेत्र की मांग और कौशल की जरूरतों को पूरा करने के लिए दूरसंचार क्षेत्र कौशल परिषद की स्थापना की गई है।   हालांकि उद्योग की सिफारिश है कि अधिक लक्षित और विशेषीकृत कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए, जो वर्तमान मानव संसाधन क्षमताओं और उपलब्धता में इजाफा करे, ताकि इस क्षेत्र का कुल मिलाकर बाधारहित विकास हो सके।    अध्ययन में कहा गया, ‘‘टीएसपीज (दूरसंचार सेवा प्रदाताओं) अपने नेटवर्क में लगातार निवेश कर रहे हैं और वर्तमान नेटवर्क अवसंरचना का आधुनिकीकरण कर रहे हैं। इस पर साल 2017 की पहली तिमाही में कुल 85,003 करोड़ रुपये का निवेश किया गया।’’साभार-khaskhabar.com   

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