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नई दिल्ली। रोजगार और मूल्यांकन मुहैया कराने वाली प्लेटफार्म यूथ4वर्क दिवाली के मौके पर 11 क्षेत्रीय और 10 विदेशी भाषाओं में अपनी सेवाएं शुरू करेगी। यूथ4वर्क की शुरुआत साल 2012 में की गई थी और इसका लक्ष्य युवा वर्ग की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी को दूर करना है। इस प्लेटफार्म पर रोजगार के अवसर मुहैया कराने के अलावा युवा प्रतिभाओं को मूल्यांकन परीक्षण, प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और प्रमाणन पाठ्यक्रमों के लिए अभ्यास परीक्षा देने की सुविधा भी उपलब्ध है।   यूथ4वर्क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रंचित जैन ने बताया, युवाओं की समस्या लगभग सभी देशों में एक जैसी ही है और हमारी कंपनी का हमेशा जोर इस बात पर रहा है कि युवाओं के मूल्यांकन के द्वारा इनका किस प्रकार हल किया जाए। किसी नौकरी के पाने के लिए बेरोजगारी एकमात्र मुद्दा नहीं है।    उन्होंने कहा, दुनिया भर में विभिन्न संस्कृति के युवाओं की बड़ी संख्या तक पहुंचने की पहल केवल तब ही की जा सकती है, जब हम उन तरीकों से उन तक पहुंचे, जिसमें वे बेहतर तरीके से हमारे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जाने वाले सेवाओं को समझते हैं और इसका एक तरीका उस भाषा में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिसे वे समझते हैं।    इसलिए यूथ4वर्क अब हिंदी समेत तेलुगू, तमिल, बंगाली, पंजाबी, मराठी, उर्दू, मलयालय, कन्नड़, ओडिय़ा और गुजराती भाषाओं में भी लांच होने जा रहा है। जैन ने कहा, मैक्सिको की कौशल आधारित कंपनी सेंट्रो नेटेक के साथ साझेदारी से हमें भारत के बाहर भी अपनी सेवाओं के विस्तार में मदद मिलेगी। हमारी वेबसाइट अब स्पैनिश, मंदारिन, अरबी, पोर्टगीज, रूसी, जर्मन, फ्रेंच, तुर्की, जापानी और इतालवी भाषाओं में भी उपलब्ध होगी।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। अडानी एंटरप्राइजेज ने शनिवार को कहा कि वह अपने ‘नवीकरणीय ऊर्जा कारोबार’ को अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) के रूप में डीमर्जर करेगी।    कंपनी ने कहा कि इस कदम से एजीईएल को बम्बई स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कराया जा सकेगा।   कंपनी द्वारा जारी बयान के मुताबिक, यह योजना एईएल (अडानी एंटरप्राइज लिमिटेड) के शेयरधारकों को एजीईएल में प्रत्यक्ष शेयरधारिता प्रदान करने वाली व्यावसायिक संरचना को सरल बनाती है।   बयान में कहा गया, ‘‘इस कदम से अक्षय ऊर्जा व्यापार के सतत विकास के लिए पूंजी जुटाने के लिए वित्तीय लचीलापन प्राप्त होगा।’’   कंपनी ने कहा कि इस योजना के तहत होनेवाला लेनदेन साल 2018 की पहली तिमाही में पूरा होने की उम्मीद है।   साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन को लेकर तीव्र आलोचनाओं का सामना कर रही सरकार ने कारोबारियों, निर्यातकों और छोटे कारोबारियों की चिंताएं दूर करने के लिए शुक्रवार रात कई कदमों की घोषणा की। इसके तहत सरकार ने आम उपभोग की 27 वस्तुओं की दरें घटा दी, जिसमें रोटी, खाखरा, नमकीन, स्टेशनरी, मानव निर्मित धागे शामिल हैं, और इनमें से अधिकांश को पांच प्रतिशत कर की श्रेणी में लाया गया है।   दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं में जरी का काम,गैरब्रांडेड आयुर्वेदिक दवा, सूखा आम, ई-कचरा, प्लास्टिक और रबर कचरा पर कर घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। स्टेशनरी वस्तुओं, डीजल इंजन पुर्जों, पंप पुर्जे, संगमरमर और ग्रेनाइट को छोडक़र फर्श के बाकी पत्थर पर कर को घटाकर 18 प्रतिशत की श्रेणी में रखा गया है।   कई वस्तुओं के आयात पर जीएसटी खत्म कर दिया गया है, जिसमें तेल एवं गैस उत्खनन के लिए रस्सियां और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा मुफ्त आपूर्ति की जाने वाली दवाओं और 5,000 रुपये तक के प्रामाणिक उपहार शामिल हैं।   वित्तमंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी परिषद की दिनभर चली 22वीं बैठक के बाद यह घोषणा की। बैठक में विभिन्न कारोबारों के सामने आ रहीं समस्याओं पर विचार किया गया।    यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी में मौजूद दिक्कतों को सुलझाने का वादा किया था।   जेटली ने निर्यातकों को राहत देते हुए कहा कि जुलाई और अगस्त के रिटर्न क्रमश: 10 अक्टूबर और 18 अक्टूबर से चेक के जरिए रिफंड किए जाएंगे।   उन्होंने कहा कि यह एक अंतरिम राहत होगी, और दीर्घकालिक कदम के रूप में सभी निर्यातकों के लिए पहली अप्रैल, 2018 तक ई-वालेट तैयार कर दिए जाएंगे, ताकि रिफंड प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।   उन्होंंने कहा कि जीएसटी परिषद 1.5 करोड़ रुपये कारोबार वाले एसएमई को मासिक रिटर्न भरने के बदले तिमाही रिटर्न भरने की अनुमति देने पर सहमत हो गई। इससे लगभग देश के 90 प्रतिशत करदाताओं को राहत मिलेगी।   जीएसटी में समायोजन योजना की सीमा 75 लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दी गई है।   जम्मू एवं कश्मीर और झारखंड को छोडक़र विशेष श्रेणी वाले राज्यों के कारोबार की सीमा 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 75 लाख रुपये कर दी गई है। साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। इस दिवाली एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने संकर आई हॉस्पिटल के सहयोग से देश भर में लोगों की जिंदगी रोशन करने के लिए आंखों के लिए हजारों ऑपरेशन का खर्च उठाएगा। इस अनूठी पहल का नाम है ‘करें रोशनी’। एलजी ने इससे पहले ‘करसलाम’ कैम्पेन शुरू किया था, जोकि भारतीय सैन्य बलों के लिए समर्पित था।    एलजी ने इस साल रोशनी के त्योहार- दिवाली पर दृष्टिबाधित लोगों को ‘देखने का उपहार’ (गिफ्ट ए विजन) प्रदान करने की पहल शुरू की है। इस पहल के तहत एलजी समूचे देश को आगे आने और इस नेक कार्य के लिए अपनी आंखें दान करने का संकल्प लेने के लिए एलजी के शॉप्स में आमंत्रित करेगा।    एलजी इस पहल को रेडियो एवं डिजिटल मीडिया के जरिये शुरू करेगा और एलजी स्टोर्स में ऑन-ग्राउंड एक्टीवेशंस भी होंगे। इसमें भारतीयों को इस कार्य के लिए नेत्र दान करने का संकल्प लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के प्रबंध निदेशक किम की वान ने कहा, ‘‘करें रोशनी एलजी की एक अनूठी पहल है और यह दृष्टिबाधितों की जिंदगी में रोशनी लेकर आएगी। एलजी में हम इस सरोकार का दृढ़ता से समर्थन करते हैं और सुनिश्चित करेंगे कि उपभोक्ता भी आगे आकर हमारे स्टोर्स में संकल्प लें और ऐसे लोगों की मदद करें। एलजी ने ऐसे ब्रांड के रूप में अपनी साख बनाई है जोकि समाज की परवाह करता है। हमें खुशी है कि हम ऐसे नेक सरोकारों से जुड़े हुए हैं।’’    साभार-khaskhabar.com     

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मुंबई। देश के शेयर बाजारों में बुधवार को तेजी रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 174.33 अंकों की तेजी के साथ 31,671.71 पर और निफ्टी 55.40 अंकों की तेजी के साथ 9,914.90 पर बंद हुए।   बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 24.79 अंकों की तेजी के साथ 31,522.17 पर खुला और 174.33 अंकों या 0.55 फीसदी की तेजी के साथ 31,671.71 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 31,752.16 के ऊपरी और 31,457.78 के निचले स्तर को छुआ।   नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 24.85 अंकों की तेजी के साथ 9,938.30 पर खुला और 55.40 अंकों या 0.56 फीसदी की बढ़त के साथ 9,914.90 पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में निफ्टी ने 9,938.30 के ऊपरी और 9,850.65 के निचले स्तर को छुआ।   बीएसई के मिडकैप व स्मॉलकैप सूचकांकों में तेजी रही। बीएसई का मिडकैप सूचकांक 59.89 अंकों की तेजी के साथ 15,614.56 पर और स्मॉलकैप सूचकांक 127.65 अंकों की तेजी के साथ 16,320.23 पर बंद हुआ।   बीएसई के 19 सेक्टरों में से 14 सेक्टरों में तेजी और पांच में गिरावट रही।    बीएसई के सर्वाधिक तेजी वाले सेक्टरों में स्वास्थ्य सेवाएं (1.83 फीसदी), ऊर्जा (1.75 फीसदी), तेज खपत उपभोक्ता वस्तु (1.57 फीसदी), तेल और गैस (1.28 फीसदी) और औद्योगिक (0.80 फीसदी) शामिल रहे।    बीएसई के गिरावट वाले सेक्टरों में दूरसंचार (0.54 फीसदी), धातु (0.24 फीसदी), प्रौद्योगिकी (0.23 फीसदी), दूरसंचार प्रौद्योगिकी (0.17 फीसदी) व उपभोक्ता टिकाऊं वस्तुएं (0.10 फीसदी) शामिल रहे।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। जापान की सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन ने यहां शुक्रवार को भारतीय बाजारों के लिए उच्चस्तरीय इंजन ऑयल और केमिकल ब्रांड ‘ईसीस्टार’ लांच किया।   एसएमआईपीएल के प्रबंध निदेशक सातोशी उचिदा ने इस अवसर पर कहा, ‘‘यह ग्राहकों को उन्नत व विकसित उत्पाद पहुंचाने का हमारा अनवरत प्रयास है, जिससे उन्हें उनके सुजुकी मोटरसाइकिल के जबरदस्त अनुभव दिलाएगा। सुजुकी की ‘ईसीस्टार’ ईंधन ऑयल  शक्तिशाली लुब्रिकेंट है, जो न सिर्फ इसके वाहन की क्षमता बढ़ाता है, बल्कि इसके ऑपटिकल लुब्रिकेंट निरूपण से ग्राहकों को जबरदस्त ईंजन सुरक्षा और रख-रखाव और ईंधन खर्च को कम करता है।’’   उन्होंने कहा कि  ‘ईसीस्टार’ ईंधन ऑयल का कमाल उबर-खाबड़ रोड, खराब मौसम समेत अन्य विपरीत परिस्थितियों में भी देखा जा सकता है।     सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन ने वर्ष 1984 में ‘ईसीस्टार’ ब्रांड की स्थापना की थी, जो कि उच्च क्षमता वाली ईंजन ऑयल है। अभी यह ब्रांड पूरे यूरोप, अमेरिका, मेक्सिको, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण पूर्व एशिया में धूम मचा चुका है।    यह ईंधन ऑयल आर 9000 को सभी गिस्सर मॉडल और बड़ बाइक जैसे हायाबुसा, जीएसएक्स-आर1000 और जीएसएक्स-आर1000 आर में प्रयोग किया जा सकेगा। भारत में यह दोपहिया वाहन के अधिकृत सुजुकी स्टोर पर उपलब्ध होगा।     साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। गूगल इंडिया ने बुधवार को कहा है कि क्षेत्रीय भाषाओं में अधिक डिजिटल सामग्री का निर्माण भारत को एक अरब डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने में बड़ा योगदान देगा।     गूगल की सार्वजनिक नीति के कंट्री हेड, चेतन कृष्णास्वामी ने इंडियन मोबाइल कांग्रेस 2017 के मौके पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगर हम स्थानीय भाषा के तत्वों को विकसित करने के लिए इंटरनेट को अनुमति नहीं देते हैं, तो मुझे लगता है कि कहानी पूरी तरह से गड़बड़ हो सकती है। भारत में 40 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, जिनमें से 23.4 करोड़ उपयोगकर्ता स्थानीय भाषा के हैं। 2021 तक इनकी संख्या 53.6 करोड़ तक जाने की संभावना है।’’   गूगल भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को देख उत्साहित है।    इस महीने की शुरुआत में कंपनी ने ‘तेज’ नामक एप लॉन्च किया था। इसके डिजिटल पेमेंट एप को एंड्रॉयड और आईओएस डिवाइसों पर डाउनलोड किया जा सकता है।   यह एप भारत के लिए बनाया गया है, जो देश में अधिकतर रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले स्मार्टफोन पर काम करेगा और यह अंग्रेजी और सात भारतीय भाषाओं (हिंदी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मराठी, तमिल और तेलुगू) में उपलब्ध है।   कृष्णास्वामी ने कहा, ‘‘हमारी धारणा है कि 2025 तक, यह डिजिटल अर्थव्यवस्था 750 अरब से एक खरब के लक्ष्य को छूने में सक्षम होगी, यह पहुंच से बाहर नहीं है। वर्तमान में, डिजिटल अर्थव्यवस्था सकल घरेलू उत्पाद में सात प्रतिशत का योगदान देती है और 2025 तक सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान लगभग 17 फीसदी होना चाहिए।’’   गूगल और केपीएमजी भारत की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश में इंटरनेट पर अंग्रेजी भाषा को भारतीय भाषा उपयोगकर्ताओं ने पीछे छोड़ दिया है।  साभार-khaskhabar.com       

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नई दिल्ली। मिर्च, जीरा और हल्दी का बड़ी मात्रा में निर्यात होने से वित्तीय वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही के दौरान भारत से मसालों का निर्यात मात्रा में 35 प्रतिशत बढ़ गया और इस अवधि के दौरान यह बढक़र 4589.14 करोड़ रुपये का हो गया है। वित्तीय वर्ष 2016-17 की पहली तिमाही में कुल निर्यात 2,27,938 टन था और इसके मुकाबले अप्रैल-जून 2017 में मात्रा की दृष्टि से यह बढक़र 3,06,990 टन हो गया।    अप्रैल-जून 2017 के दौरान 1,33,000 टन के साथ सबसे ज्यादा निर्यात मिर्च का रहा और इससे 1,198 करोड़ रुपये की कमाई हुई। स्पाइसेस बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. ए. जयतिलक ने कहा, भारतीय मसालों में मिर्च की सर्वाधिक मांग रहती है और वैश्विक बाजारों में उच्च गुणवत्ता के मसालों की बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय मांग को इसने पूरा किया है। इसके अलावा, लहसुन को बढ़ावा देने का बोर्ड का प्रयास इसके निर्यात की पर्याप्त वृद्धि में परिणत हुआ है।    मात्रा और मूल्य के मामले में लहसुन में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि के दौरान जहां इसका निर्यात भी पर्याप्त रूप से बढ़ा वहीं इसका मूल्य 107 प्रतिशत तक बढ़ा और मात्रा 169 प्रतिशत तक बढ़ी। बड़ी सौंफ की मा़त्रा में 92 प्रतिशत और मूल्य में 49 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई जब वैश्विक स्तर पर यहां से 13,250 टन बड़ी सौंफ का निर्यात किया गया।    पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले इस साल सरसों, सौंफ और सोआ बीज जैसे अन्य बीजीय मसालों का भी निर्यात मात्रा में 83 प्रतिशत बढ़ा और इसके मूल्य में 63 प्रतिशत वृद्धि रही। इस अवधि के दौरान परिमाण में 10 प्रतिशत और मूल्य में 48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 134.55 करोड़ रुपये मूल्य की 1,220 टन छोटी इलायची का निर्यात किया गया जबकि पिछले साल इसी अवधि में सिर्फ 90.81 करोड़ रुपये की 1,106 टन इलायची का ही निर्यात हो पाया था।    अप्रैल-जून 2017 के दौरान अदरक और पुदीना-उत्पादों का भी कुल निर्यात-वृद्धि में अहम योगदान रहा। प्रसंस्कृत और मूल्यवर्धित मसालों की बढ़ती मांग के कारण करी पाउडर तथा पेस्ट के अलावा मसालों के तेल और तैलीरालों का निर्यात भी बढ़ा, जिसका मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में मसालों की निर्यात-वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान रहा।   साभार-khaskhabar.com     

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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा कि उद्योग जगत का कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) खर्च सरकार के सार्वजनिक खर्च में मददगार बन सकता है।   कंपनी कानून में संशोधन के बाद बीते तीन-चार वर्षों से सीएसआर अस्तित्व में हैं।   जेटली ने यहां एक्सिस बैंक के सीएसआर कार्यक्रम में कहा, ‘‘केंद्र और राज्य सरकारें पैसा खर्च करती हैं। यदि यह (सीएसआर खर्च) इस काम से जुड़ जाए तो इससे काफी मदद मिल सकती है।’’   उन्होंने कहा कि 2013 में जब कंपनी कानून में संशोधन किया गया था और मुनाफे से सीएसआर का हिस्सा निकालना अनिवार्य कर दिया गया था, तब उद्योग के एक वर्ग ने इसे अतिरिक्त कर बताया था।   जेटली ने कहा, ‘‘लेकिन इन तीन-चार वर्षों में हमने देखा है कि यह कारगर साबित हो रहा है।’’   उन्होंने कहा कि किसी भी विकसित देश में कॉरपोरेट चैरिटी हमेशा से सेवा का एक बहुत ही महत्वपूर्ण औजार है।   जेटली ने कहा, ‘‘भारत में पारंपरिक रूप से ऐसा नहीं है। भारत में चैरिटी हमेशा समुदायों के साथ जुड़ी हुई है।’’   जेटली ने कहा कि जिस क्षेत्र में सीएसआर व्यय किया जाएगा, उस क्षेत्र का चुनाव करना अत्यधिक महत्वपूर्ण होना चाहिए।   उन्होंने एक्सिस बैंक की सीएसआर परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां सुधार की जरूरत है। भौगोलिक और सामाजिक सेक्टर में क्षेत्र हैं, जहां तक पहुंचना अधिक चुनौतीपूर्ण है।’’   जेटली ने कहा, ‘‘एक्सिस बैंक की सीएसआर पहल देश के सर्वाधिक उपेक्षित हिस्से तक पहुंच गई है। इन क्षेत्रों में रह रहे लोग बताते हैं कि कैसे हर चीज उनकी पहुंच से दूर थी और उस तक पहुंचने में अधिक लागत लगती थी और इस लागत को पूरा करने के लिए अधिक आय के साधन नहीं थे।’’   उन्होंने कहा, ‘‘लेह और लद्दाख जैसे छोटे हिस्सों, जिनकी आवाज अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम सुनी जाती थी, एक्सिस बैंक ने ऐसे क्षेत्रों को सामने मोर्चे पर रखकर सराहनीय काम किया है। स्कूलों के उन्नयन के लिए सीएसआर संसाधन के बड़े हिस्से को खर्च करना एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।’’   जेटली ने कहा कि सीएसआर गतिविधियों के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण क्षेत्र है।   साभार-khaskhabar.com     

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सियोल। सैमसंग का परिचालन लाभ 2017 की चौथी तिमाही में रिकॉर्ड 13.6 अरब डॉलर होने का अनुमान है। समाचार एजेंसी योनहप के मुताबिक, एफएनगाइड इंक की रपट में कहा गया है कि बाजार की औसत आम राय तीन महीने पहले के अनुमानित 137 खरब वोन (12 अरब डॉलर) से ऊपर है। यह रपट 23 स्थानीय ब्रोकरेज संस्थाओं के आकलन पर आधारित है।   वित्तीय उद्योग पर नजर रखने वाले एफएनगाइड ने कहा कि हालिया अनुमान एक महीने पहले प्रतिभूति कंपनियों द्वारा अनुमानित 12.9 अरब डॉलर की बाजार सहमति और सैमसंग की दूसरी तिमाही के परिचालन लाभ से ज्यादा है, जो अप्रत्याशित तौर पर 12.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया।   यदि सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का परिचालन लाभ बाजार की उम्मीदों को पूरा करता है तो यह जुलाई-सितंबर की अवधि के लिए 12.5 अरब डॉलर कमाई के अनुमान से ऊपर होगा।   एफएनगाइड ने कहा है कि बाजार के इस अनुमान का मुख्य कारण सेमीकंडक्टर बाजार में तेजी का जारी होना है, जिसके चौथी तिमाही में मजबूत बने रहने की उम्मीद है। साभार-khaskhabar.com   

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नई दिल्ली। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि सरकार आर्थिक सुस्ती के बीच स्थिति की समीक्षा कर रही है और इससे निपटने के लिए जल्द ही ‘उपयुक्त कदम’ उठाए जाएंगे।    जे.पी. मोर्गन की ओर से आयोजित दूसरे ‘भारत इंवेस्टर समिट’ को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा, ‘‘पहले दिन से ही यह सरकार अग्रसक्रिय है। हमलोग आर्थिक संकेतकों की समीक्षा कर रहे हैं और सही समय पर सही कदम उठाया जाएगा। निजी निवेश में समस्या है। सरकार ने समस्या सुलझा लिया है, बहुत जल्द ही इस पर कदम उठाएंगे।’’    उन्होंने कहा कि बैंकों ने अतीत में अत्यधिक ऋण दिया था। बैंकों के लिए पूंजी का प्रस्ताव भी लंबित है।   जेटली ने आर्थिक स्थिति और इसके उपायों की समीक्षा के लिए 19 सितंबर को उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी। इस बैठक में रेलमंत्री पीयूष गोयल, वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु, मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन और वित्त मंत्रालय के सचिव अशोक लवासा, सुभाष चंद्र गर्ग, हसमुख अधिया, राजीव कुमार और नीरज कुमार गुप्ता मौजूद थे।    सरकार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और औद्योगिक उत्पादन के साथ चालू खाते में गिरावट के बाद वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज पर विचार कर रही है। विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती के कारण चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की दर घटकर 5.7 फीसदी पर आ गई है, जो साल 2014 में मोदी के सत्ता संभालने के बाद की सबसे कम दर है।    जेटली ने कहा कि सरकार के पास चालू वित्तवर्ष में इस समस्या से निपटने के लिए महत्वाकांक्षी योजना है।   उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि गुरुवार को भी एयर इंडिया विनिवेश की बैठक थी। गत कुछ वर्षों में, बाजार में काफी उथल पुथल रहा है, इसलिए सरकार को विनिवेश के लिए सही समय का इंतजार करना पड़ेगा।’’   वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तकनीकी मुश्किलों का जिक्र करते हुए वित्तमंत्री ने व्यापारियों को रिटर्न जमा कराने की अंतिम तिथि से चार-पांच दिन पहले ही इसे अंतिम दिनों की परेशानी से बचने के लिए जमा करवाने की सलाह दी।   जीएसटी में ज्यादा से ज्यादा सामग्रियों को शामिल करने पर उन्होंने कहा कि रियल स्टेट को इसमें शामिल करना सबसे आसान होगा।    उन्होंने कहा, ‘‘अभी तक हम जीएसटी के बाद मुद्रास्फीति के प्रभाव को रोकने में सक्षम रहे हैं। मौजूदा सरकार जीएसटी को लागू करने से लेकर हर मामले में तत्काल फैसले लेती है।’’   यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) पर वित्त मंत्री ने कहा कि वह निजी तौर पर इसके पक्ष में हैं लेकिन अभी इसके लिए राजनीतिक परिपक्वता की जरूरत है। साभार-khaskhabar.com   

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कोलकाता। भारतीय चाय बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष प्रथम सात महीनों के दौरान चाय निर्यात 4.58 प्रतिशत बढक़र 1211.30 लाख किलोग्राम रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान यह 1158.30 लाख किलोग्राम रहा था।   बोर्ड ने बुधवार को कहा कि मूल्य के संदर्भ में जनवरी से जुलाई की अवधि के दौरान चाय निर्यात बढक़र 2,363.22 करोड़ रुपये का रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान यह 2,260.07 करोड़ रुपये का रहा था।   मिस्र, चीन और श्रीलंका को होने वाले भारतीय चाय निर्यात में काफी वृद्धि हुई है।   चाय बोर्ड के अनुसार, इस अवधि के दौरान श्रीलंका को चाय के निर्यात में 98.23 प्रतिशत वृद्धि हुई और यह 22.60 लाख किलोग्राम से बढक़र 44.80 लाख किलोग्राम हो गया।   इसी तरह भारत ने चीन को इस अवधि के दौरान 71 प्रतिशत अधिक चाय का निर्यात किया और यह 41.90 लाख किलोग्राम रहा, जबकि श्रीलंका को चाय के निर्यात में 150 प्रतिशत वृद्धि हुई और यह 25 लाख किलोग्राम रहा।   भारत ने इन सात महीनों के दौरान ईरान को 125.20 लाख किलोग्राम चाय का निर्यात किया और संयुक्त अरब अमीरात को 100.10 लाख किलोग्राम चाय का निर्यात किया। साभार-khaskhabar.com         

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