मथुरा। श्री रामायण प्रचारिणी समिति के तत्वावधान में महाविद्या काॅलोनी स्थित रामलीला मैदान में चल रही श्री राम कथा में षुक्रवार को सीता विदाई का संगीयत मय सजीव चित्र्ाण कर भक्तों को भावविभोर कर दिया। कथा का षुभारम्भ रामयण और व्यास गद्दी के पूजन के साथ हुआ। व्यास पीठ से बोलते हुए डा.रामकमल वेदांती महाराज ने कहाकि जब तक हम अपने अभिमान रूपी धनुष को नहीं तोडेंगे तब तक हमें ब्रहृमतत्व की प्राप्ति नहीं होगी। उन्होंने कहाकि कि संस्कार ही मनुष्य को सच्चा सुख देते हैं, अगर हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे सुखी रहें तो हमें उन्हें बचपन से ही रामचरित मानस की षिक्षा देनी चाहिए। जो ब्रज भूमि पर पैदा हुआ है, वह पिछले जन्म में संतरूपी आत्मा अवष्य होगा। तभी हमें ब्रज में जन्म मिला है। रामकथा का समापन रामयण की आरती के साथ हुआ। इस अवसर पर श्री रामायण प्रचारिणी समिति के अध्यक्ष जुगल किषोर, बांकेबिहारी, किषनचंद निवाडवाले, गोपष्वर नाथ चतुर्वेदी, वन बिहारी, बालकिषन, श्रीमती सुमन, महेष, यमुना प्रसाद, सुरेषचंद अग्रवाल, आषा अग्रवाल, दिनेष, कैषला, गिरीषचंद बनवारी आदि मौजूद रहे। संचालन लक्ष्मण प्रसाद द्वारा किया गया।
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