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नई दिल्ली। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन बीजेपी के लिए खतरनाक है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी इस बात को माना है। अमित शाह ने स्वीकार करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अगर हमें किसी से खतरा है तो वह है सपा-बसपा की एकता से। अमित शाह ने यह बात एक न्यूज चैनल में कही।    वहीं दिल्ली के लिए 2019 लोकसभा चुनाव के बाबत अमित शाह ने गुरुवार (21 जून) को दिल्ली बीजेपी को दुरुस्त किया। उन्होंने गुरुवार को आठ घंटों तक मैराथन मीटिंग करते हुए कई नेताओं को जमकर फटकार लगाई। अमित शाह ने ऐसे सभी नेताओं को तत्काल अपने व्यवहार में बदलाव लाने को कहा जो गुटबाजी में लिप्त रहते हैं। उन्होंने सचेत किया कि तत्काल अपने व्यवहार में बदलाव नहीं करते हैं तो पार्टी जल्द ही उन पर कड़ी कार्रवाई कर सकती है। इतना नहीं उन्होंने 2019 को लेकर सभी नेताओं से उनका प्लान भी मांगा। लेकिन ज्यादातर नेताओं के पास चलताऊं प्लान ही थे।    गोपनीयता के शर्त पर एक नेता ने बताया कि किसी भी प्लान से अमित शाह बहुत खुश नजर नहीं आए। इसके बाद उन्होंने अपनी तरफ से बताया कि पिछले चुनावों में बीजेपी को अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़ी जातियों से बहुत वोट मिले थे। केंद्र सरकार भी उनका काफी खयाल रख रही है। ऐसे में दिल्ली बीजेपी नेताओं को भी चाहिए कि वह निचली जातियों का खास खयाल रखें। इसके अलावा भाजपा प्रमुख अमित शाह ने सोशल मीडिया पर सक्रिय पार्टी की दिल्ली इकाई के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लोगों के बीच विश्वसनीयता खोने से बचने के लिए फर्जी सामग्री पोस्ट करने की ‘गलती’ ना करने की सलाह दी।    सूत्रों ने बताया कि भाजपा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों समेत ‘सोशल मीडिया योद्धाओं’ को दिए संबोधन में शाह ने उनसे मोदी सरकार की चार साल की उपलब्धियों को रेखांकित करने के लिए कहा। बैठक में शामिल एक व्यक्ति ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, ‘पार्टी अध्यक्ष ने हमसे ट्विटर, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी तस्वीरें, डेटा और संदेश पोस्ट करने की गलती करने से बचने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि इससे लोगों के सामने हमारी विश्वसनीयता खतरे में पड़ती है।’ शाह ने एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में पार्टी के करीब 300 कार्यकर्ताओं और समर्थकों से मुलाकात की जिनके सोशल मीडिया पर 10,000 से अधिक फॉलोअर्स हैं। साभार-khaskhabar.com          

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज चौथे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में करीब 55 हजार से ज्यादा स्वयंसेवियों के साथ योगासन किया। कई केन्द्रीय मंत्रियों ने देशभर में इन कार्यक्रमों में बढचढ कर हिस्सा लिया।    देहरादून का कार्यक्रम हिमालय की गोद में स्थापित वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में आयोजित किया गया। योग दिवस पर आज दुनियाभर में योग संबंधी कार्यक्रम आयोजित हो रहे है। योग दिवस के लिए प्रधानमंत्री बुधवार रात ही यहां पहुंचे। यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका स्वागत मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और राज्यपाल के के पॉल ने किया।   इससे पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री को देहरादून के योग दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा था कि इससे योग को लेकर राज्य की एक पहचान स्थापित होगी। साथ ही इससे पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। कई केंद्रीय मंत्री पूरे देश में अलग-अलग जगहों पर योग कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उत्तराखंड के देहरादून में योग कर रहे हैं और उनके साथ 50 हजार से अधिक लोग मौजूद हैं।     साभार-khaskhabar.com  

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श्रीनगर। आर्मी चीफ बिपिन रावत ने बुधवार को कहा है कि राज्यपाल शासन लागू होने के बावजूद सेना के ऑपरेशन पहले की तरह चलते रहेंगे। उन्होंने कहा, हमने सिर्फ रमजान के दौरान (जम्मू-कश्मीर में) अपने ऑपरेशन रोके थे, लेकिन हमने देखा कि क्या हुआ। राज्यपाल शासन से हमारे ऑपरेशनों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सेना किसी तरह के राजनैतिक हस्तक्षेप का सामना नहीं करती।        शहीद औरंगजेब के परिजनों से की मुलाकात इससे पहले सोमवार को सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने जम्मू-कश्मीर के अग्रिम इलाकों का दौरा किया था और सीमा क्षेत्र में एवं आंतरिक इलाकों में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान वे शहीद जवान औरंगजेब के परिजनों से भी मिले। इस दौरान उन्होंने कहा कि शहीद औरंगजेब की कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी और भारतीय सेना जल्द ही इसका बदला लेगी।        आपको बता दें कि मंगलवार को पीडीपी और बीजेपी की गठबंधन वाली सरकार के गिरने के बाद बुधवार को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद यहां राज्यपाल शासन लागू कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर में अगले छह महीने तक राज्यपाल शासन की घोषणा हुई है।        कई जगह आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू  रमजान के दौरान सीजफायर खत्म होते ही सेना ने दक्षिण कश्मीर में कई जगह आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू कर दिए है। मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के त्राल में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में 3 आतंकी मारे गए है। मारे गए आतंकवादियों में जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर भी शामिल है। वहीं सोमवार को भी बांदीपुरा जिले में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में दो आतंकवादी ढेर हुए थे।    साभार-khaskhabar.com      

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा ने राज्य में लगाए गए राज्यपाल शासन के क्रियान्वयन की स्थिति पर चर्चा के लिए शुक्रवार को श्रीनगर में सर्वदलीय बैठक बुलाई है।  पीडीपी-बीजेपी गठबंधन टूटने के बाद बनी स्थिति  राज्य में पीडीपी-बीजेपी सरकार गिरने के एक दिन बाद बीजेपी ने राष्ट्रीय हित और खराब सुरक्षा की स्थिति का हवाला देते हुए क्षेत्रीय पार्टी के साथ अपने तीन साल के गठबंधन को तोड़ दिया। एक राजपत्र अधिसूचना के मुताबिक गवर्नर ने निलंबित एनीमेशन में विधायी असेंबली को तब तक रखा जब तक गवर्नर के शासन की घोषणा रद्द हो जाती है या बाद में घोषणा की जाती है। वर्तमान विधानसभा की छ: वर्ष की अवधि मार्च 2021 में समाप्त होती है।  शुक्रवार शाम को होगी बैठक  अधिकारियों के मुताबिक, राज्यपाल ने राष्ट्रीय दलों की राज्य इकाइयों के प्रमुख समेत सभी पार्टी प्रमुखों की एक बैठक बुलाई है। उन्होंने कहा कि बैठक शुक्रवार की शाम होगी।   साभार-khaskhabar.com    

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जम्मू। जम्मू कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रवींद्र रैना को आतंकवादी संगठनों की तरफ से जाने से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। बीजेपी नेता को धमकी ऐसे समय पर मिली है, जब राज्य में राजनीतिक हालात काफी उथल-पुथल हैं और उनकी पार्टी से सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। फिलहाल राज्य में राज्यपाल शासन लागू है।      खबर के मुताबिक रवींद्र रैना को ये धमकी आतंकियों के द्वारा दी गई है। उन्होंने खुद धमकी मिलने की बात बताई है। उन्होंने बताया है कि गुरुवार कराची से उन्हें धमकी भरा फोन कॉल आया था। आतंकियों ने कहा कि वे उनका हाल शुजात बुखारी जैसा ही करेंगे। रैना ने इसके बाद पुलिस को जानकारी दी है। इसके साथ ही अब इस मामले की जांच भी का जाएगी। रैना को इस धमकी से करीब 48 घंटे पहले घाटी में बीजेपी ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया। यही कारण है कि महबूबा मुफ्ती को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके बाद उनकी सरकार गिर गई थी।      वहीं, उन्होंने कहा है कि मुझे पहले भी पाकिस्तान से इंटरनेट और फोन पर धमकियां मिलती रही हैं। मगर कभी भी मैंने उन पर ध्यान नहीं दिया। मुझे कराची के नंबर से कॉल आया था। हमारे देश के जवानों पर यकीन है कि वे अच्छी तरह से हमारी सुरक्षा में लगे हुए हैं। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि मैं अक्सर पाकिस्तान के खिलाफ बोलता हूं।      राज्य विधानसभा में पाक के आतंकी गुटों के खिलाफ आवाज उठा चुका हूं, लिहाजा वे हमें डरा-धमका रहे हैं। मैंने इस संबंध में संबंधित पुलिस-एजेंसियों व राज्यपाल को सूचना दे दी है। हाल ही में राइजिंग कश्मीर के संपादक और पत्रकार शुजात बुखारी का की अज्ञात हमलावरों ने अखबार के कार्यालय के बाहर ही गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी।     साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली। बीजेपी-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद जम्मू-कश्मीर में अब राज्यपाल शासन लागू होना पूरी तरह तय है। कांग्रेस ने जहां पीडीपी के साथ गठबंधन करने से इनकार कर दिया है वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला ने भी राज्य में राज्यपाल शासन को ही एकमात्र विकल्प बताया है।  बीजेपी-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाने की तैयारियां हो गई हैं। इस बीच राज्यपाल एनएन वोहरा ने सभी बड़ी पार्टियों से चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेज दी है। राज्यपाल ने रिपोर्ट के साथ ही सेक्शन 92 (जम्मू-कश्मीर के संविधान) के तहत राज्य में राज्यपाल शासन की मांग की है।   भाजपा ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आज ही दिल्ली में राज्य के सभी बड़े पार्टी नेताओं के साथ बैठक की जिसके बाद बीजेपी ने समर्थन वापस लेने का ऐलान किया है। शाम तक जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अपने पद से इस्तीफा देंगी। बीजेपी ने समर्थन वापसी की चिट्ठी राज्यपाल को सौंप दी है। वहीं, खबर आ रही है कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेज दिया है।    जम्मू-कश्मीर की स्थिति में सुधार लाने के लिए बीजेपी के साथ हाथ मिलाया बीजेपी से गठबंधन टूटने के बाद पीडीपी नेता और जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि मैं इससे बिल्कुल भी अचंभित नहीं हूं। हमने कश्मीर में सत्ता हथियाने के लिए गठबंधन नहीं किया था। जम्मू-कश्मीर की स्थिति में सुधार लाने के लिए बीजेपी के साथ हाथ मिलाया था। उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि अब हमें किसी गठबंधन की कोई जरूरत नहीं है। हमें लगा था कि भाजपा के साथ गठबंधन जम्मू-कश्मीर के लिए बेहतर होगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका। मुफ्ती ने कहा कि हम हमेशा से कहते आए हैं कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की ताकतवर नीति कभी कारगर साबित नहीं होगी। राज्य को शत्रु राज्य के रूप में देखना ठीक नहीं है ये कभी भी बर्दाश्त नहीं होगा।    माना जा रहा है यदि जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाया जाता है तो पिछले चार दशकों में ये आठवीं बार होगा।    बीजेपी नेता राममाधव ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में स्थिति काफी बिगड़ी है, जिसके कारण हमें ये फैसला लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में प्रधानमंत्री, अमित शाह, राज्य नेतृत्व सभी से बात की है।  पीडीपी नेता नईम अख्तर ने कहा कि फिलहाल पीडीपी शाम 5 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी। कहा जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने यह कदम उठाया है। गठबंधन में आगे चलना मुश्किल हो गया था- फैसले के बाद बीजेपी नेता राम माधव ने कहा कि हमने गृह मंत्रालय, जम्मू-कश्मीर के तीन साल के कामकाज, सभी एजेंसियों से राय लेकर ये फैसला किया है। जिसके बाद ये तय हुआ है कि बीजेपी अपना समर्थन वापस ले रही है। राम माधव ने कहा कि तीन साल पहले जो जनादेश आया था, तब ऐसी परिस्थितियां थी जिसके कारण ये गठबंधन हुआ था। लेकिन जो परिस्थितियां बनती जा रही थीं उससे गठबंधन में आगे चलना मुश्किल हो गया था।   बीजेपी की राज्य में राज्यपाल शासन की मांग- बीजेपी ने राज्य में राज्यपाल शासन की मांग की है। माधव ने कहा, 'पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी चीफ अमित शाह की सहमति के बाद यह फैसला किया गया। श्रीनगर में एक बड़े पत्रकार की हत्या हो गई। केंद्र ने जम्मू-कश्मीर सरकार को हर तरह से मदद की।   दायित्व निभाने में नाकाम रही हैं महबूबा मुफ्ती- उन्होंने कहा, 'तीन साल सरकार चलाने के बाद हम इस सहमति पर पहुंचे हैं कि कश्मीर में जो परिस्थिति उत्पन्न है उसपर नियंत्रण के लिए हम अलग हो रहे हैं। पीडीपी ने अड़चन डालने का काम किया। दायित्व निभाने में महबूबा मुफ्ती नाकाम रही हैं। महबूबा घाटी में हालात संभालने में असफल रहीं।'      शिवसेना का बड़ा हमला बीजेपी-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद शिवसेना ने कहा है कि अपवित्र गठबंधन को लेकर हमने पहले ही कह दिया था कि यह ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा. यह एंटी नेशनल गठबंधन था। कश्मीर में रहा केंद्र का पूरा सहयोग बीजेपी नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने पूरा सहयोग किया है। गृहमंत्री ने लगातार घाटी का दौरा किया, सभी से बातचीत का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तान को सीमा पार से गतिविधियों करने पर रोक लगाई, 4 हजार बंकर बनाए गए थे।   उन्होंने कहा कि भले ही हम सरकार में थे, लेकिन मुख्य नेतृत्व बीजेपी के हाथ में था। इसलिए हम इन हालातों को संभालने में सफल नहीं रह पाए, कई मुद्दों पर राज्य सरकार असफल रही। घाटी में शांति स्थापित नहीं हो सकी इसके अलावा जम्मू और लद्दाख में भी विकास कार्य रुका रहा. जम्मू और लद्दाख की जनता के साथ भेदभाव हुआ।     साभार-khaskhabar.com    

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार की योजनाओं का जमीनी स्तर पर आम जनता को कितना लाभ हुआ है, इसकी जानकारी लेने में जुटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज किसानों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए विभिन्न मुद्दों पर सीधी बातचीत कर रहे हैं।    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नमो ऐप के जरिए देश भर के किसानों से कहा कि हमारी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो यह सुनिश्चित करने से लिए काम कर रही है। इसके लिए जहां भी जिस चीज की जरूरत महसूस की जा रही है उसकी सुविधा मुहैया कराई जा रही है। हमें भारत के किसानों पर भरोसा है। पीएम मोदी ने कहा, किसान हमारे अन्नदाता है, वे हमें भोजन देते हैं, पशुओं को चारा देते हैं और सभी उद्योगों को कच्ची सामग्री देते हैं। देश की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने का पूरा श्रेय हमारे किसान भाइयों और बहनों को जाता है। उन्होंने कहा कि शुरू से ही किसानों को उनके नसीब पर छोड़ दिया गया। इस सोच को बदलने के लिए एक निरंतर प्रयास की जरुरत थी, वैज्ञानिक प्रयास की जरुरत थी और पिछले 4 साल में हमनें जमीन के रख रखाव से लेकर के बाजार उपलब्ध कराने तक व्यापक योजनाओं के तहत भरसक प्रयास किया है।    उन्होंने कहा, हमारा प्रयास है कि किसानों को खेती की पूरी प्रक्रिया में हर कदम पर मदद मिले, यानी बुआई से पहले, बुआई के बाद और फसल कटाई के बाद भी देश के किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिले, इसके लिए सरकार ने तय किया है की अधिसूचित फसलों के लिए एमएसपी उनकी लागत का कम से कम डेढ़ गुना घोषित किया जाएगा। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत आज देश भर में 99 सिंचाई परियोजनाएं पूरी की जा रही हैं।    हर खेत को पानी मिले, इस लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। किसानों को फसल को लेकर किसी भी तरह का जोखिम न हो, इसके लिए आज फसल बीमा योजना है। पहले खाद के लिए लंबी-लंबी कतारें लगती थी लेकिन अब किसानों को आसानी से खाद मिल रहा है। आज देश के किसानों को 100 फीसदी नीम कोटिंग वाला यूरिया मिल रहा है। पीएम ने कहा, यह अच्छी बात है कि आज हमारा किसान अपनी मेहनत में आधुनिक मशीनों और उपकरणों को भी जोड़ रहा है और इसका लाभ अपने आस-पास के गांवों में भी पहुंचा रहा है।     साभार-khaskhabar.com  

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श्रीनगर। जम्मू कश्मीर में सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने अपने अपने रास्ते अलग कर लिए। भाजपा के पीडीपी के साथ गठबंधन तोडऩे के साथ तीन साल पुरानी राज्य सरकार गिरने के बाद अब राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया है। सीएम महबूबा मुफ्ती के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद घाटी में 8वीं बार राज्यपाल शासन लग गया है। घाटी में यह पहला ऐसा मौका है जब एनएन वोहरा के कार्यकाल में चौथी बार राज्यपाल शासन लगाया जाएगा। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा। जम्मू कश्मीर के राज्यपाल एन एन वोहरा की रिपोर्ट को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है। राज्य में 6 महीने तक राज्यपाल शासन रहेगा।    इससे पहले मंगलवार को सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ विचार विमर्श करने के बाद राज्यपाल वोहरा ने जम्मू कश्मीर के संविधान की धारा 92 के तहत राज्यपाल शासन लगाने के लिए राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट भेजी थी। यह चौथा मौका है जब एन एन वोहरा के राज्यपाल के रूप में कार्यकाल के दौरान जम्मू कश्मीर में केन्द्रीय शासन लगाया गया है। पूर्व नौकरशाह एनएन वोहरा 25 जून 2008 को राज्यपाल बने थे।   वोहरा ने गठबंधन सरकार से भाजपा के बाहर होने और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के इस्तीफा देने के बाद जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू करने के लिए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को अपनी रिपोर्ट भेजी थी। मंगलवार को ही गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने आवास पर गृह सचिव राजीव गाबा और खुफिया ब्यूरो एवं उनके मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक करके जम्मू कश्मीर की जमीनी स्थिति का आकलन किया था।    जानिए, जम्मू-कश्मीर में कब-कब लगा राज्यपाल शासन... जम्मू-कश्मीर में मार्च 1977 को पहली बार राज्यपाल शासन लागू हुआ था। उस समय एल के झा राज्यपाल थे। तब सईद की अगुवाई वाली राज्य कांग्रेस ने नेशनल कांफ्रेंस के नेता शेख महमूद अब्दुल्ला की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।   मार्च 1986 में एक बार फिर सईद के गुलाम मोहम्मद शाह की अल्पमत की सरकार से समर्थन वापस लेने के कारण राज्य में दूसरी बार राज्यपाल शासन लागू करना पड़ा था। इसके बाद राज्यपाल के रूप में जगमोहन की नियुक्ति को लेकर फारूक अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री के पद से त्यागपत्र दे दिया था। इस कारण सूबे में तीसरी बार केंद्र का शासन लागू हो गया था।   अक्टूबर, 2002 में चौथी बार और 2008 में पांचवीं बार केंद्र का शासन लागू हुआ।  राज्य में छठीं बार साल 2014 में राज्यपाल शासन लागू हुआ था।    पिछली बार मुफ्ती सईद के निधन के बाद आठ जनवरी, 2016 को जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल का शासन लागू हुआ था। उस दौरान पीडीपी और भाजपा ने कुछ समय के लिए सरकार गठन को टालने का निर्णय किया था।   साभार-khaskhabar.com    

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मुंबई। आईसीआईसीआई बैंक ने सोमवार को संदीप बख्शी को पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) नियुक्त करने की घोषणा की तथा एमडी व सीईओ चंदा कोचर को उनके खिलाफ आरोपों के संबंध में 'जांच पूरी होने तक छुट्टी पर' भेज दिया।    बख्शी 1 अगस्त 2010 से आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ हैं। वे कोचर के छुट्टी पर रहने के दौरान कंपनी के निदेशक मंडल को रिपोर्ट करेंगे।    बैंक ने एक बयान में कहा, "सीओओ पद के लिए उनकी नियुक्ति पांच सालों के लिए होगी, जो नियामक अनुमोदन के अधीन है। वे 19 जून 2018 से या नियामकीय मंजूरी मिलने के दिन से सीओओ का पदभार संभालेंगे, जो भी पहले होगा।"   बयान में कहा गया, "बक्शी बैंक के सभी कारोबारी और कॉरपोरेट केंद्र की जिम्मेदारी संभालेंगे। बैंक के सभी कार्यकारी निदेशक और कार्यकारी प्रबंधन उन्हें रिपोर्ट करेंगे। जबकि बख्शी चंदा कोचर को रिपोर्ट करेंगे, जो आईसीआईसी बैंक की एमडी और सीईओ बनी रहेंगी।"     साभार-khaskhabar.com  

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार और दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) को आईएएस अधिकारियों और दिल्ली सरकार के बीच अनबन के लिए जिम्मेदार ठहराया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर उनके प्रदर्शन की वजह से शहर में गतिरोध उत्पन्न होने के लिए दोनों पर निशाना साधा।    राहुल ने प्रधानमंत्री पर इस संकट को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "दिल्ली के मुख्यमंत्री उपराज्यपाल के कार्यालय में धरने पर बैठे हैं, भाजपा मुख्यमंत्री आवास पर धरने पर बैठी है, दिल्ली के नौकरशाह संवाददाता सम्मेलन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री इस उथल-पुथल और अव्यवस्था का हल निकालने के बदले इस अराजकता पर अपनी आंखे मूंदे हुए हैं।" उन्होंने अपने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, "इस ड्रामा की वजह से, दिल्ली के लोग पीड़ित हैं।"   दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को भी उपराज्यपाल के आवास पर धरने पर बैठे हैं और प्रधानमंत्री से आईएएस अधिकारियों को उनके हड़ताल को समाप्त करवाने के लिए 'हरी झंडी दिखाने' का आग्रह कर रहे हैं। भाजपा ने भी सोमवार को केजरीवाल के धरने के विरोध में अपना प्रदर्शन जारी रखा है।   गौरतलब है कि, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का धरना आठ दिनों से एलजी हाउस पर जारी है। वहीं इस धरने पर दिल्ली हाइकोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि समझ नहीं पा रहे ये धना है या हड़ताल है। इतना ही नहीं कोर्ट ने पूछा है कि इस हड़ताल की इजाजत किसने दी। कोर्ट ने पूछा है कि क्या एलजी हाउस में बैठना मान्य है और इस संकट का समाधान जरूरी है।   दिल्ली हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्यमंत्री की हड़ताल पर सवाल उठाए हैं।  - कोर्ट ने दिल्ली सरकार की तरफ से पेश वकील से पूछा कि हम समझ नहीं पा रहे हैं कि ये क्या है धरना या हड़ताल है।  - इस धरने या हड़ताल के लिए किसने अनुमति दी या उन्होंने खुद ही ये फैसला लिया। - धरने या हड़ताल का फैसला उनका व्यक्तिगत था या कैबिनेट का सामूहिक फैसला लिया। - वहां बैठना क्या मान्य है। वो किसके ऑफिस में बैठे हैं। - क्या वो हड़ताल के लिए बाहर बैठे हैं।  - जैसे ट्रेड यूनियन अपनी मांगों को लेकर बाहर हड़ताल करती हैं क्या ये वैसे हड़ताल है।  - क्या एलजी हाउस में बैठने के लिए एलजी की अनुमति है।   इसी बीच यह भी खबर है कि आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए अरविंद केजरीवाल ने अपने घर में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।   हाईकोर्ट ने कहा ने कहा है कि इस मुद्दे का समाधान निकालना जरूरी है. कोर्ट ने इस मामले में आईएएस एसोसिएशन को भी पार्टी बनाया है। वहीं बिजेंद्र गुप्ता, प्रवेश वर्मा, सिरसा, कपिल मिश्रा ने भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। हाईकोर्ट ने इस याचिका को इस मामले के साथ जोड़ लिया है और सारी याचिकाओं पर सुनवाई शुक्रवार को होगी। वहीं गृहमंत्रालय और पीएमओ के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि आईएएस अफसर हड़ताल पर नहीं हैं।   साभार-khaskhabar.com          

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नई दिल्ली। भाजपा ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आज ही दिल्ली में राज्य के सभी बड़े पार्टी नेताओं के साथ बैठक की जिसके बाद बीजेपी ने समर्थन वापस लेने का ऐलान किया है। शाम तक जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अपने पद से इस्तीफा देंगी। बीजेपी ने समर्थन वापसी की चिट्ठी राज्यपाल को सौंप दी है।    वहीं, खबर आ रही है कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा भेज दिया है।    गठबंधन में आगे चलना मुश्किल हो गया था- फैसले के बाद बीजेपी नेता राम माधव ने कहा कि हमने गृह मंत्रालय, जम्मू-कश्मीर के तीन साल के कामकाज, सभी एजेंसियों से राय लेकर ये फैसला किया है। जिसके बाद ये तय हुआ है कि बीजेपी अपना समर्थन वापस ले रही है। राम माधव ने कहा कि तीन साल पहले जो जनादेश आया था, तब ऐसी परिस्थितियां थी जिसके कारण ये गठबंधन हुआ था। लेकिन जो परिस्थितियां बनती जा रही थीं उससे गठबंधन में आगे चलना मुश्किल हो गया था।   बीजेपी की राज्य में राज्यपाल शासन की मांग- बीजेपी ने राज्य में राज्यपाल शासन की मांग की है। माधव ने कहा, 'पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी चीफ अमित शाह की सहमति के बाद यह फैसला किया गया। श्रीनगर में एक बड़े पत्रकार की हत्या हो गई। केंद्र ने जम्मू-कश्मीर सरकार को हर तरह से मदद की।   दायित्व निभाने में नाकाम रही हैं महबूबा मुफ्ती- उन्होंने कहा, 'तीन साल सरकार चलाने के बाद हम इस सहमति पर पहुंचे हैं कि कश्मीर में जो परिस्थिति उत्पन्न है उसपर नियंत्रण के लिए हम अलग हो रहे हैं। पीडीपी ने अड़चन डालने का काम किया। दायित्व निभाने में महबूबा मुफ्ती नाकाम रही हैं। महबूबा घाटी में हालात संभालने में असफल रहीं।'      शिवसेना का बड़ा हमला बीजेपी-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद शिवसेना ने कहा है कि अपवित्र गठबंधन को लेकर हमने पहले ही कह दिया था कि यह ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा. यह एंटी नेशनल गठबंधन था। कश्मीर में रहा केंद्र का पूरा सहयोग बीजेपी नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने पूरा सहयोग किया है। गृहमंत्री ने लगातार घाटी का दौरा किया, सभी से बातचीत का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि हमने पाकिस्तान को सीमा पार से गतिविधियों करने पर रोक लगाई, 4 हजार बंकर बनाए गए थे।   उन्होंने कहा कि भले ही हम सरकार में थे, लेकिन मुख्य नेतृत्व बीजेपी के हाथ में था। इसलिए हम इन हालातों को संभालने में सफल नहीं रह पाए, कई मुद्दों पर राज्य सरकार असफल रही। घाटी में शांति स्थापित नहीं हो सकी इसके अलावा जम्मू और लद्दाख में भी विकास कार्य रुका रहा. जम्मू और लद्दाख की जनता के साथ भेदभाव हुआ।     साभार-khaskhabar.com    

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मुंबई। बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोला है। शिवसेना के अनुसार बीजेपी के मिशन 2019 के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। शिवसेना ने मुखपत्र सामना के संपादकीय में दो ऐसी बातें कही गई हैं जो बीजेपी के मुश्किल खड़ी करने वाली हैं। शिवसेना ने कहा है कि वह महाराष्ट्र में अकेले चुनाव लड़ेगी और सरकार बनाएगी। साथ ही यह भी कहा है कि 2014 की राजनीतिक दुर्घटना 2019 में नहीं होगी।   सामना के संपादकीय में शिवसेना ने कहा है कि दिल्ली की तख्त पर कौन बैठेगा, ये शिवसेना में तय करने की क्षमता है। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने अपने निवास मातोश्री में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मुलाकात की थी। लेकिन सामना के इस संपादकीय के बाद एक बार फिर साबित हो गया है कि बीजेपी और शिवसेना के बीच सबकुछ ठीक नहीं है।   संपादकीय में शिवसेना ने कहा है, साल 2014 की राजनीतिक दुर्घटना 2019 में नहीं होगी। सत्ता का उन्माद हम पर कभी चढ़ा नहीं और आगे भी नहीं चढने देंगे। देश में आज आपातकाल पूर्व परिस्थिति है क्या। ऐसे सवाल उपस्थित किए जा रहे हैं। कश्मीर में जवानों की हत्या जारी है। बहुमत से चुनकर दी गई सरकार का गला राजधानी दिल्ली में ही कसा जा रहा है। नौकरशाहों का ऐसा रवैया रहा तो चुनाव लडऩा और राज्य चलाना मुश्किल हो जाएगा। धूलभरी आंधी केवल दिल्ली में नहीं बल्कि पूरे देश में उठ चुकी है। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा विदेश यात्रा पर होते है, इसलिए इस आंधी के धूल के कण उनकी आंखों और सांसो में नहीं जा रहे हैं। जनता परेशान है, दुविधा में है। शिवसेना की राह कभी आसान नहीं रही है। उसकी राह हमेशा ऊबडख़ाबड़ रास्तों से ही गुजरी है। इसके बावजूद भी शिवसेना इन रास्तों को पार करती आई है और आगे भी करेगी। महाराष्ट्र में शिवसेना अपने दम पर खुद की सरकार बनाएगी और दिल्ली के तख़्त पर कौन बैठेगा, राष्ट्रिय स्तर पर यह फैसला लेने की ताकत भी शिवसेना ही करेगी।     साभार-khaskhabar.com    

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