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लौकी में तो औषधी के अनेक गुण समाएं होते हैं। इसके सेवन से मानसिक तनाव कम होता है, और यह आंखों की रोशनी भी बढाने के अलावा रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढाते हैं। साथ-साथ मानसिक तनाव कम होता है। सब्जियों में आप लौकी का सेवन कर सकते हैं। तो आइये जानते हैं लौकी के गुणों को...हृदय रोगियों को भोजन कम मात्रा में ही देना चाहिए इसके लिए रोगियों को लौकी की सब्जी के साथ-साथ इसके रस का 10-15 मिली तक हर रोज सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। जिससे हृदय के कार्य-भार का बोझ न बढे।ज्वर जब शरीर का तापक्रम सामान्य तापक्रम से अधिक हो जाता है तो उसे ज्वर कहते है। ज्वर होने पर रोगी को 15-20 मिली लौकी के रस में थोडी-सी मिश्री मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है।दस्ते होने पर लौकी के रायते का सेवन करें। इसके लिए लौकी को कद्दूकस करके थोडा पानी डालकर उबाल लें। दही को अच्छी तरह मथकर उसमें उबली हुई लौकी को निचोडकर मिला दें।    साभार-khaskhabar.com       

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नयति मेडिसिटी ने मनाया विश्व हेपेटाइटिस दिवस मथुरा 28 जुलाई। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर क्षेत्रीय नागरिकों को हेपेटाइटिस के प्रति जागरूक करने के लिए अस्पताल परिसर में में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें 90 से अधिक लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर आए हुए लोगों में 72 की निशुल्क हेपेटाइटिस बी तथा सी की जांच भी की गई। 19 लोग हेपेटाइटिस बी अथवा सी से से ग्रस्त पाए गए। इस अवसर पर नयति मेडिसिटी के गैस्ट्रोएंटोलॉजिस्ट डॉ. कपिल शर्मा ने कहा कि विश्व मे 35 करोड़ से अधिक लोग हेपेटाइटिस बी अथवा सी से पीड़ित हैं। हर वर्ष लगभग 13 लाख लोग इस बीमारी की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं। इस बीमारी का कोई लक्षण नहीं होता, केवल जांच कराने से ही इस बीमारी के बारे में जाना जा सकता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक रहते हुए अपनी हेपेटाइटिस की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए, जिससे समय रहते बचाव किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि कोई पीलिया, बुखार, लगातार थकावट या खुजली से पीड़ित है या किसी के परिवार में किसी अन्य सदस्य को हेपेटाइटिस बी अथवा सी की शिकायत है तो उसे तुरन्त अपनी जांच भी कर लेनी चाहिए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. एच एल वर्मा, अंशू मदान, डॉ. कपिल शर्मा तथा डॉ. नवीन अग्निहोत्री ने दीपक जलाकर की। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. सागर टुटेजा, विवेक दवे, नवनीत सिंह, हेमराज सिंह, सारिका चतुर्वेदी, पारखी अग्रवाल आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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We all know the basics of good oral care: brush in the morning and evening, floss each day and visit the dentist twice per year. But there are smaller, incremental steps we can take to guarantee good health, including the food we eat each day. Here are some fruits for healthy teeth.   Strawberries They contain malic acid, which helps remove surface stains on teeth. Take a strawberry, mash it up, add some baking soda and apply it to your teeth. Gently brush off after five minutes for clean and bright teeth.Oranges This may come as a surprise to you, but citrus fruits like oranges help keep your gums healthy by strengthening blood vessels and connective tissue, including the connective tissue that holds your teeth in your jaw. It's the vitamin C in citrus that is so powerful. Vitamin C also helps reduce inflammation, which may prevent or slow the progression of gingivitis, so make oranges, grapefruits, and other citrus regular features in your fruit bowl.Apples Renowned for keeping the doctor away, apples offer a myriad of benefits, especially if eaten fresh and crisp. They help clean plaque near the gum line while massaging the gums.Bananas The high fibre content of bananas helps remove other foods that may be stuck to the teeth. The white component inside the skin and on the outside of the fruit is known for good teeth whitening properties. Kiwi Kiwis have the highest concentration of vitamin C, but citrus fruits also boast good numbers. These fruits also do double duty because of their astringency, which may help to reverse discoloration caused by commonly consumed beverages like coffee and wine.     साभार-khaskhabar.com       

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औषधीय गुणों से भरपूर लहसुन सिर्फ खाने में स्वाद ही नहीं बढाता बल्कि आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है और वैसे भी भारतीय रसोईघर में लहसुन से मिल जायेगा इसमें विटामिन, प्रोटीन, खनिज, लवण और फॉस्फोरस, आयरन व विटामिन ए, बी व सी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। तो आज लहसुन के कुछ स्वास्थ्य संबंधी गुणों के बारें में जानते हैं.अगर आप अपने बढते मोटापे से परेशान है तो अपनाएं ये लहसुन की दो कलियां को अच्छे से भून लें और फिर उसमें जीरा सैंधा नमक मिलाकर चूर्ण बना लें। इसको आप रोजाना खाली पेट गर्म पानी से लें। कुछ ही दिनों में मोटापा कम हो जाएगा।लहसुन बैक्टिरीअल और वायरल संक्रमण को रोकने में बहुत कारगार साबित होता है। यह फंगस, यीस्ट और कीडा से इन्फेक्शन को रोकने में मदद करता है।लहसुन का तेल तैयार करने के लिए लहसुन की 3 कलियों को कूटकर आधा कप ऑलिव ऑयल तेल में मिलाकर धीमी आंच पर 2 मिनट के लिए पकाएं। छालनकर 2 हफ्तों तक फ्रिज में रखें इस्तेमाल में लानेसे पहले हल्का-सा गर्म कर लें।एजोइन यौगिक रक्त का थक्का बनाने में मदद करता है। जिनको हृदय संबंधी बीमारी होती हैं और रक्त का थक्का बनने में देर होता है उनके लिए यह बहुत मददगार है।       साभार-khaskhabar.com   

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एक सस्ता और आसान सा दिखने वाला चना हमारे सेहत के लिए बहुत लाभकारी होता है। काले चने भिगोये हुए, भुने हुए, अंकुरित हों या इसकी सब्जी बनाई हो, यह हर तरीके से सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। काले चने में कई सारे पोषक तत्व जैसे की विटामिन ए, बी, सी डी, कैल्शियम, फास्फोरस, फाइबर, आयरन, आदि पाया जाता है। यदि आप रात भर भिगोये हुए 2 मुठ्ठी चेने रोजाना खाते हैं तो इसे आपकी सेहत अच्छी होती है।नर्जी चाहिए, तो रातभर भिगोए हुए या अंकुरित चने में हल्का सा नमक, नींबू, अदरक के टुकडे और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं, बहुत फायदेमंद होता है। काले चेन में भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है। जिससे वजन के कम होने में मदद मिलती है। साथ ही इसे खाने से पेट भरा-भरा महसूस होता है, जिससे खाने की ललक कम होती है और हम ओवरईटिंग से बच जाते हैं। चना आपके पेट के लिए मुफिद होता है और जिन लोगों को अकसर कब्ज की शिकायत रहती है उन्हें तो इसका सेवन जरूर करना चाहिए। इसमें ढेर सारा फाइबर मौजूद होता है जो पेट को साफ करने में मददगार है। काला चना शरीर की गंदगी को पूरी तरह से बाहर भी निकालता है।साभार-khaskhabar.com     

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शिमला मिर्च खाने में स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जियों में से एक है। इससे बनाने वाली हर डिश बेहद स्वादिष्टऔर लाजवाब होती है। इसमें कई पोषक तत्व, विटामिन सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते है। इसमें मिनरल्स भी पर्याप्त होते हैं। इसे अपनी खाने में शामिल करने से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं।लाल और हरी शिमला मिर्च विटामिन सी का बेहतरीन स्त्रोत हैं। सलाद बनाते समय इसे भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है।  शिमला मिर्च में पाचन संबंधित समस्याओं को दूर करने के कई गुण होते हैं। इसे खाने से पाचन क्रिया दुरूस्त हो जाती है और पेट में दर्द, गैस, कब्ज आदि की समस्याएं दूर होती है। शिमला मिर्च में कैलोरी बहुत कम होती है। इसमें वसा को घटाने की शक्ति होती है और इसके सेवन से उपापयच ठीक रहता है और शरीर से टॉक्सिन निकलने की प्रक्रिया होती है। आप इसे सब्जी, सूप या सलाद के सलाद के रूप में आसानी से खा सकते हैं।   साभार-khaskhabar.com       

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Juicing is no longer a lengthy cleanse used by extreme dieters or health nuts. Juices are much more than thirst quenchers; they are instant energy renderers. Here are 5 juice to boost your energy.   Grapes Juice This is a quick and simple recipe to raise your energy levels by detoxifying your lymphatic system. The grapefruit juice naturally provides you with a powerful punch of vitamin C while the celery replenishes your body with electrolytes. Carrot Juice Carrot contains high quantities of beta carotene or Vitamin A, a powerful antioxidant. It removes free radicals from your system, which can cause a lot of damage. However, it shouldn't be consumed in huge amounts, not unless you think yellow skin is a good look on you. Melon Juice It's loaded with water, it will give you the hydration you need to look and feel alive as you go about your day. Coconut juice The coconut in this juice recipe delivers a dose of electrolytes similar to those that balance out our own blood. In fact, doctors have used coconuts to help fight dehydrating diseases such as cholera, dysentery, and influenza, helping save the lives of thousands of children in underdeveloped parts of the world, according to Organic Avenue founder Denise Mari. Cherry Juice Tart cherries are the richest sources of antioxidants in the fruit and vegetable kingdom. This makes it an ideal choice as an energy boosting drink. A glass of cherry juice has a healthy amount of carbohydrates that give you instant energy without sticking around.   साभार-khaskhabar.com     

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एक कप कॉफी और ताजगी भरा अनुभव, घर में हों या बाहर, एक कप कॉफी की दरकार हमेशा होती है। रोजमर्रा की थकान में कॉफी की खुशबू, स्वाद और तरोताजा अहसास हमें स्फूर्ति और आनंद से भर देती है। कॉफी एक ऐसा अवयव है जिस पर बहुत बडें पैमाने पर शोध किया गया है। वैज्ञानिक शोधों ने सााबित किया है कि अगर कॉफी को संतुलित मात्रा रोजाना 4-5 रेग्यूलर साइज कप में पिया जाए तो यह वयस्कों के लिए हानिकारक नहीं होती, शारीरिक तौर पर चुस्त-दुरूस्त रखती है व स्वास्थ्यवर्द्धधक भी होती है। कॉफी पर किए गए अध्ययनों में ये भी सामने आया है कि कॉफी डायबिटीज से बचाव करती है। क्या है डायबिटीज! डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें हमारा शरीर खून में मौजूद शर्करा ब्लड शुगर, खासकर ग्लूकोज को नियंत्रित नहीं कर पाता। ऐसा इंसुलिन की समस्या के कारण होता है। इंसुलिन शरीर में मौजूद ग्लूकोज को अन्य अंगों जैसे लीवर, मसल और कोशिकाओं में पहुंचाता है। जब इंसुलिन की कमी होती है तो शर्करा का पूर्ण इस्तेमाल नहीं हो पाता और शरीर में शर्करा की मात्रा बढ जाती है।कॉफी पर शोध व अध्ययन कॉफी पर प्रकाशित हो चुके अध्ययनों में यह बात भी कही गई है कि कॉफी पीना टाईप 2 मधुमेह से बचाव में सहायक होता है। इस तथ्य पर अन्य शोध और अध्ययन भी किए गए जिनमे कॉफी के इस गुण के समर्थन में ही परिणाम निकला है। शोध में यह निष्कर्ष भी निकला है कि चाय न पीने वाले लोग जो संतुलित मात्रा में कॉफी पीते हैं, उनमें मधुमेह होने की संभावना कम होती है। हालांकि अभी तक विभिन्न शोधों में यह पता नहीं चल सकता है कि किस प्रक्रिया द्वारा कॉफी मधुमेह से बचाव करती है लेकिन कैफीमेटेड और डीकैफीमेटेड दोनों तरह की कॉफी में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला क्लोरोजैनिक एसिड इस रक्षात्मक प्रभाव के लिए जिम्मेदार होता है। कई शोधों में विशिष्ट तौर पर यह बात कही गई है कि डीकैफीमेटेड दोनों तरह की कॉफी पीने से टाईप 2 मधुमेह का कम खतरा होता है।इसे इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज या जुवेनाइल डायबिटीज के नाम से भी जाना जाता है। यह आनुवांशिक भी होता है। इसे अडल्ट ऑनसेट डायबिटीज के नाम से भी जाना जाता था। इसका करण यह था कि पहले यह 40 से ज्यादा की उम्र बदलते रहन-सहन और बढते मोटापे के कारण यह बीमारी वयस्कों और यहां तक कि 10 या उससे कम उम्र के बच्चों में भी देखी जाने लगी। तब से इसका अडल्ट ऑनसेट का इस्तेमाल बंद कर दिया गया। मधुमेह के ये दोनों कारण ही शरीर में अनियंत्रित ग्लूकोज के कारण होते हैं। कई बार खाना खाने के बाद शरीर में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से कहीं ज्यादा बढ जाता है।  मधुमेह के कारणों के बारे में निश्चित रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता है। इसमें कई बार पेनक्रियाज शरीर में इंसुलिन की कम मात्रा या सृजन करता है या कोशिकाएं ही इंसुलिन का प्रतिरोध करने लगती है या ये दोनों ही कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टाईप 2 मधुमेह अनुवांशिक होता है परंतु अन्य कारणों से भी इस बीमारी के होने का खतरा बना रहता है। इन कारणों में शामिल हैं शारीरिक श्रम का अभाव, एक ही जगह बैठे रहना, मोटापा, बढती उम्र, अनियमित डाइट, मधुमेह की पारिवारिक पृष्ठभूमि, पेनक्रियाज में समस्या, एथनीसिटी या अन्य बिमारियां।   साभार-khaskhabar.com       

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दही से आपकी त्वचा में नई रंगत व चमक आती है। दही के साथ आप बेसन या चोकर मिलाकर भी चेहरे पर लगा सकती हैं। इस प्रकार दही का एक गुणकारी सौंदर्य प्रसाधन के रूप में प्रयोग कर आप अपनी त्वचा में निखार ला सकती हैं। अगर आपको अपनी उम्र छुपानी हो तो अपने चेहरे को एकदम दमकता हुआ सा बना लें। कॉस्मेटिक्स से आपके चेहरे की रंगत कुछ समय के लिए बरकरार रह सकती है लेकिन घर में मौजूद प्राकृतिक दही को चेहरे पर लगाने से उसकी रंगत हमेशा बरकरार बनी रहेगी। त्वचा की रंगत निखारने में दही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। दही खाना ना केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है बल्कि इसे शरीर पर उबटन या किसी फेस पैक में मिला कर भी लगाया जा सकता है। तो ऐसे में चलिये जानते हैं दही का त्वचा पर निखार किस प्रकार से होता है।मुंहासे से छुटकारा पाएं दही में एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं। पिंपल से छुटकारा पाने के लिये दही को सीधे चेहरे पर लगाएं और इसे आधे घण्टे के बाद धो लें। सिंपल दही कुछ मात्रा में लें और कोमल हाथों से अपनी त्वचा को रब करें यह प्रक्रिया कम से कम 10-15 मिनट तक करने के बाद ठंडे पानी से स्किन को साफ कर लें। झुर्रियां मिटाए  अगर उम्र से पहले ही झुर्रियों ने अपना प्रकोप फैलाना शुरू कर दिया है तो इनकी रफतार को धीमा कर दें। झुर्रियों को प्राकृतिक तरीके से कम करें जिसके लिये दही का फेस मास्क लगाएं। इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड मृत्य कोशिकाओं को दूर कर के पोर्स को टाइट करती हैं। रंग साफ करे  दही को आप किसी फेस पैक या फल के साथ मिला कर लगा सकती हैं या फिर ऐसे ही दही को त्वचा पर लगाकर त्वचा को गुनगुने पानी से धोने से आपकी त्वचा नर्म व मुलायम होती है। फलों व सब्जियों का पैक लगाएं एक कटोरी दही में आधी कटोरी गाजर, ककडी, पपीता आदि मौसमी फलों का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से आपकी त्वचा में निखार आएगा। आप चाहे तो मौसमी सब्जियों के रस को भी दही में मिलाकर पैक तैयार कर सकते हैं। साभार-khaskhabar.com       

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आम न केवल पौष्टिक तत्वों से भरपूर है, बल्कि स्वास्थ्यवधर्क गुणों की खान भी है। आम का वृक्ष एक फूलदार, बडा स्थलीय प वृक्ष है। इसमें दो बीजपत्र होते हैं। आम अपने स्वाद व खुशबू की वजह से ही लोकप्रिय है। आम में पाई जाने वाली बेहिसाब खूबियां इसे फलों का राज बनाती है।  आम में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन ए, बी और कॉम्प्लेक्स, पोटेशियम, फॉस्फोरस, लौह खनिज लवण पाए जाते हैं, जो इसे हमारी हेल्थ को परफेक्ट बनाती है। आम हमारे शरीर को कई रोगों से बचाता है और उसे फिट एण्ड फाइन रखता है। एक अध्ययन के अनुसार- आम में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट कैंसर जैसी बीमारी को रोकने में भी सहायक होते हैं। गर्मी के मौसम में कच्चे हरे आम का रस या पना जहां शीतलता प्रदान करता है, वहीं इससे बने अचार, चटनी तो लोगों को मजे लेकर खाते हैं। आम का नियमित सेवन से त्वचा के बंद पोर खुल जाते हैं, जिससे कील-मुहांसों से छुटकारा मिल सकता है। आम के पल्प में शहद और दूध मिलाकर लगाने से त्वचा में निखार आता है। आम का पना ब्लड सेल्स को लचीला बनाता है और नए ब्लड सेल्स बनाने में मदद करता है। साभार-khaskhabar.com          

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खीरा खीरा हेल्थ के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। ये सेहत के साथ-साथ सौंदर्य में बहुत फायदेमंद होता है। कम फेट व कैलोरी से भरपूर खीरे का सेवन आपको कई रोगो से बचाने में सहायता करता है। खीरे को आप कई तरह से खा सकते हैं, जैसे सलाद, जूस, सैंडवीच, या यूं ही नमक छिडक कर भी खा सकते हैं। खीरे के स्वास्थ्यवद्र्धक और सौन्दर्यवद्र्धक गुण दोनों अनगिनत होते हैं जैसे... आयुर्वेद के अनुसार खीरा, पित्त, रक्त पित्त दूर करने वाला तथा रक्तविकार और मूत्र कच्छ नाशक रूचिकर फल है। खीरे के प्रयोग से पेट तथा जिगर की जलन शांत होती है। आयुर्वेद के मुताबिक पेट में गर्मी होने के वजह से मुंह से बदबू निकलता है, खीरा पेट को शीतलता प्रदान करने में मदद करता है। खीरा एक ऐसी सब्जी है जिसमें कोलेस्ट्रोल बिल्कुल नहीं होता। यह हृदय रोगी के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। एक अध्ययन के अनुसार खीरा में जो स्टे्रराल नाम का योगिक होता है वह कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता है। खीरे में कैलोरी कम और फाइबर उच्च मात्रा में होता है। इसलिए मीडे डे में भूख लगने पर खीरा खाने से पेट देर तक भरा हुआ रहता है। अगर मुंह से बदबू आती है तो आप कुछ देर के लिए मुंह में खीरे के टुकडा रख लें क्योंकि यह जीवाणुओं को मारकर धीरे-धीरे बदबू निकलना कम कर देता है।   साभार-khaskhabar.com          

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नाशपाती में बहुत से विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं इसलिए इसको खाने से हमारे शरीर को विटामिन्स और मिनरल्स की पूर्ति हो जाती है। खट्टी-मीठी और रसीली स्वाद की नाशपाती होती है। तो आइये जानते हैं नाशपाती के सेहत के लिए औषधीय गुण मौजूद होते है।  जिन लोगों को नाशपाती पसंद होती हैं। उन्हें दोस्ती करना बहुत अच्छा तो लगता है, लेकिन इनकी दोस्ती जल्दी खत्म भी हो जाती है, ज्यादा लंबे समय तक टिक नहीं पाती। लेकिन एक बात बहुत खास है इन के बारे में यह लोग जो भी काम अपने हाथ में लेते हैं। उसे पूरी ईमानदारी व मेहनत से करते हैं,व्यवहार से कुछ-कुछ झगडा करने वाले भी होते हैं। नाशपाती में अधिक मात्रा में बोरोन होता है। बोरोन हड्डियों में कैल्शियम को बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए नाशपाती का सेवन करने से आस्टियोपोरोसिस होने का खतरा नहीं होता। नाशपाती में फाइबर की काफी अच्छी मात्रा होती है, जोकि पाचन तंत्र को स्ट्रॉग बनाती है। नाशपाती खाने से कब्ज की परेशानी से राहत मिलती है। एनीमिया- नाशपाती में प्रचुर मात्रा में आयरन पाया जाता है, जो हीमोग्लोबिन के स्तर केा बढाता है। अगर कोई एनीमिया से पीडित हो तो उसे प्रचुर मात्रा में नाशपाती को खाना चाहिए। नाशपाती में मौजूद विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा पर उम्र बढने के प्रभाव को कम करने, झुर्रियों, मुंहासे और त्वचा से संबंधी अन्य समस्याओं को रोकने में मदद करता है। यह बालों के झडने, धब्बेदार अध: उम्र बढते की प्रक्रिया, मोतियाबिंद आदि अन्य समस्याओं के इलाज में सहायक होता है।   साभार-khaskhabar.com      

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